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कृपया अपने चिकित्सक के परामर्श के बिना, सुझाई गयी (किसी भी प्रकार की) दवा का सेवन नहीं करें।

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हमारे 95 फीसदी रोगियों को व्यक्तिगत रूप से हम से आकर मिलने की जरूरत नहीं पड़ती। यद्यपि रोगियों की संख्या अधिक होने के कारण, आपको इन्तजार करना पड़ सकता है। कृपया धैर्यपूर्वक सहयोग करें। (Due to the high number of patients, you may have to wait. Please patiently collaborate.)

डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' आॅन लाईन होम्योपैथ एवं परम्परागत चिकित्सक, 9875066111

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नीम

(Neem Health Benefits in Hindi)
May 15, 2016 Piyush Rathor
http://www.gyanpanti.com/kadve-neem-ke-hazaro-fayde-hindi-neem-health-benefits/

कडवे नीम के लाभ

नीम के पत्ते भारत से बाहर 34 देशों को निर्यात किए जाते हैं। इसके पत्तों में मौजूद बैक्टीरिया से लड़ने वाले गुण मुंहासे, छाले, खाज-खुजली, एक्जिमा वगैरह को दूर करने में मदद करते हैं। इसका अर्क मधुमेह, कैंसर, हृदयरोग, हर्पीस, एलर्जी, अल्सर, हिपेटाइटिस (पीलिया) वगैरह के इलाज में भी मदद करता है

इस पृथ्वी पर जीवन सूर्य की शक्ति से ही चलता है…..सूर्य की ऊर्जा से जन्मे तमाम जीवों में नीम ने ही उस ऊर्जा को सबसे ज्यादा ग्रहण किया है। इसीलिए इसे रोग-निवारक समझा जाता है – किसी भी बीमारी के लिए नीम रामबाण दवा है। नीम के एक पत्ते में 150 से ज्यादा रासयानिक रूप या प्रबंध होते हैं। इस धरती पर मिलने वाले पत्तों में सबसे जटिल नीम का पत्ता ही है। नीम की केमिस्ट्री सूर्य से उसके लगाव का ही नतीजा है।
नीम के वृक्ष की ठंण्डी छाया गर्मी से राहत देती है तो पत्ते फल-फूल, छाल का उपयोग घरेलू रोगों में किया जाता है, नीम के औषधीय गुणों को घरेलू नुस्खों में उपयोग कर स्वस्थ व निरोगी बना जा सकता है। इसका स्वाद तो कड़वा होता है, लेकिन इसके फ़ायदे तो अनेक और बहुत प्रभावशाली हैं और उनमें से कुछ निम्नलिखित हैं :-
1. चर्म रोग : नीम के तेल से मालिश करने से विभिन्न प्रकार के चर्म रोग ठीक हो जाते हैं।
2. मच्छर भगाये : नीम के तेल का दिया जलाने से मच्छर भाग जाते है और डेंगू , मलेरिया जैसे रोगों से बचाव होता है
3. मुंह की दुर्गंध रोधक : नीम की दातुन करने से दांत व मसूढे मज़बूत होते है और दांतों में कीडा नहीं लगता है, तथा मुंह से दुर्गंध आना बंद हो जाता है।
4. मंजन : इसमें दोगुना पिसा सेंधा नमक मिलाकर मंजन करने से पायरिया, दांत-दाढ़ का दर्द आदि दूर हो जाता है।
5. दाँत दर्द : नीम की कोपलों को पानी में उबालकर कुल्ले करने से दाँतों का दर्द जाता रहता है।
6. रक्त शोधन : नीम की पत्तियां चबाने से रक्त शोधन होता है और त्वचा विकार रहित और चमकदार होती है।
7. चेचक : नीम की पत्तियों को पानी में उबालकर और पानी ठंडा करके उस पानी से नहाने से चर्म विकार दूर होते हैं, और ये ख़ासतौर से चेचक के उपचार में सहायक है और उसके विषाणु को फैलने न देने में सहायक है।
8. चेचक : चेचक होने पर रोगी को नीम की पत्तियों बिछाकर उस पर लिटाएं।
9. मलेरिया : नीम की छाल के काढे में धनिया और सौंठ का चूर्ण मिलाकर पीने से मलेरिया रोग में जल्दी लाभ होता है।
10. मच्छर नष्ट : नीम मलेरिया फैलाने वाले मच्छरों को दूर रखने में अत्यन्त सहायक है। जिस वातावरण में नीम के पेड़ रहते हैं, वहाँ मलेरिया नहीं फैलता है। नीम के पत्ते जलाकर रात को धुआं करने से मच्छर नष्ट हो जाते हैं और विषम ज्वर (मलेरिया) से बचाव होता है।
11. नीम तेल : नीम के फल (छोटा सा) और उसकी पत्तियों से निकाले गये तेल से मालिश की जाये तो शरीर के लिये अच्छा रहता है।
12. बाल कम झड़ते हैं : नीम के द्वारा बनाया गया लेप वालों में लगाने से बाल स्वस्थ रहते हैं और कम झड़ते हैं।
13. बाल झड़ना : नीम और बेर के पत्तों को पानी में उबालें, ठंण्डा होने पर इससे बाल धोयें, स्नान करें कुछ दिनों तक प्रयोग करने से बाल झडने बन्द हो जायेगें व बाल काले व मज़बूत रहेंगें।
14. आंख आने की बीमारी : नीम की पत्तियों के रस को आंखों में डालने से आंख आने की बीमारी (कंजेक्टिवाइटिस) समाप्त हो जाती है।
15. पीलिया : नीम की पत्तियों के रस और शहद को 2:1 के अनुपात में पीने से पीलिया में फ़ायदा होता है, और इसको कान में डालने से कान के विकारों में भी फ़ायदा होता है।
16. पसीना और जलन : नीम के तेल की 5-10 बूंदों को सोते समय दूध में डालकर पीने से ज़्यादा पसीना आने और जलन होने सम्बन्धी विकारों में बहुत फ़ायदा होता है।
17. बवासीर : नीम के बीजों के चूर्ण को ख़ाली पेट गुनगुने पानी के साथ लेने से बवासीर में काफ़ी फ़ायदा होता है।
18. कब्ज : नीम की निम्बोली का चूर्ण बनाकर एक-दो ग्राम रात को गुनगुने पानी से लें कुछ दिनों तक नियमित प्रयोग करने से कब्ज रोग नहीं होता है एवं आंतें मज़बूत बनती है।
19. लू का प्रभाव शांत : गर्मियों में लू लग जाने पर नीम के बारीक पंचांग (फूल, फल, पत्तियां, छाल एवं जड) चूर्ण को पानी मे मिलाकर पीने से लू का प्रभाव शांत हो जाता है।
20. बिच्छू ज़हर : बिच्छू के काटने पर नीम के पत्ते मसल कर काटे गये स्थान पर लगाने से जलन नहीं होती है और ज़हर का असर कम हो जाता है।
21. फोडा-फुंसी, घाव : नीम के 25 ग्राम तेल में थोडा सा कपूर मिलाकर रखें यह तेल फोडा-फुंसी, घाव आदि में उपयोग रहता है।
22. गठिया की सूजन : गठिया की सूजन पर नीम के तेल की मालिश करें।
23. कीड़े नाशक : नीम के पत्ते कीढ़े मारते हैं, इसलिये पत्तों को अनाज, कपड़ों में रखते हैं।
24. हैजा़ : नीम की 20 पत्तियाँ पीसकर एक कप पानी में मिलाकर पिलाने से हैजा़ ठीक हो जाता है।
25. जलने का घाव : निबोरी नीम का फल होता है, इससे तेल निकला जाता है। आग से जले घाव में इसका तेल लगाने से घाव बहुत जल्दी भर जाता है।
26. पेट के रोग : नीम का फूल तथा निबोरियाँ खाने से पेट के रोग नहीं होते।
27. बुखार : नीम की जड़ को पानी में उबालकर पीने से बुखार दूर हो जाता है।
28. दाग़ तथा चर्म रोग : छाल को जलाकर उसकी राख में तुलसी के पत्तों का रस मिलाकर लगाने से दाग़ तथा अन्य चर्म रोग ठीक होते हैं।
29. मधुमेह, एड्स, कैंसर आदि नाशक : विदेशों में नीम को एक ऐसे पेड़ के रूप में पेश किया जा रहा है, जो मधुमेह से लेकर एड्स, कैंसर और न जाने किस-किस तरह की बीमारियों का इलाज कर सकता है।
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नीम का वृक्ष अनेक औषधीय गुणों की खान है। नीम, हमारे शरीर, त्वचा और बालों के लिये बहुत फायदेमंद है। नीम सर्व कीटनाशक, कीटमार नाशक और फफूंदनाशकों के रूप में प्रयोग किया जाता है।
नीम का संस्कृत नाम (Sanskrit Name of Neem): नीम को संस्कृत में अरिष्ट भी कहा जाता है, जिसका मतलब होता है, श्रेष्ठ, पूर्ण और कभी खराब न होने वाला।
नीम के फायदे (Benefits of Neem in Hindi): नीम का उपयोग कई तरीकों से किया जाता है। यह एक बेहतरीन प्राकृतिक प्रदार्थ है जो स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है। इसके उपयोग निम्न हैं:
बालझड़ (Baldness)- यदि किसी कारण सर झरने लगे, परन्तु अभी अवस्था बिगड़ी न हो तो नीम और बेरी के पत्तो को पानी में उबालकर बालो को धोना चाहिए। इससे झड़ना रुक जाता है, कालीमा कायम रहती है और थोड़े थोरे ही दिनों में बाल खूब लम्बे होने लगते है। इससे जुए भी मर जाती है।
नेत्र खुजली (Itching)- नीम के पत्ते छाया में सुखा ले और किसी बर्तन में डाल कर जलाये। ज्योही पत्ते जल जाये, बर्तन का मुँह ढक दे। बर्तन ठण्डा होने पर पत्ते निकाल कर सुरमे तरह पीस ले। अब इस रख में नीबू का ताजा रस डालकर छह घंटे तक खरल करे और खुश्क शीशी में रखे। रोजाना प्रातः व सायं सलाई द्धारा सुरमे के सामान उपयोग करे।
आँख का अंजन (Home Remedies for Itchy Eyes)- नीम के फूल छाँव में खुश्क कर बराबर वजन कलमी शोर मिलाकर बारीक़ पीस ले और कपरछन करे। अनजान के रूप में रात्रि को सोते समय सलाई द्धारा उपयोग करे, नेत्र-ज्योति बढ़ता है।
कान बहना (Neem in Ear Problems)- नीम का तेल गर्म कर इसमे सोलहवाँ भाग माँ डाले, जब पिघल जाये तो आच पर से उतार कर इसमें आठवाँ भाग चूर्ण फिटकरी (खील) मिलाकर सुरक्षित रखे। यदि कान बहना बन्द न होता हो तो इस दवा को आवश्य आजमाए। 
कान में घाव (Neem in Ear Problems)- यदि कान में घाव हो जाये तो बड़ी कठिनाई से ठीक होता है। लिए निम्न नुस्ख अत्यंत लाभप्रद सिद्ध हुआ है - नीम का रस तीन माशे, शुद्ध मधु मशो। दोनों मिश्रित करे, तथा थोड़ा गरम कर के मधु के 2-4 बूंद टपकाये। कुछ ही दिन में घाव ठीक होकर स्वस्थ लाभ होगा।
नजला - जुखाम (Uses of Neem in Common Cold) - नीम के पत्ते एक टोला, काली मिर्च छह हसो- दोनों नीम के डंडे से कुटे और नीम के एक एक पत्ते से गोलिया बनाये। इस गोलिया को छाव में सुख कर सीसी में कर के रखना चाहिए। तीन-चार गोलिया प्रातः व सय कुनकुने पानी के साथ लेना चाहिए, नजला-जुखाम के लिए उत्तम है। नीम की निम्बैली एक तोला, लाहैरी नमक एक तोला, खिल फिटकरी एक तोला- तीनो बारीक़ से पीस कर मंजन रूप में दांत पर मलिये, दांत पीड़ा के लिए बिसेसकर लाभदायक है। दांत मोती के सामान चमक उठते है।
कै - दो तोले नीम के पत्ते आध पाव पानी में ठंडाई के समान घोट- छानकर रोगी को पिलाये। सभी प्रकार की कै रुक जाती है।
पुराने दस्त (Home Remedies of Diarrhea) - नीम के बीज की गिरी एक माशा में थोड़ी चीनी मिलकर उपयोग करने से पुराने दस्त बंद होते है। आहार केवल चावल ही रखे। 
बारी का ज्वर - नीम की भीतरी नरम छाल छाव में खुश्क कर बारीक़ पीस ले और एक एक माशा पानी के साथ दिन में तीन बार उपयोग करे। तीन दिन में ही दवा जादू का काम करती है तथा बारी का ज्वर फिर नही होता। नीम के पंचांग जलाकर बत्तीस गुना पानी डालकर एक घड़े में रखे और नित्य हिलाते रहे। तीन दिन पशचात पानी निथार कर कपरछन करे और लोहे की कड़ाही में डालकर आँच पर रखे। जब सारा जल सुख जाये और नमक जैसा पदार्थ बाकि रह जाये (यह नीम का क्षर है ) तो इसे शीशी में सुरक्षित रख ले। मात्रा- आधी से एक रत्ती तक। सब प्रकार के ज्वर, विशेषकर मलेरिया की अचूक औषधि है दिन में तीन-चार बार उपयोग की जा सकती है।
ज्वर-तोड़- आधा छटांक नीम के हरे पत्ते और दो दाने काली मिर्च-दोनों आधा पाव पानी में घोटकर तथा चन कर पिने से बरी का ज्वर ठीक हो जाता है। यह एक अत्यंत भरोसे की दवा है। नीम के ताजा पत्ते एक तोला, शवेत ओहितकारी छह माशो - दोनों बारीक़ पीस कर पानी द्वारा चने के बराबर गोलियाँ बना ले। नित्य तथा बरी से चढ़ने वाले सब प्रकार के ज्वर ठीक करने में चमत्कारी है।
पुराना ज्वर - इक्कीस नीम के पत्ते और इक्कीस डेन काली मिर्च - दोनों की मलमल के कपड़े में पोटली बाँधकर आधा सेर पानी में उबले। जब पानी चौथाई भाग रह जाये तो उतार कर ठण्डा होने दे। फिर प्रातः व सांय पिलाने से निशचय ही लाभ होगा।
तपेदिक का बढ़िया इलाज (Home Remedies of TB in Hindi) - छिलका नीम दो सेर, आवले की जड़ दो सेर, पुराना गुड़ चार सेर, हरड़, आँवला बहेड़ा प्रत्येक आधा सेर, सौफ आधा सेर और सोए आधा सेर और सोए आधा सेर - समस्त सामग्री मजबूत बर्तन में बन्द कर ग्रीष्म ऋतु में पांच शरद ऋतु में बारह दिन तक किसी गर्म स्थान पर - गेहूँ या भूसे में रखे। तत्पशचात दो बोतल अर्क निकले। मात्रा - पहले दिन एक तोला, दूसरे दिन डेढ़ तोला तथा तत्पशचात दो तोला तक रोजाना गुलाब अर्क के साथ पिलाये। यह नुस्खा एक सन्यासी साधु से प्राप्त हुआ है।
गर्मी ज्वर - प्रायः ज्वरो में और विशेषकर गर्मी के ज्वर में प्यास बंद नही होती। ऐसी स्थिति में नीम की पतली टहनियाँ (पत्तो रहित) लेकर पानी में डाले और थोरे देर पसगचत यह पानी रोगी को पिलाये, तुरंत प्यास को आराम होगा, घबराहट दूर होगी और ज्वर में लाभ होगा।
पेट के कीड़े - दो तोले नीम की छाल एक सेर पानी में पकाये, चौथाई भाग पानी रहने पर मलकर छाने और प्रातः व सांय पि लिया करे। इससे पेट कीड़े जाते है और फिर नही होते। यदि पेट में कीड़े पड़ जाये तो नीम के पत्तो का रस दो-तीन दिन पिलाये, कीड़े मर कर निकल जायेगे। तत्पशचात दो-तीन दिन कलई का बुझा हुआ पानी पिलाये, दोबारा पेट में कीड़े नही पड़ेंगे।
बवासीर (Remedies of Bawasir)- नीम के बीज बीज गिरी तोला, धरेक के बीज की गिरी एक तोला, धरेक के बीज की गिरी एक तोला, रसौत एक तोला, हरड़ (गुठली रहित) तीन तोला - कूटकर कपरछन करे। छह-छह माशाप्रातः व सांय ठण्डे दूध या पानी के साथ सेवन करे, अवश्य लाभ होगा।
कब्जनाशक गोलियाँ (Home Remedies for Constipation) - पांच तोले विशुद्ध रसौत, काली मिर्च दो तोले और नीम के बीज की गिरी पांच तोले - समस्त सामग्री पीसकर नीम के पत्ते के रस में घोट ले अच्छी प्रकार बारीक़ हो जाने पर काबुली चने के बराबर गोलिया बना ले। एक गोली प्रातः ताजा जल से उपयोग करे तथा एक गोली पानी में धिसकर शौच-निवती पर मस्सो में लगाये। लगाते ही बवासीर से छुटकारा मिल जायेगा।
नीम की गिरी एक छटांक, शुद्ध रसौत एक चटक-दोंनों अच्छी प्रकार कूटकर मिलाये और जंगली बेर के बराबर गोलियाँ बना ले। एक गोली नित्य प्रातः पानी के साथ एक मास तक निरंतर उपयोग करे, बवसीर में आराम होगा। 
पथरी (Remedies of Stone)- नीम के पत्ते जलाकर साधारण विधि से शर तैयार करे - दो-दो माशे ठण्ढे जल से दिन में तीन बार उपयोग करने से गुर्दे और मूत्राशय की पथरी ठीक हो जाती है।
खुजली (Uses of Neem in Hindi)- नीम की नरम कोपले, ढाई तोला नित्य ठंडाई के रूप में घोटकर पिने से खुजली दूर होती है। 
बढ़िया मरहम- रक्त विकार के कारण प्रायः फोड़े-फुंसियाँ निकलती रहती है और कई बार ये इतनि बिगड़ घाव साफ करने के लिए नीम के पत्तो मरहम बनाई जाती है जो कभी असफल नही होती|
See : http://health.raftaar.in/healthcare/health-and-tips_miracles-of-neem
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नीम में इतने गुण हैं कि ये कई तरह के रोगों के इलाज में काम आता है
Friday, 18 April 2014
नीम में इतने गुण हैं कि ये कई तरह के रोगों के इलाज में काम आता है। आयुर्वेदमें इसे वैद्य भी कहा गया है। इसके औषधीय गुणों के कारण आयुर्वेदिक मेडिसिनमें पिछले चार हजार सालों से भी ज्यादा समय से इस्तेमाल हो रहा है। नीम कोसंस्कृत में अरिष्ट भी कहा जाता है, जिसका मतलब होता है, श्रेष्ठ, पूर्ण औरकभी खराब न होने वाला।
नीम का रस डायबिटीज, बैक्ट्रिया और वायरस खत्म करने के गुण पाए जाते हैं।नीम के तने, जड़, छाल और कच्चे फलों में मियादी रोगों से लड़ने का गुण भीपाया जाता है। इसकी छाल खासतौर पर मलेरिया और त्वचा संबंधी रोगों में बहुतउपयोगी होती है। 

नीम की तासीर ठंडी होती है। इसीलिए गर्मी में इसकी पत्तियों का सेवन शरीर केलिए विशेष रूप से लाभदायक माना जाता है। चैत्र के महीने में रोज सुबह खालीपेट नीम के कोमल पत्ते चबाने से सालभर बीमारियां दूर रहती हैंं। चलिए आजजानते हैं नीम के ऐसे ही कुछ औषधीय गुणों के बारे में...

  1. - नीम की पत्तियों का रस पीने से शरीर की गंदगी निकल जाती है। इससे बालकाले, घने और चमकदार हो जाते हैं। त्वचा की कांति बढ़ जाती है।
  2. - निबौलियों को पीसकर रस तैयार करके बालों पर लगाया जाए तो जूएं मर जातीहैं। 
  3. - घमौरियों से छुटकारा पाने के लिए नीम की छाल को घिसकर लेप बना लें। इसलेप को घमौरियों और फुंसियों पर लगाएं, आराम मिलेगा।
  4. - पानी में थोड़ी-सी नीम की पत्तियां डालकर नहाने से भी घमौरियां दूर हो जातीहैं। 
  5. - नीम का महीने में 10 दिन तक सेवन करते रहने से कभी हार्ट अटैक नहीं होता।नीम के रस का उपयोग मलेरिया रोग में भी किया जाता है। नीम वाइरस कोपनपने नहीं देता और लिवर की कार्यक्षमता बढ़ाता है।
  6. नीम का पत्तियों का लेप बालों पर लगाने से बाल स्वस्थ रहते हैं और कम झड़तेहैं।
  7. - नीम और बेर के पत्तों को पानी में उबालकर इस पानी से बाल धोने से बालझड़ना बंद हो जाते हैं।
  8. - निंबोली का चूर्ण बनाकर एक-दो ग्राम मात्रा रात को गुनगुने पानी से लें। यहनुस्खा कब्ज की समस्या में रामबाण है।
  9. - बिच्छू के काटने पर नीम के पत्ते मसल कर काटे गए स्थान पर लगाने से जलननहीं होती है। साथ ही, ज़हर का असर कम हो जाता है।
  10. - डांग में आदिवासी लगभग 200 ग्राम नीम की पत्तियों को 2 लीटर पानी मेंउबालते हैं। जब पानी का रंग हरा हो जाता है, तब उस पानी को बोतल में छान कररख लेते हैं। नहाते समय बाल्टी में 75 से 100 मिलीलीटर नीम के इस पानी कोडाल लिया जाता है। जानकारों के अनुसार नहाने का यह पानी संक्रमण, मुंहासेऔर शरीर से पुराने दाग-धब्बों से छुटकारा दिलाता है।
  11. नीम के गुलाबी कोमल पत्तों को चबाकर रस चूसने से डायबिटीज रोग मे आराममिलता है। 
  12. - नीम का जूस डायबिटीज रोगियों के लिए बहुत लाभदायक है। रोजाना नीम का जूस पीने से ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल में रहता है।
  13. - कुछ आदिवासी नीम की पत्तियों के रस में दालचीनी का चूर्ण मिला कर डायबिटीज के रोगियों को देते हैं। उसके परिणाम भी काफी अच्छे मिले हैं। हालांकि, इसका कोई क्लिनिकल और वैज्ञानिक प्रमाण अब तक देखने को नहीं मिला। फिर भी इस पारंपरिक नुस्खे को आजमाने में कोई बुराई नहीं है।
  14. - नीम के रस की दो बूंदें आंखों में डालने से आंखों की रोशनी बढ़ती है। यदि किसीको कंगज्वाइटिस हो गया है, तो वह भी जल्द ठीक हो जाता है।
  15. बवासीर जैसे कष्टकारी रोग के इलाज के लिए नीम और कनेर के पत्ते की समान मात्रा लेकर लेप की सलाह देते हैं। इनका मानना है कि ये लेप लगातार एक सप्ताह तक लगाने से कष्ट कम होता जाता है। 
  16. - मध्यप्रदेश के बैतूल जिले के कोरकु आदिवासी मलेरिया में नीम के (तने के अंदर की) छाल को कूटकर कांसे के बर्तन में पानी के साथ कुछ देर के लिए उबालते हैं। फिर इसे एक कपड़े से छान लेते हैं। इन आदिवासियों के अनुसार, इस पानी को दिन में तीन बार मलेरिया के रोगी को दिया जाए तो मलेरिया दूर हो जाता है।
  17. गर्मियों में लू लग जाने पर नीम के फूल, फल, पत्तियां, छाल और जड़ के चूर्ण कोपानी मे मिलाकर पीने से लू का प्रभाव खत्म हो जाता है।
  18. - नीम के 25 ग्राम तेल में थोड़ा-सा कपूर मिलाकर यह तेल फुंसी या घाव आदिपर लगाने से घाव जल्दी भर जाता है।
  19. - गठिया की सूजन पर नीम के तेल की मालिश करें, लाभ होगा।
  20. - नीम के पत्ते कीड़े मारते हैं, इसलिए पत्तों को अनाज में रखते हैं।
  21. नीम के पत्ते और मकोय के फलों का रस समान मात्रा में लेकर पलकों पर लगानेसे आंखों में लाली दूर हो जाती है। 
  22. - डिलिवरी के समय लेबर पेन में आराम पाने के लिए नीम के रस से मसाज करना चाहिए। दर्द कम महसूस होता है।
  23. - गले की सूजन दूर करने के लिए (5 ग्राम) नीम की पत्तियां, 4 काली मिर्च, 2लौंग और चुटकी भर नमक को मिलाकर काढ़ा बनाकर लें। इसका सेवन दिन मेंतीन बार करें। गुजरात के आदिवासी इस नुस्खे को रामबाण मानते हैं। 
  24. - नीम की 20 पत्तियां पीसकर एक कप पानी में मिलाकर पीने से हैजा ठीक होजाता है।
  25. - निंबोली का तेल लगाने से जलने का घाव जल्दी भर जाता है।
  26. - नीम का फूल तथा निंबोलियां खाने से पेट के रोग नहीं होते।
  27. - नीम की जड़ को पानी में उबालकर पीने से बुखार दूर हो जाता है।
  28. - छाल को जलाकर उसकी राख में तुलसी के पत्तों का रस मिलाकर लगाने सेदाग-धब्बे दूर हो जाते हैं।
  29. नीम के तेल से मालिश करने से चर्म रोग ठीक हो जाते हैं। नीम का लेप भी सभीप्रकार के चर्म रोगों के निवारण में सहायक है।
  30. - नीम की दातुन करने से दांत व मसूढ़े मजबूत होते हैं और दांतों में कीड़ा नहींलगता है। मुंह से दुर्गंंध आना बंद हो जाता है।
  31. - नीम के रस में सेंधा नमक मिलाकर मंजन करने से पायरिया, दांत-दाढ़ का दर्दआदि दूर हो जाता है।
  32. - नीम की कोंपलों को पानी में उबालकर कुल्ला करने से दांतों का दर्द दूर हो जाताहै।
See : http://laxmanramjakhardharasar.blogspot.in/2014/04/blog-post_4636.html
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नीम जूस पीने का गुणकारी फायदा By: Purnima Updated: Tuesday, September 16, 2014, 12:52 [IST]
नीम एक आयुर्वेदिक दवाई है, जिसके कई सारे स्‍वास्‍थ्‍यवर्धक फायदे हैं। नीम, हमारे शरीर, त्‍वचा और बालों के लिये बहुत फायदेमंद है। इसका कडुआ स्‍वाद बहुत से लोगो को खराब लगता है इसलिये वे इसे चाह कर भी नहीं खा पाते। इसी कारण नीम का रस पीना ज्‍यादा आसान होता है। आइये जानते हैं इस गुणकारी नीम के रस का फायदा। नीम का जूस कैसे पिएं? 1. नीम का रस बहुत कडुआ होता है, जिसे पीना बहुत मुश्‍किल होता है। अगर आपको इसके फायदे चाहिये तो इसे एक ग्‍लास में डाल कर इसको दवा समझ कर पूरा एक साथ पी लें। इसके अलावा ये भी देखिये की नीम के रस को और किस-किसी प्रकार से पिया जा सकता है।  नीम त्‍वचा के लिए अमृत होती है

2. नीम के रस में थोड़ा मसाला डाल दें जिससे उसमें स्‍वाद आ जाए। इसको पीने से पहले उसमें नमक या काली मिर्च और या फिर दोनों ही डाल दें। 3. कई लोगो को नीम की महक अच्‍छी नहीं लगती। इसलिये जब रस निकाल लें तब उसको फ्रिज में 15-20 मिनट के लिये रखें या फिर उसमें बर्फ के कुछ क्‍यूब डाल दें और फिर पिएं। लेकिन सबसे अच्‍छा होगा कि नीम के रस को निकाल कर तुरंत ही पी लिया जाए। इसको 30 मिनट से ज्‍यादा स्‍टोर कर के नहीं रखना चाहिये। 4. नीक का रस पीने से पहले अपनी नाक को दबा लें, इससे जूस को पीने में आसानी होगी। अगर आपको नीम जूस का पूरा फायदा उठाना है, तो इसमें चीनी बिल्‍कुल भी न मिलाएं। 5. नीम का रस हमेशा सुबह-सुबह पिएं। इसकी कडुआहट को कम करने के‍ लिये इसमें नमक मिलाएं और हल्‍का सा पानी भी।
1. मुंहासों से मुक्‍ती नीम में एंटी इंफ्लेमेट्री तत्‍व पाए जाते हैं, नीम का अर्क पिंपल और एक्‍ने से मुक्‍ती दिलाने के लिये बहुत अच्‍छा माना जाता है। इसके अलावा नीम जूस शरीर की रंगत निखारने में भी असरदार है।
2. पीलिया में फायदा नीम की पत्तियों के रस और शहद को २:१ के अनुपात में पीने से पीलिया में फायदा होता है, और इसको कान में डालने से कान के विकारों में भी फायदा होता है। 
3. शरीर की गंदगी साफ करे नीम जूस पीने से, शरीर की गंदगी निकल जाती है। जिससे बालों की क्‍वालिटी, त्‍वचा की कामुक्‍ता और डायजेशन अच्‍छा हो जाता है।
4. मधुमेह रोगियों के लिये भी फायदेमंद अगर आप रोजाना नीम जूस पिएंगे तो आपका ब्‍लड़ शुगर लेवल बिल्‍कुल कंट्रोल में हो जाएगा।
5. आंखों की रौशनी बढ़ाए नीम के रस की दो बूंदे आंखो में डालने से आंखो की रौशनी बढ़ती है और अगर कन्जंगक्टवाइटिस हो गया है, तो वह भी जल्‍द ठीक हो जाता है।
6. चिकन पॉक्‍स के निशान मिटाए शरीर पर चिकन पॉक्‍स के निशान को साफ करने के लिये, नीम के रस से मसाज करें। इसके अलावा त्‍वचा सं‍बधि रोग, जैसे एक्‍जिमा और स्‍मॉल पॉक्‍स भी इसके रस पीने से दूर हो जाते हैं।
7. खून साफ करे नीम एक रक्त-शोधक औषधि है, यह बुरे कैलेस्ट्रोल को कम या नष्ट करता है। नीम का महीने में 10 दिन तक सेवन करते रहने से हार्ट अटैक की बीमारी दूर हो सकती है।
8. पायरिया में लाभदायक मसूड़ों से खून आने और पायरिया होने पर नीम के तने की भीतरी छाल या पत्तों को पानी में औंटकर कुल्ला करने से लाभ होता है। इससे मसूड़े और दाँत मजबूत होते हैं। नीम के फूलों का काढ़ा बनाकर पीने से भी इसमें लाभ होता है। नीम का दातुन नित्य करने से दांतों के अन्दर पाये जाने वाले कीटाणु नष्ट होते हैं। दाँत चमकीला एवं मसूड़े मजबूत व निरोग होते हैं। इससे चित्त प्रसन्न रहता है।
9. मलेरिया रोग में फायदेमंद नीम के रस का फायदा मलेरिया रोग में किया जाता है। नीम वाइरस के विकास को रोकता है और लीवर की कार्यक्षमता को मजबूत करता है।
10. प्रेगनेंसी में प्रेगनेंसी के दौरान नीम का रस योनि के दर्द को कम करता है। कई प्रेगनेंट औरते लेबर पेन से मुक्‍ती पाने के लिये नीम के रस से मसाज करती हैं। प्रसूता को बच्चा जनने के दिन से ही नीम के पत्तों का रस कुछ दिन तक नियमित पिलाने से गर्भाशय संकोचन एवं रक्त की सफाई होती है, गर्भाशय और उसके आस-पास के अंगों का सूजन उतर जाता है, भूख लगती है, दस्त साफ होता है, ज्वर नहीं आता, यदि आता भी है तो उसका वेग अधिक नहीं होता।
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[Edited by: भूमिका राय]
नई दिल्ली, 01 अगस्त 2015, अपडेटेड 17:43 IST
अगर आपके घर के सामने नीम का पेड़ है तो आप वाकई बहुत भाग्यशाली हैं. गर्मी में ठंडी हवा देने के साथ ही ये एक ऐसा पेड़ है जिसका हर हिस्सा किसी न किसी बीमारी के इलाज में कारगर है. इतना ही नहीं विभि‍न्न प्रकार के सौंदर्य प्रसाधनों के निर्माण में भी नीम को प्रमुख रूप से इस्तेमाल किया जाता है.
नीम के फायदे:

1. जल जाने पर : अगर आप खाना बनाते वक्त या किसी दूसरे कारण से अपना हाथ जला बैठी हैं तो तुरंत उस जगह पर नीम की पत्तियों को पीसकर लगा लें. इसमें मौजूद एंटीसेप्टिक गुण घाव को ज्यादा बढ़ने नहीं देता है.
2. कान दर्द में : अगर आपके कान में दर्द रहता है तो नीम का तेल इस्तेमाल करना काफी फायदेमंद रहेगा. कई लोगों में कान बहने की भी बीमारी होती है, ऐसे लोगों के लिए भी नीम का तेल एक कारगर उपाय है.
3. दांतों के लिए : कुछ वक्त पहले तक नीम की दातुन, ब्रश की तुलना में ज्यादा लोकप्रिय थी. एक ओर जहां दांतों और मसूड़ों की देखभाल के लिए हम तरह-तरह के महंगे टूथपेस्ट इस्तेमाल करते हैं वहीं नीम की दातुन अपने आप में पर्याप्त होती है. नीम की दातुन पायरिया की रोकथाम में भी कारगर होती है.
4. बालों के लिए भी है फायदेमंद : नीम एक बहुत अच्छा कंडीशनर है. इसकी पत्तियों को पानी में उबालकर उसके पानी से बाल धोने से रूसी और फंगस जैसी समस्याएं दूर हो जाती हैं.
5. फोड़े और दूसरे जख्मों पर लगाने के लिए : कई बार ऐसा होता है कि खून साफ न होने की वजह से समय-समय पर फोड़े हो जाते हैं. ऐसे में नीम की पत्ती को पीसकर प्रभावित जगह पर लगाने से फायदा होगा. साथ ही इसके पानी से चेहरा साफ करने पर मुंहासे नहीं होते हैं.
See : http://aajtak.intoday.in/story/5-benefits-of-neem-1-825765.html
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नीम में इतने गुण हैं कि ये कई तरह के रोगों के इलाज में काम आता है। यहाँ तक कि इसको भारत में ‘गांव का दवाखाना’ कहा जाता है। यह अपने औषधीय गुणों की वजह से आयुर्वेदिक मेडिसिन में पिछले चार हजार सालों से भी ज्यादा समय से इस्तेमाल हो रहा है। नीम को संस्कृत में ‘अरिष्ट’ भी कहा जाता है, जिसका मतलब होता है, ‘श्रेष्ठ, पूर्ण और कभी खराब न होने वाला।’

नीम के अर्क में मधुमेह यानी डायबिटिज, बैक्टिरिया और वायरस से लड़ने के गुण पाए जाते हैं। नीम के तने, जड़, छाल और कच्चे फलों में शक्ति-वर्धक और मियादी रोगों से लड़ने का गुण भी पाया जाता है। इसकी छाल खासतौर पर मलेरिया और त्वचा संबंधी रोगों में बहुत उपयोगी होती है।

नीम के पत्ते भारत से बाहर 34 देशों को निर्यात किए जाते हैं। इसके पत्तों में मौजूद बैक्टीरिया से लड़ने वाले गुण मुंहासे, छाले, खाज-खुजली, एक्जिमा वगैरह को दूर करने में मदद करते हैं।

इसका अर्क मधुमेह, कैंसर, हृदयरोग, हर्पीस, एलर्जी, अल्सर, हिपेटाइटिस (पीलिया) वगैरह के इलाज में भी मदद करता है।

नीम के बारे में उपलब्ध प्राचीन ग्रंथों में इसके फल, बीज, तेल, पत्तों, जड़ और छिलके में बीमारियों से लड़ने के कई फायदेमंद गुण बताए गए हैं। प्राकृतिक चिकित्सा की भारतीय प्रणाली ‘आयुर्वेद’ के आधार-स्तंभ माने जाने वाले दो प्राचीन ग्रंथों ‘चरक संहिता’ और ‘सुश्रुत संहिता’ में इसके लाभकारी गुणों की चर्चा की गई है। इस पेड़ का हर भाग इतना लाभकारी है कि संस्कृत में इसको एक यथायोग्य नाम दिया गया है – “सर्व-रोग-निवारिणी” यानी ‘सभी बीमारियों की दवा।’ लाख दुखों की एक दवा!

सद्‌गुरु:
“इस धरती की तमाम वनस्पतियों में से नीम ही ऐसी वनस्पति है, जो सूर्य के प्रतिबिम्ब की तरह है।”

इस पृथ्वी पर जीवन सूर्य की शक्ति से ही चलता है…..सूर्य की ऊर्जा से जन्मे तमाम जीवों में नीम ने ही उस ऊर्जा को सबसे ज्यादा ग्रहण किया है। इसीलिए इसे रोग-निवारक समझा जाता है – किसी भी बीमारी के लिए नीम रामबाण दवा है। नीम के एक पत्ते में 150 से ज्यादा रासयानिक रूप या प्रबंध होते हैं। इस धरती पर मिलने वाले पत्तों में सबसे जटिल नीम का पत्ता ही है। नीम की केमिस्ट्री सूर्य से उसके लगाव का ही नतीजा है।

नीम के पत्तों में जबरदस्त औषधीय गुण तो है ही, साथ ही इसमें प्राणिक शक्ति भी बहुत अधिक है। अमेरिका में आजकल नीम को चमत्कारी वृक्ष कहा जाता है। दुर्भाग्य से भारत में अभी लोग इसकी ओर नहीं दे हैं। अब वे नीम उगाने की कोशिश कर रहे हैं, क्योंकि नीम को अनगिनत तरीकों से इस्तेमाल किया जा सकता है। अगर आपको मानसिक बिमारी है, तो भारत में उसको दूर करने के लिए नीम के पत्तों से झाड़ा जाता है। अगर आपको दांत का दर्द है, तो इसकी दातून का इस्तेमाल किया जाता है। अगर आपको कोई छूत की बीमारी है, तो नीम के पत्तों पर लिटाया जाता है, क्योंकि यह आपके सिस्टम को साफ कर के उसको ऊर्जा से भर देता है। अगर आपके घर के पास, खास तौर पर आपकी बेडरूम की खिड़की के करीब अगर कोई नीम का पेड़ है, तो इसका आपके ऊपर कई तरह से अच्छा प्रभाव पड़ता है।

बैक्टीरिया से लड़ता नीम : 
दुनिया बैक्टीरिया से भरी पड़ी है। हमारा शरीर बैक्टीरिया से भरा हुआ है। एक सामान्य आकार के शरीर में लगभग दस खरब कोशिकाएँ होती हैं और सौ खरब से भी ज्यादा बैक्टीरिया होते हैं। आप एक हैं, तो वे दस हैं। आपके भीतर इतने सारे जीव हैं कि आप कल्पना भी नहीं कर सकते। इनमें से ज्यादातर बैक्टीरिया हमारे लिए फायदेमंद होते हैं। इनके बिना हम जिंदा नहीं रह सकते, लेकिन कुछ ऐसे भी होते हैं, जो हमारे लिए मुसीबत खड़ी कर सकते हैं। अगर आप नीम का सेवन करते हैं, तो वह हानिकारक बैक्टीरिया को आपकी आंतों में ही नष्ट कर देता है।

आपके शरीर के भीतर जरूरत से ज्यादा बैक्टीरिया नहीं होने चाहिए। अगर हानिकारक बैक्टीरिया की तादाद ज्यादा हो गई तो आप बुझे-बुझे से रहेंगे, क्योंकि आपकी बहुत-सी ऊर्जा उनसे निपटने में नष्ट हो जाएगी। नीम का तरह-तरह से इस्तेमाल करने से बैक्टीरिया के साथ निपटने में आपके शरीर की ऊर्जा खर्च नहीं होती।

आप नहाने से पहले अपने बदन पर नीम का लेप लगा कर कुछ वक्त तक सूखने दें, फिर उसको पानी से धो डालें। सिर्फ इतने से ही आपका बदन अच्छी तरह से साफ हो सकता है – आपके बदन पर के सारे बैक्टीरिया नष्ट हो जाएंगे। या फिर नीम के कुछ पत्तों को पानी में डाल कर रात भर छोड़ दें और फिर सुबह उस पानी से नहा लें।

एलर्जी के लिए नीम :
नीम के पत्तों को पीस कर पेस्ट बना लें, उसकी छोटी-सी गोली बना कर सुबह-सुबह खाली पेट शहद में डुबा कर निगल लें। उसके एक घंटे बाद तक कुछ भी न खाएं, जिससे नीम ठीक तरह से आपके सिस्टम से गुजर सके। यह हर प्रकार की एलर्जी–त्वचा की, किसी भोजन से होनेवाली, या किसी और तरह की–में फायदा करता है। आप सारी जिंदगी यह ले सकते हैं, इससे कोई नुकसान नहीं होगा। नीम के छोटे-छोटे कोमल पत्ते थोड़े कम कड़वे होते हैं, वैसे किसी भी तरह के ताजा, हरे पत्तों का इस्तेमाल किया जा सकता है।

बीमारियों के लिए नीम :
नीम के बहुत-से अविश्वसनीय लाभ हैं, उनमें से सबसे खास है–यह कैंसर-कोशिकाओं को नष्ट कर देता है। हर किसी के शरीर में कैंसर वाली कोशिकाएं होती हैं, लेकिन वे एक जगह नहीं होतीं, हर जगह बिखरी होती हैं। किसी वजह से अगर आपके शरीर में कुछ खास हालात बन जाते हैं, तो ये कोशिकाएं एकजुट हो जाती हैं। छोटे-मोटे जुर्म की तुलना में संगठित अपराध गंभीर समस्या है, है कि नहीं? हर कस्बे-शहर में हर कहीं छोटे-मोटे मुजरिम होते ही हैं। यहां-वहां वे जेब काटने जैसे छोटे-मोटे जुर्म करते हैं, यह कोई बड़ी समस्या नहीं है। लेकिन किसी शहर में अगर ऐसे पचास जेबकतरे एकजुट हो कर जुर्म करने लगें, तो अचानक उस शहर का पूरा माहौल ही बदल जाएगा। फिर हालत ये हो जाएगी कि आपका बाहर सड़क पर निकलना खतरे से खाली नहीं होगा। शरीर में बस ऐसा ही हो रहा है। कैंसर वाली कोशिकाएं शरीर में इधर-उधर घूम रही हैं। अगर वे अकेले ही मस्ती में घूम रही हैं, तो कोई दिक्कत नहीं। पर वे सब एक जगह इकट्ठा हो कर उधम मचाने लगें, तो समस्या खड़ी हो जाएगी। हमें बस इनको तोड़ना होगा और इससे पहले कि वे एकजुट हो सकें, यहां-वहां इनमें से कुछ को मारना होगा। अगर आप हर दिन नीम का सेवन करें तो ऐसा हो सकता है; इससे कैंसर वाली कोशिकाओं की तादाद एक सीमा के अंदर रहती है, ताकि वे हमारी प्रणाली पर हल्ला बोलने के लिए एकजुट न हो सकें। इसलिए नीम का सेवन बहुत लाभदायक है।
नीम में ऐसी भी क्षमता है कि अगर आपकी रक्त धमनियों (आर्टरी) में कहीं कुछ जमना शुरु हो गया हो तो ये उसको साफ कर सकती है। मधुमेह (डायबिटीज) के रोगियों के लिए भी हर दिन नीम की एक छोटी-सी गोली खाना बहुत फायदेमंद होता है। यह उनके अंदर इंसुलिन पैदा होने की क्रिया में तेजी लाता है।

साधना के लिए नीम :
नीम आपके सिस्टम को साफ रखने के साथ उसको खोलने में भी खास तौर से लाभकारी होता है। इन सबसे बढ़ कर यह शरीर में गर्मी पैदा करता है। शरीर में इस तरह की गर्मी हमारे अंदर साधना के द्वारा तीव्र और प्रचंड ऊर्जा पैदा करने में बहुत मदद करती है।
See : http://hindi.speakingtree.in/blog/content-254084
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नीम के पत्ते खाने के फायदे – नीम के गुण
Posted on 1 month ago by अनुभवी G.P.Singh 0 Comments0
परिचय :
1. इसे निम्ब (संस्कृत), नीम (हिन्दी), निम (बंगाली), कडूलिंब (मराठी), लीमड़ो (गुजराती), बेंबु (तमिल), बेया (तेलुगु), आजाद दरख्त (अरबी) तथा मेलिया एजाडिरेक्टा (लैटिन) कहते हैं।
2. नीम का वृक्ष 40-50 फुट ऊँचा, अनेक शाखा-प्रशाखाओं से युक्त और सघन होता है। तने की लकड़ी सरल होती है। छाल काली, मोटी और खुरदरी होती है। पत्ते छोटी टहनियों के अन्त में लम्बी सींकों पर नुकीले, कंगूरेदार, 3-4 अंगुल लम्बे व 1-1 अंगुल चौड़े होते हैं। नये पत्ते निकलने के साथ छोटे-छोटे, पीले-सफेद रंग के फूल आकर लद जाते हैं (बौर, निम्बमंजरी) इसके फल खिरनी के आकार के छोटे, हरे रंग के तथा पकने पर पीले होते हैं। फल में एक बीज होता है।
3. यह भारत में सर्वत्र पाया जाता है।
रासायनिक संघटन : नीम की छाल में कडुवा, रालमय सत्त्व, मार्गोसीन उड़नशील तेल, गोंद, श्वेतसार, शर्करा तथा टैनिन होते हैं। पत्तों में कडुवा पदार्थ कम होता है। बीज में मार्गोसा आइल 40 प्रतिशत गन्धक के अंश से युक्त रहता है। मद्य (ताड़ी) में कडुवा पदार्थ 60 प्रतिशत होता है। नीम के सब अंगों से तेल अधिक कार्यकारी होता है।
नीम के गुण : यह स्वाद में कडुवा, कसैला, पचने पर कटु तथा हल्का होता है। इसका मुख्यत: त्वचा-ज्ञानेन्द्रिय पर कण्डूध्न (त्वचा-रोगहर) प्रभाव पड़ता है। यह कीटाणुनाशक, शोथहर, उदर कृमिहर, व्रण-रोपण (घाव भरनेवाला), पीड़ा-शामक, रुचिकर, रक्तशोधक, कफहर, मूत्रविकारनाशक, गर्भाशयउत्तेजक, दाह-प्रशामक, ज्वरघ्न, नेत्र के लिए हितकारक तथा बलकारक होता हैं।

नीम का प्रयोग
1. विषमज्वर : नीम की पत्ती की सींकें 21 और काली मिर्च 21 नग लेकर उन्हें 6 तोला पानी में पीस-छानकर कुछ गर्म करके पिलाने से दो-तीन दिनों में विषमज्वर उतर जाता है।
2. वमन : ज्वर में वमन होता हो, तो नीम की लकड़ी जलाकर पानी में बुझाकर वही पानी पिलाइये। इससे कफ की कै रुक जाती है।
3. दाह : ज्वर में दाह हो तो नीम के पत्ते पीसकर शहद मिला पानी में घोलकर पिलायें। इससे ज्वरदाह कम हो जाता और वमन भी रुक जाता है।
4. मसूरिका : नीम के मुलायम पत्ते और काली मिर्च सम परिमाण में पीसकर चने के बराबर गोली बना लें। चेचक के दिनों में प्रात: 1 गोली पानी के साथ लेने पर चेचक नहीं निकलती। बराबर दो सप्ताह के सेवन से फोड़ा-फुन्सी भी नहीं निकलते।
5. कामला : नीम की छाल के रस में शहद मिलाकर सुबह सेवन करने से कामला में आराम होता है।
6. वातरक्त : नीम-पत्र और पटोल-पत्र का क्वाथ शहद मिलाकर पीने से वातरक्त (गाउट) में आराम होता हैं।
7. कृमिरोग : नीम-पत्र का रस मधु के साथ पीने से उदरस्थ कृमियों का नाश होता है।
8. शीतपित्त : नीम-पत्र को घी में भूनकर आँवला मिलाकर खाने से शीतपित्त, फोड़े, घाव, अम्लपित और रक्तविकार में निश्चित लाभ होता है।
9. दन्तरोग : नीम की जड़ की छाल का काढ़ा लेने से दन्तरोग नहीं होता। पायोरिया में यह विशेष लाभकर हैं।
10. खालित्य-पालित्य : नीम-बीजों के तेल का 1 मास तक नस्य लेने और केवल दूध का सेवन करने से बाल काले होते एवं गिरे बाल उग आते हैं।
11. विष-प्रतिकार : नीम-फलों की गिरी को गर्म जल के साथ देने से विष का असर तुरन्त मिट जाता है।
12. अर्श : 10-12 नीम-फलों की गिरी को पीसकर दही के साथ लें, पहले गिरी खाकर दही खायें या गिरी को गुड़ में मिला गोली बनाकर खा लें। इससे दो दिनों में बवासीर में रक्त का आना बन्द हो जाता है। यह प्रयोग शतशः अनुभूत है।
13. बाल-ज्वर : नीम के सूखे पत्रों के साथ घी मिलाकर धूप देने से बच्चों का ज्वर छूट जाता है।
14. कुष्ठ : नीम के पत्र पीसकर जल के साथ लगातार ६ मास लेने से सब प्रकार के कुष्ठ दूर हो जाते हैं। इसके साथ घी का सेवन अवश्य करें।
15. योनि-पिच्छलता : गाढ़े स्राव से योनि गीली रहती हो तो नीम के पत्ते उबालकर उस पानी से धोयें (डूसिंग करें)। फिर नीम-छाल को आग पर जलाकर उसका धुआँ दें। इससे योनि की पिच्छलता दूर होकर बदबू मिटती और वह कड़ी हो जाती है।
16. योनिशूल : नीम के बीजों को भिगोकर तथा पीसकर पोटली बना योनि पर रखने से योनि-शूल मिट जाता है।
17. शोधन : जब फोड़ा पक जाय तथा मुँह छोटा हो, तब नीम के पत्तों को पीसकर पुल्टिस बाँधने से शोधन हो जाता है।
See : http://www.homeopathicmedicine.info/neem-ke-fayde-gun-upyog/
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परामर्श : 10 AM से 10 PM के बीच। Mob & Whats App No. : 9875066111
Please Do not take any (kind of) suggested medicine, without consulting your doctor.
कृपया अपने चिकित्सक के परामर्श के बिना, सुझाई गयी (किसी भी प्रकार की) दवा का सेवन नहीं करें।

निवेदन : रोगियों की संख्या अधिक होने के कारण, आपको इन्तजार करना पड़ सकता है। कृपया धैर्यपूर्वक सहयोग करें।-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'-9875066111. 
Request : Due to the high number of patients, you may have to wait. Please patiently collaborate.-Dr. Purushottam Meena 'Nirankush'-9875066111

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--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!

--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!
सभी के स्वस्थ एवं सुदीर्घ जीवन की कामना के साथ-मेरे प्यारे और दुलारे तीन बच्चों की ममतामयी अद्वितीय माँ (मम्मी) जो दुखियों, जरूतमंदों और मूक जानवरों तक पर निश्छल प्यार लुटाने वाली एवं अति सामान्य जीवन जीने की आदी महिला थी! वह पाक कला में निपुण, उदार हृदया मितव्ययी गृहणी थी! मेरी ऐसी स्वर्गीय पत्नी "जानकी मीणा" की कभी न भुलाई जा सकने वाली असंख्य हृदयस्पर्शी यादों को चिरस्थायी बनाये रखते हुए इस ब्लॉग को आज दि. 08.08.12 को फिर से पाठकों के समक्ष समर्पित कर रहा हूँ!-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'

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इफेक्ट्स-Side Effects of Hysterectomy गर्म पानी गर्मी गर्मी-Heat गाजर गाजवां गांठ गाँठ-Knot गिलोय गिल्टी गुंदा गुदाभ्रंश गुलज़ाफ़री गृध्रसी गृह-स्वामिनी गैस गैस्ट्रिक गोक्षुरादि चूर्ण गोखरू गोखरू (LAND CALTROPS) गोंद कतीरा-Hog-Gum गोंदी गोभी-Cabbage गोरख मुंडी गोरखमुंडी घमोरी घाघरा घाव चकवड़ चक्कर चपाती चमत्कारिक सब्जियां चर्बी चर्म चर्म रोग चर्मरोग चाय चाय-Tea चालीस के पार-Forty Across चिकनगुनिया चिकित्सकीय चिरायता-Absinth चिरोटा चुंबन चोक चौलाई छपाकी छरहरी काया छाछ छाले छीकें छुआरा छुहारा छोटा गोखरू छोटा धतूरा छोटी हरड़ जकवड़ जंगली-कटीली चौलाई जटामांसी-Spikenard जलजमनी जलन जलोदर रोग-Ascites Disease जवारे जवासा-Alhag जहर जामुन का जूस जायफल जीरा जीवन रक्षक जीवनी शक्ति जुएं जुकाम जुलाब जूएं जूस जूस-Juice जोड़ों के दर्द ज्योति ज्वर ज्वर-Fiver झाइयाँ झांईं झुर्रियाँ झुर्रियां झुर्री झूठे दर्द टमाटर-Tomatoes टाइफाइड टायफायड टूटी हड्डी टॉन्सिल टोटला ट्यूमर ठेकेदार डॉक्टर डकार डायबिटीज डायरिया डिनर डिलेवरी डीकामाली डीगामाली डेंगू डेंगू-Dengue डॉ. निरंकुश डॉ. मीणा ढीलापन ढीली योनि तकलीफ का सही इलाज तरबूज-Watermelon तलाक ताकत तिल तिल्ली तुंबा तुंबी तुलसी तेल त्रिदोषनाशक त्रिफला त्वचा त्वचा रोग थकान थाईरायड थायरायड-Thyroid थायरॉइड दण्डनीय अपराध दन्तकृमि दन्तरोग दमा दर्द दर्दनाक दस्त दही दाग-धब्बे-Stains-Spots दाढ़ दांत दांतो में कैविटी-Teeth Cavity दाद दाम्पत्य दाम्पत्य-Conjugal दाल दालचीनी दालें दिल दुर्गंध दुर्बलता दुष्प्रभाव दूध दूधी दूधी-Milk Hedge दृष्टिदोष द्रोणपुष्पी-Leucas Cephalotes धड़कन धनिया-Coriander धमासा धातु धातु पतन धार्मिक नज़ला नपुंसकता नाक नाखून नागबला नागरमोथा नाडी हिंगु नाड़ी हिंगु (डिकामाली) नामर्दी नारकीय पीड़ा नारियल नाश्ता निमोनिया निम्न रक्तचाप निम्बू नियासिन निराश निरोगधाम निर्गुण्डी निसोरा नींद नींबू नींबू-Lemon नीम-azadirachta indica नुस्खे नुस्खे-Tips नेगड़ नेगड़-निर्गुन्डी-Vitex negundo नेत्र रोग नैतिक नौसादर न्युमोनिया-Pneumonia पक्षघात पढ़ने में मन लगेगा पंतजलि पत्तागोभी-CABBAGE पत्थर फोड़ी पत्थरचट्टा पत्नी पथरी पदार्थ पनीर पपीता पपीता-CARICA PAPPYA पमाड परदेशी लांगड़ी परहेज पराठा परिस्थिति पवाड़ पवाँर पाइल्स पाक-कला पाचक पाचन पाठक संख्या 16 लाख पार पाठक संख्या पंद्रह लाख पायरिया पारिजात पालक पालक-Spinach पित्त पित्ती पिंपल-मुंहासे-Pimples-Acne पिरामिड पीलिया पीलिया-Jaundice पीलिया-कामला-Jaundice पुआड़ पुदीना पुनर्नवा-साटी-सौंटी-Punarnava पुरुष पेचिश पेट के कीड़े पेट दर्द पेट में गैस पेट रोग पेड़ पेशाब में रुकावट पेंसिल थेरेपी-Pencil Therapy पौधे पौरुष पौष्टिक रागी रोटी प्याज-Onion प्यास प्रजनन प्रतिरक्षा प्रतिरक्षा प्रणाली प्रतिरोधक प्रतिरोधक-Resistance प्रदर प्रमेह प्रवाहिका (पेचिश)-Dysentery प्रसव प्रसव सुरक्षा चक्र प्रसूति प्राणायाम प्रेग्नेंसी-Pregnancy प्रेमिका प्रोटीन प्रोटीन का कार्य प्रोटीन के स्रोत प्रोस्टेट ग्रन्थि प्लीहा प्लूरिसी-Pleurisy प्लेटलेट्स फफूंद-Fungi फरास फल फल-Fruit फाइबर फिटकरी फुंसी-Pimples फूलगोभी-CAULIFLOWER फेंफड़े फैट फोटोफोबिया फोड़ा फोड़े-Boils फोलिक एसिड फ्लू फ्लू-Flu फ्लेक्स सीड्स बकायन बकुल बड़ी हरड़ बथुआ बथुआ पाउडर बथुआ-White Goose Foot बदबू बबूल-ACACIA बरसाती बीमारियाँ बरसाती बीमारियां बलगम बलवृद्धि बला बलात्कार बवासीर बहुनिया बहुमूत्रता- बांझपन बादाम-Almonds बादाम. बाल बाल झड़ना बाल झडऩा-Hair Falling बिना सिजेरियन मां बनें बिवाई बीजबंद बीमारियों के अनुसार औषधियां बीमारी बुखार बूंद-बूंद पेशाब बेल बेल – Bael बेली बैक्टीरिया ब्र​ह्मदण्डी ब्रेस्ट ग्रोथ ब्लड प्रेशर ब्लैक मेलिंग ब्लॉकेज भगंदर भगंदर-Fistula-in-ano भगनासा भगोष्ठ भय भस्मक रोग भावनात्मक भुई आंवला-Phyllanthus Niruri भूई आमला भूई आंवला भूख भूख बढ़ाने भूमि भूमि आंवला भोजनलीवर मकोय मकोय-Soleanum nigrum मंजीठ मटर-PEA मंद दृष्टि मंदाग्नि मदार मधुमेह मधुमेह-Diabetes मन्दाग्नि-Dyspepsia मरुआ मर्द मर्दाना मलेरिया (Malaria) मसाले मस्तिष्क मस्से मस्से-WARTS महत्वपूर्ण लेख महाबला माइग्रेन माईग्रेन माईंड सैट माजूफल मानसिक मानसिक-Mental मानिसक तनाव-Mental Stress मायोपिया मासिक मासिक-धर्म मासिकधर्म मासिकस्राव माहवारी मिनरल मिर्गी मिर्च-Chili मीठा खाने की आदत मुख मैथुन-ओरल सेक्स-Oral Sex मुधमेह मुलहठी मुलेठी मुहाँसे मूँगफली मूड डिस्ऑर्डर-Mood Disorders मूत्र मूत्र असंयमितता मूत्र में जलन-Burning in Urine मूत्राशय मूर्च्छा (Unconsciousness) मूली मृत्यु मृत्युदण्ड मेथी मेथी दाना मेंहदी मैथुन मोगरा (Mogra) मोटापा मोटापा-Obesity मोतियाबिंद मौत मौलसिरी मौसमी बीमारियां यकृत यकृत प्लीहा यकृत वृद्धि-Liver Growth यकृत-लीवर-जिगर-Lever यूपेटोरियम परफोलियेटम योग विज्ञापन योन योनि योनि ढीली योनि शिथिल योनि शूल-Vaginal Colic योनि संकोचन योनी योनी संकोचन यौन यौन आनंद यौन दौर्बल्य यौनशक्ति यौनशिक्षा यौनसुख यौनानंद यौनि रक्त प्रदर (Blood Pradar) रक्त रोहिड़ा-TECOMELLA UNDULATA रक्तचाप रक्तपित्त रक्तशोधक रक्ताल्पता रक्ताल्पता (एनीमिया)-Anemia रस-juices रातरानी Night Blooming Jasmine/Cestrum nocturnum रामबाण रामबाण औषधियाँ-Panacea Medicines रुक्षांश रूसी रूसी मोटापा रेचक रेठु रोग प्रतिरोधक लकवा लक्ष्मी लंच लसोड़ा लस्सी लहसुन लहसुन-Garlic लाइलाज लाभ लिंग लिंग प्रवेश लिसोड़ा लीकोरिया लीवर लीवर-Liver लू-hot wind लैंगिक लोनिया लौकी लौंग की चाय ल्युकोरिया ल्यूकोरिया ल्यूज योनी वजन वज़न वजन कम वजन बढाएं-Weight Increase वन/जंगली तुलसी वनौषधियाँ वमन वमन विकृति-Vomiting Distortion वसा वात वात श्लैष्मिक ज्वर वात-Rheumatism वायरल वायरल फीवर वायरल बुखार-Viral Fever वासना विटामिन विधारा वियाग्रा-Viagra विलायती नीम विष विषखपरा वीर्य वीर्य वृद्धि वृक्कों (गुर्दों) में पथरी-Renal (Kidney) Stone वृक्ष वैज्ञानिक वैधानिक वैवाहिक जीवन वैवाहिक जीवन-Marital वैश्यावृति व्यायाम शंखपुष्पी शरपुंखा शराब शरीफा-सीताफल-Custard apple शर्करा शलगम-Beets शल्यक्रिया शहद शहद-Honey शारीरिक शिथिलता शीघ्र पतन शीघ्रपतन शुक्राणु-Sperm शुक्राणू शुगर शोथ श्योनाक श्रेष्ठतर श्वास श्वांस श्वेत प्रदर श्वेत प्रदर-Leucorrhea श्वेतप्रदर षड़यंत्र संकुचन संकोच संक्रमण संखाहुली संतरा-Orange संतान संतुष्टि सत्यानाशी सदा सुहागन सदाफूली सदाबहार सदाबहार चूर्ण सनबर्न सफ़ेद दाग सफेद पानी सब्जि सब्जियां-Vegetables सब्जी संभालू संभोग समर्पण-Dedication सरकार को सुझाव सरफोंका सरहटी सर्दी सर्दी जुकाम-Cold सर्पक्षी सर्पविष सलाद संवेदना सहदेई सहदेवी साइटिका साइटिका-Sciatica साइड इफेक्ट्स साबूदाना-Sago सायटिका सिजेरियन सिर दर्द सिरका सिरदर्द सिरोसिस सीजर डिलेवरी सुगर सुदर्शन सुहागा सूखा रोग सूजन सेक्स सेक्स परामर्श-Sex Counseling सेक्स पावर सेक्स समस्या सेक्स हार्मोन सेक्‍स-Sex सेंधा नमक सेब सेमल-Bombax Ceiba सेल्स सोजन-सूजन सोंठ सोना पाठा सोयाबीन सोयाबीन (Soyabean) सोयाबीन-Soyabean सोराइसिस सोरियासिस-Psoriasis सौंठ सौंदर्य सौंदर्य-Beauty सौन्दर्य सौंफ सौंफ की चाय सौंफ-Fennel स्किन स्तन स्तन वृद्धि स्तनपान स्तम्भन स्त्री स्त्रीत्व स्त्रैण स्वप्न दोष स्वप्नदोष स्वप्नदोष-Night Fall स्वरभंग स्वर्णक्षीरी स्वस्थ स्वास्थ्य स्वास्थ्य रक्षक सखा हजारदानी हड़जोड़ हड्डी हड्डी में दर्द हड्डीतोड़ ज्वर हड्डीतोड़ बुखार हरड़ हरसिंगार हरी दूब-CREEPING CYNODAN हरीतकी हर्टबर्न हस्तमैथुन हस्तमैथुन-Masturbation हारसिंगार हालात हिचकी हिचकी-Hiccup हिमोग्लोबिन-hemoglobin हिस्टीरिया हिस्टीरिया-Hysteria हींग हीनतर हृदय हृदय-Heart हेपेटाइटिस हेपेटाईटिस हेल्थ टिप्स-Health-Tips हैजा हैपीनेस-Happiness हैल्थ होम केयर टिप्स-Home Care Tips होम्योपैथ होम्योपैथिक होम्योपैथी होम्योपैथी-Homeopathy