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पत्तागोभी (CABBAGE)

परिचय : पत्तागोभी जिसे हम करमकल्ला या बंदगोभी के नाम से भी जानते हैं यह एक शीत ऋतु की फसल है जो हमारे देश में यूरोप के देश से आई थी। पत्तागोभी के बाहरी पत्ते काफी उपयोगी होते हैं, इसलिए उन्हें उतारकर फेंकने नहीं चाहिए। इन पत्तों में विटामिन-ए व लौह तत्व प्रचुर मात्रा में होता है। पत्तागोभी को सलाद के रूप में भी खा सकते हैं, अधिक उपयोगी बनाने के लिए उसके रस का प्रयोग करें। वैज्ञानिक मतानुसार इस गोभी में विटामिन `यू´ पाया जाता है जो पेट और आंतों के घाव, जलन व अम्लता (एसिडिटिज) को मिटाता है।

स्वाद : पत्तागोभी खाने में मीठी और तीखी होती है।

स्वभाव : पत्तागोभी की तासीर शीतल (ठंडी) होती है। पत्तागोभी में विटामिन-ए, बी व सी प्रचुर मात्रा में विद्यमान रहते हैं। पत्तागोभी के बाहरी पत्ते में विटामिन-ए व लौह तत्त्व काफी मात्रा में होता है। पत्तागोभी में गंधक, चूना और लौह तत्व भी काफी मात्रा में होता है। पकाने पर इसमें एक अलग तरह की गंध आती हैं। पत्तागोभी को बहुत तेज आंच पर या बहुत देर तक नहीं पकाना चाहिए क्योंकि उसमें मौजूद विटामिन नष्ट हो जाते हैं। यदि पानी में सब्जी पकाएं तो उस पानी को भी प्रयोग में लाना चाहिए क्योंकि उस पानी में विटामिन व खनिज प्रचुर मात्रा में होते हैं। पत्तागोभी में पाए जाने वाले तत्व इस प्रकार से है-


तत्व
मात्रा (ग्राम में)तत्वमात्रा (ग्राम में)
प्रोटीन1.8 प्रतिशतनियासिन0.4 माइक्रोग्राम/100 ग्राम
वसा0.1 प्रतिशतविटामिन-सीलगभग 1 ग्राम का चौथा भाग /100 ग्राम
कार्बोहाइड्रेट 6.3 प्रतिशतलौहलगभग 1 ग्राम का चौथा भाग /100 ग्राम
पानी90.2 प्रतिशतफॉस्फोरस0.05 प्रतिशत
विटामिन-ए2000 आई0यू0/100 ग्रामकैल्शियम0.03 प्रतिशत
विटामिन-बी-160 मा0 ग्राम/100 ग्रामअन्य खनिज पदार्थ0.6 प्रतिशत
विटामिन-बी-230 माइक्रोग्राम /100 ग्राम
हानिकारक : पत्तागोभी का रस एक सीमित मात्रा में (एक-डेढ़ कप) ही लेना चाहिए। नवीन शोधों से ज्ञात हुआ है कि अधिक मात्रा में लिया गया पत्तागोभी का रस थाइराइड ग्रंथि के स्राव (बहना) को बढ़ा देता है जो हानिकारक भी हो सकता है।

पत्तागोभी के औषधीय उपयोग :

पायरिया (दांतों के मसूढों से पीव का आना) : 


  1. पत्तागोभी के कच्चे पत्ते 50 ग्राम रोजाना खाने से पायरिया व दांतों के अन्य रोगों में लाभ होता है।
  2. बंदगोभी का रस निकालकर पीयें तथा इसके मध्य भाग को सलाद बनाकर खाने से पायरिया तथा दांतों के अन्य रोग ठीक होते हैं।


घाव (चोट) : पत्तागोभी के रस का सेवन करने से घाव ठीक होते हैं। पत्तागोभी के आधे गिलास रस में 5 बार पानी मिलाकर पीना चाहिए। घाव पर पत्तागोभी के रस की ही पट्टी बांधने से आराम मिलता है।

कैंसर : सुबह खाली पेट पत्तागोभी का कम से कम आधा कप रस रोजाना पीने से आरम्भिक अवस्था में कैंसर, बड़ी आंत का प्रवाह (बहना) ठीक हो जाता है।

कोलाइटिस (वृहद आंत्रिक प्रदाह) : 1 गिलास छाछ में चौथाई कप पालक का रस, 1 कप पत्तागोभी का रस मिलाकर रोजाना दिन में 2 बार पिलाने से कोलाइटिस ठीक हो जाती है।

बालों का गिरना : पत्तागोभी के 50 ग्राम पत्ते को रोजाना 1 महीने तक खाने से झड़े हुए बाल फिर से उग आते हैं।

गैस्ट्रिक अल्सर : पत्तागोभी के रस को पीने और गोभी के मध्य भाग को कच्चा सलाद के रूप में खाने से गैस्ट्रिक अल्सर और पेप्टिक अल्सर में लाभ होता है।

आमाशय का जख्म : पत्तागोभी (करमकल्ला) का रस 1-1 कप दिन में 3 बार लगातार 14 दिनों तक पीने से आमाशय में लाभ होता है। पत्तागोभी को कच्चा खाने से भी आराम मिलता है। 

बालों का गिरना : पत्तागोभी के 50 ग्राम पत्ते खाने से गिरे हुए बाल उग आते हैं और बालों का गिरना कम हो जाता है।

परिणाम शूल (पेप्टिक अल्सर) :  1-1 कप पत्तागोभी का रस 3 बार रोजाना पीने से अल्सर का रोग ठीक हो जाता है। पत्तागोभी का ताजा रस कम से कम 2 सप्ताह तक पीने से बहुत लाभ होता है।

नींद की कमी, पथरी और मूत्र की रुकावट : पत्तागोभी की सब्जी को घी से छोंककर बनाकर खाने से नींद आती है, पथरी और पेशाब की रुकावट में लाभ मिलता है।

जोड़ों के दर्द : पत्तागोभी के रस का सेवन करने से पेट के घावों के अलावा जोड़ों के दर्द, दांतों के रोग, रक्तविकार (खून की खराबी), अजीर्ण, पीलिया, मस्तिश्क की कमजोरी और शरीर का मोटापा आदि रोगों में लाभ मिलता है।

बालों का झड़ना (गंजेपन का रोग) : पत्तागोभी के रस को 1 महीने सिर पर मालिश करने से गंजेपन का रोग सही हो जाता है।

कब्ज़ : 
  1. पत्तागोभी (करमकल्ले) के कच्चे पत्ते रोजाना खाने से पुराना कब्ज दूर हो जाता है। शरीर में मौजूद विजातीय पदार्थ और दोष-पूर्ण पदार्थ बाहर निकल जाते हैं।
  2. पत्ता गोभी के रस रोजाना पीने से पुरानी कब्ज दूर हो जाती है। यह शरीर में मौजूद दोषों को मल के द्वारा बाहर निकाल देता है।
  3. पत्ता गोभी को कच्चा खाने से आंतों की कमजोरी के साथ गैस की शिकायत भी दूर होती है।
स्त्रोत : जे के हेल्थ

पत्तागोभी खाएं स्लिम हो जाएं

पत्तागोभी के हरे पत्ते में बेशुमार गुण भरे होते है। सामान्य समझी जाने वाली इस सब्जी में अनेक औषधीय गुण है। पत्तागोभी के नियमित सेवन से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है। हाल ही में हुए अध्ययनों से पता चला है कि पत्तागोभी वजन घटाने में काफी लाभदायक साबित हुई है।

स्वाद में मधुर, शीतल, हल्की व हृदय को ताकत प्रदान करने वाली पत्तागोभी में कैंसर को रोकने की अपार क्षमता है। यदि कैंसर के रोगी पत्तागोभी के ताजे पत्तों का सेवन प्रतिदिन सुबह खाली पेट करे, तो काफी फायदा होता है। चिकित्सकों का कहना है कि पत्तागोभी में एक ऐसा रसायन विद्यमान रहता है, जिसमें स्तन कैंसर पैदा करने वाले तत्वों की मात्रा घटाने की क्षमता होती है।

इसके अलावा इसमें विटामिन बी-1, बी-2, बी-3, बी-6 और बी-9 पाया जाता है। इसमें आयरन और कैल्शियम भी भरपूर मात्रा में रहता है। साथ ही यह पोटेशियम, जिंक, ग्लूटामाइन और मैग्नीशियम का भी बेहतर स्त्रोत है।

आहार विशेषज्ञों के अनुसार पत्तागोभी में काफी मात्रा में विटामिन सी पाया जाता है। यह रेशेदार तत्वों से भरपूर है। यही नहीं इसमें कुछ ऐसे तत्व मौजूद रहते है, जो मनुष्य के शारीरिक विकास व बुद्धि को तीव्र करने में सहायक होते है।

पत्तागोभी में सेल्युलोस नामक तत्व मौजूद होता है, जो हमें स्वस्थ रखने में सहायक है। यह तत्व शरीर से कोलेस्ट्रोल की मात्रा को दूर करता है। इसे मधुमेह के रोगियों के लिए विशेष लाभकारी माना जाता है। यह खांसी, पित्त व रक्त विकार में भी लाभकारी है।

जर्मन पद्धति के अनुसार पत्तागोभी को काटकर उसमें नमक लगाकर उसे खट्टा होने के लिए रख दिया जाता है। इस विधि से तैयार पत्तागोभी को 'सोर क्राउट' के नाम से जाना जाता है। 'सोर क्राउट' में प्रचुर मात्रा में विटामिन पाए जाते है। हृदय रोगों को दूर करने के लिए सोर क्राउट का प्रयोग काफी लाभदायक है।

पेट व आंखों के अल्सर, उदर वायु, आमाशय या लिवर के रोगियों के लिए यह वरदान साबित हो सकता है। भूख बढ़ाने के लिए इसका प्रयोग किसी टॉनिक से कम नहीं है। कारण, यह पाचन क्रिया को नियंत्रित रखता है व शरीर को रोगों से बचाने में सहायक सिद्ध होता है।

सलाद के रूप में भी पत्तागोभी को काफी पसंद किया जाता है। दिन में एक-दो बार इसका सेवन शरीर का वजन नियंत्रित करने में सहायक सिद्ध हो सकता है। इसमें संक्रामक रोगों से लड़ने की शक्ति होती है। 200 ग्राम पत्तागोभी में विटामिन सी की उतनी मात्रा होती है जितनी किसी व्यस्क के लिए आवश्यक होती है। स्त्रोत : जागरण, [उर्वशी], १३.११.११
पता स्वास्थ्य का - पत्तागोभी- अर्बुदा ओहरी

क्या आप जानते हैं?
  1. पत्तागोभी मूल रूप से एशियन सब्जी है जो ईसा से छह सौ वर्ष पूर्व यूरोप पहुँची। 
  2. बंद गोभी की फसल तीन महीने के समय में ही काटने के लिये तैयार हो जाती हैं।
  3. पत्ता गोभी में मोटापा, कैंसर तथा अल्सर से लड़ने के प्राकृतिक तत्त्व पाए जाते हैं।
स्वादिष्ट भारतीय व्यंजन, स्वास्थ्यवर्धक कोल्सलॉ या चटपटे मंचूरियन पकौड़े, पूरे विश्व में पत्तागोभी करीब करीब हर प्रकार के भोजन में छाया रहता है। इसकी पैदावार जितनी आसान है यह पकाने और पचाने में भी उतना ही आसान है।

पत्तागोभी भी कई प्रकार का होता है। सेवोए, बोक चोए औऱ नापा पत्तागोभी चीनी व्यंजन में काम आता है, इसकी पत्तियाँ गहरे हरे रंग की और ढीली बँधी होती हैं। सेलेरी पत्तागोभी भी बोक चोए प्रकार में शामिल होता है। हरा पत्तागोभी विशेष रूप से भारतीय भोजन में प्रयोग किया जाता है। एक लाल, जामुनी रंग का पत्तागोभी भी होता है जोसलाद आदि में काम आता है। ब्रोकोली, फूलगोभी और गाँठ गोभी, ये सभी पत्तागोभी के परिवार के ही सदस्य हैं।

बंद गोभी या पत्तागोभी अनेक पौष्टिक खनिज लवण और विटामिन का स्रोत है। इसमें प्रोटीन, वसा, नमी, फाईबर तथा कर्बोहाइड्रेट भी अच्छी मात्रा में होता है। खनिज लवण तथा विटामिन की बात करें तो पत्तागोभी में कैल्सियम, फास्फोरस, आयरन, कैरोटीन, थायमिन, राइबोफ्लेविन, नियासिन तथा विटामिन सी भी प्रचुर मात्रा में होता है। इसमें क्लोरीन तथा सल्फर भी पाया जाता है और अपेक्षाकृत आयोडीन का प्रतिशत भी अधिक होता है। सल्फर, क्लोरीन तथा आयोडीन साथ में मिल कर आँतों और आमाशय की म्यूकस परत को साफ करने में मदद करते हैं। इसके लिए कच्चै पत्तागोभी को नमक लगा कर खाना चाहिए।

अपच या कब्ज की परेशानी में पत्तागोभी एक बेजोड़ इलाज की तरह काम करता है। अपने भोजन में सिर्फ कच्चे पत्तागोभी को बारीक काट लें और उस पर नमक, नींबू का रस और काली मिर्च लगा कर खाएँ। यह बिना किसी दुष्प्रभाव के आराम देगी। 

पत्तागोभी में अलसर से बचाव के गुण होते हैं। पत्तागोभी के १८०-३६० मिली रस को दिन में तीन बार लेने से पाचन तंत्र के ड्यूडेनम भाग में अल्सर की शिकायत दूर होती है। पत्तागोभी में विटामिन यू होता हैं जो कि अल्सर अवरोधक माना जाता है। यह विटामिन पकाने से नष्ट हो जाता है इसलिए बहुत सी तकलीफों में प्राकृतिक रूप में पत्तागोभी का सेवन ही लाभ पहुँचा सकता है।

पत्तागोभी में टारट्रोनिक अम्ल होता है, जो शरीर में शर्करा और कार्बोहाइड्रेट को वसा में बदलने से रोकता है। इसमें विटामिन सी और विटामिन बी की मात्रा भी होती है। विटामिन सी मोटापे को कम करता है और विटामिन बी शरीर के चयअपचय दर को बढ़ाए रखता है। इसलिए वजन कम करना हो तो पत्तागोभी का सेवन अधिक करना चाहिए। अपने भोजन का एक भाग पत्तागोभी के नाम कर दिया जाए तो वजन कम करने में बड़ी ही सहायता रहेगी। १०० ग्राम पत्तागोभी में करीब २७ कैलोरी होती है। देखा जाए तो १०० ग्राम आटे की रोटी से २४० कैलोरी मिलती हैं। इसे खाने से पेट तो भरेगा ही और साथ में कैलोरी भी कम जाएगी। पत्तागोभी में कम कैलोरी के साथ बहुत अधिक जैविक गुण होतेहैं। इसमें निहित विटामिन बी तंत्रिका तंत्र को आराम पहुँचाने में सहायक होता है।

विटामिन ए और ई की उपस्थिति से त्वचा और आँखों से संबंधित तकलीफों में भी पत्तागोभी बहुत लाभ पहुँचाता है। छाले, घाव, फोड़े-फुंसी तथा चकत्तों जैसी परेशानियों में पत्तागोभी के पत्तों की पट्टी लगाने से बहुत आराम मिलता है। इस काम के लिए पत्तागोभी की बाहरी मोटी पत्तियाँ बेहतर रहती हैं। पूरी साबुत पत्तियों को ही पट्टी की तरह काम में लेना चाहिए। इसकी पट्टी बनाने के लिए पत्तियों को गरम पानी से बहुत अच्छी तरह धोकर तौलिये से अच्छी तरह सुखा कर बेलन से बेलते हुए नरम कर लेना चाहिए। इसकी मोटी, उभरी हुई नसों को निकाल कर बेलने से यह नरम हो जाएगा। फिर इसे गरम करके घाव पर समान रूप से लगाना चाहिए। इन पत्तियों को सूती कपड़े में या मुलायम ऊनी कपड़े में डाल कर काम में ले सकते हैं। इससे पूरे दिन भर के लिए या रात भर सिकाई कर सकते हैं। जले हुए पत्तागोभी की राख भी त्वचा की बहुत सी बीमारियों में आराम पहुँचाता है।

पत्तागोभी में विभिन्न प्रकार के ऐसे तत्व होते हैं जो उम्र के साथ शरीर पर पड़ने वाले प्रभावों से निजात दिला सकते हैं। बढ़ती उम्र की परेशानियाँ घटाने में बंदगोभी मदद कर सकती हैं। रक्त वाहिनी में जमाव को रोकने में, गाल ब्लैडर में पथरी की शिकायत में बंदगोभी में बंद विटामिन सी तथा विटामिन बी की जोड़ी बहुत सहायता कर सकती है। रक्तवाहिनियों को ताकत भी पहुँचाता है। 

इसके अनेक गुणों का शरीर पर सकारात्मक असर लाने के लिए इसका सही प्रकार से सेवन करना बहुत ज़रूरी है। इसे सलाद की तरह कच्चा खाया जा सकता है या फिर हल्का सा उबाल कर। चाहें तो इसे पका सकते हैं। पर बेहतर असर पाना चाहते हों तो पत्तागोभी को इसके प्राकृतिक रूप में ही खाएँ, क्योंकि इसमें बहुत से ऐसे तत्व होते हैं जो कि पकाने के बाद नष्ट हो जाते हैं। कच्चा खाने से यह जल्दी हजम भी होती है। 

पत्तागोभी का रस पेट में गैस कर सकता है, जिसके कारण बदहजमी हो सकती है। इसलिए सलाह दी जाती है कि पत्तागोभी के रस में थोड़ी सी गाजर का रस मिला कर पीना चाहिए। इससे पेट में गैस या अन्य समस्याएँ नहीं होंगी। पका हुआ पत्तागोभी या पत्तागोभी की सब्जी खाने से भी यदि तकलीफ हो तो इसमे थोड़ी हींग मिला कर पकाएँ। बारिश के समय पत्तागोभी पर कीड़े भी हो सकते हैं, इसलिए पत्तागोभी को अच्छी प्रकार से धोकर, साफ करके ही काम में लें। 

सूप, सब्जी, सलाद या पास्ता, पुलाव, बर्गर, नूडल किसी भी खाने में इसे डालें। इसकी परतों को खोलते जाएँ, इसके गुणों को परखते जाएँ और सेहत के लिए बेहतर पत्तागोभी को अपनाएँ। स्त्रोत : अभिव्यक्ति

कैंसर रोधी भी है पत्तागोभी

पत्तागोभी जिसे हम ‘बंदगोभी’ भी कहते हैं, वह पौष्टिक गुणों का भंडार है। इससे कई रंगों को दूर भी किया जा सकता है। इसके विषय में वैज्ञानिक शोध कर रहे हैं कि इसमें ऐसा क्या है, जो रोग निरोधक है। वैसे यह सब्जी हजारों सालों से पैदा की जी रही है, प्राचीन यूनानी और रोमन सभ्यताओं के लोग बंदगोभी के गुणों से अच्छी तरह वाकिफ थे। इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि पहले यूनान में ही इसकी खेती हुई होगी। यूनान के बाद इसकी खेती यूरोप, जर्मनी, पोलैंड और रूप में शुरू हुई। रूस में पत्तागोभी ने शीघ्र ही वहां की खानपान की संस्कृति में अपनी एक विशिष्ट पहचान बना ली। इटलीवासियों ने पत्तागोभी की एक विसिष्ट किस्म विकसित की है। भारत के अलावा रूस, पोलैंड, चीन और जापान में पत्तागोभी को प्रमुख उत्पादन माना गया है। ऐसी मान्यता है कि इसके सेवन से ‘स्कर्वी’ नामक रोग नहीं होता। पत्तागोभी में पोषक तत्वों का भंडार होता है। 150 ग्राम पत्तागोभी में 33 कैलोरीज पायी जाती हैं। पत्तागोभी में विटामिन ‘ए’, ‘बी-6य, ‘बी-1य, ‘बी-2य, विटामिन ‘सी’ पाये जाते हैं। पत्तागोभी में फाइबर, खनिज तत्व मैग्नीज, फोलेट, ओमेगा-3, फैटी एसिड्स, कैल्शियम, प्रोटीन और मैग्नीशियम भी पाए जाते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार पत्तागोभी में जीवनरक्षक और रोगरक्षक तत्व पर्याप्त मात्रा में पाये जाते हैं। बंदगोभी का सेवन शरीर की रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाता है। कई शोधों से ज्ञात हुआ है कि कैंसर जैसे गंभीर रोगों से लड़ने की क्षमता पत्तागोभी में मौजूद हैं। शरीर में कुछ हानिकारक तत्वों का निर्माण होता है जिन्हें ‘फ्री-रेडिक्लस’ कहा जाता है। ये फ्री-रेडिकल्स, डी.एन.ए. कोशिकाओं आदि अंगों पर बुरा असर डालते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार पत्तागोभी इन फ्री-रेडिकल्स से शरीर को निजात दिलाता है। पत्तागोभी पर शोध अध्ययन जारी है। अमेरिका के सिएटल स्थित ‘फ्रेड इचिनसन कैंसर रिसर्च इंस्टीच्यूट’ में हुए शोध से पता चला है कि जो लोग सप्ताह में तीन बार पत्तागोभी का सेवन करते हैं, उनमें प्रोस्टेट कैंसर होने की 44 फीसदी आशंका कम हो जाती है। स्त्रोत : रांची एक्सप्रेस, ०३.१०.२०११


पत्तागोभी के औषधीय लाभ



पायरिया : पत्तागोभी के कच्चे पत्ते 50 ग्राम नित्य खाने से पायरिया व दाँतों के अन्य रोगों में लाभ होता है।

बाल गिरना : पत्तागोभी के 50 ग्राम पत्ते प्रतिदिन खाने से गिरे हुए बाल उग आते हैं।
घाव : इसका रस पीने से घाव ठीक होते हैं। इसके रस का आधा गिलास 5 बार पानी मिलाकर पीना चाहिए। घाव पर इसके रस की पट्टी बाँधें।
परिणाम शूल : करमकल्ले का रस पीने से यह रोग ठीक हो जाता है। एक-एक कप तीन बार पिएँ। इसके कच्चे पत्ते भी खा सकते हैं। इसका ताजा रस ही लाभ करता है, यह कम से कम दो सप्ताह पिएँ। : वेब दुनिया


पत्ता गोभी खाएं स्वस्थ मसूडे़ एवं मजबूत दांत पाएं

Story Update : Friday, January 20, 2012

पत्तागोभी पत्ते दर पत्तों का एक गांठ है। जिसमें कई तरह के विटामिन जैसे विटामिन ए, विटामीन बी-1, विटामिन बी-2 पर्याप्त मात्रा में पाये जाते हैं। यह प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा, कैल्शियम, मैग्नेशियम, सोडियम, पोटैशियम, लौह तत्व और फॉसफोरस का भी अच्छा स्रोत है। पत्ता गोभी खाने में हल्की और पचने में आसान होती है। इसकी तासीर शीतल होती है। 

आंतों के लिए बेहतरीन औषधी : इसमें कई प्रकार की बीमारियों को दूर करने की क्षमता पायी जाती है। पत्तागोभी के नियमित सेवन से शरीर में रोग प्रतिरोधी क्षमता बढ़ती है। इसकी पत्तियों को कच्चा चबाने से दातों के दर्द एवं पायरिया से आराम मिलता है। पत्ता गोभी के सेवन से बालों का गिरना भी कम होता है। आंतों के घाव एवं पेट में जलन होने पर पत्ता गोभी खाना काफी फायदेमंद होता है। इसके सेवन से हृदय बलवान होता है। 

पत्ता गोभी का खाने में प्रयोग : पत्ता गोभी जैसे भी खाएं यह फायदेमंद होता है। जिन्हें इसकी सब्जी पसंद है वह सब्जी खा सकते हैं। कच्चा खाना चाहें तो सलाद के रूप में प्रयोग करें इससे पत्तागोभी में मौजूद सभी पोषक तत्व शरीर को प्राप्त होता है। पत्ता गोभी का पराठा काफी लजीज बनता है। अगर सब्जी या सलाद पसंद नहीं हो तो पराठा बनाकर भी खा सकते हैं। स्त्रोत : astroujala

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--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!

--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!
सभी के स्वस्थ एवं सुदीर्घ जीवन की कामना के साथ-मेरे प्यारे और दुलारे तीन बच्चों की ममतामयी अद्वितीय माँ (मम्मी) जो दुखियों, जरूतमंदों और मूक जानवरों तक पर निश्छल प्यार लुटाने वाली एवं अति सामान्य जीवन जीने की आदी महिला थी! वह पाक कला में निपुण, उदार हृदया मितव्ययी गृहणी थी! मेरी ऐसी स्वर्गीय पत्नी "जानकी मीणा" की कभी न भुलाई जा सकने वाली असंख्य हृदयस्पर्शी यादों को चिरस्थायी बनाये रखते हुए इस ब्लॉग को आज दि. 08.08.12 को फिर से पाठकों के समक्ष समर्पित कर रहा हूँ!-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'

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मदार मधुमेह मधुमेह-Diabetes मन्दाग्नि-Dyspepsia मरुआ मर्दाना मलेरिया (Malaria) मस्तिष्क मस्से मस्से-WARTS महाबला माइग्रेन माईग्रेन माईंड सैट माजूफल मानसिक मानसिक-Mental मानिसक तनाव-Mental Stress मायोपिया मासिक मासिक-धर्म मासिकधर्म मासिकस्राव माहवारी मिनरल मिर्गी मिर्च-Chili मुख मैथुन-ओरल सेक्स-Oral Sex मुधमेह मुलहठी मुलेठी मुहाँसे मूँगफली मूड डिस्ऑर्डर-Mood Disorders मूत्र मूत्र असंयमितता मूत्र में जलन-Burning in Urine मूत्राशय मूर्च्छा (Unconsciousness) मूली मृत्यु मृत्युदण्ड मेथी मेथी दाना मेंहदी मैथुन मोगरा (Mogra) मोटापा मोटापा-Obesity मोतियाबिंद मौत मौलसिरी मौसमी बीमारियां यकृत यकृत प्लीहा यकृत वृद्धि-Liver Growth यकृत-लीवर-जिगर-Lever यूपेटोरियम परफोलियेटम योग विज्ञापन योन योनि योनि शूल-Vaginal Colic योनि संकोचन योनी योनी संकोचन यौन यौन आनंद यौन दौर्बल्य यौनशक्ति यौनशिक्षा यौनानंद यौनि रक्त प्रदर (Blood Pradar) रक्त रोहिड़ा-TECOMELLA UNDULATA रक्तचाप रक्तपित्त रक्तशोधक रक्ताल्पता रक्ताल्पता (एनीमिया)-Anemia रस-juices रातरानी Night Blooming Jasmine/Cestrum nocturnum रामबाण रामबाण 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