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लहसुन-Garlic

लहसुन- GARLIC, ALLIUM SATIVUM, SHALLOT

परिचय : लहसुन का प्रयोग भारत में बहुत पहले से चला आ रहा है। यह दाल व सब्जी में प्रयोग किया जाता है। इसका उपयोग औषधि को बनाने में किया जाता है। लहसुन में बीज नहीं होता है तथा इसकी कलियों को ही बोया जाता है। लहसुन के पौधे 30 से 45 सेमी तक होते हैं। इसकी जड़ में ही लहसुन की कली लगती है। जिसमें कई सारी कली होती हैं। इसके पत्ते प्याज की तरह चपटे, सीधे, लंबे और नोकदार होते हैं। प्राचीन काल से ही इसे अमृत के समान माना गया है।
[दाम्पत्य सुख को समझने और भोगने के इच्छुक हर एक स्त्री और पुरुष को पढने योग्य अति महत्वपूर्ण और उपयोगी जानकारी प्रदान करने वाला एक पढने योग्य आलेख!-"अतृप्त दाम्पत्य कारण एवं निवारण!" ]

लहसुन की दो किस्में होती हैं। लाल और सफेद। दोनों ही के गुण लगभग एक होते हैं। इसके अलावा एक कली वाला भी लहसुन होता है। जिसे एकपुती लहसुन कहते हैं। एक पुती वाले लहसुन को अंग्रेजी में शैलोट कहते हैं। इस लहसुन में भी सारे गुण होते हैं तथा इस लहसुन का उपयोग भी दाल, साग और चटनी में किया जाता है। लहसुन का तेल लकवे और वात रोगों में उपयोगी होता है।


लहसुन में पाए जाने वाले तत्त्व:

तत्त्वमात्रा
प्रोटीन6.3 प्रतिशत
वसा0.1 प्रतिशत
कार्बोहाइड्रेट29.0 प्रतिशत
पानी62.8 प्रतिशत
विटामिन-सी13 मिग्रा./100 ग्राम
लौह1.3 मिग्रा./100 ग्राम
फास्फोरस0.31 प्रतिशत
कैल्शियम0.03 प्रतिशत
विभिन्न भाषाओं में लहसुन के नाम:
संस्कृत   लशुन, रसोन।
हिन्दी       लहसुन।
अग्रेजी       गारलिक, शैलोट।
बंगाली       लशुन।
मराठी   लसूण।
गुजराती  लसणा।
फारसी       सीर।
लैटिन       एलियम सैटाइवम।


स्त्रोत : जेके हेल्थ वर्ल्ड

दिल के लिए वरदान लहसुन
19-07-२०११

आमतौर पर लहसुन को सिर्फ खाने का स्वाद बढ़ाने के लिए ही उपयोग में लिया जाता था और ऐसा माना भी जाता था कि यह सिर्फ खाने में स्वाद बढ़ाने वाली वस्तु हैं. लेकिन लहसुन में स्वाद बढ़ाने के अलावा भी कई ऐसी खूबियां होती हैं जो लहसुन को बेजोड़ और बहुत कीमती बनाती हैं.

लहसुन का उपयोग ह्वदय रोगों में अब वरदान सिद्ध हो रहा है। लहसुन को अंग्रेजी में गारलिक और लेटिन में ऎलियम सेटाइवम के नाम से जाना जाता है। आयुर्वेद ग्रंथों में लहसुन का काफी उल्लेख किया गया है। चरक और सुश्रुत जैसे आयुर्वेदाचार्य ने भी इसे उपयोगी बताया था। आजकल जापान में मैन ऑफ मिरकेल नाम से प्रसिद्ध एक व्यक्ति की धूम मची हुई है, वह रोगी को लहसुन के रस से भरे जार में गर्दन तक डुबो देता है, चाहे किसी भी प्रकार का रोग उसे क्यों न हो, पर रोगी इस विधि से ठीक भी हो जाता है।

हुए कई प्रयोग
ह्वदय रोग विशेष्ाज्ञों और वैज्ञानिकों ने जानवरों तथा मनुष्य के ह्वदय पर प्रयोग कर पाया कि लहसुन न सिर्फ ह्वदय की धमनियों को संकरा होने से बचाता है, वरन् रोगग्रस्त धमनियों में जमा कोलेस्ट्रॉल को निकाल कर पुन: स्वस्थ अवस्था में ला देता है। कोलेस्ट्रॉल हटाने का काम लहसुन में उपस्थित गंधक के यौगिकों से होता है। इन यौगिकों में डाइएलडी सल्फाइड, एलाइल, प्रोपाइल, सल्फाइड और पॉली सल्फाइड मुख्य हैं। 

कहा जाता है लहसुन का सेवन नियमित रूप से किया जाए, तो असमय बुढ़ापे के शिकार होने से बचा जा सकता है। यहां बुढ़ापे का अर्थ आयु की अधिकता से नहीं लगाना चाहिए वरन् बुढ़ापे का अर्थ है शरीर की धमनियों को सिकुड़कर रोग ग्रस्त हो जाना है। लहसुन प्राचीनकाल से ही औष्ाधि के रूप में विख्यात रहा है। चरक का तो यहां तक कहना था, " यदि लहसुन में गंध न होती, तो सोने से भी अधिक मूल्यवान होता।"

कैंसर रोधी भी
लहसुन और प्याज सफेद और रंगहीन वनस्पति हैं जिसमें क्लोरोफिल का अभाव होता है। लहसुन में ऎलिसिन नामक पदार्थ होता है जो कैंसर रोधी होता है। अत: लहसुन खाने से शरीर में कैंसर की रसोलिया नहीं बनती है, अत: लहसुन कैंसर रोकने का भोज्य ही नहीं, वरन् चिकित्सा विद्या भी भी अग्रणी है।
प्रश्न उठता है लहसुन का सेवन किस तरह किया जाए? वैसे लहसुन का प्रयोग कच्चा ही किया जाए, तो बेहतर है, पर सब्जी और अन्य खाद्य पदार्थो में मिलाकर इसका सेवन किया जा सकता है।

लहसुन का अधिक उपयोग करने से शरीर में गर्मी उत्पन्न होती है। अत: यह नितांत आवश्यक हो जाता है कि इसके साथ ठंडी खुराक ली जाए, जिसमें दूध, मक्खन, दही, छाछ आदि प्रमुख है। 

लहसुन का तीक्ष्ण स्वाद होने से मुंह में नहीं चबाना चाहिए, सिलबट्टे पर पीसकर चटनी के रूप में दही आदि में मिलाकर उपयोग करना सुगम होगा। फास्ट लाइफ जीने वालों के लिए आजकल कई दवा कंपनियों ने लहसुन के कैप्सूल भी बनाए हैं। स्त्रोत : २४ duniadotcom  

गुणों का भंडार है लहसुन
10 October 2011

लहसुन दैनिक प्रयोग में आने वाला एक मसाला है। यह अपनी औषधीय क्षमता के लिए विख्यात है। आयुर्वेद ने तो इसकी महिमा मुक्त कंठ से गाई है-
‘लंशति छिंनति रोगान लशुनम।’
अर्थात् जो रोगों का नाश करें, वह लहसुन है।

लहसुन का बोटेनिकल नाम ‘एलियन सेटाइवा गालिक’ है। कहीं-कहीं बोलचाल की भाषा में लोग इसे रोगन भी कहते हैं।

लहसुन देखने में कुछ-कुछ प्याज से मिलता जुलता है। इसके पौधे की ऊंचाई 30-60 सेमी. तक होती है। पत्तियां चपटी व पतली होती है। इसे मसलने पर एक उग्र तीखी गंध आती है। इसका कंद श्वेत या हल्का गुलाबी रहता है। आवरण को हटाने पर 12-15 छोटे-छोटे मटर आकार के कन्द निकलते हैं। इन्हें भी कुचलने या खाने पर तीखी गंध आती है।

सूखे एवं स्वच्छ स्थानों पर लहसुन को छ: माह तक सुरक्षित रखा जा सकता है। इसका बाह्य और अंत: दोनों प्रयोग होता है। आइए इनके उपयोग के बारे में कुछ हम भी जानें।
  1. - लहसुन के तेल लगाने से कड़ी से कड़ी गांठ भी गल जाती है। वात रोग व लकवे में तो इसका प्रयोग रामबाण के समान लाभदायक है। इस बीमारी में लहसुन के तेल की मालिश से जहां मांसपेशियों को पुनर्जीवित होने का मौका मिलता है, वहीं इसके एक-दो जौ के प्रतिदिन प्रात: सेवन से शरीर में आंतरिक गर्मी पैदा होती है।
  2. - लहसुन पीसकर पुल्टिस बांधने से दमा, गठिया, सायटिका तथा अनेक प्रकार के चर्मरोग दूर हो जाते हैं। इसकी पुल्टिस जहां चोट लगे या सूजे भाग की सृजन व दर्द भगाती है, वहीं उसमें कुष्ठ रोग तक को दूर कर देने की क्षमता होती है।
  3. - आयुर्वेदाचार्यों के अनुसार पेशाब रूकने पर पेट के निचले भाग में लहसुन की पुल्टिस बांधने से मूत्राशय की निष्क्रियता दूर होती है। फलत: पेशाब खुलकर आता है।
  4. - ‘मेडिसिनल प्लान्ट्स आफ इण्डिया’ के अनुसार लहसुन में ‘एलीन’ नामक जैव-सक्रिय पदार्थ पाया जाता है, जो प्रचण्ड जीवाणुनाशक होता है। इसकी जीवाणुनाशक क्षमता कार्बोलिक एसिड से भी दुगुनी होती है।
  5. - लहसुन के लेप से जहां फोड़े-फुंसी शीघ्र पककर ठीक हो जाते हैं, वहां दाद-खुजली भी मिटती है।
  6. - प्रतिदिन प्रात: एक या दो जौ लहसुन खाने वाले को कभी भी कब्जियत नहीं होती।
  7. - जाड़े के मौसम में तो लहसुन का प्रयोग अंत: और बाह्य दोनों (खाने तथा तेल में पका कर मालिश करने) दृष्टि से अतीव उपयोगी है।
  8. लहसुन में अनेक औषधीय गुण भरे पड़े हैं किन्तु इसका अत्यधिक प्रयोग फिर भी वर्जित हैं। अधिक प्रयोग से आंत्रशोध तथा अन्य बीमारियां हो सकती है। तामसी प्रवृत्ति के होने के कारण साधनादि करने वालों के लिए भी इसका प्रयोग वर्जित है।

मोटापे से पाना है छुटकारा तो खाएं लहसुन और शतावरी

भाषा | लंदन, 23 अगस्त 2010 आपको अगर छरहरी काया से लगाव है या आप अपने मधुमेह के स्तर को काबू में रखना चाहते हों तो आपको अपने खान पान में शतावरी, वज्रांगी और लहसुन को शामिल करना होगा.

एक अध्ययन में पता चला है कि शतावरी, वज्रांगी (आर्टीचोक) और लहसुन के प्रयोग से मोटापे और मधुमेह को नियंत्रित किया जा सकता है. ‘द डेली टेलीग्राफ’ के अनुसार शोधकर्ताओं ने पाया है कि लहसुन, शतावरी और वज्रांगी में प्रचुर मात्रा में काबरेहाइड्रेट पाया जाता है जिसका सेवन करने से भूख लगने की प्रवृत्ति कम हो जाती है और साथ ही इसके प्रयोग से मानव शरीर में मधुमेह के स्तर को नियंत्रित करने में सहायता मिलती है.

शोधकर्ताओं के अनुसार लहसुन, शतावरी और वज्रांगी आंत के हार्मोन के स्राव में क्रियाशील होते हैं जो भूख लगने की प्रवृत्ति को कम करता है. ये हार्मोन, इंसुलिन के प्रति संवेदनशीलता को बढ़ाते हैं. इंसुलिन संबंधी हारमोन का निर्माण पाचकग्रंथि द्वारा होता है, जो कि शरीर की कोशिकाओं में ग्लूकोज के प्रवेश को होने देता है. इस प्रक्रिया से ग्लूकोज को नियंत्रित करने में मदद मिलती है. स्त्रोत : आज तक 

सेक्स पावर बढ़ानी है तो लहसुन, काले चने, सफेद मुसली खाओ

सेक्स पावर बढ़ानी है तो अपना वजन वजन कम करें और अपने खाने पीने मे उन चीज़ों का सेवन अधिक करें जो सेक्स शक्ति बढ़ाने मे मदद करे.

तनाव से होने वाले हार्मोनल परिवर्तन और पौष्टिक आहार की कमी ही सिर्फ सेक्‍स लाइफ को प्रभावित नहीं करते बल्कि कई बार मानसिक कमजोरी भी इसे प्रभावित करता है। बीमारी में तो आप डॉक्‍टर से संपर्क करते हैं लेकिन इस तरह की समस्‍याओं में डॉक्‍टर के पास जाने से घबराते हैं। ऐसे में घरेलू उपाय को अपनाकर सेक्‍स लाइफ को बुस्‍टअप कर सकते हैं।

  1. . लहसुन की 2-3 कलियां और प्‍याज का प्रतिदिन सेवन से यौन-शाक्ति बढ़ती है।
  2. . काले-चने से बने खाद्य-पदार्थ का हफ्ते मे 2-3 बार प्रयोग करना लाभकारी है।
  3. . यूनानी चिकित्सा के अनुसार 15 ग्राम सफेद मूसली को एक कप दूध मे उबालकर दिन मे दो बार पीने से ज्‍यादा शक्तिशाली महसूस करेंगे।
  4. . कच्‍चा गाजर या इसका जूस भी यौन शक्ति को बढ़ाने में मददगार है।
  5. . हफ्ते में दो बार भिंडी और सहजन खाने से काफी फायदा होता है।
  6. . 15 ग्राम सहजन के फूलो को 250 मिली दूध मे उबालकर सूप बनाए। इसे यौन-टौनिक के रूप मे इस्‍तेमाल करें।
  7. . आधा चम्मच अदरक का रस, एक चम्मच शहद तथा एक उबले हुए अंडे का आधा हिस्सा, सभी को मिलकार मिश्रण बनाए प्रतिदिन रात को सोने से पहले एक महीने तक सेवन करें।
  8. . बादाम, पिस्ता खजूर तथा श्रीफल के बीजो को बराबर मात्रा मे लेकर मिश्रण बनाए। प्रतिदिन 100 ग्राम सेवन करें।
  9. . 30 ग्राम किशमिश को गुनगुने पानी मे धोए, 200 मिली दूध मे उबाले तथा दिन मे तीन बार सेवन लें।
  10. . ताजा फलों के रस भी तन और मन को ताजा करता है। स्त्रोत : दुनिया लाइव डोट कॉम
शहद और लहसुन का शर्तिया नुस्खा: हो जाएंगे सफेद बाल भी काले

आयुर्वेद में कहा गया है कि लहसुन के नियमित इस्तेमाल से आप बढ़ती उम्र में भी युवापन का एहसास कर सकते हैं। लहसुन आंत के कीड़ों को निकाल देता है। घावों को शीघ्र भरता है। लेकिन इन तमाम रोगों में कच्चा लहसुन ही विशेष फायदेमंद होता है। न कि व्यवसायिक रूप में लहसुन से बनाई गई दवाई।

शायद वनस्पति जात की यह इकलौती वनस्पति है जिसमें सभी विटामिन और खनिज है। इसीलिए लहसुन बालों के लिए भी फायदेमंद है। केवल लहसुन का सेवन ही नहीं बल्कि इसके तेल से भी बालों से जुड़ी सारी समस्याओं से निजात पाई जा सकती है।

बाल झडऩा- 50 ग्राम सरसों का तेल, एक लहसुन की सब कलियां छीलकर डाल दें। मंदाग्रि में पकाएं। कलिया जल जाएं तो उतारकर, छानकर बोतल में भर दें। रोज रात को सोने से पहले मालिश करें। 

बालों का पकना- उपरोक्त बनाए हुए तेल की मालिश आधा घंटा करना चाहिए।

बाल काले करना-5 कलियों को 50 मि.ग्राम जल में पीस लें फिर 10 ग्राम शहद मिलाकर सुबह सेवन करें।

लहसुन-प्याज का अचूक नुस्खा: दिल और कोलेस्ट्रोल हमेशा रहेंगे कंट्रोल में


वर्तमान समय में गलत खान-पान और टेन्शन भरी जिन्दगी के कारण,हर उम्र के लोगों में दिल की बीमारी और कोलेस्ट्रोल रोगी बढ़ते जा रहे हैं। कोलेस्ट्रोल जब सामान्य स्तर से अधिक हो जाता है तो वह रक्त वाहिनियों में जम जाता है। जिसके कारण हृदय रोग होने की संभावना भी बढ़ जाती है। अगर आपके साथ भी बढ़े हुए कोलेस्ट्रोल या दिल की बीमारी की समस्या है तो नीचे लिखे उपाय बहुत लाभदायक सिद्ध होंगे। 
- प्याज कोलेस्ट्रोल के रोगियों के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। रोज सुबह 5 मि. लि. प्याज का रस खाली पेट सेवन करना चाहिये। इससे खून में बढे हुए कोलेस्ट्रोल को नियंत्रित करने भी मदद मिलती है।

- दिल के रोगियों के लिए लहसुन बहुत फायदेमंद है। लहसुन में खून को पतला रखने का गुण होता है । इसके नियमित उपयोग से खून की नलियों में कोलेस्टरोल नहीं जमता है। लहसुन की 4 कली चाकू से बारीक काटें,इसे 75 ग्राम दूध में उबालें। मामूली गरम हालत में पी जाएं। भोजन पदार्थों में भी लहसुन प्रचुरता से इस्तेमाल करें। 

- एक गिलास मामूली गरम जल में एक नींबू निचोडें,इसमें दो चम्मच शहद भी मिलाएं और पी जाएं। यह प्रयोग सुबह के वक्त करना चाहिये। यह प्रयोग कोलेस्ट्रोल व दिल के रोगियों के लिए बहुत लाभदायक है।

आपके दिल की रक्षा करेगा लहसुन
17 Nov 2011, 1843 hrs IST,भाषा

लंदन।। लहसुन को अभी तक ब्लडप्रेशर की समस्या से निबटने के लिए जाना जाता था, लेकिन अब एक रिसर्च में यह बात सामने आई है कि यह दिल की हिफाजत भी करती है। 

अमेरिका के एमोरी यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन के रिसर्चर्स ने ऐसा तत्व खोजा है जो दिल की कोशिकाओं को खराब होने से बचा कर दिल की रक्षा करता है। डेली मेल की खबर के मुताबिक रिसर्चर्स ने लहसुन में एक ऐसा तत्व खोज निकाला है जो दिल की कोशिकाओं को खराब होने से बचा सकता है। 

इसके लिए उस तत्व को इंजेक्शन से लेने की जरूरत नहीं है। यह सिर्फ लहसुन खाने से ही शरीर को मिल जाता है। स्त्रोत : नवभारत टाइम्स

कई बीमारियों में रामबाण है लहसुन 

आइए जानते है इस लहसुन में छुपे हुए अनमोल गुण

-लहसुन का सेवन करने वालों को टीबी रोग नहीं होता. लहसुन एक शानदार कीटाणुनाशक है, यह एंटीबायोटिक दवाइयों का अच्छा विकल्प है. लहसुन से टीबी के कीटाणु नष्ट हो जाते हैं.

प्रयोग-1 बेजोड़ एंटीबायोटिक
सबसे पहले लहसुन के छिलके उतार दीजिए उसके बाद एक कली के तीन-चार टुकड़े कर लें. सुबह-शाम भोजन के आधा घंटे बाद काटे हुए दो टुकड़ों को मुंह में रखें और धीरे-धीरे चबाएं. जब अच्छी तरह से उस लहसुन का रस बन जाए तब थोड़ा स पानी पीकर सारी चबाई हुई लहसुन को निगल जाएं. अगर आप लहसुन का तीखापन सहन नहीं कर सकते तो एक-एक मनुक्का में दो-दो टुकड़े रखकर चबाएं.


प्रयोग-2 हर दर्द का रामबाण उपाय
लहसुन की चार कलियां छील ले और उन्हें तीस ग्राम सरसों के तेल में डाल दें. उसमें आधा चम्मच अजवाइन के दाने डालकर धीमी-धीमी आंच पर पकने दे. जब लहसुन और अजवाइन काली हो जाए तब तेल उतारकर ठंडा कर छान लें. अब इस गुनगुने गर्म तेल से मालिश करे. ऐसा करने से हर प्रकार का बदन दर्द दूर हो जाता है.


विशेष- अस्थमा का अचूक उपाय
लहसुन को दमा के इलाज में बहुत कारगर माना जाता है. इसके लिए 30 मिली दूध में लहसुन की पांच कलियां डालकर उबालें और इस मिश्रण का हर रोज सेवन करे. इससे दमे की शुरुआती अवस्था में काफी फायदा मिलता है. इसके अलावा अदरक की गरम चाय में लहसुन की दो कलियां मिलाकर पीने से भी अस्थमा पर नियंत्रण पा सकते है. स्त्रोत : ९९९ राजस्थान डोट कॉम 

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--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!

--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!
सभी के स्वस्थ एवं सुदीर्घ जीवन की कामना के साथ-मेरे प्यारे और दुलारे तीन बच्चों की ममतामयी अद्वितीय माँ (मम्मी) जो दुखियों, जरूतमंदों और मूक जानवरों तक पर निश्छल प्यार लुटाने वाली एवं अति सामान्य जीवन जीने की आदी महिला थी! वह पाक कला में निपुण, उदार हृदया मितव्ययी गृहणी थी! मेरी ऐसी स्वर्गीय पत्नी "जानकी मीणा" की कभी न भुलाई जा सकने वाली असंख्य हृदयस्पर्शी यादों को चिरस्थायी बनाये रखते हुए इस ब्लॉग को आज दि. 08.08.12 को फिर से पाठकों के समक्ष समर्पित कर रहा हूँ!-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'

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डायबिटीज डायरिया डिटॉक्सीफाई डिटॉक्सीफिकेशन डिनर डिब्बाबंद भोजन डिलेवरी डीकामाली डीगामाली डेंगू डेंगू-Dengue डॉ. निरंकुश डॉ. मीणा ढीलापन ढीली योनि तकलीफ का सही इलाज तरबूज-Watermelon तलाक ताकत तिल तिल्ली तुंबा तुंबी तुलसी तेल त्रिदोषनाशक त्रिफला त्वचा त्वचा रोग थकान थाईरायड थायरायड-Thyroid थायरॉइड दण्डनीय अपराध दंत वेदना दन्तकृमि दन्तरोग दमा दर वेदना दर्द दर्द निवारक दवा दर्दनाक दस्त दही दाग-धब्बे-Stains-Spots दाढ़ दांत दांतो में कैविटी-Teeth Cavity दाद दाम्पत्य दाम्पत्य विवाद सलाहकार दाम्पत्य-Conjugal दाल दालचीनी दालें दिल दुर्गंध दुर्बलता दुष्प्रभाव दुष्प्रभावरहित दूध दूध वृद्धि दूधी दूधी-Milk Hedge दृष्टिदोष द्रोणपुष्पी-Leucas Cephalotes धड़कन धनिया बीज धनिया-Coriander धमासा धातु धातु पतन धार्मिक धैर्यहीन नज़ला नपुंसकता नाक नाखून नागबला नागरमोथा नाडी हिंगु नाड़ी हिंगु (डिकामाली) नामर्दी नारकीय पीड़ा नारियल नाश्ता निमोनिया निम्न रक्तचाप निम्बू नियासिन निराश निरोगधाम निर्गुण्डी निसोरा नींद नींबू नींबू-Lemon नीम-azadirachta indica नुस्खे नुस्खे-Tips नेगड़ नेगड़-निर्गुन्डी-Vitex negundo नेत्र रोग नैतिक नोनिया नौसादर न्युमोनिया-Pneumonia पक्षघात पढ़ने में मन लगेगा पंतजलि पत्तागोभी-CABBAGE पत्थर फोड़ी पत्थरचट्टा पत्नी पथरी पदार्थ पनीर पपीता पपीता-CARICA PAPPYA पमाड परदेशी लांगड़ी परहेज पराठा परिस्थिति पवाड़ पवाँर पाइल्स पाक-कला पाचक पाचन पाठक संख्या 16 लाख पार पाठक संख्या पंद्रह लाख पायरिया पारिजात पालक पालक-Spinach पित्त पित्ती पिंपल-मुंहासे-Pimples-Acne पिरामिड पीलिया पीलिया-Jaundice पीलिया-कामला-Jaundice पुआड़ पुदीना पुनर्नवा-साटी-सौंटी-Punarnava पुरुष पेचिश पेट के कीड़े पेट दर्द पेट में गैस पेट रोग पेड़ पेशाब में रुकावट पेंसिल थेरेपी-Pencil Therapy पौधे पौरुष पौष्टिक रागी रोटी प्याज-Onion प्यास प्रजनन प्रतिरक्षा प्रतिरक्षा प्रणाली प्रतिरोधक प्रतिरोधक-Resistance प्रदर प्रमेह प्रवाहिका (पेचिश)-Dysentery प्रसव प्रसव सुरक्षा चक्र प्रसव-पीड़ा प्रसूति प्राणायाम प्रेग्नेंसी-Pregnancy प्रेमिका प्रोटीन प्रोटीन का कार्य प्रोटीन के स्रोत प्रोस्टेट ग्रन्थि प्लीहा प्लूरिसी-Pleurisy प्लेटलेट्स फफूंद-Fungi फरास फल फल-Fruit फाइबर फिटकरी फुंसी-Pimples फूलगोभी-CAULIFLOWER फेंफड़े फैट फैटी लीवर फोटोफोबिया फोड़ा फोड़े-Boils फोलिक एसिड फ्लू फ्लू-Flu फ्लेक्स सीड्स बकायन बकुल बड़ी हरड़ बथुआ बथुआ पाउडर बथुआ-White Goose Foot बदबू बबूल-ACACIA बरसाती बीमारियाँ बरसाती बीमारियां बलगम बलवृद्धि बला बलात्कार बवासीर बहरापन बहुनिया बहुमूत्रता- बांझपन बादाम-Almonds बादाम. बाल बाल झड़ना बाल झडऩा-Hair Falling बिना सिजेरियन मां बनें बिवाई बीजबंद बीमारियों के अनुसार औषधियां बीमारी बुखार बूंद-बूंद पेशाब बेल बेली बैक्टीरिया ब्र​ह्मदण्डी ब्रेस्ट ग्रोथ ब्लड प्रेशर ब्लैक मेलिंग ब्लॉकेज भगंदर भगंदर-Fistula-in-ano भगनासा भगोष्ठ भड़भांड़ भय भविष्य भस्मक रोग भावनात्मक भुई आंवला-Phyllanthus Niruri भूई आमला भूई आंवला भूख भूख बढ़ाने भूमि भूमि आंवला भोजनलीवर मकोय मकोय-Soleanum nigrum मंजीठ मटर-PEA मंद दृष्टि मंदाग्नि मदार मधुमेह मधुमेह-Diabetes मन्दाग्नि-Dyspepsia मरुआ मर्द मर्दाना मलेरिया मलेरिया (Malaria) मसाले मस्तिष्क मस्से मस्से-WARTS महत्वपूर्ण लेख महाबला माइग्रेन माईग्रेन माईंड सैट माजूफल मानसिक मानसिक लक्षण मानसिक-Mental मानिसक तनाव-Mental Stress मायोपिया मासिक मासिक-धर्म मासिकधर्म मासिकस्राव माहवारी मिनरल मिर्गी मिर्च-Chili मीठा खाने की आदत मुख मैथुन-ओरल सेक्स-Oral Sex मुधमेह मुलहठी मुलेठी मुहाँसे मूँगफली मूड डिस्ऑर्डर-Mood Disorders मूत्र मूत्र असंयमितता मूत्र में जलन-Burning in Urine मूत्राशय मूर्च्छा (Unconsciousness) मूली मूली कर रस मृत्यु मृत्युदण्ड मेथी मेथी दाना मेंहदी मैथुन मोगरा (Mogra) मोटापा मोटापा-Obesity मोतियाबिंद मौत मौलसिरी मौसमी बीमारियां यकृत यकृत प्लीहा यकृत वृद्धि-Liver Growth यकृत-लीवर-जिगर-Lever यूपेटोरियम परफोलियेटम यूरिक एसिड लेबल योग विज्ञापन योन योनि योनि ढीली योनि शिथिल योनि शूल-Vaginal Colic योनि संकोचन योनी योनी संकोचन यौन यौन आनंद यौन दौर्बल्य यौनशक्ति यौनशिक्षा यौनसुख यौनानंद यौनि रक्त प्रदर (Blood Pradar) रक्त रोहिड़ा-TECOMELLA UNDULATA रक्तचाप रक्तपित्त रक्तशोधक रक्ताल्पता रक्ताल्पता (एनीमिया)-Anemia रस-juices रातरानी Night Blooming Jasmine/Cestrum nocturnum रामबाण रामबाण औषधियाँ-Panacea Medicines रुक्षांश रूढिवादी रूसी रूसी मोटापा रेचक रेठु रोग प्रतिरोधक लकवा लक्षण लक्ष्मी लंच लसोड़ा लस्सी लहसुन लहसुन-Garlic लाइलाज लाइलाज का इलाज लाक्षणिक जानकारी लाभ लिंग लिंग प्रवेश लिसोड़ा लीकोरिया लीवर लीवर-Liver लू-hot wind लैंगिक लोनिया लौकी लौंग की चाय ल्युकोरिया ल्यूकोरिया ल्यूज योनी वजन वज़न वजन कम वजन बढाएं-Weight Increase वन/जंगली तुलसी वनौषधियाँ वमन वमन विकृति-Vomiting Distortion वसा वात वात श्लैष्मिक ज्वर वात-Rheumatism वायरल वायरल फीवर वायरल बुखार-Viral Fever वासना विटामिन विधारा वियाग्रा-Viagra विरह वेदना विलायती नीम विष विष हरनी विषखपरा वीर्य वीर्य वृद्धि वीर्यपात वृक्कों (गुर्दों) में पथरी-Renal (Kidney) Stone वृक्ष वैज्ञानिक वैधानिक वैवाहिक जीवन वैवाहिक जीवन-Marital वैवाहिक रिश्ते वैश्यावृति व्यायाम शंखपुष्पी शरपुंखा शराब शरीफा-सीताफल-Custard apple शर्करा शलगम-Beets शल्यक्रिया शहद शहद-Honey शारीरिक शिथिलता शीघ्र पतन शीघ्रपतन शुक्राणु-Sperm शुक्राणू शुगर शोथ श्योनाक श्रेष्ठतर श्वास श्वांस श्वेत प्रदर श्वेत प्रदर-Leucorrhea श्वेतप्रदर षड़यंत्र संकुचन संकोच संक्रमण संखाहुली संतरा-Orange संतान संतुष्टि सत्यानाशी सदा सुहागन सदाफूली सदाबहार सदाबहार चूर्ण सनबर्न सफ़ेद दाग सफेद पानी सब्जि सब्जियां-Vegetables सब्जी संभालू संभोग समर्पण-Dedication सरकार को सुझाव सरफोंका सरहटी सर्दी सर्दी जुकाम-Cold सर्पक्षी सर्पविष सलाद संवेदना सहदेई सहदेवी साइटिका साइटिका-Sciatica साइड इफेक्ट्स साबूदाना-Sago सायटिका सिजेरियन सिर दर्द सिर वेदना सिरका सिरदर्द सिरोसिस सीजर डिलेवरी सुगर सुदर्शन सुहागा सूखा रोग सूजन सेक्स सेक्स परामर्श-Sex Counseling सेक्स पावर सेक्स समस्या सेक्स हार्मोन सेक्‍स-Sex सेंधा नमक सेब सेमल-Bombax Ceiba सेल्स सोजन-सूजन सोंठ सोना पाठा सोयाबीन सोयाबीन (Soyabean) सोयाबीन-Soyabean सोराइसिस सोरियासिस-Psoriasis सौंठ सौंदर्य सौंदर्य-Beauty सौन्दर्य सौंफ सौंफ की चाय सौंफ-Fennel स्किन स्तन स्तन वृद्धि स्तनपान स्तम्भन स्त्री स्त्रीत्व स्त्रैण स्वप्न दोष स्वप्नदोष स्वप्नदोष-Night Fall स्वभाव स्वभावगत स्वरभंग स्वर्णक्षीरी स्वस्थ स्वास्थ्य स्वास्थ्य रक्षक सखा हजारदानी हड़जोड़ हड्डी हड्डी में दर्द हड्डीतोड़ ज्वर हड्डीतोड़ बुखार हरड़ हरसिंगार हरी दूब-CREEPING CYNODAN हरीतकी हर्टबर्न हस्तमैथुन हस्तमैथुन-Masturbation हारसिंगार हालात हिचकी हिचकी-Hiccup हिमोग्लोबिन-hemoglobin हिस्टीरिया हिस्टीरिया-Hysteria हींग 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