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सभी लेखों में लिखी गयी दवाईयों का विवरण जनहित में स्वास्थ्य और बीमारियों के बारे में जागरूकता के लिए लिखा गया है। पाठक कृपया स्वयं अपना इलाज करने का खतरा मोल नहीं लें।

कृपया अपने चिकित्सक के परामर्श के बिना, सुझाई गयी (किसी भी प्रकार की) दवा का सेवन नहीं करें।

Please Do not take any (kind of) suggested medicine, without consulting your doctor.

हमारे 95 फीसदी रोगियों को व्यक्तिगत रूप से हम से आकर मिलने की जरूरत नहीं पड़ती। यद्यपि रोगियों की संख्या अधिक होने के कारण, आपको इन्तजार करना पड़ सकता है। कृपया धैर्यपूर्वक सहयोग करें। (Due to the high number of patients, you may have to wait. Please patiently collaborate.)

डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' आॅन लाईन होम्योपैथ एवं परम्परागत चिकित्सक, 9875066111

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संतरा-Orange

परिचय : भारत में नागपुर व झालावाड़ में बड़े पैमाने पर संतरे की खेती होती है। संतरा ठंडा, शक्तिवर्द्धक, अम्ल, मीठा, स्वादिष्ट, खट्टा-मीठा, मूत्रल (पेशाब का बार-बार), क्षुधावर्द्धक (भूख का बढ़ना) है। गर्मी में इसकी खपत सबसे ज्यादा होती है। संतरा लोकप्रिय फल है। संतरे के अंदर विटामिन `ए´, `बी´ और `सी´ तथा कैल्शियम से भरा होता है। यह पाचन में अत्यंत लाभकारी होता हैं। संतरा खून को साफ करता है। संतरे के रस या इससे बनाया गया मार्मेलेड ज्यादा पौष्टिक है। संतरा तन और मन को प्रसन्नता देने वाला फल है। व्रत
और सभी रोगों में संतरा खाया जा सकता है। जिस व्यक्ति की पाचन-शक्ति (भोजन पचाने की क्रिया) खराब हो उनको संतरे का रस 3 गुने पानी में मिलाकर देना चाहिए। संतरा सुबह खाली पेट या खाना खाने के 5 घंटे बाद सेवन करने से सबसे ज्यादा लाभ करता है। एक व्यक्ति को एक बार में 1 या 2 संतरे का सेवन ही उपयुक्त है। संतरे में विटामिन `सी´ भरपूर मात्रा में पाया जाता है। एक व्यक्ति को जितने विटामिन `सी´ की आवश्यकता होती है वह एक संतरा रोजाना खाने से पूरी हो जाती है।



गुण :
  1. संतरे में विटामिन `सी´ व `डी´ का अद्भुत मिश्रण होता है। यह पेड़ पर ही धूप एवं हवा के संयोग से पक जाता है। संतरा रोग निरोधक शक्ति को बढ़ाता है। इसमें ग्लूकोज व डेक्सटोल 2 ऐसे तत्त्व होते हैं, जो जीवनदायिनी शक्ति से परिपूर्ण होते हैं। इसलिए संतरा न केवल रोगी के शरीर में ताजगी लाता है बल्कि अनेक रोगों के लिए लाभदायक भी होता है।
  2. संतरे के रस में घुलनशील ग्लूकोज, फ्रुक्टोज, सूक्रोज कार्बनिक एसिड भरपूर मात्रा में होते हैं। इसमें विटामिन `सी´, विटामिन `बी´ कॉम्लेक्स, विटामिन `ए´, खनिज तत्त्व, कुछ मात्रा में पौष्टिक पदार्थ एवं अन्य पोषक तत्त्व होने के कारण इसकी गणना पौष्टिक भोजन के रूप में की जाती है। बुखार के रोगी को संतरे का रस देने से शांति और ताकत मिलती है। मुंह सूखने व प्यास लगने की शिकायत दूर होती है। शरीर में खुश्की नहीं बढ़ पाती है। इसके रस को दिन में बार-बार भी पी सकते हैं।
  3. खून साफ करने के लिए व्रत में इसके रसाहार पर अनेक प्रयोग किए गए हैं। इसे शरीर शोधक व लगातार भोजन में जगह देने योग्य बताया गया है।
  4. संतरे में 23 स्वास्थ्यवर्द्धक गुण पाये जाते हैं। यूरोपवासी इसे बहुत उपयोगी मानकर इसे गोल्डन एप्पल के नाम से संबोधित करते हैं।
  5. गर्भवती औरतों को चाहिए कि वे गर्भावस्था के समय रोजाना 1 गिलास संतरे का रस पियें इससे संतान गोरे रंग की उत्पन्न होती है। इसके साथ ही यह गर्भवती की उल्टी को रोकने में सहायता करता है।
  6. रोगी के लिए संतरे का रस पानी, दवा और आहार का काम करता है। यह पेट की बढ़ती गर्मी को रोकता है और मुंह के स्वाद को सुधारता है।
संतरे में पाये जाने वाले तत्व-
तत्वमात्रा
प्रोटीन0.9 प्रतिशत
वसा0.3 प्रतिशत
कार्बोहाइड्रेट10.6 प्रतिशत
सल्फरलगभग 1 ग्राम का चौथा भाग /100 ग्राम
तांबालगभग 1 ग्राम का चौथा भाग /100 ग्राम
लौहलगभग 1 ग्राम का चौथा भाग /100 ग्राम
पोटैशियमलगभग 1 ग्राम का चौथा भाग /100 ग्राम
मैग्नेशियमलगभग 1 ग्राम का चौथा भाग /100 ग्राम
सोडियमलगभग 1 ग्राम का चौथा भाग /100 ग्राम
क्लोरीनलगभग 1 ग्राम का चौथा भाग /100 ग्राम
विटामिन-`ए´लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग /100 ग्राम
विटामिन-`बी´लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग /100 ग्राम
विटामिन-`सी´लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग /100 ग्राम
पानी87.8 प्रतिशत
कैल्शियम0.05 प्रतिशत
फॉस्फोरस0.02 प्रतिशत

औषधीय उपयोग :

चेचक के दाग : संतरे के छिलकों को सुखा कर पीस लें। 4 चम्मच गुलाबजल को मिलाकर लेप बनाकर रोजाना चेहरे पर मलने से चेचक के दाग हल्के हो जाते है।


लम्बी उम्र के लिये : 1 गिलास संतरे का रस रोजाना पीने से मनुष्य की उम्र लम्बी होती हैं।


खून की कमी : संतरे का रस रोजाना सेवन करने से खून की कमी, पायरिया, आंखों की जलन, त्वचा के रोग, हाथ-पैर की जलन आदि रोगों में बहुत लाभ मिलता है।


अपच : अपच के रोगियों को चाहिए कि वह संतरे के रस को गर्म करके उसमें काला नमक ओर सोंठ का चूर्ण पीसकर मिला लें। आमाशय के रोग में यह पेय रामबाण का काम करता है।


मधुमेह : 
  1. मधुमेह के रोगियों को संतरा दिया जा सकता है। मानसिक तनाव, हाईब्लडप्रेशर, गर्मी के रोग, अजीर्ण (भूख न लगना), कोष्ठबद्धता (कब्ज) आदि में इसका रस बहुत उपयोगी एवं प्रभावी है।
  2. संतरे के छिलकों को छाया में सुखाकर पीस लें। फिर इस 4 चम्मच चूर्ण को 1 गिलास पानी में उबालकर छान लें और रोजाना पीयें। इससे मधुमेह (डायबिटीज) रोग में लाभ मिलता है।
बच्चों के रोग : छोटे बच्चों को संतरे का रस पिलाने से उनका शरीर मजबूत और खून साफ होता है। हडि्डयां मजबूत होती हैं तथा त्वचा निरोग रहती है। पूरे मौसम में यदि संतरे का रस पिलाया जाए तो बच्चे का शारीरिक विकास अच्छा होता है।


पायरिया : 
  1. संतरे के रस को गाय के दूध के साथ सेवन करने से पायरिया रोग, पाचनशक्ति कमजोर होना, कमजोरी, नींद न आना, पुरानी खांसी, आंखों के रोग, उल्टी, पथरी, जिगर के रोगों में बहुत ही लाभ होता है। संतरे में दिल के रोग, वात विकार और पेट के रोगों को दूर करने की अदभुत क्षमता है।
  2. रोजाना संतरा खाने से पायरिया रोग में लाभ होता है। संतरे के छिलकों को छाया में सुखाकर पीस लें और उससे रोज मंजन करें। इससे दान्तों का पायरिया रोग दूर हो जाता है और दांत भी मजबूत होते हैं।

कब्ज :
  1. जिन व्यक्तियों को कब्ज की शिकायत रहती है उन्हें चाहिए कि कुछ दिनों तक संतरे का रस रोजाना पियें।
  2. रोजाना खाना खाने के बाद और सोने से पहले संतरा खाने से पेट में कब्ज नहीं बनती है।
  3. सुबह नाश्ते में संतरे का रस कुछ दिन तक पीते रहने से मल प्राकृतिक रूप से आने लगता है। यह पाचनशक्ति (भोजन पचाने की क्रिया) को बढ़ाता है।

इनफ्लूएन्जा : संसार के कुछ हिस्सों में विश्वास है कि इन्फ्लूएन्जा हो रहा हो या महामारी के रूप में फैल रहा हो तो संतरे का सेवन करने से बचा जा सकता है। फ्लू होने पर भी संतरा लाभदायक है। इन्फ्लूएंजा होने पर केवल संतरे का ही सेवन करें और गर्म पानी ही पीना चाहिए।


गुर्दे के रोग : सुबह नाश्ते से पहले 1-2 संतरे खाकर ऊपर से गर्म पानी पीने से या संतरे का रस पीने से गुर्दे के रोग अच्छे हो जाते हैं। संतरा गुर्दे को स्वस्थ रखने में लाभदायक है। सेब और अंगूर भी एक जैसा ही लाभ पहुंचाते हैं। गुर्दे को स्वस्थ रखने के लिए सुबह खाली पेट फलों का रस लाभदायक होता है।


सर्दी-खांसी : सर्दी या खांसी होने पर गर्मी में ठंडे पानी के साथ और सर्दी में गर्म पानी के साथ संतरे का रस पीने से लाभ होता हैं।


जुकाम :
  1. खांसी या जुकाम होने पर 1 गिलास संतरे का रस पीने से लाभ होता है। स्वाद के लिए इसमें नमक या मिश्री मिलाकर पी सकते हैं।
  2. जुकाम होने पर सर्दी में गर्म पानी के साथ और गर्मी में ठंडे पानी के साथ संतरे का रस पीने से आराम आता है। 1 संतरे के छोटे-छोटे टुकड़े करके 1 गिलास पानी में डालकर उबाल लें। उबलने पर जब पानी आधा बाकी रह जाये तो इसे छानकर सुबहशाम पीने से जुकाम में आराम आता है।
  3. संतरे के छिलको का काढ़ा बनाकर पीने से जुकाम दूर हो जाता है।
बच्चों का सर्दी से बचाव : बच्चों को रोजाना मीठे संतरे का रस पिलाते रहने से सर्दी के मौसम में कोई बीमारी नहीं होती। दूध पीते बच्चों के लिए यह लाभदायक है। इससे शरीर में ताकत भी बढ़ती है।


बच्चों का पौष्टिक भोजन : बच्चे को जितना दूध पिलायें उसमें उस दूध का 1 भाग मीठे संतरे का रस मिला कर पिलायें। यह बच्चों का पौष्टिक पेय है। इससे शरीर का वजन भी बढ़ता हैं।


गर्भवती का भोजन : गर्भवती महिला को पूरे गर्भ के समय में रोजाना 2 संतरे खिलाते रहने से होने वाला बच्चा सुन्दर होता है।


शिशु शक्तिवर्धक : बच्चों को संतरे का रस पिलाने से बच्चें कुछ ही दिनों में मोटे-ताजे हो जाते हैं तथा उनका पोषण तेजी से होता है। हडि्डयों की कमजोरी और टेढ़ापन दूर होकर हडि्डयां मजबूत हो जाती हैं। बच्चे जल्दी चलने लगते हैं। डिब्बे या गाय का दूध पीने वाले बच्चों को संतरे का रस रोजाना पिलाना जरूरी हैं। इसके रस को पीने से सूखा रोग (रिकेट्स) ग्रस्त बच्चे मोटे-ताजे हो जाते हैं। इसका रस आंतों की गति को तेज करता है।


शराब छुडाना : सुबह नाश्ते से पहले संतरे के रस का सेवन करने से शराब पीना की इच्छा कम होती है।


आंत्रज्वर (टायफाइड) : संतरा गर्मी, बुखार और अशांति को दूर करता है। रोगी को दूध में संतरे का रस मिलाकर पिलायें या दूध पिलाकर संतरा खिलायें। दिन में कई बार संतरे का सेवन कराना चाहिए। इससे गर्मी कम होती है और मल-मूत्र (टट्टी और पेशाब) खुल कर आता है।


शक्तिवर्धक : कमजोर व्यक्ति रोजाना 1 गिलास संतरे का रस सुबह, दोपहर कुछ सप्ताह तक पीते रहें तो उनके शरीर में ताकत आ जाती है जो बच्चे बोतल से दूध पीते हैं, कमजोर होते है, उनके लिए संतरे का रस बहुत लाभदायक होता है।

मुंहासे : संतरे के सूखे छिलकों को पीसकर चेहरे पर मलने से चेहरे के मुंहासे दूर हो जाते हैं।

शक्तिवर्धक स्नायुविक : संतरा स्नायु-मण्डल को उद्वीप्त करता है, जिससे कब्ज दूर होती है। स्नानु रोगों (सांस सबंधित बीमारियों) से पीड़ित एवं स्नानु तनाव ग्रस्त रोगियों के लिए संतरा लाभदायक है।


परिणामशूल : पेट में जख्म, फोड़े, नासूर आदि हो तो रोजाना संतरे का सेवन लाभदायक होता है।

पीलिया : रोजाना संतरे का सेवन करने से पीलिया रोग में बहुत आराम मिलता है।


जख्म : संतरे का सेवन करने से जख्म जल्दी भर जाता है।

अरुचि : संतरे की कलियों पर पिसी हुई सौंठ तथा कालानमक डालकर सेवन करने से 1 सप्ताह में ही भूख खुलकर लगने लगती है। सुबह खाली पेट 2 संतरे रोजाना खाने से भूख अच्छी लगती है। इससे पेट की गड़बड़ी भी ठीक हो जाती है।

मलेरिया : 2 संतरे के छिलकों को 2 कप पानी में उबालें। उबलते हुए आधा पानी रहने पर छानकर गर्म-गर्म ही पीने से मलेरिया का रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।


छाती के रोग : हृदय (दिल), टी.बी., सांस और छाती के हर रोगों में संतरे का सेवन बहुत ही लाभदायक होता है।


बच्चों के दस्तों में : संतरे का रस दूध में मिलाकर बच्चों को पिलाने से बच्चों के दस्त बंद हो जाते हैं।


उल्टी और जी मिचलाने पर : जी मिचलाने और उल्टी होने पर संतरे का सेवन करने से लाभ होता है। लम्बी यात्रा करने पर गाड़ी आदि में जी मिचलाने या उल्टी आने पर संतरा खाना या उसका रस पीना बहुत ही फायदेमंद होता है।


मच्छर-मक्खी : संतरे के सूखे छिलकों को जलते हुए कोयलों पर डाल दें। इसका धुआं चमकदार और खुशबूदार होता है जिससे मक्खी-मच्छर भाग जाते हैं। घर में जहां कहीं खटमल हों, वहां संतरे के छिलके रखने से वहां नही रहेंगे।


दमे या श्वास का रोग : संतरे के रस में शहद को मिलाकर पीने से हृदय रोगियों को आराम मिलता है। टी.बी., दमा, जुकाम, श्वास (सांस) के रोग और बलगम होने पर संतरे के रस को चुटकी भर नमक और 1 चम्मच शहद के साथ पीना स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभकारी होता है।


बुखार के लिए : संतरे को रोजाना खाने से बुखार और प्यास शांत होती है और यह भोजन करने की रूचि को भी बढ़ाता है।


दांत निकलना : संतरे के रस को गर्म करके 2 चम्मच रस बच्चों को रोजाना 2 से 3 बार पिलाने से बच्चे के दांत आसानी से निकल आते हैं।


वमन (उल्टी) : 
  1. अगर ऐसा लगने लगे कि उल्टी आने वाली है तो संतरा या संतरे को खाने से या उनका रस पीने से लाभ होता है। बस में सफर करते समय उल्टी रोकने के लियें संतरा खाने से लाभ होता है।
  2. संतरे के सूखे छिलकों को पीसकर उसके अन्दर संतरे से दो गुना ज्यादा शक्कर मिलाकर खाने से उल्टी होना बंद हो जाती है। 2 ग्राम संतरा के शुष्क (सूखे) छिलकों के चूर्ण में शहद मिलाकर चाटने से उल्टी आना बहुत जल्दी बंद हो जाती है।

गैस :
  1. संतरे का सेवन से जिगर के रोग ठीक होते हैं। गैस या किसी भी कारण से जिनका पेट फूलता हो, भारी रहता है, अपच (भोजन ना पचना) हो, उनके लिए यह लाभकारी है। रोजाना सुबह 1 गिलास संतरे का रस पी लिया जाये तो आंते साफ हो जाती हैं जिससे रोगी को कब्ज नहीं रहता है।
  2. 1 गिलास संतरे का रस रोजाना सुबह पीने से आंते साफ हो जाती हैं और पेट में गैस नहीं रहती है तथा जिगर भी ठीक तरह से काम करने लगता है।

मुंह का सौन्दर्य : संतरे का रस निकालकर चेहरे पर मलने से चेहरे की चमक व सौन्दर्य बढ़ता है।


बेरी-बेरी रोग :
  1. संतरे का रस निकालकर पीने से बेरी-बेरी रोग ठीक हो जाता है। 
  2. संतरे का रस जोड़ों के दर्द और सूजन में लाभकारी होता है। यह दिल, सिर और जिगर को ताकत और स्फूर्ति देता है।

दस्त के होने पर : संतरे के रस को मां या बकरी के दूध के साथ बच्चों को पिलाने से दस्त की परेशानी से छुटकारा मिल जाता है।


गर्भवती स्त्री का अतिसार (दस्त) : मीठे संतरे का शर्बत पीने से गर्भवती स्त्री का अतिसार (दस्त) रुक जाते हैं।

बवासीर (अर्श) : संतरे के छिलकों को छाया में सुखाकर बारीक पीस लें और इसमें देशी घी बराबर मात्रा में मिलायें। यह चूर्ण 1-1 चम्मच रोजाना 3 बार गुनगुने पानी में मिलाकर पीने से बवासीर में आराम मिलता है।


अल्सर की बीमारी में : भोजन करने के बाद 2 चम्मच संतरे का रस रोजाना पीने से अल्सर (पेट में जख्म) ठीक हो जाता है।


अम्लपित्त : संतरे के 100 ग्राम रस में थोड़ा-सा भुना पिसा हुआ जीरा मिलाकर पीने से अम्लपित्त (एसीडिटी) नष्ट हो जाती है।


पित्त ज्वर : संतरे का गुदा निकालकर उस पर चीनी डालकर थोड़ा सा गर्म कर लें। इसे खाने से बुखार और खांसी दोनों ठीक हो जाती है।


लू का लगना : संतरे, मौसमी और अनार के रस को ठंडा करके रोगी को पिलाने से लू के रोगी को बहुत लाभ मिलता है।


गर्मी अधिक लगना : 20 से 40 ग्राम संतरे के रस को पानी में सही मात्रा में मिलाकर पीने से शरीर में कम गर्मी लगती हैं। इसके अलावा इससे सिर का दर्द भी बंद हो जाता है।


पक्वाशय का जख्म होने पर : संतरे का प्रयोग करने से पेट में घाव, जख्म और नासूर मे बहुत आराम मिलता है।

पेट के कीड़ों के लिए : रोजाना सुबह संतरे का रस पीने से पेट के कीड़े समाप्त हो जाते हैं।


पेट में दर्द के लिए : 
  1. 4 चम्मच संतरे के रस में थोड़ी-सी मात्रा में हींग को घोलकर पीने से पेट का दर्द दूर हो जाता है।
  2. 20 ग्राम संतरे के रस में थोड़ी-सी भुनी हुई हींग और काला नमक मिलाकर पीने से पेट का दर्द समाप्त हो जाता हैं।
  3. संतरे की फांक के छिलके को प्रयोग करने से पेट का दर्द, मन्दाग्नि (भूख कम लगना) और कमजोरी में लाभ होता हैं।

गठिया रोग : रोजाना संतरे का सेवन करने से गठिया (घुटनो का दर्द) रोग में बहुत लाभ होता है।


चेहरे की झाईयां : 
  1. 10-10 ग्राम संतरे का सूखा छिलका, अंडे का छिलका, कतीरा, जौ, चना, मसूर, निसास्ता गंदन, बादाम की गिरी, खरबूजे की गिरी को पीसकर और छानकर 2 चम्मच दूध या पानी में मिलाकर सोते समय चेहरे पर लगाएं। सुबह हल्के गर्म पानी से चेहरे को धोकर बादाम रोगन या चमेली का तेल लगाने से चेहरे की झाईयां दूर हो जाती हैं।
  2. संतरा के छिलके को सुखाकर पीस लें। फिर इसमें पानी मिलाकर चेहरे पर लेप करने से त्वचा मुलायम और सुन्दर होती है।
  3. संतरे के छिलकों को सुखाकर पीस लें। इसमें नारियल का तेल और थोड़ा सा गुलाब जल मिलाकर चेहरे पर लगाने से चेहरे की त्वचा बिल्कुल कोमल बनी रहती है।
  4. संतरे के छिलके और नींबू के छिलके को बारीक पीसकर दूध में मिलाकर चेहरे पर लगाने से चेहरे पर निखार आता है।
खाज-खुजली : संतरे के छिलकों को चटनी के जैसे पीसकर उससे शरीर में जहां पर खजुली हो उस जगह पर लगाने से आराम आता है।


हाथ-पैरों की ऐंठन : हाथ-पैरों में ऐंठन होने पर 25 से 50 ग्राम संतरे के फलों का रस निकाल कर पीने से दर्द में आराम मिलाता है।


त्वचा के रोगों के लिए : संतरे का रस रोजाना पीने से खून साफ हो जाता है और त्वचा के रोग समाप्त हो जाते हैं।


निम्न रक्तचाप (लो ब्लडप्रेशर) : संतरे या संतरे के रस में हल्का-सा नमक डालकर पीने से निम्न रक्तचाप (लो ब्लड प्रेशर) सामान्य हो जाता है।

चेचक (बड़ी माता) के लिए : संतरों के छिलके को पीसकर चेचक के दानों पर लगाने से लाभ होता है।


दाद के लिए : संतरे की पोटली बनाकर दाद पर बांधने से दाद ठीक हो जाता है।


घमौरियों के होने पर : संतरे के छिलकों को सुखाकर पाउडर बना लें। इस पाउडर को गुलाबजल में मिलाकर शरीर पर लेप करने से शरीर की घमौरियां ठीक हो जाती हैं।


त्वचा का कोमल और मुलायम होना : संतरे के छिलकों को छाया में सुखाकर पीस लें तथा दूध में मिलाकर घोल बना लें और शरीर में लेप कर लें। शरीर में जहां पर भी इसका लेप होगा वहां की त्वचा कोमल और मुलायम हो जायेगी।


सौंदर्य प्रसाधन : 20 से 40 ग्राम संतरे का शर्बत जरूरत के मुताबिक पानी में मिलाकर पीने से भूख न लगना, भोजन न पचना, और जलन को तो ठीक करता ही है साथ ही त्वचा के रंग को निखार कर खूबसूरती को भी बढ़ाता है।


बच्चों का सही पालन पोषण : 4 महीने के बच्चे को रोजाना दोपहर में एक पूरे संतरे का रस निकालकर और छानकर पिलाना चाहिए। अगर जरूरत पडे़ तो 4 सप्ताह के बच्चे को संतरे का रस और पानी बराबर मात्रा में मिलाकर 2 चम्मच दिया जा सकता है। धीरे-धीरे पानी की मात्रा कम कर दी जाये और रस की मात्रा बढ़ा दी जाये। यह रस पिलाने से बच्चा सेहतमंद होता है और उसका रंग भी साफ हो जाता है।
स्त्रोत : जे के हेल्थ वर्ल्ड

पाचन सुधारे संतरा

संतरा सर्दियों के मौसम का मशहूर फल है। संतरे में विटामिन ए-बी-सी के अलावा फास्फोरस, कैल्शियम, प्रोटीन और ग्लूकोज भी पाया जाता है। संतरा खाने के अलावा कई तरह के मर्ज में भी लाभदायक होता है। बीमारी के बाद की कमजोरी में संतरे का रस बहुत फायदेमंद होता है। इसके इस्तेमाल से दिल और दिमाग को राहत मिलती है। भूख लगने लगती है और खाना भी जल्द हजम होता है। कब्ज होने पर इसका रस पीने से कब्ज दूर होती है। बुखार में भी इसका रस बहुत लाभ करता है। छोटे बच्चे जो दूध पीते हैं, उनको संतरे का रस देने से बच्चों को कब्ज नहीं होता। लगातार सेवन से बच्चे ताकतवर बनते हैं। गर्भवती महिलाओं को इसका रस दने से बच्चा तंदुरूस्त व खूबसूरत होता है। संतरे का रस पीने से सेहत अच्छी रहती है। संतरे का रस पीने से दांत कई बीमारियों से सुरक्षित रहते हैं। संतरे के रस में काली मिर्च का चूर्ण मिलकर पीने से नजर तेज होती है। पेट की बीमारी में इसका रस बहुत फायदेमंद होता है। कमजोर पाचन शक्ति वालों को इसका रस अधिक सेवन करना चाहिए। स्त्रोत : पत्रिका 

झुर्रियों से बचाये संतरा


शोधकर्ता बताते हैं कि यदि आप प्रतिदिन एक संतरे का सेवन करती हैं, तो इससे झुर्रियां रोकने में मदद मिल सकती है।

संतरे में मौजूद विटमिन सी से त्वचा देर से बूढ़ी होती है। यह शोध ब्रिटिश शोधकर्ताओं ने की। उन्होंने 40 से 74 वर्ष आयु वर्ग की चार हजार से अधिक स्ति्रयों पर शोध किया।

शोध में देखा गया कि विटमिन सी से युक्त खाद्य पदार्थ खाने वाली स्ति्रयों में झुर्रियां कम देखी गई। विटमिन सी एक ऐसा एंटीऑक्सीडेंट है जो कोलाजेन के सिंथेसिस में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

दरअसल कोलाजेन नामक प्रोटीन त्वचा को लचीला बनाए रखने में मदद करता है। कोलाजेन हड्डियों, कार्टिलेज, मसल और रक्तवाहिनियों का ढांचा भी तैयार करने में सहयोग देता है।
 स्त्रोत : ओनली मई हेल्थ 

हृदयाघात के खतरे को कम करता है संतरा

अंतिम बार अपडेट: Saturday, February 25, 2012,08:12

लंदन : वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर आप हृदयाघात के जोखिम को कम करना चाहते हैं तो संतरे और कीनू खाएं। विज्ञान पत्रिका स्ट्रोक में प्रकाशित खबर के मुताबिक, ईस्ट एंग्लिया विश्वविद्यालय के नॉर्विक मेडिकल स्कूल के अनुसंधानकर्ताओं ने अपने शोध में पाया कि अपने प्रदाहनाशी प्रवृति के कारण संतरे और कीनू मस्तिष्क आघात के जोखिम को कम कर सकते हैं। अपने अनुसंधान के लिए अनुसंधानकर्ताओं ने 68,622 महिलाओं पर अध्ययन किया है।

डेली मेल में प्रकाशित खबर के मुताबिक, जिन महिलाओं ने खट्टापन लिए हुए स्वाद वाले फल का सेवन ज्यादा किया उनमें ‘मस्तिष्क आघात’ का जोखिम सामान्य महिलाओं की तुलना में 19 प्रतिशत कम था।(एजेंसी) स्त्रोत : जी न्यूज इंडिया

संतरा सेहत का मन्त्र

संतरा मानव के लिए पौष्टिक फल है | संतरा जिसे नारंगी भी कहते है ,गुणों में एकदम संत सामान है | ये फल विटामिनो से भरपूर है , इसमें विटामिन 'सी', 'ए', 'बी' के अलावा फोस्फोरस, कैल्सियम, प्रोटीन और ग्लूकोज भी पाया जाता है | लोहा और पोटाशियम भी इसमें काफी मात्रा में होता है | इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है की इसमें विद्यमान फ्रुक्टोज, डेक्सट्रोज, खनिज एवं विटामिन शरीर में पहुँचते ही उर्जा देना प्रारंभ कर देते है | यदि पुरे मौसम में एक या दो संतेरे सुबह -सुबह खली पेट खाएं तो कई रोगों से बचा सा सकता है | 
संतेरे में मौजूद विटामिन सी जहाँ शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है , वहीँ कैल्सियम और खनिज लवण दांतों व हड्डियों को मजबूत बनाते है | यह अनेक रोगों के लिए रामबाण दवा है, संतरा केवल स्वास्थ्यवर्धक ही नहीं, खूबसूरती को संवारने वाला फल भी है | 

संतरा ठंडा, तन और मन को चुस्ती-फुर्ती प्रदान करता है | जिनकी पाचन शक्ति ख़राब है उनको नारंगी का रस तिन गुने पानी में मिलाकर सेवन करना चाहिए | इसके सेवन से भूख खुलकर लगती है , खाना जल्दी हजम होता है | कब्ज़ होने पर इसका रस पिने से कब्ज़ की समस्या से निजात मिलती है | पेट में दर्द होने से संतेरे के रस में थोड़ी सी भुनी हुई हींग मिलाकर देने से लाभ मिलता है , उलटी होने या जी मिचलाने पर संतेरे के रस में शहद मिलाकर सेवन करें | पेचिस की शिकायत होने पर संतेरे के रस में बकरी का दूध मिलाकर लेने से फायदा होता है | संतेरे का नियमित सेवन करने से बवासीर में लाभ होता है | 

बच्चों के लिए तो संतेरे अमृततुल्य है गर्भवती महिलाओं को इसका रस देने से बच्चा तंदुरुस्त होता है | बच्चों को स्वस्थ्य व हष्ट-पुष्ट बनाने के लिए दूध में चौथाई भाग मीठे संतेरे का रस मिलाकर पिलाने से यह टॉनिक का कम करता है | बच्चों को बुखार या खांसी होने पर एक गिलास गर्म पानी में एक चम्मच संतेरे के छिलकों का पाउडर और नमक या चीनी मिलाकर देने से बुखार में राहत मिलती है | यह किडनी ,दिल और त्वचा के लिए भी फायदेमंद है | दिल के मरीज को संतेरे का रस में शहद मिलाकर देने से आश्चर्यनक लाभ मिलता है | इसका एक गिलास रस तन-मन को शीतलता प्रदान कर थकान व तनाव दूर कर मस्तिष्क को नई शक्ति व ताजगी से भर देता है | 

संतेरे के सूखे छिलकों का महीन चूर्ण गुलाब जल या कच्चे दूध में मिलाकर पीसकर लेप लगाने से कुछ ही दिनों में चेहरा साफ,सुनार और कांतिवान हो जाता है | किल-मुंहासे से छुटकारा मिलता है और झाइयाँ व संवालापन दूर होता है | 

संतेरे का छिलका को मत फेंके ,इन छिलकों और रेशों में भी विटामिन और कैल्सियम होता है संतेरे की फांक धीरे-धीरे चूसिये और केवल बीज थूकते जाइए | इनका पतला आवरण और रेशे में जो पल्प है वह आँतों में चिपके मल की सफाई करता है | 


संत जैसा संतरा

सुरेश ताम्रकार द्वारा 24 मार्च, 2009 9:00:00 AM IST पर पोस्टेड

संतरा जिसे कुछ लोग नारंगी कहते हैं और अंगरेजी में आरेंज। यह गुणों में एकदम संत समान है। विटामिन सी से भरपूर है। गर्मी के दिनों में तरावट पहुँचाता है। कुदरत कितनी मेहरबान है हम पर। गर्मी देती है तो गर्मी से रक्षा के लिए संतरे, अंगूर, तरबूज, फालसा, शहतूत जैसे मीठे, मधुर व तरावटी फल भी देती है। लेकिन हम कितने नादान हैं, कुदरत की इस अनूठी देने की उपेक्षा कर मनुष्य द्वारा फितरत से बनी कृत्रिम चीजें कचोरी, समोसा, आलूबड़ा और दूध के सब तत्व खोने के बाद बने खोया की मिठाइयों पर मोहित हैं। अगर कोई इस मौसम भर, रोज एक या दो संतरे सुबह-सुबह खाली पेट खाए तो वह कई रोगों से बच सकता है। 

कुछ लोग संतरे का झीना छिलका फेंक देते हैं। ऐसा कर वे अपना नुक्सान करते हैं, इन छिलकों और रेशों में भी विटामिन और केल्शियम होता है। संतरे की फाँक मुँह में दबा कर धीरे-धीरे चूसिए और केवल बीज थूकते जाइए। इनका पतला आवरण और रेशे में जो पल्प है वह आपकी आँतों में चिपके मल की सफाई करता है। संतरे के उपर के हरे-पीले छिलकों को भी मत फेंकिए। इन्हें धूप में सुखा कर और कूट कर उबटन बनाइए। इस उबटन से नहाने पर त्वचा की रंगत निखरती है और त्वचा चिकनी और मुलायम हो जाती है। कहिए है न संतरा संत समान? संत किसी का बुरा नहीं चाहता संतरा भी नहीं चाहता। इसे नारंगी मत कहिए वरना कबीरदासजी रो देंगे। उनका दोहा आपने भी पढ़ा ही होगा रंगी को नारंगी कहे देख कबीरा रोया।

मस्तिष्क आघात से बचाता है संतरा

Published by: Isha Dwivedi 
Published: Sat, 25 Feb 2012 at 16:54 IST 

संतरे और कीनू के सेवन से आप ब्रेन हैमरेज यानि मस्तिष्क आघात के खतरे को कम कर सकते हैं। वैज्ञानिकों ने अपने शोध में बताया कि अगर आप आघात के जोखिम को कम करना चाहते हैं तो संतरे और कीनू खाएं।

विज्ञान पत्रिका में प्रकाशित खबर के मुताबिक, ईस्ट एंग्लिया विश्वविद्यालय के नॉर्विक मेडिकल स्कूल के अनुसंधानकर्ताओं ने अपने शोध में बताया कि संतरे और कीनू मस्तिष्क आघात के जोखिम को कम कर सकते हैं। अपने अनुसंधान के लिए अनुसंधानकर्ताओं ने 68,622 महिलाओं पर अध्ययन किया है।
स्त्रोत : आज की खबर 

रोग प्रतिरोधक क्षमता ब़ढाता है संतरा

संतरा खट्टा हो अथवा मीठा, यह हर किसी का पसंदीदा फल है और सर्दी के मौसम में तो बाजार में संतरों की बहार ही आ जाती है। यह खट्टामीठा फल इत्तर भारत में बहुतायत में पाया जाता है। इसके सेवन से शरीर को स्फूर्ति, पौष्टिकता तथा बल मिलता है। संतरे में विटामिन ए बी व सी पाया जाता है। विटामिनसी की तो इसमें प्रचुर मात्रा होती है।

संतरे के रस में आयरन तथा कैल्शियम की भी प्रचुर मात्रा है। संतरे के रस का सेवन करने से रक्त शुद्धि होती है तथा यह रक्त कणिकाआें को लाल सुर्ख रंग प्रदान करने में अहम भूमिका निभाता है। संतरे के नियमित सेवन से शरीर की रोग प्रतिरोध क्षमता भी विकसित होती है। त्वचा कोमल, मुलायम व कांतिमय बनती है, ज़ोडों के दर्द में लाभ मिलता है, कब्ज की शिकायत दूर होती है, पाचन शक्ति ब़ढती है, उच्च रक्तचाप कम होता हेै, बुखार से पी़डतों के लिए तो संतरा बहुत गुणकारी है। * सुबहशाम संतरे का रस पीने से शरीर में पौष्टि तत्वों की पूर्ति होती है और कमजोरी दूर होती है।* संतरा खाने या संतरे का जूस नियमित पीने से शारीरिक शक्ति ब़ढने के साथसाथ शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी विकसित होती है।* संतरा भोजन के प्रति अरुचि, मंदाग्नि तथा दाह को मिटाता है और पाचन शक्ति तथा भूख ब़ढाता है।* प्रतिदिन सुबह या रात को सोते समय एकदो संतरे खाने या जूस पीने से कब्जा दूर होती है।* पेट दर्द, पेट में भारीपन व गैस पी़डतों के लिए तो संतरा बहुत गुणकारी है।* उच्च रक्तचाप में संतरे का रस पीने से रक्तचाप कम होता है।

* प्रतिदिन ३४ संतरे खाने से जठाग्नि तेज होती है और आंतों की भी शुद्धि होती है।* बुखार से पी़डत लोगों को संतरे का रस पिलाने से उन्हें ताकत मिलती है और जल्दी ही बुखार से छुटकारा मिल जाता है।

* सुबहशाम दोनों समय कम से कम एक-एक संतरे के सेवन से सूखी और खुरदरी त्वचा में एक नई जान आती है और त्वचा कोमल, मुलायम, चमकदार व आकर्षक बनती है।* संतरे के रस के सेवन से शरीर में खुजली से भी राहत मिलती है।

* संतरा शरीर में कैल्शियम और विटमिनसी की कमी को दूर करता है और इसकी कमी से होने वाली विभिन्न बीमारियों से बचाने में सहायक होता है।

* छोटे बच्चों के लिए तो संतरा मां के दूध के समान उपयोगी है। जो बच्चे केवल मां के दूध पर ही आश्रित रहते हैं, उन्हें थ़ोडाथ़ोडा संतरे का रस पिलाने से कई रोगों से उनका बचाव होता है और वे हष्ट पुष्टहोते हैं।छिलके के उपयोग* संतरे का छिलका कृमिनाशक, विषम ज्वरनासक और अपरनाशक माना गया है। इसलिए ऐसे रोगों में संतरे का छिलका पीस के खिलाने से रोगी को लाभ मिलता है।* संतरे के छिलकों को पीस कर उसमें गुलाब जल मिलाकर चेहरे पर लगाने से दागधब्बे मिटते हैं।

* संतरे के छिलकों को पानी में पीस कर लेप लगाने से खुजली मिटती है और फ़ोडेफुंसियों पर इसे लगाने से फ़ोडेफुंसियों से भी छुटकारा मिलता है।* संतरे के पिछले को पीस कर इसके पाउडर से बाल मुलायम व चमकदार बनते हैं।* संतरे के छिलके के चूर्ण में थ़ोडासा नींबू का रस व थ़ोडासा दही मिलाकर चेहरे पर लगाने से चेहरे की रंगत निखरती है और त्वचा नर्म, मुलायम व आकर्षक बनती है।

* मुंहासे होने पर संतरों के छिलके पीस कर लेप लगाने से अथवा छिलके रग़डने से कुछ ही दिनों में मुंहासे मिट जाते हैं।-Swatantra Vaartha Sat, 7 Jan 2012, IST 

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--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!

--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!
सभी के स्वस्थ एवं सुदीर्घ जीवन की कामना के साथ-मेरे प्यारे और दुलारे तीन बच्चों की ममतामयी अद्वितीय माँ (मम्मी) जो दुखियों, जरूतमंदों और मूक जानवरों तक पर निश्छल प्यार लुटाने वाली एवं अति सामान्य जीवन जीने की आदी महिला थी! वह पाक कला में निपुण, उदार हृदया मितव्ययी गृहणी थी! मेरी ऐसी स्वर्गीय पत्नी "जानकी मीणा" की कभी न भुलाई जा सकने वाली असंख्य हृदयस्पर्शी यादों को चिरस्थायी बनाये रखते हुए इस ब्लॉग को आज दि. 08.08.12 को फिर से पाठकों के समक्ष समर्पित कर रहा हूँ!-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'

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सही इलाज तरबूज-Watermelon तलाक ताकत तिल तिल्ली तुंबा तुंबी तुलसी तेल त्रिदोषनाशक त्रिफला त्वचा त्वचा रोग थकान थाईरायड थायरायड-Thyroid थायरॉइड दण्डनीय अपराध दन्तकृमि दन्तरोग दमा दर्द दर्दनाक दस्त दही दाग-धब्बे-Stains-Spots दाढ़ दांत दांतो में कैविटी-Teeth Cavity दाद दाम्पत्य दाम्पत्य-Conjugal दाल दालचीनी दालें दिल दुर्गंध दुर्बलता दुष्प्रभाव दूध दूधी दूधी-Milk Hedge दृष्टिदोष द्रोणपुष्पी-Leucas Cephalotes धड़कन धनिया-Coriander धमासा धातु धातु पतन धार्मिक नज़ला नपुंसकता नाक नाखून नागबला नागरमोथा नाडी हिंगु नाड़ी हिंगु (डिकामाली) नामर्दी नारकीय पीड़ा नारियल नाश्ता निमोनिया निम्न रक्तचाप निम्बू नियासिन निराश निरोगधाम निर्गुण्डी निसोरा नींद नींबू नींबू-Lemon नीम-azadirachta indica नुस्खे नुस्खे-Tips नेगड़ नेगड़-निर्गुन्डी-Vitex negundo नेत्र रोग नैतिक नौसादर न्युमोनिया-Pneumonia पक्षघात पढ़ने में मन लगेगा पंतजलि पत्तागोभी-CABBAGE पत्थर फोड़ी पत्थरचट्टा पत्नी पथरी पदार्थ पनीर पपीता पपीता-CARICA PAPPYA पमाड परदेशी लांगड़ी परहेज पराठा परिस्थिति पवाड़ पवाँर पाइल्स पाक-कला पाचक पाचन पाठक संख्या 16 लाख पार पाठक संख्या पंद्रह लाख पायरिया पारिजात पालक पालक-Spinach पित्त पित्ती पिंपल-मुंहासे-Pimples-Acne पिरामिड पीलिया पीलिया-Jaundice पीलिया-कामला-Jaundice पुआड़ पुदीना पुनर्नवा-साटी-सौंटी-Punarnava पुरुष पेचिश पेट के कीड़े पेट दर्द पेट में गैस पेट रोग पेड़ पेशाब में रुकावट पेंसिल थेरेपी-Pencil Therapy पौधे पौरुष पौष्टिक रागी रोटी प्याज-Onion प्यास प्रजनन प्रतिरक्षा प्रतिरक्षा प्रणाली प्रतिरोधक प्रतिरोधक-Resistance प्रदर प्रमेह प्रवाहिका (पेचिश)-Dysentery प्रसव प्रसव सुरक्षा चक्र प्रसूति प्राणायाम प्रेग्नेंसी-Pregnancy प्रेमिका प्रोटीन प्रोटीन का कार्य प्रोटीन के स्रोत प्रोस्टेट ग्रन्थि प्लीहा प्लूरिसी-Pleurisy प्लेटलेट्स फफूंद-Fungi फरास फल फल-Fruit फाइबर फिटकरी फुंसी-Pimples फूलगोभी-CAULIFLOWER फेंफड़े फैट फोटोफोबिया फोड़ा फोड़े-Boils फोलिक एसिड फ्लू फ्लू-Flu फ्लेक्स सीड्स बकायन बकुल बड़ी हरड़ बथुआ बथुआ पाउडर बथुआ-White Goose Foot बदबू बबूल-ACACIA बरसाती बीमारियाँ बरसाती बीमारियां बलगम बलवृद्धि बला बलात्कार बवासीर बहुनिया बहुमूत्रता- बांझपन बादाम-Almonds बादाम. बाल बाल झड़ना बाल झडऩा-Hair Falling बिना सिजेरियन मां बनें बिवाई बीजबंद बीमारियों के अनुसार औषधियां बीमारी बुखार बूंद-बूंद पेशाब बेल बेल – Bael बेली बैक्टीरिया ब्र​ह्मदण्डी ब्रेस्ट ग्रोथ ब्लड प्रेशर ब्लैक मेलिंग ब्लॉकेज भगंदर भगंदर-Fistula-in-ano भगनासा भगोष्ठ भय भस्मक रोग भावनात्मक भुई आंवला-Phyllanthus Niruri भूई आमला भूई आंवला भूख भूख बढ़ाने भूमि भूमि आंवला भोजनलीवर मकोय मकोय-Soleanum nigrum मंजीठ मटर-PEA मंद दृष्टि मंदाग्नि मदार मधुमेह मधुमेह-Diabetes मन्दाग्नि-Dyspepsia मरुआ मर्द मर्दाना मलेरिया (Malaria) मसाले मस्तिष्क मस्से मस्से-WARTS महत्वपूर्ण लेख महाबला माइग्रेन माईग्रेन माईंड सैट माजूफल मानसिक मानसिक-Mental मानिसक तनाव-Mental Stress मायोपिया मासिक मासिक-धर्म मासिकधर्म मासिकस्राव माहवारी मिनरल मिर्गी मिर्च-Chili मीठा खाने की आदत मुख मैथुन-ओरल सेक्स-Oral Sex मुधमेह मुलहठी मुलेठी मुहाँसे मूँगफली मूड डिस्ऑर्डर-Mood Disorders मूत्र मूत्र असंयमितता मूत्र में जलन-Burning in Urine मूत्राशय मूर्च्छा (Unconsciousness) मूली मृत्यु मृत्युदण्ड मेथी मेथी दाना मेंहदी मैथुन मोगरा (Mogra) मोटापा 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