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पपीता (CARICA PAPPYA)

पपीता (CARICA PAPPYA)


परिचय : पपीता बहुत ही स्वादिष्ट होता है। इसके पेड़ लंबे, पतले व कोमल होते हैं। पपीते के पेड़ में कोई डालियां नहीं होती हैं। इस पर लगने वाले फल को पपीता कहते हैं। पपीता कच्चे रहने पर हरा और पक जाने पर पीले रंग का हो जाता है। पपीते के अंदर काले रंग के बीज होते हैं और बीज के ऊपर एक लसलसा द्रव्य जमा रहता है। पपीते के पेड़ भारत के कई राज्यों में पाए जाते हैं और यह किसी भी मौसम में लगाया जा सकता है। कच्चे पपीते की सब्जी और अचार भी बनती है। पके पपीते की चटनी व कचूमर भी बनाई जाती है। प्रतिदिन सुबह पपीते का सेवन करने से कब्ज दूर होती है और पाचन शक्ति बढ़ती है। यह पेट की गैस को दूर करता है। पपीते में पेप्सीन एंजाइम प्रोटीन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है जो एक प्रकार का पाचक रस है। पपीता प्रोटीन को पाचन के अलावा आंतों में सूखे मल को बाहर करके आंतों को एकदम साफ कर देता है।


विभिन्न भाषाओं में नाम :

हिंदी       अरण्ड खर्बूजा, (अरण्ड कांकड़ी)      
अंग्रेजी               पपेया
संस्कृत      मधुकर्कटी या वातकुंभफल
बंगाली               पोपैय।

हानिकारक : गर्भावस्था के दौरान कच्चा या पका पपीता नहीं खाना चाहिए। जिन स्त्रियों को मासिक-धर्म अधिक आता हो उन्हें भी पपीता नहीं खाना चाहिए। प्रमेह, कोष्ठ व अर्श (बवासीर) के रोगियों के लिए कच्चा पपीता हानिकारक होता है। पपीता के बीजो का सेवन करने से गर्भपात हो सकता है।

गुण :
  1. पपीता आसानी से हजम होने वाला फल है।
  2. पपीता भूख व शक्ति को बढ़ाता है।
  3. यह प्लीहा (तिल्ली), यकृत (लीवर), पांडु (पीलिया) आदि रोग को समाप्त करता है।
  4. पेट के रोगों को दूर करने के लिए पपीते का सेवन करना लाभकारी होता है।
  5. पपीते के सेवन से पाचनतंत्र ठीक होता है।
  6. पपीते का रस अरूचि, अनिद्रा (नींद का न आना), सिर दर्द, कब्ज व आंवदस्त आदि रोगों को ठीक करता है।
  7. पपीते का रस सेवन करने से अम्लपित्त (खट्टी डकारें) बंद हो जाती है।
  8. पपीता पेट रोग, हृदय रोग, आंतों की कमजोरी आदि को दूर करता है।
  9. पके या कच्चे पपीते की सब्जी बनाकर खाना पेट के लिए लाभकारी होता है।
  10. पपीते के पत्तों के उपयोग से उच्च रक्तचाप में लाभ होता है और हृदय की धड़कन नियमित होती है।
  11. पपीता वीर्य को बढ़ाता है, पागलपन को दूर करता है एवं वात दोषों को नष्ट करता है।
  12. इसके सेवन से जख्म भरता है और दस्त व पेशाब की रुकावट दूर होती है।
  13. कच्चे पपीते का दूध त्वचा रोग के लिए बहुत लाभकारी होता है।
  14. पपीते के बीज कीड़े को नष्ट करने वाला और मासिक-धर्म को नियमित बनाने वाला होता है।
  15. पपीते का दूध दर्द को ठीक करता है, कोढ़ को समाप्त करता है और स्तनों में दूध को बढ़ाता है।
  16. पपीते का चूर्ण सेवन करने से आमाशय की जलन, जख्म, अर्बुद व अपच दूर होता है।
  17. यूनानी चिकित्सकों के अनुसार : पका पपीता पाचन शक्ति को बढ़ाता है, भूख को बढ़ाता, पेशाब अधिक लाता है, मूत्राशय के रोगों को नष्ट करता है, पथरी को गलाता है और मोटापे को दूर करता है। पपीता कफ के साथ आने वाले खून को रोकता है एवं खूनी बवासीर को ठीक करता है।
    वैज्ञानिकों विश्लेषणों के अनुसार : पपीते में विटामिन `ए´ `बी´ `सी´ और `डी´ होता है। यह आंखों के रोग, पेशाब की रुकावट व गुर्दे से सम्बंधित रोगों को दूर करता है। पपीते में विटामिन `सी´ अधिक होता है। यह हड्डी, दांत, उच्चरक्त चाप, पक्षाघात, गठिया व उल्टी आदि में लाभकारी होता है।
पपीता में पाए जाने वाले तत्व :

तत्वमात्रातत्वमात्रा
प्रोटीन0.5 प्रतिशतकैल्शियम0.01 प्रतिशत
वसा0.1 प्रतिशतफास्फोरस0.01 प्रतिशत
कार्बोहाइड्रेट9.5 प्रतिशतलौहलगभग 1 ग्राम का चौथा भाग /100 ग्राम
पानी89.6 प्रतिशतविटामिन-बीलगभग 1 ग्राम का चौथा भाग/100 ग्राम
विटामिन- ए2020 आई0यु0/100 ग्राम



औषधीय उपयोग :
स्तनों में दूध बढ़ाने के लिए : पका पपीता खाने से या कच्चे पपीते की सब्जी बनाकर खाने से स्तनों में दूध बढ़ता है।
दाद : पपीते का दूध निकालकर कुछ दिनों तक दाद पर लगाने से दाद ठीक होता है।
प्लीहा रोग : प्लीहा रोग से पीड़ित रोगी को पपीता का सेवन प्रतिदिन करना चाहिए। इससे प्लीहा रोग ठीक होता है।
यकृत (जिगर) रोग : 
यदि छोटे बच्चों के यकृत (जिगर) खराब रहता हो तो उसे प्रतिदिन पपीता खिलाना चाहिए। पपीता यकृत (जिगर) को ताकत देता है। यह पेट के सभी रोगों को भी समाप्त करता है।
पपीता और सेब खाने से बच्चों के जिगर की खराबी दूर होती है।
कब्ज़ : 
  1. कच्चा पपीता या पका पपीता खाने से कब्ज की शिकायत दूर होती है।
  2. कब्ज से पीड़ित रोगी को प्रतिदिन सुबह पपीते का दूध पीना चाहिए। इससे कब्ज दूर होकर पेट साफ होता है।
  3. खाना खाने के बाद पपीता खाने से कब्ज की शिकायत दूर होती है।
  4. पपीते के दूध व अदरक के रस में 50 ग्राम अजवाइन मिलाकर छाया में सूखा लें। सूख जाने पर यह आधा चम्मच की मात्रा में भोजन के तुंरत बाद पानी से लें। इससे कब्ज दूर होती है। यह गैस बनना, गले व छाती की जलन, भूख का न लगना, गुदा की खुजली आदि को भी ठीक करता है।
पेट के कीड़े : पपीते के 10 बीजों को पानी में पीसकर चौथाई कप पानी में मिलाकर लगभग 7 दिनों तक लगातार पीने से पेट के कीड़े समाप्त होते हैं।
गर्भपात : पपीता खाने से गर्भपात हो जाता है। अत: गर्भावस्था में पपीते का सेवन नहीं करना चाहिए।
बच्चों के शारीरिक शक्ति व लम्बाई के लिए : जिन बच्चों की शारीरिक लम्बाई कम होती है या शरीर कमजोर होता है, उसे प्रतिदिन पपीता खिलाना चाहिए।
अपच : आधे चम्मच कच्चे पपीते का दूध चीनी के साथ प्रतिदिन लेने से अपच (भोजन का न पचना) दूर होता है।
रक्तगुल्म (खून का जम जाना) : प्रतिदिन शाम को आधा किलो पका पपीता खाने से रक्तगुल्म ठीक होता है।
पुरानी खाज-खुजली : पपीते का दूध और सुहागा को उबलते पानी में डालकर खाज-खुजली पर लगाने से दाद-खुजली दूर होती है।
नारू रोग : पपीते के पत्तों का रस अफीम में मिलाकर लेप करने से नारू शीघ्र ही बाहर निकल जाता है।
हृदय का रोग : 
  1. पपीते के पत्तों का काढ़ा बनाकर प्रतिदिन पीने से हृदय का रोग ठीक होता है। इसके सेवन से घबराहट दूर होती है।
  2. बुखार में हृदय की कमजोर व नाड़ी का अधिक तेज चलने के रोग में पपीते के पत्तों का काढ़ा बनाकर सेवन करना चाहिए।
  3. पपीते के पत्ते को पानी में उबालकर उसके पानी को छानकर पीने से हृदय रोग में लाभदायक है।
सौन्दर्य बढ़ाने के लिए : 
  1. पके पपीते को छीलकर पीस लें और इसे चेहरे पर लगाएं। इसे लगाने के 15-20 मिनट के बाद जब यह सूख जाए तो चेहरे को पानी से धो लें और मोटे तौलिए से चेहरे को अच्छी तरह साफ करें। इसके बाद चेहरे पर तिल या नारियल का तेल लगाएं। इस तरह इसका उपयोग करने से 1 से 2 सप्ताह में ही चेहरे के दाग, धब्बे व मुंहासे ठीक हो जाते हैं और चेहरा सुन्दर बनता है। इससे चेहरे की झुर्रियां व काला घेरा आदि भी दूर होता है।
  2. युवतियों को अपनी कमर को सुन्दर व सुडौल बनाने के लिए प्रतिदिन कुछ महीने तक पपीता खाना चाहिए। इससे कमर पतली व सुडौल बनती है।
  3. 10 ग्राम पपीते का गूदा, 10 बूंद नींबू का रस, आधा चम्मच गुलाब जल एवं 10 ग्राम टमाटर का रस मिलाकर चेहरे व शरीर के दूसरे अंगों पर लेप करें। लेप करने के 15 से 20 मिनट बाद हल्के गर्म पानी से साफ चेहरे को साफ कर लें। इस तरह कुछ दिनों तक इसका प्रयोग करने से त्वचा कोमल, चिकनी व मुलायम बनती है।
  4. खून की कमी होने पर रोगी को प्रतिदिन पपीता खाना चाहिए। इससे पाचन क्रिया ठीक होता है और खून बनता है।
  5. यदि प्रसव के बाद स्त्री के स्तनों में दूध न बनता हो तो उसे प्रतिदिन पपीते का सेवन करना चाहिए। इससे स्तनों में दूध बढ़ता है।
  6. लगभग 300 ग्राम पपीता प्रतिदिन खाने से मोटापा दूर होता है।
  7. चेहरे की त्वचा खुश्क व झुर्रिदार होने पर बचाव के लिए प्रतिदिन पपीता खाना चाहिए।
  8. चेहरे का रंग निखारने के लिए एक कप पपीते का रस व एक कप अमरूद का रस मिलाकर दिन में 2 बार पीना चाहिए। इससे कुछ ही दिनों मे चेहरे पर चमक आ जाती है।
  9. सभी त्वचा रोग में पपीते का रस, गाजर का रस और आधी मात्रा में पालक का रस मिलाकर दिन में 2 बार पीने से त्वचा रोग ठीक होता है।
  10. चेहरे के मुहांसे, कील, झाईयां आदि को दूर करने के लिए पके पपीते व आलू का रस मिलाकर दिन में 2-3 बार चेहरे पर लगाएं। इससे चेहरे के मुहांसे, कील व झाईयां दूर होती हैं।
  11. पपीते से मिलने वाला रासायनिक तत्त्व चेहरे पर जमी हुई तेलीय परत को हटाने में बहुत लाभकारी रहता है। एक पूरी तरह से पके हुए पपीते के अंदर का गूदा लेकर अच्छी तरह उसका लेप बना लें, 15 मिनट तक पपीते के गूदे का लेप चेहरे पर रगड़ कर कुछ देर बाद गुनगुने पानी से धो लें। अगर त्वचा रूखी हो तो पपीते के गूदे में गुलाब जल, चन्दन का बुरादा और हल्दी को मिलाकर उबटन बना कर लगा लें। और बाद में ठण्डे पानी से धो लें।
बवासीर रोग : 
  1. बवासीर के मस्सों पर करीब एक महीने तक लगातार पपीते का दूध लगाने से मस्से सूखकर झड़ जाते हैं।
  2. खूनी या बादी बवासीर में आधा किलो पपीता दिन में 2 बार खाने चाहिए। इससे दोनों प्रकार की बवासीर ठीक होता है।
फीलपांव : पपीते के पत्तों को आग में गर्म करके फीलपांव पर दिन में 3 बार सिंकाई करने से फीलपांव ठीक होता है।
मासिक-धर्म की गड़बड़ी : 100 ग्राम पपीते के रस, 100 ग्राम गाजर का रस और 50 ग्राम अनन्नास का रस मिलाकर प्रतिदिन सुबह-शाम पीने से मासिकधर्म सम्बंधी गड़बड़ी दूर होती है।
अम्लपित्त (खट्टी डकारें) : 250 ग्राम पके हुए पपीते को सेंधा नमक, कालीमिर्च व थोड़ा नींबू निचोड़कर दिन में 2 बार खाएं। इससे खट्टी डकारें बंद होती है। यह भोजन को पचाता है और भूख को बढ़ाता है।
जोड़ों का दर्द : मांसपेशियों के दर्द और जोंड़ों के दर्द को दूर करने के लिए पपीते के पत्ते को गर्म करके चिकने भाग की तरफ से बांधना या सिंकाई करना चाहिए। इससे जोड़ों व मांसपेशियों का दर्द ठीक होता है।
टांसिल होने पर : टांसिल बढ़ने तथा गले में दर्द होने पर 1 गिलास गर्म पानी में 1 चम्मच पपीते का दूध मिलाकर गरारा करने से तुंरत आराम हो जाता है।
तिल्ली (प्लीहा) के रोग : 
  1. तिल्ली या प्लीहा बढ़ने पर पपीते का रस एक कप की मात्रा में दिन में 3 बार रोगी को देने से तिल्ली का बढ़ना ठीक होता है। मलेरिया ज्वर में भी पपीते का रस या पपीता खाने से ज्वर (बुखार) के कारण होने वाली उल्टी आदि तुरंत बंद हो जाती है।
  2. पपीता का नियमित रूप से सेवन करने से तिल्ली का बढ़ना ठीक होता है।
  3. कच्चे पपीते को बीच से इस तरह काटे कि उसमें 200 या 250 ग्राम सेंधा नमक भरा जा सके। इस तरह नमक भरे हुए पपीते को उसी टुकड़े से ढक दें और ऊपर से कपड़े की मिट्टी करें और फिर पपीते पर गोबरएक अंगुल मोटा लेप कर दें। इसके बाद इसे उपलों के आग के बीच रखकर पकाएं। जब उपले जल जाए तो पपीते को निकालकर पपीते के ऊपर से मिट्टी, गोबर हटाकर उसमें से नमक निकालकर महीने पीसकर रख लें। इस नमक को 5-6 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम 3 सप्ताह तक सेवन कराएं। इससे तिल्ली का बढ़ना ठीक होता है।
हड्डी का टूटना : पपीते का एक कप रस, आधा कप गाजर का रस एवं आघा कप आंवले का रस मिलाकर दिन में 2 बार पीने से हड्डी का टूटना ठीक होता है और दर्द में आराम मिलता है।
जी मिचलाने या उल्टी होना : एक कप पपीते का रस और अनार, संतरा, अनन्नास व टमाटर का रस आधा-आधा कप। इस सभी को एक साथ मिलाकर पीने से जी मिचलाने या उल्टी आना बंद होता है।
उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) :
  1. पपीते का रस 1 कप, गाजर, संतरे आधा-आधा कप और तुलसी व लहसुन का रस 2-2 चम्मच। इन सभी को मिलाकर कुछ दिनों तक दिन में 2 बार सेवन करने से उच्च रक्तचाप सामान्य बनता है।
  2. उच्च रक्तचाप से पीड़ित रोगियों को प्रतिदिन पपीता सेवन करना चाहिए।
कांच निकलना (गुदाभ्रंश) : पपीते के पत्तों को पीसकर पानी में मिलाकर गुदाभ्रंश पर लगाने से गुदाभ्रंश ठीक होता है।
स्तनों में दूध कम होना : यदि शरीर में खून की कमी के कारण स्तनों में दूध की कमी हो तो पका हुआ पपीता प्रतिदिन खाली पेट खाएं। यह 20 दिनों तक खिलाने से स्तनों में दूध बढ़ता है।
दस्त रोग : कच्चे पपीते को उबालकर खाने से दस्त का बार-बार आना रोग ठीक होता है।
गुर्दे की पथरी : 6 ग्राम पपीते की जड़ को पीसकर 50 ग्राम पानी में मिलाकर 21 दिनों तक सुबह-शाम पीने से पथरी गलकर निकल जाती है।
पाचनशक्ति की कमजोरी :
  1. एक पक्के हुए पपीते को काटकर उसमें कालीमिर्च का चूर्ण मिलाकर प्रतिदिन खाने से पाचनशक्ति की कमजोरी दूर होती है।
  2. कच्चे पपीते की सब्जी बनाकर खाने से पाचनशक्ति मजबूत होती है।
यकृत (जिगर) का रोग :
  1. पपीते के बीजों को सुखाकर बारीक चूर्ण बना लें और यह चूर्ण 3 ग्राम की मात्रा में आधा नींबू का रस मिलाकर दिन में 2 बार सेवन करें। इससे यकृत की बीमारी दूर होती है।
  2. कच्चे पपीते का रस 2 चम्मच लेकर चीनी मिलाकर देने से यकृत और प्लीहा रोग में आराम मिलता है।
  3. 10 ग्राम कच्चे पपीते के दूध में चीनी मिलाकर दिन में 3 बार सेवन करने से यकृत का बढना रोग ठीक होता है।
मधुमेह के रोग :
  1. पपीता, कत्था, खैर व सुपारी का काढ़ा बनाकर पीने से मधुमेह रोग में लाभ मिलता है।
  2. 20 गाम पपीता, 5 ग्राम कत्था व सुपारी को मिलाकर कूट लें और फिर काढा बनाकर सेवन करें। इससे मधुमेह का रोग ठीक होता है।
प्लेग रोग : पपीता को घिसकर लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग की मात्रा में सुबह-शाम प्लेग रोग से पीड़ित रोगी को देना चाहिए। इससे पेशाब में खून का आना बंद होता है।

पेट के कीड़े :
  1. पपीते के 5 से लेकर 7 बीजों को ताजे पानी के साथ 5 दिनों तक सेवन करने से पेट में कीड़ों के कारण होने वाला दर्द कीड़ों के मरने के साथ ठीक होता है।
  2. 10 से 15 पपीते के बीज को पानी में पीसकर 7 दिनों तक खाने से लाभ होता है।
  3. पपीता के बीज को पीसकर चूर्ण बनाकर 2 चुटकी को खुराक के रूप में दिन में 3 बार पानी के साथ पीने से लाभ होता हैं।
  4. कच्चा पपीता का रस शहद के साथ मिलाकर 250 ग्राम से लेकर 125 ग्राम की मात्रा में गर्म पानी मिला दें, फिर ठंडा होने पर नींबू का रस डालकर सेवन करने से लाभ होता हैं।
  5. पपीते के 10 बीजों को अच्छी तरह पीसकर 58 ग्राम से लेकर लगभग 90 ग्राम तक 15 दिनों तक पीने से पेट के कीड़े समाप्त हो जाते है।
पेट का दर्द : 
  1. पपीता में काली मिर्च, नींबू का रस और सेंधा नमक डालकर खाने से कब्ज (गैस) के कारण होने वाले उदर (पेट) के दर्द में लाभ होता है।
  2. नींबू का रस और चीनी मिलाकर पीने से पेट का दर्द दूर होता है।
एड़ियों का फटना : पपीते के छिलकों को सुखाकर और पीसकर चूर्ण बनाकर रख लें। फिर इस चूर्ण में ग्लिसरीन मिलाकर दिन में 2 बार कटी-फटी एड़ियों और पैरों पर लगाने से बहुत जल्दी लाभ होता है।
हृदय की धड़कन तेज होना : पपीते का गूदा लेकर मथ लें और 100 ग्राम गूदे में 2 लौंग का चूर्ण मिलाकर सेवन करें। इससे हृदय की धड़कन सामान्य बनती है।
हैजा : पानी अथवा गुलाबजल में पपीता घिसकर चटाने से हैजा दूर होता है।
उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) : 
  1. प्रतिदिन 400 ग्राम पपीता खाने से उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) में बहुत लाभ होता है।
  2. भोजन के बाद पके हुए पपीते का सेवन करने से उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) में बहुत लाभ होता है।
  3. खाली पेट प्रतिदिन पका हुआ पपीता खाने से उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) ठीक होता है।
त्वचा रोग : 2 चम्मच कच्चे पपीते का रस सुबह-शाम पीने से चमड़ी के सारे रोग ठीक हो जाते हैं।
नाखूनों की खुजली : नाखूनो की खुजली पर कच्चे पपीते का रस नाखून खुजला कर लगाने से रोग ठीक होता है।
पीलिया का रोग : 
  1. पका पपीता खाने या कच्चे पपीते की सब्जी बनाकर खाने से पीलिया रोग में लाभ होता है।
  2. छिलके सहित कच्चा पपीता 75 ग्राम चटनी की तरह बारीक पीस कर 250 ग्राम पानी में घोल लें। स्वाद के अनुसार चीनी या ग्लूकोज मिलाकर पीलिया के रोगी को 3 बार प्रतिदिन पिलाने से कुछ ही दिनों में पीलिया ठीक हो जाता है। इसे और स्वादिष्ट बनाने के लिए स्वादानुसार नीबू, कालीमिर्च मिला सकते है। बच्चों के लिए मात्रा कम लें।
  3. जिन बच्चों को पीलिया हो, हाथ-पैर पतले हो या यकृत बढ़ गया हो उसे आधा गिलास पपीते का रस, एक कप अंगूर का रस, संतरा व मौसमी का रस मिलाकर दिन में 2 बार कुछ दिन तक पिलाना चाहिए। इससे
शरीर का सुन्न होना : शरीफे तथा पपीते के बीजों को पीसकर तिल के तेल में मिला लें। इस तेल को सुन्न अंगों पर मलने से रोग में लाभ मिलेगा।
खून की कमी : पपीते का गुदा 200 ग्राम की मात्रा में लगातार 20 दिनों तक प्रतिदिन खाने से शरीर में खून की कमी दूर होती है।
मुहांसे : पपीते का दूध प्रतिदिन चेहरे पर लगाने से मुंहासे ठीक होते हैं।
त्वचा का मुलायम व चमकदार होना : पके हुए पपीते के गूदे को पीसकर चेहरे पर लेप करने से त्वचा मुलायम व चमकदार होता है।
टांसिल का बढ़ना : कच्चे पपीते के हरे भाग को चीर कर उसका दूध निकाल लें और एक चम्मच दूध एक गिलास गुनगुने पानी में डालकर गरारें करें। इससे टांसिल का बढ़ना ठीक होता है। 
स्त्रोत : जे के हैल्थ

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--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!

--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!
सभी के स्वस्थ एवं सुदीर्घ जीवन की कामना के साथ-मेरे प्यारे और दुलारे तीन बच्चों की ममतामयी अद्वितीय माँ (मम्मी) जो दुखियों, जरूतमंदों और मूक जानवरों तक पर निश्छल प्यार लुटाने वाली एवं अति सामान्य जीवन जीने की आदी महिला थी! वह पाक कला में निपुण, उदार हृदया मितव्ययी गृहणी थी! मेरी ऐसी स्वर्गीय पत्नी "जानकी मीणा" की कभी न भुलाई जा सकने वाली असंख्य हृदयस्पर्शी यादों को चिरस्थायी बनाये रखते हुए इस ब्लॉग को आज दि. 08.08.12 को फिर से पाठकों के समक्ष समर्पित कर रहा हूँ!-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'

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Cucumber कब्जी कमजोरी कमर दर्द करेला कर्ण वेदना कर्णरोग कष्टार्तव-Dysmenorrhea कांच निकलना काजू कान कानून सम्मत काम काम शक्ति कामशक्ति कामशक्ति-Sexual power कामोत्तेजना कायाकल्प कार्बोहाइड्रेट कार्बोहाइड्रेट-Carbohydrates काला जीरा काला नमक काली जीरी काली तुलसी काले निशान कास-खांसी-Cough किडनी किडनी स्‍टोन कीड़े कुकरौंधा कुकुंदर कुटकी-Black Hellebore कुबडापन कुल्थी कुल्ला कुष्ठ कृमि केला केसर कैफीन-Caffeine कैलोरी कैलोरी चार्ट कैलोरी-Calories कैवांच कैविटी कैंसर कॉफी कॉफ़ी कोंडी घास कोढ़ कोबरा कोलेस्ट्रॉल कोलेस्ट्रॉल-Cholesterol कोलेस्ट्रोल कौंच कौमार्य क्रियाशीलता क्रोध क्षय रोग-Tuberculosis क्षारीय तत्व क्षुधानाश खजूर खजूर की चटनी खनिज खरबूजा-Musk melon खरेंटी खरैंटी शिलाजीत खांसी खिरेंटी खिरैटी खीरा खुजली खुशी-Joy खुश्की खुश्बू खोया गंजापन-Baldness गठिया गठिया-Arthritis गठिया-Gout गड़तुम्बा गंध गन्ने का रस गरमा गरम गर्भधारण गर्भपात गर्भवती गर्भवती कैसे हों? गर्भावस्था गर्भावस्था की विकृतियां-Disorders of Pregnancy गर्भावस्था के दौरान संभोग-Sex During Pregnancy गर्भावस्था-Pregnancy गर्भाशय गर्भाशय-उच्छेदन के साइड इफेक्ट्स-Side Effects of Hysterectomy गर्म पानी गर्मी गर्मी-Heat गाजर गाजवां गांठ गाँठ-Knot गिलोय गिल्टी गुंदा गुदाभ्रंश गुर्दे गुलज़ाफ़री गुस्सा गृध्रसी गृह-स्वामिनी गैस गैस्ट्रिक गोक्षुरादि चूर्ण गोखरू गोखरू (LAND CALTROPS) गोंद कतीरा-Hog-Gum गोंदी गोभी-Cabbage गोरख मुंडी गोरखमुंडी ग्रीन-टी घमोरी घाघरा घाव चकवड़ चक्कर चपाती चमत्कारिक सब्जियां चर्बी चर्म चर्म रोग चर्मरोग चाय चाय-Tea चालीस के पार-Forty Across चिकनगुनिया चिकित्सकीय चिरायता-Absinth चिरोटा चुंबन चोक चौलाई छपाकी छरहरी काया छाछ छाले छीकें छुआरा छुहारा छोटा गोखरू छोटा धतूरा छोटी हरड़ जंक फूड जकवड़ जंगली-कटीली चौलाई जटामांसी-Spikenard जलजमनी जलन जलोदर रोग-Ascites Disease जवारा जवारे जवासा-Alhag जहर जामुन का जूस जायफल जिगर जीरा जीवन रक्षक जीवनी शक्ति जुएं जुकाम जुलाब जूएं जूस जूस-Juice जोड़ों के दर्द जोड़ों में दर्द जौ ज्यूस ज्योति ज्वर ज्वर-Fiver झाइयाँ झांईं झुर्रियाँ झुर्रियां झुर्री झूठे दर्द टमाटर का रस टमाटर-Tomatoes टाइफाइड टायफायड टूटी हड्डी टॉन्सिल टोटला ट्यूमर ठेकेदार डॉक्टर डकार डायबिटीज डायरिया डिटॉक्सीफाई डिटॉक्सीफिकेशन डिनर डिब्बाबंद भोजन डिलेवरी डीकामाली डीगामाली डेंगू डेंगू-Dengue डॉ. निरंकुश डॉ. मीणा ढीलापन ढीली योनि तकलीफ का सही इलाज तरबूज-Watermelon तलाक ताकत तिल तिल्ली तुंबा तुंबी तुलसी तेल त्रिदोषनाशक त्रिफला त्वचा त्वचा रोग थकान थाईरायड थायरायड-Thyroid थायरॉइड दण्डनीय अपराध दंत वेदना दन्तकृमि दन्तरोग दमा दर वेदना दर्द दर्द निवारक दवा दर्दनाक दस्त दही दाग-धब्बे-Stains-Spots दाढ़ दांत दांतो में कैविटी-Teeth Cavity दाद दाम्पत्य दाम्पत्य विवाद सलाहकार दाम्पत्य-Conjugal दाल दालचीनी दालें दिल दुर्गंध दुर्बलता दुष्प्रभाव दुष्प्रभावरहित दूध दूध वृद्धि दूधी दूधी-Milk Hedge दृष्टिदोष द्रोणपुष्पी-Leucas Cephalotes धड़कन धनिया बीज धनिया-Coriander धमासा धातु धातु पतन धार्मिक धैर्यहीन नज़ला नपुंसकता नाक नाखून नागबला नागरमोथा नाडी हिंगु नाड़ी हिंगु (डिकामाली) नामर्दी नारकीय पीड़ा नारियल नाश्ता निमोनिया निम्न रक्तचाप निम्बू नियासिन निराश निरोगधाम निर्गुण्डी निसोरा नींद नींबू नींबू-Lemon नीम-azadirachta indica नुस्खे नुस्खे-Tips नेगड़ नेगड़-निर्गुन्डी-Vitex negundo नेत्र रोग नैतिक नोनिया नौसादर न्युमोनिया-Pneumonia पक्षघात पढ़ने में मन लगेगा पंतजलि पत्तागोभी-CABBAGE पत्थर फोड़ी पत्थरचट्टा पत्नी पथरी पदार्थ पनीर पपीता पपीता-CARICA PAPPYA पमाड परदेशी लांगड़ी परहेज पराठा परिस्थिति पवाड़ पवाँर पाइल्स पाक-कला पाचक पाचन पाठक संख्या 16 लाख पार पाठक संख्या पंद्रह लाख पायरिया पारिजात पालक पालक-Spinach पित्त पित्ती पिंपल-मुंहासे-Pimples-Acne पिरामिड पीलिया पीलिया-Jaundice पीलिया-कामला-Jaundice पुआड़ पुदीना पुनर्नवा-साटी-सौंटी-Punarnava पुरुष पेचिश पेट के कीड़े पेट दर्द पेट में गैस पेट रोग पेड़ पेशाब में रुकावट पेंसिल थेरेपी-Pencil Therapy पौधे पौरुष पौष्टिक रागी रोटी प्याज-Onion प्यास प्रजनन प्रतिरक्षा प्रतिरक्षा प्रणाली प्रतिरोधक प्रतिरोधक-Resistance प्रदर प्रमेह प्रवाहिका (पेचिश)-Dysentery प्रसव प्रसव सुरक्षा चक्र प्रसव-पीड़ा प्रसूति प्राणायाम प्रेग्नेंसी-Pregnancy प्रेमिका प्रोटीन प्रोटीन का कार्य प्रोटीन के स्रोत प्रोस्टेट ग्रन्थि प्लीहा प्लूरिसी-Pleurisy प्लेटलेट्स फफूंद-Fungi फरास फल फल-Fruit फाइबर फिटकरी फुंसी-Pimples फूलगोभी-CAULIFLOWER फेंफड़े फैट फैटी लीवर फोटोफोबिया फोड़ा फोड़े-Boils फोलिक एसिड फ्लू फ्लू-Flu फ्लेक्स सीड्स बकायन बकुल बड़ी हरड़ बथुआ बथुआ पाउडर बथुआ-White Goose Foot बदबू बबूल-ACACIA बरसाती बीमारियाँ बरसाती बीमारियां बलगम बलवृद्धि बला बलात्कार बवासीर बहरापन बहुनिया बहुमूत्रता- बांझपन बादाम-Almonds बादाम. बाल बाल झड़ना बाल झडऩा-Hair Falling बिना सिजेरियन मां बनें बिवाई बीजबंद बीमारियों के अनुसार औषधियां बीमारी बुखार बूंद-बूंद पेशाब बेल बेली बैक्टीरिया ब्र​ह्मदण्डी ब्रेस्ट ग्रोथ ब्लड प्रेशर ब्लैक मेलिंग ब्लॉकेज भगंदर भगंदर-Fistula-in-ano भगनासा भगोष्ठ भड़भांड़ भय भविष्य भस्मक रोग भावनात्मक भुई आंवला-Phyllanthus Niruri भूई आमला भूई आंवला भूख भूख बढ़ाने भूमि भूमि आंवला भोजनलीवर मकोय मकोय-Soleanum nigrum मंजीठ मटर-PEA मंद दृष्टि मंदाग्नि मदार मधुमेह मधुमेह-Diabetes मन्दाग्नि-Dyspepsia मरुआ मर्द मर्दाना मलेरिया मलेरिया (Malaria) मसाले मस्तिष्क मस्से मस्से-WARTS महत्वपूर्ण लेख महाबला माइग्रेन माईग्रेन माईंड सैट माजूफल मानसिक मानसिक लक्षण मानसिक-Mental मानिसक तनाव-Mental Stress मायोपिया मासिक मासिक-धर्म मासिकधर्म मासिकस्राव माहवारी मिनरल मिर्गी मिर्च-Chili मीठा खाने की आदत मुख मैथुन-ओरल सेक्स-Oral Sex मुधमेह मुलहठी मुलेठी मुहाँसे मूँगफली मूड डिस्ऑर्डर-Mood Disorders मूत्र मूत्र असंयमितता मूत्र में जलन-Burning in Urine मूत्राशय मूर्च्छा (Unconsciousness) मूली मूली कर रस मृत्यु मृत्युदण्ड मेथी मेथी दाना मेंहदी मैथुन मोगरा (Mogra) मोटापा मोटापा-Obesity मोतियाबिंद मौत मौलसिरी मौसमी बीमारियां यकृत यकृत प्लीहा यकृत वृद्धि-Liver Growth यकृत-लीवर-जिगर-Lever यूपेटोरियम परफोलियेटम यूरिक एसिड लेबल योग विज्ञापन योन योनि योनि ढीली योनि शिथिल योनि शूल-Vaginal Colic योनि संकोचन योनी योनी संकोचन यौन यौन आनंद यौन दौर्बल्य यौनशक्ति यौनशिक्षा यौनसुख यौनानंद यौनि रक्त प्रदर (Blood Pradar) रक्त रोहिड़ा-TECOMELLA UNDULATA रक्तचाप रक्तपित्त रक्तशोधक रक्ताल्पता रक्ताल्पता (एनीमिया)-Anemia रस-juices रातरानी Night Blooming Jasmine/Cestrum nocturnum रामबाण रामबाण औषधियाँ-Panacea Medicines रुक्षांश रूढिवादी रूसी रूसी मोटापा रेचक रेठु रोग प्रतिरोधक लकवा लक्षण लक्ष्मी लंच लसोड़ा लस्सी लहसुन लहसुन-Garlic लाइलाज लाइलाज का इलाज लाक्षणिक जानकारी लाभ लिंग लिंग प्रवेश लिसोड़ा लीकोरिया लीवर लीवर-Liver लू-hot wind लैंगिक लोनिया लौकी लौंग की चाय ल्युकोरिया ल्यूकोरिया ल्यूज योनी वजन वज़न वजन कम वजन बढाएं-Weight Increase वन/जंगली तुलसी वनौषधियाँ वमन वमन विकृति-Vomiting Distortion वसा वात वात श्लैष्मिक ज्वर वात-Rheumatism वायरल वायरल फीवर वायरल बुखार-Viral Fever वासना विटामिन विधारा वियाग्रा-Viagra विरह वेदना विलायती नीम विष विष हरनी विषखपरा वीर्य वीर्य वृद्धि वीर्यपात वृक्कों (गुर्दों) में पथरी-Renal (Kidney) Stone वृक्ष वैज्ञानिक वैधानिक वैवाहिक जीवन वैवाहिक जीवन-Marital वैवाहिक रिश्ते वैश्यावृति व्यायाम शंखपुष्पी शरपुंखा शराब शरीफा-सीताफल-Custard apple शर्करा शलगम-Beets शल्यक्रिया शहद शहद-Honey शारीरिक शिथिलता शीघ्र पतन शीघ्रपतन शुक्राणु-Sperm शुक्राणू शुगर शोथ श्योनाक श्रेष्ठतर श्वास श्वांस श्वेत प्रदर श्वेत प्रदर-Leucorrhea श्वेतप्रदर षड़यंत्र संकुचन संकोच संक्रमण संखाहुली संतरा-Orange संतान संतुष्टि सत्यानाशी सदा सुहागन सदाफूली सदाबहार सदाबहार चूर्ण सनबर्न सफ़ेद दाग सफेद पानी सब्जि सब्जियां-Vegetables सब्जी संभालू संभोग समर्पण-Dedication सरकार को सुझाव सरफोंका सरहटी सर्दी सर्दी जुकाम-Cold सर्पक्षी सर्पविष सलाद संवेदना सहदेई सहदेवी साइटिका साइटिका-Sciatica साइड इफेक्ट्स साबूदाना-Sago सायटिका सिजेरियन सिर दर्द सिर वेदना सिरका सिरदर्द सिरोसिस सीजर डिलेवरी सुगर सुदर्शन सुहागा सूखा रोग सूजन सेक्स सेक्स परामर्श-Sex Counseling सेक्स पावर सेक्स समस्या सेक्स हार्मोन सेक्‍स-Sex सेंधा नमक सेब सेमल-Bombax Ceiba सेल्स सोजन-सूजन सोंठ सोना पाठा सोयाबीन सोयाबीन (Soyabean) सोयाबीन-Soyabean सोराइसिस सोरियासिस-Psoriasis सौंठ सौंदर्य सौंदर्य-Beauty सौन्दर्य सौंफ सौंफ की चाय सौंफ-Fennel स्किन स्तन स्तन वृद्धि स्तनपान स्तम्भन स्त्री स्त्रीत्व स्त्रैण स्वप्न दोष स्वप्नदोष स्वप्नदोष-Night Fall स्वभाव स्वभावगत स्वरभंग स्वर्णक्षीरी स्वस्थ स्वास्थ्य स्वास्थ्य रक्षक सखा हजारदानी हड़जोड़ हड्डी हड्डी में दर्द हड्डीतोड़ ज्वर हड्डीतोड़ बुखार हरड़ हरसिंगार हरी दूब-CREEPING CYNODAN हरीतकी हर्टबर्न हस्तमैथुन हस्तमैथुन-Masturbation हारसिंगार हालात हिचकी हिचकी-Hiccup हिमोग्लोबिन-hemoglobin हिस्टीरिया हिस्टीरिया-Hysteria हींग 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