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Online Dr. P.L. Meena (डॉ. पुरुषोत्तम लाल मीणा)

Health Care Friend and Marital Dispute Consultant

(स्वास्थ्य रक्षक सक्षा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार ),

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मकोय-Soleanum Nigrum

मकोय पीलिया की अचूक दवा 

मौसम बदलने के साथ ही पीलिया (जॉन्डिस) का प्रकोप बढ़ रहा है। पीलिया का आयुर्वेद में अचूक इलाज है। आयुर्वेद चिकित्सकों के अनुसार यदि मकोय की पत्तियों को गरम पानी में उबालकर उसका सेवन करें तो रोग से जल्द राहत मिलती है। मकोय पीलिया की अचूक दवा है और इसका सेवन किसी भी रूप में किया जाए स्वास्थ्य के लिए लाभदायक ही होता है।


चिकित्सक कहते हैं कि जब भी रोगी का यह लगे कि उसका शरीर पीला हो रहा है तथा उसे पीलिया हो सकता है, तो वह पानी की मात्रा बढ़ा दे क्योंकि पानी की मात्रा कम होने पर शरीर से उत्सर्जित होने वाले तत्व रक्त में मिल जाते हैं। इससे व्यक्ति की हालत बिगडऩे लगती है। चिकित्सक बताते हैं कि यदि कच्चा पपीता सलाद के रूप में लिया जाए तो भी पीलिया का असर कम होता है।

इसके अलावा परवल, लौकी और मूंग की दाल भी पीलिया के रोगी के लिए काफी लाभप्रद होती है। पीलिया से बचने लिए प्रोटीनयुक्त भोजन करें और वसा युक्त खाद्य पदार्थों से बचे, क्योंकि यह पीलिया के स्तर को और बढ़ाते हैं। कई लोग यह मानते हैं कि पीलिया के रोगी को मीठा नहीं खाना चाहिए, जबकि आयुर्वेद चिकित्सक ऐसा नहीं मानते उनका कहना है कि पीलिया का रोगी गाय के दूध से बना पनीर व छेने का रसगुल्ला आराम से खा सकता है. यह रोगी को कोई नुकसान नहीं बल्कि लाभ पहुंचाता है।

कई रोगी जिन्हें कब्ज की शिकायत रहती हो उनके लिए सलाह है कि वे अमलतास के गूदे को प्रतिदिन रात में एक से दो चम्मच सेवन करें कब्ज से राहत मिलती है। चिकित्सकों की राय है कि मौसमी फलों का सेवन अवश्य करना चाहिए क्योंकि इससे कई बीमारियों की रोकथाम होती है।
स्त्रोत : Voice of Faridabad, 14-March-2013
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पीलिया और मकोय की पत्ती


अगर आप अंग्रेजी और अन्य तरह की दवाइयों के इलाज के बावजूद पीलिया से छुटकारा न पा सके हों तो आपके लिए यह एक अच्छी ख़बर है. पीलिया का आयुर्वेद में अचूक इलाज है. मौसम बदलने के साथ ही पीलिया का प्रकोप बढ़ रहा है. आयुर्वेद चिकित्सकों के अनुसार, यदि मकोय की पत्तियों को उबाल कर उसका सेवन किया जाए तो पीलिया से जल्द राहत मिलती है. मकोय एक अचूक दवा है, इसका सेवन किसी भी रूप में किया जाए, स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है. चिकित्सक कहते हैं कि जब भी किसी को यह लगे कि उसका शरीर पीला हो रहा है और उसे पीलिया हो सकता है तो वह पानी की मात्रा बढ़ा दे, क्योंकि पानी की मात्रा कम होने पर शरीर से उत्सर्जित होने वाले तत्व रक्त में मिल जाते हैं. इससे व्यक्ति की हालत बिगड़ने लगती है. यदि कच्चा पपीता सलाद के रूप में लिया जाए तो भी पीलिया का असर कम होता है.

इसके अलावा परवल, लौकी और मूंग की दाल भी पीलिया के रोगी के लिए काफी लाभप्रद होती है. पीलिया से बचने लिए प्रोटीनयुक्त भोजन करें और वसायुक्त खाद्य पदार्थों से बचें, क्योंकि यह पीलिया के स्तर को बढ़ाते हैं. कई लोग मानते हैं कि पीलिया के रोगी को मीठा नहीं खाना चाहिए, जबकि आयुर्वेद चिकित्सकों का कहना है कि पीलिया का रोगी गाय के दूध से बना पनीर और छेने का रसगुल्ला आराम से खा सकता है. ये रोगी को नुक़सान नहीं, लाभ पहुंचाते हैं. जिन्हें क़ब्ज़ की शिकायत रहती हो, वे प्रतिदिन सोते समय अमलतास के गूदे का एक-दो चम्मच सेवन करें, क़ब्ज़ से राहत मिलती है. मौसमी फलों का सेवन अवश्य करना चाहिए, क्योंकि इससे बीमारियों की रोकथाम होती है.

स्त्रोत : चौथी दुनिया

TUESDAY, APRIL 14, 2009

यकृत रोगों की अपुर्व औषोधि काकमाची (मकोय) Soleanum nigrum

काकमाची या मको उत्तर भारत मे लग्भग हर जगह पाया जाता है। यह पौधा खूब हरा भरा होता है। दैनिक चिकित्सा में मैं इसको भरपूर उपयोग मे लाता हूँ। लीवर को रोगो मे इसका उपयोग बहुत ही उपयोगी है! जहाँ एक से एक महंगी औषधियाँ काम नही करती यह काम कर जाती है ।

गुण तथा दोष कर्म-तिक्त तथा कटुरस, स्निगध, उष्ण, रसायन, शुक्रजनन तथा त्रिदोषशामक है। 

लीवर रोगो मे इसको देने का तरीका-शुद्ध भूमि से इसके पौधे को जड समेत उखाड कर अच्छी तरह से धो लें। इसके बाद इसको कुट कर इसका रस निकाल ले। एक मिट्टी कि हाण्डी लेकर इस रस को तब तक मन्द आँच पर तब तक गर्म करें जब तक की इसका रँग हल्का गुलाबी नही हो जाता।

अब इसकॊ करीब 50 मि. ली. लेकर इसमे 3 काली मिर्चों का चुर्ण डालकर पी जाएं।
यदि आपकी जठराग्नि तीव्र है तो इसकॊ खाली पेट ले नही तो खाना खाने के 1 घन्टे बाद ले। दिन में केवल एक बार ले। ध्यान देने योग्य बात यह है कि स्वरस हर रोज ताजा उपयोग करें। हर रोज बनाये और प्रयोग मे लाएं।

स्त्रोत : जीव आयुर्वेद ब्लॉग
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चमत्कारिक औषधि जो कई खतरनाक बीमारियों को खत्म कर सकती है। मकोय एक प्राकृतिक औषधि है, जिसे कामोनी भी कहा जाता है। यह अलग.अलग राज्यों में अलग-अलग नामों से जानी जाती है। जैसे काकमाची, मको, गुड़ कामाई, कचमच, पीलूड़ी, चरगोटी और गजचेट्टू आदि। इसका फल सफेद रंग का होता है और पकने के बाद यह काला हो जाता है। मकोय फल बाग-बगीचों, नदी नालो के किनारे आदि जगहों पर अपने आप उगता है। बहुत ही कम लोग जानते होगें आखिर यह फल हमें क्या फायदे दे सकता है। मकोय का फल एक चमत्कारिक औषधि है, जो कई खतरनाक बीमारियों को खत्म कर सकती है।
मकोय के गुण
मकोय भूख को बढ़ाने वाला होता है इसके अलावा यह फल …
लीवर की बीमारी,
चर्म रोग,
पीलिया,
गठिया,
बवासीर,
सूजन,
कोढ़,
दिल के रोग,
आंखों की बीमारी,
खांसी,
उल्टी
और
कफ
आदि रोगों को ठीक करता है।
जितनी भी भारत में स्वदेशी चिकित्सा हैं, उनमें सूजन की समस्या को दूर करने में मकोय का प्रयोग होता है। लीवर की बीमारी, चर्म रोग और दस्त में मकोय का प्रयोग होता है। आइये जानते हैं-आप कैसे मकोय का इस्तेमाल करके बच सकते हैं इन रोगों से ।
सूखी खुजली और चर्म रोग : त्वचा संबंधी रोग जैसे चर्म रोग और खुजली होने पर मकोय की पत्तियों को पीसकर इसके पेस्ट का लेप लगाने से फायदा मिलता है। साथ ही आप मकोय के डंठलों की सब्जी भी खा सकते हैं। चर्म रोग की समस्या होने पर मकोय के रस को निकालें और उसकी अपनी त्वचा में मालिश करें।
पीलिया : पीलिया में मकोय का क्वाथ रोज पीने से यह रोग ठीक हो जाता है।
मुंह में छाले : यदि मुंह में छाले हो गए हों तो आप परेशान न हों। मकोय के चार पत्ते लें और उन्हें मुंह में चबाएं। इससे जल्दी ही आपके छाले ठीक हो जाते हैं।
खूनी बवासीर : खूनी बवासीर में मकोय के पत्तों का एकदम ताजा रस कम से कम दस ग्राम की मात्रा में पीयें।
मूत्राशय और गुरदे की सूजन : रोज मकोय के पत्तों से बना रस दस मि.ली. पीने से गुरदे और मूत्राशय की सूजन ठीक होती है।
उल्टी : यदि उल्टी लगातार हो रही हो तो सुहागा को मकोय के रस में मिलाकर सेवन करें। उल्टी बंद हो जाएगी।
बुखार : बुखार होने पर आप मकोय का काड़ा बनाकर पीयें। इससे आपका बुखार जल्दी ठीक हो जाएगा।
चेचक : चेचक होने से चेहरे पर दाने निकल जाते हैं। यदि समय पर उपचार न मिलें तो यह चेहरे पर दाग छोड़ देते हैं। इसके उपचार के लिए मकोय से निकलने वाले क्वाथ को पीने से चेचक निकल जाती है।
त्वचा पर लाल चकत्ते : त्वचा पर लाल चकते दूर करने के लिए मकोय के पत्तों का रस लगाना चाहिए।
खराब दांत बिना दर्द के निकालना : खराब दांतों को बिना दर्द के बाहर निकालने के लिए किसी भी तेल या घी में मकोय के पत्तों का रस मिलाकर मूसड़ों और दांतों पर लगाने से खराब दांत बाहर निकल जाता है।
कुत्ते के काटने पर : कुत्ते के काटने के विष को खत्म करने के लिए मकोय का रस पी लेना चाहिए। इससे कुत्ते का विष उतर जाता है और घाव भी जल्दी भर जाता है।
नींद न आने की समस्या : जिन लोगों को नींद न आने की समस्या हो वे गुड़ के साथ मकोय की जड़ का रस मिलाकर रात को सोने से पहले सेवन करें।
चूहे का विष : चूहे का विष बहुत खतरनाक होता है। इस विष को खत्म करने में मकोय एक मात्र आयुवेर्दिक उपचार है। मकोय का रस निकालकर मालिश करने से चूहे का विष उतर जाता है।
यौनशक्ति और कामशक्ति : यौन-संबध बनाने के लिए जितना ध्यान मानसिक तैयारी और कामात्तेजना को देना चाहिए उतना ही ध्यान अपनी यौन-शक्ति पर भी देना आवश्यक है। यौन-शक्ति के अभाव मे एक बेहतरीन रोमांटिक माहौल में भरपूर तैयारी के साथ बनाया गया संबंध कारगर साबित नही होता है और आप यौन-सुख से वंचित रह जाते है। जिन व्यक्तियों में यौन-शक्ति का अभाव होता है वह सेक्स के दौरान थो़डी देर मे ही खुद को कमजोर महसूस करने लगते है। इस अभाव के कारण अधिकतर लोगो में शर्मिंदगी का बोध बढ़ जाता है और वह अपने साथी के साथ यौन-संबंध बनाने मे झिझकने लगते है।
शराब का सेवन ना करें व अपने जीवनसाथी के साथ समय बिताएं (Do Not Drink Alcohol, Stay Close to Life Partner) : सबसे पहले तो अगर आप शराब का सेवन करने के आदि हैं तो ये आदत आपको छोड़ देनी चाहिए. दूसरा आपको अपने जीवनसाथी के साथ भरपूर वक्त बिताना चाहिए ताकि आप दोनों और करीब आ सकें.
अश्वगंधा : अश्वगंधा का चूर्ण, चूर्ण को आधा चम्मच मात्रा में दूध (Milk) के साथ सुबह और शाम लेना चाहिए। यह मिश्रण वीर्य को ताकतवर बनाकर शीघ्रपतन की समस्या से छुटकारा दिलाता है।
कौंच का बीज : कामशक्ति बढ़ाने के लिए के लिए रोज़ाना 1 चम्मच कौंच पाक 1 गिलास दूध के साथ 2 खजूर उबाल के पिए। इसको पीने से वीर्य गाढ़ा हो जाता है और नामर्दी दूर होती है।
सफेद मूसली : सफेद मूसली, कौंच के बीज, अश्वगंधा इन सबको समान मात्रा में मिलाकर बारीक चूर्ण बना लें। इस एक चम्मच चूर्ण में मिश्री मिलाकर सुबह-शाम दूध के साथ पीना चाहिए। यह वीर्य को ताकतवर बनाता है तथा सेक्स शक्ति (Sex Power) में अधिकता लाता है। कामशक्ति बढ़ाने के लिए के लिए रोज़ाना 1 चम्मच.
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मकोय :
यह एकवर्षीय शाकीय वनस्पति है जो पुष्पीय वनस्पतियों के सोलेनेसी (Solanaceae) कुल की सदस्य है।मकोय का वैज्ञानिक नाम सोलेनम नाईग्रम (Solanum nigrum) है। यह वनस्पति सम्पूर्ण भारत में पायी जाती है। मकोय वनस्पति आमतौर से परती भूमि, कृषि भूमि, घास के मैदान, आवासीय परिसर तथा बाग-बगीचों में खरपतवार के रूप में उगती है।

मकोय की ऊँचाई 30-50 सेमी0 तक होती है। पौधे की पत्तियां तथा तना काफी नाजुक होता है। मकोय का पौधा जलजमाव के प्रति संवेदनशील होता है। पुष्प सफेद रंग के होते हैं। फल पकने के बाद काले रंग के तथा रसीले हो जाते हैं। मकोय का प्रजनन बीज द्वारा होता है। औषधीय गुण सम्पूर्ण वनस्पति में पाया जाता है। पौधे का अर्क पीलिया के उपचार में अत्यन्त ही सहायक होता है।
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मकोय एक दिव्य औषधि जो कर देती है हृदय एवं यकृत रोगों का सफाया

मकोय का पौधा इस पृथ्वी पर यकृत के रोगों व हृदय के रोगों की सबसे अच्छी औषधि कही जा सकती है। इस मकोय की पत्तियाँ पीलिया के रोग में आयुर्वेद के अनुसार अगर काड़ा बनाकर ले ली जाऐं तो पीलिया बिल्कुल ही नष्ट हो जाता है, यकृत के रोग आपके अनियमित खानपान, शराब आदि का ज्यादा सेवन, शहरी जीवन शैली, तनाव व काम की अधिकता, निराशा आदि के कारण रोग ग्रसित होता है। वैसे इसकी कार्य क्षमता इतनी है कि इसका 10 प्रतिशत भाग भी सही रहे तो यह काम करता रहेगा। ध्यान दें कि  आपके शरीर के दो ही अंग हैं-जिन पर खानपान व जीवन शैली का गंभीर प्रभाव पड़ता है। जिनमें पहला है-यकृत और दूसरा हृदय जिसे दिल भी कहते हैं। इन दोनों अंगों में रोग हो जाने पर विशेष बात यह है कि हजार रुपये से कम में तो बात बनती नही और लाखों लग जाए इसकी संभावना भी कम नही सो भइया आयुर्वेद का कहना मानो उसका नीति श्लोक है कि 'चिकित्सा से परहैज बहेतर' अर्थात रोग का इलाज है उन कारणों का विनाश करो, जिनसे रोग की उत्पत्ति हुयी है। सो अपनी जीवन चर्या ऐसी बनाओ कि रोग पास ही न फटकें। लेकिन जब रोग हो ही गया है तो चिकित्सा तो करनी ही पड़ेगी। प्रकृति ने हमें अनेकों औषधियाँ प्रदान की हैं, ऐसी ही एक दिव्य औषधि है-मकोय जिसे संस्कृत में काकमाची के नाम से जाना जाता है। English में कामन नाइट शेड बोला जाता है।
यह मिर्च के पौधे जैसा पोधा होता है जिसकी अधिकतम ऊँचाई 3 फिट के लगभग हो सकती है।इस पर फूल भी लगभग मिर्च जैसा ही आता है और मिर्च जैसी डालियाँ भी होती हैं इसके फल छोटे छोटे तथा समूह में होते है ये गोल गोल होते हैं पकने पर लाल हो जाते हैं तथा बाद में काले हो जाते हैं। इसके पुष्प मिर्च जैसे तथा छोटे छोटे सफेद रंग के होते हैं।

मकोय के गुण व प्रभाव-


  1. मकोय या काकमाची त्रिदोषनाशक अर्थात वात,पित्त व कफ तीनो दोषों का शमन करने वाला है।
  2. यह तिक्त अर्थात कड़ुवा स्वाद रखने वाली तथा इसकी प्रकृति गर्म, स्निग्ध,
  3. स्वर शोधक,
  4. रसायन,
  5. वीर्य जनक,
  6. कोढ़,
  7. बबासीर,
  8. ज्वर,
  9. प्रमेह,
  10. हिचकी,
  11. वमन को दूर करने वाला तथा नेत्रों को हितकर औषधि है।
  12. यह यकृत व हृदय के रोगो को हरने वाली औषधि है।
  13. यकृत की क्रिया विधि जब विगड़ जाती है तो शरीर में अनेक उपद्रव यथा सूजन, पतले दस्त व पीलिया जैसे रोगो के अलाबा कई बार बवासीर जैसे रोग होने लगते हैं। इन रोगों में मकोय का सेवन बहुत ही लाभप्रद रहता है। यह औषधि यकृत की क्रियाविधि को धीरे-धीरे सुद्रढ़ करके रोग का विनाश कर देती है। इस औषधि के प्रयोग से यकृत संवंधी रोग धीमें-धीमें समाप्त हो जाते हैं। इस औषधि के पत्तों का रस आँतों में पहुँचकर वहाँ इकठ्ठे विषों का  विनाश कर देता है तथा पेशाव द्वारा शरीर से बाहर कर  दिया जाता है।
  14. शरीर में कहीं सूजन हो या फिर यकृत व हृदय में सूजन हो तो इस औषधि के पत्तों का रस पिलाना लाभकारी है। खूनी बबासीर में या मुँह के किसी भी हिस्से से रक्त स्त्राव में मकोय के पत्तों का रस लाभप्रद है।
  15. हृदय रोग में इसके फल देने से रोग मिट जाता है।
  16. जलोदर रोग में मकोय के फल देने से रोग मिटने लगता है।
  17. नेत्रों के रोगों में भी इस औषधि मकोय का प्रयोग बहुत ही हितकारी है।
  18. मकोय का रस तिल्ली की सूजन,यकृत या जिगर की सूजन,यकृत के पुराने से पुराने रोग को मिटाने की ताकत रखता है।
  19.  यदि शरीर में खुजली की शिकायत हो तथा वह मिट नही रही हो। तो मकोय के रस की 25 से 50 ग्राम की मात्रा लेते रहने से यह मिट जाऐगी। इससे शरीर का रक्त शुद्ध हो जाता है और रक्त से जुड़े सभी रोग मिट जाते हैं।
मकोय का रस तैयार करने की विधि : मकोय का रस निकाल कर उसे मिट्टी के बर्तन में भरकर धीमी अग्नि पर गर्म करें, धीरे-धीरे उसका हरा रंग बादामी रंग में बदल जाता है, तब इसे उतार कर छान लें। इस प्रकार तैयार रस को 100-150 ग्राम की मात्रा में लेने पर यकृत के रोग, बड़ी हुयी तिल्ली, हृदय संबंधी रोग दूर होने लगते हैं।

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--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!

--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!
सभी के स्वस्थ एवं सुदीर्घ जीवन की कामना के साथ-मेरे प्यारे और दुलारे तीन बच्चों की ममतामयी अद्वितीय माँ (मम्मी) जो दुखियों, जरूतमंदों और मूक जानवरों तक पर निश्छल प्यार लुटाने वाली एवं अति सामान्य जीवन जीने की आदी महिला थी! वह पाक कला में निपुण, उदार हृदया मितव्ययी गृहणी थी! मेरी ऐसी स्वर्गीय पत्नी "जानकी मीणा" की कभी न भुलाई जा सकने वाली असंख्य हृदयस्पर्शी यादों को चिरस्थायी बनाये रखते हुए इस ब्लॉग को आज दि. 08.08.12 को फिर से पाठकों के समक्ष समर्पित कर रहा हूँ!-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'

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Pregnancy गर्भावस्था के दौरान संभोग-Sex During Pregnancy गर्भावस्था-Pregnancy गर्भाशय गर्भाशय भ्रंश गर्भाशय-उच्छेदन के साइड इफेक्ट्स-Side Effects of Hysterectomy गर्म पानी गर्मी गर्मी-Heat गाजर गाजवां गांठ गाँठ-Knot गारंटी गाल ब्लैडर गिलोय गिल्टी गुड़हल गुंदा गुदाभ्रंश गुर्दे गुलज़ाफ़री गुस्सा गृध्रसी गृह-स्वामिनी गैस गैस्ट्रिक गोक्षुरादि चूर्ण गोखरू गोखरू (LAND CALTROPS) गोंद कतीरा-Hog-Gum गोंदी गोभी-Cabbage गोरख मुंडी गोरखमुंडी ग्रीन-टी घमोरी घरेलु ​नुस्खे घाघरा घाव चकवड़ चक्कर चपाती चमत्कारिक सब्जियां चरित्र चर्बी चर्म चर्म रोग चर्मरोग चाय चाय-Tea चालीस के पार-Forty Across चिकनगुनिया चिकित्सकीय चिंतित चिरायता-Absinth चिरोटा चुंबन चोक चौलाई छपाकी छरहरी काया छाछ छाले छींक छीकें छुअ छुआरा छुहारा छोटा गोखरू छोटा धतूरा छोटी हरड़ जंक फूड जकवड़ जंगली-कटीली चौलाई जटामांसी-Spikenard जलजमनी जलन जलोदर रोग-Ascites Disease जवारा जवारे जवासा-Alhag जहर जामुन का जूस जायफल जिगर जीरा जीवन रक्षक जीवनी शक्ति जुएं जुकाम जुदाई जुलाब जूएं जूस जूस-Juice जोड़ों के दर्द जोड़ों में दर्द जौ ज्यूस ज्योति ज्वर ज्वर-Fiver झाइयाँ झांईं झुर्रियाँ झुर्रियां झुर्री झूठे दर्द टमाटर का रस टमाटर-Tomatoes टाइफाइड टाटबडंगा टायफायड टूटी हड्डी टॉन्सिल टोटला ट्यूमर ठंड ठंडापन ठेकेदार डॉक्टर डकार डकारें डायबिटीज डायरिया डिजिसेक्सुअल डिटॉक्सीफाई डिटॉक्सीफिकेशन डिनर डिब्बाबंद भोजन डिलेवरी डीकामाली डीगामाली डेंगू डेंगू-Dengue डॉ. निरंकुश डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' डॉ. मीणा ढकार ढीलापन ढीली योनि तकलीफ का सही इलाज तम्बाकू तरबूज-Watermelon तलाक ताकत तिल तिल्ली तुंबा तुंबी तुलसी तेल त्रिदोषनाशक त्रिफला त्वचा त्वचा रोग थकान थाईरायड थायरायड-Thyroid थायरॉइड दण्डनीय अपराध दंत वेदना दन्तकृमि दन्तरोग दमा दर वेदना दर्द दर्द निवारक दर्द निवारक दवा दर्दनाक दस्त दही दाग-धब्बे-Stains-Spots दाढ़ दांत दांतो में कैविटी-Teeth Cavity दाद दाम्पत्य दाम्पत्य विवाद सलाहकार दाम्पत्य-Conjugal दाल दालचीनी दालें दिमांग दिल दीर्घायु दु:खी दुर्गंध दुर्बलता दुष्प्रभाव दुष्प्रभावरहित दूध दूध वृद्धि दूधी दूधी-Milk Hedge दृष्टिदोष दो मन द्रोणपुष्पी-Leucas Cephalotes धड़कन धनिया बीज धनिया-Coriander धमासा धातु धातु पतन धार्मिक धूम्रपान छोड़ना चाहते हैं? धैर्यहीन नज़ला नपुंसकता नाक नाखून नागबला नागरमोथा नाडी हिंगु नाड़ी हिंगु (डिकामाली) नामर्दी नारकीय पीड़ा नारियल नाश्ता निमोनिया निम्न रक्तचाप निम्बू नियासिन निराश निरोगधाम निर्गुण्डी निर्गुन्डी निष्कपट स्नेह निष्ठा निसोरा नींद नींबू नींबू-Lemon नीम-azadirachta indica नुस्खे नुस्खे-Tips नेगड़ नेत्र रोग नेुचरल नैतिक नॉर्मल डिलेवरी नोनिया नौसादर न्युमोनिया-Pneumonia न्यूरॉन्स पक्षघात पंचकर्म पढ़ने में मन लगेगा पंतजलि पत्तागोभी-CABBAGE पत्थर फोड़ी पत्थरचट्टा पत्नी पथरी पदार्थ पनीर पपीता पपीता-CARICA PAPPYA पमाड परदेशी लांगड़ी परम्परागत चिकित्सा परहेज पराठा परामर्श परिस्थिति पवाड़ पवाँर पाइल्स पाक-कला पाचक पाचन पाचनतंत्र पाचनशक्ति पाठक संख्या 16 लाख पार पाठक संख्या पंद्रह लाख पायरिया पारदर्शिता पारिजात पालक पालक-Spinach पित्त पित्ताशय पित्ती पिंपल-मुंहासे-Pimples-Acne पिरामिड पीलिया पीलिया-Jaundice पीलिया-कामला-Jaundice पुआड़ पुदीना पुनर्नवा-साटी-सौंटी-Punarnava पुरुष पुंसत्व पेचिश पेट के कीड़े पेट दर्द पेट में गैस पेट रोग पेड़ पेद दर्द पेशाब पेशाब में रुकावट पेंसिल थेरेपी-Pencil Therapy पौधे पौरुष पौष्टिक रागी रोटी प्याज-Onion प्यास प्रजनन प्रतिरक्षा प्रतिरक्षा प्रणाली प्रतिरोधक प्रतिरोधक-Resistance प्रदर प्रमेह प्रवाहिका (पेचिश)-Dysentery प्रसव प्रसव सुरक्षा चक्र प्रसव-पीड़ा प्रसूति प्राणायाम प्रेग्नेंसी-Pregnancy प्रेम प्रेमरस प्रेमिका प्रेमी प्रोटीन प्रोटीन का कार्य प्रोटीन के स्रोत प्रोस्टेट प्रोस्टेट ग्रन्थि प्लीहा प्लूरिसी-Pleurisy प्लेटलेट्स फफूंद-Fungi फरास फल फल-Fruit फाइबर फिटकरी फुंसी-Pimples फूलगोभी-CAULIFLOWER फेंफड़े फेरम फॉस फैट फैटी लीवर फोटोफोबिया फोड़ा फोड़े-Boils फोरप्ले फोलिक एसिड फ्लू फ्लू-Flu फ्लेक्स सीड्स बकायन बकुल बड़ी हरड़ बथुआ बथुआ पाउडर बथुआ-White Goose Foot बदबू बबूल-ACACIA बरसाती बीमारियाँ बरसाती बीमारियां बलगम बलवृद्धि बला बलात्कार बवासीर बहरापन बहुनिया बहुमूत्रता- बांझपन बादाम-Almonds बादाम. बाल बाल झड़ना बाल झडऩा-Hair Falling बिना सिजेरियन मां बनें बिवाई बीजबंद बीड़ी बीमारियों के अनुसार औषधियां बीमारी बुखार बूंद-बूंद पेशाब बेल बेली बैक्टीरिया बॉयोकैमी ब्र​ह्मदण्डी ब्रेस्ट ग्रोथ ब्लड प्रेशर ब्लैक मेलिंग ब्लॉकेज भगंदर भगंदर-Fistula-in-ano भगनासा भगन्दर भगोष्ठ भड़भांड़ भय भविष्य भस्मक रोग भावनात्मक भुई आंवला-Phyllanthus Niruri भूई आमला भूई आंवला भूख भूख बढ़ाने भूमि भूमि आंवला भोजनलीवर मकोय मकोय-Soleanum nigrum मंजीठ मटर-PEA मंद दृष्टि मंदाग्नि मदार मधुमेह मधुमेह-Diabetes मन्दाग्नि-Dyspepsia मरुआ मरोड़ मर्द मर्दाना मलाशय मलेरिया मलेरिया (Malaria) मवाद मसाले मस्तिष्क मस्से मस्से-WARTS महंगा इलाज महत्वपूर्ण लेख महाबला माइग्रेन माईग्रेन माईंड सैट माजूफल मानवव्यवहार मानसिक मानसिक लक्षण मानसिक-Mental मानिसक तनाव-Mental Stress मायोपिया मासिक मासिक-धर्म मासिकधर्म मासिकस्राव माहवारी मिनरल मिर्गी मिर्च-Chili मीठा खाने की आदत मुख मैथुन-ओरल सेक्स-Oral Sex मुख्य लक्षण मुधमेह मुलहठी मुलेठी मुहाँसे मूँगफली मूड डिस्ऑर्डर-Mood Disorders मूत्र मूत्र असंयमितता मूत्र में जलन-Burning in Urine मूत्राशय मूत्रेन्द्रिय मूर्च्छा (Unconsciousness) मूली मूली कर रस मृत्यु मृत्युदण्ड मेथी मेथी दाना मेंहदी मैथुन मोगरा (Mogra) मोटापा मोटापा-Obesity मोतियाबिंद मौत मौलसिरी मौसमी बीमारियां यकृत यकृत प्लीहा यकृत वृद्धि-Liver 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