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अरंडी के फायदे

अरंडी (Castor beans) के फायदे

लेखक : राकेश गुप्ता Friday November 22, 2013 (नव भारत टाइम्स ब्लॉग 'रोचक बातें' से साभार)

किसी भी स्थान पर और किसी भी ऋतु में उगने वाला और कम पानी से पलने वाला अरंडी का वृक्ष गाँव में तो खेतों का रक्षक और घर का पड़ोसी बनकर रहने वाला होता है।

वातनाशक, जकड़न दूर करने वाला और शरीर को गतिशील बनाने वाला होने के कारण इसे अरंडी नाम दिया गया है। खासतौर पर अरंडी की जड़ और पत्ते दवाई में प्रयुक्त होते हैं। इसके बीजों में से जो तेल निकलता है उसे अरंडी का तेल कहते हैं।

गुण-दोषः गुण में अरंडी वायु तथा कफ का नाश करने वाली, रस में तीखी, कसैली, मधुर, उष्णवीर्य और पचने के बाद कटु होती है। यह गरम, हलकी, चिकनी एवं जठराग्नि, स्मृति, मेधा, स्थिरता, कांति, बल-वीर्य और आयुष्य को बढ़ाने वाली होती है।
यह उत्तम रसायन है और हृदय के लिए हितकर है। अरंडी के तेल का विपाक पचने के बाद मधुर होता है। यह तेल पचने में भारी और कफ करने वाला होता है।

यह तेल आमवात, वायु के तमाम 80 प्रकार के रोग, शूल, सूजन, वायुगोला, नेत्ररोग, कृमिरोग, मूत्रावरोध, अंडवृद्धि, अफरा, पीलिया, पैरों का वात (सायटिका), पांडुरोग, कटिशूल, शिरःशूल, बस्तिशूल (मूत्राशयशूल), हृदयरोग आदि रोगों को मिटाता है।
अरंडी के बीजों का प्रयोग करते समय बीज के बीच का जीभ जैसा भाग निकाल देना चाहिए, क्योंकि यह जहरीला होता है।
शरीर के अन्य अवयवों की अपेक्षा आँतों और जोड़ों पर अरंडी का सबसे अधिक असर होता है।

औषधि-प्रयोगः 
कटिशूल (कमर का दर्द): कमर पर अरंडी का तेल लगाकर, अरंडी के पत्ते फैलाकर खाट-सेंक (चारपाई पर सेंक) करना चाहिए। अरंडी के बीजों का जीभ निकाला हुआ भाग (गर्भ), 10 ग्राम दूध में खीर बनाकर सुबह-शाम लेना चाहिए।

शिरःशूलः वायु से हुए सिर के दर्द में अरंडी के कोमल पत्तों पर उबालकर बाँधना चाहिए तथा सिर पर अरंडी के तेल की मालिश करनी चाहिए और सोंठ के काढ़े में 5 से 10 ग्राम अरंडी का तेल डालकर पीना चाहिए।

दाँत का दर्दः अरंडी के तेल में कपूर में मिलाकर कुल्ला करना चाहिए और दाँतों पर मलना चाहिए।

योनिशूलः प्रसूति के बाद होने वाले योनिशूल को मिटाने के लिये योनि में अरंडी के तेल का फाहा रखें।

उदरशूलः अरंडी के पके हुए पत्तों को गरम करके पेट पर बाँधने से और हींग तथा काला नमक मिला हुआ अरंडी का तेल पीने से तुरंत ही राहत मिलेगी।

सायटिका (पैरों का वात): एक कप गोमूत्र के साथ एक चम्मच अरंडी का तेल रोज सुबह शाम लेने और अरंड़ी के बीजों की खीर बनाकर पीने से कब्ज दूर होती है।

हाथ-पैर फटने परः सर्दियों में हाथ, पैर, होंठ इत्यादि फट जाते हों तो अरंडी का तेल गरम करके उन पर लगायें और इसका जुलाब लेते रहें।

संधिवातः अरंडी के तेल में सोंठ मिलाकर गरम करके जोड़ों पर (सूजन न हो तो) मालिश करनी चाहिए। सोंठ तथा सौंफ के काढ़े में अरंडी का तेल डालकर पीना चाहिए और अरंडी के पत्तों का सेंक करना चाहिए। आमवात में यही प्रयोग करना चाहिए।

पक्षाघात और मुँह का लकवाः सोंठ डाले हुए गरम पानी में 1 चम्मच अरंडी का तेल डालकर पीना चाहिए एवं तेल से मालिश और सेंक करनी चाहिए।

कृमिरोगः वायविडंग के काढ़े में रोज सुबह अरंडी का तेल डालकर लें।

अनिद्राः अरंडी के कोमल पत्ते दूध में पीसकर ललाट और कनपटी पर गरम-गरम बाँधने चाहिए। पाँव के तलवों और सिर पर अरंडी के तेल की मालिश करनी चाहिए।

गाँठः अरंडी के बीज और हरड़े समान मात्रा में लेकर पीस लें। इसे नयी गाँठ पर बाँधने से वह बैठ जायेगी और अगर लम्बे समय की पुरानी गाँठ होगी तो पक जायेगी।

आँतरिक चोटः अरंडी के पत्तों के काढ़े में हल्दी डालकर दर्दवाले स्थान पर गरम-गरम डालें और उसके पत्ते उबालकर हल्दी डालकर चोटवाले स्थान पर बाँधे।

आँखें आनाः अरंडी के कोमल पत्ते दूध में पीसकर, हल्दी मिलाकर, गरम करके पट्टी बाँधें।

स्तनशोथः स्तनपाक, स्तनशोथ और स्तनशूल में अरंडी के पत्ते पीसकर लेप करें।

अंडवृद्धिः नयी हुई अंडवृद्धि में 1-2 चम्मच अरंडी का तेल, पाँच गुने गोमूत्र में डालकर पियें और अंडवृद्धि पर अरंडी के तेल की मालिश करके हलका सेंक करना चाहिए अथवा अरंडी के कोमल पत्ते पीसकर गरम-गरम लगाने चाहिए और एक माह तक एक चम्मच अरंडी का तेल देना चाहिए।

आमातिसारः सोंठ के काढ़े में अथवा गरम पानी में अरंडी का तेल देना चाहिए अथवा अरंडी के तेल की पिचकारी देनी चाहिए। यह इस रोग का उत्तम इलाज है।

गुदभ्रंशः बालक की गुदा बाहर निकलती हो तो अरंडी के तेल में डुबोई हुई बत्ती से उसे दबा दें एवं ऊपर से रूई रखकर लंगोट पहना दें।

आँत्रपुच्छ शोथ (अपेण्डिसाइटिस): प्रारंभिक अवस्था में रोज सुबह सोंठ के काढ़े में अरंडी का तेल दें।

हाथीपाँव (श्लीपद रोग): 1 चम्मच अरंडी के तेल में 5 गुना गोमूत्र मिलाकर 1 माह तक लें।

रतौंधीः अरंडी का 1-1 पत्ता खायें और उसका 1-1 चम्मच रस पियें।

वातकंटकः पैर की एड़ी में शूल होता है तो उसे दूर करने के लिए सोंठ के काढ़ें में या गरम पानी में अरंडी का तेल डालकर पियें तथा अरंडी के पत्तों को गरम करके पट्टी बाँधें।

तिलः शरीर पर जन्म से ही तिल हों तो उन्हें दूर करने के लिए अरंडी के पत्तों की डंडी पर थोड़ा कली चूना लगाकर उसे तिल पर घिसने से खून निकलकर तिल गिर जाते हैं।
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बिना एक्सरसाइज हो जाएं स्लिम-ट्रिम, देसी इलाज करें अरंडी के पत्तों से

धर्मडेस्क. उज्जैन | Jan 24, 2012, 08:30 AM IST दैनिक भास्कर


अगर आप बढ़ते मोटापे से परेशान हैं और एक्सरसाइज के लिए टाइम नहीं निकाल पाते हैं तो टेंशन न लें। आप बढ़ते मोटापे को रोक सकते हैं वो भी देसी इलाज से। एरंड यानी अरण्डी भारत में बहुत अधिक पाया जाता है। इसका आयुर्वेदिक तरीके से प्रयोग करके आप मोटापा घटा सकते हैं। लेकिन उससे पहले आपको बता दें कि अरंडी या एरंड की क्या पहचान है।

एरंड के पौधे के तने, पत्तों और टहनियों के ऊपर धूल जैसा आवरण रहता है, जो हाथ लगाने पर चिपक जाता है। ये दो प्रकार का होते हैं लाल रंग के तने और पत्ते वाले एरंड को लाल और सफेद रंग के होने पर सफेद एरंड कहते हैं। एरंड दो प्रकार का होता है-पहला सफेद और दूसरा लाल।

लाल एरंड- एरंड का तेल पेट साफ करने वाला होता है। एरंड के तेल की मालिश सिर में करने से सिर दर्द की पीड़ा दूर होती है। औषधि के रूप में इस्तेमाल किए जाते है।

सफेद एरंड- सफेद एरंड, बुखार, कफ, पेट दर्द, सूजन, बदन दर्द, कमर दर्द, सिर दर्द, मोटापा, प्रमेह और अंडवृद्धि का नाश करता है। एरंड के तेल का जुलाब देना चाहिए। इसका जुलाब बहुत ही उत्तम होता है। इससे पेट में दर्द नहीं होता और पानी की तरह पतले दस्त भी नहीं होते, केवल मल-शुद्धि होती है। यदि इसका जुलाब फायदा नहीं पहुंचाता तो यह कोई हानि नहीं पहुंचाता। छोटे बच्चों से लेकर बूढ़ों तक के लिए यह समान उपयोगी है। सोंठ के काढ़े के साथ पीने से एरंड के तेल की दुर्गन्ध कम हो जाती है।

एरंड की जड़ का काढ़ा छानकर एक-एक चम्मच की मात्रा में शहद के साथ दिन में तीन बार सेवन करें। एरंड के पत्ते, लाल चंदन, सहजन के पत्ते, निर्गुण्डी को बराबर मात्रा में लेकर पीस लें, बाद में 2 कलियां लहसुन की डालकर पकाकर काढ़ा बनाकर रखा रहने दें इसमें से जो भाप निकले उसकी उस भाप से गला सेंकने और काढ़े से कुल्ला करना चाहिए। एरंड के पत्तों का क्षार को हींग डालकर पीये और ऊपर से चावल खाएं। इससे लाभ हो जाता है। अरण्ड के पत्तों की सब्जी बनाकर खाने से मोटापा दूर हो जाता है।
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बालों के लिए वरदान है अरंडी का तेल
पल पल इंडिया : प्रेषित समय :12:08:05 PM / Tue, Mar 3rd, 2015

बाल: बालों की समस्‍या दूर करने के लिए अरंडी का तेल प्रयोग करना बहुत ही कारगर है. अरंडी का तेल बालों के बढ़ने में वृद्धि करता है. पतले हो रहे बालों को घना करने में मदद करता है. बालों का नुकसान दिखना कम करता है और बालों के नुकसान को रोकता है. सूखे बालों को पोषण और उन्हें चमक और उछाल देता है. बालों को घनापन और चमक देता है जिसके परिणामस्वरुप बाल स्वस्थ दिखते है. बालों और सिर की त्वचा को गहराई से कंडिशनिंग और नमी देता है. सिर की त्वचा का सूखापन रोकता है.

प्रयोग :

उंगलियों के प्रयोग से, बाल की जड़ों और सिर की त्वचा पर उच्च मात्रा में अरंडी के तेल लगाए.
सिर की त्वचा पर तेल समान रूप से वितरित हो रहा है,यह सुनिश्चित करे.
बाकी बालों में तेल लगाने से बचें, क्योंकि तेल के गाढ़ेपन से बालों से तेल धोकर निकालने में मुश्किल हो सकती है.
सिर की त्वचा पर लगाने के बाद, एक प्लास्टिक की टोपी के साथ अपने बालों को ढके और एक तौलिया में लपेटे.
तेल को कम से कम 15 से 20 मिनट तक रहने दे या रात भर भी रख सकते हैं.
बाद में अरंडी के तेल को निकालने के लिए शैम्पू के साथ धो लें.
यह उपाय हप्ते में एक बार करें और छह से आठ सप्ताह तक ऐसा करे जिससे अच्छे परिणाम दिखेंगे.

आप अन्य तेलों के साथ जैसे अंगूर के बीज का तेल, नारियल तेल के साथ अरंडी का तेल का मिश्रण करके लगा सकते है, जिससे उसका गाढ़ापन और अप्रिय गंध कम होगी. केवल प्राकृतिक अरंडी के तेल का उपयोग करें.
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अरंडी के तेल से त्वचा और बालों के लिए चमत्कारिक फ़ायदे ..!!
अरंडी (castor oil) का तेल अमृत तुल्य
Published on 25 Jun 2016

एरण्ड, जिसे अरण्ड, अरण्डी, अण्डी आदि और बोलचाल की भाषा में अण्डउआ भी कहते हैं, यह गाँव के बाहर आमतौर पर पाया जाता है। इसके पत्ते पाँच चौड़ी फाँक वाले होते हैं। लाल व बैगनी रंग के इस फूल वाले इस पेड़ में कांटेदार हरे आवरण चढ़े फल लगते है पेड़ लाली लिए हो तो रक्त एरण्ड और सफेद हो तो श्रेत एरण्ड कहलाता है
अरण्डी का तेल /
अरण्डी का तेल एक तरह का चिपचिपा तेल होता है जिसके स्वास्थ्य और सुंदरता से जुड़े हुए कई गुण होते है बालों के लिए भी यह काफी औषधि मानी जाती है और बालों के झड़ने नए बालों के बढ़ने और डैंडरफ को दूर करने में काफी सहायता करता है अगर आप बालों की मरम्म्त के लिए कोई उपाय ढूंढ रहे है तो भी केस्टर आयल एक बेहतरीन औषधि है अगर आप बालों के झड़ने की समस्या से ग्र्स्त है और ज्यादा महंगे विकल्पों पर विचार नहीं कर सकते है तो भी केस्टर आयल आपके लिए काफी फायदेमंद विकल्प साबित हो सकता है भले ही केस्टर आयल चिपचिपा होता है यह आपके बालों के लिए कई तरिके से फायदेमंद साबित होता है
शुद अरण्डी का तेल या केस्टर आयल थोड़ा गाढ़ा और दिखने में हल्के पिले रंग का होता है इसमें प्राकृतिक रूप से चेहरे कई सुंदरता निखारने और बालों को घना और मजबूत बनाने के गुण होते है यह मार्किट में आसानी से उपलब्ध है और आपकी जेब पर भी भरी नहीं पड़ता है तो आइये जानते है इसके कुछ ऐसे ही उपयोग सूंदर बाल और त्वचा के लिए For More Visit https://www.healthtreatment.in
बाल झड़ना रोके :-
बाल झड़ने की स्थिति में केस्टर आयल या अरण्डी के तेल की मालिश करें रात को सोने से पहले हल्के गुनगुने केस्टर आयल से स्केल्प की अच्छे से मालिश करें सुबह बालों को धोने से एक जनता पहले इनमे दही लगाए लगभग आधा घंटा लगा रहने दे और फिर गुनगुने पानी से रेगुलर शेम्पू का प्रयोग कर बालों को धो ले आपके बाल चमक उठंगे और झड़ना भी धीरे-धीरे बंद हो जायंगे सप्ताह में एक बार इस प्रकिर्या को दोहराए
रुसी से छुटकारा :-
अगर आप अपने बालोंमें अत्यधिक रुसी से परेशान है तो २ चम्मच केस्टर आयल ले इसमें एक चम्मच शहद और एप्पल साइडर विनेगर मिलाये तीनो चीजों को अच्छी तरह मिलाये एक कटोरे में खीरे का रस निकालेऔर इसमें शुद एलोविरा रस मिलाये अब इस मिश्रण को बाकि की सामग्री के साथ अच्छी तरह मिक्स करें और अपने बालों की जड़ो में हल्के हाथो से मालिश करें लगभग दो घंटे के लिए ऐसे ही छोड़ दे और फिर बालों को अपने नियमित शम्पू से धो ले केस्टर आयल के एंटी फंगल गुण रुसी हटाने में बहूत ही कारगर है
रूखे बालों के लिए :-
अगर आपके बाल बहूत अधिक रूखे और बेजान दिखने लगे है तो लगभग दो चम्मच केस्टर आयल में ४ से ५ विटामिन इ के जेल कैप्सूल फोड़ कर डाले दोनों चीजों को आपस में अच्छी तरह मिलाये और रात को बालों में अच्छी तरह लगाए अगले दिन बालों को धो ले कुछ ही दिनों में आपके बाल मुलायम और रेशमी हो जायंगे
घने लम्बे बाल पाने के लिए :-
जल्दी लम्बे बाल पाने के लिए अपने नियमित उपयोग किये जाने वाले तेल में थोड़ा सा केस्टर आयल मिलाये और फिर इस तेल से अपने बालों की मालिश करें आपके बाल जल्दी बेढंगे और लम्बे भी होंगे
चेहरे की झुर्रियां कम करें :-
एक चम्मच केस्टर आयल में एक चम्मच बादाम का तेल मिलाये इसमें एक चम्मच एलोवेरा जल मिलाये तीन चीजों को अच्छी तरह मिलाये और चेहरे की मसाज करें लगभग १५ मिनट तक निचे से ऊपर की तरफ और अंदर से बाहर की तरफ चेहरे और गर्दन की मालिश करें हप्ते में एक बार दोहराए अगर आपकी त्वचा अत्यधिक ऑइली है तो आप बादाम के तेल की जगह जोजबा आयल इस्तेमाल कर सकते है चेहरे से झुर्रियां हटाने और त्वचा को गोरा और मुलायम बनाने में यह बहूत प्रभावकारी है
चेहरे के दाग धब्बे मिटाए :-
चेहरे के दाग धब्बे मिटाने के लिए रोज नहाने से आधा घंटा पहले चेहरे पर केस्टर आयल को अच्छी तरह से लगाए और फिर लगभग ३० मिनट के बाद चेहरा धो ले इसके नियमित इस्तेमाल से आप साफ सूंदर और बेदाग चेहरा प सकती है
रूखी त्वचा से छुटकारा पाने के लिए :-
अगर आपकी त्वचा बहूत अधिक रूखी है या सर्दियों में बहूत अधिक रूखी हो जाती है तो नहाने से पहले चेहरे पर केस्टर आयल की मसाज करें या फिर रात को सोने से पहले इसे अपनी स्किन पर लगाए रात भर ऐसे ही लगे रहने दे और सुबह चेहरा धो ले
अपने हाथो को मुलायम बनाए :-
अगर आपके हाथ बहुत रूखे और खुरदरे हो गए है तो रोज रात को सोने से पहले उन पर केस्टर आयल लगाए ऐसा रोज करें इसके नियमित उपयोग से आपके हाथ एकदम कोमल और मुलायम हो जायंगे
स्ट्रेच मार्क्स से छुटकारा :-
प्रेगनेंसी में और डिलीवरी के बाद भी एलोवेरा जेल में केस्टर आयल मिलाकर अपने पेट की मालिश करें इसे दिन में दो बार अपने पेट पर लगाए स्ट्रेच मार्क्स हटाने के लिए बहूत उपयोगी होम रेमेडी है
फ़टे नाखूनों के लिए बहूत अच्छा :-
केस्टर आयल नाख़ून और उंगलियों के पोरो के लिए अच्छा है नाखूनों और उंगलियों के पोरो पर केस्टर आयल रात में लगाए यह फ़टे नाखूनों से बचाता है
फ़टी एड़ियों का इलाज :-
हल्के गर्म एरंडी के तेल को रात के समय में फ़टी एड़ियों पर लगाए अपनी एड़ियों को धूल डालेयह फ़टी एड़ियों के दर्द को हटाएगा इसका लगातार इलाज फ़टी एड़ियों को ठीक करता है
तिल हटाने के लिए :-
अरण्डी के तेल के साथ बेकिंग सोडा मिलाये और त्वचा तिल क्षेत्र पर लगा ले इसे बार-बार अपनी त्वचा तिल क्षेत्र पर तब तक लगाए जब तक यह हट न जाये
सनबर्न से बचाए :-
गर्मियों के मौसम में सनबर्न एक ऐसी समस्या है जिसके शिकार भारत वर्ष में ज्यादातर लोग होते है केस्टर आयल सनबर्न ठीक करने का सबसे अच्छा विकल्प साबित होता है एक पात्र में एक चम्मच केस्टर आयल तथा इतनी ही मात्रा में नारियल का तेल ले और इसे अच्छे से अपने बालों एवं इसकी जड़ो पर लगाए इसका प्रयोग एक हप्ते तक करें और टेन मुक्त त्वचा पाए.
स्रोत : https://www.youtube.com/watch?v=hGd_aCySrT8
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बालों की समस्या से राहत दिलाता है कैस्टर ऑयल, अरंडी का तेल
कैस्टर ऑयल एक एेसा तेल है जो बाल संबंधी बहुत सारे समस्याओं से राहत दिलाने में मदद करता है और बालों को काला और घना बनाता है।

कैस्टर ऑयल (Castor oil) को अरंडी का तेल भी कहते हैं। इसके एन्टी-इन्फ्लैमटोरी (anti-inflammatory) और एन्टी-बैक्टिरीअल (anti-bacterial) गुण के कारण प्रसाधन यानि कॉज़्मेटिक्स में इसका इस्तेमाल बहुतायत मात्रा में किया जाता है।
कैस्टर ऑयल के फायदे-
1. बालों को झड़ने से रोकता है
कैस्टर ऑयल में रिसिनोलिईक एसिड (ricinoleic acid) और ओमेगा- 6 इसेनशल फैटी एसिड्स (omega- 6 essential fatty acids) होता है जो सिर में रक्त के संचालन को बढ़ाने में मदद करता है साथ ही बालों का विकास भी करता है। यह बालों को पौष्टिकता प्रदान करके जड़ों को मजबूती प्रदान करता है।
टिप- एक छोटे से कटोरी में ज़रूरत के अनुसार नारियल का तेल लें और उसमें समान मात्रा में कैस्टर ऑयल डालकर अच्छी तरह से मिला लें। इस मिश्रण को बालों के जड़ से लेकर सिरे तक अच्छी तरह से लगा लें। तेल लगाने के बाद सिर को शा‍वर कैप या सूती कपड़े से अच्छी तरह से बांधकर रात भर छोड़ दें। अगले दिन सुबह बालों को अच्छी तरह से धो लें।
2. सर के इन्फेक्शन या रूसी की समस्या से लड़ता है
कैस्टर ऑयल में एन्टी-वायरल (anti-viral) ,एन्टी-बैक्टिरीअल (anti-bacterial) और एन्टी-फंगल (anti-fungal) गुण के कारण यह सर के किसी भी संक्रमण (infection) जैसे समस्याओं से आसानी से लड़ने में सक्षम होता हैं। बाल झड़कर जब गंजेपन के आसार नजर आने लगते हैं और खुजलाहट जैसी समस्याएं होने लगती हैं तब यह तेल इनसे राहत दिलाने में सहायता करता है। यह प्रधानतः रूसी (dandruff) के समस्या में कामगार साबित होता है।
टिप- रूसी की समस्या से राहत पाने के लिए एक कटोरी में एक बड़ा चम्मच कैस्टर ऑयल और आधा नींबू का रस डालकर अच्छी तरह से मिला लें। इनको अच्छी तरह से बालों में लगाकर आधे घंटे तक यूं ही छोड़ दें। उसके बाद पानी से धो लें।
3. बालों के सिरे का फट जाने की समस्या को कम करता है (split ends)
बालों के सिरे के फट जाने की समस्या आम समस्या है। कैस्टर ऑयल सिर के गहराई तक जाता है और रूखे बालों को मुलायम बनाने में सहायता करता है।
टिप- कैस्टर ऑयल थोड़ा घना होता है इसलिए इसमें समान मात्रा में ऑलिव ऑयल डालकर अच्छी तरह से मिला लें। कैस्टर ऑयल रूखे बालों को ठीक करने के साथ-साथ बालों के सिरों को फटने से रोकता है। तेल को अच्छी तरह से सिर पर लगायें और आधे घंटे के बाद पानी से धो लें।
4. प्राकृतिक कन्डिशनर और मॉश्चराइज़र का काम करता है
कैस्टर ऑयल सिर के भीतर गहराई तक जाकर बालों को मॉश्चराइज़ करने में सहायता करता है। इस तेल को लगाकर बालों को काला और घना बना सकते हैं।
टिप- शैंपू लगाने के पंद्रह मिनट के पहले बालों में कैस्टर ऑयल लगायें और फिर धो लें। बालों को प्राकृतिक तरीके से कन्डिशनिंग करने के लिए एक कटोरी में ज़रूरत के अनुसार कैस्टर ऑयल लें और उसमें ऐलो वेरा जेल, शहद और नींबू के रस के कुछ बूंद डालें। उसके बाद इस मिश्रण को अच्छी तरह से मिलाने के बाद बालों के जड़ से लेकर सिरे तक अच्छी तरह से लगा लें। लगाने के आधा घंटे के बाद बालों को अच्छी तरह से धो लें।
कैस्टर ऑयल खरीदते वक्त किन बातों पर ध्यान देना चाहिए?
जिस भी कम्पनी का आप कैस्टर ऑयल खरीद रहे हो, वह कोल्ड-प्रेस्ड और प्रोसेस्ड (cold-pressed and processed), 100% शुद्ध होना चाहिए।
कौन-सा कैस्टर ऑयल खरीदना अच्छा होता है?
कुछ ब्रैंड (भारत में) अच्छे होते हैं, वे है- प्यूर कैस्टर ऑयल रिसिनस कॉमूनीस (Pure Castor Oil Ricinus Communis), सनफ्लवार कोल्ड प्रेस्ड प्यूर नैचरल कैरिअर (Sunflower Cold-Pressed Pure Natural Carrier), ऐलो वेदा कोल्ड प्रेस्ड हेक्सन फ्री कैस्टर ऑयल (Aloe Veda Cold-Pressed Hexane Free Castor Oil) आदि।
स्रोत : http://www.thehealthsite.com/hindi/beauty-tip-in-hindi-4-haircare-benefits-of-castor-oil/
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जानिये अरण्डी आपके लिये कितना उपयोगी है?
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अरण्डी तेल के 10 घरेलु उपचार
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विस्तार से अरण्डी के बारे में—जेके हैल्थ
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--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!

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सभी के स्वस्थ एवं सुदीर्घ जीवन की कामना के साथ-मेरे प्यारे और दुलारे तीन बच्चों की ममतामयी अद्वितीय माँ (मम्मी) जो दुखियों, जरूतमंदों और मूक जानवरों तक पर निश्छल प्यार लुटाने वाली एवं अति सामान्य जीवन जीने की आदी महिला थी! वह पाक कला में निपुण, उदार हृदया मितव्ययी गृहणी थी! मेरी ऐसी स्वर्गीय पत्नी "जानकी मीणा" की कभी न भुलाई जा सकने वाली असंख्य हृदयस्पर्शी यादों को चिरस्थायी बनाये रखते हुए इस ब्लॉग को आज दि. 08.08.12 को फिर से पाठकों के समक्ष समर्पित कर रहा हूँ!-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'

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आमवात आमाशय आयुर्वेद आयुर्वेदिक उपचार आयुर्वेदिक औषधियां आयुर्वेदिक सीरप-Ayurvedic Syrup आयुर्वेदिक-Ayurvedic आरोग्य आँव आंव आंवला आंवला जूस आंवला रस आशावादी-Optimistic आसन आसान प्रसव-Easy Delivery आहार चार्ट आहार-Food आॅर्गेनिक इन्द्रायण- इमर्जेंसी में होम्योपैथी इमली-Tamarind Tree इम्युनिटी इलाज इलाज का कुल कितना खर्चा इलायची उच्च रक्तचाप उच्च रक्तचाप-High Blood Pressure-Hypertension उत्तेजक उत्तेजना उदर शूल-Abdominal Haul उन्माद-Mania उम्र उल्टी एक्जिमा एक्यूप्रेशर एग्जिमा एजिंग-Aging एंटी ऑक्सीडेंट्स एंटी-ओक्सिडेंट एंटीऑक्सीडेंट एनजाइना एमिनो एसिड एरंड एलर्जी एलर्जी-Allergy एलोवेरा एलोवेरा जूस ऐसीडिटी ऑर्गेनिक ओमेगा 3 के स्रोत ओमेगा-3 ओर्गेनिक औषध-Drug औषधि सूची-Drug List औषधियों के नुकसान-Loss of drugs कचनार-Bauhinia Purpurea कचनार-बहुनिया-Bauhinia कड़वाहट कंडोम कद्दू कनेर कपास-COTTON कपिकच्छू कफ कब्ज कब्ज़ कब्ज-कोष्ठबद्धता-Constipation कब्जी कमजोरी कमर दर्द करेला कर्णरोग कष्टार्तव-Dysmenorrhea काजू कान कानून सम्मत काम काम शक्ति कामशक्ति कामशक्ति-Sexual power कामोत्तेजना कायाकल्प कार्बोहाइड्रेट कार्बोहाइड्रेट-Carbohydrates काला जीरा काला नमक काली जीरी काली तुलसी काले निशान कास-खांसी-Cough कीड़े कुकरौंधा कुकुंदर कुटकी-Black Hellebore कुल्थी कुल्ला कुष्ठ कृमि केला कैफीन-Caffeine कैलोरी चार्ट कैलोरी-Calories कैवांच कैविटी कैंसर कॉफी कॉफ़ी कोढ़ कोबरा कोलेस्ट्रॉल कोलेस्ट्रॉल-Cholesterol कौंच क्रियाशीलता क्षय रोग-Tuberculosis क्षारीय तत्व क्षुधानाश खजूर खजूर की चटनी खनिज खरबूजा-Musk melon खरेंटी खरैंटी शिलाजीत खांसी खिरेंटी खिरैटी खीरा-Cucumber खुजली खुशी-Joy खुश्की खुश्बू खूनबंद क​रने वाली रूखड़ी—Tridax procumbens खोया गंजापन-Baldness गठिया गठिया-Arthritis गठिया-Gout गंध गन्ने का रस गरमा गरम गर्भधारण गर्भपात गर्भवती गर्भवती कैसे हों? गर्भावस्था की विकृतियां-Disorders of Pregnancy गर्भावस्था के दौरान संभोग-Sex During Pregnancy गर्भावस्था-Pregnancy गर्भाशय-उच्छेदन के साइड इफेक्ट्स-Side Effects of Hysterectomy गर्म पानी गर्मी गर्मी-Heat गाजर गाजवां गाँठ-Knot गिलोय गिल्टी गुंदा गुलज़ाफ़री गृध्रसी गृह-स्वामिनी गैस गोक्षुरादि चूर्ण गोखरू गोखरू (LAND CALTROPS) गोंद कतीरा-Hog-Gum गोंदी गोभी-Cabbage गोरख मुंडी गोरखमुंडी घमोरी घाघरा घाव चकवड़ चक्कर चपाती चमत्कारिक सब्जियां चर्म चर्म रोग चर्मरोग चाय चाय-Tea चालीस के पार-Forty Across चिकनगुनिया चिकित्सकीय चिरायता-Absinth चिरोटा चुंबन चोक चौलाई छपाकी छरहरी काया छाछ छाले छीकें छुआरा छुहारा छोटा गोखरू छोटा धतूरा छोटी हरड़ जकवड़ जंगली/कटीली चौलाई जटामांसी-Spikenard जलजमनी जलन जलोदर रोग-Ascites Disease जवारे जवासा-Alhag जहर जामुन का जूस जायफल-Nutmeg जीरा जीवन रक्षक जुएं जुकाम जुलाब जूएं जूस जूस-Juice जोड़ों के दर्द ज्वर ज्वर-Fiver झांईं झुर्रियाँ झुर्री झूठे दर्द टमाटर-Tomatoes टाइफाइड टायफायड टॉन्सिल टोटला ट्यूमर ठेकेदार डॉक्टर डकार डायबिटीज डायरिया डिनर डिलेवरी डीकामाली डीगामाली डेंगू डेंगू-Dengue डॉ. निरंकुश डॉ. मीणा ढीलापन ढीली योनि तकलीफ का सही इलाज तरबूज-Watermelon तलाक ताकत तिल तिल्ली तुंबा तुंबी तुलसी तेल त्रिदोषनाशक त्रिफला त्वचा थकान थायरायड-Thyroid थायरॉइड दण्डनीय अपराध दन्तकृमि दन्तरोग दमा दर्द दर्दनाक दस्त दही दाग-धब्बे-Stains-Spots दाढ़ दांत दांतो में कैविटी-Teeth Cavity दाद दाम्पत्य दाम्पत्य-Conjugal दाल दालचीनी दालें दिल दुर्गंध दुर्बलता दुष्प्रभाव दूध दूधी दूधी-Milk Hedge दृष्टिदोष द्रोणपुष्पी-Leucas Cephalotes धड़कन धनिया-Coriander धमासा धातु धातु पतन धार्मिक नज़ला नपुंसकता नाक नाखून नागबला नागरमोथा नाडी हिंगु नाड़ी हिंगु (डिकामाली) नामर्दी नारियल नाश्ता निमोनिया निम्न रक्तचाप निम्बू नियासिन निरोगधाम निर्गुण्डी निसोरा नींद नींबू नींबू-Lemon नीम-azadirachta indica नुस्खे-Tips नेगड़ नेगड़-निर्गुन्डी-Vitex negundo नेत्र रोग नैतिक नौसादर न्युमोनिया-Pneumonia पढ़ने में मन लगेगा पंतजलि पत्तागोभी-CABBAGE पत्थरचट्टा पत्नी पथरी पनीर पपीता पपीता-CARICA PAPPYA पमाड परहेज पराठा परिस्थिति पवाड़ पवाँर पाइल्स पाक-कला पाचक पाचन पाठक संख्या पंद्रह लाख पायरिया पारिजात पालक पालक-Spinach पित्त पित्ती पिंपल-मुंहासे-Pimples-Acne पिरामिड पीलिया पीलिया-Jaundice पीलिया-कामला-Jaundice पुआड़ पुदीना पुनर्नवा-साटी-सौंटी-Punarnava पुरुष पेचिश पेट के कीड़े पेट दर्द पेट में गैस पेट रोग पेंसिल थेरेपी-Pencil Therapy पौरुष प्याज-Onion प्रजनन प्रतिरक्षा प्रतिरक्षा प्रणाली प्रतिरक्षा-इम्युनिटी-Immunity प्रतिरोधक प्रतिरोधक-Resistance प्रदर प्रमेह प्रवाहिका (पेचिश)-Dysentery प्रसव प्रसव सुरक्षा चक्र प्रसूति प्राणायाम प्रेग्नेंसी-Pregnancy प्रेमिका प्रोटीन प्रोटीन का कार्य प्रोटीन के स्रोत प्रोस्टेट ग्रन्थि-Prostate Gland प्लीहा प्लूरिसी-Pleurisy फफूंद-Fungi फरास फल फल-Fruit फाइबर फिटकरी फुंसी-Pimples फूलगोभी-CAULIFLOWER फेंफड़े फैट फोटोफोबिया फोड़ा फोड़े-Boils फोलिक एसिड-Folic Acid फ्लू फ्लू-Flu फ्लेक्स सीड्स बकायन बकुल बड़ी हरड़ बथुआ बथुआ पाउडर बथुआ-White Goose Foot बदबू बबूल-ACACIA बरसाती बीमारियाँ बरसाती बीमारियां बलगम बलवृद्धि बला बवासीर बहुमूत्रता- बांझपन बादाम-Almonds बादाम. बाल बाल झडऩा-Hair Falling बिना सिजेरियन मां बनें बीजबंद बीमारियों के अनुसार औषधियां बुखार बेल बेल – Bael बेली बैक्टीरिया ब्र​ह्मदण्डी ब्रेस्ट ग्रोथ ब्लड प्रेशर ब्लैक मेलिंग भगंदर भगंदर-Fistula-in-ano भगनासा भगोष्ठ भय भस्मक रोग भावनात्मक भुई आंवला-Phyllanthus Niruri भूई आमला भूख भूख बढ़ाने भूमि आंवला भोजनलीवर मकोय मकोय-Soleanum nigrum मंजीठ मटर-PEA मंद दृष्टि मंदाग्नि मदार मधुमेह मधुमेह-Diabetes मन्दाग्नि-Dyspepsia मरुआ मर्दाना मलेरिया (Malaria) मस्तिष्क मस्से मस्से-WARTS महाबला माइग्रेन माईग्रेन माईंड सैट माजूफल मानसिक मानसिक-Mental मानिसक तनाव-Mental Stress मायोपिया मासिक मासिक-धर्म मासिकधर्म मासिकस्राव माहवारी मिनरल मिर्गी मिर्च-Chili मुख मैथुन-ओरल सेक्स-Oral Sex मुधमेह मुलहठी मुलेठी मुहाँसे मूँगफली मूड डिस्ऑर्डर-Mood Disorders मूत्र मूत्र असंयमितता मूत्र में जलन-Burning in Urine मूत्राशय मूर्च्छा (Unconsciousness) मूली मृत्यु मृत्युदण्ड मेथी मेथी दाना मेंहदी मैथुन मोगरा (Mogra) मोटापा मोटापा-Obesity मोतियाबिंद मौत मौलसिरी मौसमी बीमारियां यकृत यकृत प्लीहा यकृत वृद्धि-Liver Growth यकृत-लीवर-जिगर-Lever यूपेटोरियम परफोलियेटम योग विज्ञापन योन योनि योनि शूल-Vaginal Colic योनि संकोचन योनी योनी संकोचन यौन यौन आनंद यौन दौर्बल्य यौनशक्ति यौनशिक्षा यौनानंद यौनि रक्त प्रदर (Blood Pradar) रक्त रोहिड़ा-TECOMELLA UNDULATA रक्तचाप रक्तपित्त रक्तशोधक रक्ताल्पता रक्ताल्पता (एनीमिया)-Anemia रस-juices रातरानी Night Blooming Jasmine/Cestrum nocturnum रामबाण रामबाण औषधियाँ-Panacea Medicines रुक्षांश रूसी रूसी मोटापा रेचक रेठु रोग प्रतिरोधक लकवा लक्ष्मी लंच लसोड़ा लस्सी लहसुन लहसुन-Garlic लाइलाज लाभ लिंग लिसोड़ा लीकोरिया लीवर लीवर-Liver लू-hot wind लैंगिक लोनिया लौकी लौंग की चाय ल्युकोरिया ल्यूकोरिया वजन वज़न वजन कम वजन बढाएं-Weight Increase वन/जंगली तुलसी वमन वमन विकृति-Vomiting Distortion वसा वात वात श्लैष्मिक ज्वर वात-Rheumatism वायरल वायरल फीवर वायरल बुखार-Viral Fever वासना विटामिन विधारा वियाग्रा-Viagra विलायती नीम विष विषखपरा वीर्य वृक्कों (गुर्दों) में पथरी-Renal (Kidney) Stone वैज्ञानिक वैधानिक वैवाहिक जीवन वैवाहिक जीवन-Marital वैश्यावृति व्यायाम शंखपुष्पी शरपुंखा शराब शरीफा-सीताफल-Custard apple शर्करा शलगम-Beets शल्यक्रिया शहद शहद-Honey शारीरिक शिथिलता शीघ्र पतन शीघ्रपतन शुक्राणु-Sperm शुक्राणू शुगर शोथ श्योनाक श्रेष्ठतर श्वास श्वांस श्वेत प्रदर श्वेत प्रदर-Leucorrhea षड़यंत्र संकुचन संकोच संक्रमण संखाहुली संतरा-Orange संतान संतुष्टि सत्यानाशी सदा सुहागन सदाफूली सदाबहार सदाबहार चूर्ण सनबर्न सफ़ेद दाग सफेद पानी सब्जि सब्जियां-Vegetables संभालू संभोग समर्पण-Dedication सरकार को सुझाव सरफोंका सरहटी सर्दी सर्दी जुकाम-Cold सर्पक्षी सर्पविष सलाद संवेदना सहदेई सहदेवी साइटिका साइटिका-Sciatica साइड इफेक्ट्स साबूदाना-Sago सायटिका सिजेरियन सिर दर्द सिरका सिरदर्द सिरोसिस सुगर सुदर्शन सुहागा सूखा रोग सूजन सेक्स सेक्स परामर्श-Sex Counseling सेक्स पावर सेक्स समस्या सेक्‍स-Sex सेंधा नमक सेब सेमल-Bombax Ceiba सेल्स सोजन-सूजन सोंठ सोना पाठा सोयाबीन सोयाबीन (Soyabean) सोयाबीन-Soyabean सोराइसिस सोरियासिस-Psoriasis सौंठ सौंदर्य सौंदर्य-Beauty सौन्दर्य सौंफ सौंफ की चाय सौंफ-Fennel स्किन स्तन स्तन वृद्धि स्तनपान स्तम्भन स्त्री स्त्रीत्व स्त्रैण स्वप्न दोष स्वप्नदोष स्वप्नदोष-Night Fall स्वरभंग स्वर्णक्षीरी स्वस्थ स्वास्थ्य स्वास्थ्य रक्षक सखा हजारदानी हड़जोड़ हड्डी हड्डी में दर्द हड्डीतोड़ ज्वर हड्डीतोड़ बुखार हरड़ हरसिंगार-Night Jasmine हरी दूब-CREEPING CYNODAN हरीतकी हर्टबर्न हस्तमैथुन हस्तमैथुन-Masturbation हालात हिचकी हिचकी-Hiccup हिमोग्लोबिन-hemoglobin हिस्टीरिया हिस्टीरिया-Hysteria हींग हीनतर हृदय हृदय-Heart हेपेटाइटिस हेल्थ 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