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आक- मदार

प्रेषित समय :10:45:31 AM / Tue, Feb 17th, 2015
कुछ पेड़-पौधे ऐसे हैं जिनसे हम कई चमत्कारिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं. हमारे घर या घर के आसपास होने पर ही इनके फायदे प्राप्त होते हैं. इन पेड़ों-पौधों में आंकड़े का पौधा भी शामिल है, यदि यह घर के सामने हो तो बहुत लाभ पहुंचाता है.

मदार (वानस्पतिक नाम : Calotropis gigantea) एक औषधीय पादप है. इसको मंदार, आक, अर्क और अकौआ भी कहते हैं. इसका वृक्ष छोटा और छत्तादार होता है. पत्ते बरगद के पत्तों समान मोटे होते हैं. हरे सफेदी लिये पत्ते पकने पर पीले रंग के हो जाते हैं. इसका फूल सफेद छोटा छत्तादार होता है. फूल पर रंगीन चित्तियाँ होती हैं. फल आम के तुल्य होते हैं जिनमें रूई होती है. आक की शाखाओं में दूध निकलता है. वह दूध विष का काम देता है. आक गर्मी के दिनों में रेतिली भूमि पर होता है. चौमासे में पानी बरसने पर सूख जाता है.

आक के पौधे शुष्क, उसर और ऊँची भूमि में प्रायः सर्वत्र देखने को मिलते हैं. इस वनस्पति के विषय में साधारण समाज में यह भ्रान्ति फैली हुई है कि आक का पौधा विषैला होता है, यह मनुष्य को मार डालता है. इसमें किंचित सत्य जरूर है क्योंकि आयुर्वेद संहिताओं में भी इसकी गणना उपविषों में की गई है. यदि इसका सेवन अधिक मात्रा में कर लिया जाये तो, उल्दी दस्त होकर मनुष्य की मृत्यु हो सकती है. इसके विपरीत यदि आक का सेवन उचित मात्रा में, योग्य तरीके से, चतुर वैद्य की निगरानी में किया जाये तो अनेक रोगों में इससे बड़ा उपकार होता है.

पेड़-पौधों का सबसे बड़ा फायदा है कि उनसे हमें ऑक्सीजन गैस प्राप्त होती है. इसके अलावा प्राकृतिक दृष्टिकोण से भी पेड़-पौधों का सर्वाधिक महत्व है. इनके बिना वातावरण को संतुलित किया ही नहीं जा सकता. हर परिस्थिति में हरियाली हमारे लिए फायदेमंद ही है. इन फायदों के साथ ही शास्त्रों के अनुसार कई धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व भी बताए गए हैं.

शास्त्रों अनुसार आंकड़े के फूल शिवलिंग पर चढ़ाने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं और अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है. आंकड़े पौधा मुख्यद्वार पर या घर के सामने हो तो बहुत शुभ माना जाता है. इसके फूल सामान्यत: सफेद रंग के होते हैं. विद्वानों के अनुसार कुछ पुराने आंकड़ों की जड़ में श्रीगणेश की प्रतिकृति निर्मित हो जाती है जो कि साधक को चमत्कारी लाभ प्रदान करती है.

ज्योतिष के अनुसार जिस घर के सामने या मुख्यद्वार के समीप आंकड़े का पौधा होता है उस घर पर कभी भी किसी नकारात्मक शक्ति का प्रभाव नहीं पड़ता है. इसके अलावा वहां रहने वाले लोगों को तांत्रिक बाधाएं कभी नहीं सताती. घर के आसपास सकारात्मक और पवित्र वातावरण बना रहता है जो कि हमें सुख-समृद्धि और धन प्रदान करता है. ऐसे लोगों पर महालक्ष्मी की विशेष कृपा रहती है और जहां-जहां से लोग कार्य करते हैं वहीं से इन्हें धन लाभ प्राप्त होता है.

चिकित्सा में उपयोग

  1. आक का हर अंग दवा है, हर भाग उपयोगी है. यह सूर्य के समान तीक्ष्ण तेजस्वी और पारे के समान उत्तम तथा दिव्य रसायनधर्मा हैं. कहीं-कहीं इसे वानस्पतिक पारद भी कहा गया है.
  2. आक के पीले पत्ते पर घी चुपड कर सेंक कर अर्क निचोड कर कान में डालने से आधा शिर दर्द जाता रहता है. बहरापन दूर होता है. दाँतों और कान की पीडा शाँत हो जाती है.
  3. आक के कोमल पत्ते मीठे तेल में जला कर अण्डकोश की सूजन पर बाँधने से सूजन दूर हो जाती है. तथा कडुवे तेल में पत्तों को जला कर गरमी के घाव पर लगाने से घाव अच्छा हो जाता है. एवं पत्तों पर कत्था चूना लगा कर पान समान खाने से दमा रोग दूर हो जाता है. तथा हरा पत्ता पीस कर लेप करने से सूजन पचक जाती है.
  4. कोमल पत्तों के धूँआ से बवासीर शाँत होती है. कोमल पत्ते खाय तो ताप तिजारी रोग दूर हो जाता है.
  5. आक के पत्तों को गरम करके बाँधने से चोट अच्छी हो जाती है. सूजन दूर हो जाती है. आक के फूल को जीरा, काली मिर्च के साथ बालक को देने से बालक की खाँसी दूर हो जाती है.
  6. दूध पीते बालक को माता अपनी दूध में देवे तथा मदार के फल की रूई रूधिर बहने के स्थान पर रखने से रूधिर बहना बन्द हो जाता है. आक का दूध लेकर उसमें काली मिर्च पीस कर भिगोवे फिर उसको प्रतिदिन प्रातः समय मासे भर खाय 9 दिन में कुत्ते का विष शाँत हो जाता है. परंतु कुत्ता काटने के दिन से ही खावे. आक का दूध पाँव के अँगूठे पर लगाने से दुखती हुई आँख अच्छी हो जाती है. बवासीर के मस्सों पर लगाने से मस्से जाते रहते हैं. बर्रे काटे में लगाने से दर्द नहीं होता. चोट पर लगाने से चोट शाँत हो जाती है. जहाँ के बाल उड गये हों वहाँ पर आक का दूध लगाने से बाल उग आते हैं. तलुओं पर लगाने से महिने भर में मृगी रोग दूर हो जाता है. आक के दूध का फाहा लगाने से मुँह का लक्वा सीधा हो जाता है. आक की छाल को पीस कर घी में भूने फिर चोट पर बाँधे तो चोट की सूजन दूर हो जाती है. तथा आक की जड को दूध में औटा कर घी निकाले वह घी खाने से नहरूआँ रोग जाता रहता है.
: http://www.palpalindia.com/2015/02/17/haryali-Figures-plant-Calotropis-gigantea-Medicinal-Plants-news-in-hindi-india-85686.html
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आक , आकडा , मदार
  1. _ इसे हम शिवजी को चढाते है ; अर्थात ये ज़हरीला होता है . इसलिए इसे निश्चित मात्रा में वैद्य की देख रेख में लेना चाहिए .पर कुछ आसान प्रयोग आप कर सकते है -
  2. _ अगर किसी को चलती गाडी में उलटी आती हो ( motion sickness ) तो यात्रा पर निकलतेसमय जो स्वर चल रहा हो अर्थात जिस तरफ की श्वास ज़्यादा चल रही हो उस पैर के नीचे आक के पत्ते रखे . यात्रा के दौरान कोई तकलीफ नहीं होगी .
  3. _ आक के पीले पड़े पत्तों को घी में गर्म कर उसका रस कान में डालने से कान का दर्द ठीक होता है .
  4. _ आक का दूध कभी भी सीधे आँखों पर नहीं लगाना चाहिए . अगर दाई आँख दुःख रही हो तो बाए पैर के नाख़ून और बाई आँख दुःख रही हो तो दाए पैर के नाखूनों को आक के दूध से तर कर दे .
  5. _ रुई को आक के दूध औरथोड़े से घी में भिगोकर दांत में रखने से दांतों का दर्द ठीक हो जाता है .
  6. _ हिलते हुए दांत पर आक का दूध लगाकर आसानी से निकाला जा सकता है .
  7. _ पीले पड़े आक के पत्तों के रस का नस्य लेने से आधा शीशी में लाभ होता है .
  8. _ आक की कोपल को सुबह खाली पेट पान के पत्ते में रख चबा कर खाने से ३ से 5 दिनों में पीलिया ठीक हो जाता है .
  9. _ सफ़ेद आक की छाया में सुखी जड़ को पीस कर १-२ ग्राम की मात्रा गाय के दूध के साथ लेने से बाँझपन ठीक होता है . बंद ट्यूब और नाड़ियाँ खुल जाती है ; मासिक धर्म गर्भाशय की गांठों में लाभ होता है .
  10. _ पैरों के छाले इसकादूध लगाने से ठीक हो जाते है .
  11. _ गठिया में आक के पत्तों को घी लगा कर तवे पर गर्म कर सेकें .
  12. _ आक की रुई को वस्त्रों में भर , रजाई तकिये में इस्तेमाल करने से वात रोगों में लाभ मिलता है .
  13. _ कोई घाव अगर भर ना रहा हो तो आक की रुई उसमे भर दे और रोज़ बदल दे .
  14. _ आक के दूध में सामान मात्रा में शहद मिला कर लगाने से दाद में लाभ होता है .आक की जड़ के चूर्ण को दही में मिलाकर लगाना भी दादमें लाभकारी होता है.
  15. _ आक के पुष्प तोड़ने पर जो दूध निकलता है उसे नारियल तेल में मिलाकर लगाने से खाजदूर होती है .इसके दूध को कडवे तेल में मिलाकर लगाने से भी लाभ होता है .
  16. _ इसके पत्तों को सुखाकर उसकी पावडर जख्मों पर बुरकने से दूषित मांस दूर हो कर स्वस्थ मांस पैदाहोता है .
  17. _ आक की मिटटी की टिकिया कीड़े पड़े हुए जख्मों पर बाँधने से कीड़े टिकिया पर आ कर मर जाते है और जख्म धीरे धीरे ठीक हो जाता है .
  18. _ आक के दूध के शहद के साथ सेवन करने से कुष्ठ रोग थी होता है .आक के पुष्पों का चूर्ण भी इसमें लाभकारी है .
  19. _ पेट में दर्द होने पर आक के पत्तों पर घी लगा कर गर्म कर सेके .
  20. _ स्थावर विष पर २-३ ग्राम आक की जड़ को घिस कर दिन में ३-४ बार पिलाए .आक की लकड़ी का 6 ग्राम कोयला मिश्री के साथ लेने से शरीर में जमा पारा भी पेशाब के रास्ते निकल जाताहै .
  21. _ आक और भी कई रोगों का इलाज करता है पर ये योग वैद्य की सलाह से ही लेने चाहिए .
  22. _ इसके अर्क प्रयोग से होने वाले हानिकारक प्रभाव को कम करने के लिए दूध और घी का प्रयोग करें.

: http://sanwariyaa.blogspot.in/2013/04/blog-post_3406.html
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मंगलवार, 25 अगस्त 2009
मदार :वनस्पति,पौधा,लता,वृक्ष -3
पौधा है : मदार , वैज्ञानिक (Botanical) नाम: Calotropis gigantea,
अन्य नाम - अर्क(संस्कृत), आक, अकौआ
मदार आदमी की ऊँचाई से भी अधिक बढ़ने वाला झाड़ी प्रकार का पौधा है। इसकी पत्तियाँ स्निग्ध, मांसल सी और कोमल होती हैं। तोड़ने पर दूध सा स्राव निकलता है जिसे लोग विषैला बताते हैं।

मुख्यत: यह दो प्रकार का होता है। एक प्रकार में पुष्प एकदम श्वेत होते हैं। पत्तियाँ कुछ छोटी तो पौधा बृक्ष सा आकार लेता हुआ। दूसरे प्रकार में पत्तियाँ अपेक्षाकृत बड़ी, पौधा छोटा और पुष्प बैगनी रंगत लिए होते हैं।

इसके संस्कृत नाम 'अर्क' का एक अर्थ सूर्य भी होता है। प्रात: बेला में सूर्य की किरणों से नहाए इसके श्वेत पुष्पों को देखने से इस संज्ञा की सार्थकता सिद्ध हो जाती है। अद्भुत कांति !

यह पौधा तमाम औषधीय गुण रखता है और नानियों, दादियों का प्रिय रहा है। इसके फल जब पक कर बीज प्रसारण के लिए चिटकते हैं तो उनसे रूई निकलती है। इस रूई से बने तकिये को लगा कर सोने से 'अधकपारी' शिरोपीड़ा में लाभ होता है। इस प्रयोग को सफल होते मैंने स्वयं देखा है।

बचपन में हम लोग इसके दूध को प्रतिदिन्द्वी की आँखों मे डाल उन्हें फोड़ देने की धमकियाँ दिया करते थे। नाना नानी ने हमेशा इस पौधे के निकट जाने से मना किया - सम्भवत: इसके दूध से आतंकित रहने के कारण। वाकई इतना त्वरित प्रभाव होता है, इसकी परीक्षा नहीं कर सके। आँखों से चांस कौन ले?

महादेव की पूजा में इसके पुष्पों का प्रयोग होता है। किसी और देवी देवता की पूजा में इसे प्रयुक्त होता मैंने नहीं देखा। भाँग और धतूरा की तरह ही औघड़दानी शिव ने इस सर्वहारा पौधे पर भी अपनी कृपा रखी है। शिव से सम्बद्ध और पौधों की तरह ही टोटका वग़ैरह में भी इसका प्रयोग होता है।

सम्भवत: आप ने ध्यान न दिया हो - गाँवों में कोला कोलवाई, बँसवारी और सरेह में पाया जाने वाला यह पौधा अब कम दिखने लगा है। यहाँ गोमती नगर में एल डी ए इस पर कुछ अधिक ही मेहरबान है जिसके कारण इसके पौधे बाकायदे रोपित किए गए हैं। मैंने बड़े अनूठे चित्र मोबाइल से खींचे थे लेकिन दुर्भाग्य से कुछ चित्र गायब हो गए। इसी कारण उपर के दो चित्रों के लिए वीकीपीडिया की शरण लेनी पड़ी। वीकीपीडिया को आभार।

नए घर में आया तो आसपास इसके दूसरे प्रकार की बहुतायत दिखी। अपनी पूरी देहाती गरिमा के साथ यह पौधा यहाँ बहुतायत में उपलब्ध है। यहाँ पादप और जंतु जगत की अन्योन्याश्रयिता का एक उदाहरण मैंने पाया है। एक बहुत ही रंग बिरंगी टिड्डे की जाति आहार के लिए पूरी तरह से इसकी कोमल पत्तियों पर निर्भर है। ये टिड्डे इन पत्तियों पर ही रहते हैं, उन्हें खाते हैं, वहीं सम्भोग करते हैं . .। किसी और पौधे पर मैंने उन्हें नहीं पाया। नीचे कुछ चित्र दे रहा हूँ।
क्या आप इस टिड्डे की जाति बता सकते हैं?
रचनाकार : गिरिजेश राव, Girijesh Rao , समय 8:25 am

: http://girijeshrao.blogspot.in/2009/08/3.html

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आक : भारत की प्रसिद्ध जड़ी बूटी ग्रन्थमाला-१



(http://www.jatland.com/home/Aak)

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--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!

--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!
सभी के स्वस्थ एवं सुदीर्घ जीवन की कामना के साथ-मेरे प्यारे और दुलारे तीन बच्चों की ममतामयी अद्वितीय माँ (मम्मी) जो दुखियों, जरूतमंदों और मूक जानवरों तक पर निश्छल प्यार लुटाने वाली एवं अति सामान्य जीवन जीने की आदी महिला थी! वह पाक कला में निपुण, उदार हृदया मितव्ययी गृहणी थी! मेरी ऐसी स्वर्गीय पत्नी "जानकी मीणा" की कभी न भुलाई जा सकने वाली असंख्य हृदयस्पर्शी यादों को चिरस्थायी बनाये रखते हुए इस ब्लॉग को आज दि. 08.08.12 को फिर से पाठकों के समक्ष समर्पित कर रहा हूँ!-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'

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संभालू संभोग समर्पण-Dedication सरकार को सुझाव सरफोंका सरहटी सर्दी सर्दी जुकाम-Cold सर्पक्षी सर्पविष सलाद संवेदना सहदेई सहदेवी साइटिका साइटिका-Sciatica साइड इफेक्ट्स साबूदाना-Sago सायटिका सिजेरियन सिर दर्द सिरका सिरदर्द सिरोसिस सुगर सुदर्शन सुहागा सूखा रोग सूजन सेक्स सेक्स परामर्श-Sex Counseling सेक्स पावर सेक्स समस्या सेक्‍स-Sex सेंधा नमक सेब सेमल-Bombax Ceiba सेल्स सोजन-सूजन सोंठ सोना पाठा सोयाबीन सोयाबीन (Soyabean) सोयाबीन-Soyabean सोराइसिस सोरियासिस-Psoriasis सौंठ सौंदर्य सौंदर्य-Beauty सौन्दर्य सौंफ सौंफ की चाय सौंफ-Fennel स्किन स्तन स्तन वृद्धि स्तनपान स्तम्भन स्त्री स्त्रीत्व स्त्रैण स्वप्न दोष स्वप्नदोष स्वप्नदोष-Night Fall स्वरभंग स्वर्णक्षीरी स्वस्थ स्वास्थ्य स्वास्थ्य रक्षक सखा हजारदानी हड़जोड़ हड्डी हड्डी में दर्द हड्डीतोड़ ज्वर हड्डीतोड़ बुखार हरड़ हरसिंगार-Night Jasmine हरी दूब-CREEPING CYNODAN हरीतकी हर्टबर्न हस्तमैथुन हस्तमैथुन-Masturbation हालात हिचकी हिचकी-Hiccup हिमोग्लोबिन-hemoglobin हिस्टीरिया हिस्टीरिया-Hysteria हींग हीनतर हृदय हृदय-Heart हेपेटाइटिस हेल्थ 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