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डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' आॅन लाईन होम्योपैथ एवं परम्परागत चिकित्सक, 9875066111

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बुखार चाहे कैसा भी हो .

बुखार चाहे कैसा भी हो.
बुखार का” ……..
बुखार एक बहुत ही आम समस्या है जो कभी वायरल फीवर के रूप में कभी घातक मलेरिया बनकर अलग-अलग नामों से यह सभी को अपनी चपेट में ले ही लेता है। लेकिन अधिकतर लोग सामान्य बुखार में डॉक्टर के पास जाने से बचते हैं।

परिचय :

मलेरिया का बुखार ठंड़ लगकर आता है। इस बुखार में रोगी के शरीर का तापमान 101 से 105 डिग्री तक बना रहता है। यह एक प्रकार का संक्रामक बुखार हैं जो कि पहले, दूसरे, तीसरे और चौथे दिन पर ठंड़ लगकर आता है और फिर पसीना आकर उतर आता है। इस मलेरिया बुखार की तीन अवस्थाएं होती हैं। पहली- कंपकंपी के साथ बुखार आता है और अन्त में पसीना आकर बुखार उतर जाता है। यह मलेरिया बुखार के लक्षण माने जाते हैं। इसमें रोगी के जिगर और तिल्ली आदि बढ़ जाते हैं। यह एनोफिलीस नामक मादा मच्छरों के द्वारा फैलता है।
कारण : मलेरिया का बुखार ज्यादातर बारिश के मौसम में होता हैं। इसका अभिप्राय यह हैं कि यह बुखार मच्छरों के द्वारा फैलता है। यह मच्छर पानी के गड्डो, पोखरों, नलियों आदि के रूके हुए पानी में पैदा होते हैं। एनोफिलीज़ नामक मच्छर मरीज का खून चूस लेते हैं। यही परजीवी युक्त मच्छर जब किसी स्वस्थ व्यक्ति को काटते हैं, तो वह इस रोग से पीड़ित हो जाता है।
लक्षण :- मलेरिया बुखार में रोगी के सिर में दर्द, जी मिचलाना, उल्टी होना, ठंड़ लगकर तेज बुखार का चढ़ना, बुखार उतरते समय पसीना आना आदि लक्षण पाए जाते हैं।

परहेज : मलेरिया के बुखार में रोगी को पेट को साफ करने का जुलाब दें। तेज बुखार होने पर ठंड़े पानी या बर्फ के पानी की पट्टी माथे पर रखें।

सावधानी : बरसात के दिनों में नालियों, गड्डों आदि में पानी इकट्टा न होने दें क्योंकि मच्छर इस गंदे पानी में ही अडें देते हैं। रोगाणुनाशक दवाओं जैसे- डी. डी. टी, बी. एच. सी. पाउडर, नीम या तम्बाकू का घोल या मिट्टी के तेल को सीलनभरी दीवारों, पोखरों, तालाबों, और नालियों में छिड़क दें। रोगी को पानी उबालकर पिलाना चाहिए और पत्ते वाली सब्जियां नहीं खाने को देनी चाहिए।

विभिन्न औषधियों से उपचार-

तुलसी :

  1. काली तुलसी या मरूवे के 4 पत्ते, बबूल के 4 पत्ते, काली मिर्च 4 पीसी तथा अजवाचन 1 ग्राम को एक साथ पीसकर पकाकर काढ़ा बना लें। इस काढ़े के ठंड़ा हो जाने पर बुखार चढ़ने से पहले पिलाने से बच्चों का मलेरिया का बुखार ठीक हो जाता है।
  2. तुलसी के 15 पत्ते, 10 काली मिर्च और 2 चम्मच चीनी को एक कप पानी में उबालकर काढ़ा बना लें। इस काढ़े की 3 खुराक दिन में 3 बार लेने से मलेरिया बुखार में लाभ मिलता है।
  3. तुलसी के 10 पत्ते, 5 ग्राम करंज की गिरी, 10 दाने काली मिर्च तथा 5 ग्राम जीरे आदि को पीसकर छोटी-छोटी गोलियां बना लें। दिन में 3 बार इन 2-2 गोलियों का सेवन करने से मलेरिया में लाभ होता है।
  4. 10 ग्राम तुलसी के पत्ते और 7 कालीमिर्च को पानी में पीसकर सुबह और शाम लेते रहने से मलेरिया बुखार ठीक होता है।
  5. तुलसी के 22 पत्ते और 20 पिसी हुई कालीमिर्च को 2 कप पानी में डालकर उबाल लें। जब पानी चौथाई भाग रह जाये तब इसमें मिश्री मिलाकर ठंड़ा करके पीने से मलेरिया बुखार में लाभ होता है।
  6. तुलसी के पत्ते और कालीमिर्च को एकसाथ मिलाकर सेवन करने से मलेरिया के बुखार में आराम मिलता है।
  7. तुलसी के पत्तों को प्रतिदिन सेवन करने से मलेरिया नहीं होता है। यदि मलेरिया हो जाए तो बुखार उतरने पर सुबह के समय तुलसी के 15 पत्ते और 10 कालीमिर्च खाने से मलेरिया बुखार दुबारा नहीं होता है।
  8. तुलसी के सेवन से सभी प्रकार के बुखारों में लाभ होता है। 20 तुलसी के पत्ते, 10 कालीमिर्च और 1 चम्मच शक्कर का काढ़ा मिलाकर सेवन करने से मलेरिया बुखार में लाभ होता है।
  9. गुड़, कालीमिर्च तथा तुलसी का काढ़ा बनाकर नींबू के रस मिलाकर दिन में 3-3 घंटे के अन्तराल से गर्म-गर्म पीना चाहिए। इसके बाद रोगी को कम्बल ओढ़ा देना चाहिए। ऐसा करने से मलेरिया का बुखार दूर हो जाता है।

करंजुआ : 5 ग्राम करंजुआ के बीजों को पीसकर बनी छोटी-छोटी गोली को बुखार आने से 2 घण्टे पहले और बुखार जाने के 2 घण्टे बाद पानी के साथ दिन में 2 बार लेने से लाभ मिलता है।
ढाक : 10 ग्राम ढाक के बीजों की गिरी और 10 ग्राम करंजवा के बीजों के गिरी को पानी में घिसकर छोटी-छोटी गोलियां बनाकर सुखा लें। बुखार आने के 4 घण्टे पहले यह 1 गोली पानी के साथ लेने से मलेरिया के बुखार में आराम मिलता है।
जीरा : 1 चम्मच जीरे को पीसकर 10 ग्राम गुड़ में मिला दें। इसकी 3 खुराक बनाकर बुखार चढ़ने से पहले, सुबह, दोपहर और शाम को पीने से मलेरिया का बुखार नहीं चढ़ता है।
1 चम्मच बिना सेंका हुआ जीरा लेकर पीस लें। इसको 3 गुना गुड़ में मिलाकर 3 गोलियां बना लें। निश्चित समय पर ठंड़ लगकर आने वाले मलेरिया के बुखार के आने से पहले 1-1 घण्टे के बीच 1 गोली खाएं। कुछ दिन रोजाना इन गोलियों का प्रयोग करने से मलेरिया का बुखार ठीक हो जाता है।
काला जीरा, एलुआ, सोंठ, कालीमिर्च, बकायन के पेड़ की निंबौली तथा करंजवे की मींगी को पीसकर छोटी-छोटी गोलियां बनाकर दिन में 3-3 घण्टे के अन्तराल में 1-1 गोली खाने से मलेरिया का बुखार उतर जाता है।
प्याज : आधा प्याज का टुकड़ा लेकर उसके रस में एक चुटकी कालीमिर्च का चूर्ण मिलाकर सुबह और शाम में पीने से मलेरिया के बुखार में आराम मिलता है।
हरड़ : 10 ग्राम हरड़ के चूर्ण को 100 मिलीलीटर पानी में पकाकर काढ़ा बना ले। यह काढ़ा दिन में 3 बार पीने से मलेरिया रोग में फायदा होता है।
चकोतरा : चकोतरे के रस को गर्म करके पीने से मलेरिया बुखार में लाभ होता है।
मलेरिया के बुखार में चकोतरे का रस विशेष रूप से लाभकारी रहता है क्योंकि इसमें मलेरिया को समाप्त करने वाला तत्व कुनैन प्राकृतिक रूप से विद्यमान रहता है।
चिरायता : 10 ग्राम चिरायते के रस को 10 मिलीलीटर संतरे के रस में मिलाकर मलेरिया रोग से पीड़ित रोगी को दिन में 3 बार पिलाने से लाभ होता है।
चिरायते का काढ़ा 1 कप की मात्रा में दिन में 3 बार कुछ दिनों तक नियमित पीने से मलेरिया रोग के सारे कष्टों में शीघ्र आराम मिलता है।
नमक : 10 ग्राम सेंधानमक और 40 ग्राम देशी चीनी (बूरा) को मिलाकर बारीक पीस लें। इस चूर्ण को आघा चम्मच रोजाना 3 बार गर्म पानी से लेने से मलेरिया बुखार आना बन्द हो जाता है।
5 चम्मच सेंधानमक को तब तक भूनें जब तक वह भूरे रंग का न हो जायें। इस 1 चम्मच नमक को 1 गिलास गर्म पानी में मिलाकर दिन में 1 बार रोजाना मलेरिया बुखार आने से पहले पीने से लाभ होता हैं। ध्यान रहें कि बुखार आने पर इसका सेवन न करें।
नारंगी : 2 नारंगी के छिलके को 2 कप पानी में उबाल लें। पानी आधा रहने पर छानकर गर्म-गर्म पीनें से मलेरिया के बुखार में लाभ मिलता है।
सेब : बुखार में सेब खाने से बुखार जल्दी ठीक होता है। मलेरिया बुखार आने के पहले सेब खाने से बुखार आने के समय बुखार नहीं आता है।
अमरूद : अमरूद और सेब का रस पीने से बुखार उतर जाता हैं।
अमरूद को खाने से मलेरिया के बुखार में लाभ होता है।
शहद : 20 ग्राम शुद्ध शहद, आधा ग्राम सेंधानमक और आधा ग्राम हल्दी को पीसकर गर्म पानी में डालकर रात को पीने से बुखार और जुकाम ठीक हो जाता हैं।
नीम : 20 ग्राम नीम की जड़ की छाल को कूटकर लगभग 150 मिलीलीटर पानी में मिलाकर मटकी में रात को भिगोकर सुबह पका लें। यह 40 मिलीलीटर पानी शेष रहने पर छानकर इसी प्रकार रात में या दिन में 3 बार पीने से मलेरिया बुखार में आराम मिलता है।
50 ग्राम नीम की जड़ की और बीच की छाल को यवकूट कर 600 मिलीलीटर पानी 18 मिनट तक उबाल कर छान लें। जब रोगी को बुखार चढ़ रहा हो तो इसे 40 से 60 मिलीलीटर की मात्रा में 2 से 3 बार पिलाने से मलेरिया का बुखार रुक जाता है।
मलेरिया के बुखार में नीम के तेल की 5-10 बूंदों को दिन मे 1 या 2 बार सेवन करना चाहिए।
60 ग्राम नीम के हरे पत्ते और 4 कालीमिर्च को पीसकर 125 मिलीलीटर पानी में उबालकर और छानकर पीने से मलेरिया ठीक हो जाता है।
नीम के पत्ते, निंबौली, कालीमिर्च, तुलसी, सोंठ और चिरायता को बराबर मात्रा में मिलाकर एक गिलास पानी में डालकर इतना उबाल लें कि आधा पानी उड़ जाए। फिर इस पानी को छानकर 1-1 चम्मच की मात्रा में दिन में 3 बार पीने से मलेरिया का बुखार मिट जाता है।
नीम के कोमल पत्तों में आधा ग्राम फिटकरी भस्म मिलाकर कूट लें। फिर इसकी आधा-आधा ग्राम की गोलियां बना लें। यह 1-1 मिश्री के शर्बत के साथ लेने से मलेरिया में लाभ मिलता है।
नीम के थोडे़-से पत्तों और 8 से 10 कालीमिर्च लेकर 1 कप पानी में डालकर उबाल लें। पानी जब आघा कप बचे तो इसे दिन में 2 बार लेने से मलेरिया का बुखार मिट जाता है।
60 ग्राम नीम के हरे पत्ते और 4 कालीमिर्च को मिलाकर पीस लें। फिर इसे 125 मिलीलीटर पानी में डालकर छानकर रोगी को पिलाने से मलेरिया बुखार ठीक हो जाता है।
नीम की 5 पत्तियां, तुलसी के 5 पत्ते और 1 चम्मच नींबू के रस को एकसाथ मिलाकर चटनी बनाकर सुबह और शाम खाने से मलेरिया के बुखार में लाभ होता है।
10 ग्राम नीम की छाल, 10 ग्राम सूखा धनिया, 10 ग्राम सोंठ का चूर्ण तथा 5 तुलसी के पत्तों को एकसाथ पीसकर काढ़ा बनाकर दिन में 4 बार लेने से मलेरिया बुखार में लाभ होता है।
नीम की छाल के काढ़े में धनिया ओर सोंठ का चूर्ण मिलाकर पीने से मलेरिया बुखार समाप्त हो जाता है।
नीम की आंतरिक छाल का चूर्ण 2 से 4 ग्राम, धनिया, सोंठ, लौंग, दालचीली या मिर्च को चिरायता और कुटकी के साथ सुबह और शाम लेने से मलेरिया, विषम, सविराम, शोथयुक्त (सूजन के साथ) आदि बुखार में लाभ होता है।
पित्तपापड़ा : 6 ग्राम पित्तपापड़ा और 3 ग्राम धनिया को एकसाथ मिलाकर काढ़ा बनाकर पीने से पुराने बुखार में शान्ति मिलती है।
हारसिंगार : हारसिंगार के 7-8 पत्तों के रस, अदरक रस और शहद को मिलाकर सुबह और शाम सेवन करने से पुराने से पुराना मलेरिया बुखार समाप्त हो जाता है।
कंटकरंज : कंटकरंज के बीजों का चूर्ण लगभग आधा ग्राम से लेकर 1 ग्राम की मात्रा में कालीमिर्च के साथ सुबह और शाम लेने से मलेरिया, शीतज्वर, सविराम, अविराम आदि बुखार नष्ट हो जाते हैं। ध्यान रहें कि इसे खाली पेट न लें।
रोहिनी (मांस रोहिनी) : रोहिनी की छाल का चूर्ण लगभग आधा ग्राम की मात्रा में दिन में 3 बार देने से या इसका काढ़ा 28 मिलीलीटर को रोजाना 3 बार सेवन करने से मलेरिया के बुखार में लाभ होता हैं।
महाबला : महाबला की जड़ और सोंठ को मिलाकर काढ़ा बनाकर रख लें। इस काढ़े को 20 से 40 मिलीलीटर की मात्रा में लेने से मलेरिया के बुखार में लाभ मिलता है।
चिरईगोड़ा : चिरईगोडा़ (मिजुरगोरवा) के 50 ग्राम ताजे या छाया में सुखायें पत्तों को लगभग 1 लीटर पानी में 10 से 15 मिनट तक अच्छी तरह से धीमी आग पकाने के लिए रख दें। इसी काढ़े में चीनी मिलाकर चाय की तरह रोजाना दिन भर में मलेरिया के रोगी को 240 मिलीलीटर की मात्रा में पिलाने से लाभ पहुंचता है। ध्यान रहें कि इसका अधिक मात्रा में सेवन न करें।
भुईआंवला : भुई आंवला के पंचांग (तना, पत्ती, फल, फूल और जड़) का काढ़ा बनाकर 20 से 40 मिलीलीटर की मात्रा में सुबह और शाम सेवन करने से मलेरिया के बुखार में आराम मिलता है।
मिर्च : 3 लालमिर्च को डंठल सहित पानी में पीसकर बायें हाथ की अनामिका अंगुली में लपेटकर, मलमल के कपड़े से बांध लें। कपड़े पर पानी डालते रहें ताकि गीला रहें। इस विधि को बुखार आने से कम से कम 2 घण्टे पहले करने से मलेरिया का बुखार नहीं आता है।
कालीमिर्च का चूर्ण तुलसी के रस और शहद में मिलाकर पीने से मलेरिया का बुखार दूर हो जाता है।
3 ग्राम कालीमिर्च, 3 ग्राम करंज की मींग (गिरी) और 3 ग्राम संहालू के हरे पत्तों को पीसकर छोटी-छोटी गोलियां बना लें। बुखार आने से पहले से यह 1-1 गोली ताजे पानी से 4-4 घण्टे बाद लेने से बुखार में लाभ मिलता है।
कालीमिर्च को तुलसी के पत्तों के रस में मिलाकर 7 भावना (उबाल) देकर सुखा लें। फिर उसकी मटर के बराबर गोलियां बना लें। बुखार आने के 4 घण्टे पहले हर 1-1 घण्टे बाद यह 4 गोलियां खाने से बुखार नहीं चढ़ता है।
7 कालीमिर्च और प्याज से प्राप्त 50 मिलीलीटर रस को सुबह और शाम लेने से मलेरिया के बुखार में लाभ होता है।
1 हरी मिर्च के बीज को निकालकर बुखार आने के 2 घण्टे पहले अंगूठे में पहना कर बांध दें। इसी प्रकार इसे 2 से 3 बार बांधने से मलेरिया बुखार आना बन्द हो जाता हैं। हरी मिर्च बांधने से जलन होती है। ध्यान रहें कि जितनी देर तक सहन हों तो बांधे रखें फिर खोल दें।
मल्लसिन्दूर : लगभग एक चौथाई से कम मल्लसिन्दूर को तुलसी के पत्ते का रस के साथ सुबह और शाम लेने से मलेरिया का बुखार कम हो जाता है।
शिलासिन्दूर: लगभग एक चौथाई से कम की मात्रा में शिलासिन्दूर को 10 मिलीलीटर तुलसी के पत्तों के रस के साथ बुखार आने से पहले 2-2 घण्टे के अन्तराल पर देने से मलेरिया के बुखार में लाभ होता है।
कूठ : लगभग आधा ग्राम कूठ को घी और शहद के साथ सुबह और शाम सेवन करने से मलेरिया बुखार में लाभ होता है।
श्रंगरहार (परिजात) : श्रंगरहार के पत्तों को यवकुट कर काढ़ा बनाकर सुबह और शाम 20 से 40 मिलीलीटर की मात्रा में पीने से मलेरिया बुखार में राहत मिलती है।
धनिया : धनिया और सौंठ को पीसकर बराबर मात्रा में मिलाकर रोजाना दिन में 3 बार पानी से फंकी लेने से बुखार में राहत मिलती है।
आधा चम्मच पिसा हुआ धनिया, आधा चम्मच सोंठ, आधा चम्मच अजवाइन और चुटकीभर सेंधानमक को मिलाकर बारीक चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को दिन में 3 बार प्रयोग करने से मलेरिया के बुखार में लाभ होता है।
धनिया और सोंठ को बराबर की मात्रा में पीसकर आधा-आधा चम्मच खुराक के रूप में रोजाना 3 बार खाने से ठंड़ देकर आने वाला बुखार मिट जाता है।
पीपल : पीपल के 3 पत्तों को पीसकर शहद में मिलाकर चाटने से श्वास (दमा), खांसी के साथ मलेरिया बुखार भी ठीक होता है।
छाछ : छाछ पीने से हर चौथे दिन आने वाला मलेरिया का बुखार ठीक होता है।
लहसुन : लहसुन की 3 से 4 कलियों को छीलकर घी में मिलाकर खाने से मलेरिया की ठंड उतर जाती है।
अगर मलेरिया का बुखार सही समय पर आता हो तो लहसुन का रस हाथ पैरो के नाखूनों पर बुखार के आने से पहले लेप करें और 1 चम्मच लहसुन का रस 1 चम्मच तिल के तेल में मिलाकर जब तक बुखार न आए 1-1 घण्टे के बाद में जीभ पर लगाकर चूसें। इस तरह यह प्रयोग 3 से 4 दिन तक करने से मलेरिया का बुखार ठीक हो जाता है।
मुलेठी : 10 ग्राम छिली हुई मुलेठी, 5 ग्राम खुरासानी अजवाइन तथा थोड़े से सेंधानमक को एकसाथ मिलाकर दिन में 3-4 बार पीने से मलेरिया का बुखार दूर होता है।
आक : थोड़े-से आक के पत्तों पर नमक लगाकर उन्हें जलाकर राख बना लें। इस राख में से 2 चुटकी राख को शहद के साथ मिलाकर सेवन करने से मलेरिया के बुखार में लाभ मिलता है।
आधा ग्राम आक की जड़ की छाल को सुबह और शाम पान में डालकर सेवन करने से मलेरिया के बुखार में राहत मिलती है।
अड़ूसा (बाकस) : अड़ूसा की जड़ की छाल को आधा ग्राम से 1 ग्राम या पत्ते के चूर्ण लगभग 1 चौथाई से कम की मात्रा में सुबह और शाम शहद के साथ सेवन करने से मलेरिया के बुखार में लाभ होता है।
शीतभज्जी : लगभग एक चौथाई शीतभज्जी का रस, पान के रस व शहद के साथ दिन में 3 बार सेवन करने से मलेरिया के बुखार में आराम मिलता है।
गोदन्ती : लगभग एक चौथाई से कम की मात्रा में गोदन्ती और इतनी की मात्रा में शुद्ध स्फटिका को एकसाथ मिलाकर मलेरिया का बुखार आने से पहले 2 घंटे पहले लेने से बुखार नहीं चढ़ता है।
जवाखार : 3 ग्राम जवाखार और 3 ग्राम पीपल को पीसकर गुड़ में मिलाकर छोटी-छोटी गोलियां बनाकर रख लें। सुबह और शाम 1-1 गोली को गर्म पानी से लेने से मलेरिया का बुखार उतर जाता है।
कपूरचूरा : 5 ग्राम कपूरचूरा को पानी से सेवन करने से मलेरिया के कारण लगने वाली ठंड़ उतर जाती है।
हींग : 2 ग्राम हींग को 2 ग्राम गुड़ में मिलाकर सुबह और शाम लेने से मलेरिया के बुखार में लाभ होता है।
सफेद कत्था : 10 ग्राम सफेद कत्था और 6 ग्राम मल्लसिन्दूर को एकसाथ मिलाकर पीस लें। फिर इसे नीम के रस में घोटकर उड़द के रूप में गोलियां बना लें। बुखार आने से 1 घण्टे पहले यह गोली लेने से जवानों का बुखार उतर जाता है। ध्यान रहें की यह गोली बच्चों और गर्भवती स्त्रियों को नहीं लेनी चाहिए।
गुड़ : 10 ग्राम गुड़ और 3 ग्राम कालाजीरा को एक साथ मिलाकर दिन में 4 बार 2-2 घण्टे के अन्तराल से 2-3 ग्राम की मात्रा में खाने से मलेरिया का बुखार नहीं होता है।
गिलोय : गिलोय का 5 अंगुल लम्बा टुकड़ा और 15 कालीमिर्च को मिलाकर और कूटकर 250 मिलीलीटर पानी में डालकर उबाल लें। जब यह पानी लगभग 50 मिलीलीटर की मात्रा में रह जाए तो इसे छानकर पीने से मलेरिया का बुखार दूर हो जाता है।
गिलोय (गुरूच) के काढ़े या रस में छोटी पीपल और शहद को मिलाकर 40 से 80 मिलीलीटर की मात्रा में रोजाना सेवन करने से मलेरिया के बुखार में लाभ होता हैं।
बेल : बेल के पत्ते का रस 7 मिलीलीटर की मात्रा में सुबह और शाम लेने से मलेरिया के बुखार में लाभ मिलता है।
नाड़ी हिंगु (डिकामाली) : आधा से 2 ग्राम नाड़ी हिंगु को गर्म पानी मे घोलकर, छान लें। इस घोल को सुबह और शाम लेते रहने से नियतकालिक बुखार में आने वाला कंपन कम हो जाता है।
कुटकी : 5 से 10 ग्राम कुटकी के चूर्ण को शहद के साथ सुबह और शाम लेने से नियतकालिक बुखार नष्ट होता है।
इन्द्रायव : इन्द्रायव के भूने हुए चूर्ण को 1 से 4 ग्राम की मात्रा में शहद के साथ सुबह और शाम सेवन करने से पर्यायिक और शीत बुखार कम हो जाता है। इसका काढ़ा गुर्च (गिलोय) के साथ बनाकर लेने से लाभ होता है।
मैनफल : मैनफल का गूदा, लौंग और दालचीनी के साथ लेने से 1 से 2 ग्राम की मात्रा में लेने से पारी से आने वाले बुखार में लाभ होता हैं। ध्यान रहें कि इसका अधिक सेवन करने से उल्टी (वमन) हो सकती है।
सत्यानाशी (पीला धतूरा) : पीला धतूरा का दूध 1 से 2 ग्राम की मात्रा में सुबह और शाम नींबू के रस के साथ घोटकर पीने से मलेरिया के बुखार में लाभ होता हैं।
भारंगी (बभनेटी) : बभनेटी के पत्तों की सब्जी बनाकर खिलाने से मलेरिया के रोगी को बुखार से छुटकारा मिलता है।
आकड़ा : आकड़े के फूल की दो डोडी (बिना खिले फूल) को जरा-से गुड़ में लपेटकर मलेरिया ज्वर आने से पहले खाने से मलेरिया ज्वर नहीं चढ़ता है।
दूब हरी : मलेरिया ज्वर में दूब के रस में अतीस के चूर्ण को मिलाकर दिन में 2-3 बार चाटने से, पारी से चढ़ने वाले मलेरिया ज्वर में लाभ मिलता है।
फिटकरी : 1 ग्राम फिटकरी को 2 ग्राम चीनी में मिलाकर मलेरिया का बुखार आने से 2-2 घंटे पहले लेने से मलेरिया का बुखार नहीं आएगा और आएगा तो भी कम। फिर जब दूसरी बार भी मलेरिया का बुखार आने वाला हो तब इसी प्रकार से दे सकते हैं। ध्यान रहें कि रोगी को कब्ज नहीं होना चाहिए और यदि कब्ज हो तो पहले कब्ज को दूर करें।
1 ग्राम फिटकरी को फूले बताशे में डालकर मलेरिया बुखार आने से 2 घण्टे पहले रोगी को खिलाने से बुखार कम चढ़ता हैं।
1 ग्राम खाण्ड और 2 ग्राम भुनी फिटकरी को एकसाथ मिलाकर दिन में 2 बार पीने से मलेरिया बुखार में लाभ होता है।
फूली हुई फिटकरी के चूर्ण में 4 गुना पिसी हुई खांड या चीनी को अच्छी तरह मिलाकर रख लें। इसे 2 ग्राम की मात्रा में गुनगुने पानी के साथ एक दिन में 3 बार लेने से मलेरिया के बुखार में लाभ होता है।
कलौंजी : आधा चम्मच पिसी हुई कलौजी को 1 चम्मच शहद में मिलाकर चाटने से चौथे दिन आने वाला बुखार ठीक हो जाता है।
अजवाइन : मलेरिया बुखार के बाद हल्का-हल्का बुखार रहने लगता है। इसके लिए 10 ग्राम अजवाइन को रात में 100 मिलीलीटर पानी में भिगों दें और सुबह पानी गुनगुना करके जरा सा नमक डालकर कुछ दिन तक सेवन करने से बुखार मे आराम होता हैं।
नींबू : नींबू के 2 भाग कर लें। इसके पहले भाग में पिसी हुई कालीमिर्च और सेंधानमक भरकर तथा दूसरे भाग में मिश्री भरकर दोनों को गर्म करके चूसने से और वर्षा ऋतु के बाद आने वाला आन्त्रज्वर (टायफाइड), पित्तवमन आदि दूर हो जाते हैं।
बुखार आने से 2 घण्टे पहले कालीमिर्च, नमक और फिटकरी को बराबर मात्रा में पीसकर आधे नींबू पर लगाकर चूसें। नींबू को गर्म किये बिना दूसरा आधा टुकड़ा इसी प्रकार एक घण्टे के बाद चूसने से मलेरिया बुखार और मौसमी बुखार भी ठीक हो जाता हैं।
एक कप गर्म पानी में 2 चम्मच नींबू का रस मिलाकर पीने से बुखार का ताप गिर जाता है। 2 नींबू को काटकर 250 मिलीलीटर पानी में उबालकर पानी आधा शेष रह जाने पर छान लें। फिर इसमें 2 ग्राम सेंधानमक मिलाकर इसी प्रकार 2-3 दिन तक लगातार एक दिन मे 3 बार पीने करने से मलेरिया के बुखार में लाभ होता हैं। ध्यान रहें कि इस औषधि के प्रयोग के समय भोजन न करें।
नींबू के रस को तेज कहवा में बिना दूध मिलाये हुए पीने से मलेरिया का बुखार दूर होता है।
नींबू और गन्ने का रस पीने से मलेरिया के बुखार में बहुत लाभ होता हैं।
आधे नींबू पर कालीमिर्च और कालानमक का चूर्ण लगाकर धीरे-धीरे चूसने से मलेरिया का बुखार दूर होता है।
आधे नींबू के रस में 4 चम्मच पानी और चीनी को मिलाकर दिन में 2 से 3 बार पीने से 3-4 दिन में ही मलेरिया का बुखार ठीक हो जाता है।
नींबू में नमक और कालीमिर्च को भरकर दिन में 2 बार चूसने से मलेरिया का बुखार उतर जाता है।
2 नींबू के छिलको के रस को 500 मिलीलीटर पानी में मिलाकर मिट्टी की हांडी या स्टील के भगोने (बर्तन) में रात को उबालकर आधा रहने पर रख दें। सुबह उठकर इस पानी को पीने से मलेरिया के बुखार में आराम मिलता हैं।
नींबू के रस को पानी में मिलाकर फिर उसमें इच्छानुसार चीनी मिलाकर पीने से मलेरिया बुखार 4 दिन में आना बन्द हो जाता हैं। कुनेन खाने से कानों में सांय-सांय की आवाज हो तो यह भी इससे ठीक हो जाती हैं। कुनेन के साथ नींबू और दूध का भी प्रयोग कर सकते हैं।
अमरूद : मलेरिया बुखार में अमरूद का सेवन लाभप्रद है। इसके नियमित सेवन से तिजारा और चौथिया ज्वर में भी आराम मिलता है।
अमरूद को खाने से इकतारा तथा चतुर्थक ज्वर में लाभ होता है।
भांग : शुद्ध भांग का चूर्ण 1 ग्राम, गुड़ 2 ग्राम, दोनों को मिलाकर 4 गोलियां बना लेते हैं। जाड़े का बुखार दूर करने के लिए 1-2 गोली 2-2 घंटे के अन्तर से दें या शुद्ध भांग की 1 ग्राम गोली बुखार में 1 घंटा पहले देने से बुखार का वेग कम हो जाता है।
श्योनाक : श्योनाक की लकड़ी का छोटा सा प्याला बना लें। रात को इसमें पानी रखकर और सुबह के समय उठकर इस पानी को पीने से नियतकालिक बुखार, एकान्तरा, तिजारी, चौथियां आदि के जहरीले बुखारों का नाश होता है।
श्योनाक, शुंठी, बेल के फल की गिरी, अनारदाना, अतीस को बराबर मात्रा में लेकर यवकूट कर लें। इसमें से 10 ग्राम औषधि, 500 लीटर पानी में उबालें। जब यह पानी 125 मिलीलीटर की मात्रा में जब बच जाये तब इसे छानकर सुबह, दोपहर तथा शाम को पीने से सब तरह के बुखार व अतिसार नष्ट हो जाते हैं।
अपामार्ग : अपामार्ग के पत्ते और कालीमिर्च को बराबर की मात्रा में लेकर पीस लें। फिर इसमें थोड़ा-सा गुड़ मिलाकर मटर के दानों के बराबर की गोलियां तैयार कर लें। जब मलेरिया फैल रहा हो, उन दिनों यह 1-1 गोली सुबह-शाम भोजन करने के बाद नियमित रूप से सेवन करने से मलेरिया के बुखार का शरीर पर आक्रमण नहीं होगा। इन गोलियों का 2-4 दिन सेवन करना पर्याप्त होता है।
बैंगन : कोमल बैंगन को अंगारों पर सेंककर रोजाना सुबह के समय खाली पेट गुड़ के साथ खाने से मलेरिया बुखार से तिल्ली बढ़ जाने में और उसके कारण शरीर पीला पड़ जाने में लाभ होता है।
अतीस : 1 ग्राम अतीस के चूर्ण और 2 कालीमिर्च के चूर्ण को एक साथ मिलाकर दिन में 3-4 बार पानी से सेवन करने से मलेरिया का बुखार दूर हो जाता है।
आयापान : आयापान के 20 ग्राम पंचाग को 400 मिलीलीटर पानी में डालकर उबालते हैं। जब यह पानी एक चौथाई की मात्रा में शेष रह जाता है तो इसे ठंड़ा कर लेते हैं। इस पानी को 5 से 10 मिलीलीटर की मात्रा में सुबह-शाम पीने से मलेरिया बुखार में लाभ होता है।
आयापान के पत्ते का रस 10 से 20 मिलीलीटर की मात्रा में पीने से मलेरिया बुखार मिट जाता है।
नमक का ये आसान प्रयोग कर देगा हर तरह के बुखार की छुट्टी
बदलते मौसम में बुखार की चपेट में आना एक आम बात है। कभी वायरल फीवर के नाम परतो कभी मलेरिया जैसे नामों से यह सभी को अपनी चपेट में ले लेता है। फिर बड़ा आदमी हो या कोई बच्चा इस बीमारी की चपेट में आकर कई परेशानियों से घिर जाते हैं। कई बुखार तो ऐसे हैं जो बहुत दिनों तक आदमी को अपनी चपेट में रखकर उसे पूरी तरह से कमजोर बना देता है। पर घबराइए नहीं सभी तरह के बुखार की एक अचूक दवा है भुना नमक। इसके प्रयोग किसी भी तरह के बुखार को उतार देता है।
भुना नमक बनाने की विधि- खाने मे इस्तेमाल आने वाला सादा नमक लेकर उसे तवे परडालकर धीमी आंच पर सेकें। जब इसका कलर कॉफी जैसा काला भूरा हो जाए तो उतार कर ठण्डा करें। ठण्डा हो जाने पर एक शीशी में भरकर रखें।जब आपको ये महसूस होने लगे की आपको बुखार आ सकता है तो बुखार आने से पहले एक चाय का चम्मच एक गिलास गर्म पानी में मिलाकर ले लें। जब आपका बुखार उतर जाए तो एक चम्मच नमक एक बार फिर से लें। ऐसा करने से आपको बुखार कभी पलट कर नहीं आएगा।
विशेष :

  • – हाई ब्लडप्रेशर के रोगियों को यह विधि नहीं अपनानी चाहिए।
  • – यह प्रयोग एक दम खाली पेट करना चाहिए इसके बाद कुछ खाना नहीं चाहिए और ध्यान रखें कि इस दौरान रोगी को ठण्ड न लगे।
  • – अगर रोगी को प्यास ज्यादा लगे तो उसे पानी को गर्म कर उसे ठण्डा करके दें।
  • – इस नुस्खे को अजमाने के बाद रोगी को करीब 48 घंटे तक कुछ खाने को न दें। और उसके बाद उसे दूध चाय या हल्का दलिया बनाकर खिलाऐं।

सादा बुखार :
सादे बुखार में उपवास अत्यधिक लाभदायक है। उपवास के बाद पहले थोड़े दिन मूँग लें फिर सामान्य खुराक शुरु करें। ऋषि चरक ने लिखा है कि बुखार में दूध पीना सर्प के विष के समान है अतः दूध का सेवन न करें।

पहला प्रयोगः सोंठ, तुलसी, गुड़ एवं काली मिर्च का 50 मि.ली काढ़ा बनाकर उसमें आधा या 1 नींबू निचोड़कर पीने से सादा बुखार मिटता है।
दूसरा प्रयोगः शरीर में हल्का बुखार रहने पर, थर्मामीटर द्वारा बुखार न बताने पर थकान, अरुचि एवं आलस रहने पर संशमनी की दो-दो गोली सुबह और रात्रि में लें। 7-8 कड़वे नीम के पत्ते तथा 10-12 तुलसी के पत्ते खाने से अथवा पुदीना एवं तुलसी के पत्तों के एक तोला रस में 3 ग्राम शक्कर डालकर पीने से हल्के बुखार में खूब लाभ होता है।
तीसरा प्रयोगः कटुकी, चिरायता एवं इन्द्रजौ प्रत्येक की 2 से 5 ग्राम को 100 से 400 मि.ली. पानी में उबालकर 10 से 50 मि.ली. कर दें। यह काढ़ा बुखार की रामबाण दवा है।
चौथा प्रयोगः बुखार में करेले की सब्जी लाभकारी है।
पाँचवाँ प्रयोगः मौठ या मौठ की दाल का सूप बनाकर पीने से बुखार मिटता है। उस सूप में हरी धनिया तथा मिश्री डालने से मुँह अथवा मल द्वारा निकलता खून बन्द हो जाता है।
ऐसे में बिना डॉक्टर के परामर्श दवा खाने से अच्छा है कि आप घरेलू आयुर्वेदिक नुस्खों को अपनाएं।
आज हम आपको बताने जा रहे हैं नानी का एक खास औषधि। इस औषधि को चिरायता कहा जाता है।
कैसा भी बुखार हो चिरायता एक ऐसी देहाती जड़ी- बूटी मानी जाती है जो कुनैन की गोली से अधिकप्रभावी होती है। एक प्रकार से यह एक देहाती घरेलू नुस्खा है।पहले चिरायते को घर में सुखा कर बनाया जाता था लेकिन
आजकल यह बाजार में कुटकी चिरायते के नाम से भी मिलता है।
लेकिन घर पर बना हुआ ताजा और विशुद्ध चिरायता ही अधिक कारगर होता है।
*चिरायता बनाने की विधि-
100 ग्राम सूखी तुलसी के पत्तेका चूर्ण, 100 ग्राम नीम की सूखी पत्तियों का चूर्ण, 100 ग्राम सूखे चिरायते का चूर्ण लीजिए। इन तीनों को समान मात्रा में मिलाकर एक बड़े डिब्बे में भर कर रख लीजिए। यह तैयार चूर्ण मलेरिया या अन्य बुखार होने की स्थिति में दिन में तीन बार दूध से सेवन करें। मात्र दो दिन में आश्चर्यजनक लाभ होगा।
कारगर *एंटीबॉयोटिक- बुखार ना होने की स्थिति में भी यदि इसका एक चम्मच सेवन प्रतिदिन करें तो यह चूर्ण किसी भी प्रकार की बीमारी चाहे वह स्वाइन फ्लू ही क्यों ना हो, उसे शरीर से दूर रखता है। इसके सेवन से शरीर के सारे कीटाणु मर जाते हैं। यह रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी सहायक है। इसके सेवन से खून साफ होता है तथा धमनियों में रक्त प्रवाह सुचारू रूप से संचालित होता है।

डेंगू बुखार का इलाज :–
गिलोय बेल की डंडी ले! डंडी के छोटे टुकड़े करे!
2 गिलास पानी मे उबाले! जब पानी आधा रह जाये!
ठंडा होने पर रोगी को पिलाये!
मात्र 45 मिनट बाद cell बढ़ने शुरू हो जाएँगे!!
इससे अच्छा और सस्ता कोई इलाज नहीं डेंगू बुखार का!

मलेरिया बुखार की खास दवा

सादा खाने का नमक पिसा हुआ लेकर तवे पर इतना सेंके कि उसका रंगकाला भूरा हो जाये । ठण्डा होने पर शीशी में भर लें । मलेरिया, विषमज्वर, एंकातरा – पारी तिजारी, चौथारी, चौथारी बुखारों की खास दवा है ।ज्वर आने से पहले छ: ग्राम भुना नमक एक गिलास गर्म पानी में मिलाकरदें| इन दो खुराकों में ज्वर चला जायेगा ।
विशेष – अधिक उच्च रक्तताप के रोगी और वृध्दों के लिये उपरोक्त नमक का प्रयोग न करें या सावधानीपूर्वक करें । यहाँ औषधि खाली पेट गुण करती है । अत: इस बात का ध्यान रखें कि रोगी कुछ न खाये और उसे ठण्ड न लगने पाए ।

– गेंदे के फूलों का रस 1 से 2 ग्राम की मात्रा में प्रयोग करने सेबुखार में लाभ मिलता है.

10-12 तुलसी के पत्ते तथा 8-10 काली मिर्च के चाय बनाकर पीने से खांसी जुकाम, बुखार ठीक होता है।

तुलसी रस सेबुखारउतर जाता है। इसे पानी में मिलाकर हर दो-तीन घंटे में पीने से बुखार कम हो जाता है।

तुलसी सौंठ के साथ सेवन करने से लगातार आने वालाबुखार ठीक होता है।

तुलसी, अदरक, मुलैठी सबको घोटकर शहद के साथ लेने से सर्दी के बुखार में आराम होता है।

यदि तुलसी की 11 पत्तियों का 4 खड़ी कालीमिर्च के साथ सेवन किया जाए तो मलेरिया एवं मियादी बुखार ठीक किए जा सकते हैं।

डेंगू का उपचार :– 
आजकल डेंगू एक बड़ी समस्या के तौर पर उभरा है, जिससे कई लोगों की जान जा रही है l
यह एक ऐसा वायरल रोग है जिसका मेडिकल चिकित्सा पद्धति में कोई इलाज नहीं है परन्तु आयुर्वेद में इसका इलाज है और वो इतना सरल और सस्ता है की उसे कोई भी कर सकता है l
तीव्र ज्वर, सर में तेज़ दर्द, आँखों के पीछे दर्द होना, उल्टियाँ लगना, त्वचा का सुखना तथा खून के प्लेटलेट की मात्रा का तेज़ी से कम होना डेंगू के कुछ लक्षण हैं जिनका यदि समय रहते इलाज न किया जाए तो रोगी की मृत्यु भी सकती है l
यदि आपके किसी भी जानकार को यह रोग हुआ हो और खून में प्लेटलेट की संख्या कम होती जा रही हो तो चित्र में दिखाई गयी चार चीज़ें रोगी को दें :
१) अनार जूस
२) गेहूं घास रस३) पपीते के पत्तों का रस
४) गिलोय/अमृता/अमरबेल सत्व
– अनार जूस तथा गेहूं घास रस नया खून बनाने तथा रोगी की रोग से लड़ने की शक्ति प्रदान करने के लिए है, अनार जूस आसानी से उपलब्ध है यदि गेहूं घास रस ना मिले तो रोगी को सेब का रस भी दिया जा सकता है l
– पपीते के पत्तों का रस सबसे महत्वपूर्ण है, पपीते का पेड़ आसानी से मिल जाता है उसकी ताज़ी पत्तियों का रस निकाल कर मरीज़ को दिन में २ से ३ बार दें , एक दिन की खुराक के बाद ही प्लेटलेट की संक्या बढ़ने लगेगीl
– गिलोय की बेल का सत्व मरीज़ को दिन में २-३ बार दें, इससे खून में प्लेटलेट की संख्या बढती है, रोग से लड़ने की शक्ति बढती है तथा कई रोगों का नाश होता है l यदि गिलोय की बेल आपको ना मिले तो किसी भी नजदीकी पतंजली चिकित्सालय में जाकर “गिलोय घनवटी” ले आयें जिसकी एक एक गोली रोगी को दिन में 3 बार दें l
यदि बुखार १ दिन से ज्यादा रहे तो खून की जांच अवश्य करवा लें l
यदि रोगी बार बार उलटी करे तो सेब के रस में थोडा नीम्बू मिला कर रोगी को दें, उल्टियाँ बंद हो जाएंगी l
ये रोगी को अंग्रेजी दवाइयां दी जा रही है तब भी यह चीज़ें रोगी की बिना किसी डर के दी जा सकती हैं l
डेंगू जितना जल्दी पकड़ में आये उतना जल्दी उपचार आसान हो जाता है और रोग जल्दी ख़त्म होता है l
रोगी के खान पान का विशेष ध्यान रखें, क्योंकि बिना खान पान कोई दवाई असर नहीं करती
Source : http://www.ayurmyntra.com/%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%B9%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%88%E0%A4%B8%E0%A4%BE-%E0%A4%AD%E0%A5%80-%E0%A4%AC%E0%A5%81%E0%A4%96%E0%A4%BE%E0%A4%B0/
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--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!

--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!
सभी के स्वस्थ एवं सुदीर्घ जीवन की कामना के साथ-मेरे प्यारे और दुलारे तीन बच्चों की ममतामयी अद्वितीय माँ (मम्मी) जो दुखियों, जरूतमंदों और मूक जानवरों तक पर निश्छल प्यार लुटाने वाली एवं अति सामान्य जीवन जीने की आदी महिला थी! वह पाक कला में निपुण, उदार हृदया मितव्ययी गृहणी थी! मेरी ऐसी स्वर्गीय पत्नी "जानकी मीणा" की कभी न भुलाई जा सकने वाली असंख्य हृदयस्पर्शी यादों को चिरस्थायी बनाये रखते हुए इस ब्लॉग को आज दि. 08.08.12 को फिर से पाठकों के समक्ष समर्पित कर रहा हूँ!-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'

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आमवात आमाशय आयुर्वेद आयुर्वेदिक उपचार आयुर्वेदिक औषधियां आयुर्वेदिक सीरप-Ayurvedic Syrup आयुर्वेदिक-Ayurvedic आरोग्य आँव आंव आंवला आंवला जूस आंवला रस आशावादी-Optimistic आसन आसान प्रसव-Easy Delivery आहार चार्ट आहार-Food आॅर्गेनिक इन्द्रायण- इमर्जेंसी में होम्योपैथी इमली-Tamarind Tree इम्युनिटी इलाज इलाज का कुल कितना खर्चा इलायची उच्च रक्तचाप उच्च रक्तचाप-High Blood Pressure-Hypertension उत्तेजक उत्तेजना उदर शूल-Abdominal Haul उन्माद-Mania उम्र उल्टी एक्जिमा एक्यूप्रेशर एग्जिमा एजिंग-Aging एंटी ऑक्सीडेंट्स एंटी-ओक्सिडेंट एंटीऑक्सीडेंट एनजाइना एमिनो एसिड एरंड एलर्जी एलर्जी-Allergy एलोवेरा एलोवेरा जूस ऐलोपैथ ऐसीडिटी ऑर्गेनिक ओमेगा 3 के स्रोत ओमेगा-3 ओर्गेनिक औषध-Drug औषधि सूची-Drug List औषधियों के नुकसान-Loss of drugs कचनार-Bauhinia Purpurea कचनार-बहुनिया-Bauhinia कड़वाहट कंडोम कद्दू कनेर कपास-COTTON कपिकच्छू कफ कब्ज कब्ज़ कब्ज-कोष्ठबद्धता-Constipation कब्जी कमजोरी कमर दर्द करेला कर्णरोग कष्टार्तव-Dysmenorrhea काजू कान कानून सम्मत काम काम शक्ति कामशक्ति कामशक्ति-Sexual power कामोत्तेजना 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दाम्पत्य-Conjugal दाल दालचीनी दालें दिल दुर्गंध दुर्बलता दुष्प्रभाव दूध दूधी दूधी-Milk Hedge दृष्टिदोष द्रोणपुष्पी-Leucas Cephalotes धड़कन धनिया-Coriander धमासा धातु धातु पतन धार्मिक नज़ला नपुंसकता नाक नाखून नागबला नागरमोथा नाडी हिंगु नाड़ी हिंगु (डिकामाली) नामर्दी नारियल नाश्ता निमोनिया निम्न रक्तचाप निम्बू नियासिन निरोगधाम निर्गुण्डी निसोरा नींद नींबू नींबू-Lemon नीम-azadirachta indica नुस्खे-Tips नेगड़ नेगड़-निर्गुन्डी-Vitex negundo नेत्र रोग नैतिक नौसादर न्युमोनिया-Pneumonia पढ़ने में मन लगेगा पंतजलि पत्तागोभी-CABBAGE पत्थरचट्टा पत्नी पथरी पनीर पपीता पपीता-CARICA PAPPYA पमाड परहेज पराठा परिस्थिति पवाड़ पवाँर पाइल्स पाक-कला पाचक पाचन पाठक संख्या पंद्रह लाख पायरिया पारिजात पालक पालक-Spinach पित्त पित्ती पिंपल-मुंहासे-Pimples-Acne पिरामिड पीलिया पीलिया-Jaundice पीलिया-कामला-Jaundice पुआड़ पुदीना पुनर्नवा-साटी-सौंटी-Punarnava पुरुष पेचिश पेट के कीड़े पेट दर्द पेट में गैस पेट रोग पेंसिल थेरेपी-Pencil Therapy पौरुष प्याज-Onion प्रजनन प्रतिरक्षा प्रतिरक्षा प्रणाली प्रतिरक्षा-इम्युनिटी-Immunity प्रतिरोधक प्रतिरोधक-Resistance प्रदर प्रमेह प्रवाहिका (पेचिश)-Dysentery प्रसव प्रसव सुरक्षा चक्र प्रसूति प्राणायाम प्रेग्नेंसी-Pregnancy प्रेमिका प्रोटीन प्रोटीन का कार्य प्रोटीन के स्रोत प्रोस्टेट ग्रन्थि-Prostate Gland प्लीहा प्लूरिसी-Pleurisy फफूंद-Fungi फरास फल फल-Fruit फाइबर फिटकरी फुंसी-Pimples फूलगोभी-CAULIFLOWER फेंफड़े फैट फोटोफोबिया फोड़ा फोड़े-Boils फोलिक एसिड-Folic Acid फ्लू फ्लू-Flu फ्लेक्स सीड्स बकायन बकुल बड़ी हरड़ बथुआ बथुआ पाउडर बथुआ-White Goose Foot बदबू बबूल-ACACIA बरसाती बीमारियाँ बरसाती बीमारियां बलगम बलवृद्धि बला बवासीर बहुमूत्रता- बांझपन बादाम-Almonds बादाम. बाल बाल झडऩा-Hair Falling बिना सिजेरियन मां बनें बीजबंद बीमारियों के अनुसार औषधियां बुखार बेल बेल – Bael बेली बैक्टीरिया ब्र​ह्मदण्डी ब्रेस्ट ग्रोथ ब्लड प्रेशर ब्लैक मेलिंग भगंदर भगंदर-Fistula-in-ano भगनासा भगोष्ठ भय भस्मक रोग भावनात्मक भुई आंवला-Phyllanthus Niruri भूई आमला भूख भूख बढ़ाने भूमि आंवला भोजनलीवर मकोय मकोय-Soleanum nigrum मंजीठ मटर-PEA मंद दृष्टि मंदाग्नि मदार मधुमेह मधुमेह-Diabetes मन्दाग्नि-Dyspepsia मरुआ मर्दाना मलेरिया (Malaria) मस्तिष्क मस्से मस्से-WARTS महाबला माइग्रेन माईग्रेन माईंड सैट माजूफल मानसिक मानसिक-Mental मानिसक तनाव-Mental Stress मायोपिया मासिक मासिक-धर्म मासिकधर्म मासिकस्राव माहवारी मिनरल मिर्गी मिर्च-Chili मुख मैथुन-ओरल सेक्स-Oral Sex मुधमेह मुलहठी मुलेठी मुहाँसे मूँगफली मूड डिस्ऑर्डर-Mood Disorders मूत्र मूत्र असंयमितता मूत्र में जलन-Burning in Urine मूत्राशय मूर्च्छा (Unconsciousness) मूली मृत्यु मृत्युदण्ड मेथी मेथी दाना मेंहदी मैथुन मोगरा (Mogra) मोटापा मोटापा-Obesity मोतियाबिंद मौत मौलसिरी मौसमी बीमारियां यकृत यकृत प्लीहा यकृत वृद्धि-Liver Growth यकृत-लीवर-जिगर-Lever यूपेटोरियम परफोलियेटम योग विज्ञापन योन योनि योनि शूल-Vaginal Colic योनि संकोचन योनी योनी संकोचन यौन यौन आनंद यौन दौर्बल्य यौनशक्ति यौनशिक्षा यौनानंद यौनि रक्त प्रदर (Blood Pradar) रक्त रोहिड़ा-TECOMELLA UNDULATA रक्तचाप रक्तपित्त रक्तशोधक रक्ताल्पता रक्ताल्पता (एनीमिया)-Anemia रस-juices रातरानी Night Blooming Jasmine/Cestrum nocturnum रामबाण रामबाण 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संभालू संभोग समर्पण-Dedication सरकार को सुझाव सरफोंका सरहटी सर्दी सर्दी जुकाम-Cold सर्पक्षी सर्पविष सलाद संवेदना सहदेई सहदेवी साइटिका साइटिका-Sciatica साइड इफेक्ट्स साबूदाना-Sago सायटिका सिजेरियन सिर दर्द सिरका सिरदर्द सिरोसिस सुगर सुदर्शन सुहागा सूखा रोग सूजन सेक्स सेक्स परामर्श-Sex Counseling सेक्स पावर सेक्स समस्या सेक्‍स-Sex सेंधा नमक सेब सेमल-Bombax Ceiba सेल्स सोजन-सूजन सोंठ सोना पाठा सोयाबीन सोयाबीन (Soyabean) सोयाबीन-Soyabean सोराइसिस सोरियासिस-Psoriasis सौंठ सौंदर्य सौंदर्य-Beauty सौन्दर्य सौंफ सौंफ की चाय सौंफ-Fennel स्किन स्तन स्तन वृद्धि स्तनपान स्तम्भन स्त्री स्त्रीत्व स्त्रैण स्वप्न दोष स्वप्नदोष स्वप्नदोष-Night Fall स्वरभंग स्वर्णक्षीरी स्वस्थ स्वास्थ्य स्वास्थ्य रक्षक सखा हजारदानी हड़जोड़ हड्डी हड्डी में दर्द हड्डीतोड़ ज्वर हड्डीतोड़ बुखार हरड़ हरसिंगार-Night Jasmine हरी दूब-CREEPING CYNODAN हरीतकी हर्टबर्न हस्तमैथुन हस्तमैथुन-Masturbation हालात हिचकी हिचकी-Hiccup हिमोग्लोबिन-hemoglobin हिस्टीरिया हिस्टीरिया-Hysteria हींग हीनतर हृदय हृदय-Heart हेपेटाइटिस हेल्थ 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