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Online Dr. P.L. Meena (डॉ. पुरुषोत्तम लाल मीणा)

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(स्वास्थ्य रक्षक सक्षा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार ),

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बेल (Bael)

बेल – Bael
बेल हमारी एक ऐसी धरोहर है जिसे ईश्वरीय माना जाता है। सावन में भगवान शिव की पूजा और व्रत के समय बेलपत्र अर्पित किया जाना ये

प्रमाणित करता है कि ये कोई साधारण फल या पत्ते नहीं है। बीलपत्र के तीन पत्ते शिवजी को अर्पित करना तीन प्रकार के अहम ( Ego ) –

” मैं, मेरा और मेरे कारण ” शिवजी के चरणों में अर्पित किये जाने का सूचक है। यानि ये हर तरह का अहम भाव त्यागने का सन्देश है।
ये बहुत पुराना पारम्परिक औषधीय पेड़ है। लगभग 4000 सालों से इसे उपयोग में लाया जा रहा है। आयुर्वेद ने दशमूल जड़ीबूटी में इसे शामिल किया है। दशमूल दस ऐसी आयुर्वेदिक दवाओं का मिश्रण है, जिनकी मदद से कई प्रकार की लाभकारी आयुर्वेदिक दवा बनाई जाती है। जो विभिन्न रोगों को ठीक करती है। बील का फल, पत्ते, छाल और जड़ सभी दवा के रूप मे काम आते है।

इसमें केलशियम, पोटेशियम, आयरन, फास्फोरस, प्रोटीन और विटामिन "A", विटामिन "C", विटामिन "B" तथा कई ऑर्गनिक कंपाउंड व एंटी ऑक्सीडेंट्स होते है। इसमें भरपूर मात्रा में फायबर होता है। इन्ही कारणों की वजह ये एक बहुत ही फायदेमंद फल है।

इसका बोटैनिकल नाम एगल मरमेलोस है और ये रुतेसिया फैमिली में का सदस्य है। इंग्लिश में इसे वुड एप्पल ( Wood Apple ) कहते है।

हिंदी में इसे कैत के नाम से भी जाना जाता है।

बेल का फल अनेक प्रकार के रोगों की दवा है। ये कब्ज, अपच, पेट के अल्सर, बवासीर, साँस की तकलीफ, डायरिया आदि से मुक्ति दिलाता है। वायरल और बेक्टेरियल इन्फेक्शन को रोकता है। कैंसर जैसे रोग से बचाता है। इनके अलावा भी कई रोगों में काम आता है।

सफ़ेद दाग और टूटी हुई हड्डी जोड़ने के लिए भी बील दवा के रूप में काम आता है। ये अग्नाशय को ताकत देता है, जिससे इन्सुलिन का स्तर सही बना रहता है और खून में शुगर कंट्रोल रहती है इस तरह डायबिटीज ठीक होती है। ये ब्लड प्रेशर भी कम करता है।

बेल के फायदे लाभ – Bael Ke Fayde , Benefits

1. पेचिश – Dysentery : बील पेचिश ठीक करने के लिए बहुत प्रभावकारी है। इससे पुरानी पेचिश तक ठीक हो सकती है। सूखा बील का पाउडर और धनिया पाउडर आधा -आधा चम्मच और मिश्री एक चम्मच मिलाकर सुबह शाम पानी के साथ लेने से पेचिश ठीक होती है। पेचिश के कारण दस्त के साथ खून आता हो तो वो भी बंद होता है।

सौंफ पाउडर – 3 चम्मच ,सूखा बील का पाउडर -3 चम्मच और सोंठ पाउडर दो चम्मच इन तीनो को एक गिलास पानी में उबाल लें। जब आधा रह जाये तब ठंडा होने पर छान लें। ये पानी सुबह शाम पीने से पेचिश ठीक हो जाती है।

बील का मुरब्बा प्रतिदिन खाने से पेचिश में आराम मिलता है। इसका गोंद भी दस्त में और पेचिश में लाभकारी होता है। 

2. कब्ज – Constipation : ये आंतों को बलवान बनाता है। बील कब्ज को ठीक करता है, इसके उपयोग से पेट साफ रहता है। फायबर की भरपूर मात्रा के कारण आतें साफ और स्वस्थ रहती है।

तीन चम्मच बील का गूदा और एक चम्मच इमली एक कप पानी में भिगो दें। दो घंटे बाद मसल कर छान लें। इसमें स्वाद के अनुसार मिलाकर मिश्री मिलाकर पियें। पसंद के हिसाब से पानी की मात्रा थोड़ी बढ़ा सकते है। ये बील का शरबत नियमित पीने से कब्ज ठीक हो जाती है।

गर्मी के मौसम में बील बाजार में आसानी से मिल जाता है। इसका ऊपर का कड़क छिलका तोड़कर अंदर का गूदा चार चम्मच एक गिलास पानी में दो घंटे भिगो दें। मसल कर छान कर मिश्री मिलाकर पीएं। मिश्री की जगह काला नमक भी ले सकते है। ये शरबत कब्ज मिटा देता है।

3. मधुमेह – diabitis : बीलपत्र मधुमेह (डायबिटीज) रोग में बहुत लाभकारी है। 10 -12 बीलपत्र और 4 -5 काली मिर्च पीस कर पानी में मिलाकर रोज पीने से डायबिटीज रोग में आराम मिलता है। बील का जूस पीने से अग्नाशय ( Pancreas ) को शक्ति मिलती है और इन्सुलिन की मात्रा संतुलित रहकर डायबिटीज में फायदा मिलता है।

4. पेट का अल्सर – Peptik Ulcer : बील में विशेष फेनोलिक कम्पाउंड और एंटी ऑक्सीडेंट्स होते है जो पेट के अल्सर को ठीक करते है। पेट में लम्बे समय तक होने वाली एसिडिटी के कारण पेट की अंदरूनी त्वचा को नुकसान पहुंचता है। जिसकी वजह से अल्सर बन जाते है। बील एसिडिटी मिटाने के साथ अल्सर को भी ठीक करता है।

5. सफ़ेद दाग – Vitiligo : त्वचा के ऊपर बनने वाले सफ़ेद धब्बे बील की मदद से ठीक हो सकते है। बील के गूदे में सोरलिन ( psoralen ) नाम का तत्व होता है जो स्किन की धूप सहने की शक्ति बढ़ाता है। इसके अलावा बील में कैरोटीन भी होता है। ये दोनों तत्व मिलकर स्किन का रंग एकसार बनाए रखने में महत्त्व पूर्ण भूमिका निभाते है। नियमित बील के उपयोग से सफ़ेद दाग हलके पड़कर त्वचा सामान्य हो जाती है।

6. दस्त और हैजा – diarrhoea and cholera : बील में मौजूद टेनिन नामक तत्व में एंटी बैक्टीरियल गुण होते है। बैक्टीरिया के कारण होने वाले दस्त में बील का ये गुण बहुत लाभदायक होता है। बारिश के मौसम की बीमारियों में दस्त और हैजा अधिक होते है जिसमे बील विशेष रूप से गुणकारी होता है।

बील के विटामिन ” C ” से लाभ : बील में प्रचुर मात्रा में विटामिन C होता है। जो इम्युनिटी यानि रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। विटामिन C के कारण ही ये स्कर्वी नामक रोग से भी बचाव करता है। शरीर में चुस्ती फुर्ती लाकर सुस्ती मिटाता है। विटामिन “C ” के कारण ही बील दांत मसूड़ों को भी स्वस्थ रखने में मदद करता है।

7. बवासीर – Piles : बवासीर Piles का मुख्य कारण कब्ज ही होता है। बील का टेनिन बवासीर को ठीक करता है। बील में आंतों की क्रियाशीलता बढाने का विशेष गुण होता है जिसकी वजह से अंदरूनी पाचन तंत्र को नुकसान पंहुचे बिना बाउल मूवमेंट आसान होता है। जिसकी वजह से कब्ज ठीक होकर पाईल्स में आराम मिलता है। बील में मौजूद दर्द और सूजन मिटाने वाले तत्व भी बवासीर ठीक करते है। इसके लेने से पाइल्स में बहुत आराम मिलता है। पढ़ें बवासीर Piles के घरेलु नुस्खे

8. कोलेस्ट्रॉल – cholesterol : बील की पत्तियों में कोलेस्ट्रॉल कम करने का गुण होता है। बील की ताजा पत्तियों का रस पीने से कोलेस्ट्रॉल कम होता है। सुबह खाली पेट एक चम्मच रस प्रतिदिन लेना चाहिए। रस निकालना भी सरल है। पत्तियों को कूट पीस कर कपड़े में डालकर नीचो कर रस निकाल लें। ये रस कुछ दिन लेने से जिन्हे कोलेस्ट्रॉल नहीं है, उन्हें भी दिल की बीमारियों से सुरक्षा मिलती है।

9. लीवर – Liver : बील में बीटा कैरोटीन, थायमिन और रिबोफ्लेविन होने के कारण लीवर की समस्या से मुक्ति दिलाकर लीवर को शक्ति शाली बनाता है।

10. किडनी – kidney : बील में शरीर के विषैले तत्व को बाहर निकालने की अद्भुत शक्ति होती है। बील का नियमित उपयोग किडनी की मदद करके किडनी को स्वस्थ बनाता है। अतः किडनी की समस्या में बील का उपयोग करने की सलाह दी जाती है।

11. बेल का शर्बत बनाने की विधि/bel ka sharbat banane ki vidhi : बील का शर्बत बनाने के लिए पहले बील का सीरप तैयार कर ले।
बील का सीरप बनाने का तरीका :-
सामग्री :-
सूखा हुआ बील -250 ग्राम
पानी -2 लीटर
शक्कर – 1 किलोग्राम
सिट्रिक एसिड – 1 चुटकी

सूखे बील को धोकर पानी में रात भर भिगो दें। सुबह इसे उबालने चढ़ा दें। आधा रह जाए तब बारीक चलनी या कपड़े से छान लें। इसमें शक्कर मिलाकर मध्यम आँच पर दस मिनट उबाल लें। बहुत ज्यादा देर न उबालें। गैस से उतारकर इसमें सिट्रिक एसिड मिला दें। ठंडा होने पर साफ बोतल में भर ले। ये बील का सीरप तैयार है।

जब भी शर्बत बनाना हो तो एक ग्लास के लिए :-
1/4 ग्लास बील सीरप में पानी डालकर ग्लास पूरा भर लें।
एक चम्मच नींबू का रस मिला लें
बर्फ डालें।
मेहमान को पिलाएँ , खुद भी पिएँ।
स्वाद के अनुसार भुना जीरा , काला नमक , काली मिर्च आदि मिला सकते है।

बेल का शेक बनाने की विधि/bel ka shek banane ki vidhi
चार ग्लास शेक के लिए :-

बील के गूदे को पानी में दो घंटे के लिए भिगो दें।
बीज निकाल दें ।
बील का ये गूदा – एक कप
वेनिला आइस क्रीम – एक कप
दूध – दो ग्लास
थोड़ी बर्फ
स्वाद के अनुसार शक्कर
मिक्सी में घुमा लें।
ग्लास में डालकर थोड़े मेवे डाल दें।
बील का स्वादिष्ट शेक तैयार है।

बील का जूस बनाने की विधी
bel ka juice banane ki vidhi

बील के ऊपरी कड़क हिस्से को तोड़कर अंदर का गूदा पानी में भिगो दें। बील का गूदा पका हुआ यानी थोड़ा लाल होना चाहिए। गूदा अगर सफेद या पीला है तो कच्चा है।
चार घंटे बाद गूदे को पानी में मसल लें। इस पानी को छान लें। छानने के लिए स्टील की छलनी लें। चम्मच से थोड़ा दबा कर पानी डालकर गूदा अच्छे से निकल लें।
छने हुए गूदे में यदि चाहें तो जरूरत के हिसाब से और पानी मिला लें।
अब इसमें स्वाद के अनुसार शक्कर , काला नमक, थोड़ी काली मिर्च मिलाकर पिएँ।
खरबूजे के आकार का बील है तो चार ग्लास जूस के लिए चौथाई गूदा ही काफी होगा।
बील के गूदे को बीजों को नहीं मसलना चाहिए वर्ना जूस का स्वाद खराब हो सकता है। गूदे को मिक्सी में बीज सहित घुमाने से भी जूस का स्वाद बिगड़ जाता है।
स्रोत : http://www.dadimakenuskhe.com/%E0%A4%AC%E0%A5%80%E0%A4%B2-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AB%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A6%E0%A5%87/
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बेल का रस पीने के 8 बेजोड़ फायदे
aajtak.in [Edited by: भूमिका राय]
नई दिल्ली, 5 अप्रैल 2016 | अपडेटेड: 13:44 IST

बेल का रस पीने के फायदे
बेल एक ऐसा पेड़ है, जिसके हर हिस्से का इस्तेमाल सेहत बनाने और सौंदर्य निखारने के लिए किया जा सकता है. आयुर्वेद में इसके कई फायदों का उल्लेख मिलता है. इसका फल बेहद कठोर होता है, लेकिन अंदर का हिस्सा मुलायम, गूदेदार और बीजों से युक्त होता है.
बेल के फल का जीवनकाल काफी लंबा होता है. पेड़ से टूटने के कई दिनों बाद भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है. बेल का इस्तेमाल कई तरह की दवाइयों को बनाने में तो किया जाता है ही साथ ही ये कई स्वादिष्ट व्यंजनों में भी प्रमुखता से इस्तेमाल होता है. बेल में प्रोटीन, बीटा-कैरोटीन, थायमीन, राइबोफ्लेविन और विटामिन सी भरपूर मात्रा में पाया जाता है.
बेल का रस पीने के फायदे:
1. दिल से जुड़ी बीमारियों से बचाव में सहायक: बेल का रस तैयार कर लीजिए और उसमें कुछ कुछ बूंदें घी की मिला दीजिए. इस पेय को हर रोज एक निश्चित मात्रा में लें. इसके नियमित सेवन से दिल से जुड़ी बीमारियों से बचाव होता है. ये ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में सहायक होता है.
2. गैस, कब्ज की समस्या में राहत: नियमित रूप से बेल का रस पीने से गैस, कब्ज और अपच की समस्या में आराम मिलता है.
3. कोलेस्ट्रॉल स्तर को नियंत्रित रखने में मददगार: बेल का रस कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने में मददगार होता है.
4. दस्त और डायरिया की समस्या में भी फायदेमंद: आयुर्वेद में बेल के रस को दस्त और डायरिया में बहुत फायदेमंद माना गया है. आप चाहें तो इसे गुड़ या चीनी के साथ मिलाकर पी सकते हैं.
5. ठंडक देने का काम करता है: बेल के रस को शहद के साथ मिलाकर पीने से एसिडिटी में राहत मिलती है. अगर आपको मुंह के छाले हो गए हैं तो भी इसका सेवन आपके लिए फायदेमंद रहेगा. गर्मी के लिहाज से ये एक बेहतरीन पेय है. एक ओर जहां ये लू से सुरक्षित रखने में मददगार होता है वहीं शरीर को अंदर से ठंडक देने का काम करता है.
6. नई मांओं के लिए भी है फायदेमंद: अगर आप एक नई मां हैं तो आपके लिए बेल का रस पीना बहुत फायदेमंद रहेगा. ये मां के स्वास्थ्य को बेहतर करने में तो सहायक है ही साथ ही ब्रेस्ट मिल्क प्रोडक्शन को भी बढ़ाता है.
7. कैंसर से बचाव के लिए: नियमित रूप से बेल का रस पीने से ब्रेस्ट कैंसर होने की आशंका काफी कम हो जाती है.
8. खून साफ करने में सहायक: बेल के रस में कुछ मात्रा गुनगुने पानी की मिला लें. इसमें थोड़ी सी मात्रा में शहद डालें. इस पेय के नियमित सेवन से खून साफ हो जाता है.
स्रोत : http://aajtak.intoday.in/story/benefits-of-bael-juice-1-862486.html
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Bel ke Aushdhiy Pryog | बेल के औषधीय प्रयोग | Medicine Uses of Bel
बेल के औषधीय प्रयोग (Medicine Uses of Beal)
1. अपच: बेल का पका हुआ फल पेट की अपच को खत्म करने के लिए बेहद उपयोगी ओता हैं. यदि आपके पेट में कब्ज हो गई हैं तो आपको पके हुए बेल के गूदे का सेवन 2 – 4 दिनों तक रोजाना करना चाहिए. कुछ ही दिनों में आपको पेट की कब्ज से मुक्ति मिल जायेगी.

2. अल्सर: अल्सर के रोग से मुक्ति पाने के लिए भी बेल का प्रयोग किया जा सकता हैं. बेल के अलावा बेल के पेड़ की पत्तियां जिन्हें बेलपत्र भी कहा जाता हैं. उसका प्रयोग भी आप इस रोग से छुटकारा पाने के लिए कर सकते हैं. अल्सर के रोग से निजात पाने के लिए बेल की दस या बारह पत्तियां लें और इन्हें पानी में भिगो दें. अगले दिन सुबह उठकर इन पत्तियों को पानी में से निकालकर पानी को छान लें और इसे पी जाएँ. कुछ दिनों तक लगातार ऐसे करने से आपको अवश्य ही इस रोग से राहत मिल जायेगी.

3. नेत्ररोग: बेल के पेड़ की पत्तियां नेत्र से सम्बन्धित रोगों के लिए भी कभी लाभदायक होती हैं. आप इनका प्रयोग कर नेत्र के रोगों से मुक्ति पा सकते हैं. नेत्र के रोगों को ठीक करने के लिए बेल की कुछ पत्तियों का रस निकाल लें और उसे अपनी आँखों में काजल की तरह लगा लें. कुछ दिनों तक लगातार बेल के पत्तों का प्रयोग करने से नेत्र रोग ठीक हो जाएगा.
4. श्वास रोग: सांस से सम्बन्धित रोगों को दूर करने के लिए भी बेल के पत्तों का रस बहुत ही लाभदायक होता हैं. सांस की बिमारी से राहत पाने के लिए बेल की कुछ पत्तियां लें और उन्हें पीसकर पत्तियों का रस निकाल लें. अब बेल की पत्तियों के रस की समान मात्रा में तिल का तेल लें और इसे बेल की पत्तियों के रस में अच्छी तरह से मिला लें. अब इस रस को थोडा गर्म कर लें और इसमें काली मिर्च तथा जीरे का पाउडर मिला दें. अब इस रस को कुछ देर ठंडा करने के बाद अपने गले पर लगा लें. इस मिश्रण को गले पर लगाने से आपको काफी राहत मिलेगी तथा अगर आपको खांसी या जुखाम की शिकायत हैं तो इन दोनों परेशानियों से भी आपको मुक्ति मिल जायेगी. CLICK HERE TO READ MORE ABOUT बेल एक उपयोगी फल ...

5. संग्रहणी: यदि आप संग्रहणी की बिमारी से अत्यधिक परेशान हैं और लगातार यह बिमारी बढती जा रही हैं और संग्रहणी का वेग अधिक हो गया हैं और उसमें खून आने की भी शिकायत हैं तो आप इस रोग से मुक्ति पाने के लिए कच्चे बेल के चुर्ण का प्रयोग कर सकते हैं. इस बिमारी से राहत पाने के लिए बेल के कच्चे फल का चुर्ण लें और एक चम्मच शहद लें. अब इन दोनों को एक साथ मिला लें और इसका सेवन करें. प्रतिदिन 1 या 2 चम्मच इस मिश्रण का सेवन करने से आपको संग्रहणी के रोग से छुटकारा मिल जाएगा.
संग्रहणी के रोग से मुक्ति पाने के लिए आप पके हुए बेल का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके लिए पके हुए बेल को फोड़ कर इसके अंदर का गूदा निकाल लें. अब एक कटोरी दही लें और उसमें बेल के गूदे को मिलाकर हल्की आँच पर भून लें. भूनने के बाद इस मिश्रण को उतार लें और इसमें अपनी इच्छानुसार कच्ची शक्कर मिला लें. अब एक गिलास हल्का गरम दूध लें और उसके साथ इस मिश्रण का सेवन करें. प्रतिदिन दूध के साथ दो चम्मच मिश्रण का सेवन करने से जल्द ही पुरानी संग्रहणी की बिमारी ठीक हो जायेगी.

6. शरीर में ठंडक – शरीर को ठंडक प्रदान करने के लिए बेल बहुत ही लाभप्रद होता हैं. इसलिए गर्मी के दिनों में इसके जूस का सेवन करना अधिक्तर लोग पसंद करते हैं. बल का फल शरीर को ठंडक प्रदान करने के साथ – साथ शरीर के पाचन तंत्र के लिए भी फायदेमंद होता हैं. गर्मी के दिनों में शरीर को ठंडक प्रदान करने के लिए पके हुए बेल का गूदा निकाल लें. अब एक बर्तन में दूध लें और उसमें बेल के गूदे को डालकर मिला लें. अब इसमें 2 चम्मच शक्कर डालें और शर्बत को अच्छी तरह से घोलने के बाद इस मिश्रण का सेवन करें. गर्मी के दिनों में रोजाना बेल के शर्बत का प्रयोग करने से शरीर को ठंडक मिलती हैं.

7. कब्ज – अगर आपके पेट में गैस (कब्ज) बनने की शिकायत हैं तो इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए भी आप बेल के गूदे का प्रयोग कर सकते हैं. पेट की कब्ज से मुक्ति पाने के लिए 150 ग्राम पके हुए बेल का गूदा लें और उसे रोजाना सोने से पहले खाकर सोयें. बेल के गूदे को खाकर सोने से मल मुलायम होकर निकल जाता हैं और पेट की कब्ज भी ख़त्म हो जाती हैं. यदि खुश्की अधिक हैं तो भी आप बेल के गुदे का प्रयोग कर सकते हैं. इसके लिए बेल का गूदा लें और उसमें मिश्री के दाने या शक्कर अच्छी तरह से मिला लें. अब इस मिश्रण का सेवन करें. इस मिश्रण का सेवन रोजाना करने से खुश्की नहीं होती. CLICK HERE TO READ MORE ABOUT बेल का आयुर्वेदिक इस्तेमाल ...

बेल के औषधीय प्रयोग 

8. अतिसार – अतिसार की बिमारी से राहत पाने के लिए भी आप बेल का प्रयोग कर सकते हैं. अतिसार के रोग से मुक्ति पाने के लिए 30 ग्राम सुखी बेलगिरी लें और 10 ग्राम कत्था लें. अब इन दोनों को अच्छी तरह से पीस कर बारीक़ चुर्ण बना लें. अब इस चुर्ण में 1 ग्राम चीनी मिला लें. अब एक गिलास पानी लें. अब एक चम्मच चुर्ण को पानी के साथ फांक लें. रोजाना इस चुर्ण का सेवन करने से कुछ ही दिनों के अन्दर अतिसार का रोग ठीक हो जाएगा.

9. बच्चों में अतिसार की बिमारी – अगर बच्चों को अतिसार की बीमारी हो गई हैं तो भी आप उन्हें इस बिमारी से निजात दिलाने के लिए भी सूखे हुए बेल का प्रयोग कर सकते हैं. इसके लिए सुखी बेलगिर का एक टुकड़ा लें और अर्क वाली सौंफ लें. अब एक साफ पत्थर पर इन दोनों को पीसकर बारीक़ चुर्ण तैयार कर लें. अब इस पिसे हुए चुर्ण की एक चौथाई मात्रा दिन में 2 – 3 बार अपने बच्चे को चटायें. रोजाना बच्चे को चुर्ण चटाने से कुछ ही समय में बच्चे को अतिसार की बिमारी से छुटकारा मिल जाएगा.

10. यौन रोग – यौन रोग जैसे स्त्रियों के रक्तप्रदर, श्वेतप्रदर तथा पुरुषों में धातु दुर्बलता, स्वप्नदोष, पुरुष प्रमेह आदि रोगों के लिए भी बेल बहुत ही फायदेमंद होता हैं. इन सभी रोगों से मुक्ति पाने के लिए 4 ग्राम बेल के पत्तें लें और इन्हें पीस लें. अब एक चमच्च शहद लें और उसे बेल के पत्ते के चूर्ण में मिला दें. अब एक गिलास दूध लें और इसके साथ एक चमच्च मिश्रण का सेवन करें. रोजाना दूध के साथ एक चम्मच चुर्ण का सेवन करने से इन सभी यौन रोगों से पुरुष और महिला को मुक्ति मिल जाती हैं.

स्रोत : http://www.jagrantoday.com/2015/12/bel-ke-aushdhiy-pryog-medicine-uses-of.html
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गर्मियों में हेल्थगार्ड है बेल का फल, जानें इसके फायदे
Patrika news network Posted: 2015-04-23 12:01:52 IST Updated: 2015-04-23 12:01:52 IST
संक्षिप्त विवरण 
बील या बेल एक ऐसा ही फल हो, जो अपने विशेष गुणों के कारण गर्मियों में अधिक उपयोगी माना जाता है...
जयपुर
गर्मियों ने अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया है, इसलिए अपने पेट और दिमाग को शांत रखना जरूरी है। बील या बेल एक ऐसा ही फल हो, जो अपने विशेष गुणों के कारण गर्मियों में अधिक उपयोग किया जाता है। आयुर्वेद में भी बेल के फल और पत्र दोनों को समान रूप से उपयोगी माना गया है। फल की मज्जा में क्यूसिलेज पेक्टिन तथा टेनिन आदि रसायन पाए जाते हैं। फल का गूदा, बेल-पत्र, मूल एवं छाल का चूर्ण तथा पेड़ के अन्य सभी अंग एवं अवयव उपयोग में लिए जाते हैं। बेल का चूर्ण बनाने के लिए कच्चा, मुरब्बे के लिए अधपका और ताजे शर्बत के लिये पके हुए फल का उपयोग होता है।
अस्थमा
बेल-पत्रों से बना क्वाथ (काढ़ा) सर्दी-जुकाम के कहर को कम करता है। यह सर्दी से होने वाली श्लेष्मा (कफ) को कम करता है और अस्थमा के प्रसार को धीमा करता है।
आंखों का संक्रमण
बेल-पत्रों को आंखों में होने वाले विभिन्न संक्रमण तथा सूजन के निदान में व्यवहार किया जाता है। खासतौर से नेत्र-शोध(Psoralen) यह बहुत प्रभावी होता है।

बुखार
बेल-मूल तथा पेड़ का छाल से बने क्वाथ से विभिन्न तरह के ज्वरों का इलाज किया जाता है। आयुर्वेदिक चिकित्सा में बेल-मूलों से वात-कफ-पित्त से होने वाले दोषों तथा ज्वरों को ठीक किया जाता है।

कब्ज
उदर विकारों में बेल का फल अचूक दवा के रूप में उपयोग किया जाता है। फल के नियमित सेवन से कब्ज जड़ से समाप्त हो जाता है। बेल फल उदर की स्वच्छता के अलावा आंतों को साफ कर उन्हें ताकत भी देता है।

डायरिया
गर्मियों में प्राय: अतिसार/ डायरिया की वजह से पतले दस्त होने लगते हैं, ऐसी स्थिति में कच्चे बेल को आग में भून कर उसका गूदा, रोगी को खिलाने से फौरन लाभ मिलता है। बेल का मुरब्बा खाने से पित्त व अतिसार में लाभ होता है। पेट के सभी रोगों में बेल का मुरब्बा खाना लाभप्रद है।

गर्मियों में जरा-सी असावधानी से लू लगने का खतरा बना रहता है, इसलिए गर्मियों में बेल का सेवन जरूर करें। अगर लू लग जाए, तो निवारण करने के लिए बेल के ताजे पत्तों को पीसकर मेहंदी की तरह पैर के तलुओं में ठीक से मलें। इसके अलावा सिर, हाथ, छाती पर भी इसकी मालिश करने से राहत मिलती है। बेल के शर्बत में मिश्री मिलाकर पीने से भी तुरंत राहत मिलती है।

अल्सर
बेल फल तथा बेल पत्रों के रस से बनी दवाओं का प्रयोग पेप्टिक अल्सर को ठीक करने के लिए किया जाता है। फल के गूदे से गैस्ट्रिक म्यूकोसा पर म्यूसिलेजिनस लेयर बन जाती है, जिससे अम्लता म्यूकोसल स्तर के साथ प्रतिक्रिया नहीं कर पाती है और अल्सर बढऩे से रूक जाता है। 

कान की समस्या
बेल की जड़ों में एस्ट्रिंजेंट ए्क्टिविटी पाई जाती है और इसी वजह से यह घरेलू उपायों में कान की समस्या को दूर करने के लिए उपयोग किया जाता है। बेल की जड़ों को नीम के पत्तों के साथ मिलाकर बनी दवाएं कान के संक्रमण, असाध्य सूजन तथा पस को निकलाने में मदद करती है।

कैंसर
अध्ययनों ने बताया है कि बेल फल के सत्त में एंटी-प्रोलिफरेटिव एक्टिविटी होती है। जो मानवों में ट्यूमर सेल्स के फैलाव को रोकने में मदद करती है। गूदे से बने शर्बत में जल में घुलनसील एंटी-ऑक्सीडेंट्स, फेनोलिक तत्व तथा एंटी-म्यूटाजेन्स पाए जाते हैं, जो कैंसर-रोधी होते हैं तथा ये शरीर की सेल्स को फ्री-रेडिएशन से होने वाली क्षति से बचाते हैं। 

ल्यूकोडर्म
बेल फल के स्वादिष्ट तथा सुंगधित गूदे में सोरेलेन (क्कह्यशह्म्ड्डद्यद्गठ्ठ) नामक घटक पाया जाता है, जो सामान्य त्वचा की कड़ी धूप को सहने की शक्ति या टोलेरेंस पॉवर बढ़ाता है। इससे त्वचा का सामान्य रंग नहीं बदलता। त्वचा के सामान्य रंग से श्वेत होने की स्थिति को ल्यूकोडर्म कहते हैं और बेल फल का सेवन इस त्वचा विकार का अचूक उपाय माना जाता है।

मधुमेह
मधुमेह रोगियों के लिए बेल फल बहुत लाभदायक है। इसकी पत्तियों को पीसकर उसके रस का दिन में दो बार सेवन करने से मधुमेह रोगियों की रिस्क कम होती है। पत्तों के सत्त से ब्लड यूरिया तथा कोलेस्ट्रोल को सार्थक तरीके से कम करता है। बेल प्राकृतिक तौर पर एक क्षारीय फल है, जो शरीर से जहरीले पदार्थ निकालता है, अम्लीयता कम करता है।
स्रोत : http://rajasthanpatrika.patrika.com/story/diet/health-benefits-of-bel-fruit-976617.html
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--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!

--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!
सभी के स्वस्थ एवं सुदीर्घ जीवन की कामना के साथ-मेरे प्यारे और दुलारे तीन बच्चों की ममतामयी अद्वितीय माँ (मम्मी) जो दुखियों, जरूतमंदों और मूक जानवरों तक पर निश्छल प्यार लुटाने वाली एवं अति सामान्य जीवन जीने की आदी महिला थी! वह पाक कला में निपुण, उदार हृदया मितव्ययी गृहणी थी! मेरी ऐसी स्वर्गीय पत्नी "जानकी मीणा" की कभी न भुलाई जा सकने वाली असंख्य हृदयस्पर्शी यादों को चिरस्थायी बनाये रखते हुए इस ब्लॉग को आज दि. 08.08.12 को फिर से पाठकों के समक्ष समर्पित कर रहा हूँ!-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'

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(Tribulus Terrestris) 14 फरवरी Abutilon Indicum Allergy Aloevera Juice Alum Aluminum Amaranthus spinosus Ammonium chloride Appetite Argemone Mexicana Ash-coloured Fleabane Bael Ban Tulasi Bauhinia purpurea Bernini’s Cinema Bitter Gourd Black night shade Blumea Lacera Bone Infection Borax Calories Calories Chart Cancer Care Carrots Castor beans Chanca Piedra Cheese Chemotherapy Chenopodium Album Cholesterol Cleome viscosa Clerodendrum Phlomidis Clitoria Ternatea Colocynth Colpoptosis Constipation Convolvulus Pluricaulis Croton Bonplandianum Croton Sparsiflorus Cumin Date Palm Dengue Diabetes digestion Disorders Divorce Dog Mustard Dysentery Early Ejaculation Emblic Myrobalan Extramarital Relation Extremely Intolerance Fatty liver Femininity FENUGREEK Fenugreek Seeds Ferrum Phosphoricum Fever Fissure Fistula Folic Acid Gallbladder Gardenia Gummifera Garlic Ginger Gooseberry Gourd Groundnut-peanut Guava Hainampfer Hair Falling Headaches Health Health Care Friend Health Consultation Health Links Health Tips Hemorrhoids Hepatitis Hibiscus Homeopathic Homeopathy Homoeopath Honey How to get pregnant? 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दो मन द्रोणपुष्पी-Leucas Cephalotes धड़कन धनिया बीज धनिया-Coriander धमासा धातु धातु पतन धार्मिक धूम्रपान छोड़ना चाहते हैं? धैर्यहीन नज़ला नपुंसकता नाक नाखून नागबला नागरमोथा नाडी हिंगु नाड़ी हिंगु (डिकामाली) नामर्दी नारकीय पीड़ा नारियल नाश्ता निमोनिया निम्न रक्तचाप निम्बू नियासिन निराश निरोगधाम निर्गुण्डी निर्गुन्डी निष्कपट स्नेह निष्ठा निसोरा नींद नींबू नींबू-Lemon नीम-azadirachta indica नुस्खे नुस्खे-Tips नेगड़ नेत्र रोग नेुचरल नैतिक नॉर्मल डिलेवरी नोनिया नौसादर न्युमोनिया-Pneumonia न्यूरॉन्स पक्षघात पंचकर्म पढ़ने में मन लगेगा पंतजलि पत्तागोभी-CABBAGE पत्थर फोड़ी पत्थरचट्टा पत्नी पथरी पदार्थ पनीर पपीता पपीता-CARICA PAPPYA पमाड परदेशी लांगड़ी परम्परागत चिकित्सा परहेज पराठा परामर्श परिस्थिति पवाड़ पवाँर पाइल्स पाक-कला पाचक पाचन पाचनतंत्र पाचनशक्ति पाठक संख्या 16 लाख पार पाठक संख्या पंद्रह लाख पायरिया पारदर्शिता पारिजात पालक पालक-Spinach पित्त पित्ताशय पित्ती पिंपल-मुंहासे-Pimples-Acne पिरामिड पीलिया पीलिया-Jaundice पीलिया-कामला-Jaundice पुआड़ पुदीना पुनर्नवा-साटी-सौंटी-Punarnava पुरुष पुंसत्व पेचिश पेट के कीड़े पेट दर्द पेट में गैस पेट रोग पेड़ पेद दर्द पेशाब पेशाब में रुकावट पेंसिल थेरेपी-Pencil Therapy पौधे पौरुष पौष्टिक रागी रोटी प्याज-Onion प्यास प्रजनन प्रतिरक्षा प्रतिरक्षा प्रणाली प्रतिरोधक प्रतिरोधक-Resistance प्रदर प्रमेह प्रवाहिका (पेचिश)-Dysentery प्रसव प्रसव सुरक्षा चक्र प्रसव-पीड़ा प्रसूति प्राणायाम प्रेग्नेंसी-Pregnancy प्रेम प्रेमरस प्रेमिका प्रेमी प्रोटीन प्रोटीन का कार्य प्रोटीन के स्रोत प्रोस्टेट प्रोस्टेट ग्रन्थि प्लीहा प्लूरिसी-Pleurisy प्लेटलेट्स फफूंद-Fungi फरास फल फल-Fruit फाइबर फिटकरी फुंसी-Pimples फूलगोभी-CAULIFLOWER फेंफड़े फेरम फॉस फैट फैटी लीवर फोटोफोबिया फोड़ा फोड़े-Boils फोरप्ले फोलिक एसिड फ्लू फ्लू-Flu फ्लेक्स सीड्स बकायन बकुल बड़ी हरड़ बथुआ बथुआ पाउडर बथुआ-White Goose Foot बदबू बबूल-ACACIA बरसाती बीमारियाँ बरसाती बीमारियां बलगम बलवृद्धि बला बलात्कार बवासीर बहरापन बहुनिया बहुमूत्रता- बांझपन बादाम-Almonds बादाम. बाल बाल झड़ना बाल झडऩा-Hair Falling बिना सिजेरियन मां बनें बिवाई बीजबंद बीड़ी बीमारियों के अनुसार औषधियां बीमारी बुखार बूंद-बूंद पेशाब बेल बेली बैक्टीरिया बॉयोकैमी ब्र​ह्मदण्डी ब्रेस्ट ग्रोथ ब्लड प्रेशर ब्लैक मेलिंग ब्लॉकेज भगंदर भगंदर-Fistula-in-ano भगनासा भगन्दर भगोष्ठ भड़भांड़ भय भविष्य भस्मक रोग भावनात्मक भुई आंवला-Phyllanthus Niruri भूई आमला भूई आंवला भूख भूख बढ़ाने भूमि भूमि आंवला भोजनलीवर मकोय मकोय-Soleanum nigrum मंजीठ मटर-PEA मंद दृष्टि मंदाग्नि मदार मधुमेह मधुमेह-Diabetes मन्दाग्नि-Dyspepsia मरुआ मरोड़ मर्द मर्दाना मलाशय मलेरिया मलेरिया (Malaria) मवाद मसाले मस्तिष्क मस्से मस्से-WARTS महंगा इलाज महत्वपूर्ण लेख महाबला माइग्रेन माईग्रेन माईंड सैट माजूफल मानवव्यवहार मानसिक मानसिक लक्षण मानसिक-Mental मानिसक तनाव-Mental Stress मायोपिया मासिक मासिक-धर्म मासिकधर्म मासिकस्राव माहवारी मिनरल मिर्गी मिर्च-Chili मीठा खाने की आदत मुख मैथुन-ओरल सेक्स-Oral Sex मुख्य लक्षण मुधमेह मुलहठी मुलेठी मुहाँसे मूँगफली मूड डिस्ऑर्डर-Mood Disorders मूत्र मूत्र असंयमितता मूत्र में जलन-Burning in Urine मूत्राशय मूत्रेन्द्रिय मूर्च्छा (Unconsciousness) मूली मूली कर रस मृत्यु मृत्युदण्ड मेथी मेथी दाना मेंहदी मैथुन मोगरा 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