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पीलिया-Jaundice कारण और इलाज

पीलिया रोग के कारण एवं घरेलू उपचार
by Dr Kamal Sharma 05 May 2015

पीलिया शरीर मेँ छिपे किसी अन्य रोग का लक्षण है | नवजात शिशुओं मेँ यह रोग सामान्य रुप से पाया जाता है | रोग के लक्षण धीरे-धीरे ही स्पष्ट होते है | एकदम से पीलिया होने की संभावना कम ही होती है |

पीलिया रोग का कारण

जब जिगर से आंतों की ओर पित्त का प्रवाह रुक जाता है तो पीलिया रोग प्रकट होता होता है | पित्त के जिगर मेँ इकट्ठा होकर रक्त मेँ संचार करने से शरीर पर पीलापन स्पष्ट दिखने लगता है | पीलिया रोग प्रमुख रुप से दो प्रकार का होता है | पहला अग्न्याशय के कैंसर या पथरी के कारण | यह पित्त नलिकाओं अवरोध होने से आंतों मेँ पित्त नहीँ पहुंचने के कारण होता है | दूसरे प्रकार का पीलिया लाल रक्त कोशिकाओं के प्रभावित होने तथा शरीर मेँ पित्त की अत्यधिक उत्पत्ति से होता है | मलेरिया तथा हैपेटाइटिस रोग भी पीलिया के कारण होता है | कभी-कभी शराब तथा विष के प्रभाव से भी पीलिया रोग हो जाता है |

पीलिया रोग के लक्षण

रोगी की त्वचा पीली पड़ जाती है | आंखोँ के सफेद भाग मेँ पीलापन झलकना भी पीलिया के प्रमुख लक्षण है | इसके अतिरिक्त मूत्र मेँ पीलापन आ जाता है तथा सौंच सफेद रंग का होता है | त्वचा पर पीलापन छाने से पहले त्वचा मेँ खुजली होती है |

पीलिया रोग का उपचार

1. बड़ा पहाड़ी नीबू का रस पित्त प्रवाह मेँ सुचारु रुप से करने में सहायक होता है |

2. कच्चे आम को शहद तथा कालीमिर्च के साथ खाने से पित्त जन्य रोगो मे लाभ होता है और जिगर को बल मिलता है |

3. चुकंदर का रस भी पित्त प्रकोप को शांत करता है | इसमेँ एक चम्मच नींबू का रस मिलाकर प्रयोग करते रहने से शीघ्र लाभ होता है |

4. चुकंदर के पत्तों की सब्जी बनाकर खाने से भी पीलिया रोग शांत होता है |

5. सहजन के पत्तों के रास मेँ शहद मिलाकर दिन मेँ दो-तीन बार देने से रोगी को लाभ होता है |

6. अदरक, नींबू और पुदीने के रस मेँ एक चम्मच शहद मिलाकर प्रयोग करना भी काफी फायदेमंद होता है |

7. पीलिया के रोगी को मूली के पत्तो से बहुत अधिक लाभ होता है | पत्तों को अच्छी तरह से रगड़कर उसका रस छानें और उसमेँ छोटी मात्रा में चीनी या गुड़ मिला लेँ | पीलिया के रोगी को प्रतिदिन कम से कम आधा किलो यह रस देना चाहिए | इसके सेवन से रोगी को भूख लगती है और नियमित रुप से उसका मल साफ होने लगता है | रोग धीरे-धीरे शांत हो जाता है |

8. एक गिलास टमाटर के रस में थोड़ा सा काला नमक और काली मिर्च मिला लेँ | इसे प्रातःकाल पीने से पीलिया रोग मेँ काफी लाभ होता है और जिगर ठीक से काम करने लगता है |

9. पीपल के पेड़ की ३-4 नई कोपलेँ अच्छी प्रकार से धोकर मिश्री या चीनी के साथ मिलाकर बारीक बारीक पीस ले | 200 ग्राम जल मेँ घोलकर रोगी को दिन मेँ दो बार पिलाने से ४-5 दिनों मेँ पीलिया रोग से छुटकारा मिल जाता है | पीलिया के रोगी के लिए यह एक बहुत ही सरल और प्रभावकारी उपाय है |

10. फिटकिरी को भूनकर उसका चूर्ण बना लेँ | 2 से 4 रती तक दिन मेँ दो या तीन बार छाछ के साथ पिलाने से कुछ ही दिनोँ मेँ पीलिया रोग मेँ आराम होना शुरु हो जाता है |

11. कासनी के फूलोँ का काढ़ा बनाकर 50 मिलीलीटर तक की मात्रा मेँ दिन मेँ तीन-चार बार देने से पीलिया रोग मेँ लाभ होता है | इसका सेवन करने से बढ़ी हुई तिल्ली भी ठीक हो जाती है | पित्त प्रवाह मेँ सुचरूता तथा जिगर और पित्ताशय को ठीक करने मेँ सहायता मिलती है |

12. गोखरु की जड़ का काढ़ा बनाकर पीलिया के रोगी को प्रतिदिन 50 मिलीलीटर मात्रा दो – तीन बार देने से पीलिया रोग मेँ काफी लाभ होता है |

13. एलोवीरा का गूदा निकाल कर काला नमक और अदरक का रस मिलाकर सुबह के समय देने से लगभग 10 दिनोँ मेँ पीलिया का रोगी ठीक हो जाता है |

14. कुटकी और निशोध दो देसी जड़ी – बूटियाँ है | इन दोनोँ को बराबर मात्रा मेँ लेकर चूर्ण बना लेँ एक चम्मच चूर्ण गर्म जल मेँ रोगी को दे | इस प्रकार दिन मेँ दो बार देने से जल्दी लाभ होने लगता है |

परहेज और सावधानियां

पीलिया के रोगी को मसालेदार और गरिष्ठ भोजन का त्याग करना चाहिए | स्वच्छ पानी उबाल कर ठंडा करके पीना चाहिए | शराब, मांस, धूम्रपान, का सेवन एक दम नहीँ करना चाहिए | अशुद्ध और बासी खाद्द- पदार्थों का सेवन भी नहीं करना चाहिए |
Source : http://www.gharkavaidya.com/home-remedies-for-jaundice-in-hindi/
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पीलिया का कारण और इलाज

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घबरायें नहीं करे पीलिया का उपचार….!
  1. * पीलिया का आयुर्वेद में अचूक इलाज है। आयुर्वेद चिकित्सकों के अनुसार यदि मकोय की पत्तियों को गरम पानी में उबालकर उसका सेवन करें तो रोग से जल्द राहत मिलती है। मकोय पीलिया की अचूक दवा है और इसका सेवन किसी भी रूप में किया जाए स्वास्थ्य के लिए लाभदायक ही होता है।
  2. * जब भी रोगी का यह लगे कि उसका शरीर पीला हो रहा है तथा उसे पीलिया हो सकता है, तो वह पानी की मात्रा बढ़ा दे क्योंकि पानी की मात्रा कम होने पर शरीर से उत्सर्जित होने वाले तत्व रक्त में मिल जाते हैं। इससे व्यक्ति की हालत बिगडऩे लगती है। चिकित्सक बताते हैं कि यदि कच्चा पपीता सलाद के रूप में लिया जाए तो भी पीलिया का असर कम होता है। कई लोग यह मानते हैं कि पीलिया के रोगी को मीठा नहीं खाना चाहिए जबकि आयुर्वेद चिकित्सक ऐसा नहीं मानते उनका कहना है कि पीलिया का रोगी गाय के दूध से बना पनीर व छेने का रसगुल्ला आराम से खा सकता है यह रोगी को कोई नुकसान नहीं बल्कि लाभ पहुंचाता है।
  3. * नाश्ते में अंगूर ,सेवफल पपीता ,नाशपती तथा गेहूं का दलिया लें । दलिया की जगह एक रोटी खा सकते हैं।
  4. * मुख्य भोजन में उबली हुई पालक, मैथी ,गाजर , दो गेहूं की चपाती और ऐक गिलास छाछ लें।
  5. * करीब दो बजे नारियल का पानी और सेवफल का जूस लेना चाहिये।
  6. * रात के भोजन में एक कप उबली सब्जी का सूप , गेहूं की दो चपाती ,उबले आलू और उबली पत्तेदार सब्जी जैसे मेथी ,पालक ।
  7. * रात को सोते वक्त एक गिलास मलाई निकला दूध दो चम्मच शहद मिलाकर लें।
  8. * सभी वसायुक्त पदार्थ जैसे घी ,तेल , मक्खन ,मलाई कम से कम १५ दिन के लिये उपयोग न करें। इसके बाद थौडी मात्रा में मक्खन या जेतून का तैल उपयोग कर सकते हैं। प्रचुर मात्रा में हरी सब्जियों और फलों का जूस पीना चाहिेये। कच्चे सेवफल और नाशपती अति उपकारी फल हैं।
  9. * दालों का उपयोग बिल्कुल न करें क्योंकि दालों से आंतों में फुलाव और सडांध पैदा हो सकती है। लिवर के सेल्स की सुरक्षा की दॄष्टि से दिन में ३-४ बार निंबू का रस पानी में मिलाकर पीना चाहिये।
  10. * मूली के हरे पत्ते पीलिया में अति उपादेय है। पत्ते पीसकर रस निकालकर छानकर पीना उत्तम है। इससे भूख बढेगी और आंतें साफ होंगी।
  11. * धनिया के बीज को रातभर पानी में भिगो दीजिये और फिर उसे सुबह पी लीजिये। धनिया के बीज वाले पानी को पीने से लीवर से गंदगी साफ होती है।
  12. * एक गिलास पानी में एक बड़ा चम्मच पिसा हुआ त्रिफला रात भर के लिए भिगोकर रख दें। सुबह इस पानी को छान कर पी जाएँ। ऐसा 12 दिनों तक करें।
  13. * जौ आपके शरीर से लीवर से सारी गंदगी को साफ करने की शक्‍ति रखता है।
  14. * टमाटर में विटामिन सी पाया जाता है, इसलिये यह लाइकोपीन में रिच होता है, जो कि एक प्रभावशाली एंटीऑक्‍सीडेंट हेाता है। इसलिये टमाटर का रस लीवर को स्‍वस्‍थ्‍य बनाने में लाभदायक होता है।
  15. * इस रोग से पीड़ित रोगियों को नींबू बहुत फायदा पहुंचाता है। रोगी को 20 ml नींबू का रस पानी के साथ दिन में 2 से तीन बार लेना चाहिए।
  16. * आमला मे भी बहुत सारा विटामिन सी पाया जाता है। आप आमले को कच्‍चा या फिर सुखा कर खा सकते हैं। इसके अलावा इसे लीवर को साफ करने के लिये जूस के रूप में भी प्रयोग कर सकते हैं।
  17. * यह एक प्राकृतिक उपाय है जिसेस लीवर साफ हो सकता है। सुबह सुबह खाली पेट 4-5 तुलसी की पत्‍तियां खानी चाहिये।
  18. * जब आप पीलिया से तड़प रहे हों तो, आपको गन्‍ने का रस जरुर पीना चाहिये। इससे पीलिया को ठीक होने में तुरंत सहायता मिलती है।
  19. * गोभी और गाजर का रस बराबर मात्रा में मिलाकर एक गिलास रस तैयार करें। इस रस को कुछ दिनों तक रोगी को पिलाएँ।
  20. * रोगी को दिन में तीन बार एक एक प्लेट पपीता खिलाना चाहिए।
  21. * टमाटर पीलिया के रोगी के बहुत लाभदायक होता है। एक गिलास टमाटर के जूस में चुटकी भर काली मिर्च और नमक मिलाएं। यह जूस सुबह के समय लें। पीलिया को ठीक करने का यह एक अच्छा घरेलू उपचार है।
  22. * नीम के पत्तों को धोकर इनका रस निकाले। रोगी को दिन में दो बार एक बड़ा चम्मच पिलाएँ। इससे पीलिया में बहुत सुधार आएगा।
  23. * पीलिया के रोगी को लहसुन की पांच कलियाँ एक गिलास दूध में उबालकर दूध पीना चाहिए , लहसुन की कलियाँ भी खा लें। इससे बहुत लाभ मिलेगा।
पीलिया में परहेज…!
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  1. * पीलिया के रोगियों को मैदा, मिठाइयां, तले हुए पदार्थ, अधिक मिर्च मसाले, उड़द की दाल, खोया, मिठाइयां नहीं खाना चाहिए।
  2. * पीलिया के रोगियों को ऐसा भोजन करना चाहिए जो कि आसानी से पच जाए जैसे खिचड़ी, दलिया, फल, सब्जियां आदि।
एक और प्रयोग….!
*सरसों के तेल की खली १०० ग्राम का चूर्ण बना लें इस चूर्ण की १ चम्मच मात्रा१०० ग्राम दही में मिलाकर सुबह ८ – ९ बजे लें स्वाद अनुसार नमक या चीनी भी डाल सकते है एक सप्ताह लगातार लेने से पीलिया मल मार्ग से बाहर निकलजायेगा..लेकिन घीतेल में तली चीजो से १० दिनो तक परहेज करें एक सप्ताह में पीलिया जड से समाप्त हो जायेगा…!
सिद्ध आयुर्वेदिक : https://sidhayuvadic7.wordpress.com/category/%E0%A4%AA%E0%A5%80%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%88%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%9C/
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पीलिया का प्राकृतिक इलाज ( Natural Remedies for Jaundice )
पीलिया एक ऐसा रोग है जो हेपेटाइटिस ए या हेपेटाइटिस सी की वायरस के कारण फैलता है. पीलिया शरीर के अनेक भागों को अपना शिकार बनाता है और शरीर को बहुत हानि पहुंचाता है. इस रोग में पाचन तंत्र सही ढंग से कार्य तक करना बांध कर देता है और शरीर का रंग पीला पड़ जाता है. इस रोग से बचने के लिए रोगी अनेक तरह के उपचार और एंटी बायोटिक का सहारा लेता है. जिससे उनके शरीर पर कुछ अन्य प्रभाव भी हो सकते है किन्तु आज हम आपको कुछ ऐसे घरेलू आयुर्वेदिक उपाय बता रह है जिनको अपनाकर आप पीलिया जैसी भयंकर रोग से तुरंत मुक्ति पा सकते हो. इन उपायों का आपको कोई साइड इफ़ेक्ट भी नही होता है. CLICK HERE TO KNOW पीलिया के कारण और लक्षण ... 
Piliya Ka Ghrelu Aayurvedic Ilaaj

· प्याज ( Onion ) : प्याज को पीलिया के इलाज के लिए रामबाण उपाय माना जाता रहा है. इसका उपाय करने के लिए आप प्याज को छीलकर इससे कुछ पतले पतले हिस्सों में बाँट लें और इसके ऊपर निम्बू का रस निचोड़ें. अब आप कुछ काली मिर्च और काले / सिंधा नमक का मिश्रण लें और प्याज के ऊपर छिड़क लें. इस तरह से आप प्याज का रोजाना सुबह शाम सेवन करें. इस उपाय के 15 से 20 दिन के अंदर ही आपको पीलिया से मुक्ति मिल जाती है.

· चना ( Gram ) : चना पीलिया को ठीक करने के लिए सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाता है. इसका प्रयोग करने के लिए आप रात को सोने से पहले चने की दाल को एक भगोने में भिगो कर रख दें और सुबह दाल में गुड मिलाकर खायें. इस उपाय को 2 से 3 हफ्ते तक अपनाएं. आपका पीलिया तुरंत भाग जायेंगा.

· पपीता ( Papaya ) : आपने अनेक ऐसे लोग देखें होंगे जो पीलिया में पपीते का इस्तेमाल करते है. पपीता में कुछ ऐसे तत्व पायें जाते है जो पीलिया के असर को कम करते है. आयुर्वेद में माना जाता है कि पीलिया का रोगी गाय के दूध में बना हुआ पनीर और चने का रसगुल्ला खाता है तो उससे तुरंत अधिक लाभ मिलता है.

· मकोय की पत्ती ( Sap / Solanum Nigrum Leaf ) : आप एक भगोने में पानी लें और उसमे कुछ मकोय की पत्तियों को डालकर उबाल लें. आप इन पत्तियों का सेवन करें आपको शीघ्र ही पीलिया के रोग में राहत मिलती है. आयुर्वेद में मकोय की पत्तियों को पीलिया का अचूक उपाय माना जाता है. आप मकोय की पत्तियों का किसी भी रूप में इस्तेमाल कर सकते हो क्योकि ये पूर्ण रूप से स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होती है. CLICK HERE TO KNOW माइग्रेन के कारण, लक्षण और उपचार ... 
पीलिया का घरेलू आयुर्वेदिक इलाज

· नीम के पत्ते ( Neem Leaf ) : आप कुछ नीम के पत्ते लें और उन्हें अच्छी तरह धोकर साफ़ कर लें और इनका रस निकाल लें. आप इस रस को दिन में 2 से 3 बार एक चम्मच ग्रहण करें. इससे जल्द ही आपको पीलिया में आराम मिलता है.


· लहसुन ( Garlic ) : पीलिया के रोगियों के लिए लहसुन भी काफी कारगर सिद्ध होता है. इसके लिए एक ग्लास दूध में 4 से 5 लहसुन की कलियों को डालकर अच्छी तरह उबाल लें. अब आप इस दूध को पी जाएँ और ऊपर से इन कलियों को खायें. आपको जल्द ही लाभ मिलेगा.

· बादाम ( Almond ) : एक कटोरी पानी लें और उसमे 10 ग्राम बादाम, 5 ग्राम इलायची और 2 से 3 छुआरों डालकर रातभर भीगने दें. अगले दिन सुबह आप सारी सामग्री में स्वादानुसार पीसी हुई मिश्री डालें और थोडा ताजा मक्खन डालकर अच्छी तरह से मिलाकर एक मिश्रण तैयार कर लें. इस उपाय को आप कम से कम 2 सप्ताह तक जरुर अपनाएं. आपको जल्द ही पीलिया की बिमारी में राहत मिलेगी. बादाम का एक लाभ ये भी है कि इससे आपके पेट में बनी गर्मी भी नष्ट हो जाती है.

· टमाटर ( Tomato ) : टमाटर त्रिफला के लिए अत्यंत लाभदायी माना जाता है. इसका इस्तेमाल करने के लिए आप टमाटर का जूस निकाल लें और उसमे स्वाद अनुसार काली मिर्च और नमक डाल लें. आप इस जूस को सुबह खाली पेट पियें. पीलिया के घरेलू आयुर्वेदिक उपायों में ये उपाय सबसे आसान और असरदार उपाय माना जाता है. टमाटर में विटामिन ए की प्रचुरता होती है साथ ही इसमें लाइकोपीन नाम का एक तत्व भी पाया जाता है. जो पीलिया को दूर भागने में लाभकारी सिद्ध होता है.
Home Aayurmedic Remedies for Jaundice in Hindi

· इमली ( Tamarind ) : इमली का प्रयोग भी आप पीलिया के इलाज के रूप में कर सकते हो. इसके लिए आप इसे भी रात भर भीगने दें और सुबह इसे मसलकर इसके छिलके को उतार दें. इसके बाद आप इसमें इमली का बचा हुआ पानी लें और उसमे थोड़ी काली मिर्च और काला नमक मिलाकर ग्रहण करें. इस तरह आपका पीलिया रोग जल्द ही ठीक हो जाता है.

· आंवला ( Amla ) : आंवला का आयुर्वेद में विशेष स्थान है इसका प्रयोग अनेक रोगों की मुक्ति के लिए किया जाता है. पीलिया के उपचार में इसका इस्तेमाल करने के लिए आप 50 ग्राम की मात्रा में आंवलें का रस लें और उसमे 1 चम्मच शहद मिला लें और इस मिश्रण को 3 सप्ताह तक इस्तेमाल करें. जल्द ही आपको पीलिया में आराम मिलेगा. जिसका असर आप स्पष्ट रूप से देख पाते हो.

· सौंठ ( Fennel ) : 10 ग्राम सौंठ और 10 ग्राम गुड को मिलकर उसका ठन्डे पानी के साथ सेवन करने से भी 10 से 15 दिनों में पीलिया के रोग में आराम मिलता है. आप इस उपाय को प्रतिदिन सुबह के समय अपनायें.

· मुली ( Muli ) : आप 100 ग्राम मुली के पत्ते लें और उसका रस निकालें. इसके बाद आप इसमें स्वादानुसार चीनी या शक्कर मिलाकर इसका प्रतिदिन सुबह के समय सेवन करें. इससे आपका पेट साफ़ होता है और आपके लीवर और पाचन तंत्र को मजबूती मिलती है साथ ही आपको पीलिया में आराम मिलता है. आप अपने आहार में मुली, संतरा, तरबूज, टमाटर और अंगूर को भी जगह दें.
पीलिया रोग निवारण

· फिटकरी ( Alum ) : पीलिया के अचूक उपाय के रूप में आप फिटकरी का इस्तेमाल कर सकते हो इसके लिए आपको 50 ग्राम फिटकरी को गर्म कर उसका पानी उड़ना है और उसके बाद आप उस फिटकरी को पीसकर उसका चूर्ण बना लें. इस चूर्ण का मरीज दवा के रूप में सेवन करें.

आप फिटकरी को एक अन्य तरीके से भी इस्तेमाल कर सकते हो जिसके अनुसार आप 50 ग्राम फिटकरी का चूर्ण लेकर उसको 20 से 21 पुडिया में बाँट दें. इनमे से हर पुडिया को आप प्रतिदिन मलाई और 100 ग्राम दही के साथ सेवन करें. आप चाहे तो दही में चीनी भी मिला सकते हो. किन्तु ध्यान रहें कि ये उपाय आपको खाली पेट ही करना है. जैसे ही आपकी पुडिया खत्म होती है पीलिया का रोग भी दूर हो चूका होता है.

· त्रिफला ( Triphala ) : आप एक कटोरी पानी लें और उसमे कुछ मात्रा में त्रिफला डालकर रातभर भीगने दें. सुबह उठने के बाद आप त्रिफला को अलग कर उसके पानी को पी जाएँ. इस उपाय को आप लगातार 2 सप्ताह तक अपनाएं. निश्चित रूप से आपको पीलिया से आराम मिल जायेगा.

पीलिया रोग से मुक्ति पाने के अन्य घरेलू आयुर्वेदिक और प्राकृतिक उपायों को जानने के लिए आप तुरंत नीचे कमेंट कर जानकारी हासिल कर सकते हो. 
http://www.jagrantoday.com/2016/01/piliya-ka-ghrelu-aayurvedic-ilaaj-home.html

http://www.jagrantoday.com/2016/01/piliya-ka-ghrelu-aayurvedic-ilaaj-home.html
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पीलिया ( Jaundice )
गर्मी या बरसात के मौसम अचानक रोगों का आक्रमण बढ़ जाता है. इन रोगों में से पीलिया भी एक प्रमुख रोग है. पीलिया को एक विशेष वायरस भी माना जाता जिसमे रोगी का शरीर पीला पड़ने लगता है और उसके पित्त में वृद्धि होने लगती है. रोगी का शरीर ही नही बल्कि रोगी के नाख़ून, त्वचा, आँखों के बीच का सफ़ेद भाग और उसका मूत्र भी पीले रंग का हो जाता है. इस रोग को इंग्लिश में Jaundice कहा जाता है. ऐसे रोगियों की खाने में बिलकुल रूचि नही रहती और यदि इस रोग का समय पर उपचार नही कराया जाता तो इससे रोगी की मृत्यु तक हो सकती है. इसलिए इसे समय पर पहचानना और इसकी रोकथाम अनिवार्य है. तो आओ जानते है पीलिया होने के कुछ कारण और लक्षण. CLICK HERE TO KNOW पीलिया के घरेलू आयुर्वेदिक इलाज ... 
Piliya ke Kaaran or Lakshan
पीलिया के प्रकार ( Type of Jaundice ) :
पीलिया के वायरस के आधार पर ये रोग मुख्यतः 3 प्रकार का होता है.
- हेपेटाइटिस ए ( Hepatitis A )
- हेपेटाइटिस बी ( Hepatitis B )
- हेपेटाइटिस नॉन ए और नॉन बी ( Hepatitis Non A and Non B )
पीलिया के कारण ( Causes of Jaundice ) :
· हेपेटाइटिस ए ( Hepatitis A ) : पीलिया का मुख्य कारण और वायरस हेपेटाइटिस ए होता है. हेपेटाइटिस ए दूषित खानपान और दूषित पानी से होता है. जिससे लीवर पर काफी असर पड़ता है जिससे ये अन्य बीमारियों को भी जन्म देता है.
· मलेरिया ( Malaria ) : अगर कोई व्यक्ति मलेरिया से ग्रसित है तो उसे भी पीलिया होने की पूरी संभावना बनी रहती है क्योकि मलेरिया में रोगी की प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है जिसके कारण अन्य बीमारियाँ आसानी से रोगी को अपना शिकार बना पाती है. CLICK HERE TO KNOW माइग्रेन के कारण, लक्षण और उपचार ... 
पीलिया के कारण और लक्षण
· पित्त में पथरी ( Gall Stones ) : इसका अगला कारण है पित्त की थैली या पित्त की नाली में पथरी का अटकना या होना. इससे पित्त में सुजन आ जाती है और उसका आकार बढ़ना शुरू हो जाता है जो पीलिया को बुलावा देता है.
· पौषक तत्वों की कमी ( Deficiency of Nutrients ) : भोजन ही जीवन है, अगर आप अच्छा आहार ग्रहण करते हो तो आपका शरीर स्वस्थ रहता है और कोई भी रोग आपको छू भी नही पाता किन्तु अगर आप विशुद्ध भोजन करते हो तो हर बिमारी आपको नुकसान पहुँचाने के लिए तैयार रहती है. इसलिए साफ़ स्वच्छ और संतुलित आहार लें. जिसमे सभी पौषक तत्व मौजूद हो. 
· आसपास गंदगी ( Garbage or Mess All Around ) : जिस स्थान पर आप रहते है अगर वहाँ किसी प्रकार की गंदगी है या कूड़ा कचरा बिखर रहता है तो उस स्थान पर अनेक तरह के रोग स्वतः ही उत्पन्न हो जाते है जो पीलिया का कारण बनते है. ऐसे ही माहौल में हेपेटाइटिस ए और हेपेटाइटिस बी का भी जन्म होता है जो पीलिया का वायरस माना जाता है. तो अपने आसपास सफाई बनाएं रखें.
· अधिक मात्रा में शराब ( Heavy Alcohol ) : अकसर वे लोग जो अधिक शराब का सेवन करते है उन्हें पीलिया होता रहता है. इसका कारण शराब में मिलाया जाने वाला एसिड होता है. शराब शरीर के अंदर के हिस्से को गला देती है और शरीर में घाव पैदा कर देती है. इससे पित्त को भी बहुत नुकसान पहुँचता है जो पीलिया का कारण बनता है.
· रक्तकणों की कमी ( Lack of Blood Cells ) : खून में हीमोग्लोबिन की कमी या रक्त कणों की कमी से भी पीलिया हो जाता है क्योकि अगर खून में हीमोग्लोबिन ही नही होगा तो रक्त का रंग लाल नही रह पाता और ना ही शरीर के हर हिस्स्ते तक पौषक तत्व पहुँचते है. इस तरह पीलिया शरीर पर आसानी से आक्रमण कर देता है.
Causes and Symptoms of Jaundice
· दिन में सोना ( Day Sleeping ) : कुछ लोगो को दिन में सोने की आदत होती है. इससे उनमे आलस तो बढता ही है साथ ही उन्हें पीलिया जैसी बिमारी भी अपना शिकार बना लेती है. 
पीलिया के लक्षण ( Symptoms of Jaundice ) :
· पीलापन ( Pallor ) : पीलिया का सबसे पहला और मुख्य लक्षण शरीर के अनेक हिस्सों का पीला पड़ना है. जिसमे आँखें, नाख़ून त्वचा और मूत्र भी शामिल है. इसका मुख्य कारण ये होता है कि इस रोग में लाल रक्त कोशिकायें / RBC ( Red Blood Cell ) बाईल या बिलीरुबिन पिगमेंट में बदल जाती है. जिससे मूत्र का रंग गहरा शुरू होना आरंभ हो जाता है. अगर इसपर समय पर ध्यान नही दिया जाता तो इससे मूत्र में इन्फेक्शन भी हो सकता है जिससे किडनी भी खराब हो सकती है. किडनी के साथ साथ पीलिया का रोग लीवर को भी अपना शिकार बनता है.
· पेट दर्द ( Stomach Pain ) : क्योकि पीलिया में किडनी, लीवर और पाचन तंत्र प्रभावित होते है तो इससे पेट में दर्द और अन्य विकार उत्पन्न होने आरंभ हो जाते है. इस स्थिति में लोगो को ज्यादातर पेट के दाहिने हिस्से में दर्द होना आरंभ होता है और ये धीरे धीरे बढ़ने लगता है.
· तेज बुखार ( High Fever ) : पीलिया एक वायरस का रोग है जिससे शरीर में विष का संचार होता है. ये विष शरीर का तापमान 100 से 103 डिग्री तक पहुंचा देता है. जिससे रोगी को लगातार बुखार रहता है. इससे उनकी आँखों पर गहरा प्रभाव पड़ता है क्योकि उनकी आँखे बुरी तरह से जलने लगती है.
Piliya ke Prakar
· उल्टियाँ ( Vomiting ) : पीलिया के रोगी का खाने से मन उठ जाता है किन्तु फिर भी उसको उल्टी और मतली आती रहती है. जिससे उसके शरीर में कमजोरी आ जाती है और उसे चक्कर आने लगते है. अगर इन लक्षणों पर शीघ्र ही ध्यान नही दिया जाता तो ये बड़े रोग को बुलावा दे देती है.
· अधिक थकान ( Fatigue ) : कमजोरी, उल्टी के कारण रोगी को अपना शरीर टुटा हुआ महूसस होता है. वे हमेशा बिस्तर पर पड़े रहते है और सोते रहते है. इनका स्वभाव चिडचिडा हो जाता है, इनका ना किसी से बोलने का मन करता है और ना ही कुछ करने का.
· खुजली ( Itch ) : जिन रोगियों को पीलिया का कारण कोलेस्टासिस है उन रोगियों के शरीर में खुजली की समस्या उत्पन्न हो जाती है. खुजली की शुरुआत उनके हाथ से होती है किन्तु धीरे धीरे ये खुजली पैरों से पुरे शरीर में होने लगती है जिसकी वजह से रोगी रात भर अपने शरीर को खुजाता रहता है.
· नींद पूरी ना होना ( Lack of Sleep ) : क्योकि रोगी को बैचनी, खुजली और आँखों में जलन होती रहती है तो उन्हें नींद नही आ पाती. जिस कारण उन्हें नींद की बीमारियाँ भी अपना शिकार बनाना आरंभ कर देती है. ये एक ऐसी स्थित उत्पन्न हो जाती है जो रोगी के परिवार जन को भावनात्मक रूप से कष्ट देना आरंभ कर देती है.
पीलिया के अन्य लक्षण, कारण और इसके उपचार को जानने के लिए आप तुरंत नीचे कमेंट करके जानकारी हासिल कर सकते हो. 
Shrir ke Pila Padne ka Kaaran

http://www.jagrantoday.com/2016/01/piliya-ke-kaaran-or-lakshan-causes-and.html
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पीलिया होने पर खाएं ये आहार


By: PurnimaUpdated: Friday, June 3, 2016, 15:03 [IST]

मौसम बदलने के साथ ही पीलिया (जॉन्डिस) का प्रकोप बढ़ रहा है। पीलिया का आयुर्वेद में अचूक इलाज है। आयुर्वेद चिकित्सकों के अनुसार यदि मकोय की पत्तियों को गरम पानी में उबालकर उसका सेवन करें तो रोग से जल्द राहत मिलती है। मकोय पीलिया की अचूक दवा है और इसका सेवन किसी भी रूप में किया जाए स्वास्थ्य के लिए लाभदायक ही होता है।
घबराएं नहीं... पीलिया से बचाव के ये तरीके हैं

चिकित्सक कहते हैं कि जब भी रोगी का यह लगे कि उसका शरीर पीला हो रहा है तथा उसे पीलिया हो सकता है, तो वह पानी की मात्रा बढ़ा दे क्योंकि पानी की मात्रा कम होने पर शरीर से उत्सर्जित होने वाले तत्व रक्त में मिल जाते हैं। इससे व्यक्ति की हालत बिगडऩे लगती है। चिकित्सक बताते हैं कि यदि कच्चा पपीता सलाद के रूप में लिया जाए तो भी पीलिया का असर कम होता है।

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कई लोग यह मानते हैं कि पीलिया के रोगी को मीठा नहीं खाना चाहिए जबकि आयुर्वेद चिकित्सक ऐसा नहीं मानते उनका कहना है कि पीलिया का रोगी गाय के दूध से बना पनीर व छेने का रसगुल्ला आराम से खा सकता है यह रोगी को कोई नुकसान नहीं बल्कि लाभ पहुंचाता है। इसके अलावा जिस व्‍यक्‍ति को पीलिया हो गया हो उसे और क्‍या क्‍या खाना चाहिये इसके लिये पढ़े नीचे।
मूली कर रस

मूली के रस मे इतनी ताकत होती है कि वह खून और लीवर से अत्‍यधिक बिलिरूबीन को निकाल सके। रोगी को दिन में 2 से 3 गिलास मूली का रस जरुर पीना चाहिये।



धनिया बीज

धनिया के बीज को रातभर पानी में भिगो दीजिये और फिर उसे सुबह पी लीजिये। धनिया के बीज वाले पानी को पीने से लीवर से गंदगी साफ होती है।




जौ
जौ आपके शरीर से लीवर से सारी गंदगी को साफ करने की शक्‍ति रखता है।



टमाटर का रस

टमाटर में विटामिन सी पाया जाता है, इसलिये यह लाइकोपीन में रिच होता है, जो कि एक प्रभावशाली एंटीऑक्‍सीडेंट हेाता है। इसलिये टमाटर का रस लीवर को स्‍वस्‍थ्‍य बनाने में लाभदायक होता है।



आमला

आमला मे भी बहुत सारा विटामिन सी पाया जाता है। आप आमले को कच्‍चा या फिर सुखा कर खा सकते हैं। इसके अलावा इसे लीवर को साफ करने के लिये जूस के रूप में भी प्रयोग कर सकते हैं।




तुलसी पत्‍ती

यह एक प्राकृतिक उपाय है जिसेस लीवर साफ हो सकता है। सुबह सुबह खाली पेट 4-5 तुलसी की पत्‍तियां खानी चाहिये।



नींबू का रस

नींबू के रस को पानी में निचोड़ कर पीने से पेट साफ होता है। इसे रोज खाली पेट सुबह पीना सही होता है।



पाइनएप्‍पल


पाइनएप्‍पल एक दूसरे किसम का फल है जो अंदर से सिस्‍टम को साफ रखता है।



गन्‍ने का रस

जब आप पीलिया से तड़प रहे हों तो, आपको गन्‍ने का रस जरुर पीना चाहिये। इससे पीलिया को ठीक होने में तुरंत सहायता मिलती है।



दही
दही आसानी से पच जाती है और यह पेट को प्रोबायोटिक प्रदान करती है। यह एक अच्‍छा बैक्‍टीरिया होता है जो जॉन्‍डिस से लड़ने में सहायक होता है।
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Source : http://hindi.boldsky.com/health/diet-fitness/2013/best-foods-cure-jaundice-quickly-003572.html
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--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!

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सभी के स्वस्थ एवं सुदीर्घ जीवन की कामना के साथ-मेरे प्यारे और दुलारे तीन बच्चों की ममतामयी अद्वितीय माँ (मम्मी) जो दुखियों, जरूतमंदों और मूक जानवरों तक पर निश्छल प्यार लुटाने वाली एवं अति सामान्य जीवन जीने की आदी महिला थी! वह पाक कला में निपुण, उदार हृदया मितव्ययी गृहणी थी! मेरी ऐसी स्वर्गीय पत्नी "जानकी मीणा" की कभी न भुलाई जा सकने वाली असंख्य हृदयस्पर्शी यादों को चिरस्थायी बनाये रखते हुए इस ब्लॉग को आज दि. 08.08.12 को फिर से पाठकों के समक्ष समर्पित कर रहा हूँ!-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'

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