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अजवायन

aajtak.in [Edited by: भूमिका राय]
नई दिल्ली, 10 दिसम्बर 2015 | अपडेटेड: 13:32 IST

हम सभी के घरों में अजवायन एक प्रमुख मसाले के रूप में इस्तेमाल किया जाता है. पर आपको शायद ही पता हो कि ये एक प्राकृतिक औषधि भी है. आप चाहें तो कई छोटी-छोटी सामान्य बीमारियों का इलाज अजवायन की मदद से कर सकते हैं. अच्छी बात ये है कि इसका फायदा बड़े और छोटे दोनों को समान रूप से होता है.

अजवायन को इस्तेमाल करने का तरीका:
अजवायन का पूरा फायदा लेने के लिए इसे पानी में उबाल लेते हैं. अगर आप चाहें तो इसे यूं भी इस्तेामल कर सकते हैं लेकिन इसके पानी का इस्तेमाल करना ज्यादा फायदेमंद होता है. इसका पानी बनाने के लिए एक चम्मच अजवायन को एक कप पानी में उबाल लें. जब ये पानी आधा रह जाए और पानी मटमैला दिखने लगे तो गैस बंद कर दें. इस पानी को छान लें. जब ये ठंडा हो जाए तो इसे इस्तेमाल करें.

अजवायन के फायदे:

1. अगर आप मोटापे की समस्या से जूझ रहे हैं तो अजवायन का पानी पीना आपके लिए बहुत फायदेमंद रहेगा. ये चर्बी को गलाने का काम करता है जिससे बहुत जल्दी वजन घट जाता है.
2. अगर आपको पाचन से जुड़ी कोई समस्या है तो अजवायन का पानी आपके लिए किसी वरदान से कम नहीं.अजवायन का पानी पीने से कब्ज और गैस की समस्या में राहत मिलती है.
3. अजवायन का पानी दर्द निवारक की तरह काम करता है. अगर आपको दांत दर्द की तकलीफ है तो अजवायन के पानी से गार्गल करना आपके लिए फायदेमंद रहेगा. साथ ही इसके इस्तेमाल से मुंह की दुर्गंध भी दूर हो जाती है.
4. पीरियड्स के दौरान दर्द और ऐंठन की समस्या से राहत पाने के लिए भी अजवायन का पानी बहुत फायदेमंद होता है. इसमें एंटी-बैक्टीरियल तत्व होते हैं जो पेट के इंफेक्शन को दूर करने में मददगार होता है.
5. अगर आपको हल्की सर्दी हो रखी है तो भी अजवायन के पानी से गार्गल करना फायदेमंद रहता है. सर्दी दूर करने के लिए ग्रामीण इलाकों में लोग अजवायन का धुंआ भी लेते हैं.

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AdminJune 5, 2016

अजवायन का प्रयोग घरों में ना केवल मसाले के रूप में ही किया जाता है बल्‍कि छोटी-मोटी पेट की बीमारियां भी इसके सेवन से दूर हो जाती हैं। खाना खाने के बाद हाजमा बेहतर बनाना हो तो इसका चूरन बना कर खाइये और फिर फायदा देखिये। वैसे तो अजवायन बड़ी ही काम की चीज़ है मगर इसका एक फायदा मोटापे को भी कम करने के काम आता है। जी हां, यह बात काफी कम लोग जानते हैं कि अजवायन का पानी रोज सुबह खाली पेट पीने से मोटापा प्राकृतिक रूप से कम हो जाता है। मोटापा कम करने के लिये अक्‍सर लोग गरम पानी और नींबू पीते हैं, जिससे शरीर के विशैले तत्‍व बाहर निकलते हैं ना कि वजन में कमी आती है।

कई बीमारियों में लाभकारी अजवायन का पानी-

पाचन क्रिया बेहतर

अजवायन में थायमॉल (thymol) मौजूद होता है। दुनिया में सबसे अधिक थायमॉल वाला पौधा अजवायन का ही होता है। ये केमिकल गेस्ट्रिक द्रव्यों को बाहर निकालने में पेट की मदद करता है, जिससे की पाचन क्रिया आसान हो जाती है। अपच, मतली और शिशुओं के पेट दर्द जैसी समस्याओं में इससे मदद मिलती है।

अजवायन का प्रयोग घरों में ना केवल मसाले के रूप में ही किया जाता है बल्‍कि छोटी-मोटी पेट की बीमारियां भी इसके सेवन से दूर हो जाती हैं। खाना खाने के बाद हाजमा बेहतर बनाना हो तो इसका चूरन बना कर खाइये और फिर फायदा देखिये। वैसे तो अजवायन बड़ी ही काम की चीज़ है मगर इसका एक फायदा मोटापे को भी कम करने के काम आता है। जी हां, यह बात काफी कम लोग जानते हैं कि अजवायन का पानी रोज सुबह खाली पेट पीने से मोटापा प्राकृतिक रूप से कम हो जाता है। मोटापा कम करने के लिये अक्‍सर लोग गरम पानी और नींबू पीते हैं, जिससे शरीर के विशैले तत्‍व बाहर निकलते हैं ना कि वजन में कमी आती है।

कई बीमारियों में लाभकारी अजवायन का पानी-

पाचन क्रिया बेहतर

अजवायन में थायमॉल (thymol) मौजूद होता है। दुनिया में सबसे अधिक थायमॉल वाला पौधा अजवायन का ही होता है। ये केमिकल गेस्ट्रिक द्रव्यों को बाहर निकालने में पेट की मदद करता है, जिससे की पाचन क्रिया आसान हो जाती है। अपच, मतली और शिशुओं के पेट दर्द जैसी समस्याओं में इससे मदद मिलती है।

वजन घटाने में मददगार

अजवायन न सिर्फ आपकी पाचन क्रिया को बेहतर करता है बल्कि आपके मेटाबॉलिज़्म को भी तेज़ी देता है, जिससे कि आपको वजन घटाने में मदद मिलती है।

सिरदर्द और कंजेस्शन से छुटकारा

अजवायन का पानी उबालने पर या उसका पानी पीते हुए जो उससे भाप मिलती है उससे सिरदर्द और नाक के कंजेस्शन (congestion) में काफी राहत मिलती है।ऐसा इसलिए होता है क्योंकि अजवायन में बहुत सारे वाष्पशील पदार्थ होते हैं जो कि उबाले जाने पर भाप बनकर उड़ते हैं।जब आप इस भाप को अंदर लेते हैं तो आपको सिरदर्द और जुकाम से भी राहत मिलती है।

मतली से राहत

अजवायन के पानी से मतली भी ठीक की जा सकती है। कई मामलों में, इसको पीने से लगातार आ रहीं उल्टियां भी रूक जाती हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि अजवायन में बहुत अधिक प्रभावी एंटीबैक्टीरियल तत्व होते हैं जो कि पेट से बैक्टीरिया इंफेक्शन को दूर करते हैं।

दांद दर्द करता है दूर

अजवायन दांद दर्द को दूर करने और मुंह को स्वस्थ बनाए रखने में बहुत मददगार होती है। आयुर्वेदिक डॉक्टर ये सलाह देते हैं कि दांत दर्द होने पर अजवायन के पानी से कुल्ला करें। अजयावय में मौजूद थायमोल (thymol) दर्द से राहत दिलाता है और मुंह के स्वास्थ्य का ख्याल रखता है।

दूसरी ओर अजवायन का पानी पीने से शरीर का मेटाबॉलिज्‍म बढ़ता है जिसकी वजह से कार्ब तथा फैट बर्न होने की प्रक्रिया शुरु हो जाती है। तो अगर आप भी अपने बढ़ते हुए वजन से परेशान है तो, कुछ दिनों तक इस नुस्खे को आजमाइये और असर देखिये। आइये जानते हैं अजवान का पानी बनाने की विधि और रिजल्‍ट पाने के लिये किन-किन चीज़ों से परहेज रखना है।

ऐसे बनाएं अजवायन का पानी

1. कैसे तैयार करें अजवाय का पानी
2. 50 ग्राम अजवायन लें (आप चाहें तो 25 ग्राम भी ले सकते हैं पर 50 ग्राम ज्यादा प्रभाव शाली है)
3. अजवायन को 1 गिलास पानी में रातभर के लिये भिगो कर छोड़ दें और फिर सुबह पानी को छान लें।
4. उसके बाद पानी में 1 चम्मच शहद मिक्स करें और सुबह खाली पेट पी लें।
5. यदि आप चाहें तो उसी अजवायन को धूप मे सुखा कर फिर से दूसरे दिन भी प्रयोग कर सकते हैं। लेकिन तीसरे दिन आपको इर्न अजवायन का प्रयोग करना होगा।
6. अजवायन के पानी को 45 दिन लगातार पियें, आपको फायदा जरुर मिलेगा। वैसे तो आपको इसका असर मात्र 15 दिनों में ही दिखने लगेगा पर अगर प्रभावी परिणाम चाहिये तो, 45 दिन लगेंगे। वजन कम होना आपके शरीर के प्रकार पर भी निर्भर करेगा। इस पानी को पीने से आपका 5 किलो वजन कम होगा पर अगर आप किसी बीमारी से पीड़ित नहीं होंगे तो।

अच्छा रिजल्ट पाने के लिये कुछ जरुरी बातों का पालन करें :-

  • 1. चावल पूरी तरह से छोड़ दें रोटियों का संख्या घटा दें। मतलब अगर आप दो राटी खाते हैं तो उसे आधा कर दें। 2. आलू, शक्कर, फास्ट फूड और ऑइली फूड ना खाएं।
  • 3. भोजन करने के एक घंटे तक पानी ना पियें।


यह उपचार खास तौर पर उन महिलाओं के लिये है जिन्हें पीरियड्स की समस्या है और जिसकी वजह से उनका वजन बढ़ जाता है।
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सदियों के अजवाइन का इस्तेमाल कई तरह के घरेलू नुस्ख़ों के लिए किया जाता रहा है। उदाहरण के लिए एसिडिटी के लिए एन्टासिड खाने के जगह पर अजवाइन खाना तो लोग सामान्यतः सेफ मानते हैं। यहाँ तक कि अर्थराइटिस होने पर भी अजवाइन का पेस्ट जोड़ों पर लगाने जैसा घरेलू इलाज दर्द को कम करने में असरदार रूप से काम करता है। जिन लोगों को बदहजमी का प्रॉबल्म होता है वह तो अजवाइन बिना सोचे समझे दिन में कितनी बार खाते हैं उसके बारे में कहना मुश्किल है। अजवाइन में थाइमोल नाम का तत्व होता है जो पीएच लेवल को नॉर्मल रखने के साथ-साथ गैस्ट्रिक जूस के निष्कासन से खाना को जल्दी हजम करवाने में मदद करता है। ये तो अजवाइन का एक पहलू है उसके दूसरे पहलू के बारे में जानकर आप आश्चर्य में पड़ जायेंगे। पढ़े-

अजवाइन के साइड-इफेक्ट्स

लेकिन डायटीशियन और न्यूट्रीशनिस्ट नेहा चांदना का कहना है कि अजवाइन को खाना तब तक स्वास्थ्य या सेहत के दृष्टि से सेफ है जब तक आप इसको सीमित मात्रा में ले रहे हैं। यानि अजवाइन का सेवन आप दिन में कम से कम 10 ग्राम तक ही ले सकते हैं। इससे ज्यादा मात्रा में अजवाइन खाने से आपके सेहत को फायदा पहुँचने से जगह पर नुकसान ही पहुँचेगा। क्यों आश्चर्य में पड़ गए न! अतिरिक्त मात्रा में अजवाइन लेने से एसिडिटी कम होने के जगह पर बढ़ सकती है, सिर दर्द, उल्टी, पेट में जलन जैसा अनुभव और अल्सर जैसे प्रॉबल्म्स का सामना करना पड़ सकता है। यहाँ तक कि प्रेगनेंट महिलायें भी अजवाइन का सेवन कब्ज़ और एसिडिटी की समस्या के लिए कर तो सकती है लेकिन दिन में 10 ग्राम से ज्यादा नहीं।
ध्यान देने की बात ये है कि छह महीने से बड़े शिशु या बच्चों के हजम शक्ति को बढ़ाने के लिए आप उनको एक छोटा चम्मच गुड़ और अजवाइन का पाउडर दे सकते है। इससे उनका डाइजेस्टिव सिस्टेम बेहतर हो जाता है, लेकिन सीमित मात्रा में।
कैसे करें इसका सेवन-
अजवाइन को पानी में डालकर उबाल लें। फिर उस पानी को छानकर पियें या गुड़ के साथ भी इसको ले सकते हैं।
अजवायन एक औषधि है। जिसका उपयोग कई रोगों का इलाज करने के लिए होता है। इसका चूर्ण बनाकर सेंधानमक मिलाने से पेट की तकलीफों से चुरंत आराम मिलता है। खासकर पेट दर्द, मन्दाग्नि, अपच, अफरा, अजीर्ण और दस्त में अजवायन काफी लाभकारी है। जिसका सेवन दिन में कम से कम तीन बार करना चाहिए।
अजवाइन के फायदे
अजवाइन में 7 प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट, 21 प्रतिशत प्रोटीन, 17 प्रतिशत खनिज, 7 प्रतिशत कैल्शियम, फॉस्फोरस, लौह, पोटेशियम, सोडियम, रिबोफ्लेविन, थायमिन, निकोटिनिक एसिड अल्प मात्रा में होता है। आंशिक रूप से आयोडीन, शर्करा, सेपोनिन, टेनिन, केरोटिन और 14 प्रतिशत तेल पाया जाता है।
कुछ घरेलू उपचार
  1. *100 तोला अजवायन के फूल का चूर्ण पानी में मिलाकर घाव पर लगाएं। दाद, खुजली, फुंसियां जैसे चर्मरोग में फायदा होगा। 
  2. *अजवायन के तेल की मालिश से दर्द कम होता है। प्रयोग प्रसव के बाद अग्नि की प्रदिप्त करने और भोजन पचाने, वायु एवं गर्भाशय को शुद्ध करने के लिए अजवायन काफी लाभदायक है।
  3. *अजवायन के फूल को शक्कर के साथ तीन- चार बार पानी घोलकर से लेने से पित्ती की बीमारी ठीक हो जाती है।
  4. *पेट खराब होने पर अजवाइन को चबाकर खाएं, उसके बाद एक कप गर्म पानी पी लें, पेट ठीक हो जाएगा।
  5. *पेट दर्द होने पर अजवाइन के दाने 10ग्राम, सोंठ 5ग्राम और काला नमक 2 ग्राम को अच्छी तरह मिलाए, फिर मिश्रण का 3 ग्राम गुनगुने पानी के साथ सेवन करें आराम मिलेगा। 
  6. *काले नमक के अजवायन पेट के कीड़े निकाल देती है।
  7. * लीवर की परेशानी होने पर 3ग्राम अजवाइन और आधा ग्राम नमक खाने के बाद लेने से लाभ होगा।
  8. *पेट में गैस होने पर हल्दी, अजवाइन और चुटकीभर काला नमक लेने से जल्दी आराम मिलता है।
  9. *पथरी की समस्या होने पर 5ग्राम ग्राम जंगली अजवाइन को पानी के साथ निगल लें। ऐसा महीने में पांच दिन करें, तो पथरी नहीं बनेगी।
  10. *अजवाइन को भूनकर कपड़े में लपेट ले, फिर रात में तकिए के नजदीक रखें, इससे दमा, सर्दी, खांसी के रोगियों को अच्छे से नींद आएगी।
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Sonu Singla 10:14:00 pm
"अजवाइन के गुण/ फायदे, अजवाइन का पानी के लाभ, अजवाइन का तेल/ नुकसान, अजवायन खाने के फायदे"
अजवायन-अजवायन का बीज छोटा,दानेदार और बारीक़ होता है।अजवायन के बीज से जो तेल या अर्क निकाला जाता है उसे सर्जरी के बाद एंटी सेप्टिक मरहम के तौर पर लगाया जाता है। इजिप्ट और अफगानिस्तान को अजवायन का घर कहा जाता है। अजवायन के पोधे को घर में लगाना भी बहुत आसान है। अक्टूबर और नवंबर इस पोधे को उगाने के लिए ज्यादा लाभदायक होते है।
खाने में इसका उपयोग-
तड़का एक खाना पकाने की विधि, जिसमें खाना पकाने के लिए तेल गरम किया जाता है उसमे पूरे मसाले डाले जाते है। भारतीय खाना पकाने में अजवाइन अक्सर थाली में तड़का का हिस्सा है। यह कम मात्रा में प्रयोग किया जाता है और लगभग हमेशा पकाया करते थे। यह अपनी मजबूत, प्रभावी स्वाद की वजह से प्रयोग होता है।अजवाइन भी सब्जियों के व्यंजन (अपने विशिष्ट स्वाद के लिए) और अचार (अपने संरक्षक के गुणों के लिए) में प्रयोग किया जाता है।
साइज: बहुत छोटा
रंग: भूरा हरे रंग के लिए पीले रंग
स्वाद: गर्म और तीखे स्वाद
पत्ते: जैसे छोटे पंख
खुशबू: मजबूत गंध, अजवायन के फूल की तरह
खुजली, फोड़े और पिम्पल्स :
• यह एक शांत, अंधेरे और सूखी जगह में एक कसकर मोहरबंद ग्लास कंटेनर में ताजा रखा जा सकता है।
• यह एक साल के लिए ताजा रहेगी।
आकार: ओवल और चोटी वाला।
अजवाइन और इसके तेल के पोषण का महत्व:
कैरम बीज 100 ग्राम प्रति होता है:
प्रोटीन -17.1%
वसा - 21.8%
खनिज-7.9%
फाइबर-21.2%
कार्बोहाइड्रेट-24.6%
इसमें कैल्शियम, राइबोफ्लेविन, फास्फोरस, लोहा और नियासिन भी शामिल हैं। इसका तेल या तो बेरंग या रंग में पीला भूरे रंग का है। कैरम तेल व्यापक रूपमें कीटाणु नाशक और कवकनाशी के रूप में प्रयोग किया जाता है।
अजवाइन का लाभ:
1. अम्लता:
एक चम्मच जीरा के साथ एक चम्मच अजवाइन का मिश्रण अदरक पाउडर के साथ हर रोज ले ।यह प्राकृतिक रूप से अपच समस्याओं का इलाज करने के लिए एक सबसे अच्छा तरीका है। यह अम्लता और एसिड समस्या के इलाज में उपयोगी है।
2. कब्ज:
अजवाइन पाचन संबंधी समस्याओं के इलाज के लिए सबसे अच्छा उपाय है। इसलिए इसे कब्ज से भी छुटकारा पाने के लिए उपयोग कर सकते हैं। अजवाइन का कोई साइड इफेक्ट नहीं है।
3. गुर्दा विकार और गुर्दे की पत्थरी :
अजवाइन गुर्दे की पत्थरी का इलाज करने के लिए बहुत उपयोगी हैं। इसे गुर्दा रोग के इलाज के लिए और दर्द को कम करने के लिए उपयोग किया जा सकता है।
4. अस्थमा:
गर्म पानी के साथ अजवाइन लेने से शरीर से खांसी और बलगम को निष्कासित किया जा सकता है। यह ब्रोंकाइटिस और अस्थमा के इलाज के लिए बहुत उपयोगी है। इसे दिन में दो बार गुड़ के साथ सेवन किया जा सकता है। आप को निश्चय ही लाभ होगा।
5. जिगर और गुर्दे की खराबी :
अजवाइन का पानी पीने से अपच और संक्रमण की वजह होने वाले आंतों में दर्द का सफल इलाज किया जा सकता है।अजवाइन जिगर और गुर्दे की खराबी के इलाज के लिए बहुत फायदेमंद है।
6. मुँह समस्याएँ
अजवाइन दांत दर्द का इलाज करने के लिए असरकारक सिद्ध किया गया है। लौंग के तेल में एक हिस्सा अजवाइन का तेल होता है। दांत दर्द, मुँह से बुरी गंध और क्षय के इलाज के लिए अजवाइन पावडर और पानी के साथ कुल्ला करे । मौखिक स्वच्छता बनाए रखने के लिए यह सबसे अच्छा और कारगर तरीका है।
7. ठंड लगने पर उपयोगी --
अजवाइन बंद नाक आदि सर्दी के लक्षणों का इलाज करने के लिए सबसे अच्छा प्राकृतिक तरीका है। राहत के लिए गर्म पानी में अजवाइन डालकर भाप ले,नाक तुरंत खुल जाएगी और सर्दी में भी आराम होगा।
अजवाइन पीसकर गुनगुने पानी के साथ इसका पेस्ट बना लें। चेहरे या शरीर के किसी भी प्रभावित हिस्से पर इस पेस्ट को लगाये । इसके अलावा सबसे अच्छा परिणाम के लिए अजवाइन के पानी से प्रभावित अंग को धोने की कोशिश करो। यह सूजन , फोड़े, पिम्पल्स या एक्जिमा में बहुत असरकारक है। नींबू के रस के साथ अजवाइन बीज का पेस्ट बना लें। यह सूजन को दूर करने में सहायक होगा।
8. अत्यधिक रक्तस्राव और अनियमित मासिक धर्म:
इस समस्या में महिलाओं को अजवाइन का पानी पीने से बहुत लाभ होता है। रात में पानी से भरे मिट्टी के बर्तन में मुट्ठी भर अजवाइन भिगो दे । सुबह उन्हें पीसकर पी लो । धीरे धीरे आराम हो जायेगा।
9 पाचन:
अजवाइन पाचन समस्याओं में भी बहुत लाभ पहुंचाती है। चीनी के साथ 1 बड़ा चम्मच अजवाइन चबाने से अपच से छुटकारा मिलेगा। यह चीनी के बिना भी सेवन किया जा सकता है।
10 गठिया:
अजवाइन का तेल गठिया के दर्द के इलाज के लिए एक बहुत ही उपयोगी असरकारक नुस्खा है। अजवाइन के तेल के साथ नियमित रूप से प्रभावित जोड़ों पर मालिश करने से दर्द से राहत मिलती है।और गठिया रोग ठीक होने लगता है।
11. दस्त:
अजवाइन पेचिश या दस्त का इलाज करने के लिए एक प्राकृतिक उपचार है। एक गिलास पानी में अजवाइन की एक मुट्ठी उबाल लें।ठंडा करके छानकर इसे दिन में दो बार पिए,तुरंत आराम मिलेगा। यह अपच और पेचिश के इलाज के लिए एक अचूक उपाय है।
12. वायरल संक्रमण:
अजवाइन पाउडर के साथ दही का मिश्रण बना ले । एक पूरी रात के लिए चेहरे पर इस पेस्ट को लगाने से मुँहासे और निशान को हल्का कर सकते है। अच्छे परिणाम के लिए सुबह गुनगुने पानी से धो लें।
13. पेट दर्द में आराम:
अजवाइन को नमक के साथ मिला कर गुनगुने पानी से लो। पेट दर्द में तुरंत आराम मिल जायेगा। यह बहुत अचूक नुस्खा है।
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अजवायन एक ऐसी चीज या औषधि है, जो अकेली ही एक ऐसी है जो कि सौ प्रकार के खाद्य पदार्थों को पचाने वाली होती है।

अनेक प्रकार के गुणों से भरपूर अजवायन पाचक रूचि कारक, तीक्ष्ण, कढवी, अग्नि प्रदीप्त करने वाली, पित्तकारक तथा शूल, वात, कफ, उदर आनाह, प्लीहा, तथा क्रमि का नाश करने वाली होती है।

अति गर्म प्रकृति वालों के लिए यह हानिकारक होती है।
इसकी खेती सारे देश में होती है।

अजवायन का उपयोग औषिध के रूप में, मुख्यत: उदर एवं पाचन से समबन्धित विकारों तथा वात व्याधियों को दूर करने में बहुत गुणकारी होती है।

अजवायन में लाल मिर्च की तेजी, राई की कटुता तथा हींग और लहसुन की वातनाशक गुण एक साथ मिलते हें। इस लिए यह गुणों का भंङार है । इसी लिए यह उदर शूल, गैस, वायुशोला, पेट फूलना, वात प्रकोप आदि को दूर करता है। इसी कारण इसे घर पर छुपा हुआ वेद्य कहा गया है।

अजवायन की पत्ती का दिलकश स्वाद होता है। इसी कारण इसका (पत्ती) इतालवी व्यंजनों में, जेसे पिज्जा पास्ता आदि। अजवायन की पत्ती में एंटी बैक्टीरियल गुण है जो कि संक्रमण से लड़ने में मदद करता है। अजवायन की ताजा पत्ती में प्रचुर मात्रा में पोषक तत्व और विटामिन होते है.
विटामिन सी, विटामिन ए, लोहा, मैंगनीज और कैल्शियम और साथ ही युक्त ओमेगा -3 फैटी एसिड का एक अच्छा स्रोत है। अजवायन से कैलशियम, फासफोरस, लोहा सोडियम व पोटेशियम जैसे तत्व मिलते हैं।
अजवायन के लाभ-अजवायन के गुण-अजवायन का औषिध
के रूप में उपयोग (THE BENEFITS OF PARSLEY)
  1. यह एक उत्कृष्ट एंटीऑक्सिडेंट है, अजवायन मोटापे को कम करने में भी मदद करती है। सर्दियों के मौसम में सर्द से बचने के लिए अजवायन एक सफल औषधि है। जंगली अजवायन की पत्ती का तेल श्रेष्ट माना गया है प्रतिरक्षा प्रणाली को दृढ़ करता है, श्वसन क्रिया को दुरुस्त करता है। जोड़ों और मांसपेशियों का लचीलापन बढाता है और त्वचा को संक्रमण से बचाता है। 
  2. अपच : बरसात के मौसम में पाचन क्रिया के शिथिल पड़ने पर अजवायन का सेवन काफी लाभदायक होता है। इससे अपच को दूर किया जा सकता है।
  3. अजीर्ण : अजवायन, काला नमक, सौंठ तीनों को पीसकर चूर्ण बना लें। भोजन के बाद फाँकने पर अजीर्ण, अशुद्ध वायु का बनना व ऊपर चढ़ना बंद हो जाएगा।
  4. झाईं : खीरे के रस में अजवायन पीसकर चेहरे की झाइयों पर लगाने से लाभ होता है।
  5. शराब उपद्रव नाशक : अधिक शराब पी लेने से अगर व्‍यक्ति को उल्‍टियां आ रहीं हो तो उसे अजवाईन खिलाना बेहतर होगा। इससे उसको आराम मिलेगा और भूंख भी अच्‍छी तरह से लगेगी।
  6. गर्भावस्था में : गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को अजवाइन जरुर खानी चाहिए, क्‍योंकि इससे ना सिर्फ खून साफ रहता है, बल्कि यह पूरे शरीर में रक्त के प्रवाह को संचालित भी करता है।
  7. कान दर्द : कान में दर्द होने पर अजवाइन के तेल की कुछ बूंदे कान में डालने से आराम मिलता है। 
  8. दाद-खा़ज : शरीर में दाने हो जाएं या फिर दाद-खा़ज हो जाए तो, अजवाइन को पानी में गाढ़ा पीसकर दिन में दो बार लेप करने से फायदा होता है। घाव और जले हुए स्थानों पर भी इस लेप को लगाने से आराम मिलता है और निशान भी दूर हो जाते हैं।
  9. गठिया : गठिया के रोगी को अजवाइन के चूर्ण की पोटली बनाकर सेंकने से रोगी को दर्द में आराम पहुंचता है। अजवाइन का रस आधा कप में पानी मिलाकर आधा चम्मच पिसी सोंठ लेकर ऊपर से इसे पीलें। इससे गठिया का रोग ठीक हो जाता है।
  10. खांसी : अजवाइन के रस में एक चुटकी काला नमक मिलाकर सेवन करें। और ऊपर से गर्म पानी पी लें। इससे खांसी बंद हो जाती है।
  11. गुर्दे का दर्द : गुड़ और पिसी हुई कच्ची अजवाइन समान मात्रा में मिलाकर 1-1 चम्मच रोजाना 4 बार खायें। इससे गुर्दे का दर्द भी ठीक हो जाता है।
  12. रात में पेशाब करने  आदत : जिन बच्चे को रात में पेशाब करने की आदत होती है उन्हें रात में लगभग आधा ग्राम अजवाइन खिलायें।
  13. चेहरे का लेप : 2 चम्मच अजवाइन को 4 चम्मच दही में पीसकर रात में सोते समय पूरे चेहरे पर मलकर लगाएं और सुबह गर्म पानी से साफ कर लें।
  14. मसूढ़ों के रोग : अजवाइन को भून व पीसकर मंजन बना लें। इससे मंजन करने से मसूढ़ों के रोग मिट जाते हैं।
  15. खट्टी डकारें : अजवाइन, सेंधानमक, सेंचर नमक, यवाक्षार, हींग और सूखे आंवले का चूर्ण आदि को बराबर मात्रा में लेकर अच्छी तरह पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को 1 ग्राम की मात्रा में सुबह और शाम शहद के साथ चाटने से खट्टी डकारें आना बंद हो जाती हैं।
  16. जुकाम के साथ हल्का बुखार : देशी अजवाइन 5 ग्राम, सतगिलोए 1 ग्राम को रात में 150 मिलीलीटर पानी में भिगोकर, सुबह मसल-छान लें। फिर इसमें नमक मिलाकर दिन में 3 बार पिलाने से लाभ मिलता है।
  17. दमा : अजवाइन का रस आधा कप इसमें इतना ही पानी मिलाकर दोनों समय (सुबह और शाम) भोजन के बाद लेने से दमा का रोग नष्ट हो जाता है।
  18. मासिक धर्म की पीड़ा : मासिक धर्म के समय पीड़ा होती हो तो 15 से 30 दिनों तक भोजन के बाद या बीच में गुनगुने पानी के साथ अजवायन लेने से दर्द मिट जाता है। मासिक अधिक आता हो, गर्मी अधिक हो तो यह प्रयोग न करें। सुबह खाली पेट 2-4 गिलास पानी पीने से अनियमित मासिक स्राव में लाभ होता है।
  19. एसिडिटी : एसिडिटी की तकलीफ है तो थोड़ा-थोड़ा अजवाइन और जीरा को एक साथ भून लें। फिर इसे पानी में उबाल कर छान लें। इस छने हुए पानी में चीनी मिलाकर पिएं, एसिडिटी से राहत मिलेगी।
  20. पेट दर्द, गैस और अशुद्ध वायु : इसे अदरक (सोंठ) पाउडर और काला नमक 2-2 और 1 के अनुपात में मिलाएं भोजन करने के बाद एक चम्मच चूर्ण गुनगुने पानी के साथ लें तो पेट दर्द व गैस की समस्या में आराम मिलेगा। अशुद्ध वायु का बनना व सर में चढ़ना ख़त्म होगा।
  21. पेट दर्द, दस्त , अपच, अजीर्ण, अफारा तथा मन्दाग्नि : अजवायन पाउडर का एक चम्मच (टी स्पून) ले उसमे एक चुटकी काला नमक मिला कर दिन में दो या तीन बार गुनगुने पानी के साथ सेवन से पेट में दर्द, दस्त , अपच, अजीर्ण, अफारा तथा मन्दाग्नि में लाभकारी होती है।
  22. भूख लगाना : अजवायन, सौंफ, सोंठ और काला नमक को बराबर मात्रा में मिलाकर देसी घी के साथ दिन में तीन बार खाएं। भूख लगने लगेगी ।
  23. मोटापा नाशक : शाम को अजवायन को एक गिलास पानी में भिगोएं सुबह छानकर उस पानी में शहद डालकर पीने से मोटापे को कम करने में मदद होती है।
  24. मसूड़ों की सूजन : अजवायन के तेल की कुछ बूंदें गुनगुने पानी में मिलाकर कुल्ला करने से मसूड़ों की सूजन कम होती है।
  25. खांसी जुकाम में रामबाण : खांसी जुकाम में चुटकी भर काला नमक, आधा चम्मच अजवायन और दो लोंग इन सब को पिसकर गुनगुने पानी के साथ दिन में कई बार पीने से अदभुत लाभ मिलता है। यह रामबाण दवा है।
  26. जमा कफ निकालने हेतु : आधा कप पानी में आधा चम्मच अजवायन और थोड़ी सी हल्दी पाउडर डालकर उबाले और ठंडा करें और इसमें एक चम्मच शहद डालकर पीएं। और गर्म पानी में अजवायन डालकर इसका भाप लें। इस से छाती में जमा कफ निकल जाता है ।
  27. शीत-पित्ती : शीत-पित्ती की बीमारी के लिए अजवायन के फूल को गुड के साथ मिला कर पानी से लेने से पित्ती ठीक होती है। अजवायन का चूर्ण गेरु में मिलाकर शरीर पर मलने से पित्ती में तुरन्त लाभ होता है।
  28. खांसी : बेर के पत्तों और अजवायन को पानी में उबालकर, छानकर उस पानी से गरारे करने पर खांसी में लाभ होता है।
  29. अर्धशिरशूल : अजवायन को पानी में डालकर उबालें। छानकर बार बार थोड़ा-थोड़ा लेते रहने से आधे सिर दर्द में लाभ होता है। रात को कई बार पेशाब आने पर भी इसके सेवन से फायदा होता है।
  30. जोड़ों का दर्द : जोड़ों के दर्द में सरसों के तेल में अजवायन डालकर अच्छे से गर्म करें व छान ले और इससे जोड़ों की मालिश करे इससे आराम होगा।
  31. कृमिनाशक : अजवायन प्रबल कीटनाशक है। आँतों में कीड़े होने पर अजवायन के साथ काले नमक का सेवन करने पर पेट के कीड़े बाहर निकल जाते हैं। अजवायन का चूर्ण और गुड समान मात्रा में मिलकर गोली बनाकर दिन में दो तीन बार खिलाने से पेट के सभी प्रकार के कीडे नष्ट हो जाते है।
  32. कृमिनाशक : एक से दो ग्राम ग्राम अजवायन का चूर्ण छाछ के साथ देने से पेट के कीडे नष्ट होकर मल के साथ बाहर निकल जाते है।
  33. कृमिनाशक : सुबह दस-पन्द्रह ग्राम गुड खाकर दस-पन्द्रह मिनट बाद एक से दो ग्राम अजवायन का चूर्ण बासी पानी के साथ ले। इससे आंतों में मौजूद सब प्रकार के कीडे मर कर मल के साथ बहार निकल जायेंगे।
  34. दस्तावर : अजवायन को रात में चबाकर गरम पानी पीने से सवेरे पेट साफ हो जाता है।
  35. खॉसी और कफ एवं कफ की दुर्गन्ध : अजवायन के फूल को शहद में मिलाकर लेने से खॉसी और कफ में फायदेमंद होता है। इससे कफ की दुर्गन्ध भी खत्म होती है।
  36. चोट सूजन व दर्द : चोट लगने पर अजवायन एवं हल्दी की पुल्टिस बाँधने से चोट की सूजन व दर्द कम होती है।
  37. दस्त : अजवायन का अर्क या तेल 10-15 बूँद बराबर लेते रहने से दस्त बंद होते हैं।
  38. ठंड का बुखार : अजवायन का चूर्ण दो-दो ग्राम की मात्रा में दिन में तीन बार लेने से ठंड का बुखार शान्त होता है।
  39. ब्लडप्रेशर : ब्लडप्रेशर, बाय का दर्द, रक्तचाप और चर्म रोगों, में ऊँगलियों के काम न करने पर अजवायन के फूल एवं गिलोय का अर्क 1-1 ग्राम साथ मिलाकर लेना लाभ दायक होता है।
  40. चर्मरोग : अजवायन के फूल (सफ़ेद दाने के रूप में बाज़ार में उपलब्ध) का चूर्ण पानी में मिलाकर उस घोल से घाव, दाद, खुजली, फुंसियाँ आदि धोने पर ये चर्मरोग नष्ट होते हैं।
  41. प्रसव के बाद : अजवायन का प्रसव के बाद अग्नि की प्रदिप्त करने और भोजन को पचाने, वायु एवं गर्भाशय को शुद्ध करने के लिए सभी परम्परागत भारतीय परिवारों में लड्डू बना कर खिलाया जाने की परंपरा हे। यह चमत्कारी लाभ देता हे। प्रसूति स्त्रियों को अजवायन व गुड मिलाकर देने से भूख बढ़ती है। प्रसव के बाद अजवायन के प्रयोग से गर्भाशय शुद्ध होता है। गर्भाशय पूर्वास्थिती में आ जाता है। दूध ज्यादा बनता है। बुखार व कमर का दर्द ठीक करता है। इससे खराब मासिक चक्र ठीक भी हो जाता हें।
  42. पेट दर्द, जलन, अफारा , और मलमूत्र की रूकावट : अजवायन 10 ग्राम, छोटी हरड़ का चूर्ण 6 ग्राम, सेंधा नमक 3 ग्राम, हींग 3 ग्राम का चूर्ण बनाकर रखें और 3-3 ग्राम की मात्रा में जल के साथ लें तो पेट दर्द, जलन, अफारा , और मलमूत्र की रूकावट दूर होती है।
  43. बदन दर्द : अजवायन चूर्ण गरम पानी के साथ लेने से या अर्क को गुनगुना करके पीने से या इसके तेल की मालिश करने से बदन दर्द ठीक होता है।
  44. शक्तिशाली एंटीबायोटिक, एंटीऑक्सिडेंट और एंटीऑक्सिडेंट : अजवायन की पत्ती माहवारी के विकारों के उपचार, फेफड़ों की समस्याओं और अजीर्ण में और प्रयोग किया जाता है यह शक्तिशाली एंटीबायोटिक और एंटीऑक्सिडेंट भी होता है। अजवायन की पत्ती में प्राकृतिक एंटीसेप्टिक तत्व हंड यह संक्रमण को दूर रखने के महत्वपूर्ण होता है।
  45. किडनी या गुर्दे का दर्द : किडनी या गुर्दे संबंधी परेशानी में एक बड़ा चम्मच जीरा और दो चम्मच अजावयन को पीस कर पाउडर बना लें। इसमें थोड़ा सा काला नमक और एक चम्मच भूरे रंग का सिरका डाले। हर घंटे बाद एक-एक चम्मच इस मिश्रण का लें। दर्द से जल्द ही आराम मिल जाएगा।
  46. हाजमा : दोपहर को भोजन के बाद पिसी 2 - 3 ग्राम अजवायन लेने से खाना आसानी से हजम होता है।
  47. पुरानी खांसी : पान में अजवायन को डाल कर खाने से पुरानी खांसी ठीक होती है।
  48. मालिश : अजवायन को सरसों के तेल में डाल कर पकायें उससे बच्चों को मालिश करें सर्दी-जुकाम में तथा प्रसव उपरांत लाभ होगा।
  49. मसूड़ों में सूजन : मसूड़ों में सूजन होने पर अजवायन के तेल की कुछ बूँदें पानी में मिलाकर कुल्ला करने से सूजन कम होती है।
  50. आधे सिर में दर्द : आधे सिर में दर्द होने पर एक चम्मच अजवायन आधा लीटर पानी में डालकर उबालें। पानी को छानकर रखें एवं दिन में दो-तीन बार थोड़ा-थोड़ा लेते रहने से काफी लाभ होगा।
  51. जोड़ों का दर्द : सरसों के तेल में अजवायन डालकर अच्छी तरह गरम करें। इससे जोड़ों की मालिश करने पर जोड़ों के दर्द में आराम होता है।
  52. चोट के नीले-लाल दाग : चोट लगने पर नीले-लाल दाग पड़ने पर अजवायन एवं हल्दी की पुल्टिस चोट पर बाँधने पर दर्द व सूजन कम होती है।
  53. मुख में दुर्गंध : मुख से दुर्गंध आने पर थोड़ी सी अजवायन को पानी में उबालकर रख लें, फिर इस पानी से दिन में दो-तीन बार कुल्ला करने पर दो-तीन दिन में दुर्गंध खत्म हो जाती है।
स्रोत : http://desi-prescriptions.blogspot.in/2015/10/benefits-of-parsley.html


निवेदन : उपरोक्त पोस्ट में दी गयी जानकारी अच्छी लगे तो कृपया लेखक के उत्साहवर्धन के लिये एक कमेंट अवश्य करें। हमारे द्वारा पीलिया की दवाई मुफ्त में दी जाती है। जबकि-पैट में गैस, ऐसीडिटी, कब्जी, आँतों के अल्सर/छाले, लीवर/यकृत में सूजन/कमजोरी सिरदर्द, आधासीसी/माईग्रेन, पथरी, आसान और बिना सिजेरियन सुरक्षित प्रसव/डिलेवरी, विरह वेदना/प्रेम विछोह, डिप्रेशन, प्रदर, प्रमेह, शीघ्रपतन, यौन दुर्बलता, चिकनगुनिया/डेंगू के दर्द, सियाटिक आदि जटिल रोगों का बहुत कम खर्चे में उपचार किया जाता है। इसके अलावा दाम्पत्य विवाद समाधान के लिये भी सम्पर्क किया जा सकता है।नोट : कृपया उपचार के नाम पर गारण्टी देकर ठगने वालों से बचें और एक बार सेवा का मौका प्रदान करें। उपचारक बाद में पहले—स्वास्थ्य रक्षक सखा डॉ. पुरुषोत्तम मीणा-मोबाईल एवं वाट्स एप नम्बर : 9875066111.

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--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!

--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!
सभी के स्वस्थ एवं सुदीर्घ जीवन की कामना के साथ-मेरे प्यारे और दुलारे तीन बच्चों की ममतामयी अद्वितीय माँ (मम्मी) जो दुखियों, जरूतमंदों और मूक जानवरों तक पर निश्छल प्यार लुटाने वाली एवं अति सामान्य जीवन जीने की आदी महिला थी! वह पाक कला में निपुण, उदार हृदया मितव्ययी गृहणी थी! मेरी ऐसी स्वर्गीय पत्नी "जानकी मीणा" की कभी न भुलाई जा सकने वाली असंख्य हृदयस्पर्शी यादों को चिरस्थायी बनाये रखते हुए इस ब्लॉग को आज दि. 08.08.12 को फिर से पाठकों के समक्ष समर्पित कर रहा हूँ!-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'

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CALTROPS) गोंद कतीरा-Hog-Gum गोंदी गोभी-Cabbage गोरख मुंडी गोरखमुंडी घमोरी घाघरा घाव चकवड़ चक्कर चपाती चमत्कारिक सब्जियां चर्म चर्म रोग चर्मरोग चाय चाय-Tea चालीस के पार-Forty Across चिकनगुनिया चिकित्सकीय चिरायता-Absinth चिरोटा चुंबन चोक चौलाई छपाकी छरहरी काया छाछ छाले छीकें छुआरा छुहारा छोटा गोखरू छोटा धतूरा छोटी हरड़ जकवड़ जंगली/कटीली चौलाई जटामांसी-Spikenard जलजमनी जलन जलोदर रोग-Ascites Disease जवारे जवासा-Alhag जहर जामुन का जूस जायफल-Nutmeg जीरा जीवन रक्षक जुएं जुकाम जुलाब जूएं जूस जूस-Juice जोड़ों के दर्द ज्वर ज्वर-Fiver झांईं झुर्रियाँ झुर्री झूठे दर्द टमाटर-Tomatoes टाइफाइड टायफायड टॉन्सिल टोटला ट्यूमर ठेकेदार डॉक्टर डकार डायबिटीज डायरिया डिनर डिलेवरी डीकामाली डीगामाली डेंगू डेंगू-Dengue डॉ. निरंकुश डॉ. मीणा ढीलापन ढीली योनि तकलीफ का सही इलाज तरबूज-Watermelon तलाक ताकत तिल तिल्ली तुंबा तुंबी तुलसी तेल त्रिदोषनाशक त्रिफला त्वचा थकान थायरायड-Thyroid थायरॉइड दण्डनीय अपराध दन्तकृमि दन्तरोग दमा दर्द दर्दनाक दस्त दही दाग-धब्बे-Stains-Spots दाढ़ दांत दांतो में कैविटी-Teeth Cavity दाद दाम्पत्य दाम्पत्य-Conjugal दाल दालचीनी दालें दिल दुर्गंध दुर्बलता दुष्प्रभाव दूध दूधी दूधी-Milk Hedge दृष्टिदोष द्रोणपुष्पी-Leucas Cephalotes धड़कन धनिया-Coriander धमासा धातु धातु पतन धार्मिक नज़ला नपुंसकता नाक नाखून नागबला नागरमोथा नाडी हिंगु नाड़ी हिंगु (डिकामाली) नामर्दी नारियल नाश्ता निमोनिया निम्न रक्तचाप निम्बू नियासिन निरोगधाम निर्गुण्डी निसोरा नींद नींबू नींबू-Lemon नीम-azadirachta indica नुस्खे-Tips नेगड़ नेगड़-निर्गुन्डी-Vitex negundo नेत्र रोग नैतिक नौसादर न्युमोनिया-Pneumonia पक्षघात पढ़ने में मन लगेगा पंतजलि पत्तागोभी-CABBAGE पत्थरचट्टा पत्नी पथरी पनीर पपीता पपीता-CARICA PAPPYA पमाड परहेज पराठा परिस्थिति पवाड़ पवाँर पाइल्स पाक-कला पाचक पाचन पाठक संख्या पंद्रह लाख पायरिया पारिजात पालक पालक-Spinach पित्त पित्ती पिंपल-मुंहासे-Pimples-Acne पिरामिड पीलिया पीलिया-Jaundice पीलिया-कामला-Jaundice पुआड़ पुदीना पुनर्नवा-साटी-सौंटी-Punarnava पुरुष पेचिश पेट के कीड़े पेट दर्द पेट में गैस पेट रोग पेंसिल थेरेपी-Pencil Therapy पौरुष प्याज-Onion प्रजनन प्रतिरक्षा प्रतिरक्षा प्रणाली प्रतिरक्षा-इम्युनिटी-Immunity प्रतिरोधक प्रतिरोधक-Resistance प्रदर प्रमेह प्रवाहिका (पेचिश)-Dysentery प्रसव प्रसव सुरक्षा चक्र प्रसूति प्राणायाम प्रेग्नेंसी-Pregnancy प्रेमिका प्रोटीन प्रोटीन का कार्य प्रोटीन के स्रोत प्रोस्टेट ग्रन्थि-Prostate Gland प्लीहा प्लूरिसी-Pleurisy फफूंद-Fungi फरास फल फल-Fruit फाइबर फिटकरी फुंसी-Pimples फूलगोभी-CAULIFLOWER फेंफड़े फैट फोटोफोबिया फोड़ा फोड़े-Boils फोलिक एसिड-Folic Acid फ्लू फ्लू-Flu फ्लेक्स सीड्स बकायन बकुल बड़ी हरड़ बथुआ बथुआ पाउडर बथुआ-White Goose Foot बदबू बबूल-ACACIA बरसाती बीमारियाँ बरसाती बीमारियां बलगम बलवृद्धि बला बवासीर बहुमूत्रता- बांझपन बादाम-Almonds बादाम. बाल बाल झड़ना बाल झडऩा-Hair Falling बिना सिजेरियन मां बनें बीजबंद बीमारियों के अनुसार औषधियां बुखार बेल बेल – Bael बेली बैक्टीरिया ब्र​ह्मदण्डी ब्रेस्ट ग्रोथ ब्लड प्रेशर ब्लैक मेलिंग भगंदर भगंदर-Fistula-in-ano भगनासा भगोष्ठ भय भस्मक रोग भावनात्मक भुई आंवला-Phyllanthus Niruri भूई आमला भूख भूख बढ़ाने भूमि आंवला भोजनलीवर मकोय मकोय-Soleanum nigrum मंजीठ मटर-PEA मंद दृष्टि मंदाग्नि 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