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कद्दू

कद्दू फल एवं बीज के औषधीय गुण और स्वास्थ्य लाभ
Monday, August 31, 2015

कद्दू या कुम्हड़ा एक स्थलीय, द्विबीजपत्री पौधा है जिसका तना लम्बा,कमजोर व हरे रंग का होता है। तने पर छोटे-छोटे रोयें होते हैं। यह अपनेआकर्षों की सहायता से बढ़ता या चढ़ता है। इसकी लता (बेल) लम्बी, मोटी व चारों तरफ पृथक, प्रथम शाखा के रूप में जमीन पर फैलकर बढ़ती जाती है। इसके पत्ते बड़े, हृदयाकार तथा पुष्प नीले रंग के व एकल होते हैं। फल के रूपमें प्राप्त कद्दू बड़े-बड़े गोलाकार या गोल लम्बवत् होते हैं। फल की मज्जाअपक्वावस्था में सफेद रंग की तथा परिपक्व होने पर पीले रंग की होती है। 

फल के अन्दर असंख्य सफेद रंग के चपटे फूले हुए बीज रहते हैं। इसका फूल पीले रंग का सवृंत, नियमित तथा अपूर्ण घंटाकार होता। नर एवं मादा पुष्पअलग-अलग होते हैं। नर एवं मादा दोनों पुष्पों में पाँच जोड़े बाह्यदल एवं पाँचजोड़े पीले रंग के दलपत्र होते हैं। नर पुष्प में तीन पुंकेसर होते हैं जिनमें दो एक जोड़ा बनाकार एवं तीसरा स्वतंत्र रहता है। मादा पुष्प में तीन संयुक्त अंडप होते हैं, जिसे युक्तांडप कहते हैं। इसका फल लंबा या गोलाकार होता है। फल के अन्दर काफी बीज पाये जाते हैं। फल का वजन 4 से 8 किलोग्राम तक हो सकता है। सबसे बड़ी प्रजाति मैक्सिमा का वजन 34 किलोग्राम से भी अधिक होता है। इस पौधे की आयु एक वर्ष होती है।

कद्दू स्वाद के साथ ही सेहत के लिए भी प्रकृति ने अपनी इस बड़ी देन में कई तरह के औषधीय गुण समेटे हैं। इसका सेवन स्वास्थ्यवर्धक माना जाता है। इस सब्जी में पेट से लेकर दिल तक की कई बीमारियों के इलाज की क्षमता है। जहां यह हृदयरोगियों के लिए बहुत लाभदायक होती है, वहीं कोलेस्ट्रॉल को कम करने में भी सहायक होती है। कद्दू में मुख्य रूप से बीटा केरोटीन पायाजाता है, जिससे विटामिन ए मिलता है। पीले और संतरी कद्दू में केरोटीन की मात्रा अपेक्षाकृत ज्यादा होती है। बीटा केरोटीन एंटीऑक्सीडेंट होता है जो शरीरमें फ्री रैडिकल से निपटने में मदद करता है। कद्दू ठंडक पहुंचाने वाला होता है। 
इसे डंठल की ओर से काटकर तलवों पर रगड़ने से शरीर की गर्मी खत्म होती है। कद्दू लंबे समय के बुखार में भी असरकारी होता है। इससे बदन की हरारत या उसका आभास दूर होता है। कद्दू का रस भी सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है। यह मूत्रवर्धक होता है और पेट संबंधी गड़बड़ियों में भी लाभकारी रहता है। यह खून में शर्करा की मात्रा को नियंत्रित करने में सहायक होता है और अग्नयाशय को भी सक्रिय करता है। इसी वजह से चिकित्सक मधुमेह के रोगियों को कद्दू के सेवन की सलाह देते हैं।
भारत में कद्दू की कई प्रजातियां पाई जाती हैं, जिन्हें उनके आकार-प्रकार और गूदे के आधार पर मुख्य रूप से सीताफल, चपन कद्दू और विलायती कद्दू के वर्गों में बांटा जाता है। हमारे यहां विवाह जैसे मांगलिक अवसरों पर कद्दू की सब्जी और हलवा आदि बनाना-खाना शुभ माना जाता है। उपवास के दिनों में फलाहार के रूप में भी इससे बने विशेष पकवानों का सेवन किया जाता है।

कद्दू का इतिहास बहुत पुराना है। माना जाता है कि कद्दू की उत्पत्ति उत्तरी अमेरिका में हुई होगी। पश्चिमी एशिया में इसका इस्तेमाल मीठे व्यंजन बनाने में किया जाता है। आगरा की प्रसिद्ध मिठाई पेठा भी इसी की प्रजाति की सब्जी से बनाई जाती है। अमेरिका, मेक्सिको, चीन और भारत इसके सबसे बड़े उत्पादक देश हैं। इसके साथ ही यह विश्व के अनेक देशों की संस्कृति के साथ जुड़ा है। भारत में विवाह जैसे मांगलिक अवसरों पर कद्दू की सब्जी और हलवा आदि बनाना-खाना शुभ माना जाता है। उपवास के दिनों में फलाहार के रूप में भी इससे बने विशेष पकवानों का सेवन किया जाता है। ईसाई देशों में हैलोईन के त्यौहार पर इसका विशेष महत्व होता है। जहाँ इसे लालटेन के रूप में भी प्रयोग किया जाता है।
कद्दू बीज
कद्दू को सीताफल, कुम्हड़ा, काशीफल, मीठा कद्दू, चपन कद्दू आदि कई नामोंसे जाना जाता है। कद्दू के बीज भी बहुत गुणकारी होते हैं। कद्दू व इसके बीज विटामिन सी और ई, आयरन, कैलशियम मैग्नीशियम, फॉसफोरस, पोटैशियम, जिंक, प्रोटीन और फाइबर आदि के भी अच्छे स्रोत होते हैं। यह बलवर्धक, रक्त एवं पेट साफ करता है, पित्त व वायु विकार दूर करता है और मस्तिष्क के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है। प्रयोगों में पाया गया है कि कद्दू के छिलके में भी एंटीबैक्टीरिया तत्व होता है जो संक्रमण फैलाने वाले जीवाणुओं से रक्षा करता है। शायद इन्हीं खूबियों की वजह से कद्दू को प्राचीन काल से ही गुणों की खान माना जाता रहा है।

विटामिन ई, जिंक और मैग्नीशियत के बेहतर स्रोत के रूप में कद्दू के बीज को जाना जाता है। साथ ही इसमें कई प्रकार के एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। कद्दू के बीज इम्यूनिटी को बेहतर बनाने का काम करते हैं और इंसुलिन के स्तर को सुधारते हैं।
कद्दू के बीज विटामिन सी और ई, आयरन, कैलशियम मैग्नीशियम, फॉसफोरस, पोटैशियम, जिंक, प्रोटीन और फाइबर आदि के भी अच्छे स्रोत होते हैं। इसमें श्वेतसार, कुकुर्बिटान नामक क्षाराभ, एक तिक्तराल, प्रोटीन-मायोसिन, वाईटेलिन शर्करा क्षार आदि पाए जाते हैं। यह बलवर्धक है, रक्तएवं पेट साफ करता है,

पित्त व वायु विकार दूर करता है और मस्तिष्क के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है। प्रयोगों में पाया गया है कि कद्दू के छिलके में भी एंटीबैक्टीरिया तत्व होता है जो संक्रमण फैलाने वाले जीवाणुओं से रक्षा करता है। कद्दू के बीज भी आयरन, जिंक, पोटेशियम और मैग्नीशियम के अच्छे स्रोत हैं। इसमे खूब रेशायानी की फाइबर होता है जिससे पेट हमेशा साफ रहता है। शायद इन्हीं खूबियों के कारण कद्दू को प्राचीन काल से ही गुणों की खान माना जाता रहा है। यह खून में शर्करा की मात्रा को नियंत्रित करने में सहायक होता है और अग्नयाशय को भी सक्रिय करता है। इसी वजह से चिकित्सक मधुमेह के रोगियों को कद्दू के सेवन की सलाह देते हैं।
1. अनिद्रा, चिंता और तनाव (डिप्रेशन)-कद्दू के एक ग्राम बीजों में करीब 22मिलीग्राम ट्रिप्टोफान प्रोटीन पाया जाता है, जिसे नींद का कारक भी माना जाता है।
2. हृदय स्वास्थ्य के लिए अच्छा-कद्दू के बीज मिनरल मैग्नीशियम का एक समृद्ध स्रोत है, जो दिल के उपचार में मदद करता है।
3. रक्त शर्करा पर नियंत्रण-इस चमत्कारिक बीज में सुपाच्य प्रोटीन होता है। जो शरीर में रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करता है और अग्न्याशय कोसक्रिय करता है। इसी कारण मधुमेह रोगियों को कद्दू के बीज खाने की सलाह दी जाती हैं।
4. प्रोस्टेटिक हाइपरट्रॉफी का खतरा कम करें-कद्दू के बीज के तेल में ओमेगा-3 बहुत अधिक मात्रा में होता है जो प्रोस्टेटिक अतिवृद्धि यानी बीपीएच के जोखिम को कम करने में मदद करता है।
5. एनर्जी देता है-जिन लोगों में एनर्जी का लेवल कम होता है, उन लोगों के लिए कद्दू के बीज रामबाण की तरह काम करते हैं। इन बीजों के सेवन शरीर में रक्त और ऊर्जा के स्तर के निर्माण में मदद करता है।
6. एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण की मौजूदगी-कद्दू को प्राचीन काल से ही गुणों की खान माना जाता रहा है। कुछ अध्ययनों से यह बात साबित हुई है कि कद्दू के बीजों में भरपूर मात्रा में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण दर्द, बुखार, सूजन और जकड़न में इस्तेमाल होने वाली दवा (इंडोमेथासिन) के सामान ही प्रभावी होतीहै।
7. कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करती है-बुरे कोलेस्ट्रॉल को कम करने के लिए कद्दू के बीज फायदेमंद होते है। स्टेरॉल्स और फिटोस्टेरॉल नामक तत्व से भरपूर कद्दू के बीज शरीर में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में मदद करते है।
8. फाइबर का अच्छा स्रोत-कद्दू के बीज रेशा यानी फाइबर से उच्च होते है। जो शरीर में फाइबर की आवश्यकता को पूरा करता है। साथ ही इसके सेवन से कब्ज की समस्या नहीं होती और पेट हमेशा साफ रहता है।
9. एसिटिडी का इलाज-कद्दू के बीज में शरीर के पीएच को अल्कलाइजिंग करता है, जिससे पेट में एसिड के गठन को रोकता है। एसिड की समस्या से बचने के लिए इसे अपने आहार में शामिल करें। इसे आप सब्जी, सूप, सलाद, जिसमें चाहे और जैसे चाहे खा सकते हैं।
कद्दू के बीज का सूप, सलाद और सब्जियों के साथ फ्राय करके भी खा सकते हैं।

Source : http://healthdiseasegenetics.blogspot.in/2015/08/blog-post_31.html
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कद्दू के गुण और फायदे
Pumpkin health benefits in hindi.
by Sehat Gyan 21/09/2016 

कद्दू की सब्जी, कद्दू का हलवा खाना कोई पसंद नहीं करता। यहां तक की शहरों में बहुत ही कम लोग जानते हैं कि कद्दू के व्यंजन भी बनते हैं। इसके पीछे की वजह यह है कि कद्दू से बने व्यंजन को लोग एक अच्छा व्यंजन नहीं मानते। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि कद्दू में कुछ ऐसे पोषक तत्व पाए जाते हैं जो दूसरी किसी सब्जी में नहीं मिलते। वैसे, एक ओर जहां कद्दू बेहद फायदेमंद सब्जी है वहीं इसके बीजों में भी पोषक तत्वों का खजाना भरा हुआ है। यह बड़े ही काम का होता है और इसमें बड़े औषधिय गुण होते हैं जो पेट से लेकर दिल की बीमारी तक का इलाज करता है। कद्दू इतना फायदेमंद है कि लोग इसका जूस भी बनाकर पीते हैं।
कद्दू के फायदे
  1. डायबिटीज के मरीजों के लिए बहुत ही फायदेमंद है : शरीर में इंसुलिन की मात्रा कम होने पर डायबटीज की शिकायत हो जाती है, ऐसे में एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में मिलने पर इस कमी की भरपाई की जा सकती है। कई शोध में पाया गया है कि कद्दू में एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है। इसके अलावा इसमें विटामिन सी होने की वजह से इसे खाने से शरीर में इंसुलिन की मात्रा अच्छी हो जाती है और बढ़ी हुई डायबटीज कंट्रोल में आ जाती है।
  2. फॉलिक एसिड : फॉलिक एसिड भरपूर कद्दू शरीर में नाईट्रिक एसिड की मात्रा को घटाता है। यह आपके शरीर की प्रक्रिया को सुचारू बनाता है। वैसे कुछ आहार विशेषज्ञों का मानना है कि कद्दू हृदयरोगियों के लिए बहुत ही गुणकारी है। यह कोलेस्ट्राल को कम करता है।
  3. कद्दू ठंडक पहुंचाती है : कद्दू न केवल लंबे समय के बुखार में भी असरकारी होता है, बल्कि इसे डंठल की ओर से काटकर तलवों पर रगड़ने से शरीर की गर्मी खत्म होती है। इससे बदन की हरारत या उसका आभास भी दूर होता है।

कद्दू के बीज भी है फायदेमंद
  1. आयरन और वसा : कद्दू बहुत ही सस्ता और पौष्टिक फल है। इसलिए जिनके शरीर में आयरन की कमी है वह कद्दू का सेवन कर सकते हैं। कद्दू के बीजों में आयरन की पर्याप्त मात्रा होती है और इसमें वसा भी नहीं होता है जो दिल के लिए भी अच्छा होता है। इसमें जिंक तत्व होता है जो मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाकर बुद्धि को तेज करता है।
  2. बाल को रखे स्वस्थ्य : अगर आप भी इतनी तेजी से बालों के झड़ने की समस्याि से ग्रस्त हैं तो कद्दू का सेवन कीजिए। कद्दू खाने से बाल स्वस्थ, चमकदार और घने हो जाते हैं।
  3. इम्यून सिस्टम को बढ़ाता है : कद्दू में ऐसे तत्व मौजूद हैं जिससे वायरल, सर्दी-खांसी-जुकाम जैसे संक्रमणों से सुरक्षित रखता है। इसके अलावा डिप्रेशन दूर करने में भी मददगार होता है।
  4. बुद्धि के लिए बेहतर : कद्दू के खाने से एक तो चंचलता, चिड़चिड़ापन, अनिद्रा आदि समस्या दूर होती है, दूसरे इसमें मौजूद जिंक तत्व मानसिक विकारों को दूर करके बुद्धि को तेज और मन को शांत करता है।
स्रोत : http://www.sehatgyan.com/kaddu-ke-gun-aur-fayde-hindi-me/2090
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कद्दू (Pumpkin) के आयुर्वेदिक और औषधीय गुण
Posted in Daily Healthy Tips,
Education By Dr. D K Goyal On May 24, 2016
कद्दू (Kaddu) के गुण
कद्दू हमारे घर में बनाई जाने वाली आम सब्‍जी है लेकिन हम फिर भी इसे अपनी फेवरेट सब्‍जी के रूप में उल्‍लेख नहीं करते। यह बहुत ही स्‍वास्‍थ्‍य वर्धक सब्‍जी है जिसे हम नजरअंदाज कर देते हैं। लोगों में यह भी गलत धारणा है कि कद्दू मीठा होता है इसलिये इसे मधुमेह रोगी नहीं खा सकते। यह बात बिल्‍कुल गलत है। शरीर के इन्‍सुलिन लेवल को बढाना कद्दू का काम होता है. कद्दू का सेवन, डायबटीज के रोग में फायदेमंद होता है।
कद्दू को सब्जी एवं अनेक प्रकार के व्यंजन बनाने के काम में लिया जाता है। यह अनेक पौष्टिक गुणों से भरपूर फल है, जिसका आयुर्वेदीय चिकित्सा पद्धति में कई रोगों की चिकित्सा करने में प्रयोग किया जाता है। हिन्दी में इसको काशीफल, कद्दू, रामकोहला, तथा संस्कृत में कुष्मांड, पुष्पफल, वृहत फल, वल्लीफल कहते हैं।
कद्दू में मुख्य रूप से बीटा केरोटीन पाया जाता है, जिससे विटामिन ए मिलता है। पीले और संतरी कद्दू में केरोटीन की मात्रा अपेक्षाकृत ज्यादा होती है। बीटा केरोटीन एंटीऑक्सीडेंट होता है जो शरीर में फ्री रैडिकल से निपटने में मदद करता है। कद्दू व इसके बीज विटामिन सी और ई, आयरन, कैलशियम मैग्नीशियम, फॉसफोरस, पोटैशियम, जिंक, प्रोटीन और फाइबर आदि के भी अच्छे स्रोत होते हैं। इसमें श्वेतसार, कुकुर्बिटान नामक क्षाराभ, एकतिक्तराल, प्रोटीन-मायोसिन, वाईटेलिन शर्करा क्षार आदि पाए जाते हैं।
आहार विशेषज्ञों का कहना है कि कद्दू हृदयरोगियों के लिए अत्यंत लाभदायक है। यह कोलेस्ट्राल कम करता है, ठंडक पहुंचाने वाला और फायदेमंद होता है।

कद्दू  बलवर्धक है, रक्त एवं पेट साफ करता है, पित्त व वायु विकार दूर करता है और मस्तिष्क के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है। प्रयोगों में पाया गया है कि कद्दू के छिलके में भी एंटीबैक्टीरिया तत्व होता है जो संक्रमण फैलाने वाले जीवाणुओं से रक्षा करता है। कद्दू के बीज भी आयरन, जिंक, पोटेशियम और मैग्नीशियम के अच्छे स्रोत हैं। इसमे खूब रेशा यानी की फाइबर होता है जिससे पेट हमेशा साफ रहता है। शायद इन्हीं खूबियों के कारण कद्दू को प्राचीन काल से ही गुणों की खान माना जाता रहा है।  यह खून में शर्करा की मात्रा को नियंत्रित करने में सहायक होता है और अग्नयाशय को भी सक्रिय करता है। इसी वजह से चिकित्सक मधुमेह के रोगियों को कद्दू के सेवन की सलाह देते हैं।
कद्दू के आयुर्वेदिक प्रयोग-


  1. अग्नि से जल जाने पर (अग्निदग्ध) इसके पत्तों का रस निकाल कर लगाने से काफी लाभ मिलता है।
  2. उन्माद, मिर्गी आदि मानसिक रोगों में यह अच्छा लाभ करता है तथा स्मरण शक्ति व मस्तिष्क व ह्रदय की दुर्बलता को दूर करता है।
  3. मानस रोगों में पका कद्दू विशेष लाभदायक होता है। यह शरीर को पुष्ट बनाता है।
  4. यह उरःक्षत, रक्तपित्त, मूत्र, कृच्छ, मूत्राघात, अश्मरी, राजयक्ष्मा क्षय आदि में भी सहायक रूप से लाभ करता है।
  5. शरीर में जलन की शान्ति के लिए इसके बीजों को पीसकर मिश्री मिलाकर ठण्डाई के रूप में प्रयोग करते हैं।
  6. गर्मियों में इसका अवलेह व मुरब्बा भी प्रयोग किया जाता है तथा इसके अनेक व्यंजन, बर्फी, खीर, हलवा, रायता, पकौड़े आदि के रूप में भी प्रयोग करते हैं।
कद्दू के घरेलू नुस्खे-
  1. पुराना बुखार : कद्दू लंबे समय के बुखार में असरकारी होता है। इससे बदन की हरारत या उसका आभास दूर होता है।
  2. हृदय रोग : आहार विशेषज्ञों का कहना है कि कद्दू हृदयरोगियों के लिए अत्यंत लाभदायक है। यह कोलेस्ट्राल कम करता है, ठंडक पहुंचाने वाला और मूत्रवर्धक होता है।
  3. मधुमेह रोगियों के लिये : कद्दू रक्त में शर्करा की मात्रा को नियंत्रित करता है और अग्न्याशय को सक्रिय करता है। इसी कारण चिकित्सक मधुमेह रोगियों को कद्दू खाने की सलाह देते हैं। इसका रस भी स्वास्थ्यवर्धक माना गया है।
  4. एनीमिया : लोहे की कमी या एनीमिया में कद्दू लाभदायक सिद्ध होता है।
  5. विटामिन ए-एंटीऑक्सिडेंट : इसमें पाया जाने वाला विटामिन ए बहुत ही लाभकारी होता है। इससे शरीर में एंटीऑक्सिडेंट की मात्रा में इजाफा होता है। ऐसा होने से आपकी स्किन और बालों की सेहत बेहतर रहती है।
  6. एंटीबैक्टीरिया : प्रयोगों में पाया गया है कि कद्दू के छिलके में भी एंटीबैक्टीरिया तत्व होता है जो संक्रमण फैलाने वाले जीवाणुओं से रक्षा करता है। शायद इन्हीं खूबियों की वजह से कद्दू को प्राचीन काल से ही गुणों की खान माना जाता रहा है।
  7. कद्दू मस्तिष्क को बल व शांति प्रदान करता है। यह निद्राजनक है। इसलिए अनेक मनोविकार जैसे मिर्गी (एपिलेप्सी), अनिद्रा, गुस्सा, डिप्रेशन, असंतुलन तथा मस्तिष्क की दुर्बलता में अत्यन्त लाभदायी है। इससे बुद्धि की क्षमता बढ़ती है। चंचलता, चिड़चिड़ापन, अनिद्रा आदि दूर होकर मन शांत हो जाता है।
  8. कुम्हड़ा रक्तवाहिनियों व हृदय की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है और अच्छे रक्त का निर्माण करता है। आंतरिक जलन, अत्यधिक प्यास, एसिडिटी, पुराना बुखार आदि में कद्दू का रस और सब्जी दोनो उपयोगी हैं।
  9. कद्दू के बीज भी बहुत गुणकारी होते हैं। कद्दू व इसके बीज विटामिन सी और ई, आयरन, कैलशियम मैग्नीशियम, फॉसफोरस, पोटैशियम, जिंक, प्रोटीन और फाइबर आदि के भी अच्छे स्रोत होते हैं। यह बलवर्धक, रक्त एवं पेट साफ करता है, पित्त व वायु विकार दूर करता है और मस्तिष्क के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है। प्रयोगों में पाया गया है कि कद्दू के छिलके में भी एंटीबैक्टीरिया तत्व होता है जो संक्रमण फैलाने वाले जीवाणुओं से रक्षा करता है।
  10. अनिद्रा, चिंता और तनाव (डिप्रेशन) : कद्दू के एक ग्राम बीजों में करीब 22 मिलीग्राम ट्रिप्टोफान प्रोटीन पाया जाता है, जिसे नींद का कारक भी माना जाता है।
  11. हृदय स्वास्थ्य के लिए अच्छा : कद्दू के बीज मिनरल मैग्‍नीशियम का एक समृद्ध स्रोत है, जो दिल के उपचार में मदद करता है।
  12. रक्त शर्करा पर नियंत्रण : इस चमत्कारिक बीज में सुपाच्‍य प्रोटीन होता है। जो शरीर में रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करता है और अग्न्याशय को सक्रिय करता है। इसी कारण मधुमेह रोगियों को कद्दू के बीज खाने की सलाह दी जाती हैं।
  13. प्रोस्टेटिक हाइपरट्रॉफी का खतरा कम करें : कद्दू के बीज के तेल में ओमेगा-3 बहुत अधिक मात्रा में होता है जो प्रोस्टेटिक अतिवृद्धि यानी बीपीएच के जोखिम को कम करने में मदद करता है।
  14. एनर्जी देता है : जिन लोगों में एनर्जी का लेवल कम होता है, उन लोगों के लिए कद्दू के बीज रामबाण की तरह काम करते हैं। इन बीजों के सेवन शरीर में रक्त और ऊर्जा के स्तर के निर्माण में मदद करता है।
  15. एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण की मौजूदगी : कद्दू को प्राचीन काल से ही गुणों की खान माना जाता रहा है। कुछ अध्‍ययनों से यह बात साबित हुई है कि कद्दू के बीजों में भरपूर मात्रा में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण दर्द, बुखार, सूजन और जकड़न में इस्‍तेमाल होने वाली दवा (इंडोमेथासिन) के सामान ही प्रभावी होती है।
  16. कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करता है : बुरे कोलेस्‍ट्रॉल को कम करने के लिए कद्दू के बीज फायदेमंद होते है। स्टेरॉल्‍स और फि‍टोस्टेरॉल नामक तत्‍व से भरपूर कद्दू के बीज शरीर में कोलेस्‍ट्रॉल के स्‍तर को कम करने में मदद करते है।
  17. फाइबर का अच्छा स्रोत : कद्दू के बीज रेशा यानी फाइबर से उच्‍च होते है। जो शरीर में फाइबर की आवश्‍यकता को पूरा करता है। साथ ही इसके सेवन से कब्‍ज की समस्‍या नहीं होती और पेट हमेशा साफ रहता है।
  18. एसिटिडी का इलाज : कद्दू के बीज में शरीर के पीएच को अल्कलाइजिंग करता है,  जिससे पेट में एसिड के गठन को रोकता है। एसिड की समस्‍या से बचने के लिए इसे अपने आहार में शामिल करें। इसे आप सब्जी, सूप, सलाद, जिसमें चाहे और जैसे चाहे खा सकते हैं।
  19. कद्दू में सेचुरेटेड फैट नहीं पाया जाता। इससे शरीर में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा कम बनी रहती और दिल सेहतमंद रहता है। इसमें पाए जाने वाले डायटरी फाइबर से पेट की बीमारियों में आराम मिलता है।
  20. स्किन और बालों का संरक्षक : इसमें पाया जाने वाला विटामिन ए बहुत ही लाभकारी होता है। इससे शरीर में एंटीऑक्सिडेंट की मात्रा में इजाफा होता है। ऐसा होने से आपकी स्किन और बालों की सेहत बेहतर रहती है।
  21. त्वचा का संरक्षक : कद्दू में जीआ स्कैनटिन नामक एंटीऑक्सिडेंट पाया जाता है। यह अल्ट्रा वायलेट किरणों से होने वाले नुकसान से बचाता है। इससे त्वचा के नए सेल्स बनने लगते हैं।
नोट :- सप्ताह में कम से कम दो बार कद्दू जरूर खाएं। सलाद के रूप में न खा पाएं तो इसकी सब्जी बनाकर खाना भी लाभ देगा।
स्रोत : http://dkgoyal.com/%E0%A4%95%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A5%82-pumpkin-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%86%E0%A4%AF%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A5%87%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%95-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%94/
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कद्दू के बीज के पांच ऐसे फायदे जिन्हें जानकर आप दंग रह जाएंगे
aajtak.in [Edited by: भूमिका राय]
नई दिल्ली, 7 अक्टूबर 2015 | अपडेटेड: 14:09 IST


कद्दू के बीज
हालांकि बहुत कम लोगों को ही कद्दू की सब्जी पसंद होती है लेकिन आपको जानकर आश्चर्य होगा कि कद्दू में कुछ ऐसे पोषक तत्व पाए जाते हैं जो दूसरी किसी सब्जी में नहीं मिलते. वैसे, एक ओर जहां कद्दू बेहद फायदेमंद सब्जी है वहीं इसके बीजों में भी पोषक तत्वों का खजाना भरा हुआ है.

कद्दू के बीज स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं. आप चाहें तो इन्हें अपनी डाइट का हिस्सा बनाकर इसके फायदे ले सकते हैं:

1. स्वस्थ दिल के लिए
कद्दू के बीजों से भरा एक-चौथाई कप हमारे दिनभर की मैग्नीशियम की आवश्यकता को पूरा करता है. यह दिल को स्वस्थ और सक्रिय रखने के लिए बहुत फायदेमंद है. यह ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने और आघात से सुरक्षित रखने में मददगार होता है.

2. इम्यून सिस्टम को बेहतर बनाने में
कद्दू की बीजों में पर्याप्त मात्रा में जिंक पाया जाता है. यह इम्यून सिस्टम को बेहतर बनाने में कारगर होता है और वायरल, सर्दी-खांसी-जुकाम जैसे संक्रमणों से सुरक्षित रखता है. इसके अलावा डिप्रेशन दूर करने में भी मददगार होता है.

3. प्रोस्टेट ग्रंथि ठीक रखने में
सालों से कद्दू के बीजों को पुरुषों के लिए बेहतर माना जाता रहा है. इसमें मौजूद जिंक की मात्रा प्रोस्टेट ग्रंथि के लिए बहुत जरूरी अवयव है.

4. मधुमेह का खतरा कम करने में
शोधकर्ताओं के अनुसार, कद्दू के बीज इंसुलिन की मात्रा को संतुलित करने का काम करते हैं. ऐसे में ये मधुमेह के रोगियों के लिए बहुत फायदेमंद है.

5. नींद के लिए भी बेहतर
सोने से पहले कद्दू के कुछ बीज लेना बहुत अच्छा रहता है. आप चाहें तो किसी फल के साथ इसे ले सकते हैं. कद्दू के बीजों का सेवन करने से तनाव कम होता है और नींद अच्छी आती है.

Source : http://aajtak.intoday.in/story/health-benefits-of-pumpkin-seeds-1-836853.html
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चिंता और तनाव कम होता है कद्दू के बीज खाने से, जानें इसके 10 फायदे

dainikbhaskar.com | Sep 27, 2014, 12:14 PM IST
लाइफस्टाइल डेस्क:कद्दू की सब्जी बन रही हो तो अक्सर हम इसके बीजों को कूड़ेदान में फेंक देते हैं। इतना ही नहीं, हम बाकी कई सब्जियों और फलों के छिलकों और बीजों को बेकार समझकर उन्हें भी फेंक देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इनका कितना महत्व होता है। इन्हीं सब्जियों और फलों के छिलके और बीज हमारी हेल्थ के लिए कितने फायदेमंद होते हैं? चलिए, आज आपको बताते हैं कद्दू के बीज की ढेर सारी खूबियां और इसके जबरदस्त औषधीय गुण।

इन खूबियों को बताया है डॉ. दीपक आचार्य ने। वो अभुमका हर्बल प्रा. लि. अहमदाबाद के डायरेक्टर हैं। डॉ. आचार्य पिछले 15 सालों से अधिक समय से भारत के सुदूर आदिवासी अंचलों जैसे पातालकोट (मध्य प्रदेश), डांग (गुजरात) और अरावली (राजस्थान) से आदिवासियों के पारंपरिक ज्ञान को इकट्ठा कर उन्हें आधुनिक विज्ञान की मदद से प्रमाणित करने का काम कर रहे हैं।


1. अनिद्रा, चिंता और तनाव (डिप्रेशन)
कद्दू के एक ग्राम बीजों में करीब 22 मिलीग्राम ट्रिप्टोफान प्रोटीन पाया जाता है, जिसे नींद का कारक भी माना जाता है। कनाडियन जर्नल ऑफ फिजियोलॉजी में 2007 में प्रकाशित एक शोध में पाया गया कि ग्लुकोज़ के साथ कद्दू के बीजों का सेवन करने वाले अनिद्रा से ग्रस्त रोगियों को आमतौर पर साधारण दिनों की तुलना में बेहतर नींद आती है। ग्रामीण इलाकों में जी मिचलाना, थकान होना या चिंतित व्यक्ति को कद्दू के बीजों को शक्कर के साथ मिलाकर खिलाया जाता है।
2. जोड़ों का दर्द या आर्थरायटिस :
सन 1995 में जर्नल ऑफ फार्मेकोलॉजिकल रिसर्च की एक शोध रिपोर्ट के अनुसार, ड्रग इंडोमेथासिन, जो आर्थरायटिस के रोगियों को दी जाती है, के समतुल्य कद्दू के बीजों से प्राप्त तेल का असर होता है। कृत्रिम ड्रग की तरह इन बीजों का कोई दुष्प्रभाव भी नहीं होता है।
3. दिल और लिवर रोग :
अलसी और कद्दू के बीजों की समान मात्रा (करीब 2 ग्राम प्रत्येक) प्रतिदिन एक बार ली जाए तो माना जाता है कि लिवर की कमजोरी और दिल की समस्याओं के निपटारे के लिए कारगर होते हैं। जर्नल ऑफ फूड केमिस्ट्री एंड टोक्सिकोलॉजी में प्रकाशित 2008 की एक शोध रिपोर्ट भी इस तरह के दावों को सही ठहराती है।


4. घावों का होना :
शरीर के जिन हिस्सों पर घाव पक चुके हैं या किसी तरह का संक्रमण हो गया हो, उन जगहों पर सूखे बीजों का चूर्ण या ताजा बीजों को कुचलकर उनका रस लगा देने से आराम मिल जाता है।
5. पथरी या किडनी स्टोन :
सन 1987 में अमेरिकन जर्नल ऑफ क्लिनिकल न्युट्रिशन में प्रकाशित एक शोध के अनुसार, जिन बच्चों की पेशाब टेस्ट सैंपल में कैल्शियम ओक्सेलेट के कण पाए गए, उनके खाने में कद्दू के बीजों को मिलाकर देने से इस समस्या को काफी हद तक कम होते देखा गया। कैल्शियम ओक्सेलेट दरअसल किडनी में पथरी का निर्माण करते हैं।
6. हाथ-पैरों में जलन :
हाथ पैरों में जलन होने पर कद्दू के बीजों को पीसकर इसका लेप जलन वाले हिस्सों पर करने से तुरंत राहत मिलती है। आदिवासियों का मानना है कि लेप के सूख जाने के बाद हाथ पैर या जलन वाले अंग को नमक के घोल से धो लिया जाए तो और भी तेजी से आराम मिलता है।
7. हाई ब्लड प्रेशर या हाईपरटेंशन :
कद्दू के बीजों में प्रचुर मात्रा में एंटी-ऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं जो उच्च रक्तचाप को कम करने में बेहद कारगर साबित हुए हैं। जिन्हें हाई ब्लड प्रेशर की समस्या हो, उन्हें कद्दू के बीजों को अपने खाने का हिस्सा जरूर बनाना चाहिए।
8. रजोनिवृति और उससे जुड़ी समस्याएं :
विज्ञान के प्रचलित जर्नल फाइटोथेरापी रिसर्च में 2008 में प्रकाशित एक क्लिनिकल रिपोर्ट के अनुसार, जिन महिलाओं को कद्दू के बीजों के तेल (2 मिली) का सेवन 12 हफ्तों तक कराया गया, उनमें रजोनिवृति पर होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं जैसे ब्लड प्रेशर बढ़ना, HDL कोलेस्ट्रॉल का बढ़ना, हार्मोन की कमी होना आदि में काफी सुधार देखा गया। इसके अलावा, रजोनिवृति पर हृदयविकारों और रक्त प्रवाह से जुड़ी अन्य समस्याओं में कद्दू के बीजों से प्राप्त तेल को बहुत कारगर बताया गया है।
9. प्रोस्टेट वृद्धि :
टेस्टोस्टेरोन प्रेरित प्रोस्टेट वृद्धि को रोकने के लिए कद्दू के बीजों को काफी कारगर माना जाता है। यूरोलोजिया इंटरनेशनालिस नाम की जर्नल में 2008 में छपी एक शोध रिपोर्ट के अनुसार, कद्दू के बीजों के तेल से प्रोस्टेट को बढ़ने से कम किया जा सकता है। माना जाता है कि प्रोस्टेट ग्रंथी की वृद्दि से परेशान रोगी को प्रतिदिन कम से कम 4-5 ग्राम बीजों का सेवन जरूर करना चाहिए।
10. पेट के कीड़े :
शोध के अनुसार, इन बीजों को चबाए जाने और निगलने से पेट और छोटी आंत के परजीवियों का नाश हो जाता है और आदिवासी भी यही मानते हैं कि पेट के कीड़ों को मार गिराने के लिए कद्दू के बीज बेहद असरकारक होते हैं।
स्रोत :http://www.bhaskar.com/news/LIF-HNB-10-health-benefits-of-pumpkin-seeds-4758617-PHO.html?seq=10
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--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!

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सभी के स्वस्थ एवं सुदीर्घ जीवन की कामना के साथ-मेरे प्यारे और दुलारे तीन बच्चों की ममतामयी अद्वितीय माँ (मम्मी) जो दुखियों, जरूतमंदों और मूक जानवरों तक पर निश्छल प्यार लुटाने वाली एवं अति सामान्य जीवन जीने की आदी महिला थी! वह पाक कला में निपुण, उदार हृदया मितव्ययी गृहणी थी! मेरी ऐसी स्वर्गीय पत्नी "जानकी मीणा" की कभी न भुलाई जा सकने वाली असंख्य हृदयस्पर्शी यादों को चिरस्थायी बनाये रखते हुए इस ब्लॉग को आज दि. 08.08.12 को फिर से पाठकों के समक्ष समर्पित कर रहा हूँ!-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'

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इलाज लाक्षणिक जानकारी लाभ लिंग लिंग प्रवेश लिसोड़ा लीकोरिया लीवर लीवर-Liver लू-hot wind लैंगिक लोनिया लौकी लौंग की चाय ल्युकोरिया ल्यूकोरिया ल्यूज योनी वजन वज़न वजन कम वजन बढाएं-Weight Increase वन/जंगली तुलसी वनौषधियाँ वमन वमन विकृति-Vomiting Distortion वसा वात वात श्लैष्मिक ज्वर वात-Rheumatism वायरल वायरल फीवर वायरल बुखार-Viral Fever वासना विटामिन विधारा वियाग्रा-Viagra विरह वेदना विलायती नीम विष विष हरनी विषखपरा वीर्य वीर्य वृद्धि वीर्यपात वृक्कों (गुर्दों) में पथरी-Renal (Kidney) Stone वृक्ष वैज्ञानिक वैधानिक वैवाहिक जीवन वैवाहिक जीवन-Marital वैवाहिक रिश्ते वैश्यावृति व्यायाम शंखपुष्पी शरपुंखा शराब शरीफा-सीताफल-Custard apple शर्करा शलगम-Beets शल्यक्रिया शहद शहद-Honey शारीरिक शिथिलता शीघ्र पतन शीघ्रपतन शुक्राणु-Sperm शुक्राणू शुगर शोथ श्योनाक श्रेष्ठतर श्वास श्वांस श्वेत प्रदर श्वेत प्रदर-Leucorrhea श्वेतप्रदर षड़यंत्र संकुचन संकोच संक्रमण संखाहुली संतरा-Orange संतान संतुष्टि सत्यानाशी सदा सुहागन सदाफूली सदाबहार सदाबहार चूर्ण सनबर्न सफ़ेद दाग सफेद पानी सब्जि सब्जियां-Vegetables सब्जी 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