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कौंच


By अभिषेक बहुगुणा | 1 December 2015

इस का वानस्पतिक नाम मुकुना प्रूरिएंस है और यह फाबेसी परिवार का पौधा है. बात हो रही है कौंच की जो भारत के लोकप्रिय औषधीय पौधों में से एक है. यह भारत के मैदानी इलाकों में झाडि़यों के रूप में फैली हुई होती है. इस झाड़ीय पौधे की पत्तियां नीचे की ओर झुकी होती हैं. इस के भूरे रेशमी डंठल 6.3 से 11.3 सेंटीमीटर लंबे होते हैं. इस में झुके हुए गहरे बैगनी रंग के फूलों के गुच्छे निकलते हैं, जिस में करीब 6 से 30 तक फूल होते हैं. इस पौधे में सेम जैसी फलियां लगती हैं. कौंच के पौधे के सभी भागों में औषधीय गुण होते हैं. इस की पत्तियों, बीजों व शाखाओं का इस्तेमाल दवा के तौर पर किया जाता है. ज्यादातर कौंच का इस्तेमाल लंबे समय तक सेक्स की कूवत बरकरार रखने के लिए किया जता है.

जिन खिलाडि़यों की मांसपेशियों में खिंचाव आ जाता है, उन के लिए भी कौंच का इस्तेमाल मुफीद होता है. इस के बीजों के इस्तेमाल से याद रखने की कूवत बढ़ती है. वजन बढ़ाने में भी कौंच का इस्तेमाल कारगर साबित होता है. इस के अलावा गैस, दस्त, खांसी, गठिया दर्द, मधुमेह, टीबी व मासिकधर्म की तकलीफों के इलाज के लिए भी कौंच के बीजों का इस्तेमाल किया जाता है.

कौंच के बीजों में निम्न रोगों को दूर करने की कूवत होती है:
  1. * दर्द व पेट की तकलीफें * मधुमेह
  2. * बुखार * खांसी, * सूजन
  3. * गुर्दे की पत्थरी * गैस की समस्या
  4. * नपुंसकता * नसों की कमजोरी
1. यौन संबंधी परेशानियां : कौंच को कपिकच्छू और कैवांच वगैरह नामों से भी जाना जाता है. आयुर्वेद में इसे यौन कूवत बढ़ाने वाली दवा के रूप में इस्तेमाल किया जाता है. सेक्स कूवत बढ़ाने के लिए इस के बीज बेहद कारगर होते हैं. कौंच का इस्तेमाल मर्दों व औरतों की हमबिस्तरी की ख्वाहिश में इजाफा करता है. यह नपुंसकता दूर करने में मदद करती है.
2. कौंच के बीजों का इस्तेमाल : कौंच के बीजों का इस्तेमाल करने के लिए उन को दूध या पानी में उबाल कर उन के ऊपर का छिलका हटा देना चाहिए. इस के बाद बीजों को सुखा कर बारीक चूर्ण बना लेना चाहिए. इस चूर्ण की 5 ग्राम मात्रा को मिश्री व दूध में मिला कर रोज सुबहशाम इस्तेमाल करने से मर्दों के अंग का ढीलापन और शीघ्रपतन का रोग दूर होता है. कौंच के बीजों के साथ सफेदमूसली और अश्वगंधा के बीजों को बराबर मात्रा में मिश्री के साथ मिला कर बारीक चूर्ण तैयार कर के सुबहशाम 1 चम्मच मात्रा दूध के साथ लेने से मर्दों की तमाम सेक्स संबंधी दिक्कतों को दूर किया जा सकता है. कौंच के बीजों के साथ शतावरी, गोखरू, तालमखाना, अतिबला और नागबला को एक साथ बराबर मात्रा में मिला कर बारीक चूर्ण तैयार कर के इस चूर्ण को मिश्री मिला कर 2-2 चम्मच चूर्ण सुबह और शाम के वक्त दूध के साथ रोज लेने से मर्द के अंग की कूवत बढ़ती है. सोने से 1 घंटा पहले इस चूर्ण को कुनकुने दूध के साथ लेने से जिस्मानी संबंध बेहतर होते हैं.

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10-10 ग्राम धाय के फूल, नागबला, शतावरी, तुलसी के बीज, आंवला, तालमखाना व बोलबीज, 5-5 ग्राम अश्वगंधा, जायफल व रुद्रंतीफल, 20-20 ग्राम सफेदमूसली, कौंच के बीज व त्रिफला और 15-15 ग्राम त्रिकुट व गोखरू को एकसाथ मिला कर चूर्ण बना लें. इस के बाद इस मिश्रण को 16 गुना पानी में मिला कर उबालने पर जब पानी सूख जाए तो उस में 10 ग्राम भांगरे का रस मिला कर दोबारा उबालें और जब मिश्रण गाढ़ा हो जाए तो इसे आंच से उतारें और ठंडा कर के कपड़े से अच्छी तरह मसल कर छान लें और सुखा कर व पीस कर चूर्ण बनाएं. इस चूर्ण में 20 ग्राम शोधी हुई शिलाजीत, 1 ग्राम बसंतकुसूमार रस और 5 ग्राम स्वर्ण बंग मिलाएं. इस मिश्रण की आधा ग्राम मात्रा शहद के साथ मिला कर सुबहशाम चाट कर उस के बाद दूध पीना बेहद फायदेमंद होता है. इस औषधि के सेवन से मर्द के बल में इजाफा होता है. इस औषधि को लेने के दौरान तेज मिर्चमसाले वाली, तली हुई व खट्टी चीजें नहीं खानी चाहिए.

कौंच के बीजों के साथ उड़द, गेहूं, चावल, शक्कर, तालमखाना और विदारीकंद को बराबर मात्रा में ले कर बारीक पीस कर दूध मिला कर आटे की तरह गूंध कर इस की छोटीछोटी पूडि़यां बना कर गाय के घी में तलें. इन पूडि़यों को दूध के साथ खाने से भी काफी फायदा होता है. 100-100 ग्राम कौंच के बीज, शतावरी, उड़द, खजूर, मुनक्का, दाख व सिंघाड़ा को मोटा पीस कर 1 लीटर दूध व 1 लीटर पानी मिला कर हलकी आग में पकाएं. गाढ़ा होने पर आंच से उतारें और ठंडा होने पर छानें. इस में 300-300 ग्राम चीनी, वंशलोचन का बारीक चूर्ण और घी मिलाएं. इस मिश्रण की 50 ग्राम मात्रा में शहद मिला कर रोजाना सुबहशाम खाने से बल बढ़ता है.

कौंच के अन्य लाभ: कौंच तनाव और चिंता को दूर करती है. यह खासतौर पर यौन ग्रंथियों को मजबूती प्रदान करती है. यह तंत्रिकातंत्र के लिए एक खास पोषक तत्त्व के रूप में काम करती है.

तंत्रिकातंत्र संबंधी परेशानियां : कौंच तंत्रिकातंत्र संबंधी परेशानियों के लिए एक खास दवा के रूप में इस्तेमाल की जाती है. यह पार्किसंस रोग में भी इस्तेमाल की जाती है.

कोलेस्ट्राल और ब्लडशुगर : कौंच कोलेस्ट्राल कम करने की एक खास दवा है, साथ ही यह ब्लडशुगर के स्तर को सही करने के लिए फायदेमंद दवा है. इस के अलावा यह एक मानसिक टानिक के रूप में भी कारगर होती है.
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  1. * कौंच के बीज, सफेद मूसली और अश्वगंधा के बीजों को बराबर मात्रा में मिश्री के साथ मिलाकर बारीक चूर्ण तैयार कर लें। इस चूर्ण में से एक चम्मच चूर्ण सुबह और शाम दूध के साथ लेने से लिंग का ढीलापन, शीघ्रपतन और वीर्य की कमी होना जैसे रोग जल्दी दूर हो जाते हैं।
  2. * मूसली के लगभग 10 ग्राम चूर्ण को 250 ग्राम गाय के दूध में मिलाकर अच्छी तरह से उबालकर किसी मिट्टी के बर्तन में रख दें। इस दूध में रोजाना सुबह और शाम पिसी हुई मिश्री मिलाकर सेवन करने से लिंग का ढीलापन, शीघ्रपतन और संभोग क्रिया की इच्छा न करना, वीर्य की कमी होना आदि रोगों में बहुत लाभ मिलता है।
  3. * कौंच को कपिकच्छू और कैवांच आदि के नामों से भी जाना जाता है। संभोग करने की शक्ति को बढ़ाने के लिए इसके बीज बहुत लाभकारी रहते हैं। इसके बीजों का सेवन करने से वीर्य की बढ़ोत्तरी होती है, संभोग करने की इच्छा तेज होती है और शीघ्रपतन रोग में लाभ होता है। इसके बीजों का उपयोग करने के लिए बीजों को दूध या पानी में उबालकर उनके ऊपर का छिलका हटा देना चाहिए। इसके बाद बीजों को सुखाकर बारीक चूर्ण बना लेना चाहिए। इस चूर्ण को लगभग 5-5 ग्राम की मात्रा में सुबह और शाम मिश्री के साथ दूध में मिलाकर सेवन करने से लिंग का ढीलापन और शीघ्रपतन का रोग दूर होता है।
  4. * एक किलो इमली के बीजों को तीन-चार दिनों तक पानी में भीगे पड़े रहने दें। इसके पश्चात उन बीजों को पानी से निकालकर और छिलके उतारकर ठीक तरह से पीस लें। इसमें इससे दो गुना पुराने गुड़ को मिलाकर इसे आटे की तरह गूंथ लें। फिर इसकी बेर के बराबर गोलियां बना लें। सेक्स क्रिया करने के दो घंटे पहले इसे दूध के साथ इस्तेमाल करें। इस तरह का उपाय सेक्स करने की ताकत को और अधिक मजबूत बनाता है।
  5. * शतावरी, गोखरू, तालमखाना, कौंच के बीज, अतिबला और नागबला को एक साथ मिलाकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण में बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर 2-2 चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम दूध के साथ रोजाना सेवन करने से स्तंभन शक्ति तेज होती है और शीघ्रपतन के रोग में लाभ होता है। रात को संभोग क्रिया करने से 1 घंटा पहले इस चूर्ण को गुनगुने दूध के साथ सेवन करने से संभोग क्रिया सफलतापूर्वक संपन्न होती है। वीर्य का पतला होना, यौन-दुर्बलता और विवाह के बाद शीघ्रपतन होना जैसे रोगों में इसका सेवन बहुत लाभकारी रहता है।
  6. * मोचरस, कौंच के बीज, शतावरी, तालमखाना को 100-100 ग्राम की मात्रा में लेकर लगभग 400 ग्राम मिश्री के साथ मिलाकर बारीक चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को 2-2 चम्मच की मात्रा में सुबह और शाम दूध के साथ सेवन करने से बुढ़ापे में भी संभोग क्रिया का पूरा मजा लिया जा सकता है। इस योग को लगभग 2-3 महीने तक सेवन करना लाभकारी रहता है।
  7. * लगभग 6 चम्मच अदरक का रस, 8 चम्मच सफेद प्याज का रस, 2 चम्मच देशी घी और 4 चम्मच शहद को एक साथ मिलाकर किसी साफ कांच के बर्तन में रख लें। इस योग को रोजाना 4 चम्मच की मात्रा में सुबह खाली पेट सेवन करना चाहिए। इसको लगातार 2 महीने तक सेवन करने से स्नायविक दुर्बलता, शिथिलता, लिंग का ढीलापन, कमजोरी आदि दूर हो जाते हैं।
  8. * बबूल की कच्ची पत्तियां, कच्ची फलियां और गोंद को बराबर मात्रा में मिलाकर बारीक चूर्ण बना लें और इनमें इतनी ही मात्रा में मिश्री मिलाकर किसी डिब्बे आदि में रख लें। इस चूर्ण को नियमित रूप से 2 महीने तक 2-2 चम्मच की मात्रा में दूध के साथ सेवन करने से वीर्य की वृद्धि होती है और स्तंभन शक्ति बढ़ती है। इसके अलावा यह योग शीघ्रपतन और स्वप्नदोष जैसै रोगों में बहुत लाभकारी रहता है।
  9. * सफेद मूसली के चूर्ण और मुलहठी के चूर्ण को बराबर की मात्रा में मिला लें। इस चूर्ण को 1 चम्मच की मात्रा में सुबह और शाम शुद्ध घी के साथ मिलाकर चाट लें और ऊपर से गर्म दूध पी लें। इस योग को नियमित सेवन करने से धातु वृद्धि होती है, नपुंसकता दूर होती है और शरीर पुष्ट और शक्तिशाली बनता है।
  10. * 10-10 ग्राम धाय के फूल, नागबला, शतावरी, तुलसी के बीज, आंवला, तालमखाना और बोलबीज, 5-5 ग्राम अश्वगंध, जायफल और रूदन्तीफल, 20-20 ग्राम सफेद मूसली, कौंच के बीज और त्रिफला तथा 15-15 ग्राम त्रिकटु, गोखरू को एक साथ जौकुट करके चूर्ण बना लें। इसके बाद इस मिश्रण के चूर्ण को लगभग 16 गुना पानी में मिलाकर उबालने के लिए रख दें। उबलने पर जब पानी जल जाए तो इसमें 10 ग्राम भांगरे का रस मिलाकर दुबारा से उबाल लें। जब यह पानी गाढ़ा सा हो जाए तो इसे उतारकर ठंडा करके कपड़े से अच्छी तरह मसलकर छान लें और सुखाकर तथा पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण में 20 ग्राम शोधी हुई शिलाजीत, 1 ग्राम बसन्तकुसूमाकर रस और 5 ग्राम स्वर्ण बंग को मिला लें। इस औषधि को आधा ग्राम की मात्रा में शहद के साथ मिलाकर सुबह-शाम चाटकर ऊपर से गर्म दूध पी लें। 
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MONDAY, 22 AUGUST 2016
कपिकच्छू/कौंच/केवांछ (Cowhage) : 
कपिकच्छुभृंश वृष्या मधुरा बृंहणी गुरुः।
तिक्ता वातहरी बल्या कफपिस्रानाशिनी।।
तद्विजं वातशमन स्मृतं वाजीकरं परम्।।भा. प्र.।।
➡ कपिकच्छू/कौंच/केवांछ (Cowhage) :
सामान्य नाम 
लैटिन नाम : mucuna pruricus 
अंग्रेजी : cowhage.
हिन्दी : कौच ,केवांछ।
मराठी : कुहिलेवे बीज।
गुजरती : कवचाना बीज ।
बंगला : आलाकुशी ।

➡ कपिकच्छू/कौंच/केवांछ का सामान्य परिचय :
कौंच लता जाति की वनस्पति है । जो सूक्ष्म में रोमो से युक्त होती । यह वर्षांत में उत्पन्न होती है यह गांव के बाहर बागों एवं जंगलों में किसी झाड़ी या वृक्ष पर फैली हुई होती है इसका पत्र विषम एवं सेम के पत्तों के समान प्रत्येक पत्र दंड पर 3 की संख्या में होते हैं पुष्पा नीलाभ है रक्त वर्ण के या श्वेत वर्ण के जूतों में होते हैं । इसकी फली 2 से 3 इंच लम्बी 1/2इंच चौड़ी तथा इसके दोनों ओर के अग्रभाग एक दूसरे के विपरीत दिशा में मोटे होते हैं। यह भूरे रंग की सूक्ष्म सघन व मजबूत रोमो से आवृत होती है। यह रोम शरीर में लगने पर अति तीव्र खुजली के साथ दाह एवं शोथ उत्पन्न हो जाता है। बीज प्रत्येक फली में 5 से 6 काले चमकीले रंग के बीज होते है। www.allayurvedic.org
कौंच के पौधे के सभी भागों में औषधीय गुण होते हैं. इसकी पत्तियों, बीजों व शाखाओं का इस्तेमाल दवा के तौर पर किया जाता है. ज्यादातर कौंच का इस्तेमाल लंबे समय तक सेक्स की पॉवर बरकरार रखने के लिए किया जता है। कौंच के बीज वियग्रा से भी 10 गुना ज्यादा शक्तिशाली होते है, चाहे लिंग कमजोर, वीर्य पतला, नपुंसकता या शीघ्रपतन हो सभी का रामबाण उपाय कौंच है।
जिन खिलाडि़यों की मांसपेशियों में खिंचाव आ जाता?है, उन के लिए भी कौंच का इस्तेमाल मुफीद होता है. इस के बीजों के इस्तेमाल से याद रखने की कूवत बढ़ती है. वजन बढ़ाने में भी कौंच का इस्तेमाल कारगर साबित होता है. इस के अलावा गैस, दस्त, खांसी, गठिया दर्द, मधुमेह, टीबी व मासिकधर्म की तकलीफों के इलाज के लिए भी कौंच के बीजों का इस्तेमाल किया जाता है.
➡ कौंच के बीजों में निम्न रोगों को दूर करने की कूवत होती है :
दर्द
पेट की तकलीफें
मधुमेह
बुखार
खांसी
सूजन
गुर्दे की पत्थरी
गैस की समस्या
नपुंसकता
लिंग और नसों की कमजोरी
यौन संबंधी परेशानियां
कौंच को कपिकच्छू और कैवांच वगैरह नामों से भी जाना जाता है. आयुर्वेद में इसे यौन कूवत बढ़ाने वाली दवा के रूप में इस्तेमाल किया जाता है. सेक्स कूवत बढ़ाने के लिए इस के बीज बेहद कारगर होते हैं. कौंच का इस्तेमाल मर्दों व औरतों की हमबिस्तरी की ख्वाहिश में इजाफा करता है. यह नपुंसकता दूर करने में मदद करती है। www.allayurvedic.org
रासायनिक संगठन : इसमें राल, टेनिन,वसा एवम मैगनीज रहता है।
गुण : गुरु ,स्निग्ध।
रस : मधुर , तिक्त।
वीर्य : उष्ण । 
विपाक : मधुर ।
➡ कपिकच्छू/कौंच/केवांछ का विभिन्न रोगों में प्रयोग :
कौंच के बीज पोस्टिक उत्तेजक वाजीकरण एवं वातशामक होते हैं केंचुए को निकालने के लिए इसके रोमो को वृत मधु या गुड़ के साथ गोली बनाकर खिलाते है। इसके पश्चात विरेचक औषधि अवश्य देते हैं जिससे केंचुए निकल जाते है।
केवांच के पत्ते को कालीमिर्च के साथ पीसकर पिलाने से उदर कृमि नष्ट होते है। धातु पुष्टि के लिए बीज चोरों ने तालमखाने के चूर्ण को मिश्री मिलाकर ताजे दूध के साथ देते हैं, इसकी जड़ों को मुख में रखकर चूसने से शीघ्रपतन नहीं होता हैं। बीज चूर्ण व गोक्षुर चूर्ण दोनों समान भाग लेकर ठंड के साथ मिलाकर दूध से लेने से यह है, धातु पुष्ट करता हैं।
तीव्र ज्वर में मूल चूर्ण को शहद यहां गर्म जल से देने से दाह शांत होता है एवं ज्वार कम होता है। इसके जड़ का स्वरस या क्वाथ स्नायु दौर्बल्य अंगघात, अर्दित आदि वात रोग में लाभ करता है। www.allayurvedic.org
कौंच के बीज, सफेद मूसली और अश्वगंधा शीघ्रपतन के देसी इलाज के लिए कौंच के बीज, सफेद मूसली और अश्वगंधा के बीजों को बराबर मात्रा में मिश्री के साथ मिलाकर बारीक चूर्ण बना लें। फिर एक चम्मच चूर्ण सुबह और शाम एक कप दूध के साथ लेने से शीघ्रपतन और वीर्य की कमी जैसे रोग दूर हो जाते हैं।
कपिकच्छू/कौंच/केवांछ का उपयोगी भाग (प्रयोज्य अंग) : बीज, मूल एवं पत्र ।
बीज चूर्ण सेवन मात्रा : 2 से 6 ग्राम तथा रोम 250 मि. ग्राम की मात्रा में। मूल क्वाथ 5 से 10 तोला ।
आयुर्वेदीक स्टोर पर उपलब्ध विशिष्ठ योग : वानरी गुटिका, माषवलादि पाचन आदि ।
➡ कौंच के बीजों का इस्तेमाल : कौंच के बीजों का इस्तेमाल करने के लिए उन को दूध या पानी में उबाल कर उन के ऊपर का छिलका हटा देना चाहिए. इस के बाद बीजों को सुखा कर बारीक चूर्ण बना लेना चाहिए. इस चूर्ण की 5 ग्राम मात्रा को मिश्री व दूध में मिला कर रोज सुबहशाम इस्तेमाल करने से मर्दों के अंग का ढीलापन और शीघ्रपतन का रोग दूर होता है. कौंच के बीजों के साथ सफेदमूसली और अश्वगंधा के बीजों को बराबर मात्रा में मिश्री के साथ मिला कर बारीक चूर्ण तैयार कर के सुबह-शाम 1 चम्मच मात्रा दूध के साथ लेने से मर्दों की तमाम सेक्स संबंधी दिक्कतों को दूर किया जा सकता है. कौंच के बीजों के साथ शतावरी, गोखरू, तालमखाना, अतिबला और नागबला को एकसाथ बराबर मात्रा में मिला कर बारीक चूर्ण तैयार कर के इस चूर्ण को मिश्री मिला कर 2-2 चम्मच चूर्ण सुबह और शाम के वक्त दूध के साथ रोज लेने से मर्द के अंग की कूवत बढ़ती है. सोने से 1 घंटा पहले इस चूर्ण को कुनकुने दूध के साथ लेने से जिस्मानी संबंध बेहतर होते हैं।

कौंच के बीजों के साथ उड़द, गेहूं, चावल, शक्कर, तालमखाना और विदारीकंद को बराबर मात्रा में ले कर बारीक पीस कर दूध मिला कर आटे की तरह गूंध कर इस की छोटीछोटी पूडि़यां बना कर गाय के घी में तलें. इन पूडि़यों को दूध के साथ खाने से भी काफी फायदा होता है. 100-100 ग्राम कौंच के बीज, शतावरी, उड़द, खजूर, मुनक्का, दाख व सिंघाड़ा को मोटा पीस कर 1 लीटर दूध व 1 लीटर पानी मिला कर हलकी आग में पकाएं. गाढ़ा होने पर आंच से उतारें और ठंडा होने पर छानें. इस में 300-300 ग्राम चीनी, वंशलोचन का बारीक चूर्ण और घी मिलाएं. इस मिश्रण की 50 ग्राम मात्रा में शहद मिला कर रोजाना सुबहशाम खाने से बल बढ़ता है। 

10-10 ग्राम धाय के फूल, नागबला, शतावरी, तुलसी के बीज, आंवला, तालमखाना व बोलबीज, 5-5 ग्राम अश्वगंधा, जायफल व रुद्रंतीफल, 20-20 ग्राम सफेदमूसली, कौंच के बीज व त्रिफला और 15-15 ग्राम त्रिकुट व गोखरू को एकसाथ मिला कर चूर्ण बना लें. इस के बाद इस मिश्रण को 16 गुना पानी में मिला कर उबालने पर जब पानी सूख जाए तो उस में 10 ग्राम भांगरे का रस मिला कर दोबारा उबालें और जब मिश्रण गाढ़ा हो जाए तो इसे आंच से उतारें और ठंडा कर के कपड़े से अच्छी तरह मसल कर छान लें और सुखा कर व पीस कर चूर्ण बनाएं. इस चूर्ण में 20 ग्राम शोधी हुई शिलाजीत, 1 ग्राम बसंतकुसूमार रस और 5 ग्राम स्वर्ण बंग मिलाएं. इस मिश्रण की आधा ग्राम मात्रा शहद के साथ मिला कर सुबहशाम चाट कर उस के बाद दूध पीना बेहद फायदेमंद होता है. इस औषधि के सेवन से मर्द के बल में इजाफा होता है. इस औषधि को लेने के दौरान तेज मिर्चमसाले वाली, तली हुई व खट्टी चीजें नहीं खानी चाहिए।
➡ कौंच के अन्य लाभ : 
कौंच तनाव और चिंता को दूर करती है. यह खासतौर पर यौन ग्रंथियों को मजबूती प्रदान करती है. यह तंत्रिकातंत्र के लिए एक खास पोषक तत्त्व के रूप में काम करती है।
तंत्रिकातंत्र संबंधी परेशानियां : कौंच तंत्रिकातंत्र संबंधी परेशानियों के लिए एक खास दवा के रूप में इस्तेमाल की जाती है. यह पार्किसंस रोग में भी इस्तेमाल की जाती है।
कोलेस्ट्राल और ब्लडशुगर : कौंच कोलेस्ट्राल कम करने की एक खास दवा है, साथ ही यह ब्लडशुगर के स्तर को सही करने के लिए फायदेमंद दवा है. इस के अलावा यह एक मानसिक टानिक के रूप में भी कारगर होती है।
http://www.allayurvedic.org/2016/08/Kaunch-ke-bij-ke-adbhut-fayde.html
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सभी यौन समस्याओं का रामबाण उपाय है कौंच के बीज … जानिए इसके अन्य लाभ
August 25, 2016

चाहे लिंग कमजोर हो या वीर्य पतला हो पतला या फिर नपुंसकता या शीघ्रपतन हो ….सभी यौन समस्याओं का रामबाण उपाय है कौंच के बीज … जानिए इसके अन्य फायदे

आयुर्वेद में कौंच के बीज औषधीय गुणों से भरपूर मने गए हैं।ज्यादातर कौंच के बीज का और और इसके पौधे के अन्य अंगों का इस्तेमाल लंबे समय तक सेक्स की इच्छा को बरकरार रखने के लिए किया जता है। जिन खिलाडि़यों की मांसपेशियों में खिंचाव आ जाता है, उनके लिए भी कौंच का इस्तेमाल बेहद लाभकारी होता है। इस के बीजों के इस्तेमाल से याद रखने की क्षमता भी बढ़ती है। वजन बढ़ाने के लिए भी कौंच का इस्तेमाल कारगर साबित होता है। इस के अलावा गैस,  दस्त, खांसी, गठिया का दर्द, मधुमेह, टीबी व मासिक धर्म की समस्याओं के उपचार के लिए भी कौंच के बीजों का इस्तेमाल किया जाता है। आइये जानते हैं इसके अन्य लाभों को।

जानिये क्या हैं कौंच के बीज के गुण : कौंच पुष्टिकारक, वीर्यवर्धक, भारी, वातनाशक, मधुर, बलदायक और कफ, पित्त तथा रुधिरविकार नाशक होता है। इसके बीज वात नाशक और अत्यंत वाजीकारक होते हैं। कौंच प्रजनन अंगों के लिए सबसे अच्छा टॉनिक और कामोत्तेजक के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।

कैसे करें कौंच के बीजों का इस्तेमाल… जानिए
शीघ्रपतन की समस्या दूर करे : कौंच के बीजों को दूध या पानी में उबाल कर उनके ऊपर का छिलका उतार लें। अब बीजों को सुखा कर बारीक चूर्ण बना लें। इस चूर्ण की 5 ग्राम मात्रा को मिश्री व दूध में मिला कर रोज सुबह और शाम खाने से मर्दों के अंग का ढीलापन और शीघ्रपतन का रोग दूर होता है।

नपुंसकता दोष दूर करे: कौंच के बीजों के साथ सफेद मूसली और अश्वगंधा के बीजों को बराबर मात्रा में मिश्री के साथ मिला कर बारीक चूर्ण बना लें। इस चूर्ण का सुबहशाम दूध के साथ 1 चम्मच लेने से मर्दों की सही यौन संबंधी परेशानियां दूर हो जाती है।

संभोग शक्ति बढ़ाये: कौंच के बीजों के साथ तालमखाना, शतावरी, गोखरू, अतिबला और नागबला को एक साथ बराबर मात्रा में मिला कर बारीक चूर्ण तैयार कर लें। इस चूर्ण में मिश्री मिलाकर दूध के साथ 2-2 चम्मच चूर्ण सुबह और शाम लेने से मर्द के यौन अंग की शक्ति बढती है। सोने से 1 घंटा पहले इस चूर्ण को कुनकुने दूध के साथ लेने से जिस्मानी संबंध बेहतर होते हैं।

वीर्य गाढ़ा करे: कौंच के बीजों के साथ उड़द, गेहूं, चावल, शक्कर, तालमखाना और विदारीकंद को बराबर मात्रा में मिला कर बारीक पीस कर इसमें दूध मिला कर आटे की तरह गूंध लें। इस की छोटी-छोटी पूडि़यां बना कर गाय के घी में तल लें। इन पूडि़यों को दूध के साथ खाने से भी वीर्य गाढ़ा करने में काफी फायदा होता है।

कौंच के अन्य लाभ :
तनाव दूर करे: कौंच के बीज तनाव और चिंता को दूर करने में बेहद सफल औषधि का काम करते हैं।

कोलेस्ट्राल और ब्लडशुगर: कौंच कोलेस्ट्राल कम करने के लिए एक सफल दवा है। साथ ही यह ब्लडशुगर के स्तर को नियंत्रित करने के लिए फायदेमंद दवा है।
स्रोत : http://ayursudha.in/?p=1211
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कौंच
Saturday, 3 October 2015
परिचय : कौंच की बेल होती है और यह भारत के गर्म स्थानों पर अधिक पाई जाती है। यह एक प्रकार की जंगली औषधि है। कौंच की बेल जून-जुलाई के महीने में पैदा होकर सितम्बर-नवम्बर में फूलती है। इसकी बेल झाड़ियों और पेड़ों पर फैलती है। इसके पत्ते 6 से 9 इंच लंबे व 3 पत्तों में होते हैं। इसके फूल एक से डेढ इंच लंबे, नीले या बैंगनी रंग के होते हैं। इसकी फली 2 से 4 इंच लंबी और लगभग आधी इंच चौड़ी होती है। फलिया गुच्छों में लगती है जिस पर सुनहरे व बारीक रोंए होते हैं। इसकी फली के रोंए त्वचा पर लगने से तेज खुजली होती है जिसे खुजलाने से जलन पैदा होती है। इसके फली के अन्दर बीज होते हैं और इसका छिलका सख्त होता है। इसके बीजों को ही औषधि के रूप में प्रयोग किया जाता है।

आयुर्वेद के अनुसार: कौंच की गिरी स्वाद में कड़वी,मीठी, तीखी, गर्म और मन व मस्तिष्क को शांत करने वाली होती है। इसका फल मीठा होता है। यह धातु को बढ़ाने वाला, बलदायक, पाचनशक्ति को बढ़ाने वाला, वात, पित्त, कफ और खून की खराबी को दूर करने वाला होता है। इसमें यौन रोग को दूर करने की शक्ति होती है। यह दर्द, कमजोरी, पेशाब की बीमारी,दिल की बीमारी, गर्भाशय की कमजोरी, आंखों की रोशनी, वात रोग, चेहरे की सुन्दरता, प्रदर रोग, प्रसूता रोग आदि में भी गुणकारी है। इसे महिला या पुरुष आराम से खा सकते हैं।

यूनानी चिकित्सकों के अनुसार: कौंच की गिरी तीसरे दर्जे की गर्म होती है। यह विरेचक, सेक्स पावर को बढ़ाता है। बिच्छू के जहर पर भी यह फायदेमंद होता है। बवासीर के रोगी को यह हानिकारक होता है।

वैज्ञानिकों के अनुसार: कौंच के बीजों का रासायनिक विश्लेषणों से पता चला है कि कौंच में विभिन्न प्रकार की विटामिन्स होते हैं।

कौंच में पाए जाने वाले तत्त्व व मात्रा: तत्त्वमात्रा प्रोटीन 25.03 प्रतिशत आर्द्रता 9.1 प्रतिशतरेशा 6.75 प्रतिशत खनिज 3.95 प्रतिशत फास्फोरसथोड़ी मात्रा में कैल्शियम थोड़ी मात्रा में लौहा थोड़ी मात्रा में मैंगनीज थोड़ी मात्रा में गंधक थोड़ी मात्रा मेंग्लुटाथायोन थोड़ी मात्रा में ग्लुकोसाइड थोड़ी मात्रा मेंलेसिथिन थोडी मात्रा में निकोटिन थोडी मात्रा मेंगैलिक ऐसिड थोड़ी मात्रा में।

विभिन्न भाषाओं में कौंच के नाम :
संस्कृत   कपिकच्छु, आत्मगुप्ता।
हिन्दी        केवांच, कौंच।
अंग्रेजी        काउहैज प्लांट।
बंगाली        आलंकुषी।
मराठी        कुहिलीवे बीज।
गुजरती   कोंचा।
तैलगी        पिप्ली अडूगु।
लैटिन        म्युकना प्रुरिटा।

मात्रा : कौंच के बीजों का चूर्ण 3 से 6 ग्राम और जड़ का काढ़ा 50-100 मिलीलीटर की मात्रा में प्रयोग किया जाता है।

विभिन्न रोगों में उपचार :
1. बिच्छू का डंक: मिट्टी के तेल या पानी में कौंच के बीज की गिरी को घिसकर डंक वाले स्थान पर लगाने से बिच्छू का जहर उतर जाता है।
2. घाव: कौंच के पत्तों को पीसकर घाव पर लेप करने से और पट्टी बांधने से घाव ठीक होता है।
3. लिंग का ढीलापन: कौंच की जड़ को अपने पेशाब में घिसकर लिंग पर लेप करने से लिंगा का ढीलापन दूर होता है।
4. श्वेत प्रदर: कौंच के बीजों की गिरी का आधा चम्मच चूर्ण एक चम्मच शहद के साथ मिलाकर प्रतिदिन सुबह-शाम सेवन करने लाभ श्वेत प्रदर रोग में लाभ मिलता है।
5. मूत्र रोग: कौंच के बीजों की गिरी का आधा चम्मच चूर्ण एक कप पानी के साथ दिन में 2 बार खाने से मूत्र रोग ठीक होता है।
6. बांझपन: कौंच के बीजों की गिरी और जड़ का चूर्ण बराबर मात्रा में मिलाकर 1-1 चम्मच की मात्रा में दिन में 3 बार कुछ सप्ताह तक सेवन करने से बांझपन दूर होता है।
7. बुखार: यदि कोई रोगी तेज बुखार से पीड़ित हो तो कौंच की जड़ का काढ़ा 1-1 कप की मात्रा में दिन में 2 से 3 बार पिलाएं। इससे बुखार में जल्दी आराम मिलता है।
8. नपुंसकता: कौंच के बीजों का चूर्ण, तालमखाना व मिश्री बराबर मात्रा में लेकर 3 ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन दूध के साथ खाने से नपुंसकता दूर होती है।कौंच के बीजों की गिरी और तालमखाने के बीज 25-25 ग्राम की मात्रा में लेकर पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण में 50 ग्राम मिश्री मिलाकर प्रतिदिन 2 चम्मच की मात्रा में दूध के साथ खाने से नपुंसकता दूर होती है।
9. जलोदर (पेट में पानी भरना): कौंच की जड़ को पीसकर लेप बनाकर कलाई पर बांधने से जलोदर रोग ठीक होता है और पेट का दर्द भी शांत होता है।
10. गिल्टी (ट्यूमर) : कौंच के बीजों को पानी में पीसकर दिन में 2 से 3 बार गिल्टी पर लेप करने से गिल्टी ठीक होती है।
11. वात रोग : कौंच के बीजों का खीर बनाकर खाने से वात रोग दूर होता है।
12. योनि का फैल जाना: कौंच की जड़ का काढ़ा बनाकर कुछ दिनों तक योनि को धोने से योनि सिकुड़ जाती है।

13. बेहोशी : कौंच की सूखी फली को बेहोश व्यक्ति के शरीर पर रगड़ने से बेहोशी दूर होती है। बेहोशी दूर होने पर गाय के घी से रोगी के शरीर की मालिश करें। इससे कौंच का जहर उतर जाता है।
14. उपदंश: कौंच के बीजों को पानी में पीसकर दिन में 2 से 3 बार लेप करने से उपदंश रोग ठीक होता है।
15. श्वास या दमा रोग: शहद व अदरक का रस 1-1 चम्मच और कौंच के बीजों की गिरी आधी चम्मच। इन सभी को एक साथ पीसकर चूर्ण बना लें और इसका सेवन सुबह-शाम करें। इससे दमा रोग में आराम मिलता है।
16. शरीर को शक्तिशाली बनाना: कौंच के बीज और गोखरू के चूर्ण को मिश्री के साथ मिलाकर दूध के साथ पीने से शारीरिक शक्ति बढ़ती है।कौंच के बीज और जड़ को समान मात्रा में लेकर इनको पीसकर चूर्ण बना लें और इसमें बराबर मात्रा में चीनी मिलाकर एक शीशी में भरकर रख लें। यह चूर्ण 10 ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन दूध के साथ लेने से शारीरिक शक्ति बढ़ती है।
स्रोत : http://gkworldak.blogspot.in/2015/10/blog-post.html
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वियग्रा से भी 10 गुना ज्यादा शक्तिशाली कौंच के बीज – Mardana Shakti kaunch seeds sey
कपिकच्छू/कौंच/केवांछ (Cowhage) :
कपिकच्छुभृंश वृष्या मधुरा बृंहणी गुरुः।
तिक्ता वातहरी बल्या कफपिस्रानाशिनी।।
तद्विजं वातशमन स्मृतं वाजीकरं परम्।। भा. प्र.।।

कपिकच्छू/कौंच/केवांछ (Cowhage) : सामान्य नाम : कौंच को कपिकच्छू और कैवांच वगैरह नामों से भी जाना जाता है. आयुर्वेद में इसे यौन कूवत बढ़ाने वाली दवा के रूप में इस्तेमाल किया जाता है. सेक्स कूवत बढ़ाने के लिए इस के बीज बेहद कारगर होते हैं. कौंच का इस्तेमाल मर्दों व औरतों की हमबिस्तरी की ख्वाहिश में इजाफा करता है. यह नपुंसकता दूर करने में मदद करती है।

रासायनिक संगठन : इसमें राल, टेनिन,वसा एवम मैगनीज रहता है।

गुण : गुरु ,स्निग्ध।
रस : मधुर , तिक्त।
वीर्य : उष्ण ।
विपाक : मधुर ।

1. कौंच के बीज पोस्टिक उत्तेजक वाजीकरण एवं वातशामक होते हैं केंचुए को निकालने के लिए इसके रोमो को वृत मधु या गुड़ के साथ गोली बनाकर खिलाते है। इसके पश्चात विरेचक औषधि अवश्य देते हैं जिससे केंचुए निकल जाते है।
2. केवांच के पत्ते को कालीमिर्च के साथ पीसकर पिलाने से उदर कृमि नष्ट होते है। धातु पुष्टि के लिए बीज चोरों ने तालमखाने के चूर्ण को मिश्री मिलाकर ताजे दूध के साथ देते हैं इसकी जड़ों को मुख में रखकर चूसने से शीघ्रपतन नहीं होता हैं। बीज चूर्ण व गोक्षुर चूर्ण दोनों समान भाग लेकर ठंड के साथ मिलाकर दूध से लेने से यह है धातु पुष्ट करता हैं।
3. तीव्र ज्वर में मूल चूर्ण को शहद यहां गर्म जल से देने से दाह शांत होता है एवं ज्वार कम होता है। इसके जड़ का स्वरस या क्वाथ स्नायु दौर्बल्य अंगघात ,अर्दित आदि वात रोग में लाभ करता है।
4. कौंच के बीज, सफेद मूसली और अश्वगंधा शीघ्रपतन के देसी इलाज के लिए कौंच के बीज, सफेद मूसली और अश्वगंधा के बीजों को बराबर मात्रा में मिश्री के साथ मिलाकर बारीक चूर्ण बना लें। फिर एक चम्मच चूर्ण सुबह और शाम एक कप दूध के साथ लेने से शीघ्रपतन और वीर्य की कमी जैसे रोग दूर हो जाते हैं।

कपिकच्छू/कौंच/केवांछ का उपयोगी भाग (प्रयोज्य अंग) : बीज, मूल एवं पत्र ।
बीज चूर्ण सेवन मात्रा : 2 से 6 ग्राम तथा रोम 250 मि. ग्राम की मात्रा में। मूल क्वाथ 5 से 10 तोला ।
आयुर्वेदीक स्टोर पर उपलब्ध विशिष्ठ योग : वानरी गुटिका, माषवलादि पाचन आदि ।

कौंच के बीजों का इस्तेमाल करने के लिए उन को दूध या पानी में उबाल कर उन के ऊपर का छिलका हटा देना चाहिए. इस के बाद बीजों को सुखा कर बारीक चूर्ण बना लेना चाहिए. इस चूर्ण की 5 ग्राम मात्रा को मिश्री व दूध में मिला कर रोज सुबहशाम इस्तेमाल करने से मर्दों के अंग का ढीलापन और शीघ्रपतन का रोग दूर होता है. कौंच के बीजों के साथ सफेदमूसली और अश्वगंधा के बीजों को बराबर मात्रा में मिश्री के साथ मिला कर बारीक चूर्ण तैयार कर के सुबहशाम 1 चम्मच मात्रा दूध के साथ लेने से मर्दों की तमाम सेक्स संबंधी दिक्कतों को दूर किया जा सकता है. कौंच के बीजों के साथ शतावरी, गोखरू, तालमखाना, अतिबला और नागबला को एकसाथ बराबर मात्रा में मिला कर बारीक चूर्ण तैयार कर के इस चूर्ण को मिश्री मिला कर 2-2 चम्मच चूर्ण सुबह और शाम के वक्त दूध के साथ रोज लेने से मर्द के अंग की कूवत बढ़ती है. सोने से 1 घंटा पहले इस चूर्ण को कुनकुने दूध के साथ लेने से जिस्मानी संबंध बेहतर होते हैं।
कौंच के बीजों के साथ उड़द, गेहूं, चावल, शक्कर, तालमखाना और विदारीकंद को बराबर मात्रा में ले कर बारीक पीस कर दूध मिला कर आटे की तरह गूंध कर इस की छोटीछोटी पूडि़यां बना कर गाय के घी में तलें. इन पूडि़यों को दूध के साथ खाने से भी काफी फायदा होता है. 100-100 ग्राम कौंच के बीज, शतावरी, उड़द, खजूर, मुनक्का, दाख व सिंघाड़ा को मोटा पीस कर 1 लीटर दूध व 1 लीटर पानी मिला कर हलकी आग में पकाएं. गाढ़ा होने पर आंच से उतारें और ठंडा होने पर छानें. इस में 300-300 ग्राम चीनी, वंशलोचन का बारीक चूर्ण और घी मिलाएं. इस मिश्रण की 50 ग्राम मात्रा में शहद मिला कर रोजाना सुबहशाम खाने से बल बढ़ता है।
10-10 ग्राम धाय के फूल, नागबला, शतावरी, तुलसी के बीज, आंवला, तालमखाना व बोलबीज, 5-5 ग्राम अश्वगंधा, जायफल व रुद्रंतीफल, 20-20 ग्राम सफेदमूसली, कौंच के बीज व त्रिफला और 15-15 ग्राम त्रिकुट व गोखरू को एकसाथ मिला कर चूर्ण बना लें. इस के बाद इस मिश्रण को 16 गुना पानी में मिला कर उबालने पर जब पानी सूख जाए तो उस में 10 ग्राम भांगरे का रस मिला कर दोबारा उबालें और जब मिश्रण गाढ़ा हो जाए तो इसे आंच से उतारें और ठंडा कर के कपड़े से अच्छी तरह मसल कर छान लें और सुखा कर व पीस कर चूर्ण बनाएं. इस चूर्ण में 20 ग्राम शोधी हुई शिलाजीत, 1 ग्राम बसंतकुसूमार रस और 5 ग्राम स्वर्ण बंग मिलाएं. इस मिश्रण की आधा ग्राम मात्रा शहद के साथ मिला कर सुबहशाम चाट कर उस के बाद दूध पीना बेहद फायदेमंद होता है. इस औषधि के सेवन से मर्द के बल में इजाफा होता है. इस औषधि को लेने के दौरान तेज मिर्चमसाले वाली, तली हुई व खट्टी चीजें नहीं खानी चाहिए।
कौंच के अन्य लाभ :
कौंच तनाव और चिंता को दूर करती है. यह खासतौर पर यौन ग्रंथियों को मजबूती प्रदान करती है. यह तंत्रिकातंत्र के लिए एक खास पोषक तत्त्व के रूप में काम करती है।
तंत्रिकातंत्र संबंधी परेशानियां : कौंच तंत्रिकातंत्र संबंधी परेशानियों के लिए एक खास दवा के रूप में इस्तेमाल की जाती है. यह पार्किसंस रोग में भी इस्तेमाल की जाती है।
कोलेस्ट्राल और ब्लडशुगर : कौंच कोलेस्ट्राल कम करने की एक खास दवा है, साथ ही यह ब्लडशुगर के स्तर को सही करने के लिए फायदेमंद दवा है. इस के अलावा यह एक मानसिक टानिक के रूप में भी कारगर होती है।
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--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!

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सभी के स्वस्थ एवं सुदीर्घ जीवन की कामना के साथ-मेरे प्यारे और दुलारे तीन बच्चों की ममतामयी अद्वितीय माँ (मम्मी) जो दुखियों, जरूतमंदों और मूक जानवरों तक पर निश्छल प्यार लुटाने वाली एवं अति सामान्य जीवन जीने की आदी महिला थी! वह पाक कला में निपुण, उदार हृदया मितव्ययी गृहणी थी! मेरी ऐसी स्वर्गीय पत्नी "जानकी मीणा" की कभी न भुलाई जा सकने वाली असंख्य हृदयस्पर्शी यादों को चिरस्थायी बनाये रखते हुए इस ब्लॉग को आज दि. 08.08.12 को फिर से पाठकों के समक्ष समर्पित कर रहा हूँ!-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'

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जवासा-Alhag जहर जामुन का जूस जायफल जिगर जीरा जीवन रक्षक जीवनी शक्ति जुएं जुकाम जुदाई जुलाब जूएं जूस जूस-Juice जोड़ों के दर्द जोड़ों में दर्द जौ ज्यूस ज्योति ज्वर ज्वर-Fiver झाइयाँ झांईं झाड़-फूंक झुर्रियाँ झुर्रियां झुर्री झूठे दर्द टमाटर का रस टमाटर-Tomatoes टाइफाइड टाटबडंगा टायफायड टूटी हड्डी टॉन्सिल टोटला ट्यूमर ठंड ठंडापन ठेकेदार डॉक्टर डकार डकारें डायबिटीज डायरिया डिग्री फ़ारेनहाइट डिग्री सेल्सियस डिजिसेक्सुअल डिटॉक्सीफाई डिटॉक्सीफिकेशन डिनर डिब्बाबंद भोजन डिलेवरी डीकामाली डीगामाली डेंगू डेंगू-Dengue डॉ. निरंकुश डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' डॉ. मीणा ढकार ढीलापन ढीली योनि तकलीफ का सही इलाज तंत्र-मंत्र तम्बाकू तरबूज-Watermelon तलाक ताकत तिल तिल्ली तुंबा तुंबी तुम्बा तुलसी तेल त्रिदोषनाशक त्रिफला त्वचा त्वचा रोग थकान थाईरायड थायरायड-Thyroid थायरॉइड दण्डनीय अपराध दंत वेदना दन्तकृमि दन्तरोग दमा दर वेदना दरार दर्द दर्द निवारक दर्द निवारक दवा दर्दनाक दस्त दही दाग-धब्बे-Stains-Spots दाढ़ दांत दांतो में कैविटी-Teeth Cavity दाद दाम्पत्य दाम्पत्य विवाद सलाहकार दाम्पत्य-Conjugal दाल दालचीनी दालें दिमांग दिल दीर्घायु दु:खी दुर्गंध दुर्बलता दुष्प्रभाव दुष्प्रभावरहित दूध दूध वृद्धि दूधी दूधी-Milk Hedge दृष्टिदोष दो मन द्रोणपुष्पी द्रोणपुष्पी-Leucas Cephalotes धड़कन धनिया बीज धनिया-Coriander धमासा धात धातु धातु पतन धार्मिक धूम्रपान छोड़ना चाहते हैं? धैर्यहीन नज़ला नपुंसक नपुंसकता नाइट्रिक एसिड नाक नाखून नागबला नागरमोथा नाडी हिंगु नाड़ी हिंगु (डिकामाली) नामर्दी नारकीय पीड़ा नारियल नाश्ता निमोनिया निम्न रक्तचाप निम्बू नियासिन निराश निरोगधाम निर्गुण्डी निर्गुन्डी निष्कपट स्नेह निष्ठा निसोरा नींद नींबू नींबू-Lemon नीम-azadirachta indica नुस्खे नुस्खे-Tips नेगड़ नेत्र रोग नेुचरल नैतिक नॉर्मल डिलेवरी नोनिया नौसादर न्युमोनिया-Pneumonia न्यूरॉन्स पक्षघात पंचकर्म पढ़ने में मन लगेगा पंतजलि पत्तागोभी-CABBAGE पत्थर फोड़ी पत्थरचट्टा पत्नी पथरी पदार्थ पनीर पपीता पपीता-CARICA PAPPYA पमाड परदेशी लांगड़ी परम्परागत चिकित्सा परहेज पराठा परामर्श परिस्थिति पवाड़ पवाँर पाइल्स पाक-कला पाचक पाचन पाचनतंत्र पाचनशक्ति पाठक संख्या 16 लाख पार पाठक संख्या पंद्रह लाख पायरिया पारदर्शिता पारिजात पालक 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बलात्कार बवासीर बहरापन बहुनिया बहुमूत्रता- बांझपन बादाम-Almonds बादाम. बाल बाल झड़ना बाल झडऩा-Hair Falling बिना सिजेरियन मां बनें बिवाई बीजबंद बीड़ी बीमारियों के अनुसार औषधियां बीमारी बील बुखार बूंद-बूंद पेशाब बेल बेली बैक्टीरिया बॉयोकैमी ब्र​ह्मदण्डी ब्रेस्ट ग्रोथ ब्लड प्रेशर ब्लैक मेलिंग ब्लॉकेज भगंदर भगंदर-Fistula-in-ano भगनासा भगन्दर भगोष्ठ भड़भांड़ भय भविष्य भस्मक रोग भावनात्मक भुई आंवला-Phyllanthus Niruri भूई आमला भूई आंवला भूख भूख बढ़ाने भूमि भूमि आंवला भोजनलीवर मकोय मकोय-Soleanum nigrum मक्का मक्का के भुट्टे मंजीठ मटर-PEA मंद दृष्टि मंदाग्नि मदार मधुमेह मधुमेह-Diabetes मन्दाग्नि-Dyspepsia मरुआ मरोड़ मर्द मर्दाना मलाशय मलेरिया मलेरिया (Malaria) मवाद मसाले मस्तिष्क मस्से मस्से-WARTS महंगा इलाज महत्वपूर्ण लेख महाबला माइग्रेन माईग्रेन माईंड सैट माजूफल मानवव्यवहार मानसिक मानसिक लक्षण मानसिक-Mental मानिसक तनाव-Mental Stress मायोपिया मासिक मासिक-धर्म मासिकधर्म मासिकस्राव माहवारी मिनरल मिर्गी मिर्च-Chili मीठा खाने की आदत मुख मैथुन-ओरल सेक्स-Oral Sex मुख्य लक्षण मुधमेह मुलहठी मुलेठी 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