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मुलहठी, मुलेठी

मुलहठी से विभिन्न रोगों में उपचार
January 26, 2015
सिद्ध आयुर्वेदिक
        *मुलहठी से विभिन्न रोगों में उपचार*
घाव (जख्म): 
मुलहठी पेट में बन रहे एसिड (तेजाब) को नष्ट करके अल्सर के रोग से बचाती है।
पेट के घाव की यह सफल औषधि है।
मुलहठी खाने से कोई दुष्प्रभाव नहीं होता है। इसका सेवन लंबे समय तक नहीं करना चाहिए। बीच-बीच में बंद कर दें।
मुलहठी को पीसकर घी के साथ चूर्ण के रूप में हर तरह के घावों पर बांधने से शीघ्र लाभ होता है।
चाकू आदि के घाव के कारण उत्पन्न तेज दर्द रोगी को बहुत कष्ट देता है। यह दर्द मुलहठी के चूर्ण को घी में मिलाकर थोड़ा गर्म करके लगाने से शीघ्र ही शांत होता है।

कफ व खांसी:
खांसी होने पर यदि बलगम मीठा व सूखा होता है तो बार-बार खांसने पर बड़ी मुश्किल से निकल पाता है। जब तक गले से बलगम नहीं निकल जाता है, तब तक रोगी खांसता ही रहता है। इसके लिए 2 कप पानी में 5 ग्राम मुलहठी का चूर्ण डालकर इतना उबाल लें कि पानी आधा कप बचे। इस पानी को आधा सुबह और आधा शाम को सोने से पहले पी लें। 3 से 4 दिन तक प्रयोग करने से कफ पतला होकर बड़ी आसानी से निकल जाता है और खांसी, दमा के रोगी को बड़ी राहत मिलती है। यक्ष्मा (टी.बी.) की खांसी में मुलहठी चूसने से लाभ होता है।
2 ग्राम मुलहठी पाउडर, 2 ग्राम आंवला पाउडर, 2 चम्मच शहद मिलाकर सुबह-शाम खाने से खांसी में लाभ होता है।

नपुंसकता (नामर्दी):
रोजाना मुलहठी चूसने से नपुंसकता नष्ट हो जाती है।
10 ग्राम मुलहठी का पिसा हुआ चूर्ण, घी और शहद में मिलाकर चाटने से और ऊपर से मिश्री मिले गर्म-गर्म दूध को पीने से नपुंसकता का रोग कुछ ही समय में कम हो जाता है।
10-10 ग्राम मुलहठी, विदारीकंद, तज, लौंग, गोखरू, गिलोय और मूसली को लेकर पीसकर चूर्ण बना लें। इसमें से आधा चम्मच चूर्ण लगातार 40 दिनों तक सेवन करने से नपुंसकता का रोग दूर हो जाता है।

दाह (जलन):
मुलहठी और लालचंदन पानी के साथ घिसकर शरीर पर लेप करने से जलन शांत होती है।

अम्लपित्त (एसिडिटिज):
खाना खाने के बाद यदि खट्टी डकारें आती हैं, जलन होती है तो मुलहठी चूसने से लाभ होता है। भोजन से पहले मुलहठी के 3 छोटे-छोटे टुकड़े 15 मिनट तक चूसें, फिर भोजन करें।
मुलहठी का चूर्ण 1 से 4 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम सेवन करने से आमाशय की अम्लपित्त (एसिडिटीज) समाप्त हो जाती है और पेट दर्द मिट जाता है।

कब्ज़, आंव:
125 ग्राम पिसी मुलहठी, 3 चम्मच पिसी सोंठ, 2 चम्मच पिसे गुलाब के सूखे फूल को 1 गिलास पानी में उबालें। जब यह ठंडा हो जाए तो इसे छानकर सोते समय रोजाना पीने से पेट में जमा आंव (एक तरह का चिकना सफेद मल) बाहर निकल जाता है।
5 ग्राम मुलहठी को गुनगुने दूध के साथ सोने से पहले पीने से सुबह शौच साफ आता है और कब्ज दूर हो जाती है।

पेशाब के रोग:
पेशाब में जलन, पेशाब रुक-रुककर आना, अधिक आना, घाव और खुजली और पेशाब सम्बंधी समस्त बीमारियों में मुलहठी का प्रयोग लाभदायक है। इसे खाना खाने के बाद रोजाना 4 बार हर 2 घंटे के उंतराल पर चूसते रहना लाभकारी होता है। इसे बच्चे भी आसानी से बिना हिचक ले सकते हैं।
1 चम्मच मुलहठी का चूर्ण 1 कप दूध के साथ लेने से पेशाब की जलन दूर हो जाती है।

हृदय शक्तिवर्धक (शक्ति को बढ़ाने वाला):
ज्यादातर शिराओं और धमनियों पर गलत खान-पान, गलत आदतें और काम का अधिक भार पड़ने से कमजोरी आ जाती है, इससे हृदय को हानि पहुंचती है। इस कारण से अनिंद्रा (नींद का न आना), हाई और लो ब्लड प्रेशर जैसे रोग हो जाते हैं। ऐसे में मुलहठी का सेवन काफी लाभदायक होता है।

फेफड़ों के रोग:
मुलहठी फेफड़ों की सूजन, गले में खराश, सूजन, सूखी कफ वाली खांसी में लाभ करती है। मुलहठी फेफड़ों को बल देती है। अत: फेफडे़ सम्बंधी रोगों में यह लाभकारी है। इसको पान में डालकर खाने से लाभ होता है। टी.बी. (क्षय) रोग में भी इसका काढ़ा बनाकर उपयोग किया जाता है।

विष (ज़हर):
जहर पी लेने पर शीघ्र ही उल्टी करानी चाहिए। तालु को उंगुली से छूने से तुरन्त उल्टी हो जाती है। यदि उल्टी नहीं आये तो एक गिलास पानी में 2 चम्मच मुलहठी और 2 चम्मच मिश्री को पानी में डालकर उबाल लें। आधा पानी शेष बचने पर छानकर पिलायें। इससे उल्टी होकर जहर बाहर निकल आता है।

मांसपेशियों का दर्द:
मुलहठी स्नायु (नर्वस स्टिम) संस्थान की कमजोरी को दूर करने के साथ मांसपेशियों का दर्द और ऐंठन को भी दूर करती है। मांसपेशियों के दर्द में मुलहठी के साथ शतावरी और अश्वगंधा को समान रूप से मिलाकर लें। स्नायु दुर्बलता में रोजाना एक बार जटामांसी और मुलहठी का काढ़ा बनाकर लेना चाहिए।

गंजापन, रूसी (ऐलोपीका):
मुलहठी का पाउडर, दूध और थोड़ी-सी केसर, इन तीनों का पेस्ट बनाकर नियमित रूप से बाल आने तक सिर पर लगायें। इससे बालों का झड़ना और बालों की रूसी आदि में लाभ मिलता है।

बाजीकरण (कामोद्दीपन):
मुलहठी का चूर्ण शहद के साथ सेवन करने से शुक्र वृद्धि और बाजीकरण होता है।
सिद्ध आयुर्वेदिक
See : https://sidhayuvadic7.wordpress.com/2015/01/26/%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%B2%E0%A4%B9%E0%A4%A0%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%AD%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A8-%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%97%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%AE/
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जानिए मुलहठी के 6 अनमोल गुण

1. अगर आप सूखी खांसी या गले की समस्याओं से परेशान हैं, तो मुलहठी आपके काम की चीज है। काली मिर्च के साथ पीस कर मुलहठी का सेवन, सूखी खांसी में तो लाभकारी है ही, साथ ही इसे चूसने या उबालकर सेवन करने से गले की खराश, दर्द आदि में भी लाभ होता है।
2. मुलहठी चेहरे की खूबसूरती को बढ़ाने का काम करती है। इसे घिसकर लगाने पर चेहरे के दाग और मुंहासे ठीक हो जाते हैं, साथ ही यह आपकी त्वचा को जवा बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। मुलहठी रक्त को भी शुद्ध करती है, जिससे त्वचा की समस्याएं नहीं होती।
3. दूध के साथ मुलहठी का सेवन शरीर की ताकत में वृद्धि करता है। इसके अलावा घी व शहद के साथ मुलहठी का प्रयोग करने से हृदय से संबंधित समस्याएं नहीं होती। 
4. मुंह में छाले हो जाने की स्थिति में मुलहठी चूसना, इसके पानी से कुल्ला करना और उसे पीना बहुत जल्दी छालों से राहत देता है। साथ ही मुलहठी आवाज को मधुर और सुरीली बनाने के लिए भी उपयोग की जाती है। 
5. पेट के अल्सर में मुलहटी का सेवन ठंडक देने के साथ ही लाभप्रद होता है। आंत की टीबी होने की स्थिति में भी मुलहठी फायदेमंद उपाय है। 
6. त्वचा या शरीर में कहीं जल जाने पर भी मुलहठी के चूर्ण और मक्खन का लेप एक कारगर उपाय है, साथ ही यह आंखों की रौशनी में भी वृद्धि करती है। 
See : http://hindi.webdunia.com/health-care/benefits-of-mulethi-115070600013_3.html
By: PurnimaPublished: Friday, April 11, 2014, 14:04 [IST]

मुलहठी एक प्रसिद्ध और सर्वसुलभ जड़ी है। असली मुलेठी अंदर से पीली, रेशेदार एवं हल्की गंधवाली होती है। यह सूखने पर अम्ल जैसे स्वाद की हो जाती है। यह स्‍वाद में शक्‍कर से भी मीठी होती है। मुलेठी बड़ी ही गुणकारी औषधि के रूप में उपयोग की जाती है। मुलेठी गले की खराश, खांसी, उदरशूल क्षयरोग, श्‍वासनली की सूजन तथा मिरगी आदि के इलाज में उपयोगी है। मुलेठी का सेवन आँखों के लिए भी लाभकारी है। इसमें जीवाणुरोधी क्षमता पाई जाती है। यह शरीर के अन्‍दरूनी चोटों में भी लाभदायक होता है। भारत में इसे पान आदि में डालकर प्रयोग किया जाता है।
मुलेठी या मुलहठी पान में भी डाल कर खाई जाती है। इसे मधुमेह के रोग को ठीक करने के लिये भी प्रयोग किया जाता है। आयुर्वेद के अनुसार मुलेठी अपने गुणों के कारण ही बढ़े हुए तीनों दोषों वात, कफ और पित्त को शांत करती है। कोई भी समस्या न हो तो भी कभी-कभी मुलेठी का सेवन कर लेना चाहिए आँतों के अल्सर, कैंसर का खतरा कम हो जाता है तथा पाचनक्रिया भी एकदम ठीक रहती है। सेहत और दिमाग बनाए मजबूत बादाम का दूध
आइये जानते हैं मुलेठी के स्‍वास्‍थ्‍य लाभ के बारे में थोड़ा और।

पित्‍त दूर करे
यह ठंडी प्रकृति की होती है और पित्त का नाश करती है।


सूखी खांसी में लाभदायक
मुलेठी को काली-मिर्च के साथ खाने से कफ ढीला होता है। सूखी खांसी आने पर मुलेठी खाने से फायदा होता है। इससे खांसी तथा गले की सूजन ठीक होती है।


गले में खराश
गले में खराश के लिए भी मुलेठी का प्रयोग किया जाता है।



महिलाओं के लिए बहुत फायदेमंद है
मुलेठी का एक ग्राम चूर्ण नियमित सेवन करने से वे अपनी सुंदरता को लंबे समय तक बनाये रख सकती हैं।















मासिक सम्बन्धी रोग
लगभग एक महीने तक, आधा चम्मच मुलेठी का चूर्ण सुबह-शाम शहद के साथ चाटने से मासिक सम्बन्धी सभी रोग दूर होते है।


फोड़े हो जाने पर
फोड़े होने पर मुलेठी का लेप लगाने से जल्दी ठीक हो जाते है।



ताकत बढ़ाए
रोज़ 6 ग्रा. मुलेठी चूर्ण , 30 मि.ली. दूध के साथ पिने से शरीर में ताकत आती है।


दिल के रोग से बचाए
लगभग 4 ग्रा. मुलेठी का चूर्ण घी या शहद के साथ लेने से ह्रदय रोगों में लाभ होता है।


मुंह के छालों से राहत
इसके चूर्ण को मुंह के छालों पर लगाने से आराम मिलता है।


खून बढाए
इसके आधा ग्राम रोजाना सेवन से खून में वृद्धि होती है।


जल जाने पर
जलने पर मुलेठी और चन्दन के लेप से शीतलता मिलती है.


पेट का घाव भरने के लिये
मुलेठी की जड़ पेट के घावों को समाप्‍त करती है, इससे पेट के घाव जल्‍दी भर जाते हैं। पेट के घाव होने पर मुलेठी की जड़ का चूर्ण इस्‍तेमाल करना चाहिए।


पेट के अल्‍सर के लिए फायदेमंद है
इससे न केवल गैस्ट्रिक अल्सर वरन छोटी आंत के प्रारम्भिक भाग ड्यूओडनल अल्सर में भी पूरी तरह से फायदा करती है। जब मुलेठी का चूर्ण ड्यूओडनल अल्सर के अपच, हाइपर एसिडिटी आदि पर लाभदायक प्रभाव डालता है। साथ ही अल्सर के घावों को भी तेजी से भरता है।


टीबी रोग में फायदेमंद
मुलेठी आंतों की टीबी के लिए भी फायदेमंद है।


आंखों की रौशनी बढ़ाए
मुलेठी के चूर्ण से आँखों की शक्ति भी बढ़ती है सुबह तीन या चार ग्राम खाना चाहिये।

See : http://hindi.boldsky.com/health/diet-fitness/2014/15-medicinal-uses-liquorice-or-mulethi-005480.html
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मुलहठी से विभिन्न रोगों में उपचार

घाव (जख्म) : 

  • मुलहठी पेट में बन रहे एसिड (तेजाब) को नष्ट करके अल्सर के रोग से बचाती है।
  • पेट के घाव की यह सफल औषधि है।
  • मुलहठी खाने से कोई दुष्प्रभाव नहीं होता है। इसका सेवन लंबे समय तक नहीं करना चाहिए। बीच-बीच में बंद कर दें।
  • मुलहठी को पीसकर घी के साथ चूर्ण के रूप में हर तरह के घावों पर बांधने से शीघ्र लाभ होता है।
  • चाकू आदि के घाव के कारण उत्पन्न तेज दर्द रोगी को बहुत कष्ट देता है। यह दर्द मुलहठी के चूर्ण को घी में मिलाकर थोड़ा गर्म करके लगाने से शीघ्र ही शांत होता है।
कफ व खांसी :

  • खांसी होने पर यदि बलगम मीठा व सूखा होता है तो बार-बार खांसने पर बड़ी मुश्किल से निकल पाता है। जब तक गले से बलगम नहीं निकल जाता है, तब तक रोगी खांसता ही रहता है। इसके लिए 2 कप पानी में 5 ग्राम मुलहठी का चूर्ण डालकर इतना उबाल लें कि पानी आधा कप बचे। इस पानी को आधा सुबह और आधा शाम को सोने से पहले पी लें। 3 से 4 दिन तक प्रयोग करने से कफ पतला होकर बड़ी आसानी से निकल जाता है और खांसी, दमा के रोगी को बड़ी राहत मिलती है। यक्ष्मा (टी.बी.) की खांसी में मुलहठी चूसने से लाभ होता है।
  • 2 ग्राम मुलहठी पाउडर, 2 ग्राम आंवला पाउडर, 2 चम्मच शहद मिलाकर सुबह-शाम खाने से खांसी में लाभ होता है।
नपुंसकता (नामर्दी) :

  • रोजाना मुलहठी चूसने से नपुंसकता नष्ट हो जाती है।
  • 10 ग्राम मुलहठी का पिसा हुआ चूर्ण, घी और शहद में मिलाकर चाटने से और ऊपर से मिश्री मिले गर्म-गर्म दूध को पीने से नपुंसकता का रोग कुछ ही समय में कम हो जाता है।
  • 10-10 ग्राम मुलहठी, विदारीकंद, तज, लौंग, गोखरू, गिलोय और मूसली को लेकर पीसकर चूर्ण बना लें। इसमें से आधा चम्मच चूर्ण लगातार 40 दिनों तक सेवन करने से नपुंसकता का रोग दूर हो जाता है।
दाह (जलन) : मुलहठी और लालचंदन पानी के साथ घिसकर शरीर पर लेप करने से जलन शांत होती है।
अम्लपित्त (एसिडिटिज) :

  • खाना खाने के बाद यदि खट्टी डकारें आती हैं, जलन होती है तो मुलहठी चूसने से लाभ होता है। भोजन से पहले मुलहठी के 3 छोटे-छोटे टुकड़े 15 मिनट तक चूसें, फिर भोजन करें।
  • मुलहठी का चूर्ण 1 से 4 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम सेवन करने से आमाशय की अम्लपित्त (एसिडिटीज) समाप्त हो जाती है और पेट दर्द मिट जाता है।
  • कब्ज़, आंव :
  • 125 ग्राम पिसी मुलहठी, 3 चम्मच पिसी सोंठ, 2 चम्मच पिसे गुलाब के सूखे फूल को 1 गिलास पानी में उबालें। जब यह ठंडा हो जाए तो इसे छानकर सोते समय रोजाना पीने से पेट में जमा आंव (एक तरह का चिकना सफेद मल) बाहर निकल जाता है।
  • 5 ग्राम मुलहठी को गुनगुने दूध के साथ सोने से पहले पीने से सुबह शौच साफ आता है और कब्ज दूर हो जाती है।
पेशाब के रोग :

  • पेशाब में जलन, पेशाब रुक-रुककर आना, अधिक आना, घाव और खुजली और पेशाब सम्बंधी समस्त बीमारियों में मुलहठी का प्रयोग लाभदायक है। इसे खाना खाने के बाद रोजाना 4 बार हर 2 घंटे के उंतराल पर चूसते रहना लाभकारी होता है। इसे बच्चे भी आसानी से बिना हिचक ले सकते हैं।
  • 1 चम्मच मुलहठी का चूर्ण 1 कप दूध के साथ लेने से पेशाब की जलन दूर हो जाती है।
हृदय शक्तिवर्धक (शक्ति को बढ़ाने वाला) : ज्यादातर शिराओं और धमनियों पर गलत खान-पान, गलत आदतें और काम का अधिक भार पड़ने से कमजोरी आ जाती है, इससे हृदय को हानि पहुंचती है। इस कारण से अनिंद्रा (नींद का न आना), हाई और लोब्लड प्रेशर जैसे रोग हो जाते हैं। ऐसे में मुलहठी का सेवन काफी लाभदायक होता है।
फेफड़ों के रोग : मुलहठी फेफड़ों की सूजन, गले में खराश, सूजन, सूखी कफ वाली खांसी में लाभ करती है। मुलहठी फेफड़ों को बल देती है। अत: फेफडे़ सम्बंधी रोगों में यह लाभकारी है। इसको पान में डालकर खाने से लाभ होता है। टी.बी. (क्षय) रोग में भी इसका काढ़ा बनाकर उपयोग किया जाता है।
विष (ज़हर) : जहर पी लेने पर शीघ्र ही उल्टी करानी चाहिए। तालु को उंगुली से छूने से तुरन्त उल्टी हो जाती है। यदि उल्टी नहीं आये तो एक गिलास पानी में 2 चम्मच मुलहठी और 2 चम्मच मिश्री को पानी में डालकर उबाल लें। आधा पानी शेष बचने पर छानकर पिलायें। इससे उल्टी होकर जहर बाहर निकल आता है।
मांसपेशियों का दर्द : मुलहठी स्नायु (नर्वस स्टिम) संस्थान की कमजोरी को दूर करने के साथ मांसपेशियों का दर्द और ऐंठन को भी दूर करती है। मांसपेशियों के दर्द में मुलहठी के साथ शतावरी और अश्वगंधा को समान रूप से मिलाकर लें। स्नायु दुर्बलता में रोजाना एक बार जटामांसी और मुलहठी का काढ़ा बनाकर लेना चाहिए।
गंजापन, रूसी (ऐलोपीका) : मुलहठी का पाउडर, दूध और थोड़ी-सी केसर, इन तीनों का पेस्ट बनाकर नियमित रूप से बाल आने तक सिर पर लगायें। इससे बालों का झड़ना और बालों की रूसी आदि में लाभ मिलता है।
बाजीकरण (कामोद्दीपन) : मुलहठी का चूर्ण शहद के साथ सेवन करने से शुक्र वृद्धि और बाजीकरण होता है।
Posted by Madhu Arora at 09:40
See : http://drinkeatright.blogspot.in/2014/12/blog-post_85.html
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मुलहेठी (Liquorice) : मुलेठी प्रचीन समय से ही सबसे अधिक इस्तेमाल की जाने वाली प्रसिद्ध औषधि है. इसे आप आसानी से अपने आसपास की किसी भी आयुर्वेदिक दुकान से खरीद सकते हो. ये अंदर से पिली और रेशेदार होती होती है, साथ ही इसमें से हल्की गंध भी आती है. इसका उपयोग अनेक रोगों से बचने के लिए किया जाता है. इसमें अनेक ऐसी जीवाणुरोधक क्षमता पायी जाती है जिसकी वजह से ये ना सिर्फ बाहरी बल्कि अंदरूनी चोंटों में भी आराम पहुँचती है. CLICK HERE TO KNOW मेथी में मौजूद पौषक तत्व और मेथी का बालों में घरेलू प्रयोग ... 
Mulethi ke Aushdhiya Gun

अगर आप इसकी जड़ का औषधि के रूप में इस्तेमाल कर रहे हो तो इसकी जड़ को उखाड़ने के 2 साल बाद तक इसका प्रयोग किया जा सकता है. ताज़ी मुलेठी में करीब 50 प्रतिशत के आसपास जलतत्व होता है. आपको बता दें कि मुलेठी का स्वाद शक्कर से भी कई गुना मीठा होता है इसका कारण इसमें पाया जाने वाला ग्लिसराइजिक एसिड होता है. ये बच्चो, बड़ों, स्त्री, पुरुषों और वृद्धो सबसे लिए गुणकारी होती है. मुलेठी के ऐसे ही कुछ गुणों के बारे मे आज हम चर्चा कर रहे है और आपको इससे स्वस्थ लाभ से परिचित करा रहे है.
मुलेठी के गुण ( Qualities of Liquorice ) :
1. अल्सर (Ulcer) :

  • अनेक शौध के बाद ये माना गया है कि अल्सर से होने वाले घावों को ठीक करने और उन्हें भरने में मुलेठी से बेहतर कोई औषधि नही है.
  • मुलेठी में पाया जाने वाला तत्व Carbenoxolone गैस्ट्रिक अल्सर तक को ठीक कर देता है. ये तत्व आसानी से पेट में घुल जाता है और पेट के रोगों को दूर करता है. 
  • कुछ लोग अपने अल्सर से मुक्ति पाने के लिए दवाइयां खाने लगते है जिससे उनके घावों से रक्त बहने लगता है और उनकी स्थित अधिक बिगड़ जाती है किन्तु मुलेठी का प्रयोग करने से उतकों को मजबूती मिलती है और उन्हें इस तरह की परिस्थिति से निजात मिलती है. CLICK HERE TO KNOW गुलर के आयुर्वेदिक फायदे और महत्व ... 
मुलेठी के औषधीय गुण :

  1. · आँखों को लाभ ( Beneficial for Eyes ) : मुलेठी में पायें जाने तत्व हानिकारक जीवाणु को बढ़ने से रोकते है और आँखों को लाभ पहुंचाते है. आँखों को लाभ देने के लिए आप प्रतिदिन 3 से 4 ग्राम मुलेठी का सेवन करें और खुद इस बात का आभास करें कि आपकी आँखों की शक्ति दिन प्रतिदिन बढती जा रही है.
  2. · खांसी जुखाम ( Cough and Cold ) : खांसी जुखाम सामान्य रोग है, इससे गले और छाती में बलगम जम जाता है और जलन महसूस होने लगती है. किन्तु अगर आप मुलेठी का प्रयोग शहद के साथ करते हो तो इससे जल्द ही आपको बलगम की समस्या से समाधान मिलता है. कुछ लोगो को सुखी खांसी भी हो जाती है, जिससे गले में सुजन की समस्या पैदा होती है. ऐसे रोगियों को काली मिर्च के साथ मुलेठी का इस्तेमाल करना चाहियें.
  3. · पित्त का नाश ( End Gall Problems ) : क्योकि मुलेठी की तासीर ठंडी होती है तो ये पित्त जैसी समस्या को भी दूर करने में लाभकारी सिद्ध होती है. अगर आपका अमाशय बढ़ा हुआ है तो ये उसे भी नियंत्रित करती है. कुछ लोगो के अमाशय में ही अल्सर हो जाता है. जिसकी वजह से उनके पित्त में वृद्धि होने लगती है. किन्तु अगर आप रोग मुलेठी को घी में पकाकर इस्तेमाल करते हो तो आपको इस रोग से भी जल्दी राहत मिलती है.
  4. · कब्ज भगायें ( Remove Constipation ) : अनियमित और विपरीत आहार का सेवन करने से अनेक लोगो में मोटापा, कब्ज और वायु रोग उत्पन्न होने लगे है. इनमे से प्रमुख है कब्ज. इस स्थिति में व्यक्ति को मल निकालने में अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ता है. इस रोग से बचने के लिए आप मुलेठी की सुखी जड़ें लें और उसे पीसकर उसका पाउडर बना लें. इस पाउडर को आप गुड और पानी दे साथ ग्रहण करें. आपको निश्चित रूप से कब्ज की समस्या से निजात मिल जाती है.
  5. · जोड़ों में दर्द ( Joint Pain ) : आजकल हर पीढ़ी चाहे वो युवा हो या वृद्ध जोड़ों और मांसपेशियों के दर्द से सभी परेशान है. इसका एक कारण आजकल की व्यस्त जीवन भी है. इस तरह के रोगों से बचने के लिए आप मुलेठी को रातभर के लिए पानी में भीगने दें और सुबह उस पानी से मुलेठी अलग कर उस पानी को पी जाएँ. ये उपाय आपके पुराने से पुराने जोड़ों और मांसपेशियों के दर्द को भी दूर कर देता है.
  6. · मानसिक रोग ( Cure Psychological Diseases ) : मुलेठी का प्रतिदिन लगभग 2 महीनो के इस्तेमाल से मानसिक रोगी के मानसिक संतुलन को भी ठीक किया जा सकता है. इसके लिए मुलेठी को सुखाकर उसका चूर्ण बनाएं और रोग आधा चम्मच की मात्रा में शहद के साथ मानसिक रोगी को दें.
  7. · महिलाओं की सुन्दरता ( Make Ladies Look Beautiful ) : महिलायें अपनी सुन्दरता के लिए अत्यंत चिंतित को जागरूक रहती है, यही नही वे खुद को आकर्षक और खुबसूरत दिखने के लिए अनेक तरह की दवाओं और क्रीम का इस्तेमाल भी करती है, किन्तु इसके लिए सबसे लाभकारी मुलेठी है जिसे ये घरेलू उपाय के रूप में आसानी से इस्तेमाल कर सकती है. मुलेठी चूर्ण का प्रतिदिन 1 ग्राम का सेवन ही इनकी त्वचा के रोगों को दूर इनके यौवन को बढ़ा सकता है, जिससे ये लम्बे समय तक खुबसूरत बनी रहती है.
  8. अगर आप इसको घिसकर अपने चेहरे पर लगती है तो इससे आपके चेहरे के सारे दाग धब्बे और किल मुंहासे ठीक हो जाते है. इसके अलावा ये आपके खून को साफ़ करके आपको फोड़े फुंसियों से भी निजात दिलाती है. 
जाने आप मुलहठी के कुछ उपयोग

  • · दमा रोग नियंत्रित ( Control Asthma and Respiratory Diseases) : अनेक लोग जो सांस की बिमारी या दमा जैसे रोगों से परेशान है उनके लिए मुलेठी एक संजीवनी के रूप में कार्य करती है इसमें पाया जाने वालाGlycyrrhizin दमा जैसी समस्या के लिए रामबाण तत्व माना जाता है. इसका इस्तेमाल करने के लिए आप इसकी जड़ को प्रतिदिन चबा सकते है. इसका रस आपके गले, श्वास नली, छाती और पेट सबके लिए फायदेमंद सिद्ध होता है. ये आपके छाती नसों में जमे विशुद्ध पदार्थों को दूर कर आपकी सांस लेने की समस्या से आपको निजात दिलाता है.
  • · लीवर की मजबूती ( Make Liver Strong ) : लीवर में कुछ फ्री रेडिकल डैमेज होते है जिसकी वजह से हेपाटाइटिस बी रोग लोगो को अपना शिकार बना लेता है. इस स्थिति में मुलेठी लीवर में निकलने वाले बाईल जूस के स्त्राव को तेज करने में सहायक होती है ताकि लीवर को इन रोगों से लड़ने की ताकत मिल सके. ये जूस शरीर और लीवर दोनों के लिए बहुत लाभकारी होता है. अनेक चिकित्सक भी लीवर के रोग में मुलेठी की ही सलाह देते है.
Mulethi Har Rog ki Davaa

  • · हृदय रोग ( Cure Heart Problems ) : मुलेठी की जड़ों में कोलेस्ट्रॉल और ट्रीगील्सेराइड की मात्रा अधिक होती है जिससे हृदय की रक्षा की जाती है. कोलेस्ट्रॉल से हृदय मजबूत होता है और हार्ट अटैक की संभावनायें खत्म होती है. इसके साथ ही ये खून को अधिक गाढ़ा होने से भी बचाती है ताकि रक्त संबंधी किसी भी तरह का विकार न उत्पन्न हो सके.
  • · बैक्टीरिया से लडती है ( Fight Unwanted Bacteria as An Anti Bacterial ) : कई बार हमे अंदरूनी चोट लग जाती है. जिसकी वजह से शरीर पर बैक्टीरिया का हमला बढ़ जाता है और किन्तु मुलेठी इन्ही बैक्टीरिया से लडती है और अन्य रोगों के उत्पन्न होने से हमे बचाती है. कुछ लोगो अपनी अंदरूनी चोटों को जल्द ठीक करने के लिए एंटीबायोटिक का इस्तेमाल करते है किन्तु इससे उनका लीवर या कितनी क्षतिग्रस्त हो जाता है. इस स्थिति में भी आप मुलेठी का इस्तेमाल कर सकते हो क्योकि मुलेठी को एक एंटी बैक्टीरियल के रूप में देखा जाता है और ये प्राकृतिक रूप से आपके शरीर की रक्षा करती है, जिससे आपके शरीर पर किसी तरह का साइड इफ़ेक्ट नही होता.
  • · मुंह के छाले ( Cold Sores ) : मुंह में छाले होने पर ना तो आप अच्छी तरह बोल ही पते है और ना ही कुछ खा पाते हो. किन्तु आप मुलेठी को आयुर्वेदिक तरीके से इस्तेमाल करते हुए इसको कुछ देर तक पानी में भिगों दें और इसके बाद मुलेठी अलग कर उस पानी से गरारे करें. कुछ दिनों तक आप ऐसा करें शीघ्र ही आपके मुंह के छाले खत्म हो जायेंगे.
Mulethi ke Anmol Fayde Laabh

  • · मासिक रोग ( Treat Menstruation ) : महिलाओं में बढ़ते मासिक रोग को ठीक करने में भी मुलेठी का इस्तेमाल किया जा सकता है. इसके लिए आप मुलेठी की जड़ों को पीस लें और उसका पाउडर तैयार कर लें. इस पाउडर को आप रोज शहद के साथ आधा चम्मच लें. 1 महीने तक इस उपाय को करें आपको निश्चित रूप से मासिक रोग से छुटकारा मिल जाएगा. 
  • · खून बढायें ( Increase Blood Level ) : शरीर में कमजोरी, शुष्कता और खून की कमी को दूर करने के लिए भी आप मुलेठी का इस्तेमाल कर सकते हो. इसका प्रतिदिन 1 ग्राम सेवन आपके खून में वृद्धि कर आपको लाभ पहुंचाता है और आपको हष्ट पुष्ट रखता है.
  • · जल जाने पर ( Cure Burning Part of Body ) : अगर आपके शरीर का कोई हिस्सा जल जाता है तो आप उस स्थान पर मुलेठी और चन्दन को पीसकर लगायें. इससे उस स्थान को ठंडक मिलती है और जल्द हे वो जगह ठीक भी हो जाती है.
मुलहेठी
इसके अलावा मुलेठी घावों को भरने, टीबी, बुद्धि को तेज करने, पाचन तंत्र को सदृढ़ करने, मिर्गी और क्षयरोग में भी फायदेमंद होती है.
ध्यान दें ( Notice ) : अगर आपको उच्च रक्तचाप है तो आप मुलेठी का सेवन ना करें. इसके अलावा जिनके रक्त में पोटैशियम की मात्रा कम है, सोडियम की मात्रा अधिक है, शरीर में सूजन है या कोई स्त्री प्रसव की अवस्था में है तो उन्हें भी मुलेठी का इस्तेमाल नही करना चाहियें.

मुलेठी

See : http://www.jagrantoday.com/2016/01/mulethi-ke-aushdhiya-gun-medicinal.html
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Sunday, 8 June 2014

एक बहुत ही उपयोगी एवं सुपरिचित जड़ी है मुलहठी, जिसे अन्य बोलचाल में मुलेठी भी कहते हैं। यह दो वर्ष तक खराब नहीं होती और विभिन्न नुस्खों में औषधि के रूप में प्रयोग की जाती है। 

मुलहठी के गुण : यह शीतल, शीतवीर्य, भारी, स्वादिष्ट, नेत्रों के लिए हितकारी, बल तथा वर्ण के लिए उत्तम, स्निग्ध, वीर्यवर्द्धक, केशों तथा स्वर के लिए गुणकारी है। यह पित्त, वात एवं रुधिर विकार, व्रण, शोथ, विष, वमन, तृषा, ग्लानि तथा क्षय को नष्ट करने वाली है। नेत्रों के लिए फायदेमन्द, त्रिदोषनाशक और घाव को भरने वाली है।

उपयोग : इसका उपयोग औषधियों में, मीठे जुलाब में, मीठी गोली, खांसी की गोली, बलवीर्यवर्द्धक नुस्खों में प्रायः होता ही है। आयुर्वेदिक योग मधुयष्टादि चूर्ण, यष्टादि क्वाथ, यष्टी मध्वादि तेल में इसका उपयोग होता है। इसे मुंह में रखकर चूसने से कफ आसानी से निकल जाता है, खांसी में आराम होता है, गले की खराश और स्वरभंग में लाभ होता है।

रासायनिक संघटन : इसमें एक प्रमुख तत्व ग्लिसीराइजिन पाया जाता है जो ग्लिसीराजिक एसिड के रूप में रहता है। यह शकर से 50 गुना मीठा होता है। इसमें एक स्टिरॉयड इस्ट्रोजन भी पाया जाता है। इसके अतिरिक्त ग्लूकोज, सुक्रोज, मैनाइट, स्टार्च, ऐस्पैरेजिन, तिक्त पदार्थ, राल, एक प्रकार का उड़नशील तेल और एक रंजक तत्व पाया जाता है

मुलहठी एक पौष्टिक औषधि : 

शरीर को पुष्ट, सुडौल और शक्तिशाली बनाने के लिए किसी भी आयु वाले स्त्री या पुरुष सुबह और रात को सोने से पहले मुलहठी का महीन पिसा हुआ चूर्ण 5 ग्राम, आधा चम्मच शुद्ध घी और डेढ़ चम्मच शहद में मिलाकर चाटें और ऊपर से मिश्री मिला ठंडा किया हुआ दूध घूंट-घूंट कर पिएं। यह प्रयोग कम से कम 40 दिन करें। बहुत लाभकारी है।

मासिक ऋतुस्राव में लाभकारी : 

मुलहठी का चूर्ण 5 ग्राम थोड़े शहद में मिलाकर चटनी जैसा बनाकर चाटने और ऊपर से मिश्री मिला ठंडा किया हुआ दूध घूंट-घूंटकर पीने से मासिक स्राव नियमित हो जाता है। इसे कम से कम 40 दिन तक सुबह-शाम पीना चाहिए और तले पदार्थ, गरम मसाला, लाल मिर्च, बेसन के पदार्थ, अंडा व मांस का सेवन बंद रखें। ऊष्ण प्रकृति के पदार्थों का सेवन न करें। यह महिलाओं के मासिक ऋतुस्राव की अनियमितता को दूर करती है। 

कफ प्रकोप व खांसी : 

5 ग्राम मुलहठी चूर्ण 2 कप पानी में डालकर इतना उबालें कि पानी आधा कप बचे। इस पानी को आधा सुबह और आधा शाम को सोने पहले पी लें। 3-4 दिन तक यह प्रयोग करना चाहिए। इस प्रयोग से कफ पतला हो जाता है और ढीला हो जाता है, जिससे बड़ी आसानी से निकल जाता है और खांसी व दमा के रोगी को बड़ी राहत मिलती है।

मुंह के छाले : 

मुलहठी का टुकड़ा मुंह में रखकर चूसने से मुंह के छाले ठीक होते हैं। इसके चूर्ण को थोड़े से शहद में मिलाकर चाटने से भी आराम होता है।

हिचकी : 

मुलहठी चूर्ण शहद के साथ चाटने से हिचकी आना बंद होता है। यह प्रयोग वात और पित्त का शमन भी करता है।

पेट दर्द : 

वात प्रकोप से होने वाले उदरशूल में ऊपर बताए गए मुलहठी के काढ़े का सेवन आधा सुबह और आधा शाम को करने से बादी का उदरशूल ठीक हो जाता है।


बलवीर्यवर्द्धक और सुडौल शरीर : 

मुलहठी का चूर्ण 5 ग्राम और 5 ग्राम अश्वगंधा चूर्ण थोड़े से घी में मिलाकर चाट लें और ऊपर से 1 गिलास मिश्री मिला मीठा दूध पिएं। लगातार 60 दिन तक यह प्रयोग सुबह-शाम करने से खूब बलवीर्य की वृद्धि होती है और शरीर पुष्ट व सुडौल होता है। 

दाह (जलन) : 

मुलहठी और लाल चंदन पानी के साथ घिसकर लेप करने से दाह (जलन) शांत होती है। केश एवं नेत्रों के लिए इसका प्रयोग अत्यंत लाभकारी सिद्ध होता है।
See : http://samirfilmeditor.blogspot.in/2014/06/blog-post_2106.html
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धर्मडेस्क . उज्जैन | Jan 31, 2012, 06:32 AM IST

कुछ लोगों को बदलते मौसम में सर्दी और खांसी जैसी समस्याएं ज्यादा परेशान करती हैं, ऐसे में कई बार कड़वी और नींद आने वाली दवाईयां लेने के बाद भी कफ से मुक्ति नहीं मिल पाती है। हमेशा कफ बना ही रहता है। अगर आपके साथ भी यही समस्या है तो हम आपको बताने जा रहे हैं मुलहठी के बारे में। मुलहठी या मुलेठी कफ की ऐसी मीठी दवा है जो कफ से जुड़ी हर समस्या का नाश कर देती है।
मुलहठी की पहचान- मुलहठी रेशेदार,गन्धयुक्त और बहुत ही उपयोगी होती है। आमतौर पर लोग इसे मीठी लकड़ी के नाम से जानते हैं। भारत में इसे मुलहठी या मुलेठी के नाम से जाना जाता है। मुलहठी ही एक ऐसी वस्तु है, जिसका सेवन किसी भी मौसम में किया जा सकता है। पनवाड़ी इसे पान में डालकर देता है। मुलहठी का प्रयोग मधुमेह की औषधि बनाने में किया जाता है। मुलहठी की एक से डेढ़ मीटर ऊंची बेल होती है और इमली जैसे छोटे-छोटे पत्ते होते हैं। इन बेलों पर बैंगनी रंग के फूल लगते हैं इसकी जड़ें जमीन के अंदर फैली होती हैं, जिनका औषधि के लिए उपयोग किया जाता है। मुलहठी स्वाद में मधुर, शीतल, पचने में भारी, स्निग्ध और शरीर को बल देने वाली होती है।
लाभ- इसके ऊपर बताए गए गुणों के कारण ही यह बढ़े हुए तीनों दोषों वात, कफ और पित्त को शांत करती है। कफ से गला, नाक, छाती में जलन होने पर मुलहठी को शहद में मिलाकर चाटने से बहुत फायदा होता है। बड़ों के लिए मुलहठी के चूर्ण का इस्तेमाल कर सकते हैं। शिशुओं के लिए मुलहठी के जड़ को पत्थर पर पानी के साथ 6-7 बार घिसकर शहद या दूध में मिलाकर दिया जा सकता है। मुलहठी मिलाकर पकाए गया घी इस्तेमाल करने से अल्सर मिटता है। बच्चों के लिए मुलहठी विशेष रूप से फायदेमंद होती है। अगर किसी बच्चे को पेट में गैस के कारण शाम के वक्त पेट में दर्द होता है। 
उस समय मुलहठी को पत्थर पर घिसकर पानी या दूध के साथ पिलाने से पेट दर्द शांत हो जाता है। इसकी जड़ को पत्थर पर पानी के साथ 6-7 बार घिसकर देना चाहिए ये स्वाद में मीठी होती है। मुलहठी बुद्धि को भी तेज करती है। इसलिए छोटे बच्चों के लिए इसका उपयोग नियमित रूप से कर सकते हैं। मुलहटी कफ की दुश्मन है दमा, टीबी एवं आवाज बदल जाना आदि फेफड़ों की बीमारियों में मुलहठी का एक छोटा टुकड़ा मुंह में रखकर चबाने से भी फायदा होता है। खांसी में मुलहठी को शहद में मिलाकर चाटने से बहुत लाभ होता है।
See :http://religion.bhaskar.com/news/yoga-sweet-medicine-the-ayurvedic-herb-unique-to-cure-every-disease-of-the-mucus-2803669.html
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मुलहठी/Mulethi/Glycyrrhiza glabra

मुलहठी (Liquorice/Mulethi) रेशेदार, गन्धयुक्त और बहुत ही उपयोगी होती है। आमतौर पर लोग इसे मीठी लकड़ी के नाम से जानते हैं। भारत में इसे मुलहठी (Liquorice/Mulethi) या मुलेठी के नाम से जाना जाता है। मुलहठी (Liquorice/Mulethi) ही एक ऐसी वस्तु है, जिसका सेवन किसी भी मौसम में किया जा सकता है। पनवाड़ी इसे पान में डालकर देता है। मुलहठी (Liquorice/Mulethi) का प्रयोग मधुमेह की औषधि बनाने में किया जाता है।

भारत में यह बहुत ही कम मात्रा में होती है इसलिए यह अधिकांश रूप से विदेशों से आयात की जाती है। मुलहठी (Liquorice/Mulethi) की जड़ और रस हमेशा बाजारों में पंसारियों के यहां मिलती हैं। मुलहठी (Liquorice/Mulethi) मीठी तथा ठण्डी होती है। मुलहठी (Liquorice/Mulethi) की जड़ पेसाब (Urin) लाने वाली और दर्दनाशक भी होती है। यह खांसी में विशेष लाभकारी है। इससे कफ(Cough) पिघलकर बाहर निकल जाती है।

यह आमाशय की जलन (Irritation of the stomach) को भी दूर कर पीठ की हड्डियों को मजबूत करती है। फेफड़ों (Lungs) के लिए भी यह फायदेमंद है। गले का दर्द व सूजन (Throat pain and inflammation)भी कम करती है। इसके सेवन से अनेक रोग दूर होतें हैं।

मुलहठी (Liquorice/Mulethi) का पौधा 1 से 6 फुट तक होता है। यह स्‍वाद में मीठी होती है इसलिए इसे यष्टिमधु भी कहा जाता है। असली मुलहठी (Liquorice/Mulethi) अंदर से पीली, रेशेदार एवं हल्की गंधवाली होती है। सूखने पर इसका स्‍वाद अम्‍लीय हो जाता है।

स्वभाव: यह खाने में ठण्डी होती है। मुलहठी (Liquorice/Mulethi) में 50 प्रतिशत पानी होता हैं। इसमें मुख्य घटक `ग्लिसराइजिन´ हैं, जिसके कारण यह खाने में मीठा होता है जो 5 से 20 प्रतिशत विभिन्न प्रजातियों में पाया जाता है। मुलहठी (Liquorice/Mulethi) में 10 से 14 प्रतिशत तक ग्लाइकोसाइड भी होता है। इसके अतिरिक्त इसमें घावों को शीघ्र भरने वाले विभिन्न घटक सुक्रोज (Sucrose), डेक्स्ट्रोज (Dextrose), स्टार्च (Starch), प्रोटीन (Protein), वसा (Fat), रेजिन(Resins), कोसाइड्स (Kosaids), लिक्विरीस्ट्रासाइड्स (Likviristrasaids), आइसोलिक्यिरीस्ट्रोसाइड कुमेरिन (Aisolikyiristrosaid Kumerin), फ्रलेकोनोन (Frlekonon), लिक्विरीटिन (Likviritin), आइसोलिक्विरीटिन (Aisolikviritin), अम्वलीफीरोन (Amwlifirom) आदि तत्त्व भी पाये जाते हैं। मुलहठी (Liquorice/Mulethi) में ग्लूकोज (Glucose), स्टीराइड (Stiraid), एस्ट्रोजन (Estrogen), कैल्शियम (Calcium), पोटैशियम (Potassium) आदि तत्त्व भी मौजूद हैं।

मुलहठी (Liquorice/Mulethi) की जड़ को उखाड़ने के बाद दो वर्ष तक उसमें औषधीय गुण विद्यमान रहते हैं। इसका औषधि के रूप में प्रयोग बहुत पहले से होता आया है। मुलेठी पेट के रोग, सांस संबंधी रोग, स्तन रोग, योनिगत रोगों (Intestinal diseases, respiratory diseases, breast disease , diseases Yonigt) को दूर करती है।

ताजी मुलेठी में पचास प्रतिशत जल होता है, जो सुखाने पर मात्र दस प्रतिशत ही शेष रह जाता है। ग्लिसराइजिक एसिड (Glisraijik acid)के होने के कारण इसका स्वाद साधारण शक्कर से पचास गुना अधिक मीठा होता है। आइए हम आपको मुलेठी के गुणों के बारे में बताते हैं।
मुलहठी (Liquorice/Mulethi) से विभिन्न रोगों में उपचार

घाव (जख्म): मुलहठी (Liquorice/Mulethi) पेट में बन रहे एसिड (तेजाब) को नष्ट करके अल्सर के रोग से बचाती है।
पेट के घाव की यह सफल औषधि है।
मुलहठी (Liquorice/Mulethi) खाने से कोई दुष्प्रभाव नहीं होता है। इसका सेवन लंबे समय तक नहीं करना चाहिए। बीच-बीच में बंद कर दें।
मुलहठी (Liquorice/Mulethi) को पीसकर घी के साथ चूर्ण के रूप में हर तरह के घावों पर बांधने से शीघ्र लाभ होता है।
चाकू आदि के घाव के कारण उत्पन्न तेज दर्द रोगी को बहुत कष्ट देता है। यह दर्द मुलहठी (Liquorice/Mulethi) के चूर्ण को घी में मिलाकर थोड़ा गर्म करके लगाने से शीघ्र ही शांत होता है।

कफ व खांसी: खांसी होने पर यदि बलगम मीठा व सूखा होता है तो बार-बार खांसने पर बड़ी मुश्किल से निकल पाता है। जब तक गले से बलगम नहीं निकल जाता है, तब तक रोगी खांसता ही रहता है। इसके लिए 2 कप पानी में 5 ग्राम मुलहठी (Liquorice/Mulethi) का चूर्ण डालकर इतना उबाल लें कि पानी आधा कप बचे। इस पानी को आधा सुबह और आधा शाम को सोने से पहले पी लें। 3 से 4 दिन तक प्रयोग करने से कफ पतला होकर बड़ी आसानी से निकल जाता है और खांसी, दमा के रोगी को बड़ी राहत मिलती है। यक्ष्मा (टी.बी.) की खांसी में मुलहठी (Liquorice/Mulethi) चूसने से लाभ होता है।


2 ग्राम मुलहठी (Liquorice/Mulethi) पाउडर, 2 ग्राम आंवला पाउडर, 2 चम्मच शहद मिलाकर सुबह-शाम खाने से खांसी में लाभ होता है।

नपुंसकता (नामर्दी): रोजाना मुलहठी (Liquorice/Mulethi) चूसने से नपुंसकता नष्ट हो जाती है।
10 ग्राम मुलेठी का पिसा हुआ चूर्ण, घी और शहद में मिलाकर चाटने से और ऊपर से मिश्री मिले गर्म-गर्म दूध को पीने से नपुंसकता का रोग कुछ ही समय में कम हो जाता है।
10-10 ग्राम मुलहठी (Liquorice/Mulethi), विदारीकंद, तज, लौंग, गोखरू, गिलोय और मूसली को लेकर पीसकर चूर्ण बना लें। इसमें से आधा चम्मच चूर्ण लगातार 40 दिनों तक सेवन करने से नपुंसकता का रोग दूर हो जाता है।

दाह (जलन): मुलहठी (Liquorice/Mulethi) और लालचंदन पानी के साथ घिसकर शरीर पर लेप करने से जलन शांत होती है।
अम्लपित्त (एसिडिटिज): खाना खाने के बाद यदि खट्टी डकारें आती हैं, जलन होती है तो मुलहठी (Liquorice/Mulethi) चूसने से लाभ होता है। भोजन से पहले मुलहठी (Liquorice/Mulethi) के 3 छोटे-छोटे टुकड़े 15 मिनट तक चूसें, फिर भोजन करें।
See : http://dkgoyal.com/%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%B2%E0%A4%B9%E0%A4%A0%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%86%E0%A4%AF%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A5%87%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%95-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%94/
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परामर्श : 10 AM से 10 PM के बीच। Mob & Whats App No. : 9875066111
Please Do not take any (kind of) suggested medicine, without consulting your doctor.
कृपया अपने चिकित्सक के परामर्श के बिना, सुझाई गयी (किसी भी प्रकार की) दवा का सेवन नहीं करें।

निवेदन : रोगियों की संख्या अधिक होने के कारण, आपको इन्तजार करना पड़ सकता है। कृपया धैर्यपूर्वक सहयोग करें।
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डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'-9875066111. 
Request : Due to the high number of patients, you may have to wait. Please patiently collaborate.
-Dr. Purushottam Meena 'Nirankush'-9875066111

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--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!

--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!
सभी के स्वस्थ एवं सुदीर्घ जीवन की कामना के साथ-मेरे प्यारे और दुलारे तीन बच्चों की ममतामयी अद्वितीय माँ (मम्मी) जो दुखियों, जरूतमंदों और मूक जानवरों तक पर निश्छल प्यार लुटाने वाली एवं अति सामान्य जीवन जीने की आदी महिला थी! वह पाक कला में निपुण, उदार हृदया मितव्ययी गृहणी थी! मेरी ऐसी स्वर्गीय पत्नी "जानकी मीणा" की कभी न भुलाई जा सकने वाली असंख्य हृदयस्पर्शी यादों को चिरस्थायी बनाये रखते हुए इस ब्लॉग को आज दि. 08.08.12 को फिर से पाठकों के समक्ष समर्पित कर रहा हूँ!-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'

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CALTROPS) गोंद कतीरा-Hog-Gum गोंदी गोभी-Cabbage गोरख मुंडी गोरखमुंडी घमोरी घाघरा घाव चकवड़ चक्कर चपाती चमत्कारिक सब्जियां चर्म चर्म रोग चर्मरोग चाय चाय-Tea चालीस के पार-Forty Across चिकनगुनिया चिकित्सकीय चिरायता-Absinth चिरोटा चुंबन चोक चौलाई छपाकी छरहरी काया छाछ छाले छीकें छुआरा छुहारा छोटा गोखरू छोटा धतूरा छोटी हरड़ जकवड़ जंगली/कटीली चौलाई जटामांसी-Spikenard जलजमनी जलन जलोदर रोग-Ascites Disease जवारे जवासा-Alhag जहर जामुन का जूस जायफल-Nutmeg जीरा जीवन रक्षक जुएं जुकाम जुलाब जूएं जूस जूस-Juice जोड़ों के दर्द ज्वर ज्वर-Fiver झांईं झुर्रियाँ झुर्री झूठे दर्द टमाटर-Tomatoes टाइफाइड टायफायड टॉन्सिल टोटला ट्यूमर ठेकेदार डॉक्टर डकार डायबिटीज डायरिया डिनर डिलेवरी डीकामाली डीगामाली डेंगू डेंगू-Dengue डॉ. निरंकुश डॉ. मीणा ढीलापन ढीली योनि तकलीफ का सही इलाज तरबूज-Watermelon तलाक ताकत तिल तिल्ली तुंबा तुंबी तुलसी तेल त्रिदोषनाशक त्रिफला त्वचा थकान थायरायड-Thyroid थायरॉइड दण्डनीय अपराध दन्तकृमि दन्तरोग दमा दर्द दर्दनाक दस्त दही दाग-धब्बे-Stains-Spots दाढ़ दांत दांतो में कैविटी-Teeth Cavity दाद दाम्पत्य दाम्पत्य-Conjugal दाल दालचीनी दालें दिल दुर्गंध दुर्बलता दुष्प्रभाव दूध दूधी दूधी-Milk Hedge दृष्टिदोष द्रोणपुष्पी-Leucas Cephalotes धड़कन धनिया-Coriander धमासा धातु धातु पतन धार्मिक नज़ला नपुंसकता नाक नाखून नागबला नागरमोथा नाडी हिंगु नाड़ी हिंगु (डिकामाली) नामर्दी नारियल नाश्ता निमोनिया निम्न रक्तचाप निम्बू नियासिन निरोगधाम निर्गुण्डी निसोरा नींद नींबू नींबू-Lemon नीम-azadirachta indica नुस्खे-Tips नेगड़ नेगड़-निर्गुन्डी-Vitex negundo नेत्र रोग नैतिक नौसादर न्युमोनिया-Pneumonia पक्षघात पढ़ने में मन लगेगा पंतजलि पत्तागोभी-CABBAGE पत्थरचट्टा पत्नी पथरी पनीर पपीता पपीता-CARICA PAPPYA पमाड परहेज पराठा परिस्थिति पवाड़ पवाँर पाइल्स पाक-कला पाचक पाचन पाठक संख्या पंद्रह लाख पायरिया पारिजात पालक पालक-Spinach पित्त पित्ती पिंपल-मुंहासे-Pimples-Acne पिरामिड पीलिया पीलिया-Jaundice पीलिया-कामला-Jaundice पुआड़ पुदीना पुनर्नवा-साटी-सौंटी-Punarnava पुरुष पेचिश पेट के कीड़े पेट दर्द पेट में गैस पेट रोग पेंसिल थेरेपी-Pencil Therapy पौरुष प्याज-Onion प्रजनन प्रतिरक्षा प्रतिरक्षा प्रणाली प्रतिरक्षा-इम्युनिटी-Immunity प्रतिरोधक प्रतिरोधक-Resistance प्रदर प्रमेह प्रवाहिका (पेचिश)-Dysentery प्रसव प्रसव सुरक्षा चक्र प्रसूति प्राणायाम प्रेग्नेंसी-Pregnancy प्रेमिका प्रोटीन प्रोटीन का कार्य प्रोटीन के स्रोत प्रोस्टेट ग्रन्थि-Prostate Gland प्लीहा प्लूरिसी-Pleurisy फफूंद-Fungi फरास फल फल-Fruit फाइबर फिटकरी फुंसी-Pimples फूलगोभी-CAULIFLOWER फेंफड़े फैट फोटोफोबिया फोड़ा फोड़े-Boils फोलिक एसिड-Folic Acid फ्लू फ्लू-Flu फ्लेक्स सीड्स बकायन बकुल बड़ी हरड़ बथुआ बथुआ पाउडर बथुआ-White Goose Foot बदबू बबूल-ACACIA बरसाती बीमारियाँ बरसाती बीमारियां बलगम बलवृद्धि बला बवासीर बहुमूत्रता- बांझपन बादाम-Almonds बादाम. बाल बाल झड़ना बाल झडऩा-Hair Falling बिना सिजेरियन मां बनें बीजबंद बीमारियों के अनुसार औषधियां बुखार बेल बेल – Bael बेली बैक्टीरिया ब्र​ह्मदण्डी ब्रेस्ट ग्रोथ ब्लड प्रेशर ब्लैक मेलिंग भगंदर भगंदर-Fistula-in-ano भगनासा भगोष्ठ भय भस्मक रोग भावनात्मक भुई आंवला-Phyllanthus Niruri भूई आमला भूख भूख बढ़ाने भूमि आंवला भोजनलीवर मकोय मकोय-Soleanum nigrum मंजीठ मटर-PEA मंद दृष्टि मंदाग्नि मदार मधुमेह मधुमेह-Diabetes मन्दाग्नि-Dyspepsia मरुआ मर्दाना मलेरिया (Malaria) मस्तिष्क मस्से मस्से-WARTS महाबला माइग्रेन माईग्रेन माईंड सैट माजूफल मानसिक मानसिक-Mental मानिसक तनाव-Mental Stress मायोपिया मासिक मासिक-धर्म मासिकधर्म मासिकस्राव माहवारी मिनरल मिर्गी मिर्च-Chili मुख मैथुन-ओरल सेक्स-Oral Sex मुधमेह मुलहठी मुलेठी मुहाँसे मूँगफली मूड डिस्ऑर्डर-Mood Disorders मूत्र मूत्र असंयमितता मूत्र में जलन-Burning in Urine मूत्राशय मूर्च्छा (Unconsciousness) मूली मृत्यु मृत्युदण्ड मेथी मेथी दाना मेंहदी मैथुन मोगरा (Mogra) मोटापा मोटापा-Obesity मोतियाबिंद मौत मौलसिरी मौसमी बीमारियां यकृत यकृत प्लीहा यकृत वृद्धि-Liver Growth यकृत-लीवर-जिगर-Lever यूपेटोरियम परफोलियेटम योग विज्ञापन योन योनि योनि शूल-Vaginal Colic योनि संकोचन योनी योनी संकोचन यौन यौन आनंद यौन दौर्बल्य यौनशक्ति यौनशिक्षा यौनानंद यौनि रक्त प्रदर (Blood Pradar) रक्त रोहिड़ा-TECOMELLA UNDULATA रक्तचाप रक्तपित्त रक्तशोधक रक्ताल्पता रक्ताल्पता (एनीमिया)-Anemia रस-juices रातरानी Night Blooming Jasmine/Cestrum nocturnum रामबाण रामबाण 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संभालू संभोग समर्पण-Dedication सरकार को सुझाव सरफोंका सरहटी सर्दी सर्दी जुकाम-Cold सर्पक्षी सर्पविष सलाद संवेदना सहदेई सहदेवी साइटिका साइटिका-Sciatica साइड इफेक्ट्स साबूदाना-Sago सायटिका सिजेरियन सिर दर्द सिरका सिरदर्द सिरोसिस सुगर सुदर्शन सुहागा सूखा रोग सूजन सेक्स सेक्स परामर्श-Sex Counseling सेक्स पावर सेक्स समस्या सेक्‍स-Sex सेंधा नमक सेब सेमल-Bombax Ceiba सेल्स सोजन-सूजन सोंठ सोना पाठा सोयाबीन सोयाबीन (Soyabean) सोयाबीन-Soyabean सोराइसिस सोरियासिस-Psoriasis सौंठ सौंदर्य सौंदर्य-Beauty सौन्दर्य सौंफ सौंफ की चाय सौंफ-Fennel स्किन स्तन स्तन वृद्धि स्तनपान स्तम्भन स्त्री स्त्रीत्व स्त्रैण स्वप्न दोष स्वप्नदोष स्वप्नदोष-Night Fall स्वरभंग स्वर्णक्षीरी स्वस्थ स्वास्थ्य स्वास्थ्य रक्षक सखा हजारदानी हड़जोड़ हड्डी हड्डी में दर्द हड्डीतोड़ ज्वर हड्डीतोड़ बुखार हरड़ हरसिंगार-Night Jasmine हरी दूब-CREEPING CYNODAN हरीतकी हर्टबर्न हस्तमैथुन हस्तमैथुन-Masturbation हालात हिचकी हिचकी-Hiccup हिमोग्लोबिन-hemoglobin हिस्टीरिया हिस्टीरिया-Hysteria हींग हीनतर हृदय हृदय-Heart हेपेटाइटिस हेल्थ 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