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नपुंसकता का करे अचूक नुस्खे से ईलाज

Last Updated : Wed, 01,Apr, 2015

जो व्यक्ति यौन संबन्ध नहीं बना पाता या जल्द ही शिथिल हो जाता है, वह नपुंसकता का रोगी होता है। इसका सम्बंध सीधे जननेन्द्रिय से होता है। इस रोग में रोगी अपनी यह परेशानी, किसी दूसरे को नहीं बता पाता या सही उपचार नहीं करा पाता, मगर जब वह पत्नी को संभोग के दौरान पूरी सन्तुष्टि नहीं दे पाता, तो रोगी की पत्नी को पता चल ही जाता है कि वह नंपुसकता के शिकार हैं। इससे पति-पत्नी के बीच में लड़ाई-झगड़े होते हैं और कई तरह के पारिवारिक मन मुटाव हो जाते हैं। बात यहां तक भी बढ़ जाती है कि आखिरी में उन्हें अलग होना पड़ता है।
कुछ लोग शारीरिक रूप से नपुंसक नहीं होते, लेकिन कुछ प्रचलित अंधविश्वासों के चक्कर में फसकर, सेक्स के शिकार होकर मानसिक रूप से नपुंसक हो जाते हैं। मानसिक नपुंसकता के रोगी अपनी पत्नी के पास जाने से डर जाते हैं। सहवास भी नहीं कर पाते और मानसिक स्थिति बिगड़ जाती है।
नपुंसकता के दो कारण होते हैं। शारीरिक और मानसिक। चिन्ता और तनाव से ज्यादा घिरे रहने से मानसिक रोग होता है। नपुंसकता शरीर की कमजोरी के कारण होती है। ज्यादा मेहनत करने वाले व्यक्ति को जब पौष्टिक आहार नहीं मिल पाता, तो कमजोरी बढ़ती जाती है और नपुंसकता पैदा हो सकती है। हस्तमैथुन, ज्यादा काम-वासना में लगे रहने वाले नवयुवक नपुंसक के शिकार होते हैं। ऐसे नवयुवकों की सहवास की इच्छा कम हो जाती है।
मैथुन के योग्य ना रहना, नपुंसकता का मुख्य लक्षण है। थोड़े समय के लिए कामोत्तेजना होना, या थोड़े समय के लिए ही लिंगोत्थान होना, इसका दूसरा लक्षण है। मैथुन अथवा बहुमैथुन के कारण उत्पन्न ध्वजभंग नपुंसकता में शिशन पतला, टेढ़ा और छोटा भी हो जाता है। अधिक अमचूर खाने से धातु दुर्बल होकर नपुंसकता आ जाती है।
नपुंसकता से परेशान रोगी को औषधियों खाने के साथ कुछ और बातों का ध्यान रखना चाहिए। जैसे सुबह शाम किसी पार्क में घूमना चाहिए, खुले मैदान में, किसी नदी या झील के किनारे घूमना चाहिए। सुबह सूर्य उगने से पहले घूमना ज्यादा लाभदायक है। सुबह साफ पानी और हवा शरीर में पहुंचकर शक्ति और स्फूर्ति पैदा करती है। इससे खून भी साफ होता है।
नपुंसकता के रोगी को अपने खाने (आहार) पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। आहार में पौष्टिक खाद्य पदार्थों घी, दूध, मक्खन के साथ सलाद भी ज़रूर खाना चाहिए। फ़ल और फ़लों के रस के सेवन से शारीरिक क्षमता बढ़ती है। नपुंसकता की चिकित्सा के चलते रोगी को अश्लील वातावरण और फिल्मों से दूर रहना चाहिए, क्योंकि इसका मस्तिष्क पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है। इससे बुरे सपने भी आते हैं, जिसमें वीर्यस्खलन होता है।
  1. ईसबगोल की भूसी 5 ग्राम और मिश्री 5 ग्राम दोनों को रोज सुबह के समय खायें और ऊपर से दूध पी लें। इससे शीध्रपतन की विकृति खत्म होती है।
  2. ईसबगोल की भूसी और बड़े गोखरू का चूर्ण 20-20 ग्राम तथा छोटी इलायची के बीजों का चूर्ण 5 ग्राम इन सबका चूर्ण बनाकर रोज 2 चम्मच गाय के दूध के साथ लें।
  3. सफेद प्याज़ का रस 8 मिलीलीटर, अदरक का रस 6 मिलीलीटर और शहद 4 ग्राम, घी 3 ग्राम मिलाकर 6 हफ्ते खाने से नपुंसकता खत्म हो जाती है।
  4. सफेद प्याज़ को कूटकर दो लीटर रस निकाल लें। इसमें 1 किलो शुद्ध शहद मिलाकर धीमी आग पर पकायें, जब सिर्फ शहद ही बच कर रह जाए, तो आग से उतार लें और उसमें आधा किलो सफेद मूसली का चूर्ण मिलाकर चीनी या शीशे के बर्तन में भर दें। 10 से 20 ग्राम तक दवा सुबह-शाम खाने से नामर्दी मिट जाती है।
  5. जामुन की गुठली का चूर्ण रोज गर्म दूध के साथ खाने से धातु (वीर्य) का खत्म होना बन्द हो जाता है।
  6. छुहारे को दूध में देर तक उबालकर खाने से और उसी दूध को पीने से नपुंसकता खत्म होती है।

  7. रात को पानी में दो छुहारे और 5 ग्राम किशमिश भिगो दें। सुबह को पानी से निकालकर दोनों मेवे को दूध के साथ खायें।
  8. बादाम की गिरी, मिश्री, सौंठ और काली मिर्च कूट-पीसकर चूर्ण बनाकर, कुछ हफ्ते खाने से और ऊपर से दूध पीने से धातु (वीर्य) का खत्म होना बन्द होता है।
  9. बादाम को गर्म पानी में रात में भींगने दें। सुबह थोड़ी देर तक पकाकर पेय बनाकर 20 से 40 मिलीलीटर रोज़ पीऐं, इससे मूत्रजनेन्द्रिय संस्थान के सारे रोग खत्म हो जाते हैं।
  10. रोज गाजर का रस 200 मिलीलीटर पीने से मैथुन शक्ति (संभोग) बढ़ती है।
  11. गाजर का हलवा, रोज़ 100 ग्राम खाने से सेक्स की क्षमता बढ़ती है।
  12. कौंच के बीज के चूर्ण में तालमखाना और मिश्री का चूर्ण बराबर मात्रा में मिलाकर 3 - 3 ग्राम की मात्रा में खाने और दूध के साथ पीने से नपुंसकता (नामर्दी) ख़त्म होती है।
  13. कौंच के बीजों की गिरी तथा राल ताल मखाने के बीज। दोनों को 25 - 25 ग्राम की मात्रा में लेकर पीसकर छान लें, फिर इसमें 50 ग्राम मिस्री मिला लें। इसमें 2 चम्मच चूर्ण रोज़ दूध के साथ खाने से लाभ होता है।
  14. गिलोय, बड़ा गोखरू और आंवला सभी बराबर मात्रा में लेकर कूट पीसकर चूर्ण बना लें। 5 ग्राम चूर्ण रोज़ मिस्री और घी के साथ खाने से प्रबल मैथुन शक्ति विकसित होती है।
  15. जायफल का चूर्ण लगभग आधा ग्राम शाम को पानी के साथ खाने से 6 हफ्ते में ही धातु (वीर्य) की कमी और मैथुन में कमजोरी दूर होगी।
  16. जायफल का चूर्ण एक चौथाई चम्मच सुबह - शाम शहद के साथ खाऐं और इसका तेल सरसों के तेल के मिलाकर शिश्न (लिंग) पर मलें।
  17. बेल के पत्तों का रस 20 मिली लीटर निकालकर, उसमें सफेद जीरे का चूर्ण 5 ग्राम, मिस्री का चूर्ण 10 ग्राम के साथ खाने और दूध पीने से शरीर की कमजोरी ख़त्म होती है।
  18. बेल के पत्तों का रस लेकर, उसमें थोड़ा सा शहद मिलाकर शिश्नि पर 40 दिन तक लेप करने से नपुंसकता में लाभ होगा।
  19. सफेद मूसली और मिस्री, बराबर मिलाकर, पीसकर चूर्ण बना कर रखें और चूर्ण बनाकर 5 ग्राम सुबह - शाम दूध के साथ खाने से शरीर की शक्ति और खोई हुई मैथुन शक्ति, वापस मिल जाती है।
  20. सफेद मूसली 250 ग्राम बारीक चूर्ण बना लें। उसे 2 लीटर दूध में मिलाकर खोया बना लें। फिर 250 ग्राम घी में डालकर इस खोए को भून लें। ठंडा हो जाने पर आधा किलो पीसकर शक्कर (चीनी) मिलाकर पलेट या थाली में जमा लें। सुबह - शाम 20 ग्राम खाने से काम शक्ति बढ़ती है।
  21. सफेद मूसली, सतावर, असगंध 50 - 50 ग्राम कूट छान कर, 10 ग्राम दवा सोते समय 250 मिली लीटर, कम गर्म दूध में खांड़ के संग मिलाकर लें।
  22. सफेद मूसली 20 ग्राम, ताल मखाने के बीज 200 ग्राम और गोखरू 200 ग्राम। तीनों को पीसकर चूर्ण बनाकर रखें, फिर इसमें से 5 ग्राम चूर्ण दूध के साथ खायें।
  23. सफेद मूसली और मिस्री, बराबर मात्रा में कूट पीसकर चूर्ण बनाकर 6 ग्राम की मात्रा में खाने से नपुंसकता (नामर्दी) खत्म होती है।
  24. भीगे चने सुबह - शाम चबाकर खाने से ऊपर से बादाम की गिरी खाने से, मैथुन शक्ति बढ़ती है और नंपुसकता ख़त्म होती है।
  25. शतावर को दूध में देर तक उबाल कर मिस्री मिला लें और उस दूध को पीने से ही कुछ महीनों में नपुंसकता (नामर्दी) ख़त्म हो जाती है।
  26. शतावर, असगंध, एला, कुलंजन और वंशलोचन का चूर्ण बनाकर रखें। 3 ग्राम चूर्ण में 6 ग्राम शक्कर को मिलाकर खाने से और फिर ऊपर से दूध पीने से कुछ महीनों में नपुंसकता (नामर्दी) ख़त्म होती है।
  27. शतावर और असगन्ध के 4 ग्राम चूर्ण को दूध में उबाल कर पीने से नपुंसकता (नामर्दी) दूर होती है।
  28. शतावर का चूर्ण 10 ग्राम से 20 ग्राम को चीनी मिले दूध में, सुबह - शाम डालकर पीऐं, इससे नपुंसकता दूर होती है। शरीर की कमजोरी भी दूर होती है।
  29. सेमल के पेड़ की छाल के 20 मिली लीटर रस में मिस्री मिलाकर, पीने से शरीर में वीर्य और मैथुन शक्ति बढ़ती है।
  30. 10 - 10 ग्राम सेमल के चूर्ण और चीनी को 100 मिली लीटर पानी के साथ घोट कर सुबह - शाम लेने से बाजीकरण यानी संभोग शक्ति ठीक होती है और नपुंसकता भी दूर हो जाती है।
  31. बड़ी गोखरू का फांट या घोल सुबह - शाम लेने से काम शक्ति यानी संभोग की वृद्धि दूर होती है। 250 मिलीलीटर को खुराक के रूप में सुबह और शाम सेवन करें।
  32. बड़ा गोखरू और काले तिल, इन दोनों को 14 ग्राम की मात्रा में कूट - पीस लें। फिर इस को 1 किलो गाय के दूध में पकाकर खोआ बना लें। यह एक मात्रा है। इस खोयें को खाकर ऊपर से 250 मिली लीटर गाय के निकाले दूध के साथ पी लें। 40 दिन तक इसको खाने से नपुंसकता दूर हो जाती है।
  33. 25 ग्राम बड़ी गोखरू के फल का चूर्ण, 250 मिली लीटर उबले पानी में डालकर रखें। इसमें से थोड़ा - थोड़ा बार - बार पिलाने से कामोत्तेजना बढ़ती है।
  34. बड़ी गोखरू के फल का चूर्ण 2 ग्राम को चीनी और घी के साथ सेवन करें तथा ऊपर से मिस्री मिले दूध का सेवन करने से कामोत्तेजना बढ़ती है।
  35. हस्तमैथुन की बुरी लत से पैदा हुई नपुंसकता को दूर करने के लिए 1 - 1 चम्मच, गोखरू के फ़ल का चूर्ण और काले तिल को मिलाकर शहद के साथ दिन में 3 बार नियमित रूप से कुछ हफ्तों तक सेवन करें। इससे नपुंसकता में लाभ होता है।
  36. गोखरू, कौंच के बीज, सफेद मूसली, सफेद सेमर की कोमल जड़, आंवला, गिलोय का सत और मिस्री, बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें। 10 ग्राम से लगभग 20 ग्राम तक चूर्ण दूध के साथ खाने से नपुंसकता और वीर्य की कमजोरी दूर होती है।
  37. गोखरू को 3 बार दूध में उबालकर तीनों बार सुखाकर चूर्ण बनाकर खाने से नपुंसकता दूर होती है।
  38. गोखरू का चूर्ण और तिल बराबर मिलाकर बकरी के दूध में पकाकर शहद में मिला लें और खायें। इससे अनेक प्रकार की नपुंसकता ख़त्म होती है।
  39. देशी गोखरू 150 ग्राम पीसकर छान लें। इसे 5 - 5 ग्राम सुबह - शाम शहद में मिलाकर चाटने से नपुंसकता (नामर्दी) में लाभ मिलता है।
  40. गोखरू, तालमखाना, शतावर, कौंच के बीजों की गिरी, बड़ी खिरेंटी तथा गंगरेन इन सबको 100 ग्राम की मात्रा में लेकर पीस लें। इस चूर्ण को 6 ग्राम से 10 ग्राम तक की मात्रा में रात के समय फांककर ऊपर से गरम दूध पियें। 60 दिनों तक रोज़ खाने से वीर्य बढ़ता है और नपुंसकता दूर होती है।
  41. विदारीकन्द के चूर्ण को घी, दूध और गूलर के रस के साथ खाने से प्रौढ़ पुरुष भी नवयुवकों की तरह मैथुन शक्ति प्राप्त कर सकता है।
  42. 5 ग्राम विदारीकन्द को पीसकर लुगदी बना लें। इसे खाकर ऊपर से 5 ग्राम देशी घी और मिस्री मिलाकर, दूध के साथ पियें। यह बल और वीर्य को बढ़ाता है तथा इससे नपुंसकता दूर होती है।
  43. सूखे सिंघाड़े को कूट पीसकर घी और चीनी के साथ हलवा बनाकर खाने से कुछ ही हफ्ते में नपुंसकता ख़त्म हो जाती है।
  44. * तरबूज़ के बीजों की गिरी 6 ग्राम, मिस्री 6 ग्राम मिलाकर, चबाकर खाने से और ऊपर से दूध पीने से शरीर में शक्ति विकसित होने से नपुंसकता (नामर्दी) ख़त्म होती है।
  45. गेंदे के बीज 4 ग्राम और मिस्री 4 ग्राम को पीसकर कुछ दिनों तक खाने से वीर्य स्तंभन शक्ति का विकास होता है।
  46. कैथ के सूखे पत्तों का चूर्ण 6 ग्राम रोज़ खाकर ऊपर से मिस्री मिलाकर, दूध पीने से धातु (वीर्य) बढ़ता है।
  47. उड़द की दाल 40 ग्राम को पीसकर शहद और घी में मिलाकर खाने से पुरुष कुछ दिनों में ही मैथुन (संभोग) करने के लायक बन जाता है।
  48. उड़द की दाल के थोड़े से लड्डू बना लें। उसमें से 2 - 2 लड्डू खायें और ऊपर से दूध पी लें। इससे नपुसकता दूर होती है।
  49. इमली के बीजों को भून लें, फिर उनके छिलके अलग करके, उनका चूर्ण बनाकर रोज़ 3 ग्राम चूर्ण मिस्री के साथ खाने से वीर्य शक्ति बढ़ने लगती है और नपुंसकता दूर हो जाती है।
  50. तुलसी की जड़ और ज़मीकन्द को पान में रखकर खाने से शीघ्रपतन की विकृति खत्म होती है।
  51. धातु दुर्बलता में तुलसी के बीज 1 ग्राम दूध के साथ सुबह - शाम सेवन करने से लाभ मिलता है।
  52. तुलसी के बीज या तुलसी की जड़ के चूर्ण में पुराना गुड़ समान मात्रा में मिलाकर 3 - 3 ग्राम की गोली बना लें। इसकी 1 - 1 गोली सुबह - शाम गाय के ताजे दूध के साथ लेते रहें। इससे नपुंसकता (नामर्दी) दूर होती है।
  53. तुलसी की मंजरी या जड़ के 1 से 3 ग्राम बारीक चूर्ण में गुड़ मिलाकर ताजे दूध के साथ लेने से नपुंसकता दूर होती है।
  54. गंधक और शहद को पीसकर लेप बना लें। इस लेप को शिश्न (लिंग) पर लेप करें। इससे वीर्य स्तंभन शक्ति में वृद्धि होती है।
  55. काली मूसली का पाक बनाकर खाने से नपुंसकता समाप्त हो जाती है।
  56. काली मूसली 10 ग्राम की मात्रा में लेकर दूध के साथ खाने से लाभ होता है।
  57. काली मूसली की जड़ का चूर्ण 3 से 6 ग्राम की मात्रा में सुबह शाम मिस्री मिले, हल्के गर्म दूध के साथ खाने से नपुंसकता में कुछ हद तक लाभ होता है।
  58. काले तिल, सोंठ, पीपल, मिर्च, भारंगी और गुड़ समान मात्रा में मिलाकर काढ़ा बनायें। इस काढ़े को 21 दिनों तक पीने से शरीर की गर्मी बढ़ती है।
  59. जावित्री डेढ़ ग्राम, जायफल 10 ग्राम, बड़ी इलायची 10 ग्राम और अफीम आधा ग्राम को मिलाकर बारीक चूर्ण बना लें। इसके 2 ग्राम चूर्ण को शहद में मिलाकर सर्दियों में लगभग एक महीने तक खाने से नपुंसकता मिट जाती है। याद रहे, अफ़ीम नशाआवर है।
  60. ग्वारपाठे का गूदा और गेहूं का आटा बराबर मात्रा में लेकर घी मिला लें। फिर इसके दुगुने वज़न के बराबर शक्कर (चीनी) लेकर हलुआ बनाकर खाने से 7 दिन में नपुंसकता दूर होती है।
  61. 3 बोतल गुलाबजल में 10 ग्राम सोने का बुरादा डालकर कूटकर मिला लें। जब सब गुलाबजल उसमें समा जायें, तब निकालकर रख लें। लगभग आधा ग्राम मलाई में मिलाकर खाने से सहवास करने से जल्दी ही वीर्य पतन नहीं होता है।
  62. अगर का चोया, पान में मिलाकर खाने से नामर्दी में लाभ होता है।
  63. सहवास से 1 घण्टा पहले शिश्न पर लगभग 1 ग्राम के चौथे भाग घी की मालिश करने से नपुंसकता नहीं रहती है।
  64. मालकांगनी के तेल की 10 बूंदे नागबेल के पान पर लगाकर खाने से नपुंसकता दूर हो जाती है।
  65. मांलकांगनी के बीजों को खीर में मिलाकर खाने से नपुंसकता मिट जाती है।
  66. मालकांगनी के दाने 50 ग्राम और 25 ग्राम शक्कर (शुगर) को आधा किलो गाय के दूध में डालकर आग पर चढ़ा दें। जब दूध का खोया बन जाए, तब उतारकर मोटी - मोटी गोली बनाकर रख लें और रोज़ 1 - 1 गोली सुबह - शाम गाय के दूध के साथ खायें। इससे नपुंसकता दूर होती है।
  67. बड़ी कटेरी की 25 ग्राम ताजी जड़ की छाल को गाय के दूध में उबालकर पीने से नपुंसकता मिट जाती है।
  68. कलौंजी का तेल और जैतून का तेल मिलाकर पीने से नामर्दी मिट जाती है।
  69. जदवार 2 ग्राम खाने से काम शक्ति (संभोग) बढ़ती है।
  70. *जवासीद की गोंद को अकरकरा के साथ पीसकर तिल के तेल में मिलाकर लिंग पर लेप करने से नपुंसकता (नामर्दी) दूर होती है।
  71. धतूरे के बीज, अकरकरा और लौंग बराबर मात्रा में पीसकर चने के बराबर गोलियां बनाकर रोज सुबह - शाम 1 - 1 गोली का सेवन करें।
  72. बहेड़े का चूर्ण 6 ग्राम, 6 ग्राम गुड़ के साथ मिलाकर रोज़ खाने से नपुंसकता (नामर्दी) दूर हो जाती है।
  73. महुए के 25 ग्राम फूलों को 250 मिली लीटर दूध में उबालकर पीने से कमजोरी की नपुंसकता (नामर्दी) मिट जाती है।
  74. सेमर की छोटी जड़ों को छाया में सुखाकर पका दें। पकाने के बाद इसकी जड़ों को खाने से नपुसंकता (नामर्दी) दूर होती है।
  75. सुहागा, कूट और मैनसिल को बराबर मिलाकर चूर्ण बनाकर चमेली के रस और तिल के तेल में पकाकर लिंग पर मलें। इससे लिंग का टेढ़ापन दूर होता है।
  76. गोरखमुण्डी 75 ग्राम कूट छानकर इसमें 75 ग्राम खांड़ मिला लें। 10 ग्राम दवा सोते समय गर्म गर्म खांड़ मिले दूध के साथ लें।
  77. गोरखमुण्डी के फूलों के चूर्ण को नीम के रस के साथ लेने से नपुंसकता (नामर्दी) में लाभ होता है।
  78. लगभग 2 ग्राम कुलिंजन के चूर्ण को 10 ग्राम शहद में मिलाकर खाने से और ऊपर से गाय के दूध में शहद को मिलाकर पीने से काम शक्ति बढ़ती है।
  79. 10 ग्राम असगन्ध नागौरी के बारीक चूर्ण को गाय के 500 मिली लीटर दूध में उबालें। जब 400 मिली लीटर दूध रह जाऐ, तब उसमें शहद मिलाकर 40 दिन तक पिऐं। इससे काम शक्ति बढ़ती है।
  80. दालचीनी 75 ग्राम कूटकर छान लें। 5 ग्राम को पानी में पीसकर सोते समय लिंग पर सुपारी (लिंग का अगला हिस्से) को छोड़कर लेप करें और 2 - 2 ग्राम को सुबह - शाम दूध के साथ सेवन करने से नपुंसकता (नामर्दी) में आराम मिलता है।
  81. सीम्बल की जड़ 100 ग्राम कूट छानकर 5 - 5 ग्राम शहद में मिलाकर सुबह - शाम प्रयोग करने से नपुंसकता (नामर्दी) में आराम मिलता है।
  82. मल्ल सिंदूर एक ग्राम का चौथा भाग, शहद और अदरक के रस को सुबह - शाम लें। इससे हस्तमैथुन से हुई नामर्दी दूर हो जाती है।
  83. हल्दी और कपूर 10 - 10 ग्राम पीस लें, फिर 5 ग्राम को खुराक के रूप में सुबह - शाम दूध के साथ लेना चाहिए।
  84. चनसूर 10 ग्राम को दूध में उबालकर मिस्री के साथ सुबह - शाम खाऐं। इससे संभोग की शक्ति बढ़ जाती है।
  85. कुलिजंन को मुंह में रखकर चूसते रहने से भी काम शक्ति में वृद्धि होती है।
  86. जंगली उशवा के चूर्ण में 10 ग्राम का काढ़ा बनाकर रोज़ 1 मात्रा पीते रहने से नपुंसकता दूर होती है।

  87. पटुओक (सन) के बीज का तेल खाने कें काम में आता है। जिससे शरीर हुष्ट पुष्ट होता है, कामोत्तेजना बढ़ती है। इस तेल की मालिश से चोट मोच का दर्द भी जल्दी ठीक होता है।
  88. नपुंसकता और कामशक्ति में कमजोरी आने पर 60 ग्राम लहसुन की कली को घी में तलकर रोजाना खाने से नपुंसकता समाप्त हो जाती है।
  89. लहसुन की एक पुतिया घी में भूनकर शहद मे साथ खाने से कामोत्तेजना बढ़ती है।
  90. रोज़ लगभग 20 दिन तक 4 - 5 लहसुन की कलियां दूध के साथ खाने से नपुंसकता में लाभ होता है।
  91. प्याज़ के रस में घी और शहद मिला कर खाने से नपुंसकता दूर होती है। प्याज़ का रस 10 से 20 मिली लीटर रोज सुबह - शाम लें।
  92. प्याज़ के हिस्से का चूर्ण 10 ग्राम से 20 ग्राम मिस्री मिले, दूध के साथ सुबह - शाम प्रयोग करने से कामोत्तेजना की वृद्धि होती है।
  93. जबाद कस्तूरी शिश्न यानी लिंग पर लेप करने से संभोग करने में ज्यादा आनन्द मिलता है। मगर इससे गर्भधारण नहीं होता है।
  94. अगर का पुराना सेंट 1 से 2 बूंद को पान में डालकर खाने से बाजीकरण होता है और नपुंसकता दूर होती है।
  95. बाजीकरण के लिए छोटी इलायची का चूर्ण लगभग आधे से दो ग्राम तक सुबह - शाम खाऐं या मिस्री मिले गर्म - गर्म दूध के साथ रोज़ रात को सोने से पहले खाऐं।
  96. केवटी मोथा के बीज 10 ग्राम पीसकर, मिस्री मिले गर्म गाय के दूध के साथ रोज़ शाम को पीने से नपुंसकता दूर हो जाती है।
  97. सहजना के फूलों को दूध में उबाल कर रोज़ रात को मिस्री मिलाकर पीने से नपुंसकता की बीमारी दूर होकर लाभ होता है।
  98. गुंजा (करजनी) की जड़ 2 ग्राम दूध में पकाकर भोजन से पहले रोज़ रात में खाने से पूरा लाभ होता है। वीर्य सम्बन्धी समस्त दोष दूर होते हैं।
  99. केवांच (कपिकच्छू) के बीजों के बीच का हिस्सा का चूर्ण 2 से 6 ग्राम रोज़ रात को सोते समय मिस्री मिले गर्म दूध के साथ पीने से लाभदायक होता है।
  100. अतिबला के बीज 4 से 8 ग्राम सुबह शाम मिस्री मिले गर्म दूध के साथ खाने से नपुंसकता में पूरा लाभ होता है।
  101. जमालगोटा के तेल को लिंग के ऊपर लगाने से लाभ मिलता है।
  102. नपुंसकता को दूर करने के लियें तालमखाना के बीज का चूर्ण, 2 से 4 ग्राम केवाचं के बीज के साथ मिस्री मिले ताजे निकाले दूध के साथ सुबह - शाम पीने से लाभ होता है।
  103. विष्णुकान्ता का रस 20 से 40 मिली लीटर या काढ़ा 40 से 80 मिली लीटर तक सुबह - शाम खाने से पूयमेह, शुक्र मेह, दुर्बल्यता (कमजोरी) आदि कष्ट दूर हो जाते है।
  104. वनतुलसी के बीज 3 से 7 ग्राम लेकर मिस्री मिले गाय के दूध से लेने से लाभ होता है।
  105. बड़ (बरगद) का दूध 20 से 30 बूंद रोज़ सवेरे बताशे या चीनी पर डालकर खाने से पुरुषत्व शक्ति बढ़ती है। नपुंसकता दूर करने के लिए बताशे में दूध की 5 - 10 बूंदें सुबह - शाम रोज खाने से लाभ होता हैं।
  106. बरगद के पेड़ की कोंपले और गूलर के पेड़ की छाल 3 - 3 ग्राम और मिस्री 6 ग्राम इन सबको पीसकर लुगदी सी बना लें और 3 बार मुंह में रखकर खालें और ऊपर से 250 मिली लीटर दूध पी लें। 40 दिन तक खाने से वीर्य बढ़ता है और संभोग से ख़त्म शक्ति बढ़ती है।
  107. सिरिस के फूलों का रस 20 से 40 मिली लीटर की मात्रा में सुबह - शाम मिस्री मिले दूध के साथ खाने से लाभ होगा और इससे शीघ्रपतन में भी लाभ होगा।
  108. सिरिस के बीज का चूर्ण 1 से 2 ग्राम को मिस्री मिले दूध के साथ सुबह - शाम लेने से वीर्य गाढ़ा होता है।
  109. सिरिस की छाल का चूर्ण 3 से 6 ग्राम घी में शक्कर मिलाकर गर्म दूध के साथ 2 बार खाऐं। अगर फूलों का रस, बीज का चूर्ण और छाल का चूर्ण एक साथ मिस्री मिले दूध के साथ खाया जाए, तो शरीर की कमजोरी दूर हो जाती है।
  110. सिरस के थोड़े से बीज सुखाकर पीस लें। इसमें 3 ग्राम चूर्ण सुबह - शाम दूध के साथ खाने से लाभ होता है।
  111. नपुंसक व्यक्ति को मुनक्का खाने से वीर्य की वृद्धि होती है।
  112. नपुंसकता में अंबर आधा से एक ग्राम सुबह - शाम मिस्री मिले दूध के साथ खाने से लाभ होता है।
  113. उटंगन के बीज, जो चपटे और रोमाच्छादित होते हैं, पानी में भिगोनें पर काफी लुआबदार हो जाते हैं। इनको शतावरी, कौंच बीच चूर्ण आदि के साथ सुबह शाम मिस्री मिले गर्म - गर्म दूध के साथ सेवन करने से काफी लाभ होता है।
  114. बहमन सफेद या बहमन सुर्ख की जड़ का चूर्ण 3 से 6 ग्राम सुबह और शाम मिस्री को मिलाकर गर्म - गर्म दूध से खाने से कामोद्दीपन होता है।
  115. ब्रहमदण्डी का रस 10 से 20 मिलीलीटर सुबह शाम शहद के साथ सुबह - शाम खाने से पुरुषत्व शक्ति बढ़ती है।
  116. सालव मिस्री का कनद चूर्ण 3 से 6 ग्राम सुबह - शाम खाने से नपुंसकता दूर होती है।
  117. हरमल के बीज का चूर्ण 2 से 4 ग्राम मिस्री को मिलाकर गर्म - गर्म दूध के साथ सुबह - शाम लेने से लाभ होता है।
  118. आम की मंजरी 5 ग्राम की मात्रा में सुखाकर दूध के साथ लेने से काम शक्ति बढ़ती है।
  119. 2 - 3 महीने आम का रस पीने से ताक़त आती है। शरीर की कमजोरी दूर होती है और शरीर मोटा होता है। इससे वात संस्थान (नर्वस सिस्टम) भी ठीक हो जाता है।
  120. रोज़ मीठे अनार के 100 ग्राम दानों को दोपहर के समय खाने से संभोग शक्ति बढ़ाती है।
  121. पिप्पली, उड़द, लाल चावल, जौ, गेहूं। सब को 100 - 100 ग्राम की मात्रा में लेकर आटा पीसकर फिर इसको देशी घी में पूरियां बनाकर, रोज़ 3 पूरियां 40 दिन तक खाऐं। ऊपर से दूध पी लें। इससे नपुंसकता दूर हो जाती है।
  122. आंवलों का रस निकाल कर एक चम्मच आंवले के चूर्ण में मिलाकर लें। उसमें थोड़ी सी शक्कर (चीनी) और शहद मिलाकर घी के साथ सुबह - शाम खाऐं।
  123. अरण्ड के बीज 5 ग्राम, पुराना गुड़ 10 ग्राम, तिल 5 ग्राम, बिनौले की गिरी 5 ग्राम, कूट 2 ग्राम, जायफल 2 ग्राम, जावित्री 2 ग्राम तथा अकरकरा 2 ग्राम। इन सबको कूट - पीसकर एक साफ कपड़े में रखकर, पोटली बना लें और इस पोटली को बकरी के दूध में उबालें। दूध जब अच्छी तरह पक जायें, तो इसे ठंड़ा करके 5 दिन तक पियें तथा पोटली से शिश्नि की सिंकाई करें।
  124. मुलेठी, विदारीकन्द, तज, लौग, गोखरू, गिलोय और मूसली। सब चीजे 10 - 10 ग्राम की मात्रा में लेकर पीसकर चूर्ण बना लें। इसमें से आधा चम्मच चूर्ण रोज 40 दिन तक सेवन करें।
  125. नागौरी असगंध और विधारा। दोनों 250 - 250 ग्राम की मात्रा में लेकर इसे पीसकर चूर्ण बना लें। इसमें से 2 चम्मच चूर्ण देसी घी या शहद के साथ लें।
  126. सालम मिस्री, तोदरी सफेद, कौंच के बीजों की मींगी, ताल मखाना, सखाली के बीज, सफेद व काली मूसली, शतावर तथा बहमन लाल। इन सबका 10 - 10 ग्राम की मात्रा में लेकर कूट पीस लें और चूर्ण बना लें। 2 चम्मच रोज़ दूध से 40 दिन तक बराबर खाने से पूरा लाभ होता है।
  127. नारियल कामोत्तेजक है। वीर्य को गाढ़ा करता है।
  128. 15 चिलगोजे रोज़ खाने से नपुंसकता दूर होती है।
  129. शहद और दूध को मिलाकर पीने से धातु (वीर्य) की कमी दूर होती है। शरीर बलवान होता है।
  130. अंकुरित गेहूंओं को बिना पकायें ही खाऐं। स्वाद के लिए गुड़ या किशमिश मिलाकर खा सकते हैं। इन अंकुरित गेहूंओं में विटामिन ´ई` मिलता है। यह नपुंसकता और बांझपन में लाभकारी है।
  131. पिस्ता में विटामिन `ई´ बहुत होता है। विटामिन `ई´ से वीर्य बढ़ता है।
  132. सफेद कनेर की जड़ की छाल बारीक पीसकर भटकटैया के रस में खरल करके 21 दिन इन्द्री की सुपारी छोड़कर लेप करने से तेजी आ जाती है।
  133. किसी कपड़े को आक के दूध में चौबीस घंटे तक भिगोकर रखा रहने दें, उसके बाद निकालकर सुखा लें। फिर उस पर घी लपेट कर 2 बत्तियां बना लें और उसको लोहे की सलाई पर रखे। नीचे एक कांसे की थाली रख दे और बत्तियां जला दें, जो तेल नीचे थाली पर गिरेगा। उसे लिंग पर सुपारी छोड़ कर पूरे पर मलते रहें। आधा घंटे तक, उसके बाद एरण्ड का पत्ता लपेट कर ऊपर से कच्चा धागा बांध दें। इससे हस्तमैथुन का दोष दूर हो जाता है।
  134. लौंग 8 ग्राम, जायफल 12 ग्राम, अफीम शुद्ध 16 ग्राम, कस्तूरी लगभग आधा ग्राम, इनको कूट पीसकर शहद में मिलाकर आधे आधे ग्राम की गोलियां बनाकर रख लें। 1 गोली बंगला पान में रखकर खाने से स्तम्भन होता है। अगर स्तम्भन ज्यादा हो जाऐ, तो खटाई खा ले। स्खलन हो जायेगा।
  135. चमेली के पत्तों का रस तिल के तेल की बराबर की मात्रा में मिलाकर आग पर पकाएं। जब पानी उड़ जाए और केवल तेल शेष रह जाए, तो इस तेल की मालिश शिश्न पर सुबह - शाम प्रतिदिन करना चाहिए। इससे नपुंसकता और शीघ्रपतन नष्ट हो जाता है।
  136. ढाक की जड़ का काढ़ा आधा कप की मात्रा दिन में 2 बार पीने से, बीज का तेल शिश्न पर मुण्ड छोड़कर मालिश करते रहने से कुछ ही दिनों में लाभ मिलता है।
  137. हींग को शहद के साथ पीसकर शिश्न या लिंग पर लेप करने से वीर्य ज्यादा देर तक रुकता है और संभोग करने में आंनद मिलता है।
  138. मालकांगनी के तेल को पान के पत्ते पर लगा कर रात में शिशन (लिंग) पर लपेटकर सो जाऐं और 2 ग्राम बीजों को दूध की खीर के साथ सुबह - शाम सेवन करने से लाभ मिलता है।
  139. छुआरों के अन्दर की गुठली निकाल कर उनमें आक का दूध भर दे, फिर इनके ऊपर आटा लपेट कर पकायें, ऊपर का आटा जल जाने पर छुआरों को पीसकर मटर जैसी गोलियां बना लें, रात्रि के समय 1 - 2 गोली खाकर तथा दूध पीने से स्तम्भन होता है।
  140. आक की छाया सूखी जड़ के 20 ग्राम चूर्ण को 500 मिली लीटर दूध में उबालकर दही जमाकर घी तैयार करें, इसके सेवन से नामर्दी दूर होती है।
  141. आक का दूध असली मधु और गाय का घी, समभाग 4 - 5 घंटे खरल कर शीशी में भरकर रख लें, इन्द्री की सीवन और सुपारी को बचाकर इसकी धीरे धीरे मालिश करें और ऊपर से खाने का पान और एरण्ड का पत्ता बांध दें, इस प्रकार सात दिन मालिश करें। फिर 15 दिन छोड़कर पुन: मालिश करने से शिश्न के समस्त रोंगों में लाभ होता है।
  142. मुलहठी का पीसा हुआ चूर्ण 10 ग्राम, घी और शहद में मिलाकर चाटने से और ऊपर से मिस्री मिले गर्म गर्म दूध पीने से नपुंसकता में लाभ होता है।
  143. जटामांसी, सोठ, जायफल और लौंग। सबको समान मात्रा में लेकर पीस लें। 1 - 1 चम्मच की मात्रा में दिन में 3 बार खाऐं।
  144. आधा चम्मच काकड़ासिंगी कोष का बारीक चूर्ण एक कप दूध के साथ सुबह - शाम सेवन कराते रहने से कुछ हफ्ते में नपुंसकता में पूरा लाभ मिलेगा।
  145. कलौंजी के तेल को शिश्न व कमर पर नियमित रूप से सुबह - शाम कुछ हफ्तों तक मालिश करते रहने से यह रोग दूर हो जायेगा।
  146. सफेद कनेर की 10 ग्राम जड़ को पीसकर 20 ग्राम वनस्पति घी में पकायें। फिर ठंड़ा करके जमने पर इसे शिश्न पर सुबह - शाम लगाने से नपुंसकता में आराम मिलता है।
  147. रोगी के लिंग पर पान के पत्ते बांधने से और पान के पत्ते पर मालकांगनी का तेल 10 बूंद लगाकर दिन में 2 से 3 बार कुछ दिन खाने से नपुंसकता दूर होती है। इस प्रयोग के दौरान दूध, घी का अधिक मात्रा में सेवन जारी रखें।
  148. ध्वज भंग रोग में पान को चबाने से और रोगी के लिंग पर बांधने से लाभ होता है।
  149. घी में कपूर को घिसकर शिशन (पेनिस) के ऊपर मालिश करें। प्रयोग रोज़ कुछ हफ्ते तक करें।
  150. नोट : खटाई और बादीयुक्त समान ना खाऐं। औषधि खाने के साथ दूध और घी का प्रयोग ज्यादा करें।
  151. ध्यान रहे -आयुर्वेदिक चिकित्सक से विचार - विमर्श ज़रूर कर ले।
साभार:उपचार स्वास्थ्य और प्रयोग
- See more at: http://www.samaybhaskar.com/health/dtl/an-infallible-prescription-treatment-of-impotence#sthash.IlQktul2.dpuf
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आयुर्वेद और कामसूत्र Click4Source
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नामर्दी के लिये शक्तिशाली प्रयोग--Click4Source
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Impotence-नामर्दी के लिए Powerful-शक्तिशाली प्रयोग

बहुत से पाठक गण ने बार-बार हमें पौरुष शक्ति (Masculine Power) बढ़ाने के लिए कुछ अचूक उपाय पूछते रहते है जबकि वास्तविकता ये है कि पहले के लोगों की अपेक्षा आज का दूषित खान-पान ही मनुष्य की दिनों-दिन बढती कमजोरी का कारण है जो लोग वास्तव में अपनी पौरुष कमजोरी को दूर करना चाहते है, उनको सबसे पहले अपने खान-पान पर विशेष ध्यान देना होगा तभी दिए गए नुस्खों का पूर्ण-प्रभाव होता है-

खोई स्टेमिना(Stamina)के लिए-

Impotence-नामर्दी के लिए Powerful-शक्तिशाली प्रयोगएक किलो Tamarind (इमली) के बीजों को पांच-सात दिनों तक पानी में भीगे पड़े रहने दें इसके पश्चात उन बीजों को पानी से निकालकर और उनके छिलके उतारकर ठीक तरह से पीस लें-अब आप इसके वजन से दो गुना पुराने गुड़ को मिलाकर इसे आटे की तरह गूंथ लें और फिर इसकी बेर के बराबर गोलियां बना कर रख लें-सेक्स क्रिया करने के दो घंटे पहले इसे दूध के साथ इस्तेमाल करें- इस तरह का उपाय सेक्स करने की ताकत को ये और अधिक मजबूत बनाता है Tamarind Seeds(इमली के बीज) पंसारी से आसानी से मिल जाता है लेकिन देसी इमली के बीज ही ले -

ताकत (Strength) बढ़ाने वाला शक्तिशाली चूर्ण-


सामग्री-

Black Basil Seeds (काली तुलसी का बीज)- 25 ग्राम,
Ground Mishri (पिसी हुई मिश्री)- 30 ग्राम
Real Pyllitory Root (असली अकरकरा)- 5 ग्राम

आप इन सभी को मिलाकर ठीक तरह से कूट-पीस कर किसी एक शीशी में रख दें और रात को भोजन करने के 2 घंटा पहले 10 ग्राम चूर्ण को खाकर ऊपर से एक गिलास ठंडा पानी पी लें- रात के समय भोजन करने के दो घंटे के पश्चात संभोग क्रिया करें-यह चूर्ण पौष्टिक और यौन शक्ति को बढ़ाने वाला होता है-इसका दो हफ्ते (सप्ताह) तक विस्तृत रुप से इस्तेमाल करें- इस चूर्ण का प्रयोग करने तक हो सके तो सेक्स क्रिया न करें-

नामर्दी (Impotency) को दूर करने वाला प्रयोग-

सामग्री-
Black Basil Seeds (काली तुलसी के बीज)- 50 ग्राम
Shivlingi Seeds (शिवलिंगी के बीज)- 50 ग्राम
Semal Seeds (सेमल के बीज)- 50 ग्राम
Kiranti Seeds (खिरैंटी के बीज)- 50 ग्राम
Black Kaunch Seeds (काली कौंच के बीज)- 50 ग्राम
Gangern Dried Root Bark (गंगेरन के जड़ की सूखी छाल)- 50 ग्राम
Chironji Root Bark (चिरौंजी की जड़ की छाल)- 50 ग्राम
Ground Mishri (पिसी मिश्री) -175 ग्राम

आप इन सभी 350 ग्राम सामग्री को मिलाकर बराबर मात्रा में लेकर कूट-पीस लें और इस सब मिश्रण में 175 ग्राम मिश्री को मिलाकर कांच के किसी बर्तन में डाल लें अब इस पावडर से 10 ग्राम दवा रात को सोते समय लेकर ऊपर से एक गिलास दूध पी लें- इस मिश्रण को प्रतिदिन एक महीने तक इस्तेमाल करें- इस मिश्रण को जब तक लेते रहें तब तक अधिक तेल-मसालेदार, चिकनाईयुक्त, भारी भोजन एवं खट्टे पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए- इसके अंर्तगत सेक्स क्रिया नहीं करनी चाहिए- एक महीने तक इसका सेवन करने से यह शरीर में बहुत अधिक शक्ति पैदा कर देता है-

कमजोरी (Weakness) के लिए पौष्टिक खीर-

सबसे पहले बिना छिलके वाली उड़द की दाल को रात के समय में थोड़े से पानी में भिगोकर रख दें और सुबह के समय में इस दाल को निकालकर मिक्सी में पीस लें-इसके बाद इसको दो चम्मच शुद्ध गाय के देशी में गुलाबी होने तक भूनें- फिर इसके बाद 250 ग्राम गर्म दूध कर लें-जब दूध उबलने लग जाए तब उसमें भुनी हुई उड़द की दाल डालकर इसे चम्मच से तक तक चलाते रहें जब तक यह गाढ़ा न हो जाएं- गाढ़ा हो जाने पर इसको नीचे उतार लें- फिर ठंडा हो जाने पर इसके अंदर दो चम्मच शहद डालकर रोजाना सुबह नाश्ता करते समय इस पौष्टिक खीर का इस्तेमाल करें- इसका सेवन करने से शरीर हष्ट-पुष्ट और ताकतवर बनता है- इस खीर का विस्तृत रुप से सेवन कर सकते हैं- इस खीर को सात दिन में कम से कम दो या तीन बार तो जरुर ही इस्तेमाल करना चाहिए- यह खीर सभी उम्र के लोगों के लिए बहुत ही उत्तम है-खायेगे तभी तो जान पायेगे इसकी ताकत का कमाल -तो फिर कल से ही शुरू करे और कहेगें वाह गुरु जी आपने क्या बता दिया-

शक्ति (Power) वर्धक उपाय-
लगभग आधा लीटर गाय के दूध में 150 ग्राम कौंच के बीज को मिलाकर इसे हल्की आग पर पकाने के लिए रख दें और जब यह दूध अच्छी तरह से पककर गाढ़ा हो जाए तो इसे आग से उतार दें- फिर कौंच के बीजों के छिलके को निकालकर इन्हें सिल-बट्टे पर बारीक पीस लें- इसमें अच्छी तरह से मैदा मिलाकर इसको आटे की तरह गूंथ लें- फिर मैदा को जामुन की तरह से गोलियां बना लें- इस गोली को शुद्ध घी के साथ गुलाबी रंगत आने तक इसको +भूनें- इसके बाद इसको शक्कर की चाशनी में मिलाकर निकाल लें- अब सभी पदार्थ को एक चौड़े मुंह वाले बर्तन में डालकर उस बर्तन में इतना मधु (शहद) डाले कि मैदा से बनी हुई सारी गोलियां उसमें डूब जाएं- इसमें से एक-एक गोली सुबह और शाम को खाली पेट लेना चाहिए और ऊपर से एक गिलास दूध पी लें- इन गोली का प्रयोग करने के एक घंटे के बाद भोजन को करना चाहिए- यह गोली बुजुर्ग और शादी-शुदा पुरुष दोनों के लिए बहुत ही फायदेमंद है- जिन पुरुषों के शिश्न (लिंग) में तनाव उत्पन्न नहीं होता या वे पुरुष जिनका वीर्य जल्दी ही निकल जाता है उन पुरुषों के लिए यह एक बहुत ही कामगारी उपाय है-

वीर्य (Semen) वर्धक पौष्टिक चूर्ण-
अधिकतर पुरुष काफी मात्रा में अधिक संभोग करते हैं जिसके कारण उनके वीर्य की मात्रा में अधिक कमी और उनके शुक्राणुओं में अधिक दुर्बलता हो जाती है- उसके लिए 2-2 ग्राम दालचीनी का बारीक चूर्ण लेकर दूध के साथ सुबह और शाम के समय में इस्तेमाल करना चाहिए- इस चूर्ण का दो महीनों तक प्रयोग करने से इसका लाभ दिखाई देने लगेगा- इसका नियमित रुप से भी इस्तेमाल कर सकते हैं- इसका प्रयोग करने से कोई साइड या बाहरी प्रभाव नहीं पड़ता है- इसके इस्तेमाल करने से वीर्य की तादाद बहुत अधिक बढ़ जाती है- इस चूर्ण के प्रयोग करने से शुक्राणुओं की मात्रा भी बढ़ती है और इसकी संख्या में भी बढ़ोत्तरी होती है-

उत्तेजक (Stimulants) क्षीरपाक-
पीपल की कोमल जड़ और पीपल का फल- इन दोनों को 25-25 ग्राम की मात्रा में लेकर इसको चटनी की तरह से बना लें- फिर इसमें 400 ग्राम पानी और 100 ग्राम दूध मिलाकर इसे हल्की आंच पर रखकर तब तक उबालें जब तक की पानी की मात्रा अच्छी तरह से जल न जाएं- पानी के जलने के बाद जब दूध बाकी रह जाए तो इस दूध को छानकर आधा सुबह और आधा शाम के समय प्रयोग में लाएं- जो पुरुष लिंग में उत्तेजना न आने की वजह से चिंता में रहते हैं उन व्यक्तियों के लिए यह उपयोग बहुत ही अधिक लाभदायक है-

वीर्य (Semen) शुद्धिकरण चू्र्ण-
बबूल का गोंद, बबूल की बिना बीजों वाली कच्ची फलियां और बबूल की कोमल पत्तियां- इन तीनों को बराबर मात्रा में लेकर छाया में सुखाकर अलग-अलग करके कूट लें-फिर तीनों को बराबर-बराबर लेकर आपस में मिला लें- रोजाना के समय एक चम्मच पिसी हुई मिश्री लेकर इसे एक चम्मच चूर्ण के साथ मिलाकर खा लें- फिर इसके ऊपर से एक गिलास गर्म दूध पी लें-इसका इस्तेमाल दो महीने तक विस्तारपूर्वक करने से इससे काफी अधिक फायदा मिलता है-यह वीर्य को अधिक गाढ़ा बनाता है-यह रात को होने वाले स्वप्न रोग, वीर्य का जल्दी गिरना और यौनांग के ढीलेपन एवं कमजोरी जैसे रोगों को समाप्त कर देता है-

सम्पूर्ण कारक (Total Factor) चूर्ण-
आंवला, रुदंती, गिलोय सत्व, अश्वगंधा, हरड़, शतावर, चव्य, नागबला, वृद्धादारु, ब्राह्नी, प्रियंगु, वच, बिदारीकंद, जीवंती, पुनर्नवा, मेदा, महामेदा, काकोली, क्षीर काकोली, जीवन ऋषभक, मुग्दपर्णी, माषपर्णी, कौंच के बीज, तुलसी के बीज, सेमल, मूसली, काकनासा, पिपली बड़ी, जटामांसी, शंखपुष्पी, तालमखाना, सोनापाठा, अंनतमूल, मुलहठी, विधारा, अमलबेत, सोंठ तथा श्वेत चंदन- इन सभी पदार्थों को 50-50 ग्राम की मात्रा में लेकर अच्छी तरह से कूटकर कपड़े से छान लें-इसके अंदर वसंत कुसुमाकर रस तथा सिद्ध चंद्रोदय नं. 1- इन दोनों को भी लेकर 25-25 ग्राम डालकर अच्छी तरह से इसमें मिला दें-इस चूर्ण को आधा-आधा चम्मच की मात्रा में सुबह और शाम के समय में लें-फिर ऊपर से गर्म दूध का इस्तेमाल करें-इस चूर्ण को विस्तारपूर्वक रोजाना तीन महीनों तक खाना चाहिए-फिर इसका इस्तेमाल तीन महीनों के लिए रोककर रखें- इसके बाद फिर तीन महीनों तक इस चूर्ण को लें- इस चूर्ण के प्रयोग से सेक्स क्रिया करने में पूर्ण रुप से सुख की प्राप्ति होती है- यह चूर्ण अधिक पौष्टिक होता है-इस चूर्ण का इस्तेमाल उच्च रक्तचाप, ह्रदय के रोगी तथा शूगर के रोगियों को नहीं करना चाहिए-
Source : http://www.upcharaurprayog.com/2016/10/Powerful-use-for-impotence.html

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--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!

--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!
सभी के स्वस्थ एवं सुदीर्घ जीवन की कामना के साथ-मेरे प्यारे और दुलारे तीन बच्चों की ममतामयी अद्वितीय माँ (मम्मी) जो दुखियों, जरूतमंदों और मूक जानवरों तक पर निश्छल प्यार लुटाने वाली एवं अति सामान्य जीवन जीने की आदी महिला थी! वह पाक कला में निपुण, उदार हृदया मितव्ययी गृहणी थी! मेरी ऐसी स्वर्गीय पत्नी "जानकी मीणा" की कभी न भुलाई जा सकने वाली असंख्य हृदयस्पर्शी यादों को चिरस्थायी बनाये रखते हुए इस ब्लॉग को आज दि. 08.08.12 को फिर से पाठकों के समक्ष समर्पित कर रहा हूँ!-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'

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Cucumber कब्जी कमजोरी कमर दर्द करेला कर्ण वेदना कर्णरोग कष्टार्तव-Dysmenorrhea कांच निकलना काजू कान कानून सम्मत काम काम शक्ति कामशक्ति कामशक्ति-Sexual power कामोत्तेजना कायाकल्प कार्बोहाइड्रेट कार्बोहाइड्रेट-Carbohydrates काला जीरा काला नमक काली जीरी काली तुलसी काले निशान कास-खांसी-Cough किडनी किडनी स्‍टोन कीड़े कुकरौंधा कुकुंदर कुटकी-Black Hellebore कुबडापन कुल्थी कुल्ला कुष्ठ कृमि केला केसर कैफीन-Caffeine कैलोरी कैलोरी चार्ट कैलोरी-Calories कैवांच कैविटी कैंसर कॉफी कॉफ़ी कोंडी घास कोढ़ कोबरा कोलेस्ट्रॉल कोलेस्ट्रॉल-Cholesterol कोलेस्ट्रोल कौंच कौमार्य क्रियाशीलता क्रोध क्षय रोग-Tuberculosis क्षारीय तत्व क्षुधानाश खजूर खजूर की चटनी खनिज खरबूजा-Musk melon खरेंटी खरैंटी शिलाजीत खांसी खिरेंटी खिरैटी खीरा खुजली खुशी-Joy खुश्की खुश्बू खोया गंजापन-Baldness गठिया गठिया-Arthritis गठिया-Gout गड़तुम्बा गंध गन्ने का रस गरमा गरम गर्भधारण गर्भपात गर्भवती गर्भवती कैसे हों? गर्भावस्था गर्भावस्था की विकृतियां-Disorders of Pregnancy गर्भावस्था के दौरान संभोग-Sex During Pregnancy गर्भावस्था-Pregnancy गर्भाशय गर्भाशय-उच्छेदन के साइड इफेक्ट्स-Side Effects of Hysterectomy गर्म पानी गर्मी गर्मी-Heat गाजर गाजवां गांठ गाँठ-Knot गिलोय गिल्टी गुंदा गुदाभ्रंश गुर्दे गुलज़ाफ़री गुस्सा गृध्रसी गृह-स्वामिनी गैस गैस्ट्रिक गोक्षुरादि चूर्ण गोखरू गोखरू (LAND CALTROPS) गोंद कतीरा-Hog-Gum गोंदी गोभी-Cabbage गोरख मुंडी गोरखमुंडी ग्रीन-टी घमोरी घाघरा घाव चकवड़ चक्कर चपाती चमत्कारिक सब्जियां चर्बी चर्म चर्म रोग चर्मरोग चाय चाय-Tea चालीस के पार-Forty Across चिकनगुनिया चिकित्सकीय चिरायता-Absinth चिरोटा चुंबन चोक चौलाई छपाकी छरहरी काया छाछ छाले छीकें छुआरा छुहारा छोटा गोखरू छोटा धतूरा छोटी हरड़ जंक फूड जकवड़ जंगली-कटीली चौलाई जटामांसी-Spikenard जलजमनी जलन जलोदर रोग-Ascites Disease जवारा जवारे जवासा-Alhag जहर जामुन का जूस जायफल जिगर जीरा जीवन रक्षक जीवनी शक्ति जुएं जुकाम जुलाब जूएं जूस जूस-Juice जोड़ों के दर्द जोड़ों में दर्द जौ ज्यूस ज्योति ज्वर ज्वर-Fiver झाइयाँ झांईं झुर्रियाँ झुर्रियां झुर्री झूठे दर्द टमाटर का रस टमाटर-Tomatoes टाइफाइड टायफायड टूटी हड्डी टॉन्सिल टोटला ट्यूमर ठेकेदार डॉक्टर डकार डायबिटीज डायरिया डिटॉक्सीफाई डिटॉक्सीफिकेशन डिनर डिब्बाबंद भोजन डिलेवरी डीकामाली डीगामाली डेंगू डेंगू-Dengue डॉ. निरंकुश डॉ. मीणा ढीलापन ढीली योनि तकलीफ का सही इलाज तरबूज-Watermelon तलाक ताकत तिल तिल्ली तुंबा तुंबी तुलसी तेल त्रिदोषनाशक त्रिफला त्वचा त्वचा रोग थकान थाईरायड थायरायड-Thyroid थायरॉइड दण्डनीय अपराध दंत वेदना दन्तकृमि दन्तरोग दमा दर वेदना दर्द दर्द निवारक दवा दर्दनाक दस्त दही दाग-धब्बे-Stains-Spots दाढ़ दांत दांतो में कैविटी-Teeth Cavity दाद दाम्पत्य दाम्पत्य विवाद सलाहकार दाम्पत्य-Conjugal दाल दालचीनी दालें दिल दुर्गंध दुर्बलता दुष्प्रभाव दुष्प्रभावरहित दूध दूध वृद्धि दूधी दूधी-Milk Hedge दृष्टिदोष द्रोणपुष्पी-Leucas Cephalotes धड़कन धनिया बीज धनिया-Coriander धमासा धातु धातु पतन धार्मिक धैर्यहीन नज़ला नपुंसकता नाक नाखून नागबला नागरमोथा नाडी हिंगु नाड़ी हिंगु (डिकामाली) नामर्दी नारकीय पीड़ा नारियल नाश्ता निमोनिया निम्न रक्तचाप निम्बू नियासिन निराश निरोगधाम निर्गुण्डी निसोरा नींद नींबू नींबू-Lemon नीम-azadirachta indica नुस्खे नुस्खे-Tips नेगड़ नेगड़-निर्गुन्डी-Vitex negundo नेत्र रोग नैतिक नोनिया नौसादर न्युमोनिया-Pneumonia पक्षघात पढ़ने में मन लगेगा पंतजलि पत्तागोभी-CABBAGE पत्थर फोड़ी पत्थरचट्टा पत्नी पथरी पदार्थ पनीर पपीता पपीता-CARICA PAPPYA पमाड परदेशी लांगड़ी परहेज पराठा परिस्थिति पवाड़ पवाँर पाइल्स पाक-कला पाचक पाचन पाठक संख्या 16 लाख पार पाठक संख्या पंद्रह लाख पायरिया पारिजात पालक पालक-Spinach पित्त पित्ती पिंपल-मुंहासे-Pimples-Acne पिरामिड पीलिया पीलिया-Jaundice पीलिया-कामला-Jaundice पुआड़ पुदीना पुनर्नवा-साटी-सौंटी-Punarnava पुरुष पेचिश पेट के कीड़े पेट दर्द पेट में गैस पेट रोग पेड़ पेशाब में रुकावट पेंसिल थेरेपी-Pencil Therapy पौधे पौरुष पौष्टिक रागी रोटी प्याज-Onion प्यास प्रजनन प्रतिरक्षा प्रतिरक्षा प्रणाली प्रतिरोधक प्रतिरोधक-Resistance प्रदर प्रमेह प्रवाहिका (पेचिश)-Dysentery प्रसव प्रसव सुरक्षा चक्र प्रसव-पीड़ा प्रसूति प्राणायाम प्रेग्नेंसी-Pregnancy प्रेमिका प्रोटीन प्रोटीन का कार्य प्रोटीन के स्रोत प्रोस्टेट ग्रन्थि प्लीहा प्लूरिसी-Pleurisy प्लेटलेट्स फफूंद-Fungi फरास फल फल-Fruit फाइबर फिटकरी फुंसी-Pimples फूलगोभी-CAULIFLOWER फेंफड़े फैट फैटी लीवर फोटोफोबिया फोड़ा फोड़े-Boils फोलिक एसिड फ्लू फ्लू-Flu फ्लेक्स सीड्स बकायन बकुल बड़ी हरड़ बथुआ बथुआ पाउडर बथुआ-White Goose Foot बदबू बबूल-ACACIA बरसाती बीमारियाँ बरसाती बीमारियां बलगम बलवृद्धि बला बलात्कार बवासीर बहरापन बहुनिया बहुमूत्रता- बांझपन बादाम-Almonds बादाम. बाल बाल झड़ना बाल झडऩा-Hair Falling बिना सिजेरियन मां बनें बिवाई बीजबंद बीमारियों के अनुसार औषधियां बीमारी बुखार बूंद-बूंद पेशाब बेल बेली बैक्टीरिया ब्र​ह्मदण्डी ब्रेस्ट ग्रोथ ब्लड प्रेशर ब्लैक मेलिंग ब्लॉकेज भगंदर भगंदर-Fistula-in-ano भगनासा भगोष्ठ भड़भांड़ भय भविष्य भस्मक रोग भावनात्मक भुई आंवला-Phyllanthus Niruri भूई आमला भूई आंवला भूख भूख बढ़ाने भूमि भूमि आंवला भोजनलीवर मकोय मकोय-Soleanum nigrum मंजीठ मटर-PEA मंद दृष्टि मंदाग्नि मदार मधुमेह मधुमेह-Diabetes मन्दाग्नि-Dyspepsia मरुआ मर्द मर्दाना मलेरिया मलेरिया (Malaria) मसाले मस्तिष्क मस्से मस्से-WARTS महत्वपूर्ण लेख महाबला माइग्रेन माईग्रेन माईंड सैट माजूफल मानसिक मानसिक लक्षण मानसिक-Mental मानिसक तनाव-Mental Stress मायोपिया मासिक मासिक-धर्म मासिकधर्म मासिकस्राव माहवारी मिनरल मिर्गी मिर्च-Chili मीठा खाने की आदत मुख मैथुन-ओरल सेक्स-Oral Sex मुधमेह मुलहठी मुलेठी मुहाँसे मूँगफली मूड डिस्ऑर्डर-Mood Disorders मूत्र मूत्र असंयमितता मूत्र में जलन-Burning in Urine मूत्राशय मूर्च्छा (Unconsciousness) मूली मूली कर रस मृत्यु मृत्युदण्ड मेथी मेथी दाना मेंहदी मैथुन मोगरा (Mogra) मोटापा मोटापा-Obesity मोतियाबिंद मौत मौलसिरी मौसमी बीमारियां यकृत यकृत प्लीहा यकृत वृद्धि-Liver Growth यकृत-लीवर-जिगर-Lever यूपेटोरियम परफोलियेटम यूरिक एसिड लेबल योग विज्ञापन योन योनि योनि ढीली योनि शिथिल योनि शूल-Vaginal Colic योनि संकोचन योनी योनी संकोचन यौन यौन आनंद यौन दौर्बल्य यौनशक्ति यौनशिक्षा यौनसुख यौनानंद यौनि रक्त प्रदर (Blood Pradar) रक्त रोहिड़ा-TECOMELLA UNDULATA रक्तचाप रक्तपित्त रक्तशोधक रक्ताल्पता रक्ताल्पता (एनीमिया)-Anemia रस-juices रातरानी Night Blooming Jasmine/Cestrum nocturnum रामबाण रामबाण औषधियाँ-Panacea Medicines रुक्षांश रूढिवादी रूसी रूसी मोटापा रेचक रेठु रोग प्रतिरोधक लकवा लक्षण लक्ष्मी लंच लसोड़ा लस्सी लहसुन लहसुन-Garlic लाइलाज लाइलाज का इलाज लाक्षणिक जानकारी लाभ लिंग लिंग प्रवेश लिसोड़ा लीकोरिया लीवर लीवर-Liver लू-hot wind लैंगिक लोनिया लौकी लौंग की चाय ल्युकोरिया ल्यूकोरिया ल्यूज योनी वजन वज़न वजन कम वजन बढाएं-Weight Increase वन/जंगली तुलसी वनौषधियाँ वमन वमन विकृति-Vomiting Distortion वसा वात वात श्लैष्मिक ज्वर वात-Rheumatism वायरल वायरल फीवर वायरल बुखार-Viral Fever वासना विटामिन विधारा वियाग्रा-Viagra विरह वेदना विलायती नीम विष विष हरनी विषखपरा वीर्य वीर्य वृद्धि वीर्यपात वृक्कों (गुर्दों) में पथरी-Renal (Kidney) Stone वृक्ष वैज्ञानिक वैधानिक वैवाहिक जीवन वैवाहिक जीवन-Marital वैवाहिक रिश्ते वैश्यावृति व्यायाम शंखपुष्पी शरपुंखा शराब शरीफा-सीताफल-Custard apple शर्करा शलगम-Beets शल्यक्रिया शहद शहद-Honey शारीरिक शिथिलता शीघ्र पतन शीघ्रपतन शुक्राणु-Sperm शुक्राणू शुगर शोथ श्योनाक श्रेष्ठतर श्वास श्वांस श्वेत प्रदर श्वेत प्रदर-Leucorrhea श्वेतप्रदर षड़यंत्र संकुचन संकोच संक्रमण संखाहुली संतरा-Orange संतान संतुष्टि सत्यानाशी सदा सुहागन सदाफूली सदाबहार सदाबहार चूर्ण सनबर्न सफ़ेद दाग सफेद पानी सब्जि सब्जियां-Vegetables सब्जी संभालू संभोग समर्पण-Dedication सरकार को सुझाव सरफोंका सरहटी सर्दी सर्दी जुकाम-Cold सर्पक्षी सर्पविष सलाद संवेदना सहदेई सहदेवी साइटिका साइटिका-Sciatica साइड इफेक्ट्स साबूदाना-Sago सायटिका सिजेरियन सिर दर्द सिर वेदना सिरका सिरदर्द सिरोसिस सीजर डिलेवरी सुगर सुदर्शन सुहागा सूखा रोग सूजन सेक्स सेक्स परामर्श-Sex Counseling सेक्स पावर सेक्स समस्या सेक्स हार्मोन सेक्‍स-Sex सेंधा नमक सेब सेमल-Bombax Ceiba सेल्स सोजन-सूजन सोंठ सोना पाठा सोयाबीन सोयाबीन (Soyabean) सोयाबीन-Soyabean सोराइसिस सोरियासिस-Psoriasis सौंठ सौंदर्य सौंदर्य-Beauty सौन्दर्य सौंफ सौंफ की चाय सौंफ-Fennel स्किन स्तन स्तन वृद्धि स्तनपान स्तम्भन स्त्री स्त्रीत्व स्त्रैण स्वप्न दोष स्वप्नदोष स्वप्नदोष-Night Fall स्वभाव स्वभावगत स्वरभंग स्वर्णक्षीरी स्वस्थ स्वास्थ्य स्वास्थ्य रक्षक सखा हजारदानी हड़जोड़ हड्डी हड्डी में दर्द हड्डीतोड़ ज्वर हड्डीतोड़ बुखार हरड़ हरसिंगार हरी दूब-CREEPING CYNODAN हरीतकी हर्टबर्न हस्तमैथुन हस्तमैथुन-Masturbation हारसिंगार हालात हिचकी हिचकी-Hiccup हिमोग्लोबिन-hemoglobin हिस्टीरिया हिस्टीरिया-Hysteria हींग 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