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Online Dr. P.L. Meena (डॉ. पुरुषोत्तम लाल मीणा)

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एलर्जी का उपचार

एलर्जी का उपचार
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>>>>>एलर्जी (Allergy) एवं अतिसंवेदनशीलता (Oversentiveness) : किसी भी वस्तु का अनुभव करना संवेदनशीलता कहलाता है और जो व्यक्ति अधिक संवेदनशील होता है, उसे छोटी सी व्स्तु भी बहुत बड़ी महसूस होती है, अधिक संवेदनशीलता होने के कारण रोग ग्रस्त स्थान पर हल्का सा छू देने से भी तेज दर्द होता है और छू जाने के डर से भी रोगी काँप उठता है। इस तरह हल्का सा छूने से उत्पन्न दर्द आदि को ही अतिसंवेदनशीलता कहते है।

>>>>>कभी-कभी संवेदनशीलता गंभीर परेशानी का सबब बन जाती है, जब हमारा शरीर किसी पदार्थ के प्रति अतिसंवेदनशीलता दर्शाता है तो इसे एलर्जी कहा जाता है और जिस पदार्थ के प्रति प्रतिक्रिया दर्शाई जाती है, उसे एलर्जेन [Allergens= A substance (पदार्थ) that causes an allergic reaction (एलर्जी की प्रतिक्रिया)] कहा जाता है। इस रोग के कारण रोगी के शरीर पर छोटे-छोटे दाने निकल आते है और कभी-कभी तो इन दानों के साथ शरीर में खुजली भी मचने लगती है। इस रोग के कारण कभी-कभी रोगी के गाल तथा शरीर की त्वचा शुष्क हो जाती है।

एलर्जी की प्रतिक्रियाएं :

>>>>>अस्थमा (asthma), राइनाइटिस (Rainaitis/नासा शोध), एक्जिमा (Eczema/शरीर पर दाग धब्बे निकल जाना), माइग्रेन (आधे सर का दर्द ), पाचन संबंधी विकार (भोजन पचने में परेशानी)। इसके अलावा इस रोग के कारण व्यक्तियों को अन्य अनेक प्रकार की बीमारियां भी होती देखी जाती हैं, जो की हृदय रोग, अल्सर, दमा, एक्जिमा व मधुमेह आदि, एलर्जी के कारण रोगी एनाफाएजेटिक शॉक में भी जा सकता है और आपात्कालीन स्थिति निर्मित हो सकती है।

एलर्जी होने के कारण :
1. प्राकृतिक चिकित्सा के अनुसार एलर्जी उन लोगों को होती है, जिनके शरीर में रोगों से लड़ने की प्रतिरोधक शक्ति कम हो जाती है।
2. यह रोग नशीले पदार्थों के सेवन, हानिकारक पदार्थ का पेट में चले जाना, पेट में कीड़े होना तथा रसायन युक्त भोजन का सेवन, सोंदर्य प्रसाधनों, किसी विशेष प्रकार का भोजन ग्रहण करने के कारण हो सकता है।
3. औषधियों का अधिक प्रयोग करने के कारण भी एलर्जी हो सकती है।
4. चीनी का अधिक सेवन करना या इससे बनी मिठाइयों का सेवन करने से भी एलर्जी रोग हो सकता है।
5. सिंथेटिक कपडे पहनने तथा अत्यधिक मानसिक तनाव हो जाने के कारण भी एलर्जी रोग हो सकता है।
6. बीमारी की हालत में अधिक सेक्स करने से भी एलर्जी रोग हो सकता है।
7. अधिक सोड़े वाला साबुन उपयोग करने से भी एलर्जी रोग हो सकता है।
8. कुछ लोगों में एलर्जी का कारण खाद्य पदार्थ होता है-जैसे दूध, दही, मछली, अंडे, गिरीदार फल आदि।
9. एलर्जी गेहू का आटा या चॉकलेट खाने से भी एलर्जी हो सकती है।
10. एंटीबायोटिक दवाइयों का प्रयोग करना तथा ज्वेलरी आदि से भी एलर्जी हो सकती है.

स्थानानुसार एलर्जी के लक्षण :

1. नाक की एलर्जी-नाक में खुजली होना, छीकें आना, नाक बहना, नाक बंद होना या बार बार जुकाम होना आदि।
2. आँख की एलर्जी-आखों में लालिमा, पानी आना, जलन होना, खुजली आदि।
3. श्वसन संस्थान की एलर्जी-इसमें खांसी, साँस लेने में तकलीफ एवं अस्थमा जैसी गंभीर समस्या हो सकती हैं।
4. त्वचा की एलर्जी-त्वचा की एलर्जी काफी कॉमन है और बारिश का मौसम त्वचा की एलर्जी के लिए बहुत ज्यादा मुफीद है, त्वचा की एलर्जी में त्वचा पर खुजली होना, दाने निकलना, एक्जिमा, पित्ती उछलना आदि होता है।
5. खान पान से एलर्जी-बहुत से लोगों को खाने पीने की चीजों जैसे दूध, अंडे, मछली, चॉकलेट आदि से एलर्जी होती है।
6. सम्पूर्ण शरीर की एलर्जी-कभी कभी कुछ लोगों में एलर्जी से गंभीर स्थिति उत्पन्न हो जाती है और सारे शरीर में एक साथ गंभीर लक्षण उत्पन्न हो जाते हैं ऐसी स्तिथि में तुरंत हॉस्पिटल लेकर जाना चाहिए।
8. अंग्रेजी दवाओं से एलर्जी-कई अंग्रेजी दवाएं भी एलर्जी का सबब बन जाती हैं। जैसे पेनिसिलिन का इंजेक्शन जिसका रिएक्शन बहुत खतरनाक होता है और मौके पर ही मौत हो जाती है। इसके अलावा दर्द की गोलियां, सल्फा ड्रग्स एवं कुछ एंटीबायोटिक दवाएं भी सामान्य से गंभीर एलर्जी के लक्षण उत्पन्न कर सकती हैं।
9. मधु मक्खी ततैया आदि का काटना–इनसे भी कुछ लोगों में सिर्फ त्वचा की सूजन और दर्द की परेशानी होती है, जबकि कुछ लोगों को इमर्जेन्सी में जाना पड़ जाता है।

एलर्जी से बचाव/Avoidance of Allergens : 
>>>>>एलर्जी से बचाव ही एलर्जी का सर्वोत्तम इलाज है। इसलिए एलर्जी से बचने के लिए इन उपायों का पालन करना चाहिए। य़दि आपको एलर्जी है तो सर्वप्रथम ये पता करें की आपको किन—किन चीजों से एलर्जी है। इसके लिए आप ध्यान से अपने खान-पान और रहन-सहन को वाच करें।
1. घर के आस पास गंदगी ना होने दें।
2. घर में अधिक से अधिक खुली और ताजा हवा आने का मार्ग प्रशस्त करें।
3. जिन खाद्य पदार्थों से एलर्जी है, उन्हें न खाएं।
4. एकदम गरम से ठण्डे और ठण्डे से गरम वातावरण में ना जाएं।
5. बाइक चलाते समय मुंह और नाक पर रुमाल बांधे, आँखों पर धूप का अच्छी क़्वालिटी का चश्मा लगायें।
6. गद्दे, रजाई, तकिये के कवर एवं चद्दर आदि समय—समय पर गरम पानी से धोते रहें।
7. रजाई, गद्दे, कम्बल आदि को समय—समय पर धूप दिखाते रहें।
8. पालतू जानवरों से एलर्जी है तो उन्हें घर में ना रखें।
9. ज़िन पौधों के पराग कणों से एलर्जी है, उनसे दूर रहें।
10. घर में मकड़ी वगैरह के जाले ना लगने दें। समय—समय पर साफ सफाई करते रहें।
11. धूल मिट्टी से बचें, यदि धूल मिट्टी भरे वातावरण में काम करना ही पड़ जाये तो फेस मास्क पहन कर काम करें।

एलर्जी का प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार/Naturopathy Treatment of Allergies :

1-एलर्जी रोग से पीड़ित रोगी का प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार करने के लिए सबसे पहले रोगी को 4-5 दिनों तक निम्बू पानी, नारियल पानी, सब्जियों का रस और फलों के रसों का सेवन करके उपवास रखना चाहिए। इसके बाद एक सप्ताह तक बिना पका हुआ भोजन का सेवन करना चाहिए।
2-इस रोग से पीड़ित रोगी को कभी भी डिब्बाबंद खाद्य,नमक तथा चीनी का सेवन सेवन नहीं करना चाहिए, क्योकि इससे रोग गंभीर हो सकता है।
3-एलर्जी से पीड़ित रोगी को सोयाबीन दूध में डालकर पीना चाहिए, इसका प्रतिदिन सेवन करने से यह रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।
4-एलर्जी के रोगी व्यक्ति कुछ दिनों तक सुबह खाली पेट नीम के पत्तों को पीसकर पानी में मिलाकर पीना चाहिए तथा आधे घंटे तक कुछ भी नहीं खाना चाहिए।
5-प्रतिदिन आंवले के चूर्ण में थोड़ी सी हल्दी मिलाकर पानी के साथ सेवन करने से एलर्जी रोग जल्द ही ठीक हो जाता है।
6-एलर्जी के रोगी को सूर्यतृप्त नीली बोतल का पानी पीना चाहिए।

एलर्जी का होमोयोपेथिक उपचार/Homeopathic Treatment of Allergies :

1. Apis Mellifica : कीट-पतंगों से एलजीं होने तथा सूजन आने पर पर ‘एपिस’ 30 शक्ति का प्रयोग करना चाहिए।
2. अर्जेन्टम नाइट्रिकम/Argentum nitricum 200 : कोई चीज खाने से एलर्जी के लक्षण दिखाई दे तो उपचार के इस औषधि की 30 शक्ति का प्रयोग करना चाहिए। इस औषधि का प्रयोग श्लेष्मिक झिल्ली तथा शरीर के किसी भी अंग पर विशेष कर फेफड़ों पर एलर्जी के प्रभाव को ठीक करने के लिए किया जाता है।
3. ऐसेरम यूरोपम/Asarum Europaeum 200 : कभी-कभी रोगी को आवाज के प्रति संवेदनशीलता आ जाती है, रोगी हलकी आवाजें भी बर्दाश्त नहीं कर पाता, रोगी को हर समय ठण्ड लगती है।
4. आर्सेनिक एल्बम/Arsenic Album 200 : पुराने जुकाम, नजला, छींक आना, नाक से गर्म स्त्राव होना, ठण्ड लगना, समुद्र के किनारे जाने से रोग का बढ़ जाना आदि में उपयोग होता है।
5. आर्सेनिक एल्बम/Arsenic Album 200+3-नक्स-वोमिका/ Nux Vomica-30 : खाद्य पदार्थों से एलर्जी होने पर ‘आर्सेनिक’ 30 शक्ति में व ‘नक्सवोमिका’ 30 शक्ति में।
6. बेलाडोना/Belladonna-30/200 : रोगी को हल्की सी आवाज भी बर्दाश्त नहीं होती, शोर से रोगी गुस्सा हो जाता है। चेहरा लाल पड़ने पर
7. ब्रोमीन-30 : धूल से एलर्जी होने पर ‘ब्रोमीन’ 30 शक्ति में।
8. कैमोमिला/Chamomilla 30 : इस औषधि का सेवन करने से रोगी में दर्द सहन करने की शक्ति बढ़ती है।
9. काफ़िया/Coffea 200 : किसी भी अंग में होने वाले तेज दर्द जिसे रोगी बिलकुल बर्दाश्त नही कर पाता, रोगी दर्द वाले स्थान पर छू जाने का अनुभव करके ही डर जाता है।
10. डल्कामारा/Dulcamara 30 : शरीर पर पित्ती उछलने पर ‘डल्कामारा’ 30 शक्ति में ।
11. इग्नेशिया/Ignatia Amara 30 या 200 : तम्बाकू व धुएं से एलर्जी होने पर ‘इग्नेशिया’ 30 या 200 शक्ति में।
12. नैट्रम म्यूर/Natrum Muriaticum 200 : फूल की गंध, अंडे, प्याज, गेहूं, शहद, दूध, मांस आदि से एलर्जी होने पर इस औषधि का सेवन किया जा सकता है।
13. नैट्रम म्यूर/Natrum Muriaticum 200 : अत्यधिक छींक आने पर नाक टपकने पर ‘नेट्रमम्यूर’ 200 की एक खुराक व ‘एलियम सीपा’ 30 शक्ति में।
14. नक्स-वोमिका/Nux Vomica 200 : संवेदनशीलता में ऐसे लक्षण जिसमें रोगी किसी भी प्रकार के बाहरी अनुभूति से संवेदनशील हो जाता है। जिसके कारण रोगी छोटी-छोटी बातों पर भी ग़ुस्सा हो जाता है।
15. सोरिनम/Psorinum 200 : गेहूं से एलर्जी होने पर।
16. ट्यूबरकुलीनम/Tuberculinum : जिस व्यक्ति को दूध, दही, दूध से बने पदार्थों, अंडा, मछली या मांस से किसी भी प्रकार की कोई एलर्जी हो तो पहले इस औषधि की 200 शक्ति का सेवन सप्ताह में एक बार दो सप्ताह तक ले। इससे लाभ न हो तो सल्फर औषधि की 1m/1000 का सेवन करें।
17. सल्फर/Sulphur 200 : चॉकलेट से एलर्जी होने पर
18. अर्टिका युरेन्स/Urtica Urens 200 : दूध पीने से पित्ती उछलने के लक्षण में इस औषधि के मूलार्क का सेवन करना चाहिए।
19. पायोस 200 : धूल-मिटटी के कारण दमा रोग होना भी एक प्रकार की एलर्जी है। इस तरह के लक्षण में यह औषधि उपयोगी होती है।
20. अर्टिका युरेन्स/Urtica Urens-Q : शरीर पर चकत्ते पड़ने पर ‘आर्टिका यूरेंस’ औषधि मूल अर्क में लें। शैल फिश (एक प्रकार की मछली) खाने से होने वाली एलर्जी में भी यह लाभकारी है।

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--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!

--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!
सभी के स्वस्थ एवं सुदीर्घ जीवन की कामना के साथ-मेरे प्यारे और दुलारे तीन बच्चों की ममतामयी अद्वितीय माँ (मम्मी) जो दुखियों, जरूतमंदों और मूक जानवरों तक पर निश्छल प्यार लुटाने वाली एवं अति सामान्य जीवन जीने की आदी महिला थी! वह पाक कला में निपुण, उदार हृदया मितव्ययी गृहणी थी! मेरी ऐसी स्वर्गीय पत्नी "जानकी मीणा" की कभी न भुलाई जा सकने वाली असंख्य हृदयस्पर्शी यादों को चिरस्थायी बनाये रखते हुए इस ब्लॉग को आज दि. 08.08.12 को फिर से पाठकों के समक्ष समर्पित कर रहा हूँ!-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'

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ज्वर-Fiver झाइयाँ झांईं झुर्रियाँ झुर्रियां झुर्री झूठे दर्द टमाटर का रस टमाटर-Tomatoes टाइफाइड टाटबडंगा टायफायड टूटी हड्डी टॉन्सिल टोटला ट्यूमर ठंड ठंडापन ठेकेदार डॉक्टर डकार डकारें डायबिटीज डायरिया डिजिसेक्सुअल डिटॉक्सीफाई डिटॉक्सीफिकेशन डिनर डिब्बाबंद भोजन डिलेवरी डीकामाली डीगामाली डेंगू डेंगू-Dengue डॉ. निरंकुश डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' डॉ. मीणा ढकार ढीलापन ढीली योनि तकलीफ का सही इलाज तम्बाकू तरबूज-Watermelon तलाक ताकत तिल तिल्ली तुंबा तुंबी तुलसी तेल त्रिदोषनाशक त्रिफला त्वचा त्वचा रोग थकान थाईरायड थायरायड-Thyroid थायरॉइड दण्डनीय अपराध दंत वेदना दन्तकृमि दन्तरोग दमा दर वेदना दर्द दर्द निवारक दर्द निवारक दवा दर्दनाक दस्त दही दाग-धब्बे-Stains-Spots दाढ़ दांत दांतो में कैविटी-Teeth Cavity दाद दाम्पत्य दाम्पत्य विवाद सलाहकार दाम्पत्य-Conjugal दाल दालचीनी दालें दिमांग दिल दीर्घायु दु:खी दुर्गंध दुर्बलता दुष्प्रभाव दुष्प्रभावरहित दूध दूध वृद्धि दूधी दूधी-Milk Hedge दृष्टिदोष दो मन द्रोणपुष्पी-Leucas Cephalotes धड़कन धनिया बीज धनिया-Coriander धमासा धातु धातु पतन धार्मिक धूम्रपान 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भगंदर भगंदर-Fistula-in-ano भगनासा भगन्दर भगोष्ठ भड़भांड़ भय भविष्य भस्मक रोग भावनात्मक भुई आंवला-Phyllanthus Niruri भूई आमला भूई आंवला भूख भूख बढ़ाने भूमि भूमि आंवला भोजनलीवर मकोय मकोय-Soleanum nigrum मंजीठ मटर-PEA मंद दृष्टि मंदाग्नि मदार मधुमेह मधुमेह-Diabetes मन्दाग्नि-Dyspepsia मरुआ मरोड़ मर्द मर्दाना मलाशय मलेरिया मलेरिया (Malaria) मवाद मसाले मस्तिष्क मस्से मस्से-WARTS महंगा इलाज महत्वपूर्ण लेख महाबला माइग्रेन माईग्रेन माईंड सैट माजूफल मानवव्यवहार मानसिक मानसिक लक्षण मानसिक-Mental मानिसक तनाव-Mental Stress मायोपिया मासिक मासिक-धर्म मासिकधर्म मासिकस्राव माहवारी मिनरल मिर्गी मिर्च-Chili मीठा खाने की आदत मुख मैथुन-ओरल सेक्स-Oral Sex मुख्य लक्षण मुधमेह मुलहठी मुलेठी मुहाँसे मूँगफली मूड डिस्ऑर्डर-Mood Disorders मूत्र मूत्र असंयमितता मूत्र में जलन-Burning in Urine मूत्राशय मूत्रेन्द्रिय मूर्च्छा (Unconsciousness) मूली मूली कर रस मृत्यु मृत्युदण्ड मेथी मेथी दाना मेंहदी मैथुन मोगरा (Mogra) मोटापा मोटापा-Obesity मोतियाबिंद मौत मौलसिरी मौसमी बीमारियां यकृत यकृत प्लीहा यकृत वृद्धि-Liver 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