डेंगू और, या चिकनगुनिया का दुष्प्रभाव: नपुंसकता? Dengue and, or Chikungunya Side Effects: Impotence?

लेखक: डॉ. पुरुषोत्तम मीणा ‘निरंकुश’
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डेंगू और, या चिकनगुनिया से जो इंसान पीड़ित रहा होता है, वही जानता है कि डेंगू और, या चिकनगुनिया की तकलीफ कैसी होती है तथा डेंगू और, या चिकनगुनिया के कारण किस प्रकार की कमजोरी उत्पन्न हो जाती है। उपचार के दौरान मुझे अनेकानेक डेंगू और, या चिकनगुनिया पीड़ित पेशेंट्स ने बताया कि डेंगू और, या चिकनगुनिया से ठीक हो जाने के बाद उन्हें मूल रूप से निम्न परेशानियों को सामना करना पड़ता है:

मानसिक:

1. उत्साहहीनता (Desperateness): ऐसा लगता है जैसे कि सब कुछ खतम हो गया।
2. हमेशा उनींदेपन में पलंग पर ही पड़े रहने की इच्छा होती है।
3. कुछ भी अच्छा नहीं लगता। न अच्छा भोजन और न अच्छा ओढना-पहनना।

शारीरिक:

1. दर्द ही दर्द: सारे शरीर में दर्द रहता है। नसों, मांसपेशियों, हड्डियों, जोड़ों (Nerves, Muscles, Bones, Joints) आदि शरीर के प्रत्येक अंग में दर्द रहता है।
2. अत्यधिक कमजोरी (Excessive Weakness): ऐसा लगता है जैसे कुछ भी नहीं किया जा सकता। टांगे शरीर का वजन नहीं झेल सकती। हाथों से पानी का गिलास तक नहीं उठाया जा सकता। इत्यादि।
3. नपुंसकता (Impotency): शारीरिक यौन उत्तेजना का अभाव और यदाकदा उत्तेजना हो, लेकिन यौन सम्बन्ध नहीं बना सकना।
नोट: ऐसा नहीं है कि सभी डेंगू और, या चिकनगुनिया के सभी रोगियों में उपरोक्त सभी लक्षण लक्षण प्रकट होते हों या केवल उक्त लक्षण ही प्रकट होते हों। इनके अलावा भी कुछ लक्षण हो सकते हैं। यहां कॉमन लक्षण बताये गये हैं।

उपचार से पूर्व सावधानियां:

1. सबसे पहली बात रोगी को धैर्य नहीं खोना चाहिये।
2. दर्द निवारक दवाइयों का कम से कम  सेवन करना चाहिये।
3. बिस्तर में नहीं पड़ जाना चाहिये। हर हाल में चलने-फिरने की कोशिश करते रहें। हो सके तो हल्की एक्सरसाइज भी करते रहें।
4. नपुंसकता अनुभव होने पर भी यौनेत्तजक दवाइयों का भूलकर भी उपयोग नहीं करें। यथासंभव कम से कम तीन महिने तक यौन-सम्बन्ध बनाने की कोशिश ही नहीं करें।
5. अत्यधिक गरिष्ठ खुराक/भोजन नहीं लें। जैसे-घी, ताकत के लड्डू, भैंस का दूध, पनीर, चीज आदि।

घरेलु उपचार:

1. आॅर्गेनिक गिलोय (जिसे अमृता भी कहा गया है) का सत या ज्यूस का नियमित सेवन करें।
2. कम मात्रा में पपीता का सेक सेवन करें।
3. पपीता के पत्ते, तुलसी के पत्ते, हरसिंगार के पत्ते और निर्गुंडी के पत्तों या पाउडर का ज्यूस या क्वाथ सेवन करें।
4. बकरी के दूध का सेवन करें।
5. मौसमी फलों का ज्यूस एवं नारियल पानी का निरन्तर सेवन जारी रखें।

मानसिक उपचार:

  • 1. निरोशाजनक बातें करने वाले लोगों से दूर रहें।
  • 2. मन में निराशाजनक विचारों को जगह नहीं बनाने दें।
  • 3. हमेशा अपने आप को कहें कि मैं बहुत जल्दी पूर्ण स्वस्थ हो जाऊंगा।
  • 4. अपने आप में, अपने चिकित्सक एवं औषधियों में आस्था एवं विश्वास रखें।
  • 5. यह दृढ विश्वास रखें कि इस जीवन में कुछ भी स्थिर या असंभव नहीं है।

होम्योपैथिक उपचार:

1. शरीर के हर हिस्से में भयंकर दर्द, नसों में दर्द, जोड़ों में दर्द, मांसपेशियों में दर्द हो तो यूपेटोरियम-परफोलियेटम 30 शक्ति की 30 नम्बर की 6-7 गोली दिन में 3-4 बार देना चाहिए।
2. शरीर के हर हिस्से में भयंकर दर्द, नसों में दर्द, जोड़ों में दर्द, मांसपेशियों में दर्द के लक्षणों के साथ मरीज यदि सुस्त हो और अधिक प्यास लगती हो तो ब्रायोनिया-30 शक्ति की 30 नम्बर की 6-7 गोली दिन में 3-4 बार देना चाहिए।
3. शरीर के हर हिस्से में भयंकर दर्द के लक्षणों के साथ सर्वांगीण थकावट, मांसपेशियों में शिथिलता, स्नायविक कंपन, चक्कर आना, निद्रालुता आदि के साथ प्यास बिलकुल नहीं लगती हो तो जेल्सीमियम-30 शक्ति की 30 नम्बर की 6-7 गोली दिन में 3-4 बार देना चाहिए।
4. शरीर के हर हिस्से में भयंकर दर्द के लक्षणों के साथ बेचैनी, विश्राम करने से तकलीफें बढना, चलने-फिरने की हिम्मत नहीं होती, लेकिन फिर भी रोगी चलने-फिरने या करवट बदलने की कोशिश करता रहता है। रोगी को लगातार अपने शरीर को किसी न किसी तरह से हिलाने डुलाने से सुकून और आराम का अनुभव होता है। इस स्थिति में रस टॉक्स-30 शक्ति की 30 नम्बर की 6-7 गोली दिन में 3-4 बार देना चाहिए।

नपुंसकता का उपचार: उपरोक्त सभी में से उचित लाक्षणिक उपचार के साथ-साथ:

1. आॅर्गेनिक शोधित कौंच का पाउडर, सफेद मूसली का पाउडर, उटंगन के बीज का पाउडर, आॅर्गेनिक गोखरू के बीज का पाउडर, आॅर्गेनिक आंवले का पाउडर इत्यादि का समान मात्रा में समिश्रण रोगी की स्थिति एवं उम्र के अनुसार सेवन करवाया जा सकता है।
2. रोगी के लक्षणों के अनुसार होम्योपैथी की एग्नस कैस्टस, स्टेफिसैग्रिया, सेलेनियम, लाइकोपोडियम, कैलेडियम, अर्जेंटम नाईट्रिकम, नेट्रम म्यूर आदि का 30 या 200 शक्ति में उचित मात्रा में सेवन करवाया जा सकता है।

प्रतिरोधक: 

जिन दिनों डेंगू और, या चिकनगुनिया का संक्रमण फैलता जा रहा हो तो कुछ सावधानियां आपको, और आपके परिवार को पूरी तरह सुरक्षित रख सकती हैं और डेंगू और, या चिकनगुनिया से 90 फीसदी तक बचाये रख सकती हैं। जैसे:-

1. डेंगू और, या चिकनगुनिया फैलता कैसे हैं-एडिस एजिप्टी (Ades Egypt) प्रजाति की मादा मच्छर के दिन में काटने से डेंगू पैदा होते हैं। यह मादा मच्छर खून पी कर मजबूत होती है और अंडे देती है। यह बीमारी एक इंसान से दूसरे इंसान तक नहीं फैलती। गमलों, प्लास्टिक के थैलों, पुराने टायरों, डिब्बों में इक्क्ठा पानी में ये मच्छर पनपता है। अत: साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।
2. इस मच्छर के काट लेने के 5-6 दिन बाद लक्षण दिखना शुरू होते हैं। 7-10 दिन तक तेज बुखार बना रहना, सिर औऱ आंखों में दर्द, मांस पेशियों में दर्द, चक्कर आना, उल्टी होना, मसूड़ों से खून बना इसके लक्षण हैं। अत: लक्षण दिखते ही उचित उपचार लेने में विलम्ब नहीं करें।
3. डेंगू वायरस के चार प्रकार के होते हैं। डेन-1, डेन-2, डेन-3, डेन-4 और ऐसा नहीं है कि एक बार एक प्रकार का डेंगू हो जाने से कभी दूसरे प्रकार का नहीं होगा। इसलिए जिंदगी में चार बार डेंगू का खतरा बना रहता है। अत: आरोग्य हो जाने के बाद भी सावधानी जरूरी है।
4. डेंगू और, या चिकनगुनिया होने के स्थिति में घबराए बिना धैर्यपूर्वक इसका उपचार करवाएं और सबसे अच्छा तो यही होगा कि ऐसी स्थिति आने ही न दें। यहां बताई गयी सावधानियों का पालन किया जायेगा तो खतरा कम हो सकता है।
5. होम्योपैथी की ‘यूपेटोरियम-परफोलियेटम 30’ एवं ‘ब्रायोनिया-30’ नामक इवाइयां लिक्विड में खरीद कर लायें और परिवार के हर व्यक्ति को दोनों में से सुबह-शाम दो-दो बूंद, एक सप्ताह से 10 दिन तक एक चम्मच पानी में मिलाकर, विधिवत सेवन करावें।
6. रोग प्रतिरोधक क्षमता बढायें: रोग प्रतिरोधक क्षमता जिसे इम्युनिटी भी कहा जाता है। यानी बीमारियों से लड़ने की शरीर की क्षमता अच्छी हो तो कोई भी बीमारी आसानी से दबोच नहीं पाती। इम्युनिटी बढ़ाने के लिए नियमित रूप से बैलेंस्ड और पोष्टिक भोजन जरूरी होता है। जिनमें मौसमी फल, हरी सब्जियां, दाल, दूध-दही आदि खूब लें। याद रहे इम्युनिटी एक-दो दिन में नहीं बढ़ती। इसके लिए लंबे समय तक ध्यान रखना पड़ता है। यह सबसे कारगर उपाय है।
7. 20 का मंत्र: विशेषज्ञ डॉक्टरों के मुताबिक, नब्ज में 20 की बढ़ोतरी, ब्लड प्रेशर में 20 की कमी, हाई और लॉ बीपी में 20 से कम का अंतर और बांह पर 20 से ज्यादा निशान हों तो सतर्क हो जाएं और तुरंत अपने डॉक्टर से सम्पर्क करें।

नोट: उक्त सावधानियां बरतने पर डेंगू और, या चिकनगुनिया पास तक नहीं फटकेगा।

लेखक: डॉ. पुरुषोत्तम मीणा ‘निरंकुश’ 20.11.2018

>>>>> नोट: किसी भी पुरानी या लाइलाज मानी जाने वाली बीमारी से पीड़ित लोगों को, अपनी बीमारी को अपनी नियति मानकर निराश या हताश (Frustrated or Depressed) होने की जरूरत नहीं है। देशी जड़ी बूटियों और होम्योपैथी में इलाज संभव है। अपने आपपास के किसी अनुभवी डॉक्टर से सम्पर्क किया जा सकता है। देशभर में अनेकानेक अनुभवी तथा योग्य होम्योपैथ/आयुर्वेद के डॉक्टर उपलब्ध हैं।
 
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