सेक्स फोबिया (Sex Phobia) अर्थात मनो यौनरोग (Psychosexually illness): जितना विलम्ब करेंगे, उपचार और समाधान की कीमत बढती जायेगी

 
  जैसा कि मेरे बारे में सार्वजनिक है कि मैं केवल ऑनलाइन स्वास्थ्य रक्षक सखा (Health Care Friend) के रूप में अपनी सेवाएं प्रदान करता हूं और 99 फीसदी मामलों में, अर्थात किन्हीं अपवादिक मामलों को छोड़कर किसी भी पेशेंट को मुझ से व्यक्तिगत रूप से जयपुर, राजस्थान आकर मिलने की जरूरत नहीं पड़ती है। जबकि देश के लगभग सभी क्षेत्रों के लोग मेरे हेल्थ वाट्सएप नम्बर: 8561955619 पर अपनी तकलीफ लिखकर मुझे सेवा करने का अवसर प्रदान कर रहे हैं।
 
इस लेख के मार्फत बताने वाली मूल बात यह है कि मेरे पास यदि स्वास्थ्य परामर्श के लिये यदि 100 फोन काल आते हैं तो उनमें से तकरीबन 80 काल सेक्स से सम्बन्धित समस्याओं से पीड़ित लोगों के होते हैं। लेकिन 100 में 80 काल सेक्स से सम्बन्धित समस्याओं से पीड़ित लोगों के आना उतनी बड़ी या गंभीर या दु:खद बात नहीं, जितनी कि 80 में से 90 फीसदी काल करने लोग सेक्स बीमारियों के नाम पर सिर्फ सेक्स फोबिया (Sex Phobia) जिसे चिकित्सकीय भाषा में Genophobia (Fear of Sex) कहा जाता है, से पीड़ित होते हैं। जिन्हें दवाइयों से कहीं अधिक मनश्चिकित्सा (Psychotherapy) की जरूरत होती है।
 
इसके बावजूद भी ऐसे लोगों में से कोई एक भी खुद को मनोरागी अर्थात मनो यौनरोग (Psychosexually illness) से पीड़ित मानने को तैयार नहीं होता है! हां उन्हें खुद को यौन रोगी अवश्य मानना पड़ता हैं। जो भी उनकी मजबूरी होती है, क्योंकि इलाज जो करवाना होता है। मैं समझता हूं कि ऐसे लोगों की यही सबसे बड़ी बीमारी होती है। जिसके चलते वे जाने-अनजाने सच को झूठ और झूठ को सच मानने और समझने की भूल लगातार करते रहते हैं। यही उनका सेक्स फोबिया या Genophobia है! सेक्स फोबिया को समझने से पहले फोबिया को समझना जरूरी है।
 

अत: सबसे पहले जानने की कोशिश करते हैं कि फोबिया क्या होता है?

Extreme or irrational fear of or aversion to something. (किसी चीज का अति या तर्कहीन भय।) या दूसरे शब्दों में कहें तो Extreme or irrational fear or dislike of a specified thing or group. (अत्यधिक या तर्कहीन भय या एक निर्दिष्ट चीज या समूह के प्रति अरुचि।)
उपरोक्त तकनीकी शब्दावली को हम व्यावहारिक रूप से समझने की कोशिश करते हैं। जब कोई व्यक्ति किसी भी बात या घटना का अपनी कल्पना में डर बिठाकर उसे सत्य मान लेता है तो उस व्यक्ति के संदर्भ में, ऐसी स्थिति को फोबिया कहा जा सकता है।
 
अब हम सेक्स फोबिया की बात करते हैं। सबसे पहली बात तो यह कि अधिकतर पुरुषों या युवकों को शुरूआत में खुद को सेक्स रोगी बताने और मानने में ही संकोच होता है। कालांतर में शर्म-संकोच (Shyness) की यह मानसिक स्थिति या मनोदशा (Mental State or State of Mind) उन्हें मनोरोगी (Psychopath) बना देती है।
 

अब इसे थोड़ा और अधिक व्यावहारिकता तथा सरलता से समझते हैं।

  1. एक युवक जो 14-15 साल की आयु में हस्तमैथुन के जरिये वीर्यपात करना शुरू कर देता है। जो हस्तमैथुन को ही सेक्स अर्थात यौनानंद का पर्याय या विकल्प मानकर जवानी के 10 साल से अधिक समय में उत्सर्जित वीर्य को बाथरूम में बहा देता है।
  2. वह पोर्न फिल्म/वीडियो देखकर द्रवित होता रहता है। द्रवित मतलब पोर्न वीडियो देखने से ही उसका वीर्यपात (Spermatorrhea, Emission, Ejaculation) हो जाता है। मलत्याग के समय जोर लगाने पर स्वत: ही वीर्यपात हो जाता है।
  3. ऐसे लोगों का किसी लड़की या विवाहिता स्त्री से सम्पर्क हो जाता है तो उससे बात करते समय या उसको स्पर्श करते ही उनका वीर्यपात हो जाता है।
  4. यदि उन्हें संयोग से किसी स्त्री, प्रेमिका या वैश्या से यौन सम्बन्ध बनाने का अवसर मिल जाता है तो लिंग को योनि में प्रवेश करवाने से पहले ही वीर्यपात हो जाता है।
  5. इसके अलावा ऐसे लोगों को रात्रि में सपने देखते हुए और, या बिना सपने देखे भी वीर्यपात होता रहता है। जिसे आम बोलचाल में स्वप्नदोष कहा जाता है। आमतौर पर इस स्थिति को भारत में धात की बीमारी या धातु रोग या प्रमेह (Spermatorrhea) कहा जाता हैं।
  6. ऐसे लोगों को जब किसी युवती या स्त्री से साक्षात बात करने, मोबाईल पर बात करने या स्पर्श करने या कामुक चित्र, वीडियो या फिल्म देखने मात्र से वीर्यपात हो जाता है तो उनका मनोबल चूर चूर हो जाता है (Morale or psychic force gets Crushed) और उनके अवचेतन मन (Subconscious Mind) में अनेक प्रकार के भय और आशंकाएं स्थापित हो जाते हैं। (Many types of fears and doubts are established in their subconscious mind) उनके मन में तरह-तरह के निराधार, उलजुलूल तथा काल्पनिक विचार आने लगते हैं (different kind of baseless, disorganized and fictional ideas begin to appear in their minds)।
यहां समझने वाली सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस प्रकार की तकलीफों से ग्रसित रोगियों के मन में अनेक तरह की आधारहीन, लेकिन उनको सच लगने वाली भ्रांतियां उनके अवचेतन मन में (अंदर तक) स्थापित हो चुकी होती हैं। उदाहरणार्थ:
  • 1. वह विवाह के बाद या किसी स्त्री के सम्पर्क में आने पर सफलतापूर्वक यौन सम्बन्ध स्थापित कर भी पायेगा या नहीं? अर्थात वह अपनी पत्नी के समक्ष अपनी मर्दानगी सिद्ध कर सकेगा या नहीं?
  • 2. उसे लगने लगता है कि हो न हो छोटी उम्र से हस्तमैथुन करते रहने के कारण वह अपना पुंसत्व अर्थात मर्दानगी खो चुका है।
  • 3. इन सबके कारण ऐसे रोगी को लगने लगता है, बल्कि उसको सच में अनुभव होता है कि उसका वीर्य पानी जैसा पतला हो चुका है। लिंग की नशें कमजोर तथा शिथिल हो चुकी हैं। लिंग में टेढापन आ गया है।
  • 4. किसी ऊंची इमारत को नीचे से देखने पर या ऊपर/ऊंची इमारत से नीचे देखने पर अत्यधिक डर लगने लगता है। पुल पार करते समय डर या नाव में बैठने पर डर लगता है।
  • 5. किसी अनजान या बड़े व्यक्ति से मिलने जाने या परीक्षा या साक्षात्कार हेतु जाने से पहले उसे डर लगता है। डर के कारण बार-बार पेशाब और लैट्रिन जाने की इच्छा होती है। अनेक बार मूत्रत्याग और मलत्याग नहीं होता, लेकिन इच्छा बनी रहती है।
  • 6. अत्यधिक मिठाई या नमक खाने की उत्कट इच्छा (Strong or Passionate Desire) उत्पन्न होने लगती है। जिसके कारण मधुमेह (Diabetes) होने या गुर्दे में पथरी (Kidney Stones) बनने या दूसरी शारीरिक तकलीफें होने का खतरा बना रहता है।
  • 7. ऐसा व्यक्ति मानसिक रूप से तनाव और निराश, विफल एवं घुटनभरा जीवन (Hopeless, Frustrating  and Stuffy Life) जीने को मजबूर हो जाता है।
  • 8. यदि उससे कोई कुछ कड़वी बात कह दे, अर्थात अगर कोई उसका अपमान या तिरस्कार (Humiliation or Dishonor) कर दे तो, जवाब देने के बजाय, वह अंदर ही अंदर घुटता रहता है। दु:खी रहता है। (Instead of answering, he keeps kneeling inside. Keeps sad.) 
  • 9. उपरोक्त एवं अन्य अनेक हालातों के दुष्परिणामस्वरूप ऐसे रोगियों का पाचन तंत्र (Digestive System) भी बुरी तरह से खराब हो जाता है। उन्हें ठीक से भूख नहीं लगती। गैस बनने लगती है। जरा सा कुछ खाते ही या जरा सा तनाव होते ही भूख समाप्त जाती है या उबाकी आने लगती है। आंतों और गले में जलन रहने लगती है। सिरदर्द या माईग्रेन रहने लगता है। तेज सिरदर्द होने के बाद जी मिचलाता है या कय हो जाती है।
  • 10. कालांतर में ऐसे ही कुछ रोगियों को बवासीर अर्थात पाइल्स, फिश्चुला अर्थात भगंदर, रैक्टम कॉलैप्स अर्थात गुदाभ्रंश जिसे आम बोलचाल में कांच निकलना कहते हैं, जैसे गुदारोगों की समस्या भी होने लगती है।
  • 11. ऐसे युवकों के परिवारजन उनका विवाह करना चाहते हैं और वे नये-नये बहाने बनाकर विवाह को टालते रहते हैं। ऐसे लोगों की इस स्थिति को मनो यौनरोग (Psychosexually illness) कहना क्यों गलत है? मगर वे अपने आपको यौनरोगी तो मान सकते हैं, लेकिन मनो यौनरोगी मानने की कल्पना भी नहीं कर सकते।

इस सबका दुष्परिणाम होता है कि ऐसे पुरुषों या युवाओं में स्थायी तौर पर—

  • 1. आत्मविश्वास की कमी (Lack of Confidence)।
  • 2. सेक्स में असफलता का भय (Fear of Failure in Sex)।
  • 3. अर्द्ध नपुंसकता (Semi Impotency)
  • 4. यौन कमजोरी (Sexual Weakness)
  • 5. शीघ्रपतन (Premature Ejaculation) इत्यादि।
थक हारकर ऐसे युवकों या पुरुषों में से अनेक उन महान यौन विशेषज्ञों या नीमहकीमों के चक्कर में फंस जाते हैं जो विज्ञापन की बदौलत करोड़ों युवाओं का जीवन बर्बाद कर रहे हैं। जो यौन शक्ति बढाने का तेल या कोर्स बेचते हैं। जिनमें क्षणिक यौन उत्तेजक दवाईयों या द्रव्यों का मिश्रण शामिल होता है, जो कुछ समय के लिये तो यौन उत्तेजना पैदा कर देते हैं, लेकिन ऐसी कथित दवाइयों का लम्बे समय तक सेवन करने से असमय अर्द्ध या स्थायी नपुंसकता उत्पन्न हो जाती है। कुछ जो खुद को अधिक समझदार तथा पढे-लिखे समझते हैं वे मैडीकल स्टोर पर जाते हैं और Viagra, Cialis, Levitra जैसी यौनोत्तेजक दवाओं का सेवन करके पत्नी/प्रेमिका के समक्ष खुद को मर्द सिद्ध करने की कोशिश करने की मूर्खता करते रहते हैं। उनकी मूर्खता कुछ ही समय में प्रकट होने लगती है।
 
उपरोक्त हालातों से गुजर रहे युवकों और पुरुषों को Viagra, Cialis, Levitra जैसी यौनोत्तेजक दवाओं का सेवन तो बिलकुल भी नहीं करना चाहिये। यदि अनजाने में शुरू कर चुके हैं तो तुरंत बंद कर देना चाहिये। इन दवाइयों का सेवन करके सामयिक मर्दानगी सिद्ध करके, जीवनभर के लिये नामर्द होने तथा प्रोस्टेट कैंसर जैसी बीमारियों को आमंत्रित करने के बजाय यथास्थिति को स्वीकारना बेहतर विकल्प है।
 
यद्यपि यथास्थिति को स्वीकारने की जरूरत ही नहीं है। क्योंकि होम्योपैथी की दुष्प्रभाव रहित दवाइयों तथा ओर्गेनिक देशी जड़ी बूटियों से ऐसी समस्याओं का सफलता पूर्वक निदान किया जा सकता है। मेरे पास उक्त तकलीफों से ग्रस्त जो रोगी सम्पर्क करते हैं, लेकिन जिन्होंने Viagra, Cialis, Levitra जैसी यौनोत्तेजक दवाओं का सेवन नहीं किया हो, उनकी 100 फीसदी आरोग्यता की दर 95 फीसदी से अधिक है। जबकि शेष 5 फीसदी को भी 25 से 90 फीसदी तक लाभ होता है। जिन्होंने Viagra, Cialis, Levitra जैसी यौनोत्तेजक दवाओं का सेवन किया हो उनका उपचार करना बहुत जटिल और खर्चीला तो होता ही है। इसमें समय भी अधिक लगता है और सफलता का प्रतिशत भी तुलनात्मक रूप से कम है।
 
सबसे बड़ी और महत्वूपर्ण बात उपरोक्त प्रकार की तकलीफों से ग्रसित अर्थात मनो यौनरोग (Psychosexually illness) से ग्रसित यौन रोगियों का उपचार करने के लिये यौन मनश्चिकित्सा (Sexual Psychotherapy) पहली जरूरत होती है। जिसमें किसी योग्य एवं दक्ष यौन मनश्चिकित्सक (Sexual Psychiatrist) को बहुत सा समय खर्चना पड़ता है। जिसका भुगतान कर सकने वाले ही उनकी सेवाएं हासिल कर पाते हैं। यदि कोई यौन मनश्चिकित्सक (Sexual Psychiatrist) साथ में अच्छा मानव व्यवहारशास्त्री (Human Behaviorist) हो तो स्थिति अधिक आसान हो जाती है। दाम्पत्य विवाद सलाहकार (Marital Dispute Consultant) के रूप में विवादों को निराकरण करते समय, मुझे एवं मेरी सेवाएं लेने वाले लोगों को मेरे मानव व्यवहारशास्त्री (Human Behaviorist) होने का बड़ा लाभ मिलता रहा है।
 

निष्कर्ष: इस लेख को लिखने का मूल मकसद यौन समस्याओं से ग्रस्त पुरुषों और युवकों को यह समझाना है कि-

  • 1. छोटी-मोटी यौन उलझनें, शंकाएं और तकलीफें कभी न कभी अधिकतर पुरुषों के जीवन में आती ही रहती हैं और उनके समाधान हो जाते हैं। अत: किसी यौन समस्या से घबरायें नहीं।
  • 2. यौन उलझनों, शंकाओं और तकलीफों को शर्म-संकोच की चादर में लपेटकर नहीं छुपायें, बल्कि अविलम्ब किसी योग्य समाधानकर्ता से बेहिचक सम्पर्क करें।
  • 3. नीम-हकीम और इलाज का ठेका लेने वाले या कोर्स बेचने या शर्तिया/गारण्टेड इलाज करने वाले लोगों में से अधिकतर चालाक और ठग होते हैं। अत: अपनी यौन उलझनों, शंकाओं और तकलीफों को ऐसे लोगों को बताकर अपने आप को लुटने से बचायें।
  • 4. यौन उलझनों, शंकाओं और तकलीफों के समाधान हेतु Viagra, Cialis, Levitra जैसी यौन उत्तेजक दवाईयों को कभी भी सेवन नहीं करें।
  • 5. यौन उलझनों, शंकाओं और तकलीफों के समाधान हेतु देशी जड़ी-बूटी, होम्योपैथी और यौन मनश्चिकित्सा (Sexual Psychotherapy) सर्वाधिक सफल हैं।
  • 6. यदि कोई नीम-हकीम और यौन रोगों को ठीक करने का ठेका लेने वाले या सेक्स कोर्स बेचने या शर्तिया/गारण्टेड इलाज करने वाला आपको लूटता है तो इसके लिये और कोई नहीं, बल्कि केवल आप खुद जिम्मेदार हैं। अत: उपचारक का चयन करते समय सावधान।
  • 7. इस संसार में हर गलती की कीमत चुकानी पड़ती है और मुफ्त में कुछ नहीं मिलता। अत: अपनी यौन उलझनों, शंकाओं और तकलीफों का समाधान चाहते हैं तो आपको वांछित खर्चा उठाना ही होगा। जितना विलम्ब करेंगे, उपचार और समाधान की कीमत बढती जायेगी।
  • लेखन दिनांक: 12 जनवरी, 2019

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