मित्रो, नमस्कार।

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शीघ्रपतन (Premature Ejaculation) तलाक (Divorce) और विवाहेत्तर यौन सम्बन्धों (Extramarital Relations) की बड़ी वजह
(Premature Ejaculation is a Major reason for Divorce and Extramarital Relations)

जून, 2017 की 22 तारीख को मेरा वास्तविक जन्मदिन था। सोशल मीडिया पर मैंने अपने जीवन की संक्षिप्त जानकारी पेश की हुई थी। जिसे पढकर, उसी दिन रामकृपाल सिंह (बदला हुआ नाम) का वाट्सएप पर मैसेज मिला जो टूटी-फूटी रोमन हिंदी में लिखा गया था। जिसे पेशेंट रामकृपाल सिंह की सहमति से पाठकों के लिये हिंदी में पेश कर रहा हूं:-


''सर हैप्पी बर्थ डे। आज आपके जीवन के बारे में पढकर पता चला आप बहुत संघर्ष किये हो। लेकिन आपने ईमानदारी से सब कुछ सार्वजनिक कर दिया जो मेरी नजर में आपके ईमानदार और अच्छे इंसान होने का सबूत है। इसी उम्मीद से मैं आपको मेरी तकलीफ लिख रहा हूं, प्लीज मेरी मदद करके मेरी जिंदगी को बचाकर उपकार करें। मेरी उम्र 28 साल है। यूपी का रहने वाला हूं और सरकारी नौकरी करता हूं। मुझे साल में एक बार एक महिने की छुट्टी मिलती है। जब में 15-16 साल का था, तब से ही कुछ बड़े लड़कों के साथ मुठ्ठ मारने की आदत लग गयी। 3 साल पहले शादी हुई, लेकिन सेक्स शुरू करते ही कुछ ही सेकण्ड में वीर्य निकल गया। कुल 10 दिन पत्नी मेरे साथ रही, मैं कुछ विशेष नहीं कर सका। उसके बाद नौकरी पर आ गया। शायद मेरी पत्नी को सेक्स का कुछ नॉलेज नहीं था। अत: उसने मुझ से कुछ भी नहीं बोला। जैसे-तैस मां की बीमारी का बहाना बनाकर 3 महिने बाद फिर से छुट्टी पर गया। इस बार पत्नी का सारा रंग-ढंग बदला हुआ था। पहली रात को ही बोली कुछ करने की हिम्मत हो तो कुछ करो, नहीं तो परेशान मत करो। ऐसा कहते ही मेरे दिलोदिमांग में बहुत बड़ा झटका लगा और मैं कुछ नहीं कर सका। मेरी उत्तेजना ही समाप्त हो गयी। इस प्रकार जब-जब भी मैं सेक्स करने की कोशिश करता, हर बार निराशा ही हाथ लगती। पत्नी के पास जाने से पहले तो खूब इच्छा होती और उत्तेजना भी होती, लेकिन एन वक्त पर पत्नी के शब्द दिमांग में गूंजने लगते और सारा खेल खत्म हो जाता। कुल मिलाकर मैंने खुद को नामर्द मान लिया। उधर जानकारी करने पर पता चला कि मेरी पत्नी विवाह से पहले एक अच्छी चरित्रवान लड़की थी, लेकिन विवाह के बाद उसके पीहर में दो लड़कों से सम्बन्ध बन गये। दु:ख और शर्म तो यह बताते हुए है कि उसने मेरे 50 वर्षीय पिता से भी सम्बन्ध बना लिये और बेशर्मी से कहने लगी कि या तो तलाक दे दो किसी ओर से शादी कर लूंगी, नहीं तो तुमको मुझ पर पाबंदी लगाने का कोई हक नहीं है। बात-बात पर मुझे नामर्द कहने लगी। मैंने अनेक बार आत्महत्या करने की भी सोची, लेकिन अपनी मां की ओर ध्यान जाता तो रुक जाता। मैंने टीवी, अखबार के सेक्स रोगों के इलाज के विज्ञापनों पर अपनी तनख्वा का बहुत सा रुपया बर्बाद कर दिया है। सब ने मुझे खूब लूटा है, लेकिन हर जगह से मुझे निराशा ही हाथ लगी। पत्नी मेरे पिता और मेरे चचेरे भाई के साथ खुलकर गुलछर्रे उड़ा रही है। अब तो मुझ छुट्टी पर जाने में भी शर्म आती है। उधर इन सब बातों का गांव में सबको पता चल चुका है। इस कारण मेरी मां की दशा बहुत खराब है। यदि आप हकीकत में मेरा इलाज कर सकें तो प्लीज हां करें। नहीं तो अब मौत ही एक रास्ता है।''

पूर्व में भी मैं इस प्रकार के अनेक मामलों में सफलतापूर्वक इलाज कर चुका था। अत: रोगी को निराश करना उचित नहीं समझते हुए, मैंने उसे हां कह दी, लेकिन हमेशा की भांति बता दिया कि 'गारंटी या शर्तिया इलाज की उम्मीद मुझ से नहीं करें, लेकिन 100 फीसदी कोशिश करूंगा और ठीक होने की पूरी उम्मीद है।'


जैसे ही रोगी के मानसिक लक्षण पूछे तो मुझे केस बहुत आसान लगा। उसे निर्धारित रीति से समयांतराल से उचित तथा वांछित शक्ति मात्रा में अर्जेंटम नाइट्रिकम, स्टेफिसेग्रिया, केलेडियम, एग्नस कैस्टस आदि सिंगल दवाइयों के साथ हमारे द्वारा अनुभवसिद्ध होम्योपैथिक सम्पूरक मिश्रण सेक्सो टॉन, इम्यूनिटी बूस्टर और आॅर्गेनिक देशी जड़ी बूटियों से निर्मित सम्पूरक मिश्रण एक्स्ट्रा लॉस्ट पावर गैनर, कायाकल्प पाउडर, रोग प्रतिरोधक शक्ति वर्धक पाउडर आदि सेवन करने को दिये गये। सबसे महत्वपूर्ण रहा उसके दिमांग में बैठे फोबिया का निराकरण। कुल मिलाकर 6 महिने में वह सफलतापूर्वक सेक्स करने में समर्थ हो गया। रोगी ने मुझे लिखे मैसेज में बताया कि-

''डॉ. साहब आपने मेरा जीवन बदल दिया। मैं जीवनभर आपका कर्जवान रहूंगा। जून, 17 में, मैं मरना चाहता था, लेकिन अब मैं 100 साल जीना चाहता हूं। पूरी जिंदगी मजे से जीऊंगा। सर आपको खुशी होगी कि जनवरी में छुट्टी गया तो पत्नी के प्रति नफरत से भरा हुआ होने के बाद भी मैंने उसे अपनी मर्दानगी का अहसास करवाने के लिये पत्नी के साथ एक रात बितायी। एक रात में 4 बार सफलतापूर्वक सेक्स किया और दूसरे दिन कोर्ट में जाकर तलाक की अर्जी दाखिल कर दी। इसके बाद उसे उसके पीहर छोड़कर आ गया। जहां मैंने उसके सारे ​कारनामों की जानकारी उसके मां-बाप को दी तथा उन्हें बोल दिया कि अब मैं इस औरत को किसी भी कीमत पर नहीं रखूंगा और किसी दुखियारी वफादार विधवा से दूसरा विवाह करके जीवन जीऊंगा।"

यह उसका व्यक्तिगत निर्णय है, जिस पर अकारण टिप्पणी करने का मुझ कोई हक नहीं है। लेकिन अब वह पूरी तरह से स्वस्थ है और अभी भी वह हमारे 'कामवाण पाउडर' का नियमित सेवन कर रहा है।

अंतिम टिप्पणी: मैं अनेकों बार लिखता रहा हूं कि "सेक्स दो टांगों के बीच का नहीं, बल्कि दो कानों के बीच का खेल है।" अर्थात सेक्स शारीरिक बाद में, पहले मानसिक क्रिया है। मन पर पड़ने वाले अच्छे-बुरे विचारों का प्रभाव शरीर पर पड़ता है। शीघ्रपतन के पीछे भी 70 फीसदी से अधिक मानसिक कारण होते हैं। दूसरी बात शीघ्रपतन दाम्पत्य जीवन के बिखराव का सबसे बड़ा कारण है। इसकी वजह से बड़ी संख्या में विवाहेत्तर यौन सम्बन्ध तथा तलाक के मामले बढ रहे हैं। जबकि उचित परामर्श तथा उपचार के जरिये शीघ्रपतन का उपचार संभव है। ऐसे मामलों में हमें 90 फीसदी से अधिक मामलों में सफलता मिलती रही है। जो आपने आप में बड़ा आंकड़ा है।

Online Dr. PL Meena (डॉ. पुरुषोत्तम मीणा): Health Care Friend and Marital Dispute Consultant (स्वास्थ्य रक्षक सक्षा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार ), Mobile & Health Advice WhatsApp No.: 85619-55619 (10AM to 10 PM), 26.04.2018

----------------------------देशी जड़ी बूटियों के बारे में पूर्वजों से प्राप्त ज्ञान तथा दुष्प्रभाव रहित होम्योपैथिक एवं बॉयोकैमिक जर्मन दवाईयों के सतत अध्ययन, शोधन, परीक्षण और उपचार के दौरान अनेक अनुभव सिद्ध उपयोगी नुस्खे तैयार किये गये हैं। जो बेशक कुछ महंगे अवश्य हैं, लेकिन इन नुस्खों से हजारों रोगियों को "लाइलाज समझी जाने वाली" अनेक तकलीफों से मुक्ति मिल चुकी है और चुनौतीपूर्ण मानव सेवा का यह क्रम हर दिन जारी है। लेकिन 'तुरन्त, गारण्टेड और शर्तिया इलाज' चाहने वाले माफ करें।-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'-26.04.2018.
काश मेरी बहन को भी प्रसव सुरक्षा चक्र (Pregnancy Safeguard) का कोर्स दिलवाया होता?

डॉ. मीणा साहब नमस्कार। मैं आज बहुत खुश हूं, लेकिन साथ ही दु:खी भी बहुत ज्यादा हूं। जैसा कि आपको पता है सर आपने मेरी पत्नी को गर्भ धारण करने पर प्रसव सुरक्षा चक्र का कोर्स उपलब्ध करवाया था। ठीक 9 माह 10 दिन में आपकी दी हुई तारीख: 20.03.2018 को मेरी पत्नी को दिन के 11 बजे प्रसव पीड़ा शुरू हुई और दोपहर बाद 3 बजे मेरी पत्नी ने फूल सी बिटिया को जन्म दिया।



हम माता-पिता बने, मेरे माता-पिता दादा-दादी और मेरे सास-ससुर नाना-नानी बन गये। हम सभी बहुत खुश थे। जिसका सबसे बड़ा कारण-पिछले दो साल में हमारे ​परिवार तथा रिश्तेदारी में 7 महिलाएं पहली बार मां बनी, लेकिन सब को सिजेरियन डिलेवरी हुई। उन सबकी हालते देखकर बेहद दु:ख होता है। मेरी पत्नी गर्भ धारण करने के नाम से ही डरने लगती थी।

अत: हम दोनों ने तय किया कि बच्चा तो पैदा करेंगे, लेकिन सिजेरियन नहीं। सबसे पहले सेफ और बिदाउट सीजर डिलेवरी का रास्ता तलाशते-तलाशते हमें आपकी साइट हेल्थ केयर फ्रेंड पर 'आसान डिलेवरी-इजी डिलेवरी-सैफ डिलेवरी' की जानकारी पढने को मिली। जिसे पढने के बाद आप से बात हुई और हमने आपकी सलाह के अनुसार बच्चे को जन्म देने का प्लान किया। जैसे ही मेरी पत्नी ने कंसीव किया, मैंने आपकी राय के अनुसार मेरी पत्नी को 'प्रसव सुरक्षा चक्र' कोर्स दिलवाया। परिणाम चौंकाने वाला रहा। मेरी पत्नी को गर्भावस्था के दौरान बिना किसी प्रकार की गड़बड़ी और असहनीय पीड़ा के नेच्युअरली मां बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।

लेकिन इस बात का दु:ख ज्यादा है कि मेरी पत्नी के साथ-साथ मेरी बहन ने भी गर्भधारण किया था। हमने उन्हें नहीं बताया कि हमने सिजेरियन से बचाव हेतु 'प्रसव सुरक्षा चक्र' कार्स शुरू किया हुआ है और उसे भी लेना चाहिये। कारण हम खुद कनफर्म नहीं थे कि 'प्रसव सुरक्षा चक्र' कितना सफल होने वाला है। इसकी दु:खद कीमत मेरी बहन चुका चुकी है। उसे 09 अप्रेल, 2018 को सिजेरियन डिलेवरी हुई है। अभी भी उसे अनेक प्रकार की तकलीफें झेलनी पड़ रही हैं। डॉ. साहब मेरी बहन की दशा देखकर मैं अपने आप को बहुत ज्यादा दोषी मान रहा हूं। काश मैंने मेरी बहन को भी प्रसव सुरक्षा चक्र का कोर्स दिलवाया होता?-प्रभाकर सिंह, इंदौर, मध्यप्रदेश। (व्यक्तिगत आग्रह पर नाम और स्थान बदल दिये हैं।)

डॉक्टर टिप्पणी: प्रभाकर सिंह जिस तरह पछता रहे हैं। आये दिन इस प्रकार के अनेकों मामले हो रहे हैं। कारण अशिक्षा, अविश्वास, संकोच और अनुभवहीनता। सबसे महत्वपूर्ण और समझने वाली बात यह है कि सिजेरियन डिलेवरी के लिये केवल डॉक्टरों को दोष देना भी इस ​स्थि​ति के एक पहलु को ही देखना है। सिजेरियन डिलेवरी के अनेकानेक कारण हो सकते हैं। जिनमें गर्भिणी की शारीरिक श्रम करने की प्रवृत्ति के साथ-साथ घर का माहौल एवं गर्भिणी की मनोस्थिति बड़ी भूमिका निभाती है। जो औरतें गर्भधारण करने से पहले ही सिजेरियन डिलेवरी के डरावने सपने देखने लगती हैं। उन्हें सिजेरियन डिलेवरी से बचाना बहुत मुश्किल होता है। स्पष्ट किया जाता है कि हम बिना सहमति-अनुमति के किसी का भी केस प्रकाशिक नहीं करते हैं। जनहित में जो लोग अपनी स्थिति को सार्वजनिक करना चाहते हैं। उनके मामले प्रकाशित किये जाते हैं। इस विषय में अधिक जानकारी के लिये निम्न लेख भी पढे जा सकते हैं।
Online Dr. PL Meena (डॉ. पुरुषोत्तम मीणा): Health Care Friend and Marital Dispute Consultant (स्वास्थ्य रक्षक सक्षा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार ), Mobile & Health Advice WhatsApp No.: 85619-55619 (10AM to 10 PM), 17.04.2018
----------------------------देशी जड़ी बूटियों के बारे में पूर्वजों से प्राप्त ज्ञान तथा दुष्प्रभाव रहित होम्योपैथिक एवं बॉयोकैमिक जर्मन दवाईयों के सतत अध्ययन, शोधन, परीक्षण और उपचार के दौरान अनेक अनुभव सिद्ध उपयोगी नुस्खे तैयार किये गये हैं। जो बेशक कुछ महंगे अवश्य हैं, लेकिन इन नुस्खों से हजारों रोगियों को "लाइलाज समझी जाने वाली" अनेक तकलीफों से मुक्ति मिल चुकी है और चुनौतीपूर्ण मानव सेवा का यह क्रम हर दिन जारी है। लेकिन 'तुरन्त, गारण्टेड और शर्तिया इलाज' चाहने वाले माफ करें।-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'-17.04.2018.
लाइलाज एलर्जी (Incurable Allergy) का इलाज
डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
राजस्थान के जिला भरतपुर की बयाना तहसील के पास गाँव के एलर्जी से 8-9 वर्षों से पीड़ित 1 व्यक्ति के चार चित्र यहां प्रस्तुत हैं। जो उपचार हेतु मेरे पास आने से पहले एक दिन छोड़कर इंजेक्शन लगवाता था। इसके बाद भी उसकी दशा अत्यधिक खराब थी। जिसे 23.10.2017 के चित्र को जूम करके देखकर समझा जा सकता है। वह दिनभर खुजाता रहता था। उसके जख्मों पर मक्खियां भिनभिनाती रहती थी। अत: हमेशा मक्खियों को उड़ाता रहता था। रोगी ने बताया कि कभी-कभी उसके सारे शरीर में भयंकर सोजन आ जाती थी। जख्मों से रक्त निकलता रहता था। अनेक बार उसके लिये चलना-फिरना भी मुश्किल हो जाता था। इस कारण उसका जीवन अत्यधिक कष्टमय था। लोग उसे देखकर नफरत करते थे। उसके पास बैठना पसंद नहीं करते थे। इस कारण वह किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाता था। इस दौरान उसने बयाना, भरतपुर एवं मथुरा में अनेकों डॉक्टरों से इलाज करवाने में अपनी कड़ी मेहनत का बहुत सा रुपया खर्च किया। लेकिन सभी डॉक्टर्स ने अंत में यही कहा कि एलर्जी का कोई स्थायी इलाज सम्भव नहीं। उपरोक्त हालातों में पीड़ित व्यक्ति ने दिनांक: 23.10.17 को निदान हेतु मुझ से संपर्क किया। उसने बताया कि वह करीब 45-50 साल से बीड़ी पीने का आदी है। चूंकि धूम्रपान करने वालों को होम्योपैथिक दवाई असर नहीं करती हैं।

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अत: सबसे पहले बीड़ी छोड़ने हेतु उसका होम्योपैथिक उपचार किया गया। पीड़ित व्यक्ति के सहयोग से मात्र 5 दिन में उनकी बीड़ी पीने की आदत छुड़वा दी गयी। दिनांक: 28.10.17 से पीड़ित व्यक्ति की एलर्जी का निदान शुरु किया गया। आॅर्गेनिक देशी-जड़ी बूटियों एवं दुष्प्रभाव रहित होम्योपैथिक दवाइयों के उपचार से 15.11.17 तक अनुमान से बहुत पहले एलर्जी नियंत्रित हो गयी। दिनांक: 24.12.17 तक अर्थात 2 माह में शरीर और चेहरे के सभी जख्म मिट गये। दिनांक: 30.01.18 तक, अर्थात 3 महिने में रोगी ऊपरी तौर पर एलर्जी से पूर्णत: स्वस्थ हो गया एवं खुजली बंद हो गयी। लेकिन फिर से तकलीफ न हो इसलिये कम से कम अगले 3 महिने तक रोगी का आंतरिक उपचार किया जायेगा। जिसमें उनकी रक्तशुद्धि भी की जायेगी। यह सब हमारे निरोगधाम पर पैदा की जा रही शुद्ध-ताजा आॅर्गेनिक जड़ी-बूटियों तथा अमृततुल्य एवं दुष्प्रभाव रहित जर्मन होम्योपैथिक-बॉयोकैमिक तत्वों-दवाईयों का सुखद परिणाम है। उक्त रोगी का विवरण जैसे ही मैंने अपनी वेब साईट website www.healthcarefriend.in पर प्रकाशित किया तो एलर्जी, दाद, खाज, खुजली आदि त्वचा/चर्म रोगों से पीड़ित लोगों के फोन आने का सिलसिला शुरू हो गया। हजारों काल आ चुके हैं। जो यह संशोधित नोट डाले जाने तक जारी है। यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि समयाभाव के चलते तथा हमारे निरोगधाम पर पैदा की जा रही शुद्ध-ताजा आॅर्गेनिक जड़ी-बूटियों की उपलब्धता सीमित होने के कारण मैं सीमित संख्या में ही कुछेक रोगियों का ही उपचार कर पाता हूं।

नोट: देशी जड़ी बूटियों के बारे में पूर्वजों से प्राप्त ज्ञान तथा दुष्प्रभाव रहित होम्योपैथिक एवं बॉयोकैमिक जर्मन दवाईयों के सतत अध्ययन, शोधन, परीक्षण और उपचार के दौरान अनेक अनुभव सिद्ध उपयोगी नुस्खे तैयार किये गये हैं। जो बेशक कुछ महंगे अवश्य हैं, लेकिन इन नुस्खों से हजारों रोगियों को "लाइलाज समझी जाने वाली" अनेक तकलीफों से मुक्ति मिल चुकी है और चुनौतीपूर्ण मानव सेवा का यह क्रम लगातार जारी है। तुरन्त, गारंटेड और शर्तिया इलाज चाहने वाले माफ करें।
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बवासीर, गुदाभ्रंश और भगंदर (Piles, Rectum Collapse & Fissure) आॅपरेशन अंतिम विकल्प


बवासीर, गुदाभ्रंश और भगंदर (Piles, Rectum Collapse & Fissure) मुख्यत: पाचन क्रिया की गड़बड़ी (Digestive System disorder) से जुड़ी ऐसी तकलीफें हैं, जिन्हें अधिकतर पीड़ित लोग लम्बे समय तक किसी को नहीं बताते हैं। स्त्रियों में योनिभ्रंश (Colpoptosis/Elytroptosis) भी इसी श्रेणी की तकलीफ है। जिसे भी अकसर छिपाया जाता है। शर्म-संकोच इन सभी तकलीफों को बढाने और दुष्कर (Incurable) बनाने में सहायक होते हैं। योनिभ्रंश का इलाज नहीं करवाने पर स्त्रियों के यौन जीवन का अंत और दाम्पत्य जीवन में बिखराब या विवाहेत्तर यौन सम्बन्धों का कारण बन सकता है। अत: अपनी शारीरिक तकलीफों को छिपायें नहीं, बल्कि तुरंत नजदीकतम डॉक्टर को दिखायें और नियमित रूप से ठीक होने तक इलाज करवायें। डॉक्टर द्वारा आॅपरेशन की सलाह देने पर, आॅपरेशन करवाने की जल्दबाजी नहीं करें। एक से अधिक डॉक्टर से सलाह करें। अन्य चिकित्सा पद्धति के डॉक्टर्स से सलाह करें। डॉक्टर के कहने पर भी आॅपरेशन को प्रथम नहीं, बल्कि अंतिम विकल्प (Last option) के रूप में अपनायें।



मई, 2017 में गुजरात के एक 40 वर्षीय व्यक्ति का काल आया और संकुचाते हुए बताया-"पिछले 15 साल से मेरी गुदा का द्वारा बाहर निकलता है। मैंने 10 साल तक किसी को नहीं बताया। अब जब गुदा द्वारा को अंदर धकेलने में असहनीय तकलीफ और बहुत मुश्किल होने लगी तो मैंने अनेक डॉक्टर्स से इलाज करवाया। अंत में आॅपरेशन की सलाह दी। मुझे आॅपरेशन नहीं करवाना है। कृपया मुझे ठीक कर दें।''


पूछताछ करने पर ज्ञात हुआ कि उसे बचपन से कब्ज की शिकायत थी, जिसका उचित उपचार करने के बजाय दस्तावर दवाई ली जाती रही और दस्तावर चूर्ण का भी लम्बे समय तक सेवन किया। उसका मल सूख गया। अंत में गुदाद्वारा बाहर निकलने लगा और गुदाभ्रंश हो गया। ऐसे मामलों में अधिकतर रोगी 1-1 महिने में बार-बार डॉक्टर बदलते रहते हैं। इस कारण बीमारी बढती जाती है। जबकि धैर्यपूर्वक नियमित रूप से उपचार लेना जरूरी होता है।


उक्त पेशेंट का इलाज शुरू किया गया। पाचन क्रिया में 15 दिन में ही सुधार दिख गया, लेकिन 5 महिने तक गुदाभ्रंश में कोई विशेष लाभ नहीं हुआ। छठवें-सातवें महिने में कुछ लाभ दिखा। अब तकरीबन 10 महिने के उपचार के बाद रोगी स्वस्थ हो रहा है। रोगी को लगता है कि उसकी पाचन क्रिया और गुदाभ्रंश की तकलीफ ठीक हो चुकी है। लेकिन अभी भी उसे 2 से 5 महिने तक दवाईयों के सेवन की जरूरत हो सकती है। बहुत कम मामलों में ऐसा होता है। अधिकतर रोगी 6 से 8 महीने में ठीक हो जाते हैं।


इस प्रकरण में रोगी की भयंकर कब्ज तो सबसे बड़ी समस्या थी ही, साथ ही साथ मलद्वार के ज्ञान-तंतु इतने शिथिल हो चुके थे। जिसके कारण अनेक बार रोगी को पता ही नहीं चलता था कि उसका मलद्वारा और मल कब निकल गया। अत: इस स्थिति की रिकवरी में लम्बा समय लगा।


अन्तिम महत्वपूर्ण बात: खानपीन पर ध्यान रखें और अपनी पाचन क्रिया को दुरुस्त रखें। पाचन क्रिया में होने वाली गड़बड़ी की अनदेखी नहीं करें। स्वास्थ्य से बढकर कुछ भी नहीं है। लेकिन गुदाद्वारा या प्रजनन अंगों से जुड़ी किसी भी तकलीफ में आॅपरेशन करवाने से पहले जल्दबाजी नहीं करें। एक नहीं 100 बार सोचें। दूसरे-तीसरे डॉक्टर्स की राय लें और सभी चिकित्सा पद्धतियों को आजमा लेने के बाद अंतिम उपाय/विकल्प (Last option) के रूप में ही आॅपरेश को चुनें।

Online Dr. PL Meena (डॉ. पुरुषोत्तम मीणा): Health Care Friend and Marital Dispute Consultant (स्वास्थ्य रक्षक सक्षा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार ), Mobile & Health Advice WhatsApp No.: 85619-55619 (10AM to 10 PM), 05.04.2018
सावधान: यौन उत्तेजक पिल्स (sexual stimulant pills) नामर्दी का कारण। लाइलाज का इलाज-1 (Treatment of Incurable-1)

अधिकतर स्त्री-पुरुषों के जीवन में यौन समस्याएं अर्थात सेक्स प्रोब्लम्स इस कारण विद्यमान (Existing) हैं, क्योंकि इन प्रोब्लम्स के बारे में खुलकर बात नहीं कर पाना तथा शर्म, संकोच में डूबे रहना, ऐसे स्त्री-पुरुषों के व्यक्तित्व का कमजोर पहलु है। केवल इसी वजह से अनेकों स्त्री-पुरुषों का दाम्पत्य जीवन बर्बाद होकर नर्क बना हुआ है। अनेक उच्च पदस्थ तथा उच्च शिक्षा प्राप्त पुरुष भी इस क्षेत्र में मूर्खतापूर्ण आचरण करते रहते हैं। प्रोपर सेक्स एज्यूकेशन का अभाव, कुसंस्कार एवं सेक्स प्रोब्लम्स के बारे में अधकचरा ज्ञान रखने वालों से सलाह लेना या बिना योग्य डॉक्टरी सलाह के विज्ञापनों के आधार पर या गुमराह दोस्तों की सलाह पर यौन उत्तेजक पिल्स/गोलियों (sexual stimulant pills) का सेवन करने वालों में से 70 फीसदी से अधिक पुरुष 6 माह से 2 साल के अंदर पूरी तरह से नपुंसक/नामर्द (Neuter) हो जाते हैं। ऐसे पुरुषों की इन मूर्खताओं का खामियाजा उनकी निर्दोष पत्नियों को ताउम्र भुगतना पड़ता है। जबकि यदि इनके द्वारा प्रारंभ में ही किसी योग्य डॉक्टर से सम्पर्क किया जाये तो इनकी यौन कमजोरियों/बीमारियों का अधिक आसानी से दूरगामी समाधान संभव है।



केवल इतना ही नहीं, बल्कि यौन उत्तेजक पिल्स का सेवन करने वालों का होम्योपैथी एवं देशी जड़ी बूटियों के जरिये भी बहुत आसानी से इलाज संभव नहीं हो पाता है। मेरा व्यक्तिगत अनुभव है कि यौन उत्तेजक गोलियों का अत्यधिक सेवन करके अपने पुंसत्व को खो चुके पुरुषों को 6 माह से 2 साल तक लगातार शुद्ध, ताजा एवं ओर्गेनिक देशी जड़ी बूटियों तथा होम्योपैथिक दवाइयों का सेवन करवाने के बाद मुश्किल से 50-60 फीसदी पुरुष ही फिर से अपने पुंसत्व को प्राप्त कर पाते हैं। वह भी पूर्ववत नहीं।

अत: सबसे पहली और महत्वपूर्ण बात 'किसी भी स्थिति में किसी भी प्रकार की यौन उत्तेजक पिल्स/गोलियों का भूलकर भी सेवन नहीं करें।' दूसरी बात 'यौन उत्तेजक पिल्स या गोली किन्हें कहते हैं? जिन गोलियों, तेलों या अन्य किसी भी रूप में उपलब्ध दवाइयों के बारे में दावा किया जाता है कि उनका सेवन या उपयोग करने के तत्काल बाद अत्यंत यौन उत्तेजना या लम्बे समय तक यौन उत्तेजना उत्पन्न होगी, तो समझो दवा रूपी ऐसी वस्तुएं पुरुषों की यौन क्षमताओं की दुश्मन और पुंसत्व को खतम करने वाला धीमा जहर हैं।'

एक पुरुष रोगी ने अपनी वेदना मुझे इन शब्दों में लिखकर भेजी थी।
''डॉक्टर साहब मेरी गलतियों और मूर्खताओं की की वजह से मुझे समय से पहले सेक्स की कमजोरी आ गयी। जबकि मैं सेक्स का अत्यधिक भूखा था। दोस्तों की सलाह पर मैंने 32 साल की उम्र में..... नाम की यौन उत्तेजक​ गोली लेकर सेक्स करना शुरू कर दिया था। मैं हर महिने में 10 से 15 बार इस गोली का सेवन करता था। जिसको लेने के बाद तुरंत उत्तेजना आती थी और लम्बे समय तक वीर्य स्खलन नहीं होता था। एक साल बाद स्थिति यह है कि एक साथ 3 गोली लेने पर भी शरीर तो बुखार की तरह गरम होकर तपने लगता है, लेकिन लिंग में उत्तेजना नहीं आती है। मुझे लगता है कि मेरे इन हालातों के कारण मेरी पत्नी ने नाजायज सम्बन्ध बना लिये हैं। मैं पत्नी का सामना नहीं कर पा रहा हूं। सब कुछ जानते हुए भी कुछ भी बोलने की स्थिति में नहीं हूं। अनेक बार आत्महत्या करने का विचार आता है। कृपया मुझे बचा लें।''

उपरोक्त स्थिति किसी एक पुरुष की नहीं, लाखों पुरुष इन हालातों से गुजर रहे हैं। लगातार एक साल तक उपचार करने के बाद उक्त निराश एवं जीवन से हार चुके पुरुष रोगी के जीवन में फिर से आशा की किरण जागना शुरू हुआ है। उसे यौन उत्तेजना शुरू हो चुकी है और वह फिर से यौन सम्बन्ध बनाने में सफल हुआ है। यद्यपि अभी भी मंजिल बहुत दूर है। मुझे विश्वास है कि यदि शुद्ध, ताजा एवं ओर्गेनिक (Organic) देशी-जड़ी बूटियों से निर्मित नुस्खों का नियमित सेवन किया जाये और साथ में होम्योपैथी की अमृत तुल्य तथा दुष्प्रभाव रहित सेलेनियम, लाईकोपोडियम, स्टेफिसेग्रिया, एग्नस कैस्टस, कैलेडियम, अवेना सेटाइवा, ओनोसमोडियम, योहिम्बीनम, नक्स वोमिका, सल्फर, अर्जेंटम नाईट्रिकम, एसिडम फॉस्फोरिकम, सार्सा​पारिल्ला जैसी अनेकानेक दवाइयों में से चयनित (Selected) का निर्धारित रीति से उचित मात्रा एवं उचित शक्ति में सेवन किया जाये तो निराशा के भंवर में डूब चुके पुरुषों के जीवन में फिर से बहार आ सकती है।

नोट/Note: अपने स्वास्थ्य की अनदेखी नहीं करें, तुरंत स्थानीय डॉक्टर (Local Doctor) से सम्पर्क करें। हां यदि आप स्थानीय डॉक्टर्स से इलाज करवाकर थक चुके हैं, तो आप मेरे हेल्थ वाट्सएप No.: 8561955619 पर अपनी बीमारी की डिटेल और अपना नाम-पता लिखकर भेजें और घर बैठे उचित समाधान प्राप्त करें। Dr. PL Meena, On Line-Health Care Friend and Marital Dispute Consultant (स्वास्थ्य रक्षक सखा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार) तथा संचालक निरोगधाम (लाइलाज का इलाज) Health WhatsApp No. 8561955619, Mob.: 9875066111

----------------------------देशी जड़ी बूटियों के बारे में पूर्वजों से प्राप्त ज्ञान तथा दुष्प्रभाव रहित होम्योपैथिक एवं बॉयोकैमिक जर्मन दवाईयों के सतत अध्ययन, शोधन, परीक्षण और उपचार के दौरान अनेक अनुभव सिद्ध उपयोगी नुस्खे तैयार किये गये हैं। जो बेशक कुछ मंहगे अवश्य हैं, लेकिन इन नुस्खों से हजारों रोगियों को "लाइलाज समझी जाने वाली" अनेक तकलीफों से मुक्ति मिल चुकी है और चुनौतीपूर्ण मानव सेवा का यह क्रम लगातार जारी है। तुरन्त, गारण्टेड और शर्तिया इलाज चाहने वाले माफ करें। हेल्थ बलेटिन प्राप्त करने के लिये 9875066111 पर अपना नाम पता लिखकर भेजें।-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'-27.03.2018.
हेल्थ बुलेटिन (स्वास्थ्य परामर्श) भाग-3 (Health Bulletin-3)

समस्या: मेरी उम्र 38 साल, लम्बाई 5 फिट 4 इंच और वजन 85 किलो है। मैं दो बच्चों का पिता हूं। मुझे विवाहपूर्व से ही शीघ्रपतन की समस्या है। इस कारण पत्नी को संतुष्ट नहीं कर पाता हूं। इस कारण हमारे बीच किसी न किसी बात पर लगातार तकरार होती ही रहती है। जबकि सभी प्रकार की समस्याओं की जड़ शीघ्रपतन है। इस वजह से हम एक साथ रहकर भी दुश्मनों की भांति रहते हैं। महिनों तक हमारे बीच बीतचीत तक नहीं होती है। कृपया कोई पक्का इलाज बतायें। एक्सवाईजेड त्रिवेदी, गोरखपुर, उप्र।



परामर्श: त्रिवेदी जी सबसे पहले तो आप यह समझ लें कि आपकी समस्या कोई ऐसी समस्या नहीं है, जिससे आप अकेले जूझ रहे हैं, बल्कि एक अध्ययन के अनुसार भारत में 30 फीसदी लोगों का दाम्पत्य तकरीबन इसी तरह का है। आप और आप जैसी तकलीफ से जूछ रहे दम्पत्तियों के हितार्थ मैं आपको कुछ सुझाव लिख रहा हूं:-
(1) पहली बात झगड़ा करना या बातचीत बंद कर देना समस्या का समाधान नहीं, बल्कि समस्या को बढाना है। आपको अपने वैवाहिक सम्बन्धों की पुनर्स्थापना हेतु तुरंत किसी अनुभवी तथा विश्वास योग्य दाम्पत्य विवाद सलाहकार (Marital Dispute Consultant) से सम्पर्क करना चाहिये।
(2) दूसरी बात दाम्पत्य विवाद सलाहकार से सम्पर्क करने के बाद उनकी सलाह का अनुसरण करें। जब तक आपको दाम्पत्य विवाद सलाहकार का परामर्श नहीं मिल पाता है, आप मेरी वेब साइट स्वास्थ्य रक्षक सखा (Health Care Friend) पर 'शीघ्रपतन' (Early Ejaculation) शीर्षक से प्रकाशित मेरे लेख को पढें और अपने पाचन संस्थान का उपचार करवायें। उसके बाद ही उपचार की सोचें। क्योंकि जब तक आपका पाचन संस्थान ठीक नहीं होगा, आपकी किसी भी बीमारी का आसानी से उपचार सम्भव नहीं है। जिसके लिये आप किसी स्थानीय डॉक्टर से सम्पर्क करें। या इस पोस्ट के अंत में लिखे मेरे हेल्थ वाट्सएप पर सम्पर्क करें।
(3) तीसरी बात उपचार होने तक आप त्रिफला का सेवन कर सकते हैं। लेकिन बाजारू त्रिफला नहीं लें, बल्कि थोड़ा सा श्रम खुद करें। 100 ग्राम बड़ी हरड़, 200 ग्राम बहेड़ा, 400 आंवला लें। तीनों ताजा हों। अर्थात पुराने सड़े-गले नहीं हों। तीनों को अच्छे से कूट-पीसकर कपड़छन करके पाउडर बना लें। इस सब में 200 ग्राम काले नमक का पाउडर बनाकर मिला लें। सभी को मिश्रित करके किसी एयर टाईट डब्बे में भरकर सुरक्षित रख लें। इसमें से प्रतिदिन शाम को दो टी-स्पून (Teaspoon) पाउडर शाम को आधा गिलास पानी में भिगो दें। सुबह आधा गिलास पानी और मिलायें। फिर धीमी आंच पर पकावें। जब पानी आधा रह जाये तो सुबह खाली पेट गुनगुना-गुनगुना (Lukewarm) नियमित रूप से लगातार एक से तीन महिने तक या पाचन संस्थान ठीक होने तक पियें। खाली पेट चाय और दूध का सेवन भूलकर भी नहीं करें।
(4) जब आपकी पाचन क्रिया नियमित हो जाये तो शुद्ध आॅर्गेनिक कौंच का विधिवत शोधित किया हुआ पाउडर, शुद्ध आॅर्गेनिक अश्वगंधा पाउडर, शुद्ध सफेद मूसली पाउडर तीनों को कपड़छन करके समान मात्रा में मिला लें, इन तीनों के बराबर मात्रा में मिश्री पाउडर मिला लें। रात्रि सोते समय करीब 5 ग्राम पाउडर की फक्की लेकर 150 से 500 मिलीलीटर तक, अपनी क्षमतानुसार गुनगुना-गुनगुना (Lukewarm) दूध नियमित रूप से  पियें।
(5) पूरी तरह से स्वस्थ होने तक किसी भी प्रकार का नशा और मांसाहार नहीं करें। नियमित रूप से समय पर स्वास्थ्यवर्धक भोजन लें।

चेतावनी: यहां पर जनहित में स्वास्थ्य और बीमारियों के बारे में जागरूकता के लिए दवाईयों का विवरण लिखा गया है। पाठक कृपया स्वयं अपना इलाज करने का खतरा नहीं उठायें। कृपया अपने चिकित्सक के परामर्श के बिना, सुझाई गयी (किसी भी प्रकार की) दवा का सेवन नहीं करें। [Please Do not take any (kind of) suggested medicine, without consulting your Doctor.]

नोट/Note: अपने स्वास्थ्य की अनदेखी नहीं करें, तुरंत स्थानीय डॉक्टर (Local Doctor) से सम्पर्क करें। हां यदि आप स्थानीय डॉक्टर्स से इलाज करवाकर थक चुके हैं, तो आप मेरे हेल्थ वाट्सएप No.: 8561955619 पर अपनी बीमारी की डिटेल और अपना नाम-पता लिखकर भेजें और घर बैठे उचित समाधान प्राप्त करें। On Line-Health Care Friend and Marital Dispute Consultant-Dr. PL Meena, Health WhatsApp No. 8561955619

----------------------------देशी जड़ी बूटियों के बारे में पूर्वजों से प्राप्त ज्ञान तथा दुष्प्रभाव रहित होम्योपैथिक एवं बॉयोकैमिक जर्मन दवाईयों के सतत अध्ययन, शोधन, परीक्षण और उपचार के दौरान अनेक अनुभव सिद्ध उपयोगी नुस्खे तैयार किये गये हैं। जो बेशक कुछ मंहगे अवश्य हैं, लेकिन इन नुस्खों से हजारों रोगियों को "लाइलाज समझी जाने वाली" अनेक तकलीफों से मुक्ति मिल चुकी है और चुनौतीपूर्ण मानव सेवा का यह क्रम लगातार जारी है। तुरन्त, गारण्टेड और शर्तिया इलाज चाहने वाले माफ करें।—डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'-14.03.2018.
हेल्थ बुलेटिन (स्वास्थ्य परामर्श) भाग-2 (Health Bulletin-2)

नोट: सुझाई गयी सभी होम्योपैथिक एवं बॉयोकैमिक दवाईयां केवल जर्मनी निर्मित सील पैक और देशी जड़ी-बूटियां शुद्ध, ताजा तथा आॅर्गेनिक उपयोग करने पर ही परिणाम मिलने की उम्मीद की जा सकती है।



1. मैं जब भी किसी बड़े अफसर से मिलता हूँ या परीक्षा या इंटरव्यू देने जाता हूँ तो मेरा कॉन्फिडेंस जवाब दे जाता है। क्या इसका कोई इलाज हो सकता है?-भरत कुलश्रेष्ठ, उज्जैन, मप्र।
परामर्श: जब भी ऐसा मौका आये आप होम्योपैथी की दवाई अर्जेण्टम नाईट्रिकम-30 की 1-1 घण्टे में 4-5 खुराक सेवन करें। सम्पूर्ण उपचार के लिये किसी योग्य हिम्योपैथ से सम्पर्क करें।
2. मेरी एज 37 वर्ष है। मैरिज को 15 साल हो गये। 2 बच्चे हैं। लेकिन मुझे अभी भी शीघ्रपतन की समस्या है। अनेक डॉक्टर्स का कहना है कि मैरिज के बाद सब ठीक हो जाता है, लेकिन मुझे कोई फर्क नहीं हुआ। इस कारण हमारी मैरिज लाइफ डिस्टर्ब है। कोई पक्का इलाज बतायें।-के के सिंह, कानपुर, उप्र।
परामर्श: आपके प्रोपर/सही उपचार के लिये आपका सम्पूर्ण लक्षणात्मक विवरण जानना बहुत जरूरी है। फिर भी फौरी उपचार के लिये आप होम्योपैथी की दवाई स्टेफिसेग्रिया-200 और शुद्ध ऑर्गेनिक काले कौंच, सफेद मूसली, शतावरी, भूई आमला, शरफुंका और मिश्री का सम्भाग मिश्रण बनाकर, प्रतिदिन 2 से 5 ग्राम तक शाम को दूध के साथ 2-3 महीने तक सेवन करें। आप मेरी वेब साइट पर 'शीघ्रपतन' शीर्षक से 30.11.2017 को प्रकाशित लेख अवश्य पढें। इसे पढने के बाद आपकी अनेक भ्रांतियां और उलझनें दूर हो सकेंगी।
3. मेरी पत्नी की उम्र 40 साल है। उसको 20 साल की उम्र से सफेद पानी की बीमारी है। बहुत इलाज करवाया, लेकिन कोई लाभ नहीं। बिल्कुल सूख गई है। 35 किलो भजन रह गया है। कोई काम नहीं कर पाती। चक्कर आते हैं और आधे सिर में दर्द रहता है। भूख नहीं लगती। कब्जी रहती है। क्या करें?-रमेश शर्मा, मुरेना, मध्य प्रदेश।
परामर्श: जितना आपने बताया है, उतनी सी जानकारी से उपचार बताना सम्भव नहीं है। लगता है आपकी पत्नी को लीवर में सूजन या इंफेक्शन के साथ ल्यूकोरिया/श्वेत प्रदर और माइग्रेन की पीड़ा है। इन सभी तकलीफों का प्रोपर उपचार जरूरी है। किसी योग्य होम्योपैथ और, या आयुर्वेद के डॉक्टर से सम्पर्क करें। तब तक आप उन्हें नियमित रूप से शुद्ध ऑर्गेनिक और ताजा भूई आमला, मकोय, पुनर्नवा और आंवले का काढ़ा सुबह शाम पिला सकते हैं। आपकी पत्नी की पूर्ण जानकारी हेतु मेरे हेल्थ वाट्सएप नम्बर 8561955619 पर भी सम्पर्क कर सकते हैं। 
4. मेरे अंडकोषों में 8-9 महिने से दाद और खुजली की समस्या है। जब तक गोली, कैप्सूल और इंजेक्शन लेता हूँ, सब ठीकठाक रहता है। कुछ दिन बाद फिर से तकलीफ शुरू हो जाती है। जिसमें जलन होती है और खुजाने पर रक्त निकलने लगता है। प्लीज मुझे इससे मुक्ति दिलाएं।-पीएस गंगवाल, भोपाल, मप्र।
परामर्श: सबसे जरूरी सावधानी-अपने सभी आंतरिक कपड़े सूती पहनें और उन्हें साफ रखें। जिसके लिये स्वस्थ होने तक रोजाना उबलते पानी में कपड़ों की धुलाई जरूरी है। नहाते समय नीम के पत्ते पानी में उबालें या गुनगुने पानी में एंटी इंफेक्शन पाऊडर पानी में डालकर नहाएं। प्रतिदिन होम्योपैथी की दवाई सल्फर-200+कैंथरिस-200 की एक-एक खुराक और शुद्ध ऑर्गेनिक शरफुंका+श्योनाक पाउडर, प्रतिदिन 2 से 5 ग्राम तक सुबह-शाम पानी के साथ ठीक होने तक सेवन करें।
5. मेरी पत्नी की उम्र 32 साल है। विवाह को 6 महिने हुए हैं। उसकी योनि का करीब 2 इंच हिस्सा बाहर निकलता है। डॉक्टर का कहना है कि वैजाइना कोलैप्स की तकलीफ है, ऑपरेशन करना पड़ेगा। हमें बहुत घबराहट और डर है। क्या मेरी पत्नी बिना ऑपरेशन ठीक हो सकती है और क्या वह माँ बन पाएगी? खर्चे की कोई दिक्कत नहीं हम दोनों जॉब करते हैं।-मनीष पांचाल, रेवाड़ी, हरियाणा।
परामर्श: बिना बच्चों को जन्म दिये योनिभ्रंश अर्थात वैजाइना कोलैप्स, लगभग असम्भव। मामला उतना सरल नहीं जितना आप को लग रहा है। आपकी पत्नी के सहयोग के बिना उपचार सम्भव नहीं। उन्हें सम्पूर्ण केस हिस्ट्री ईमानदारी से बतानी होगी। आप तुरन्त किसी होम्योपैथ से सम्पर्क करें या मेरे हेल्थ वाट्सएप 85619 55619 पर सम्पर्क करें। तब तक होम्योपैथी की दवाई कोलोफाईलम-200+कॉस्टीकम-200 सुबह शाम सेवन करवा सकते हैं।
चेतावनी: यहां पर जनहित में स्वास्थ्य और बीमारियों के बारे में जागरूकता के लिए दवाईयों का विवरण लिखा गया है। पाठक कृपया स्वयं अपना इलाज करने का खतरा नहीं उठायें। कृपया अपने चिकित्सक के परामर्श के बिना, सुझाई गयी (किसी भी प्रकार की) दवा का सेवन नहीं करें। [Please Do not take any (kind of) suggested medicine, without consulting your Doctor.]

Note: अपने स्वास्थ्य की अनदेखी नहीं करें, तुरंत स्थानीय डॉक्टर (Local Doctor) से सम्पर्क करें। हां यदि आप स्थानीय डॉक्टर्स से इलाज करवाकर थक चुके हैं, तो आप मेरे हेल्थ वाट्सएप No.: 8561955619 पर अपनी बीमारी की डिटेल और अपना नाम-पता लिखकर भेजें और घर बैठे उचित समाधान प्राप्त करें। On Line-Health Care Friend and Marital Dispute Consultant-Dr. PL Meena, Health WhatsApp No. 8561955619

----------------------------देशी जड़ी बूटियों के बारे में पूर्वजों से प्राप्त ज्ञान तथा दुष्प्रभाव रहित होम्योपैथिक एवं बॉयोकैमिक जर्मन दवाईयों के सतत अध्ययन, शोधन, परीक्षण और उपचार के दौरान अनेक अनुभव सिद्ध उपयोगी नुस्खे तैयार किये गये हैं। जो बेशक कुछ मंहगे अवश्य हैं, लेकिन इन नुस्खों से हजारों रोगियों को "लाइलाज समझी जाने वाली" अनेक तकलीफों से मुक्ति मिल चुकी है और चुनौतीपूर्ण मानव सेवा का यह क्रम लगातार जारी है। तुरन्त, गारण्टेड और शर्तिया इलाज चाहने वाले माफ करें।
हेल्थ बुलेटिन (स्वास्थ्य परामर्श) भाग-1



1. डॉ. साहब मुझे साल में 6 महिने जुकाम रहती है। जब तक टैबलेट लेता हूं, आराम रहता है। दवाई छोड़ते ही तकलीफ फिर से शुरू हो जाती ​है। जुकाम के दौरान आंसुओं से आंखें जलने लगती हैं। आंसू गालों पर लगते हैं तो गालों पर भी जलन होती है।-रश्मि गोयल, मथुरा, उप्र।
परामर्श: रश्मि जी आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कामजोर हो चुकी है। जिसका प्रोपर इलाज जरूरी है। फिर भी आप होम्योपैथी की यूफ्रेशिया-30 दवाई लेकर देख सकते हैं।

2. डॉ. साहब मेरा वजन बढ रहा है। 25 साल में 80 किलो। थॉइराइड नहीं है। पेट खराब रहता है। ढकारें आती हैं। भूख नहीं लगती। पेट के ऊपरी दायें हिस्से में दर्द होता है। गैस बनती हैं और बहुत कमजोरी अनुभव होती है।-प्रशांत कुमार सैनी, अजमेर, राजस्थान।
परामर्श: प्रशांत जी आपके लीवर की स्थिति ठीक नहीं लगती। लीवर की जांच करवायें। उसके बाद प्रोपर उपचार करवायें। तब तक सुबह खाली पेट चाय और दूध पीते हों तो तत्काल बंद कर दें। चावल, तली, भुनी, बासी और पैक्ट सामग्री, जंक फूड और मांसाहार आपके लिये विशेष रूप से नुकसान दायक हैं। सुबह, दोपहर और शाम को 1-1 गिलास गुनगुना पानी पीने की आदत डालें। सोते समय होम्योपैथी की नक्स वोमिका-200 दवाई का सेवन कर सकते हैं।
3. डॉ. सर मेरी उम्र 30 साल है। बचपन से गुदाद्वारा बाहर निकलता है। बहुत परेशान हूं। जीवन नर्क बना हुआ है। कोई घरेलु इलाज बतायें।-गौरव सिंह, मंदसौर, मप्र।
परामर्श: भारत में 80 फीसदी से अधिक लोगों का पेट खराब है। जिनमें से लगभग आधों को बवासीर, गुदाभ्रंश-गुदाद्वारा बाहर निकलना और भगदंर की तकलीफ है। शर्म और अज्ञानता के कारण लोग इन्हें छुपाते हैं। जिसके कारण मर्ज बढता जाता है। अनेक तो आॅपरेशन करवाकर जीवनभर पछताते रहते हैं। इसमें घरेलु इलाज काम नहीं आने वाला, आपको इसे गंभीरता से लेना चाहिये और तुरंत किसी योग्य डॉक्टर से पूर्ण उपचार लें। फिर भी आप दिन में तीन बार होम्योपैथी की रटानिया-200 दवाई का सेवन कर सकते हैं, लेकिन अपने हाजमें को सही रखें।

4. सर मेरी बहिन के पैर में एक फोड़ा है, अनेक एण्टी बोयोटिक खाली लेकिन 8 महिने ठीक नहीं हो रहा है। कृपया होम्योपैथिक इलाज बतायें।-महेश गुर्जर, गुरूग्राम, हरियाणा।
परामर्श: बेहतर होगा आप अपनी बहिन को किसी अनुभवी होम्योपैथ को दिखायें। तब तक आप होम्योपैथी की हिपर सल्फ-30 दवाई दिन में 3 बार देकर देख सकते हैं।

5. डॉ. साहब गुदाद्वार में जलन होती है। मरोड़ के साथ पतले दस्त आते हैं। जिनमें कुछ चिकना पदार्थ निकलता है। 3 साल से परेशान हूं। कोई पक्का इलाज बतायें।-अश्विन कुमार जगमाल, देहरादून, उख।
परामर्श: अश्विन जी पक्के इलाज के लिये आपका सम्पूर्ण लक्षणात्मक विवरण जानना जरूरी है। जितना आपने बताया है, उसके अनुसार आप होम्योपैथी की मर्क सोल-200 दवाई दिन देकर देख सकते हैं।

चेतावनी: यहां पर जनहित में स्वास्थ्य और बीमारियों के बारे में जागरूकता के लिए दवाईयों का विवरण लिखा गया है। पाठक कृपया स्वयं अपना इलाज करने का खतरा नहीं उठायें। कृपया अपने चिकित्सक के परामर्श के बिना, सुझाई गयी (किसी भी प्रकार की) दवा का सेवन नहीं करें। [Please Do not take any (kind of) suggested medicine, without consulting your Doctor.]
Note:----------------------------स्वास्थ्य की अनदेखी नहीं करें, तुरंत स्थानीय डॉक्टर (Local Doctor) से सम्पर्क करें। हां यदि आप स्थानीय डॉक्टर्स से इलाज करवाकर थक चुके हैं, तो आप मेरे हेल्थ वाट्सएप No.: 8561955619 पर अपनी बीमारी की डिटेल और अपना नाम-पता लिखकर भेजें और घर बैठे आॅन लाइन इलाज प्राप्त करें। On Line-Health Care Friend and Marital Dispute Consultant-Dr. PL Meena, Health WhatsApp No. 8561955619
----------------------------देशी जड़ी बूटियों के बारे में पूर्वजों से प्राप्त ज्ञान तथा दुष्प्रभाव रहित होम्योपैथिक एवं बॉयोकैमिक जर्मन दवाईयों के सतत अध्ययन, शोधन, परीक्षण और उपचार के दौरान अनेक अनुभव सिद्ध उपयोगी नुस्खे तैयार किये हैं। जो बेशक कुछ मंहगे अवश्य हैं, लेकिन इन नुस्खों से हजारों रोगियों को अनेकानेक लाइलाज समझी जाने वाली तकलीफों से मुक्ति मिल चुकी है और चुनौतीपूर्ण सेवा का यह क्रम लगातार जारी है। गारंटी और शर्तिया इलाज चाहने वाले माफ करें।

पाचन (digestion) तंत्र की कमजोरी जीवन को नरक बना सकती है!

डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
एक सर्वे के अनुसार भारतीय उपमहाद्वीप में 80 प्रतिशत लोगों को कोई न कोई पेट सम्बन्धी तकलीफ बनी ही है। जिसके कारण उन्हें पाचन (digestion) सम्बन्धी अनेक प्रकार के उपद्रव प्रकट होते रहते हैं। जैसे—कब्ज (Constipation), अपच, अजीर्ण, बदहजमी, मंदाग्नि (indigestion), खट्टी डकार आना (Sourness), गैस-ऐसीडिटी (Gas-Acidity), मुँह में बारंबार-छाले (Repeatedly-Mouth-Ulcer), आंतों में अल्सर (Intestinal Ulcer), आंतों/गले में जलन (Intestinal/throat irritation), आफरा (flatulence), बवासीर-मस्से (Piles-Hemorrhoids), भगंदर-फिस्च्युला-गुदा में फोड़ा (Fistula), गुदाभ्रंश-गुदा/कांच बाहर निकलना (Rectum Collapse), जिगर-यकृत रोग/लीवर में सूजन (Liver Dysfunction/Fetty-Swollen Liver), तिल्ली में सूजन (Swelling in the Spleen), क्षुधानाश-भूख नहीं लगना (Anorexia-Loss of Appetite), कमजोरी/घबराहट (Weakness/Nervousness), हाथ-पैरों और बदन में सूजन (Swelling of hands-feet and Body), मुँह से दुर्गन्ध (Stench) आना, लगातार मितली/उबकाई आना (Frequent Nausea), पुरानी पेचिश/डिसेंट्री (Dysentery), आलस्य-सुस्ती-चिड़चिड़ापन-तनाव (Laziness-Lethargy-Irritability-Stress), चर्म रोग, जिनमें प्राय: दाद-खाज-खुजली-(Ringworm-Herpes-Itching), मुंहासे (Acne), एलर्जी (Allergy), एक्जीमा (Eczema)।



उपरोक्त लक्षणों की लम्बे समय तक अनदेखी भारी पड़ सकती है। क्योंकि सर्वे में कहा गया है कि पुरुषों में शीघ्रपतन (Early Discharge, Early Ejaculation, Premature Ejaculation), यौन कमजोरी एवं नामर्दी (sexual weakness and impotence) तथा महिलाओं में रक्ताल्पता, बांझपन, प्रदर (anemia, infertility, leucorrhea) और यौनेच्छाओं में कमी या अरुचि (lack of sexual excitement or interest) के पीछे भी पाचन तंत्र में गड़बड़ी होना प्रमुख कारण पाया गया। इसी प्रकार से गठिया (arthritis, rheumatism, gout) और जोड़ों के दर्द (joint pains) के लिये भी पाचन सम्बन्धी कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। सबसे दु:खद तथ्य तो यह सामने आया है कि जिन लोगों का पेट खराब रहता है, उनमें से आधे से अधिक लोगों को बवासीर-मस्से (Piles-Hemorrhoids), भगंदर-फिस्च्युला-गुदा में फोड़ा (Fistula), गुदाभ्रंश-गुदा/कांच बाहर निकलना (Rectum Collapse) में से कोई न कोई तकलीफ अवश्य पाई जाती है, लेकिन अशिक्षा तथा संकोच के कारण लोग अपनी समस्या को खुलकर डॉक्टरों तक को नहीं बताते हैं। जिसके चलते समस्या बढती ही जाती है और अंतत: उन्हें आॅपरेशन तक करवाना पड़ता है। आॅपरेशन के बाद कैसा जीवन होता है, इसको वही व्यक्ति समझ सकता है। जो इसे भोग रहा/चुका होता है?

किसी भी समझदार व्यक्ति को इस बात को समझना चाहिये कि पाचन सम्बन्धी तकलीफों की अनदेखी करके अपने स्वास्थ्य से खिलवाड़ नहीं करना चाहिये। क्योंकि धन तो दुबारा कमाया जा सकता है, लेकिन एक बार स्वास्थ्य खराब हो गया तो फिर उसे ज्यों का त्यों वापस पाना बहुत मुश्किल और दुरूह कार्य है। इस तथ्य को स्पष्ट करने के लिये मेरे एक पेशेंट की पीड़ा को व्यक्त करने वाली कुछ पंक्तियां यहां उद्धरित करना जरूरी समझता हूं:-
"स्वास्थ्य का जीवन में क्या महत्व होता है, इसको नजर अंदाज करते हुए रोजगार पाने के चक्कर में, मैं बर्बाद कर बैठा। सरकारी नौकरी तो मिल गयी, लेकिन समय निकलने पर अहसास हुआ कि जिस स्वस्थ स्वास्थ्य की एक शरीर/व्यक्ति को आवश्यकता होती है, उसे तो मैं खो चुका हूं। पिछले तीन सालों से नौकरी से मिलने वाली पगार से मैं उस खाये हुए स्वास्थ्य को पुन: खरीदने की कोशिश कर रहा हूं।"

अत: मेरी राय है कि यदि आप में से कोई भी पाचन सम्बन्धी तकलीफों या पाचनतंत्र की कमजोरी के उपरोक्त लक्षणों या दुष्परिणामों का सामना कर रहे हैं तो तत्काल किसी योग्य, अनुभवी और संवेदनशील डॉक्टर से सम्पर्क करें। हां यदि आप इलाज के चक्कर में वक्त और पैसा खर्च करके थक चुके हैं और अभी तक आशातीत सफलता नहीं मिली है तो आप आॅन लाईन उपचार हेतु मेरे हेल्थ वाट्सएप नम्बर 8561955619 या मो. नं. 9875066111 पर सम्पर्क कर सकते हैं।

हमारी कोशिश होती है कि पीड़ित व्यक्ति के लक्षणों के अनुसार उसके शरीर में जिन-जिन तत्वों की कमी या अधिकता है, प्राकृतिक तरीके से उनकी पूर्ति, निष्कासन या सुधार (regeneration-improvement-reformation) की प्रक्रिया से निदान हेतु यथासंभव शुद्ध आॅर्गेनिक जड़ी-बूटियों (Pure organic herbs), होम्योपैथिक (Homeopathic) और, या बायोकेमिक (Biochemic) तत्वों से युक्त दुष्प्रभाव रहित पोषक या विषाक्तता नाशक सम्पूरक तत्वों (Without side effect nutrient or anti-toxicity-supplement elements) के जरिये निदान करने की कोशिश की जाती है। मगर याद रहे हम से आप स्वस्थ होने की उम्मीद तो करें, लेकिन किसी प्रकार की गारंटी या शर्तिया इलाज की उम्मीद नहीं करें, क्योंकि गारण्टी देना स्पष्ट रूप से पीड़ित व्यक्ति के साथ धोखा और कानूनी अपराध है।
डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'-स्वास्थ्य रक्षक सखा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार-04.03.2018. Online Dr. PL Meena: Health Care Friend and Marital Dispute Consultant, Health Advice WhatsApp No.: 85619-55619, Mobile No.: 9875066111 (10AM to 10 PM)
जो व्यक्ति खुद अपनी मदद नहीं कर सकता!
दुनियां में कोई उसकी मदद नहीं कर सकता!
आप को बीमारी का निदान चाहिये तो स्वास्थ्य-परामर्श-फॉर्म भरना ही होगा।
(रोगी और स्वास्थ्य रक्षक सखा (स्वरस) के मध्य संवाद)




रोगी: मुझे सिरदर्द, पाइल्स और शीघ्रपतन की समस्या है। क्या मैं ठीक हो सकता हूं?
स्वास्थ्य रक्षक सखा (स्वरस): जरूर हो सकते हैं, लेकिन पहले आपकी डिटेल जानकारी के लिये आपको वाट्सएप या मेल पर 'स्वास्थ्य-परामर्श-फॉर्म (Health Consultation Form)' भरना होगा!
रोगी: सर फॉर्म भेज दें।
स्वरस: फॉर्म भेज दिया है। कृपया इसे ठीक पढकर और समझकर भर दें।
रोगी: सर जब मैंने अपनी तकलीफ सिरदर्द, पाइल्स और शीघ्रपतन की बता दी है तो इतनी सारी जानकारी क्यों जरूरी हैं?
स्वरस: आपकी तकलीफों का सही से निदान करने के लिये।
रोगी: अब से पहले तो किसी डॉक्टर ने इतनी जानकारी नहीं पूछी। जबकि मैं 8-10 डॉक्टरों से इलाज करवा चुका हूं।
स्वरस: उन 8-10 डॉक्टरों से इलाज तो करवा चुके, लेकिन इलाज का परिणाम क्या रहा?
रोगी: सर मेरी बीमारी उनसे ठीक नहीं हुई तब ही तो आपसे कॉण्टेक्ट किया है..
स्वरस: आपका इलाज 8-10 डॉक्टरों से नहीं हुआ। इसका मतलब या तो बीमारी गंभीर है या आपने उन्हें सही से बतायी नहीं या उनमें से किसी को समझ में नहीं आयी? हमारी कोशिश है कि आपकी बीमारी के मूल कारण को समझकर उसका पक्का निदान किया जाये। इसीलिये फॉर्म में डिटेल जानकारी चाही गयी है।
रोगी: लेकिन सर इलाज तो सिरदर्द, पाइल्स और शीघ्रपतन का करवाना है, आप तो मेरी पाचन क्रिया के बारे में 25 जानकारी मांग रहे हैं...?
स्वरस: आपके इलाज के लिये आपके खानपान की आदतों तथा आपकी पाचन क्रिया की जानकारी बहुत जरूरी है। बल्कि अनिवार्य है।
रोगी: सर क्या बिना डिटेल लिखे इलाज संभव नहीं?
स्वरस: बिलकुल नहीं!
रोगी: क्या आप माबाईल पर लिख सकते हैं?
स्वरस: बिलकुल नहीं!
रोगी: क्या मैं कागज पर लिखकर, उसका फोटो खींचकर भेज सकता हूं?
स्वरस: बिलकुल नहीं!
रोगी: क्या मैं आपसे व्यक्तिगत रूप से मिलकर समस्या बता सकता हूं?
स्वरस: बिलकुल नहीं! पहले फॉर्म भरें, उसके बाद जरूरी हुआ तो मिलने भी बुला लूंगा। वैसे 99 फीसदी केसेज में, रोगी को व्यक्तिगत रूप से मिलने की जरूरत नहीं होती है। क्योंकि मैं केवल आॅन लाईन निदान करता हूं। अत: ऐसे केस ही लेता हूं, जिनमें व्यक्तिगत रूप से मिलने की जरूरत नहीं होती है।
रोगी: सर क्या मेरी बीमारियों का पक्का इलाज हो जायेगा?
स्वरस: बिना फॉर्म भरे और बिना डिटेल जाने कुछ नहीं कहा जा सकता! इसके अलावा आप यह भी जान लें कि हम किसी को ठीक करने की गारण्टी नहीं देते हैं।
रोगी: फिर मेरा इलाज कैसे होगा?
स्वरस: आप पहले फॉर्म तो भरें!
रोगी: बिना फॉर्म भरे...?
स्वरस: बिलकुल नहीं! क्योंकि जो व्यक्ति खुद अपनी मदद नहीं कर सकता! दुनियां में कोई उसकी मदद नहीं कर सकता! आप को बीमारी का निदान चाहिये तो फॉर्म भरना ही होगा।
रोगी: सर लेकिन सिरदर्द, पाइल्स और शीघ्रपतन के इलाज के लिये इतनी सारी जानकारी क्यों?
स्वरस: आप सवाल रिपीट कर रहे हो। इसका जवाब पहले दिया जा चुका है।
रोगी: सर...
स्वरस: प्लीज मेरा और अपना समय खराब नहीं करें। आगे से फॉर्म भरे बिना किसी प्रकार के संवाद की उम्मीद नहीं करें। अन्यथा आपका नम्बर ब्लॉक कर दिया जायेगा।

डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' 
स्वास्थ्य रक्षक सखा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार
Online Dr. PL Meena: Health Care Friend and Marital Dispute Consultant, Health Advice WhatsApp No.: 85619-55619, Mobile No.: 9875066111 (10AM to 10 PM)

--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!

--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!
सभी के स्वस्थ एवं सुदीर्घ जीवन की कामना के साथ-मेरे प्यारे और दुलारे तीन बच्चों की ममतामयी अद्वितीय माँ (मम्मी) जो दुखियों, जरूतमंदों और मूक जानवरों तक पर निश्छल प्यार लुटाने वाली एवं अति सामान्य जीवन जीने की आदी महिला थी! वह पाक कला में निपुण, उदार हृदया मितव्ययी गृहणी थी! मेरी ऐसी स्वर्गीय पत्नी "जानकी मीणा" की कभी न भुलाई जा सकने वाली असंख्य हृदयस्पर्शी यादों को चिरस्थायी बनाये रखते हुए इस ब्लॉग को आज दि. 08.08.12 को फिर से पाठकों के समक्ष समर्पित कर रहा हूँ!-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'

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(Tribulus Terrestris) 14 फरवरी Abutilon Indicum Allergy Aloevera Juice Alum Aluminum Amaranthus spinosus Ammonium chloride Argemone Mexicana Ash-coloured Fleabane Bael Bauhinia purpurea Bernini’s Cinema Bitter Gourd Black night shade Blumea Lacera Bone Infection Borax Calories Calories Chart Cancer Care Carrots Castor beans Chanca Piedra Cheese Chenopodium Album Cholesterol Clerodendrum Phlomidis Colocynth Colpoptosis Constipation Convolvulus Pluricaulis Cumin Date Palm Dengue Diabetes digestion Disorders Divorce Dysentery Early Ejaculation Emblic Myrobalan Extramarital Relation Extremely Intolerance Fatty liver Femininity FENUGREEK Fenugreek Seeds Fissure Fistula Folic Acid Gallbladder Gardenia Gummifera Garlic Ginger Gooseberry Gourd Groundnut-peanut Guava Hair Falling Health Health Care Friend Health Consultation Health Links Health Tips Hepatitis Hibiscus Homeopathic Homeopathy Homoeopath Honey How to get pregnant? Immunity IMPOTENCY Incurable indigestion Jaundice Juice Juice of Berries LAND CALTROPS Lemon Leucas Aspera Leucorrhea Lever Liver Cirrhosis Liver fibrosis Low Blood Pressure Marital Dispute Consultant Masturbation Mexican Daisy Mexican Poppy Migraine Myopia Night Jasmine Nutgrass Nutmeg Nutsedge Obesity Omega 3 Oroxylum indicum Piles Portulaca Oleracea Pregnancy Safeguard Premature Ejaculation Prostate Gland Protein Purple Nutsedge Radish Rectal Collapse rectum collapse Saffron Senna occidentalis Sex Sexual Power Sickness side effects less Side-Effects Sperms Spiny Amaranth Stone Breaker Sword fruit tree Tips Treatment of Incurable Tribulus Terrestris Tridax Procumbens Umbrella Sedge Unquenchable Conjugal Uterine Prolapse Vaginal Prolapse Vitamins White Discharge अंकुरित अनाज अंकुरित गेहूं-Wheat germ अंकुरित भोजन-Sprouts अखरोट अंगूर-Grapes अचूक चमत्कारिक चूर्ण अजवाइन अजवायन अजीर्ण-Indigestion अंडकोष अडूसा (वासा)-Adhatoda Vasika-Malabar nut अण्डी अतिबला अतिसार अतिसार-Diarrhea अतृप्त अतृप्त दाम्पत्य अत्यंत असहिष्णुता अदरक अदरख अध्ययन अनिद्रा अपच अपराधबोध अफरा अफीम अमरूद अमृता अम्लपित्त-Pyrosis अरंडी अरणी अरण्ड अरण्डी अरलू अरुचि अरुचि-Anorexia-Distaste अर्जुन अर्थराइटिस अर्द्धसिरशूल अर्श अर्श रोग-बवासीर-Hemorrhoids-Piles अलसी अल्सर अल्सर-Ulcers अवसाद अवसाद-Depression अश्वगंधा अश्वगंधा-Winter Cherry असंतुष्ट असफल असर नहीं असली अस्थमा अस्थमा-दमा-Asthma आइरन आक आकड़ा आघात आत्महत्या आंत्र कृमि आंत्रकृमि-Helminth आंत्रिक ज्वर-टायफाइड-Typhoid fever आधाशीशी आधासीसी आंधीझाड़ा-ओंगा-अपामार्ग-Prickly Chalf flower आमला आमवात आमाशय आयुर्वेद आयुर्वेदिक आयुर्वेदिक उपचार आयुर्वेदिक औषधियां आयुर्वेदिक सीरप-Ayurvedic Syrup आयुर्वेदिक-Ayurvedic आरोग्य आँव आंव आंवला आंवला जूस आंवला रस आशावादी-Optimistic आसन आसान प्रसव-Easy Delivery आहार चार्ट आहार-Food आॅपरेशन आॅर्गेनिक इच्छा-शक्ति इन्द्रायण इन्फ्लुएंजा इमर्जेंसी में होम्योपैथी इमली-Tamarind Tree इम्युनिटी इलाज इलाज का कुल कितना खर्चा इलायची उच्च रक्तचाप उच्च रक्तचाप-High Blood Pressure-Hypertension उत्तेजक उत्तेजना उदर शूल-Abdominal Haul उदासी उन्माद-Mania उपवास उम्र उल्टी ऊर्जा एक्जिमा एक्यूप्रेशर एग्जिमा एजिंग-Aging एंटी ऑक्सीडेंट्स एंटी-ओक्सिडेंट एंटीऑक्सीडेंट एण्टी-आॅक्सीडेंट एनजाइना एमिनो एसिड एरंड एलर्जी एलर्जी-Allergy एलोवेरा एलोवेरा जूस एल्यूमीनियम ऐंठन ऐलोपैथ ऐसीडिटी ऑर्गेनिक ओमेगा 3 के स्रोत ओमेगा-3 ओर्गेनिक औषध-Drug औषधि सूची-Drug List औषधियों के नुकसान-Loss of drugs कचनार कचनार-Bauhinia Purpurea कटुपर्णी कड़वाहट कंडोम कद्दू कनेर कपास-COTTON कपिकच्छू कफ कब्ज कब्ज़ कब्ज-कोष्ठबद्धता-Constipation कब्ज. 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नागबला नागरमोथा नाडी हिंगु नाड़ी हिंगु (डिकामाली) नामर्दी नारकीय पीड़ा नारियल नाश्ता निमोनिया निम्न रक्तचाप निम्बू नियासिन निराश निरोगधाम निर्गुण्डी निष्कपट स्नेह निष्ठा निसोरा नींद नींबू नींबू-Lemon नीम-azadirachta indica नुस्खे नुस्खे-Tips नेगड़ नेगड़-निर्गुन्डी-Vitex negundo नेत्र रोग नेुचरल नैतिक नोनिया नौसादर न्युमोनिया-Pneumonia पक्षघात पंचकर्म पढ़ने में मन लगेगा पंतजलि पत्तागोभी-CABBAGE पत्थर फोड़ी पत्थरचट्टा पत्नी पथरी पदार्थ पनीर पपीता पपीता-CARICA PAPPYA पमाड परदेशी लांगड़ी परम्परागत चिकित्सा परहेज पराठा परामर्श परिस्थिति पवाड़ पवाँर पाइल्स पाक-कला पाचक पाचन पाचनतंत्र पाठक संख्या 16 लाख पार पाठक संख्या पंद्रह लाख पायरिया पारदर्शिता पारिजात पालक पालक-Spinach पित्त पित्ताशय पित्ती पिंपल-मुंहासे-Pimples-Acne पिरामिड पीलिया पीलिया-Jaundice पीलिया-कामला-Jaundice पुआड़ पुदीना पुनर्नवा-साटी-सौंटी-Punarnava पुरुष पुंसत्व पेचिश पेट के कीड़े पेट दर्द पेट में गैस पेट रोग पेड़ पेद दर्द पेशाब पेशाब में रुकावट पेंसिल थेरेपी-Pencil Therapy पौधे पौरुष पौष्टिक रागी रोटी प्याज-Onion प्यास प्रजनन प्रतिरक्षा प्रतिरक्षा प्रणाली प्रतिरोधक प्रतिरोधक-Resistance प्रदर प्रमेह प्रवाहिका (पेचिश)-Dysentery प्रसव प्रसव सुरक्षा चक्र प्रसव-पीड़ा प्रसूति प्राणायाम प्रेग्नेंसी-Pregnancy प्रेमरस प्रेमिका प्रेमी प्रोटीन प्रोटीन का कार्य प्रोटीन के स्रोत प्रोस्टेट प्रोस्टेट ग्रन्थि प्लीहा प्लूरिसी-Pleurisy प्लेटलेट्स फफूंद-Fungi फरास फल फल-Fruit फाइबर फिटकरी फुंसी-Pimples फूलगोभी-CAULIFLOWER फेंफड़े फैट फैटी लीवर फोटोफोबिया फोड़ा फोड़े-Boils फोरप्ले फोलिक एसिड फ्लू फ्लू-Flu फ्लेक्स सीड्स बकायन बकुल बड़ी हरड़ बथुआ बथुआ पाउडर बथुआ-White Goose Foot बदबू बबूल-ACACIA बरसाती बीमारियाँ बरसाती बीमारियां बलगम बलवृद्धि बला बलात्कार बवासीर बहरापन बहुनिया बहुमूत्रता- बांझपन बादाम-Almonds बादाम. बाल बाल झड़ना बाल झडऩा-Hair Falling बिना सिजेरियन मां बनें बिवाई बीजबंद बीड़ी बीमारियों के अनुसार औषधियां बीमारी बुखार बूंद-बूंद पेशाब बेल बेली बैक्टीरिया ब्र​ह्मदण्डी ब्रेस्ट ग्रोथ ब्लड प्रेशर ब्लैक मेलिंग ब्लॉकेज भगंदर भगंदर-Fistula-in-ano भगनासा भगन्दर भगोष्ठ भड़भांड़ भय भविष्य भस्मक रोग भावनात्मक भुई आंवला-Phyllanthus Niruri भूई आमला भूई आंवला भूख भूख बढ़ाने भूमि भूमि आंवला भोजनलीवर मकोय मकोय-Soleanum nigrum मंजीठ मटर-PEA मंद दृष्टि मंदाग्नि मदार मधुमेह मधुमेह-Diabetes मन्दाग्नि-Dyspepsia मरुआ मरोड़ मर्द मर्दाना मलाशय मलेरिया मलेरिया (Malaria) मवाद मसाले मस्तिष्क मस्से मस्से-WARTS महत्वपूर्ण लेख महाबला माइग्रेन माईग्रेन माईंड सैट माजूफल मानसिक मानसिक लक्षण मानसिक-Mental मानिसक तनाव-Mental Stress मायोपिया मासिक मासिक-धर्म मासिकधर्म मासिकस्राव माहवारी मिनरल मिर्गी मिर्च-Chili मीठा खाने की आदत मुख मैथुन-ओरल सेक्स-Oral Sex मुख्य लक्षण मुधमेह मुलहठी मुलेठी मुहाँसे मूँगफली मूड डिस्ऑर्डर-Mood Disorders मूत्र मूत्र असंयमितता मूत्र में जलन-Burning in Urine मूत्राशय मूत्रेन्द्रिय मूर्च्छा (Unconsciousness) मूली मूली कर रस मृत्यु मृत्युदण्ड मेथी मेथी दाना मेंहदी मैथुन मोगरा (Mogra) मोटापा मोटापा-Obesity मोतियाबिंद मौत मौलसिरी मौसमी बीमारियां यकृत यकृत प्लीहा यकृत वृद्धि-Liver Growth यकृत-लीवर-जिगर-Lever यूपेटोरियम परफोलियेटम यूरिक एसिड लेबल योग विज्ञापन योन योन संतुष्टि योनि योनि ढीली योनि 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