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*फैटी लीवर/Fatty Liver कारण एवं निवारण*
छाती के दाँये ओर की पसलियों के नीचे की हड्डी के नीचे और पेट के ऊपरी भाग में लीवर/यकृत नामक अंग होता है। इसी को अंग्रेजी में लीवर कहा जाता है। फैटी लीवर/Fatty Liver से आशय लीवर में चर्बी जमा होने से है। यह समझने वाली बात है कि शरीर में लीवर एक महत्वपूर्ण अंग होता है। यह स्वस्थ अवस्था में हमारे शरीर में तकरीबन ढाई सौ से अधिक प्रकार से फंक्शन करता रहता है। लीवर का आकार बढ जाने अर्थात फैटी लीवर हो जाने से लीवर की कार्यकुशलता अर्थात कार्य/फंक्शन करने की गति कम हो जाती है। परिणामस्वरूप फैटी लीवर/Fatty Liver से अनेक प्रकार की परेशानियां उत्पन्न हो जाती हैं।











*फैटी लीवर/Fatty Liver के लक्षण:*
सबसे दु:खदायी स्थिति यह होती है कि सामान्यत: शुरूआत में फैटी लीवर का पता नहीं चल पाता है। इस कारण रोगी की स्थिति अधिक बिगड़ सकती है। यद्यपि जैसे-जैसे लीवर बढना शुरू होता है, वैसे-वैसे इसके लक्षण प्रकट होने लगते हैं। जिन लोगों का फैटी लीवर/Fatty Liver होता है, उनमें आमतौर पर निम्न लक्षण प्रकट होते देखे जा सकते हैं:-
1. भूख की कमी।
2. पेट दर्द और उबकायी।
3. थकान एवं वजन में कमी।
4. भ्रमावस्था/कंन्फ्यूजन।
5. अन्य अनेक कारण।

*फैटी लीवर/Fatty Liver का पता कब चलता है?*
आमतौर पर स्वास्थ्य के प्रति जागरूक नहीं रहने वाले लोगों को 40 की आयु पार करने पर फैटी लीवर का पता चलता है। लेकिन तब तक स्थिति नियंत्रण से बाहर जा चुकी होती है या स्थिति अधिक पीड़ादायक हो चुकी होती है। लीवर को अधिक क्षति हो चुकी होती है। अनेक लोगों को लीवर सिरोसिस/Cirrhosis, पीलिया/Jaundice, हेपैइाईटिस/Hepatitis आदि से पीड़ित होते देखा जा सकता है।

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*फैटी लीवर/Fatty Liver के मुख्य कारण:*
1. शराब का अधिक सेवन करना।
2. लम्बे समय तक अपच और कब्ज।
3. आधुनिक दवाईयों के सेवन का दुष्प्रभाव।
4. रोड-छाप बाजारू तला-भुना-गरिष्ठ भोजन।
5. जंक फूड और डिब्बाबंद भोजन का सेवन।
6. आठ घंटे से अधिक सोने की आदत।
7. अधिक मात्रा में आईरन का सेवन।
8. उच्च कोलेस्ट्रोल तथा डायबिटीज से पीड़ित लोगों को फैटी लीवर का खतरा बढ जाता है।
9. मोटापा: मोटापे के कारण लीवर के फैटी होने का खतरा बढ जाता है।
10. फैट प्रोटीन का उच्च स्तर: शरीर में फैट प्रोटीन का उच्च स्तर भी फैटी लीवर का जनक हो सकता है।
11. अनुवांशिक कारण: जिनके माता-पिता में से किसी एक या दोनों का फैटी लीवर होता है, उनको फैटी लीवर होने का खतरा बढ जाता है। स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोग विवाह करते समय इस बात का ध्यान रखते हैं।
12. रोटी, आलू और कार्बोहाईड्रेट्स की उच्च मात्रा से युक्त भोजन की आदत।
13. लीवर में रक्त की मात्रा अधिक हो जाना।
14. हृदय या फेफड़ों के रोगों से ग्रस्त होना।
15. अन्य विविध कारणों से भी यकृत/लीवर बढ़ जाता है।

*फैटी लीवर/Fatty Liver से बचाव के उपाय:*

1. स्वस्थ, सुपाच्य और ताजा भोजन का सेवन करें।
2. अधिक समय तक भूखे नहीं रहें।
3. संतुलित भोजन करें।
4. भोजन में विटामिन-डी एवं ई तथा ओमेगा 3 फैडी एसिड जैसे पोषक तत्वों को शामिल करें।
5. चीनी का सेवन बहुत जरूरी होने पर ही करें।

*फैटी लीवर/Fatty Liver का आयुर्वेदिक उपचार:*

1. भूई आंवला।
2. मकोय।
3. शरपुंखा।
4. पुनर्नवा।
5. हरसिंगार।
6. गिलोय।
7. अपामार्ग।
8. श्योनाक।
9. बथुआ।
10. कालमेघ।
11. द्रोणपुष्पी।
इत्यादि।

फैटी लीवर/Fatty Liver के उपचार के लिये उक्त दवाईयों में से एक या एकाधिक की मात्रा और खुराक का निर्धारण रोग तथा रोगी की स्थिति के अनुसार योग्य डॉक्टर द्वारा ही किया जा सकता है।
-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा, आॅल लाईन स्वास्थ्य रक्षक सखा। परामर्श समय: सुबह 10 से सायं 10 बजे के बीच। वाट्सएप नम्बर: 8-5619-5-5619, 20.10.2017

NOTE: यहां पर सभी लेखों में लिखी गयी दवाईयों का विवरण जनहित में स्वास्थ्य और बीमारियों के बारे में जागरूकता के लिए लिखा गया है। पाठक कृपया स्वयं अपना इलाज करने का खतरा मोल नहीं लें। कृपया अपने चिकित्सक के परामर्श के बिना, सुझाई गयी (किसी भी प्रकार की) दवा का सेवन नहीं करें। [Please Do not take any (kind of) suggested medicine, without consulting your Doctor.] हमारे 95 फीसदी रोगियों को व्यक्तिगत रूप से हम से आकर मिलने की जरूरत नहीं पड़ती। यद्यपि रोगियों की संख्या अधिक होने के कारण, आपको इन्तजार करना पड़ सकता है। कृपया धैर्यपूर्वक सहयोग करें।
डॉ. पुरुषोत्तम मीणा
आॅन लाईन स्वास्थ्य रक्षक सखा
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विरह वेदना का उपचार करवाने में संकोच क्यों?

''यदि हम उदर वेदना, सिरो वेदना, दंत वेदना, कर्ण वेदना आदि का उपचार करवाने में संकोच नहीं करते तो फिर विरह वेदना का उपचार करवाने में ही संकोच क्यों?'' डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' जी के उक्त शब्दों ने मुझे अन्दर तक झकझोर दिया।

मेरी बहिन को उसके पति के सहकर्मी से प्यार हो गया था। इतना प्यार कि वह उस प्रेमी के बिना जीने की कल्पना ही नहीं करना चाहती थी। पता चलने पर उसके पति ने उसकी खूब मारपीट की, भलाबुरा कहा। हम सभी भाईयों ने और हमारे माता-पिताजी ने भी उसे खूब भला-बुरा कहा और तरह-तरह से समझाया भी, लेकिन उस पर इसका कोई असर नहीं हुआ।

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हमारे जीजाजी बहुत सज्जन इंसान होने के कारण, हमारी बहिन को माफ करने को सहमत हो गये। लेकिन वह अपने प्रेमी को भूलने और छोड़ने को तैयार ही नहीं हो रही थी। एक 2 साल का बेटा होने और जगहंसाई के डर से हम सभी अन्दर ही अन्दर घुट रहे थे। मगर हमारी बहिन किसी न किसी तरह से मौका निकालकर अपने प्रेमी से मिलने का अवसर निकाल ही लेती थी। जिसके कारण हमारे जीजाजी और बहिन में आये दिन घृहक्लेश रहने लगा। कुछ लोगों ने जादू-टोने, तंत्र-मंत्र आदि की सलाह दी। हमने सब-कुछ करवाकर देख लिया, लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ। 

थक-हारकर इंटरनेट पर इसका कोई समाधान तलाशना शुरू किया। तो डॉ. निरंकुश जी की निम्न पंक्ति पढने को मिली:-

''*विरह वेदना/प्रेम विछोह अर्थात् जुदाई और वियोग में रोते/तड़फते रहने वाले प्रेमियों की मनोदशा का उपचार किया जाता है।*''

मैंने तुरंत डॉ. साहब को काल किया और सारी बात बतायी और पूछा कि क्या मेरी बहिन का कोई इलाज सम्भव है? इस पर डॉ. साहब ने कहा कि-

''यदि हम उदर वेदना, सिर वेदना, दंत वेदना, कर्ण वेदना आदि का उपचार करवाने में संकोच नहीं करते तो फिर विरह वेदना का उपचार करवाने में ही संकोच क्यों?'' डॉ. साहब ने कहा कि विरह वेदना का होम्योपैथी में सफलतापूर्वक उपचार सम्भव है!

इसके बाद मैंने अपनी बहिन की डॉ. साहब से मोबाईल पर बात करवाई। एक महिने के उपचार के बाद मेरी बहिन की स्थिति बदलने लग गयी। तीन महिने में वह अपने प्रेमी के वियोग से मुक्त हो चुकी है और अब वह अपने पति के साथ पूरी तरह से खुश है। इसके लिये मैं और हमारे सभी परिवारजन डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' जी के दिल से अहसानमंद और ऋिणी हैं।-विनोद कुमार बदला हुआ नाम, इन्दौर, मध्य प्रदेश।

डॉक्टर टिप्पणी: 'विरह वेदना का उपचार सम्भव है।' यह बात बहुत से लोगों को अटपटी सी सग सकती है, लेकिन सच में विरह वेदना उपचार योग्य है। समस्या यह है कि हम में अधिकांश परम्परागत ज्ञान और सोच से हटकर सोचने के लिये सहमत ही नहीं होते हैं। होम्योपैथी में इस प्रकार के चमत्कारिक परिणाम सामने आने पर लोगों का आश्चर्य होता है।*-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा, आॅल लाईन स्वास्थ्य रक्षक सखा। परामर्श समय: सुबह 10 से सायं 10 बजे के बीच। वाट्सएप नम्बर: 85-619-55-619, 19.10.2017*

NOTE: यहां पर सभी लेखों में लिखी गयी दवाईयों का विवरण जनहित में स्वास्थ्य और बीमारियों के बारे में जागरूकता के लिए लिखा गया है। पाठक कृपया स्वयं अपना इलाज करने का खतरा मोल नहीं लें। कृपया अपने चिकित्सक के परामर्श के बिना, सुझाई गयी (किसी भी प्रकार की) दवा का सेवन नहीं करें। [Please Do not take any (kind of) suggested medicine, without consulting your Doctor.] हमारे 95 फीसदी रोगियों को व्यक्तिगत रूप से हम से आकर मिलने की जरूरत नहीं पड़ती। यद्यपि रोगियों की संख्या अधिक होने के कारण, आपको इन्तजार करना पड़ सकता है। कृपया धैर्यपूर्वक सहयोग करें।
डॉ. पुरुषोत्तम मीणा
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*जोड़ों के दर्द और गठिया का दुश्मन यूरिक एसिड लेबल कैसे कम करें?*
*लेखक: डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'*

यदि अपने आसपास नजर डालते हैं तो हमें पता चलता है कि उम्र बढने के साथ-साथ अनेक लोगों के जोड़ों में दर्द होना शुरू हो जाता है। जबकि कुछ को तो युवावस्था में ही स्थानीय कारणों जैसे जलवायु, खानपान की आदतों और व्यक्तिगत परिस्थितियों के कारण जोड़ों में दर्द होना शुरू हो जाता है। सामान्यत: रक्त में यूरिक एसिड लेबल (Uric Acid Label) बढने पर, जोड़ों पर/में यूरिक एसिड जमा/एकत्रित होने लगता है। शरीर में प्यूरिन (Purine) नामक रासायनिक यौगिक के टूटने के कारण यूरिक एसिड बनता रहता है। प्यूरिन खाने-पीने की चीजों में पाया जाता है। विशेष रूप से जब मनुष्य प्यूरिन युक्त पदार्थों को खाता है तो लीवर (Liver) खाये हुए पदार्थों को पचाने के लिए प्यूरिन को तोड़ने लगता है और उसमें से कचरा अर्थात निरर्थक पदार्थ (Waste Product-अपशिष्ट पदार्थ) को मूत्र के जरिये यूरिक एसिड के रूप में किडनी के द्वारा शरीर से बाहर निकाल देता है। किसी कारण से जब यही निरर्थक पदार्थ या अपशिष्ट पदार्थ यूरिक एसिड साथ शरीर से पूरी तरह बाहर ना निकलकर, शरीर के अंदर ही एकत्रित/जमा होने लगता है और एक क्रिस्टल (Crystal) की तरह बन/जम जाता है। ऐसी स्थिति में शरीर में यूरिक एसिड का स्तर बढ जाता है। इसी यूरिक एसिड के जमा होने के कारण ही अनेक लोगों को किडनी स्टोन भी बनने लगता है। इस समस्या से ग्रस्त अधिकतर लोगों को हाथ-पैरों की उंगलियों, हथेलियों, कोहनी, कंधा, घुटने आदि छोटे-बड़े जोड़ों में दर्द होता देखा जा सकता है।


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यदि शुरूआत में ही इसका सही से इलाज नहीं किया जाये तो पीड़ित व्यक्ति के लिये चलना-फिरना, उठना-बैठना और नैतिक कार्य करना/निपटाना तक मुश्किल हो जाता है। रक्त में यूरिक एसिड का स्तर बढते जाने पर पीड़ित व्यक्ति को गठिया (Gout/Arthritis) होने का खतरा बढ जाता है। जिससे पीड़ित व्यक्ति अकसर मजबूर होकर दर्द-निवारक दवाईयों के सहारे जीवित रहते हैं। जबकि इस तकलीफ को कैमीकलयुक्त दर्द निवार​क दवाओं के जरिये ठीक नहीं किया जा सकता। दर्द निवारक दवाओं के अधिक सेवन के कारण पीड़ित व्यक्ति के गुर्दे खराब होने का खतरा भी उत्पन्न हो जाता है।

अत: बढते यूरिक एसिड को शुरूआती अवस्था में ही नियंत्रित करना बहुत जरूरी होता है। जिसके लिए समय-समय पर रक्त में यूरिक एसिड लेबल (Uric Acid Label) जांच करवाते रहना चाहिए। यूरिक ऐसिड बढने के कारण होने वाले जोड़ों के दर्द से मुक्ति के लिये कुछ आसान से घरेलु उपाय बताये जा रहे हैं:-

*नोट: इन उपायों में से किसी को भी आजमाने से पहले डॉक्टर से परामर्श अवश्य किया जाना चाहिये।*

*1. गुनगुना पानी:* रोगी को रोजाना दिनभर में 3 से 4 लीटर गुनगुना पानी थोड़ा-थोड़ा करके पीना चाहिए। ऐसा करने से यूरिक एसिड सहित, शरीर में जमा/पड़े हुए सभी दूषित पदार्थ आसानी से बाहर निकलने लगते हैं।
*2. आॅर्गेनिक ब​थुआ के पत्तों का रस:* सुबह खाली पेट शुद्ध आॅर्गेनिक बथुआ के पत्तों का रस या शुद्ध आॅर्गेनिक बथुआ पाउडर (रोगी तथा रोग की स्थिति के अनुसार मात्रा) रोगी को पिलायें। इसके दो घंटे बाद तक न कुछ खायें और न हीं कुछ पियें। बथुए की सब्जी भी लाभकारी है।
*3. अख़रोट+एलोवेरा/घृतकुमारी+आंवला:* यूरिक एसिड को कंट्रोल करने के लिए रोजाना खाली पेट अख़रोट खाना चाहिये और एलोवेरा/घृतकुमारी रस में आंवले का रस मिलाकर पीना लाभकारी है।
*4. अलसी+अजवाइन:* भोजन के बाद एक चम्मच भुने हुए शुद्ध आॅर्गेनिक अलसी के बीज और, या शुद्ध आॅर्गेनिक अजवायन भोजन के बाद खाने से यूरिक एसिड लेबल कम होता है।
*5. अश्वगंधा+शहद:* एक चम्मच शुद्ध आॅर्गेनिक अश्वगंधा+एक चम्मच शुद्ध आॅर्गेनिक शहद+एक गिलास गुनगुना दूध रोगी को पिलायें। *लेकिन गर्मियों में अश्वगंधा की मात्रा कम प्रयोग करें।* या रात को सोने से पहले अश्वगंधा चूर्ण को शहद के साथ खिलाकर हल्का गर्म दूध रोगी को पीना चाहिये।
*6. एलोवेरा ज्यूस+आंवले का रस:* शुद्ध आॅर्गेनिक एलोवेरा ज्यूस और शुद्ध आॅर्गेनिक आंवले का रस मिलाकर पीने से भी आराम मिलता है।
*7. नारियल पानी:* नारियल का पानी पीने से और, या नींबू का रस गर्म पानी में डालकर पीने से मूत्र के जरिये यूरिक एसिड बाहर निकल जाता है।
*8. सेब का सिरका:* एक गिलास गुनगुने पानी में 2-3 चम्मच सेब का सिरका मिलाकर पीने से भी आराम मिलता है और यूरिक एसिड का दर्द कम होता है।
*9. बेकिंग सोडा:* एक गिलास पानी में एक चम्मच बेकिंग सोडा मिलाकर पीने से भी क्रिस्टल टूट कर घुल जाते हैं और पेशाब के जरिये निकल जाते हैं।
10. नींबू+शहद की चाय का सेवन भी उपयोगी और लाभ दायक है।

*-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा, आॅल लाईन स्वास्थ्य रक्षक सखा। परामर्श समय: सुबह 10 से सायं 10 बजे के बीच। वाट्सएप नम्बर: 85-619-55-619, 14.10.2017*

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*शरीर को डिटॉक्सीफाई (जहरीले तत्वों से मुक्त) करें!*

*लेखक: डॉ. पुरुषोत्तम मीणा*
यदि आपको हमेशा थकावट और कमजोरी महसूस होती है। चक्कर आते हैं। सिर दर्द रहता है। भूख नहीं लगती। गैस बनती है। गले में जलन होती है। खट्टी डाकरें आती हैं। मलत्याग सही से नहीं होता। मलत्याग के समय मरोड़/दर्द होता है। मलत्याग के समय आंव, खून या आंव/खून मिश्रिम मल आता है। मलत्याग में 3 मिनट से अधिक समय लगता है। मलत्याग से सन्तुष्टि नहीं मिलती या मलत्याग के लिये एकाधिक बार जाना पड़ता है। चेहरे पर फुंसियां और शरीर में खाज-खुजली तथा एलर्जी होती रहती है। खूनी या बादी बवासीर/पाइल्स की शिकायत है। बालों में डण्डरफ/फ्यास रहता है। *इसका स्पष्ट मतलब-आपका पेट खराब है और आपका पाचनतंत्र खराब है। लीवर सही से काम नहीं कर रहा। इससे निजात पाने के लिये आपको अपने शरीर को तुरंत डिटॉक्सीफाई करना बहुत जरूरी है। डिटॉक्सीफाई का मतलब है, शरीर में संग्रहित/जमा विषैले तत्वों का निष्कासन। क्योंकि विषैले तत्वों का शरीर में रहने देने का तात्पर्य है, खुद ही बीमारी पैदा करने वाले तत्वों से दोस्ती करना। इन्हें बाहर निकालने की प्रक्रिया को ही शरीर को डिटॉक्सीफाई करना कहते हैं।* यदि विषैले तत्व शरीर में वर्षों से जमा हैं और बीमारियों के रूप में अपना असर दिखाने लग गये हैं तो उनका प्रोपर/सही से उपचार करवाना जरूरी है। जिनके शरीर में किसी प्रकार की तकलीफ नहीं है और जो चाहते हैं कि उनके शरीर में विषैले तत्व पैदा/जमा ही नहीं हो, इसके लिये कुछ सरल सुझाव प्रस्तुत हैं:-


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*01. आॅर्गेनिक फल और सब्जियों का सेवन करें:* बेशक आॅर्गेनिक फल और सब्जियों का मिलना बहुत मुश्किल है, लेकिन इनका सेवन बहुत जरूरी है। 
*02. बेकरी प्रोडक्ट्स को नहीं कहें:* शरीर और नर्वस सिस्टम को नुकसान पहुंचाने वाले बेकरी प्रोडक्ट्स को तुरंत नहीं कहें। 
*03. गहरी और लम्बी सांस की आदत डालें:* गहरी और लम्बी सांस लेने की आदत डालें, जिससे शरीर के सभी अंगों तक आॅक्सीजन पहुंच सके। 
*04. ताजा नींबू पानी:* नियमित ताजा नींबू पानी पीने की आदत डालकर शरीर की गंदगी को आसानी से साफ किया जा सकता है। 
*05. ताजा और आॅर्गेनिक फलों का ज्यूस पियें:* पैक्ड ज्यूस नुकसान दायक होते हैं। अत: शरीर को विषैले तत्वों से मुक्त करने के ​लिये ताजा और आॅर्गेनिक फलों का ज्यूस पियें। 
*06. भोजन में एण्टी-आॅक्सीडेंट की मात्रा बढायें:* एण्टी-आॅक्सीडेंट से लीवर एंजाइम एक्टिव होते हैं। अत: अपने भोजन में एण्टी-आॅक्सीडेंट्स की मात्रा बढायें। 
*07. रोजाना ढाई लीटर पानी पियें:* पेशाब के जरिये विषैले तत्वों के निष्कासन के लिये हर दिन कम से कम ढाई लीटर पानी पीने की आदत डालें। 
*08. हल्का भोजन:* पचने में आसान और अपने शरीर के मिजाज के अनुसार हल्के भोजन का सेवन करें। 
*09. ग्रीन-टी पियें:* शरीर से विषैले तत्वों के निष्कासन और पाचनतंत्र को ठीक करने के लिये, ब्लैक-टी को त्यागें और ग्रीन-टी का सेवन करें। 
*10. पर्याप्त नींद:* गहरी नींद से शरीर रिचार्ज होता है। अत: रोजाना न्यूनतम 6 से 8 घंटे की गहरी नींद सोना भी अनिवार्य है। 
*11. लहसुन का सेवन करें:* अपने भोजन में नियमित रूप से पर्याप्त लहसुन का सेवन करें। लहसुन में सलफ्यूरिक तत्व पाये जाते हैं, जो शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने वाले ग्लुथाथिओन नामक एण्टी आॅक्सीडेण्ट का निर्माण करते हैं। 
*12. भोजन चबा-चबा कर खायें:* बेशक आपको कितनी भी जल्दी क्यों न हो रही हो, लेकिन भोजन को हमेशा चबा-चबा कर खाने की आत डालें। इससे भोजन में अधिक आनंद आयेगा और पचानतंत्र भी दुरुस्त रहेगा। 
*13. शराब, धूम्रपान और मांसाहार को त्यागें:* यदि शरीर से विषैले तत्वों का निष्कासन करना है तो शराब, धूम्रपान और मांसाहार को हमेशा को त्यागना होगा। 
*14. नियमित रूप से टहलें तथा व्यायाम और योग करें:* जैसे रोजाना स्नान करते हैं। ब्रुश करते हैं और दूसरे काम करते हैं। ऐसे ही नियमित रूप से *एक हजार से दस हजार कदम पैदल चलने/टहलने की आदत डालें।* इसके साथ-साथ किसी जानकार व्यक्ति के परामर्श से व्यायाम और योग भी करें। 
*15. सुबह खाली पेट चाय और दूध नहीं:* सुबह खली पेट चाय और, या दूध का सेवन शरीर में जहरीले तत्वों का निर्माण करता है। अत: इनको आज ही ना कहें।
*-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा, आॅल लाईन स्वास्थ्य रक्षक सखा। परामर्श समय: सुबह 10 से सायं 10 बजे के बीच। वाट्सएप नम्बर: 85-619-55-619, 09.10.2017*


हस्तमैथुन की लत (Masturbation Addiction) छुड़ाने का 100% उपचार

समस्या: सर मुझे हस्तमैथुन करने की ऐसी लत लग चुकी है कि मैं लागातार प्रयास के बाद भी इसे छोड़ नहीं पा रहा हूं। अनेक ऐलोपैथ डॉक्टर कहते हैं कि हस्तमैथुन करने से कोई नुकसान नहीं होता है। इसका कोई इलाज नहीं है और विवाह ही इसका समाधान है। जबकि सर हस्तमैथुन की लत के कारण मैं मानसिक और शारीरिक रूप से कमजोर होता जा रहा हूं। इस कारण अपराधबोध का शिकार भी हो चुका हूं? सर मुझे उचित परामर्श एवं समाधान बताने का कष्ट करें।-मनीष (बदला हुआ नाम), रायपुर, छत्तीसगढ।

समाधान: मनीष जी, आपकी बात सही है। हस्तमैथुन की लत के आदी हजारों युवक-युवतियां आप ही की जैसी स्थिति में जी रहे हैं। यदि आप किसी ऐलोपैथ डॉक्टर से सम्पर्क करेंगे तो निश्चय ही उनकी ओर से हस्तमैथुन का कोई उपचार या समाधान बताने के बजाय, आपको निम्न सला​ह दी जायेंगी:-

(1)—हस्तमैथुन करना कोई बीमारी नहीं है।
(2)—हस्तमैथुन करने से कोई नुकसान नहीं होता है।
(3)—हस्तमैथुन की लत छोड़ने के लिये जल्दी शादी करें।

डॉक्टर्स की उक्त सलाह अपनी जगह पर हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि मुझ से सम्पर्क करने वाले हस्तमैथुन की लत के आदी युवक अपने आप को शारीरिक कमजोरी, यौन उत्तेजना में कमी, आत्मविश्वास में कमी, अनिद्रा, कमजोर पाचन क्रिया, भूख की कमी, लैंगिक शिथिलता, स्वत: वीर्यपात और शीघ्रपतन के शिकार बताते रहते हैं।

अनुभव यही बतलाता है कि हस्तमैथुन के साईड इफैक्ट भयावह हैं। जहां तक उचित परामर्श और उपचार का सवाल है तो:-

उचित परामर्थ: अपने विश्वसनीय डॉक्टर को बेहिचक अपनी सभी तकलीफों के बारे में विस्तार से सही, सत्य और पूर्ण जानकारी से अवगत करावें। जिससे आपका समुचित परामर्श दिया जा सके। 


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या स्वास्थ्य परामर्थ हेतु रिक्वेस्ट भेज सकते हैं।
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लेकिन याद रहे उक्त वाट्सएप पर अन्य कोई सामग्री नहीं भेजें।
अन्यथा आपके नम्बर को ब्लॉक कर दिया जायेगा।
डॉ. पुरुषोत्तम मीणा
आॅन लाईन स्वास्थ्य रक्षक सखा
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उपचार: होम्योपैथी और आयुर्वेदिक औषधियों से हस्तमैथुन की लत और हस्तमैथुन के सभी तरह के साईड इफैक्ट्स का उपचार सम्भव है। मैं बताना चाहूंगा कि इस बात में कोई दो राय नहीं है कि होम्योपैथी में हस्तमैथुन की लत का 100 फीसदी उपचार सम्भव है। लेकिन हस्तमैथुन के कारण जन्मी अन्य सभी परेशानियों का भी उपचार भी उतना ही जरूरी है, जितना कि हस्तमैथुन का जरूरी है। लेकिन जब तक रोगी का पाचनतंत्र, लीवर, तिल्ली, गुर्दा और मानसिक संतुलन सही से उपचार नहीं होगा, हस्तमैथुन का कोई भी इलाज सफल नहीं हो सकता।

*-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा, आॅल लाईन स्वास्थ्य रक्षक सखा। परामर्श समय: सुबह 10 से सायं 10 बजे के बीच। वाट्सएप नम्बर: 85-619-55-619, 01.10.2017*
पौष्टिक रागी रोटी

चावल और गेहूं के आटे से यह नाचनी रोटी और पौष्टिक बनती है। साथ ही इसका स्वाद बढ़ाने के लिए इसमें सब्जियां और जीरा, करीपत्ते डालकर इसे संपूर्ण पौष्टिक सुबह का नाश्ता बनाया जा सकता है। इस रागी रोटी को थोडा मोटा बेलकर इसे दाल और सब्जी के साथ परोसिए।

सामग्री

1-1/2 कप रागी का आटा (नाचनी का आटा)
2-2 टेबल-स्पून गेहूं का आटा
3-1/2 कप चावल का आटा
4-2 टेबल-स्पून बारीक कटा हुआ प्याज़
5-2 टेबल-स्पून कसा हुआ गाजर
6-1/4 टी-स्पून कसा हुआ अदरक
7-2 टेबल-स्पून बारीक कटा हुआ हरा धनिया
8-1 टी-स्पून बारीक कटी हुई हरी मिर्च
9-1 टी-स्पून भुना हुआ जीरा
10-4 करीपत्ते , कटे हुए
11-नमक , स्वाद अनुसार
12-तेल पकाने कि लिए
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बनाने की विधि:
1-सभी सामग्री को एक गहरे बर्तन में डालकर पर्याप्त पानी की मदद से नरम आटा गूँधिए।
2-आटे को 6 बराबर भागों में बाँटिए और एक भाग को 2 प्लास्टिक के बीच में रखकर 125 mm। (5") के व्यास की गोल रोटी बेलिए।
3-एक नॉन-स्टिक तवे को गरम करे और रोटी को, थोडे तेल की मदद से, दोनो तरफ से सुनहरा होने तक सेकिए।
4-बचे हुए आटे से 5 और रोटियाँ बनाइए।
5-तुरंत परोसिए।
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Nutrient Values Per ROTI

Energy 115 cal
Protein 2.1 g
Carbohydrates 20.5 g
Fiber 2.1 g
Fat 2.8 g
Cholesterol 0 mg
Vitamin A 166.9 mcg
Vitamin B1 0.1 mg
Vitamin B2 0 mg
Vitamin B3 0.5 mg
Vitamin C 1.9 mg
Folic Acid 5 mcg
Calcium 50.5 mg
Iron 0.8 mg
Magnesium 0 mg
Phosphorus 0 mg
Sodium 4 mg
Potassium 70 mg
Zinc 0.5 mg


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शीघ्रपतन के कारण मामला तलाक तक जा पहुंचा, लेकिन.....?

मेरा जन्म एक छोटे गांव के गरीब, परम्परावादी परिवार में हुआ। जैसे-तैसे पढाई पूर्ण करने के बाद मुझे बैंक में जॉब मिली। 23 वर्ष की आयु में विवाह होने तक नेचुरल इच्छा और भावनाओं को कुचलते हुए मैंने अपने कौमार्य को सुरक्षित रखा। मैं अपने होने बाले पति के प्रति वफादार रहने के लिये 100 परसेंट कमिटेड थी।

प्रथम श्रेणी सरकारी अफसर के साथ बड़ी धूमधाम से मेरी शादी हुई। सुहागरात को ही सारे अरमान चकनाचूर हो गये। मेरे पति कुछ नहीं कर सके। जैसे ही उन्होंने सेक्स शुरू किया, उनका वीर्य बाहर ही निकल गया। दूसरी बार कोशिश की (लेकिन मुझे बाद में बताया कि) उत्तेजित ही नहीं हो सके। मैंने धैर्य बनाये रखा। 5 दिन पति के साथ रही, लेकिन वे मेरी योनि में अपने लिंग को प्रवेश नहीं करा पाये। लौटने से पहले मुझ से उन्होंने माफी मांगी और रिक्वेस्ट की, कि कुछ टाईम दीजिये, इलाज करवा लूंगा। मैं सहमत हो गयी।

मैंने अपने पीहर में किसी को कुछ नहीं बताया। अलग-अलग जिलों में पोस्टिंग के कारण अगले 3 महिने तक हम मिल नहीं सके। इस बीच उन्होंने अपना इलाज करवाया था। 3 महिने बाद उन्होंने कोशिश की और लिंग प्रवेश करवा दिया, लेकिन कुछ ही क्षणों में डिस्चार्ज हो गये। यह सिलसिला महिनों चला। फिर ऐसी दवाई ली कि 20-30 मिनट में डिस्चार्ज होने लगे। जिससे मेरी योनि छिल जाती। भयंकर दर्द होता। मेरे लिये सेक्स एक दु:खद और पीड़ादायक अनुभव बन गया। भयंकर टेंशन रहने लगा। मुझे सेक्स से नफरत सी हो गयी। इधर उन्होंने शराब पीना शुरू कर दिया। टेंशन के चलते मुझे माईग्रेन हो गया। रोज पैन-किलर ब्रूफेन टेबलेट लेना शुरू कर दिया। अन्त में उन्होंने साफ कह दिया कि अब कुछ नहीं हो सकता, तुम चाहो तो तलाक लेकर दुबारा मैरिज कर सकती हो। मेरे लिये यह भयंकर अपमानकारी और घुटनभरी स्थिति बन गयी। रोती रहती। 1 साल बिलकुल अलग रहे। हालांकि मोबाईल पर बातचीत होती रहती।

जब इनकी शराब अधिक हो गयी तो मैंने 6 महिने की छुट्टी ली और अन्तिम प्रयास करने का तय किया। कुछ ही दिनों में शराब कंट्रोल हो गयी। हम डॉक्टर से मिले और सेक्सुअल प्रोब्लम बतायी। ऐलोपैथी, आयुर्वेद, होम्योपैथी, यूनानी, एक्यूपेशर सारी दवाईयां करवा ली, लेकिन इनकी शीघ्रपतन की समस्या का कोई समाधान नहीं हुआ। थक हारकर मैंने भी तलाक का मन बना लिया। 

इसी दौरान मेरी सहेली ने बताया कि उनके पति को शीघ्रपतन और कम उत्तेजना की दिक्कत थी तो डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' जी के आॅन लाईन ट्रीटमेंट से बिलकुल सही हो गये। मैंने खुद डॉ. 'निरंकुश' जी से बात की, उन्होंने कहा कि आपके पति से बात करने को कहो। ये इतने निराश हो गये कि बात ही नहीं करना चाहते थे। जैसे-तैसे तैयार हुए। सारी जानकारी डॉ. साहब को दी। इलाज शुरू हुआ। तीन महिने तक कोई फर्क नहीं पड़ा। 

एक दिन डॉ. सा​हब का काल आया और मुझ से पूछा, "आप यह बतायें कि आपके पति को सबसे अधिक क्या खाना पसंद है?" मैंने कहा "मिठाई! दिनभर मीठा खाते रहते हैं।" बस इतना कहते ही डॉ. साहब बोले "चिन्ता मत करो अब सब ठीक हो जायेगा।" चौथे महिने जो दवाई भेजी, तो चमत्कार हो गया। डॉ. 'निरंकुश' जी बोले "मैं शुरू से खानपान के बारे में पूछ रहा था, लेकिन कोई स्पष्ट जवाब ही नहीं मिल रहा था।" कुल 6 महिने दवाई लेने के बाद अब मेरे पति पूर्ण पुरुष हैं। हमारी जिन्दगी में बहार आ गयी। शीघ्रपतन के कारण मामला तलाक लेने तक जा पहुंचा, लेकिन डॉ. 'निरंकुश' जी ने बचा लिया।
लता शर्मा (बदला हुआ नाम) जोधपुर, राजस्थान।


डॉक्टर टिप्पणी: होम्योपैथी में लक्षणों के आधार पर इलाज होता है। इस बात को प्रमाणित करने वाला यह मजबूत केस है। लता के पति से मैंने अनेक बार पूछा कि उसे मीठे और नमकीन में अधिक क्या खाना पसंद है? उनका जवाब होता कुछ भी नहीं। जब लता ने उनकी अत्यधिक मीठा खाने की आदत बतायी तो श्रीमान जी ने सफाई दी कि उनको मीठा खाने की बच्चों जैसी आदत थी, जिसे बताने में ही शर्म आती थी। यदि लता ने मुझे मीठा खाने की आदत के बारे में नहीं बताया होता, तो शायद वह कभी भी स्वस्थ नहीं हो पाता। होम्योपैथी में खाने-पीने की आदत, मानसिक लक्षणों आदि का बहुत ज्यादा महत्व होता है। अत: डॉक्टर के पूछने पर सब कुछ बेहिचक सच-सच बताना चाहिये।

डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' आॅन लाईन स्वास्थ्य रक्षक सखा
M&WA No. 85-619-55-619 Site: www.healthcarefriend.in


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भूई आंवला, भूमि आंवला, भूई आमला, भूमि आमला की 100 फीसदी शुद्ध आॅर्गेनिक फसल (हेपेटाईटिस, लीवर सिरोसिस, किडनी संक्रमण, हाई बीपी, पथरी सहित अनेक रोगों की महौषधि)

लेखक: डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' महा औषधि


भूई आंवला एक अनेक रोग नाशक महा औषधि है। (Bhui Amla is a Multi-disease curable Great medicine) जिसका किसी योग्य डॉक्टर की देखरेख में, उचित मात्रा में निर्धारत समय तक सेवन करने पर बहुत सी लाइलाज/असाध्य (Incurable) समझी जाने वाली बीमारियों से मुक्ति पायी जा सकती है। लेकिन भूई आंवला ताजा, शुद्ध और 100 फीसदी आॅर्गेनिक होगा तो ही सही तथा वांछित परिणाम मिल पायेंगे। कीटनाशक तथा कैमीकलयुक्त खाद का उपयोग करने से इसके गुण कम या समाप्त हो सकते हैं। भूई आंवला की आॅर्गेनिक खेती करने पर तुलनात्मक रूप से किसान को बहुत कम उत्पादन मिलता है। यही मूल वजह है कि शुद्ध आॅर्गेनिक भूई आंवला की कीमत कई गुणी बढ जाती है, लेकिन आॅर्गेनिक खेती करने पर इसकी गुणवत्ता 100 फीसदी अक्षुण्ण अर्थात बरकरार (Quality intact) रहती है। किसी योग्य डॉक्टर की देखरेख में शुद्ध आॅर्गेनिक तथा ताजा भूई आंवला/आमला पाउडर का किसी भी रूप में उपचार हेतु उपयोग करने पर श्रेृष्ठ तथा जल्दी परिणाम मिलते हैं। जिसकी पुष्टि मेरे निजी अनुभव के साथ-साथ अनेक समर्पित चिकित्सकों ने भी की है।

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आमतौर पर बरसात के मौसम में भूई आंवला बहुतायत में पाया जाता है, लेकिन खेतों में खरपतवार नाशक दवाईयों के उपयोग के कारण यह अमूल्य औषधि लगातार नष्ट होती जा रही है। इसी वजह से हमारे द्वारा शुद्ध आॅर्गेनिक भूई आंवला प्राप्त करने के लिये सीमित मात्रा में इसकी आॅर्गेनिक खेती की जा रही है। जिससे हम अपने रोगियों को शुद्ध आॅर्गेनिक भूई आंवला पाउडर उपलब्ध करवाने में समर्थ और सफल हो पाये हैं।

अनेक बार किन्हीं गम्भीर रोगियों के उपचार हेतु बहुत जरूरी होने पर कुछ मित्र चिकित्सकों को भी अत्यल्प मात्रा (Minimal quantity) में ताजा और शुद्ध आॅर्गेनिक भूई आंवला पाउडर उपलब्ध करवाने की कोशिश की जाती है। अनेक डॉक्टर्स की मांग के बावजूद हम अभी तक अर्थात 2017-2018 में आॅर्गेनिक भूई आमला को मांग के मुताबिक पर्याप्त मात्रा में व्यापारिक दृष्टिकोंण से उपलब्ध करवाने की स्थिति में नहीं हैं। फिर भी हमारी कोशिश रहेगी कि लीज पर जमीन लेकर आने वाले वर्षों में शुद्ध आॅर्गेनिक भूई आंवला का उत्पादन बढाया जा सके। अभी तक के अनुभवों के अनुसार शुद्ध आॅर्गेनिक भूई आंवला निम्न तकलीफों/बीमारियों में कारगर सिद्ध हुआ है:—



1-अद्भुत दर्द निवारक/Wonderful Painkillers: शोध प्रमाणित करते हैं कि वास्तव में भूई आंवला पौधे की जड़ें शक्तिशाली दर्द अवरुद्ध/दर्द निवारण करने वाले एजेंट्स हैं जो मॉर्फिन से 3 गुना अधिक शक्तिशाली हैं। (In fact the roots of the Bhui Aamlaa plant contains powerful pain blocking agents which are 3 times more powerful than morphine.) अत: इसे किसी भी प्रकार के दर्द के निवारण के लिये उपयोग किया जा सकता है। यही वजह है कि शुद्ध आॅर्गेनिक भूई आंवला जिद्दी और लाइलाज गठिया, आमवात और जोड़ों के दर्द से मुक्ति दिलाने में उपयोगी सिद्ध हुआ है। (Pure Organic Bhui Anvla/Aamla has been proven useful to getting relief from Stubborn and incurable arthritis, rheumatoid and joint pain.)



2-गुर्दे और पित्ताशय की पथरी ब्रेकर या पथरी विनाशक (Kidney and gallbladder stone Breaker or Destroyer): भूई आमले के इसी अद्भुत गुण के कारण इसे Stone Breaker/स्टोन ब्रेकर/पथरी विनाशक नाम से भी जाना जाता है। (A study in German showed that people with gallstones that were given Stone Breaker for 2 weeks were completely healed of gallstones 94% of the time… amazing!) हमारा अपना अनुभव है कि कुछ अन्य ताजा एवं 100 फीसदी शुद्ध आॅर्गेनिक औषधियों के साथ इसका नियमित उपयोग करने से पथरी टूटकर/गलकर आराम से निकल जाती है।



3-प्रतिरक्षा प्रणाली वर्धक और एंटीऑक्सिडेंट-प्रतिउपचायक: ताजा एवं 100 फीसदी शुद्ध आॅर्गेनिक भूई आंवला हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ा देता है (Boosts up our Immune System), एंटीऑक्सिडेंट—प्रतिउपचायक (Antioxidant) का काम करता है। साथ ही यह यह एक अच्छा रोगाणुरोधक एजेंट भी (It’s a good antimicrobial agent too) है। इन सब गुणों के कारण एक स्वस्थ व्यक्ति द्वारा भी भूई आंवला के नियमित सेवन से रोगों से लड़ने की ताकत बढ जाती है। यही वजह है कि इसके सेवन से रोगी में हेपेटाइटिस, एचआईवी-पॉजेटिव, लीवर सिरोसिस, संक्रमित लीवर, संक्रमित किडनी जैसे रोगों से लड़ने की रोगी की ताकत कई गुणा बढ जाती है।



4-श्रृेष्ठ डीटॉक्स/Superior Detox: ताजा एवं 100 फीसदी शुद्ध आॅर्गेनिक भूई आंवला को श्रृेष्ठतम डीटॉक्स के नाम से भी जाना जाता है। जिसे आम बोलचाल में हम गुर्दे, यकृत, आंतों सहित शरीर की आंतरिक सफाई करने वाली श्रृेष्ठ दवाई कह सकते हैं। यही वजह है कि यह हेपेटाइटिस, गैस्ट्रिक अल्सर, फैटी लीवर, मूत्रपथ संक्रमण, एचआईवी आदि से लड़कर, इन्हें स्वस्थ करने में मदद करता है।



5-रक्तचाप और रक्त शर्करा को कम करता है (Bhui Amla/Anvla Lowers Blood Pressure and also may help in Lowering Blood Sugar Levels): ताजा एवं 100 फीसदी शुद्ध आॅर्गेनिक भूई आंवला का सेवन करने से उच्च रक्तचाप कम होकर हाई ब्लड प्रेशर और रक्त में शर्करा कम होने से मधुमेह/डायबिटीज रोग से मुक्ति मिलती है।



6-लीवर एवं गुर्दा संरक्षक/Liver and Kidney Protector or Guard: साधारण भाषा में भूई आंवला को लीवर एवं किडनी का संरक्षक और सुरक्षा गार्ड भी कहा जा सकता है। क्योंकि यह एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट (Powerful Antioxidant तथा रोगाणुरोधक एजेंट (Antimicrobial Agent) होने के साथ-साथ, इसमें शक्तिशाली उपचारक गुण (Powerful Healing Qualities) भी हैं। यही वजह है कि यह मूत्रपथ, जिगर/यकृत और गुर्दों की सफाई की सफाई करने में सक्षम होता है। अध्ययनों से पता चलता है कि भूई आंवला शराब के सेवन से क्षतिग्रस्त होने वाले यकृतों को पुनर्जीवित करता है और फैटी जिगर/लीवर की बीमारी से पीड़ित लोगों को भी मदद करता है। यह मूत्र पथ के संक्रमण को खत्म करने में मदद करता है। (Studies show that Bhui aamla/Anvla revitalize livers damaged by alcohol intake. Bui Amla have powerful healing qualities including detoxing, liver cleansing, breakdown of gallbladder and kidney stones, it’s a powerful antioxidant, great for pain, great for hepatitis and HIV, and it’s a good antimicrobial agent too.) इस प्रकार बिना किसी बीमारी के भी यदि ताजा एवं 100 फीसदी शुद्ध आॅर्गेनिक भूई आंवले का सेवन किया जाये तो सम्पूर्ण पाचन संस्थान और मूत्र संस्थान स्वस्थ बना रह सकता है। लीवर और किडनी में संक्रमण होन पर ताजा एवं 100 फीसदी शुद्ध आॅर्गेनिक भूई आंवला का पाउडर अमृत समान उपयोगी है।



7-अन्य: उपरोक्त के अलावा भी ताजा एवं 100 फीसदी शुद्ध आॅर्गेनिक भूई आंवला का सेवन करने से अनेकानेक बीमारियों का इलाज किया जा सकता है। अधिक जानकारी के लिये स्वास्थ्य रक्षक सखा पर ''भूमि आंवला, भुई आंवला Phyllanthus Niruri, Country Gooseberry'' (http://www.healthcarefriend.in/2016/08/phyllanthus-niruri.html) शीर्षक से प्रकाशित विवरण को पढा जा सकता है।
डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'-9875066111/27.08.2017 आॅन लाईन होम्योपैथ एवं परम्परागत चिकित्सक।

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ल्यूकोरिया (श्वेत प्रदर), अनियमित पीरियड्स, गर्भपात, ल्यूज योनी, सेक्स की अतिइच्छा, भय, अपराधबोध सीजर डिलेवरी इत्यादि के भय के कारण मैं विवाह के नाम से ही घबराने लगी थी।

जब मैं 13 साल की थी। मेरी मौसी की सीजर डिलेवरी हुई। 14 की थी तब चाची के रिश्ते में सीजर डिलेवरी हुई। कुछ ही समय बाद हमारे पड़ौस में सीजर डिलेवरी हुई। इस प्रकार 23 साल की हुई तब तक 20-25 सीजर डिलेवरी के केस मैंने देख लिये। सीजर के बाद अधिकतर लेडीज को मैंने कई तरह से परेशान होते और रोते हुए देखा। इस कारण मैं विवाह के नाम से ही घबराने लगी थी। हालांकि 14-15 साल की उम्र में ही मुझे सेक्स की इच्छा होने लगी थी और चाहे-अनचाहे 15 की उम्र से ही सेक्स शुरू हो गया जो शादी तक मैंने अनेक लडकों के साथ खूब इंजोय किया। प्राईवेट कम्पनी में नौकरी लग गयी तो इकोनोमिक प्रोब्लम भी खतम हो गयी। यंग बैचलर सर्किल होने के कारण कई बॉइज के साथ खुलकर सेक्स होने लगा। 




अनेक फ्रेंडस ने धोखा भी दिया तो मेरा बॉय फ्रेंड्स को लाइफ पार्टनर बनाने का सोच खतम हो गया। लेकिन हालातों के कारण जब यह तय हो गया कि मैरिज करनी ही है तो बहुत सारे टेंशन माइंड में घूमने लगे। सोचते-सोचते हैडेक (सिरदर्द) होने लगता। अधिक सेक्स करने के कारण मुझे ल्यूकोरिया (श्वेत प्रदर) भी हो गया। पीरियड्स रैग्यूलर नहीं आते। बहुत दर्द होता था। माइंड में बहुत सारी बातें घूमती रहती थी। जैसे यदि मेरी सीजर डिलेवरी हुई तो क्या होगा? मेरे बॉय फ्रेंड्स के बारे में, मेरे होने वाले हसबैंड को पता चल गया तो क्या होगा? यदि शादी से पहले किये सेक्स के कारण मेरी वैजाईना की ल्यूजनेस (योनी के साइज के ढीलेपन) का होने वाले हसबैंड को पता चल गया तो मेरा क्या होगा? ल्यूकोरिया के कारण वैजाइना में स्मैल भी आने लगी थी। जिसका एलोपैथी डॉक्टर से इलाज करवाया लेकिन सब बेकार।

मैंने नैट पर सभी प्रोब्लम्स के सोल्यूशन तलाशने शुरू किये। अनेक डॉक्टर्स से बात भी की, लेकिन अधिकतर का मैन मकसद डराकर रुपये ऐंठना लगा। कुछ अच्छे डॉक्टर्स भी लगे, लेकिन उनकी बातों पर विश्वास नहीं हुआ। इसी दौरान मैंने गर्भनिरोधक पिल्स के साईड इफैक्ट पढे। जिनको पढकर मैं तो घबरा ही गयी। क्योंकि मैंने तो हजारों गर्भनिरोधक पिल्स खाई थी। दो बार एबोर्ट (गर्भपात) भी करवाया था। इस कारण मुझे ऐसी अनेक मैंटल प्रोब्लम्स तथा टेंशन हो गयी, जिनको किसी को बता भी नहीं सकती थी। नैट पर अनेक तरह से सोल्यूशन मिल रहे थे, लेकिन कंफ्यूजन भी बढ रहा था। अनेक आयुर्वेदिक घरेलु नुस्खे पढे। लेकिन सीजर डिलवरी का मेरा भय नहीं मिटा। दूसरी टेंशन भी मुझे खाये जा रही थी। मैं खुद ग्युल्टी फील (अपराधबोध अनुभव) करने लगी। सोचने लगी मुझे भी ऐसा ही हसबैंड मिलेगा, जिसके बहुत गर्ल्स के साथ सेक्स रिलेशन रहे होंगे।

नैट पर ऐसे लड़कों के बारे में भी पढा जो मस्टरबेशन (हस्तमैथुन) करने के कारण सेक्स की पावर खो चुके थे। मुझे इसका भी भय सताने लगा कि यदि मुझे ऐसा हसबैंड मिला तो क्या होगा? क्योंकि मैं बहुत सेक्सी हो चुकी थी। हर दिन 2-4 बार सेक्स करने की इच्छा होती थी। आखिर में मैंने अपने किसी बॉय फेंड के बजाय किसी नये लड़के से मैरिज करने का तय किया। इसी बीच 2014 में मैंने हैल्थ केयर फ्रेंड (http://www.healthcarefriend.in/) पर डॉ. पुरुषोत्तम मीणा निरंकुश जी का एक आर्टिकल बढा। जिसमें बिना सीजर के इजी एंड सेफ डिलेवरी के बारे में लिखा था। नीचे डॉ. साहब का मो. नं. 9875066111 लिखा था। मैंने तुरंत काल किया। डॉ. साहब के बजाय किसी दूसरे व्यक्ति ने पिक किया और मुझे बताया कि डॉ. साहब किसी मीटिंग में स्पीच दे रहे हैं। मुझे भी वोइस सुनाई दे रही थी। मुझे लगा कम से कम यह बंदा चोर-उचक्का तो नहीं है। सोशल स्टेटस वाला बंदा है। मैंने दूसरे दिन फिर काल किया तो डॉ. साहब ट्रेन में यात्रा कर रहे थे। बात शुरू होते से ही कट गयी।

आखिर तीसरे दिन डॉ. साहब से बात हुई। मैंने उन्हें बताया कि मुझे सीजर डिलेवरी नहीं चाहिये और बैबी भी चाहिये। साथ ही हो सके तो वैजाइना की लूजनेस भी कम करनी है। मुझे सरप्राईज हुआ डॉ. मीणा जी ने सभी प्रोब्लम को सोल्व करने की बात कही। मैंने खर्चा पूछा तो बोले पहले वाट्सएप पर अपनी डिटेल्स भेजें और खर्च की चिंता नहीं करें, बहुत कम लूंगा।



सारी जानकारी देने के बाद डॉ. साहब द्वारा मुझे कहा गया कि जो कुछ भी हुआ और जो हो रहा है, उसके बारे में जितना सच तथा सही बताओगी, उतना ही इलाज तथा समाधान के सफल होने की उम्मीद की जा सकती है। मुझे सारी बातों को 100 परसेंट कॉन्फीडेंसियल रखने का विश्वास दिलाया तो मैंने अपनी सारी स्टोरी खुलकर बता दी। इसके दो दिन बाद डॉ. साहब ने मुझे 48 मिनट तक मोबाईल पर जो कुछ काउनसिल किया। मैं उसे कभी नहीं भुला सकती। डॉ. साहब ने मेरे सोचने का तरीका ही बदल दिया। मेरा सारा भय खतम कर दिया और बोल दिया कि सब कुछ भूलकर बिना संकोच ​मैरीज करो, लेकिन फ्यूचर में अपने लाइफ पार्टनर के साथ धोखा नहीं करना। हो सके तो बॉय फ्रेंड्स से अभी से ही दूर रहो। पुरानी बातों को याद करने से लाभ नहीं, नुकसान ही हो सकता है। यदि अत्यधिक सेक्स इच्छा होगी तो उसका भी नेच्युरल उपचार है।

डॉ. साहब ने मुझे यह भी विश्वास दिलाया कि यदि बाई चांस मेरे होने वाले हसबैंड को कोई सेक्सुल प्रोब्लम हुई तो उसको भी संभाल लेंगे। वैजाइना की ल्यूजनेस कम करने के साथ ही हर हाल में विदाउट सीजर नॉर्मल डिलेवरी का विश्वास दिलाया। करीब 5 महिने के उपचार के बाद मेरी वैजाइना की ल्यूजनेस लगभग खतम हो गयी। ल्यूकोरिया भी ठीक हो गया। पेट (हाजमा) खराब रहता था, वो भी ठीक हो गया। सब कुछ ठीक हो गया, लेकिन सीजर डिलेवरी का थोड़ा सा भय अभी मन में था। मैंने डॉ. साहब की एडवाईस को नहीं मानकर अपने एक पुराने बॉय फ्रेंड के साथ यह जानने के लिये सेक्स किया कि क्या वाकई मेरी वैजाइना टाईट हो चुकी है? रिलेशन के बाद मेरा बॉय फ्रेंड तो बहुत खुश हुआ ही मुझे भी बहुत अच्छा लगा।

आखिर में 28 की उम्र में मई, 2015 में मैंने फैमिली द्वारा सिलेक्ट लड़के से अरेंज मैरिज कर ली। मैरीज से पहले मेरी डॉ. साहब से व्यक्तिगत रूप से मिलने की बहुत इच्छा थी। इसलिये मैंने डॉ. साहब को मैरिज में इनवाइट भी किया। लेकिन डॉ. साहब किसी मीटिंग के कारण नहीं आये या मीटिंग का बहाना बनाया पता नहीं, लेकिन मेरी मैरिज में नहीं आये। इसका उस समय मुझे दु:ख हुआ।
आखिर मुझ जैसी गंदी और धोखेबाज लड़की की जिन्दगी में सुहागरात का क्षण आ गया। मेरे स्मार्ट हसबैंड ने वैजाइना में अपना पैनिस 2-3 बार डाला और डिस्चार्ज हो गये। उनका पहला सेंटेंस था-''डार्लिंग सोरी, मेरी गलत हैबिट्स के कारण मेरी सेक्स पावर खतम हो चुकी है, बट आई प्राउड यू, इतनी एज में भी तुम्हारी वैजाइना इतनी टाइट है। आईएम लकी।''

पहले सेक्स के कुछ समय बाद पतिदेव निढाल होकर सो गये। बैड पर लेटे हुए मेरा दिमांग घूमने लग गया। सोचिये मुझे जैसी गंदी और धोखेबाज लड़की को पाकर मेरे हसबैंड द्वारा अपने आप को लकी मानना मुझे कैसा लगा होगा? मेरे मन में बहुत से विचार घूमने लगे।
फर्स्ट-मुझे खुशी हुई कि मेरी पुरानी जिन्दगी का मेरे हसबैंड को कभी पता नहीं चलेगा। मन ही मन मैंने डॉ. मीणा जी को दिल से थैंक्स बोला।

सेकण्ड-सेक्स पावरलेस हसबैंड मिलना, मुझे लगा कि मेरे कर्मों की सजा है। लेकिन तुरंत ही खुद को संभाला डॉ. मीणा जी के होते चिंता किस बात की?

थर्ड-क्या ये बंदा मुझे कभी प्रिग्नेंट कर पायेगा?
ऐसे न जाने कितने विचार घूमते रहे और सोचते-साचते नींद आ गयी। सुबह जागने पर ननदों और भाभियों की ठिठोली के बीच मैं अन्दर ही अन्दर रो रही थी। अचानक मुझे अन्दर अकेले में बुलाकर पतिदेव महोदय ने आदेश फरमाया-''रात को जो कुछ हुआ, उसके बारे में किसी को मत बताना, मैं अपना इलाज करवा लूंगा। एक बाबा हैं, जो बहुत अच्छी दवाई देते हैं।'' मन ही मन डर भी लगा कि कहीं कोई गलत मैडीसिन नहीं ले आये? अगली रात दवाई के सेवने के बाद सेक्स शुरू किया तो आधा घंटे तक मेहनत करने के बाद भी डिस्चार्ज नहीं हुआ। परेशान होकर अधूरा ही छोड़ दिया। एक घंटे बाद फिर कोशिश की तब डिस्चार्ज हुआ। बोले अब तो ठीक है। मैंने कहा क्या खाक ठीक है? आपने मुझे क्या समझ रखा है? कौनसी मैडीसिन लाये हो? कहीं कोई साइड इफैक्ट नहीं हो जाये? बोले जो होगा देखा जायेगा, तुम तो खुश हो ना? मैंने कहा नहीं, मैं ऐसे खुश नहीं हो सकती। आप ऐसी दवाई नहीं लेना कोई नेचुरल और सेफ मैडीसन लीजिये। बेशक आप सेक्स मत करो मैं वेट कर लूंगी।

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डॉ. पुरुषोत्तम मीणा
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आखिर में, मैं पीहर लौटी तो मैंने डॉ. साहब को सारी कहानी बतायी। डॉ. साहब की एडवाइस के मुताबिक मैंने एक झूंठी कहानी गढकर डॉ. मीणा जी का नम्बर अपने हसबैंड को दिया। डॉ. मीणा जी से उनकी बात हुई, उपचार शुरू हुआ और नवम्बर, 2015 तक मेरे हसबैंड 100% मर्द बन गये। इस बीच  हम दोनों की डॉ. साहब से बात होने लगी। अब डॉ. साहब की सलाह के मुताबिक मुझे कंसीव (गर्भधारण) करना था। जनवरी, 2016 में मुझे कंसीव करने में सफलता मिली। दूसरे महिने से ही मैंने डॉक्टर साहब के 'प्रसव सुरक्षा चक्र' (http://www.healthcarefriend.in/2017/07/blog-post_18.html) की दवाईयों को अन्तिम दिन तक सेवन किया। ठीक समय पर नवम्बर, 2016 में बिना सीजर, बिना फाल्स लैबर पैन, बिना इंज्री, बिना परेशानी और लगभग बिना डॉक्टरी मदद के मैं एक स्वस्थ बेटे की मां बन चुकी हूं। मन ही मन अपने आप को लकी माना और मैंने डॉ. साहब के लिये भगवान से दुआएं मांगी। काश ऐसा डॉक्टर और एडवाईजर सबको मिले। डॉ. साहब की सलाह के मुताबिक मार्च, 2017 के पहले वीक में हमने डिलेवरी के बाद पहली बार सेक्स किया। मेरे हसबैंक को सरप्राईज हुआ और बोले-"तू तो वापस कुंवारी जैसी हो गयी! मजा आ गया।"

अन्त में सबसे बड़ा सवाल इस सबका खर्चा किना हुआ? फिगर (आंकडा) देने के बजाय मैं इतना ही कहूंगी कि बहुत ही कम खर्चा हुआ। इतना बता दूं कि मेरे इलाज, मेरे हसबैंड के इलाज और अन्त में प्रसव सुरक्षा चक्र पर कुल मिलाकर मेरी एक महिने की सैलेरी भी खर्च नहीं हुई। अब हम बहुत खुश हैं। बीच-बीच में डॉ. साहब से दुआ-सलाम करते रहते हैं।

डॉ. साहब कृपया आप मेरी इस स्टोरी को अपनी वेबसाइट पर डालने का कष्ट करें। जिससे दूसरे हम जैसे दु:खी लोग भी इंस्पायर हो सकें। खुद को अनलकी और ग्युल्टी मानने वाली एक लकी लड़की-बदला हुआ नाम 'प्रतिभा'।

डॉक्टर टिप्पणी: प्रतिभा और प्रतिभा के हसबैंड जैसी समस्याओं का सामना करने वाले युवक-युवतियां की संख्या असंख्य है। जो यौनशिक्षा की ​कमी, गलत संगत, अपराधबोध, अविश्वास, संकोच और गलत आदतों के कारण घुट-घुट कर जीने को विवश हैं। ऐसे लोगों के परिवार और जीवन बिखर रहे हैं। बड़ी संख्या में होने वाले तलाकों की छुपी वजह यौन सम्बन्धों में असंतुष्टि होता है। मेरे पास तकरीब हर दिन ऐसे अनेकों व्यथित युवक-युवतियां के काल आते रहते हैं। हम पर जो विश्वास कर लेते हैं, उनका उपचार हो जाता है और जो हम पर विश्वास नहीं कर पाते उनकी वे जानें। मैं इतना ही लिखूंगा कि यदि सही डॉक्टर को, सही समय पर, सच बताओगे तो शारीरिक और मानसिक व्यधियों और परेशानियों से मुक्ति सम्भव है! मैडम प्रतिभा के हसबैंड की स्टोरी भी बड़ी दर्दनाक और युवकों को सबक सिखाने वाली है। लेकिन उनकी अनुमति के बिना प्रकाशन नहीं किया जायेगा।-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'-85-619-55-619

--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!

--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!
सभी के स्वस्थ एवं सुदीर्घ जीवन की कामना के साथ-मेरे प्यारे और दुलारे तीन बच्चों की ममतामयी अद्वितीय माँ (मम्मी) जो दुखियों, जरूतमंदों और मूक जानवरों तक पर निश्छल प्यार लुटाने वाली एवं अति सामान्य जीवन जीने की आदी महिला थी! वह पाक कला में निपुण, उदार हृदया मितव्ययी गृहणी थी! मेरी ऐसी स्वर्गीय पत्नी "जानकी मीणा" की कभी न भुलाई जा सकने वाली असंख्य हृदयस्पर्शी यादों को चिरस्थायी बनाये रखते हुए इस ब्लॉग को आज दि. 08.08.12 को फिर से पाठकों के समक्ष समर्पित कर रहा हूँ!-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'

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डिटॉक्सीफाई डिटॉक्सीफिकेशन डिनर डिब्बाबंद भोजन डिलेवरी डीकामाली डीगामाली डेंगू डेंगू-Dengue डॉ. निरंकुश डॉ. मीणा ढीलापन ढीली योनि तकलीफ का सही इलाज तरबूज-Watermelon तलाक ताकत तिल तिल्ली तुंबा तुंबी तुलसी तेल त्रिदोषनाशक त्रिफला त्वचा त्वचा रोग थकान थाईरायड थायरायड-Thyroid थायरॉइड दण्डनीय अपराध दंत वेदना दन्तकृमि दन्तरोग दमा दर वेदना दर्द दर्द निवारक दवा दर्दनाक दस्त दही दाग-धब्बे-Stains-Spots दाढ़ दांत दांतो में कैविटी-Teeth Cavity दाद दाम्पत्य दाम्पत्य-Conjugal दाल दालचीनी दालें दिल दुर्गंध दुर्बलता दुष्प्रभाव दूध दूधी दूधी-Milk Hedge दृष्टिदोष द्रोणपुष्पी-Leucas Cephalotes धड़कन धनिया बीज धनिया-Coriander धमासा धातु धातु पतन धार्मिक नज़ला नपुंसकता नाक नाखून नागबला नागरमोथा नाडी हिंगु नाड़ी हिंगु (डिकामाली) नामर्दी नारकीय पीड़ा नारियल नाश्ता निमोनिया निम्न रक्तचाप निम्बू नियासिन निराश निरोगधाम निर्गुण्डी निसोरा नींद नींबू नींबू-Lemon नीम-azadirachta indica नुस्खे नुस्खे-Tips नेगड़ नेगड़-निर्गुन्डी-Vitex negundo नेत्र रोग नैतिक नौसादर न्युमोनिया-Pneumonia पक्षघात पढ़ने में मन लगेगा 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