सीधे परामर्श हेतु Mob & Whats App No. : डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 9875066111


प्रेषित समय :10:14:15 AM / Thu, Apr 10th, 2014

हमारा देश आयुर्वेद का जनक है और यहां ऐसी हज़ारों जड़ी-बूटियां है जिनसे असाध्य रोग भी ठीक हो जाते हैं. उन्हीं में से एक है माजूफल.

विभिन्न रोगों में सहायक :

1. बवासीर में दर्द का होना और मलद्वार का निकलना: 1 गिलास पानी में माजूफल पीसकर डालें और 10 मिनट तक उबाल लें, ठंडी होने के बाद इससे मलद्वार को धोयें. इससे मलद्वार का बाहर निकलना और बवासीर का दर्द दूर होता है.

2. अंडकोष के रोग: 12 ग्राम माजूफल और 6 ग्राम फिटकरी को पानी में पीसकर अंडकोष पर लेप करें. 15 दिन लेप करने से अण्डकोषों में भरा पानी सही हो जाता है.

3. अंडकोष की सूजन: 10-10 ग्राम माजूफल और असगंध लेकर पानी के साथ पीस लें, फिर इसे थोड़ा-सा गर्म करके अण्डकोष पर बांधें. इससे अंडकोष की सूजन मिट जाती है.

4. दांतों का दर्द: 
  • (1) 1 माजूफल एवं 1 सुपाड़ी को आग पर भून लें तथा 1 कच्चे माजूफल के साथ मिलाकर बारीक पाउडर बनाकर मंजन बना लें. इससे रोजाना 2 बार मंजन करने से दांतों का दर्द ठीक हो जाता है.
  • (2) फिटकरी को फुला लें. माजूफल और हल्दी के साथ फूली हुई फिटकरी को बराबर मात्रा में मिलाकर बारीक पीसकर पाउडर बना लें. इससे मंजन करने पर दांतों की पीड़ा शांत होती है.
  • (3) दांतों में तेज दर्द होने पर माजूफल को पीसकर दांतों के नीचे दबाकर रखें. इससे तेज दर्द में जल्द आराम मिलता है तथा दांतों से खून का आना बंद हो जाता है.
5. आंखों की खुजली: माजूफल और छोटी हरड़ को पीसकर आंखों में लगाने से आंखों की खुजली समाप्त होती है.

6. मसूढ़ों का रोग: माजूफल को बारीक पीसकर और छानकर सुबह-शाम मसूढ़ों पर मालिश करने से मसूढ़ों के सारे रोग समाप्त हो जाते हैं.

7. दांतों से खून आना: दांतों से खून निकल रहा हो तो माजूफल को बारीक पीसकर मंजन बना लें. इससे मंजन करने से दांतों से खून का निकलना बंद हो जाता है.

8. दांत मजबूत करना: 5 ग्राम माजूफल, 4 ग्राम भुनी फिटकरी, सफेद कत्था 6 ग्राम और 1 ग्राम नीलाथोथा भुना हुआ को बारीक पीसकर मंजन बना लें. इससे रोजाना मंजन करने से दांत मजबूत होते हैं.

9. दांतों में ठंडी लगना: माजूफल को बारीक पीसकर मंजन बना लें. इसे दांतों में लगाने से दांतों में पानी का लगना और खून निकलना बंद हो जाता है तथा दांत मजूबत होते हैं.

10. पायरिया: 
  • (1) 20 ग्राम माजूफल, 1 ग्राम पोटेशियम परमैगनेट और 30 ग्राम पांचों नमक को मिलाकर बारीक पाउडर बना लें. इसके पाउडर से मंजन करने से पायरिया रोग दूर हो जाता है.
  • (2) माजूफल के चूर्ण का दांतों पर मंजन करने से मुंह व मसूढ़ों के घाव एवं मसूढ़ों से खून का निकलना बंद होता है तथा पायरिया रोग में लाभ मिलता है.
11. कांच निकलना (गुदाभ्रंश): 
  • (1) 2 ग्राम भुनी फिटकरी को 2 माजूफल के साथ पीसकर 100 ग्राम पानी में मिलाकर घोल बना लें. इस घोल में रूई को भिगोकर गुदा पर लगाएं और गुदा को अन्दर कर लंगोट बांध दें. लगातार 4-5 दिन तक इसका प्रयोग करने से गुदाभ्रंश (कांच निकलना) बंद हो जाता है.
  • (2) माजूफल और फिटकरी का पाउडर बनाकर गुदा पर छिड़कने से दर्द में आराम आता है.
  • (3) 1 गिलास पानी में 2 माजूफल को पीसकर डालें और आग पर उबाल लें. ठंडी होने पर उस पानी से मलद्वार को धोने से गुदा का बाहर आना बंद हो जाता है.
  • (4) 10-10 ग्राम माजूफल, फिटकरी तथा त्रिफला चूर्ण को लेकर पानी में भिगो दें. 1 से 2 घंटे भिगोने के बाद पानी को कपड़े से छानकर मलद्वार को धोने से गुदाभ्रंश ठीक हा जाता है.
12. गर्भधारण: 60 ग्राम माजूफल को पीसकर छान लें. इसे 10-10 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम मासिक-धर्म समाप्त होने के बाद 3 दिनों तक गाय के दूध से सेवन करना चाहिए. इससे गर्भ स्थापित होता है.

13. मुंह के छाले:

माजूफल के टुकड़े को सुपारी की तरह चबाते रहने से मुंह के छाले और दाने आदि खत्म हो जाते हैं.
5-5 ग्राम माजूफल, कत्था, वंशलोचन तथा छोटी इलायची के दाने लेकर पीसकर और छानकर चूर्ण बना लें. इस 1 चुटकी चूर्ण को बच्चे के मुंह में सुबह-शाम छिड़कने से बच्चों के मुंह के छाले खत्म हो जाते हैं.

14. मुंह का रोग: 10 ग्राम माजूफल, 10 ग्राम फिटकरी और 10 ग्राम कत्था को पीसकर व कपड़े में छानकर चूर्ण बना लें. रोजाना 2 से 3 बार इस चूर्ण को मुंह में छिड़कने से मुंह के रोगों में आराम मिलता है.

15. दस्त: माजूफल को घिसकर या पीसकर बने चूर्ण को 3 से 6 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम खुराक के रूप में सेवन करने से अतिसार (दस्त) में लाभ मिलता है.

16. कान का बहना:
5 ग्राम माजूफल को पीसकर और कपड़े में छानकर 50 ग्राम शराब में मिला लें. इसकी 2-2 बंदे कान को साफ करके सुबह-शाम डालने से कान से मवाद बहना बंद होता है.
माजूफल को बारीक पीसकर सिरके में डालकर उबाल लें. उबलने के बाद इसे छानकर कान में डालने से कान में से मवाद बहना बंद हो जाता है.

17. घाव:
माजूफल को जलाकर उसकी राख एकत्र कर लें. इस राख को कपड़े से छानकर घाव पर छिड़कने से घाव ठीक हो जाता है.
माजूफल को पानी में पीसकर घाव पर पट्टी बांधने से लाभ मिलता है. इससे घाव जल्दी ठीक हो जाता है और घाव से खून भी आना बंद हो जाता है.
माजूफल को पीसकर और छानकर पानी में पीसकर घाव पर लगाकर पट्टी बांध लें. इससे खून बहना बंद हो जायगा, घाव भी भर जाएगा और हड्डी भी जुड़ जाती है.

18. श्वेतप्रदर: 1-2 ग्राम की मात्रा में माजूफल का चूर्ण ताजे पानी के साथ सुबह-शाम सेवन करने से श्वेतप्रदर ठीक हो जाता है.

19. रक्तप्रदर: 25 ग्राम माजूफल को लेकर 200 ग्राम पानी में मिलाकर काढ़ा बना लें. फिर उसमें 3-3 ग्राम रसौत, फिटकरी मिलाकर योनि को साफ करने से रक्तप्रदर में लाभ मिलता है.

20. नकसीर: माजूफल को पीसकर और किसी कपड़े में छानकर नाक से सूंघने से नकसीर (नाक से खून बहना) ठीक हो जाती है.

21. तंग योनि को शिथिल करना:
10 ग्राम माजूफल को पीसकर रख लें, फिर इसमें आधा ग्राम कपूर का चूर्ण और शहद मिलाकर योनि पर लगायें. इससे योनि शिथिल (ढीली) हो जाती है.
माजूफल को पानी के साथ पीसकर लुगदी बना लें. फिर इसमें रूई को भिगोकर स्त्री की योनि में संभोग (सहवास) करने से पहले रख दें, इसके बाद संभोग करने से योनि में दर्द नहीं होता हैं. ध्यान रहे कि इसका प्रयोग गर्भ को रोकने के लिए भी प्रयोग किया जाता है, इसलिए सोच समझकर ही इस्तेमाल करें.

23. योनि का संकोचन:
माजूफल, शहद और कपूर को एक साथ पीसकर मिला लें, फिर इसे अंगुली की मदद से योनि में लगाने से योनि संकुचित हो जाती है.
माजूफल, धाय के फूल, फिटकरी को पीसकर बेर के आकार की गोली बनाकर योनि के अन्दर रखने से योनि छोटी हो जाती है.

24. होठ को पतला करना: माजूफल को पीसकर दूध या पानी में पीसकर रात को सोते समय होठों पर लगातार 1 सप्ताह तक लगाने से होठ पतले हो जाते हैं.

By Dr. D K Goyal On May 15, 2016

फिटकरी (Alum) के औषधीय एवं आयुर्वेदिक गुण
फिटकरी जो मनुष्य की काया ‘फिट’ करे उसे ‘फिटकरी’ कहते हैं।  यह लाल व सफ़ेद दो प्रकार की होती है। अधिकतर सफ़ेद फिटकरी का प्रयोग ही किया जाता है। यह संकोचक अर्थात सिकुड़न पैदा करने वाली होती है। फिटकरी में और भी बहुत गुण होते हैं। फिटकरी एक प्रकार का खनिज है जो प्राकृतिक रूप में पत्थर की शक्ल में मिलता है। इस पत्थर को एल्युनाइट कहते हैं। इससे परिष्कृत फिटकरी तैयार की जाती है। नमक की तरह है, पर यह सेंधा नमक की तरह चट्टानों से मिलती है। यह एक रंगहीन क्रिस्टलीय पदार्थ है। इसका रासायनिक नाम है-पोटेशियम एल्युमिनियम सल्फेट। संसार को इसका ज्ञान तकरीबन पाँच सौ से ज्यादा वर्षों से है। इसे एलम भी कहते हैं। पोटाश एलम का इस्तेमाल रक्त में थक्का बनाने के लिए किया जाता है। इसीलिए दाढ़ी बनाने के बाद इसे चेहरे पर रगड़ते हैं ताकि छिले-कटे भाग ठीक हो जाएं। इसके कई तरह के औषधीय उपयोग हैं।

आज हम फिटकरी के कुछ गुणों के विषय में बात करेंगे –
फिटकरी के लाभ (Fitkari ke labh)

हुपिंग कास (कुकुर खांसी ) : यह बीमारी बच्चो को अधिकार होती हैं। इसमें इतने जोर की खांसी उठती है कि बच्चे को वमन तक हो जाती हैं। ऐसी हालत में Fitkari भस्म 1 रत्ती, प्रवाल पिष्टी आधी रत्ती, ककड़ीसिंगी चूर्ण 2 रत्ती में मिला शहद के साथ देने से फायदा भुत होती हैं । यह भस्म विष नासक हैं। अत: सभी प्रकार के विषों पर इसका प्रभाव होता हैं।
  1. तत्काल काटे हुए सर्प के रोगी को Fitkari भस्म 1 माशे को 5 तोला घी में मिला कर पिलाने से कुछ देर के लिए बिष का वेग आगे न बढ़कर रुक जाता हैं।
  2. बिच्छू के बिष में भी 1 तोला Fitkari को 5 तोला गर्म पानी में मिलकर रुई के फाहा से काटे स्थान पर इस पानी को बार बार रकने से बिच्छू का बिष दूर हो जाता हैं।
  3. चोट या घाव : Fitkari को चोट या घाव लगने पर इस्‍तमाल करें। Fitkari का पानी लगाने से घाव से खून बहना बंद हो जाएगा। तथा घाव पर फिटकरी का चूर्ण बनाकर डालने से खून बहना बंद हो जाता है
  4. पसीना : जिन लोगो को शरीर से ज्यादा पसीना आने की समस्या हो तो वो लोग नहाते समय पानी में फिटकरी को घोलकर नहाने से पसीना आना कम हो जाता है।
  5. माउथवॉश : एंटीबैक्‍टीरियल और एस्‍ट्रिजेंट तत्‍व होने की वजह से यह दंत रोग को दूर कर सकती है। यह माउथवॉश की तरह भी प्रयोग की जा सकती है।
  6. खुजली और शरीर से बदबू : Fitkari को नहाने के पानी में घोल कर प्रयोग करने से खुजली और शरीर से बदबू आना बंद होती है।
  7. दांत दर्द : Fitkari और काली मिर्च पीसकर दांतों की जड़ों में मलने से दांतों की दर्द में लाभ होते है।
  8. आफ्टर सेविंग : सेविंग करने के बाद चेहरे पर फिटकरी लगाने से चेहरा मुलायम हो जाता है।
  9. दांतों के कीड़े तथा मुंह की बदबू : प्रतिदिन फिटकरी को गर्म पानी में घोलकर कुल्ला करें, इससे दांतों के कीड़े तथा मुंह की बदबू दूर हो जाती है।
  10. कान में चींटी : कान में चींटी चली जाने पर कान में सुरसरी हो तो Fitkari को पानी में घोलकर पीने से लाभ मिलता है।
  11. दांत दर्द : फिटकरी और कालीमिर्च की बराबर-बराबर मात्रा पीसकर दाँतों की जड़ों में मलने से दाँतों के दर्द में काफी लाभ होता है. फिटकरी को गर्म पानी में घोलकर प्रतिदिन सुबह-शाम कुछ दिनों तक लगातार कुल्ला करने से दाँतों के कीड़े ख़त्म हो जाते हैं व मुँह की बदबू दूर हो जाती है. 100 ग्राम Fitkari के चूर्ण में 50 ग्राम सैंधा नमक मिलाकर मंजन बना लें. इस मंजन के प्रतिदिन प्रयोग से दाँतों के दर्द में आराम मिलता है. भुनी हुई Fitkari = 10 ग्राम, भुना हुआ तूतिया = 5 ग्राम एवं कत्था = 10 ग्राम, इस अनुपात में कूट पीसकर मंजन बना लें. इस मंजन के नित्य इस्तेमाल करने से दाँतों की पीड़ा दूर होती है और दाँत मजबूत तथा सुदृढ़ होते हैं.
  12. सूजन और खुजली : सर्दियों के समय में पानी में ज्यादा काम करने से हाथों की उंगुलियों में सूजन या खुजली हो जाती है. इससे बचने के लिए थोड़े पानी में अंदाजन थोड़ी सी फिटकरी डालकर उबाल लें. इस पानी द्वारा उंगलियाँ धोने से सूजन और खुजली में काफी आराम मिलता है.
  13. खून बहना बंद : यदि चोट या खरोंच लगकर घाव हो गया हो और उससे खून बह रहा हो तो घाव को फिटकरी के पानी से धोने के बाद उस पर फिटकरी का चूर्ण बुरकने से खून बहना बंद हो जाता है.
  14. चोट-दर्द : डेढ़ ग्राम फिटकरी पाऊडर को फाँककर ऊपर से सादा अथवा हल्दीयुक्त दूध पीने से चोट-दर्द दूर होता है.
  15. टॉन्सिल : टॉन्सिल की समस्या होने पर एक गिलास गर्म पानी में चुटकी भर फिटकरी, चुटकी भर हल्दी चूर्ण और एक चम्मच नमक डालकर गरारे करें. इससे टॉन्सिल की समस्या में जल्दी आराम मिलता है.
  16. दस्त और पेचिश : दस्त और पेचिश की परेशानी से बचने के लिए 1-2 चुटकी भुनी हुई फिटकरी को गुलाबजल के साथ मिलाकर पीने से खूनी दस्त आना बंद हो जाते हैं.
  17. सिर के जुएँ : एक लीटर पानी में 10 ग्राम फिटकरी का चूर्ण घोल लें. इस घोल से प्रतिदिन सिर धोने से सिर के जुएँ मर जाते हैं.
  18. एंटीसेप्टिक : सेविंग करने के बाद चेहरे पर फिटकरी लगाने से चेहरा मुलायम हो जाता है और यह एंटीसेप्टिक के रूप में ब्लेड के घाव से चेहरे की रक्षा भी करती है.
  19. दमा और खाँसी : आधा ग्राम पिसी हुई फिटकरी को शहद में मिलाकर चाटने से दमा और खाँसी में बहुत लाभ मिलता है.
  20. दमा : गर्म तवे पर फुलाई हुई फिटकरी 10 ग्राम और मिश्री 20 ग्राम इन दोनों को महीन पीसकर रख लें. करीब एक ग्राम मात्रा नित्य सवेरे खाने से दमा रोग में लाभ होता है.
  21. खून की उल्टी : भुनी हुई फिटकरी 1-1 ग्राम सुबह-शाम पानी के साथ लेने से खून की उल्टी बंद हो जाती है.
  22. कान में फुँसी/मवाद : कान में फुँसी अथवा मवाद हो तो फिटकरी के पानी की 2-4 बूँदें कान में डालें काफी आराम मिलेगा.
  23. आँखों की लाली : शहद में फिटकरी मिलाकर काजल या सुरमा की भांति आँखों में आँजने से आँखों की लाली समाप्त हो जाती है.
  24. त्वचा में खुजली : त्वचा में खुजली वाली जगह को फिटकरी वाले पानी से धोकर उस जगह पर थोड़े से सरसों के कड़वे तेल का लेप लगाकर उसके ऊपर थोड़ा सा कपूर का चूर्ण डाल लें. काफी लाभ मिलता है.
  25. जननांगों की खुजली: फिटकरी को गर्म पानी में मिलाकर जननांगों को धोने से जननांगों की खुजली में लाभ होता है।
  26. टांसिल का बढ़ना: टांसिल के बढ़ने पर गर्म पानी में चुटकी भर फिटकरी और इतनी ही मात्रा में नमक डालकर गरारे करें।
  27. गर्म पानी में नमक या फिटकरी मिलाकर उस पानी को मुंह के अन्दर डालकर और सिर ऊंचा करके गरारे करने से गले की कुटकुटाहट, टान्सिल (गले में गांठ), कौआ बढ़ना, आदि रोगों में लाभ होता है।
  28. टांसिलों की सूजन : 5 ग्राम फिटकरी और 5 ग्राम नीले थोथे को अच्छी तरह से पकाकर इसके अन्दर 25 ग्राम ग्लिसरीन मिलाकर रख लें। फिर साफ रूई और फुहेरी बनाकर इसे गले के अन्दर लगाने और लार टपकाने से टांसिलों की सूजन समाप्त हो जाती है।
  29. घावों में रक्तस्राव (घाव से खून बहना): घाव ताजा हो, चोट, खरोंच लगकर घाव हो गया हो, उससे रक्तस्राव हो। ऐसे घाव को फिटकरी के पानी से धोएं तथा घाव पर फिटकरी को पीसकर इसका पावडर छिड़कने, लगाने व बुरकने से रक्तस्राव (खून का बहना) बंद हो जाता है।
  30. शरीर में कहीं से भी खून बह रहा हो तो एक ग्राम फिटकरी पीसकर 125 ग्राम दही और 250 मिलीलीटर पानी मिलाकर लस्सी बनाकर सेवन करना बहुत ही लाभकारी होता है।
फिटकरी के आयुर्वेदिक और औषधीय गुण
खूनी बवासीर: खूनी बवासीर हो और गुदा बाहर आती हो तो फिटकरी को पानी में घोलकर गुदा में पिचकारी देने से लाभ प्राप्त होता है। एक गिलास पानी में आधा चम्मच पिसी हुई फिटकरी मिलाकर प्रतिदिन गुदा को धोयें तथा साफ कपड़े को फिटकरी के पानी में भिगोकर गुदे पर रखें।
10 ग्राम फिटकरी को बारीक पीसकर इसके चूर्ण को 20 ग्राम मक्खन के साथ मिलाकर बवासीर के मस्सों पर लगाने से मस्से सूखकर गिर जाते हैं। फिटकरी को पानी में घोलकर उस पानी से गुदा को धोने खूनी बवासीर में लाभ होता है।
भूनी फिटकरी और नीलाथोथा 10-10 ग्राम को पीसकर 80 ग्राम गाय के घी में मिलाकर प्रतिदिन सुबह-शाम बवासीर के मस्सों पर लगायें। इससे मस्से सूखकर गिर जाते हैं।
सफेद फिटकरी 1 ग्राम की मात्रा में लेकर दही की मलाई के साथ 5 से 7 सप्ताह खाने से रक्तार्श (खूनी बवासीर) में खून का अधिक गिरना कम हो जाता है।
भूनी फिटकरी 10 ग्राम, रसोत 10 ग्राम और 20 ग्राम गेरू को पीस-कूट व छान लें। इसे लगभग 3-3 ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन सुबह-शाम खाने से खूनी तथा बादी बवासीर में लाभ मिलता है।
घाव: फिटकरी को तवे पर डालकर गर्म करके राख बना लें। इसे पीसकर घावों पर बुरकाएं इससे घाव ठीक हो जाएंगे। घावों को फिटकरी के घोल से धोएं व साफ करें।
2 ग्राम भुनी हुई फिटकरी, 2 ग्राम सिन्दूर और 4 ग्राम मुर्दासंग लेकर चूर्ण बना लें। 120 मिलीग्राम मोम और 30 ग्राम घी को मिलाकर धीमी आग पर पका लें। फिर नीचे उतारकर उसमें अन्य वस्तुओं का पिसा हुआ चूर्ण अच्छी तरह से मिला लें। इस तैयार मलहम को घाव पर लगाने से सभी प्रकार के घाव ठीक हो जाते हैं।
फिटकरी, सज्जीक्षार और मदार का दूध इन सबको मिलाकर और पीसकर लेप बना लें। इस लेप को घाव पर लगाने से जलन और दर्द दूर होता है।
भुनी हुई फिटकरी को छानकर घाव पर छिड़कने से घाव से सड़ा हुआ मांस बाहर निकल आता है और दर्द में आराम रहता है।
आग से जलने के कारण उत्पन्न हुए घाव को ठीक करने के लिए पुरानी फिटकरी को पीसकर दही में मिलाकर लेप करना चाहिए।
5 ग्राम फूली फिटकिरी का चूर्ण बनाकर देशी घी में मिला दें, फिर उसे घाव पर लगायें। इससे घाव ठीक हो जाता है।
किसी भी अंग से खून बहना: एक ग्राम फिटकरी पीसकर 125 ग्राम दही और 250 मिलीलीटर पानी मिलाकर लस्सी बनाकर पीने से कहीं से भी रक्तस्राव हो, बंद हो जाता है।
नकसीर (नाक से खून बहना): गाय के कच्चे दूध में फिटकरी घोलकर सूंघने से नकसीर (नाक से खून आना) ठीक हो जाती है। यदि नकसीर बंद न हो तो फिटकरी को पानी में घोलकर उसमें कपड़ा भिगोकर मस्तक पर रखते हैं। 5-10 मिनट में रक्तबंद हो जाएगा। चौथाई चाय की चम्मच फिटकरी पानी में घोलकर प्रतिदिन तीन बार पीना चाहिए।
अगर नाक से लगातार खून बह रहा हो तो 30 ग्राम फिटकरी को 100 मिलीलीटर पानी में मिलाकर उस पानी में कोई कपड़ा भिगोकर माथे और नाक पर रखने से नाक से खून बहना रुक जाता है।
गाय के कच्चे दूध के अन्दर फिटकरी को मिलाकर सूंघने से नाक से खून बहना बंद हो जाता है।
मुंह का लिबलिबापन: काला नमक और फिटकरी समान मात्रा में मिलाकर पीसकर इसके पाउडर से मंजन करने से दांतों और मुंह का लिबलिबापन दूर हो जाता है।
आंखों में दर्द: एक ग्राम फिटकरी, 40 ग्राम गुलाब जल में भिगोकर शीशी में भर लें। इसकी दो-दो बूंद आंखों में प्रतिदिन डालें। इससे आंखों का दर्द, कीचड़ तथा लाली आदि दूर जाएगी। रात को सोते समय आंखों में डालने से तरावट रहती है। इसे रोजाना डाल सकते हैं।
उंगुलियों की सूजन: पानी में ज्यादा काम करने से जाड़ों में उंगुलियों में सूजन या खाज हो जाए तो पानी में फिटकरी उबालकर इससे उंगुलियों को धोने से लाभ होता है
पायरिया, मसूढ़ों में दर्द, सूजन, रक्त आना: एक भाग नमक, दो भाग फिटकरी बारीक पीसकर मसूढ़ों पर प्रतिदिन तीन बार लगायें। फिर एक गिलास गर्म पानी। में पांच ग्राम फिटकरी डालकर हिलाकर कुल्ले करें। इससे मसूढ़े व दांत मजबूत होंगे। इससे रक्त आना और मवाद का आना बंद हो जाएगा।
दांतों का दर्द: भुनी फिटकरी, सरसों का तेल, सेंधानमक, नौसादर, सांभर नमक 10-10 ग्राम तथा तूतिया 6 ग्राम को मिलाकर बारीक पीसकर कपड़े से छान लें। इससे दांतों को मलने से दांतों का दर्द, हिलना, टीस मारना, मसूढ़ों का फूलना, मसूढ़ों से पीव का निकलना तथा पायरिया रोग ठीक होता है।
Fitkari को बारीक पीसकर पॉउडर बना लें। इससे प्रतिदिन मंजन करने से दांतों का दर्द जल्द ठीक होता है।
Fitkari को गर्म पानी में घोलकर लगातार कुल्ला करने से दांत में हो रहे तेज दर्द से जल्द आराम मिलता है।
भुनी फिटकरी 1 ग्राम, कत्था 1.5 ग्राम तथा भुना तूतिया 240 मिलीग्राम इन सबको बारीक पीस छानकर मंजन की तरह बना लें। इसे प्रतिदिन सुबह-शाम इस मंजन से दांतों को मलें। इससे दांत मजबूत होते हैं।
दांत में छेद हो, दर्द हो तो Fitkari रूई में रखकर छेद में दबा दें और लार टपकाएं दांत दर्द ठीक हो जाएगा।
मलेरिया बुखार: एक ग्राम Fitkari , दो ग्राम चीनी में मिलाकर मलेरिया बुखार आने से पहले दो-दो घंटे से दो बार दें। मलेरिया नहीं आएगा और आएगा तो भी कम। फिर जब दूसरी बार भी मलेरिया आने वाला हो तब इसी प्रकार से दे देते हैं। इस प्रयोग के दौरान रोगी को कब्ज नहीं होनी चाहिए। यदि कब्ज हो तो पहले कब्ज को दूर करें।
लगभग 1 ग्राम Fitkari को फूले बताशे में डालकर उसे बुखार आने से 2 घंटे पहले रोगी को खिलाने से बुखार कम चढ़ता है।
लगभग 1 ग्राम Fitkari में 2 ग्राम चीनी मिलाकर मलेरिया बुखार आने से पहले 2-2 घण्टे के अंतराल में 2-2 बार दें। इससे मलेरिया बुखार कम होकर उतर जाता है।
फूली हुई फिटकरी के चूर्ण में 4 गुना पिसी हुई चीनी अच्छी तरह मिला लें। इसे 2 ग्राम की मात्रा में गुनगुने पानी के साथ 2-2 घंटे के अंतर पर 3 बार लें। इससे मलेरिया बुखार में लाभ होता है।
दस्त और पेचिश: फिटकरी 20 ग्राम और अफीम 3 ग्राम को पीसकर मिला लें। सुबह-शाम इस चूर्ण को दाल के बराबर पानी के साथ रोगी को पिलाएं इससे दस्तों में लाभ होगा। फिर तीन घंटे बाद ईसबगोल की भूसी के साथ दें तो पेचिश बंद हो जाएगी और खून का आना भी बंद हो जाएगा।
120 मिलीग्राम Fitkari को जलाकर शहद के साथ एक दिन में 4 बार पीने से खूनी दस्त और पतले दस्त का आना बंद हो जाता है। खाने में साबूदाने की खीर या जौ का दलिया लें।
1 ग्राम फिटकरी को 1 कप छाछ के साथ एक दिन में 3 बार पीने से गर्मी के कारण आने वाले खूनी दस्तों में लाभ मिलता है।
20 ग्राम फिटकरी और 3 ग्राम अफीम को मिलाकर पीसकर चूर्ण बनाकर रख दें, फिर इस बने चूर्ण को थोड़े से पानी के साथ पीने से दस्त में लाभ मिलता है।
Fitkari को भूनकर लगभग 2 ग्राम बेल के रस में मिलाकर पीने से लाभ मिलता है।
भुनी हुई Fitkari को गुलाब के जल के साथ मिलाकर पीने से खूनी दस्त आना बंद हो जाता है।
आंतरिक चोट: चार ग्राम Fitkari को पीसकर आधा किलो गाय के दूध में मिलाकर पिलाने से लाभ प्राप्त होता है।
सूजाक: सूजाक में पेशाब करते समय जलन होती है। इसमें पेशाब बूंद-बूंद करके बहुत कष्ट से आता है। इतना अधिक कष्ट होता है कि रोगी मरना पसन्द करता है। इसमें 6 ग्राम पिसी हुई फिटकरी एक गिलास पानी में घोलकर पिलाएं। कुछ दिन पिलाने से सूजाक ठीक हो जाता है।
साफ पानी में पांच प्रतिशत फिटकिरी का घोल बनाकर लिंग धोना चाहिए।
फिटकरी, पीला गेरू, नीलाथोथा, हराकसीस, सेंधानमक, लोध्र, रसौत, हरताल, मैनसिल, रेणुका और इलायची इन्हें बराबर लेकर बारीक कूट पीस छान लें। इस चूर्ण को शहद में मिलाकर लेप करने से उपदंश के घाव ठीक हो जाते हैं।
सूखी खांसी: लगभग 10 ग्राम भुनी हुई हुई फिटकरी तथा 100 ग्राम चीनी को बारीक पीसकर आपस में मिला लें और बराबर मात्रा में चौदह पुड़िया बना लेते हैं। सूखी खांसी में एक पुड़िया रोजाना 125 मिलीलीटर गर्म दूध के साथ सोते समय लेना चाहिए। इससे सूखी में बहुत लाभ मिलता है।
गीली खांसी: 10 ग्राम भुनी हुई फिटकरी और 100 ग्राम चीनी को बारीक पीसकर आपस में मिला लें और बराबर मात्रा में 14 पुड़िया बना लें। सूखी खांसी में 125 ग्राम गर्म दूध के साथ एक पुड़िया प्रतिदिन सोते समय लेना चाहिए तथा गीली खांसी में 125 मिलीलीटर गर्म पानी के साथ एक पुड़िया रोजाना लेने से गीली खांसी लाभ होता है।
फिटकरी को पीसकर लोहे की कड़ाही में या तवे पर रखकर भून लें। इससे फिटकरी फूलकर शुद्ध हो जाती है। इस भुनी हुई फिटकरी का कई रोगों में सफलतापूर्वक बिना किसी हानि के उपयोग किया जाता है। इससे पुरानी से पुरानी खांसी दो सप्ताह के अन्दर ही नष्ट हो जाती है। साधारण दमा भी दूर हो जाता है। गर्मियों की खांसी के लिए यह बहुत ही लाभकारी है।
श्वास, दमा: आधा ग्राम पिसी हुई Fitkari शहद में मिलाकर चाटने से दमा, खांसी में आराम आता है। एक चम्मच पिसी हुई Fitkari आधा कप गुलाब जल में मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से दमा ठीक हो जाता है।
एक गांठ सोंठ, सफेद फिटकरी का फूला दो ग्राम, हल्दी एक गांठ, 5 कालीमिर्च को चीनी में मिलाकर खाने से श्वास और खांसी दूर हो जाती है। बारहसिंगा की भस्म 2 ग्राम, भुनी हुई फिटकरी एक ग्राम, मिश्री 3 ग्राम मिलाकर पानी से सुबह के समय पांच दिनों तक लगातार सेवन करना चाहिए। इससे श्वास रोग नष्ट हो जाता है।
आग पर फुलाई हुई फिटकरी 20 ग्राम तथा मिश्री 20 ग्राम इन दोनों को पीसकर रख लें। इस चूर्ण को 1 या 2 ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन सुबह के समय सेवन करने से श्वास रोग नष्ट हो जाता है।
फूली हुई फिटकरी 120 मिलीग्राम की मात्रा में मुंह में डाल लें और चूसते रहें। इससे न कफ बनता है और न ही दमा रोग होता है।
फूली हुई Fitkari और मिश्री 10-10 ग्राम पीसकर रख लेते हैं। इसे दिन में एक-दो बार डेढ़ ग्राम की फंकी ताजा पानी के साथ लेना चाहिए। इससे पुराना दमा भी ठीक हो जाता है। दूध, घी, मक्खन, तेल, खटाई, तेज मिर्च मसालों से परहेज रखना चाहिए। मक्खन निकला हुआ मट्ठा तथा सब्जियों के सूप (रस) आदि लेना चाहिए।
पिसी हुई Fitkari एक चम्मच, आधा कप गुलाबजल में मिलाकर सुबह-शाम पीने से दमा ठीक हो जाता है।
गर्भपात: पिसी हुई Fitkari चौथाई चम्मच एक कप कच्चे दूध में डालकर लस्सी बनाकर पिलाने से गर्भपात रुक जाता है। गर्भपात के समय दर्द, रक्तस्राव हो रहा हो तो हर दो-दो घंटे से एक-एक खुराक दें।
बांझपन: मासिक-धर्म ठीक होने पर भी यदि सन्तान न होती हो तो रूई के फाये में Fitkari लपेटकर पानी में भिगोकर रात को सोते समय योनि में रखें। सुबह निकालने पर रूई में दूध की खुर्चन सी जमा होगी। फोया तब तक रखें, जब तक खुर्चन आती रहे। जब खुर्चन आना बंद हो जाए तो समझना चाहिए कि बांझपन रोग समाप्त हो गया है।
योनि संकोचन: बांझपन की तरह योनि में रूई का फाया रखें तथा Fitkari पानी में घोलकर योनि को दिन में तीन बार धोएं। इससे योनि सिकुड़कर सख्त हो जाएगी और योनि का ढीलापन समाप्त हो जाएगा।
Fitkari 30 ग्राम और 10 ग्राम माजूफल को लेकर अच्छी तरह पीसकर चूर्ण बना लें, फिर इस चूर्ण को मलमल के कपड़े में डालकर पोटली बनाकर सोने से पहले रात को योनि में रखने से योनि का ढीलापन दूर होकर सिकुड़ जाती है।
2 ग्राम फिटकरी को 80 मिलीलीटर पानी में घोलकर योनि को धोने से योनि की आकृति कम यानी योनि सिकुड़ने लगती है।
कान में चींटी चली जाने पर: कान में चींटी चली जाने पर कान में सुरसरी हो तो Fitkari को पानी में घोलकर पीने से लाभ मिलता है।
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Source : http://dkgoyal.com/%E0%A4%AB%E0%A4%BF%E0%A4%9F%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%94%E0%A4%B7%E0%A4%A7%E0%A5%80%E0%A4%AF-%E0%A4%8F%E0%A4%B5%E0%A4%82-%E0%A4%86%E0%A4%AF%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A5%8D/

aajtak.in [Edited by: भूमिका राय]
नई दिल्ली, 10 दिसम्बर 2015 | अपडेटेड: 13:32 IST

हम सभी के घरों में अजवायन एक प्रमुख मसाले के रूप में इस्तेमाल किया जाता है. पर आपको शायद ही पता हो कि ये एक प्राकृतिक औषधि भी है. आप चाहें तो कई छोटी-छोटी सामान्य बीमारियों का इलाज अजवायन की मदद से कर सकते हैं. अच्छी बात ये है कि इसका फायदा बड़े और छोटे दोनों को समान रूप से होता है.

अजवायन को इस्तेमाल करने का तरीका:
अजवायन का पूरा फायदा लेने के लिए इसे पानी में उबाल लेते हैं. अगर आप चाहें तो इसे यूं भी इस्तेामल कर सकते हैं लेकिन इसके पानी का इस्तेमाल करना ज्यादा फायदेमंद होता है. इसका पानी बनाने के लिए एक चम्मच अजवायन को एक कप पानी में उबाल लें. जब ये पानी आधा रह जाए और पानी मटमैला दिखने लगे तो गैस बंद कर दें. इस पानी को छान लें. जब ये ठंडा हो जाए तो इसे इस्तेमाल करें.

अजवायन के फायदे:

1. अगर आप मोटापे की समस्या से जूझ रहे हैं तो अजवायन का पानी पीना आपके लिए बहुत फायदेमंद रहेगा. ये चर्बी को गलाने का काम करता है जिससे बहुत जल्दी वजन घट जाता है.
2. अगर आपको पाचन से जुड़ी कोई समस्या है तो अजवायन का पानी आपके लिए किसी वरदान से कम नहीं.अजवायन का पानी पीने से कब्ज और गैस की समस्या में राहत मिलती है.
3. अजवायन का पानी दर्द निवारक की तरह काम करता है. अगर आपको दांत दर्द की तकलीफ है तो अजवायन के पानी से गार्गल करना आपके लिए फायदेमंद रहेगा. साथ ही इसके इस्तेमाल से मुंह की दुर्गंध भी दूर हो जाती है.
4. पीरियड्स के दौरान दर्द और ऐंठन की समस्या से राहत पाने के लिए भी अजवायन का पानी बहुत फायदेमंद होता है. इसमें एंटी-बैक्टीरियल तत्व होते हैं जो पेट के इंफेक्शन को दूर करने में मददगार होता है.
5. अगर आपको हल्की सर्दी हो रखी है तो भी अजवायन के पानी से गार्गल करना फायदेमंद रहता है. सर्दी दूर करने के लिए ग्रामीण इलाकों में लोग अजवायन का धुंआ भी लेते हैं.

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AdminJune 5, 2016

अजवायन का प्रयोग घरों में ना केवल मसाले के रूप में ही किया जाता है बल्‍कि छोटी-मोटी पेट की बीमारियां भी इसके सेवन से दूर हो जाती हैं। खाना खाने के बाद हाजमा बेहतर बनाना हो तो इसका चूरन बना कर खाइये और फिर फायदा देखिये। वैसे तो अजवायन बड़ी ही काम की चीज़ है मगर इसका एक फायदा मोटापे को भी कम करने के काम आता है। जी हां, यह बात काफी कम लोग जानते हैं कि अजवायन का पानी रोज सुबह खाली पेट पीने से मोटापा प्राकृतिक रूप से कम हो जाता है। मोटापा कम करने के लिये अक्‍सर लोग गरम पानी और नींबू पीते हैं, जिससे शरीर के विशैले तत्‍व बाहर निकलते हैं ना कि वजन में कमी आती है।

कई बीमारियों में लाभकारी अजवायन का पानी-

पाचन क्रिया बेहतर

अजवायन में थायमॉल (thymol) मौजूद होता है। दुनिया में सबसे अधिक थायमॉल वाला पौधा अजवायन का ही होता है। ये केमिकल गेस्ट्रिक द्रव्यों को बाहर निकालने में पेट की मदद करता है, जिससे की पाचन क्रिया आसान हो जाती है। अपच, मतली और शिशुओं के पेट दर्द जैसी समस्याओं में इससे मदद मिलती है।

अजवायन का प्रयोग घरों में ना केवल मसाले के रूप में ही किया जाता है बल्‍कि छोटी-मोटी पेट की बीमारियां भी इसके सेवन से दूर हो जाती हैं। खाना खाने के बाद हाजमा बेहतर बनाना हो तो इसका चूरन बना कर खाइये और फिर फायदा देखिये। वैसे तो अजवायन बड़ी ही काम की चीज़ है मगर इसका एक फायदा मोटापे को भी कम करने के काम आता है। जी हां, यह बात काफी कम लोग जानते हैं कि अजवायन का पानी रोज सुबह खाली पेट पीने से मोटापा प्राकृतिक रूप से कम हो जाता है। मोटापा कम करने के लिये अक्‍सर लोग गरम पानी और नींबू पीते हैं, जिससे शरीर के विशैले तत्‍व बाहर निकलते हैं ना कि वजन में कमी आती है।

कई बीमारियों में लाभकारी अजवायन का पानी-

पाचन क्रिया बेहतर

अजवायन में थायमॉल (thymol) मौजूद होता है। दुनिया में सबसे अधिक थायमॉल वाला पौधा अजवायन का ही होता है। ये केमिकल गेस्ट्रिक द्रव्यों को बाहर निकालने में पेट की मदद करता है, जिससे की पाचन क्रिया आसान हो जाती है। अपच, मतली और शिशुओं के पेट दर्द जैसी समस्याओं में इससे मदद मिलती है।

वजन घटाने में मददगार

अजवायन न सिर्फ आपकी पाचन क्रिया को बेहतर करता है बल्कि आपके मेटाबॉलिज़्म को भी तेज़ी देता है, जिससे कि आपको वजन घटाने में मदद मिलती है।

सिरदर्द और कंजेस्शन से छुटकारा

अजवायन का पानी उबालने पर या उसका पानी पीते हुए जो उससे भाप मिलती है उससे सिरदर्द और नाक के कंजेस्शन (congestion) में काफी राहत मिलती है।ऐसा इसलिए होता है क्योंकि अजवायन में बहुत सारे वाष्पशील पदार्थ होते हैं जो कि उबाले जाने पर भाप बनकर उड़ते हैं।जब आप इस भाप को अंदर लेते हैं तो आपको सिरदर्द और जुकाम से भी राहत मिलती है।

मतली से राहत

अजवायन के पानी से मतली भी ठीक की जा सकती है। कई मामलों में, इसको पीने से लगातार आ रहीं उल्टियां भी रूक जाती हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि अजवायन में बहुत अधिक प्रभावी एंटीबैक्टीरियल तत्व होते हैं जो कि पेट से बैक्टीरिया इंफेक्शन को दूर करते हैं।

दांद दर्द करता है दूर

अजवायन दांद दर्द को दूर करने और मुंह को स्वस्थ बनाए रखने में बहुत मददगार होती है। आयुर्वेदिक डॉक्टर ये सलाह देते हैं कि दांत दर्द होने पर अजवायन के पानी से कुल्ला करें। अजयावय में मौजूद थायमोल (thymol) दर्द से राहत दिलाता है और मुंह के स्वास्थ्य का ख्याल रखता है।

दूसरी ओर अजवायन का पानी पीने से शरीर का मेटाबॉलिज्‍म बढ़ता है जिसकी वजह से कार्ब तथा फैट बर्न होने की प्रक्रिया शुरु हो जाती है। तो अगर आप भी अपने बढ़ते हुए वजन से परेशान है तो, कुछ दिनों तक इस नुस्खे को आजमाइये और असर देखिये। आइये जानते हैं अजवान का पानी बनाने की विधि और रिजल्‍ट पाने के लिये किन-किन चीज़ों से परहेज रखना है।

ऐसे बनाएं अजवायन का पानी

1. कैसे तैयार करें अजवाय का पानी
2. 50 ग्राम अजवायन लें (आप चाहें तो 25 ग्राम भी ले सकते हैं पर 50 ग्राम ज्यादा प्रभाव शाली है)
3. अजवायन को 1 गिलास पानी में रातभर के लिये भिगो कर छोड़ दें और फिर सुबह पानी को छान लें।
4. उसके बाद पानी में 1 चम्मच शहद मिक्स करें और सुबह खाली पेट पी लें।
5. यदि आप चाहें तो उसी अजवायन को धूप मे सुखा कर फिर से दूसरे दिन भी प्रयोग कर सकते हैं। लेकिन तीसरे दिन आपको इर्न अजवायन का प्रयोग करना होगा।
6. अजवायन के पानी को 45 दिन लगातार पियें, आपको फायदा जरुर मिलेगा। वैसे तो आपको इसका असर मात्र 15 दिनों में ही दिखने लगेगा पर अगर प्रभावी परिणाम चाहिये तो, 45 दिन लगेंगे। वजन कम होना आपके शरीर के प्रकार पर भी निर्भर करेगा। इस पानी को पीने से आपका 5 किलो वजन कम होगा पर अगर आप किसी बीमारी से पीड़ित नहीं होंगे तो।

अच्छा रिजल्ट पाने के लिये कुछ जरुरी बातों का पालन करें :-

  • 1. चावल पूरी तरह से छोड़ दें रोटियों का संख्या घटा दें। मतलब अगर आप दो राटी खाते हैं तो उसे आधा कर दें। 2. आलू, शक्कर, फास्ट फूड और ऑइली फूड ना खाएं।
  • 3. भोजन करने के एक घंटे तक पानी ना पियें।


यह उपचार खास तौर पर उन महिलाओं के लिये है जिन्हें पीरियड्स की समस्या है और जिसकी वजह से उनका वजन बढ़ जाता है।
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सदियों के अजवाइन का इस्तेमाल कई तरह के घरेलू नुस्ख़ों के लिए किया जाता रहा है। उदाहरण के लिए एसिडिटी के लिए एन्टासिड खाने के जगह पर अजवाइन खाना तो लोग सामान्यतः सेफ मानते हैं। यहाँ तक कि अर्थराइटिस होने पर भी अजवाइन का पेस्ट जोड़ों पर लगाने जैसा घरेलू इलाज दर्द को कम करने में असरदार रूप से काम करता है। जिन लोगों को बदहजमी का प्रॉबल्म होता है वह तो अजवाइन बिना सोचे समझे दिन में कितनी बार खाते हैं उसके बारे में कहना मुश्किल है। अजवाइन में थाइमोल नाम का तत्व होता है जो पीएच लेवल को नॉर्मल रखने के साथ-साथ गैस्ट्रिक जूस के निष्कासन से खाना को जल्दी हजम करवाने में मदद करता है। ये तो अजवाइन का एक पहलू है उसके दूसरे पहलू के बारे में जानकर आप आश्चर्य में पड़ जायेंगे। पढ़े-

अजवाइन के साइड-इफेक्ट्स

लेकिन डायटीशियन और न्यूट्रीशनिस्ट नेहा चांदना का कहना है कि अजवाइन को खाना तब तक स्वास्थ्य या सेहत के दृष्टि से सेफ है जब तक आप इसको सीमित मात्रा में ले रहे हैं। यानि अजवाइन का सेवन आप दिन में कम से कम 10 ग्राम तक ही ले सकते हैं। इससे ज्यादा मात्रा में अजवाइन खाने से आपके सेहत को फायदा पहुँचने से जगह पर नुकसान ही पहुँचेगा। क्यों आश्चर्य में पड़ गए न! अतिरिक्त मात्रा में अजवाइन लेने से एसिडिटी कम होने के जगह पर बढ़ सकती है, सिर दर्द, उल्टी, पेट में जलन जैसा अनुभव और अल्सर जैसे प्रॉबल्म्स का सामना करना पड़ सकता है। यहाँ तक कि प्रेगनेंट महिलायें भी अजवाइन का सेवन कब्ज़ और एसिडिटी की समस्या के लिए कर तो सकती है लेकिन दिन में 10 ग्राम से ज्यादा नहीं।
ध्यान देने की बात ये है कि छह महीने से बड़े शिशु या बच्चों के हजम शक्ति को बढ़ाने के लिए आप उनको एक छोटा चम्मच गुड़ और अजवाइन का पाउडर दे सकते है। इससे उनका डाइजेस्टिव सिस्टेम बेहतर हो जाता है, लेकिन सीमित मात्रा में।
कैसे करें इसका सेवन-
अजवाइन को पानी में डालकर उबाल लें। फिर उस पानी को छानकर पियें या गुड़ के साथ भी इसको ले सकते हैं।
अजवायन एक औषधि है। जिसका उपयोग कई रोगों का इलाज करने के लिए होता है। इसका चूर्ण बनाकर सेंधानमक मिलाने से पेट की तकलीफों से चुरंत आराम मिलता है। खासकर पेट दर्द, मन्दाग्नि, अपच, अफरा, अजीर्ण और दस्त में अजवायन काफी लाभकारी है। जिसका सेवन दिन में कम से कम तीन बार करना चाहिए।
अजवाइन के फायदे
अजवाइन में 7 प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट, 21 प्रतिशत प्रोटीन, 17 प्रतिशत खनिज, 7 प्रतिशत कैल्शियम, फॉस्फोरस, लौह, पोटेशियम, सोडियम, रिबोफ्लेविन, थायमिन, निकोटिनिक एसिड अल्प मात्रा में होता है। आंशिक रूप से आयोडीन, शर्करा, सेपोनिन, टेनिन, केरोटिन और 14 प्रतिशत तेल पाया जाता है।
कुछ घरेलू उपचार
  1. *100 तोला अजवायन के फूल का चूर्ण पानी में मिलाकर घाव पर लगाएं। दाद, खुजली, फुंसियां जैसे चर्मरोग में फायदा होगा। 
  2. *अजवायन के तेल की मालिश से दर्द कम होता है। प्रयोग प्रसव के बाद अग्नि की प्रदिप्त करने और भोजन पचाने, वायु एवं गर्भाशय को शुद्ध करने के लिए अजवायन काफी लाभदायक है।
  3. *अजवायन के फूल को शक्कर के साथ तीन- चार बार पानी घोलकर से लेने से पित्ती की बीमारी ठीक हो जाती है।
  4. *पेट खराब होने पर अजवाइन को चबाकर खाएं, उसके बाद एक कप गर्म पानी पी लें, पेट ठीक हो जाएगा।
  5. *पेट दर्द होने पर अजवाइन के दाने 10ग्राम, सोंठ 5ग्राम और काला नमक 2 ग्राम को अच्छी तरह मिलाए, फिर मिश्रण का 3 ग्राम गुनगुने पानी के साथ सेवन करें आराम मिलेगा। 
  6. *काले नमक के अजवायन पेट के कीड़े निकाल देती है।
  7. * लीवर की परेशानी होने पर 3ग्राम अजवाइन और आधा ग्राम नमक खाने के बाद लेने से लाभ होगा।
  8. *पेट में गैस होने पर हल्दी, अजवाइन और चुटकीभर काला नमक लेने से जल्दी आराम मिलता है।
  9. *पथरी की समस्या होने पर 5ग्राम ग्राम जंगली अजवाइन को पानी के साथ निगल लें। ऐसा महीने में पांच दिन करें, तो पथरी नहीं बनेगी।
  10. *अजवाइन को भूनकर कपड़े में लपेट ले, फिर रात में तकिए के नजदीक रखें, इससे दमा, सर्दी, खांसी के रोगियों को अच्छे से नींद आएगी।
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Sonu Singla 10:14:00 pm
"अजवाइन के गुण/ फायदे, अजवाइन का पानी के लाभ, अजवाइन का तेल/ नुकसान, अजवायन खाने के फायदे"
अजवायन-अजवायन का बीज छोटा,दानेदार और बारीक़ होता है।अजवायन के बीज से जो तेल या अर्क निकाला जाता है उसे सर्जरी के बाद एंटी सेप्टिक मरहम के तौर पर लगाया जाता है। इजिप्ट और अफगानिस्तान को अजवायन का घर कहा जाता है। अजवायन के पोधे को घर में लगाना भी बहुत आसान है। अक्टूबर और नवंबर इस पोधे को उगाने के लिए ज्यादा लाभदायक होते है।
खाने में इसका उपयोग-
तड़का एक खाना पकाने की विधि, जिसमें खाना पकाने के लिए तेल गरम किया जाता है उसमे पूरे मसाले डाले जाते है। भारतीय खाना पकाने में अजवाइन अक्सर थाली में तड़का का हिस्सा है। यह कम मात्रा में प्रयोग किया जाता है और लगभग हमेशा पकाया करते थे। यह अपनी मजबूत, प्रभावी स्वाद की वजह से प्रयोग होता है।अजवाइन भी सब्जियों के व्यंजन (अपने विशिष्ट स्वाद के लिए) और अचार (अपने संरक्षक के गुणों के लिए) में प्रयोग किया जाता है।
साइज: बहुत छोटा
रंग: भूरा हरे रंग के लिए पीले रंग
स्वाद: गर्म और तीखे स्वाद
पत्ते: जैसे छोटे पंख
खुशबू: मजबूत गंध, अजवायन के फूल की तरह
खुजली, फोड़े और पिम्पल्स :
• यह एक शांत, अंधेरे और सूखी जगह में एक कसकर मोहरबंद ग्लास कंटेनर में ताजा रखा जा सकता है।
• यह एक साल के लिए ताजा रहेगी।
आकार: ओवल और चोटी वाला।
अजवाइन और इसके तेल के पोषण का महत्व:
कैरम बीज 100 ग्राम प्रति होता है:
प्रोटीन -17.1%
वसा - 21.8%
खनिज-7.9%
फाइबर-21.2%
कार्बोहाइड्रेट-24.6%
इसमें कैल्शियम, राइबोफ्लेविन, फास्फोरस, लोहा और नियासिन भी शामिल हैं। इसका तेल या तो बेरंग या रंग में पीला भूरे रंग का है। कैरम तेल व्यापक रूपमें कीटाणु नाशक और कवकनाशी के रूप में प्रयोग किया जाता है।
अजवाइन का लाभ:
1. अम्लता:
एक चम्मच जीरा के साथ एक चम्मच अजवाइन का मिश्रण अदरक पाउडर के साथ हर रोज ले ।यह प्राकृतिक रूप से अपच समस्याओं का इलाज करने के लिए एक सबसे अच्छा तरीका है। यह अम्लता और एसिड समस्या के इलाज में उपयोगी है।
2. कब्ज:
अजवाइन पाचन संबंधी समस्याओं के इलाज के लिए सबसे अच्छा उपाय है। इसलिए इसे कब्ज से भी छुटकारा पाने के लिए उपयोग कर सकते हैं। अजवाइन का कोई साइड इफेक्ट नहीं है।
3. गुर्दा विकार और गुर्दे की पत्थरी :
अजवाइन गुर्दे की पत्थरी का इलाज करने के लिए बहुत उपयोगी हैं। इसे गुर्दा रोग के इलाज के लिए और दर्द को कम करने के लिए उपयोग किया जा सकता है।
4. अस्थमा:
गर्म पानी के साथ अजवाइन लेने से शरीर से खांसी और बलगम को निष्कासित किया जा सकता है। यह ब्रोंकाइटिस और अस्थमा के इलाज के लिए बहुत उपयोगी है। इसे दिन में दो बार गुड़ के साथ सेवन किया जा सकता है। आप को निश्चय ही लाभ होगा।
5. जिगर और गुर्दे की खराबी :
अजवाइन का पानी पीने से अपच और संक्रमण की वजह होने वाले आंतों में दर्द का सफल इलाज किया जा सकता है।अजवाइन जिगर और गुर्दे की खराबी के इलाज के लिए बहुत फायदेमंद है।
6. मुँह समस्याएँ
अजवाइन दांत दर्द का इलाज करने के लिए असरकारक सिद्ध किया गया है। लौंग के तेल में एक हिस्सा अजवाइन का तेल होता है। दांत दर्द, मुँह से बुरी गंध और क्षय के इलाज के लिए अजवाइन पावडर और पानी के साथ कुल्ला करे । मौखिक स्वच्छता बनाए रखने के लिए यह सबसे अच्छा और कारगर तरीका है।
7. ठंड लगने पर उपयोगी --
अजवाइन बंद नाक आदि सर्दी के लक्षणों का इलाज करने के लिए सबसे अच्छा प्राकृतिक तरीका है। राहत के लिए गर्म पानी में अजवाइन डालकर भाप ले,नाक तुरंत खुल जाएगी और सर्दी में भी आराम होगा।
अजवाइन पीसकर गुनगुने पानी के साथ इसका पेस्ट बना लें। चेहरे या शरीर के किसी भी प्रभावित हिस्से पर इस पेस्ट को लगाये । इसके अलावा सबसे अच्छा परिणाम के लिए अजवाइन के पानी से प्रभावित अंग को धोने की कोशिश करो। यह सूजन , फोड़े, पिम्पल्स या एक्जिमा में बहुत असरकारक है। नींबू के रस के साथ अजवाइन बीज का पेस्ट बना लें। यह सूजन को दूर करने में सहायक होगा।
8. अत्यधिक रक्तस्राव और अनियमित मासिक धर्म:
इस समस्या में महिलाओं को अजवाइन का पानी पीने से बहुत लाभ होता है। रात में पानी से भरे मिट्टी के बर्तन में मुट्ठी भर अजवाइन भिगो दे । सुबह उन्हें पीसकर पी लो । धीरे धीरे आराम हो जायेगा।
9 पाचन:
अजवाइन पाचन समस्याओं में भी बहुत लाभ पहुंचाती है। चीनी के साथ 1 बड़ा चम्मच अजवाइन चबाने से अपच से छुटकारा मिलेगा। यह चीनी के बिना भी सेवन किया जा सकता है।
10 गठिया:
अजवाइन का तेल गठिया के दर्द के इलाज के लिए एक बहुत ही उपयोगी असरकारक नुस्खा है। अजवाइन के तेल के साथ नियमित रूप से प्रभावित जोड़ों पर मालिश करने से दर्द से राहत मिलती है।और गठिया रोग ठीक होने लगता है।
11. दस्त:
अजवाइन पेचिश या दस्त का इलाज करने के लिए एक प्राकृतिक उपचार है। एक गिलास पानी में अजवाइन की एक मुट्ठी उबाल लें।ठंडा करके छानकर इसे दिन में दो बार पिए,तुरंत आराम मिलेगा। यह अपच और पेचिश के इलाज के लिए एक अचूक उपाय है।
12. वायरल संक्रमण:
अजवाइन पाउडर के साथ दही का मिश्रण बना ले । एक पूरी रात के लिए चेहरे पर इस पेस्ट को लगाने से मुँहासे और निशान को हल्का कर सकते है। अच्छे परिणाम के लिए सुबह गुनगुने पानी से धो लें।
13. पेट दर्द में आराम:
अजवाइन को नमक के साथ मिला कर गुनगुने पानी से लो। पेट दर्द में तुरंत आराम मिल जायेगा। यह बहुत अचूक नुस्खा है।
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अजवायन एक ऐसी चीज या औषधि है, जो अकेली ही एक ऐसी है जो कि सौ प्रकार के खाद्य पदार्थों को पचाने वाली होती है।

अनेक प्रकार के गुणों से भरपूर अजवायन पाचक रूचि कारक, तीक्ष्ण, कढवी, अग्नि प्रदीप्त करने वाली, पित्तकारक तथा शूल, वात, कफ, उदर आनाह, प्लीहा, तथा क्रमि का नाश करने वाली होती है।

अति गर्म प्रकृति वालों के लिए यह हानिकारक होती है।
इसकी खेती सारे देश में होती है।

अजवायन का उपयोग औषिध के रूप में, मुख्यत: उदर एवं पाचन से समबन्धित विकारों तथा वात व्याधियों को दूर करने में बहुत गुणकारी होती है।

अजवायन में लाल मिर्च की तेजी, राई की कटुता तथा हींग और लहसुन की वातनाशक गुण एक साथ मिलते हें। इस लिए यह गुणों का भंङार है । इसी लिए यह उदर शूल, गैस, वायुशोला, पेट फूलना, वात प्रकोप आदि को दूर करता है। इसी कारण इसे घर पर छुपा हुआ वेद्य कहा गया है।

अजवायन की पत्ती का दिलकश स्वाद होता है। इसी कारण इसका (पत्ती) इतालवी व्यंजनों में, जेसे पिज्जा पास्ता आदि। अजवायन की पत्ती में एंटी बैक्टीरियल गुण है जो कि संक्रमण से लड़ने में मदद करता है। अजवायन की ताजा पत्ती में प्रचुर मात्रा में पोषक तत्व और विटामिन होते है.
विटामिन सी, विटामिन ए, लोहा, मैंगनीज और कैल्शियम और साथ ही युक्त ओमेगा -3 फैटी एसिड का एक अच्छा स्रोत है। अजवायन से कैलशियम, फासफोरस, लोहा सोडियम व पोटेशियम जैसे तत्व मिलते हैं।
अजवायन के लाभ-अजवायन के गुण-अजवायन का औषिध
के रूप में उपयोग (THE BENEFITS OF PARSLEY)
  1. यह एक उत्कृष्ट एंटीऑक्सिडेंट है, अजवायन मोटापे को कम करने में भी मदद करती है। सर्दियों के मौसम में सर्द से बचने के लिए अजवायन एक सफल औषधि है। जंगली अजवायन की पत्ती का तेल श्रेष्ट माना गया है प्रतिरक्षा प्रणाली को दृढ़ करता है, श्वसन क्रिया को दुरुस्त करता है। जोड़ों और मांसपेशियों का लचीलापन बढाता है और त्वचा को संक्रमण से बचाता है। 
  2. अपच : बरसात के मौसम में पाचन क्रिया के शिथिल पड़ने पर अजवायन का सेवन काफी लाभदायक होता है। इससे अपच को दूर किया जा सकता है।
  3. अजीर्ण : अजवायन, काला नमक, सौंठ तीनों को पीसकर चूर्ण बना लें। भोजन के बाद फाँकने पर अजीर्ण, अशुद्ध वायु का बनना व ऊपर चढ़ना बंद हो जाएगा।
  4. झाईं : खीरे के रस में अजवायन पीसकर चेहरे की झाइयों पर लगाने से लाभ होता है।
  5. शराब उपद्रव नाशक : अधिक शराब पी लेने से अगर व्‍यक्ति को उल्‍टियां आ रहीं हो तो उसे अजवाईन खिलाना बेहतर होगा। इससे उसको आराम मिलेगा और भूंख भी अच्‍छी तरह से लगेगी।
  6. गर्भावस्था में : गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को अजवाइन जरुर खानी चाहिए, क्‍योंकि इससे ना सिर्फ खून साफ रहता है, बल्कि यह पूरे शरीर में रक्त के प्रवाह को संचालित भी करता है।
  7. कान दर्द : कान में दर्द होने पर अजवाइन के तेल की कुछ बूंदे कान में डालने से आराम मिलता है। 
  8. दाद-खा़ज : शरीर में दाने हो जाएं या फिर दाद-खा़ज हो जाए तो, अजवाइन को पानी में गाढ़ा पीसकर दिन में दो बार लेप करने से फायदा होता है। घाव और जले हुए स्थानों पर भी इस लेप को लगाने से आराम मिलता है और निशान भी दूर हो जाते हैं।
  9. गठिया : गठिया के रोगी को अजवाइन के चूर्ण की पोटली बनाकर सेंकने से रोगी को दर्द में आराम पहुंचता है। अजवाइन का रस आधा कप में पानी मिलाकर आधा चम्मच पिसी सोंठ लेकर ऊपर से इसे पीलें। इससे गठिया का रोग ठीक हो जाता है।
  10. खांसी : अजवाइन के रस में एक चुटकी काला नमक मिलाकर सेवन करें। और ऊपर से गर्म पानी पी लें। इससे खांसी बंद हो जाती है।
  11. गुर्दे का दर्द : गुड़ और पिसी हुई कच्ची अजवाइन समान मात्रा में मिलाकर 1-1 चम्मच रोजाना 4 बार खायें। इससे गुर्दे का दर्द भी ठीक हो जाता है।
  12. रात में पेशाब करने  आदत : जिन बच्चे को रात में पेशाब करने की आदत होती है उन्हें रात में लगभग आधा ग्राम अजवाइन खिलायें।
  13. चेहरे का लेप : 2 चम्मच अजवाइन को 4 चम्मच दही में पीसकर रात में सोते समय पूरे चेहरे पर मलकर लगाएं और सुबह गर्म पानी से साफ कर लें।
  14. मसूढ़ों के रोग : अजवाइन को भून व पीसकर मंजन बना लें। इससे मंजन करने से मसूढ़ों के रोग मिट जाते हैं।
  15. खट्टी डकारें : अजवाइन, सेंधानमक, सेंचर नमक, यवाक्षार, हींग और सूखे आंवले का चूर्ण आदि को बराबर मात्रा में लेकर अच्छी तरह पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को 1 ग्राम की मात्रा में सुबह और शाम शहद के साथ चाटने से खट्टी डकारें आना बंद हो जाती हैं।
  16. जुकाम के साथ हल्का बुखार : देशी अजवाइन 5 ग्राम, सतगिलोए 1 ग्राम को रात में 150 मिलीलीटर पानी में भिगोकर, सुबह मसल-छान लें। फिर इसमें नमक मिलाकर दिन में 3 बार पिलाने से लाभ मिलता है।
  17. दमा : अजवाइन का रस आधा कप इसमें इतना ही पानी मिलाकर दोनों समय (सुबह और शाम) भोजन के बाद लेने से दमा का रोग नष्ट हो जाता है।
  18. मासिक धर्म की पीड़ा : मासिक धर्म के समय पीड़ा होती हो तो 15 से 30 दिनों तक भोजन के बाद या बीच में गुनगुने पानी के साथ अजवायन लेने से दर्द मिट जाता है। मासिक अधिक आता हो, गर्मी अधिक हो तो यह प्रयोग न करें। सुबह खाली पेट 2-4 गिलास पानी पीने से अनियमित मासिक स्राव में लाभ होता है।
  19. एसिडिटी : एसिडिटी की तकलीफ है तो थोड़ा-थोड़ा अजवाइन और जीरा को एक साथ भून लें। फिर इसे पानी में उबाल कर छान लें। इस छने हुए पानी में चीनी मिलाकर पिएं, एसिडिटी से राहत मिलेगी।
  20. पेट दर्द, गैस और अशुद्ध वायु : इसे अदरक (सोंठ) पाउडर और काला नमक 2-2 और 1 के अनुपात में मिलाएं भोजन करने के बाद एक चम्मच चूर्ण गुनगुने पानी के साथ लें तो पेट दर्द व गैस की समस्या में आराम मिलेगा। अशुद्ध वायु का बनना व सर में चढ़ना ख़त्म होगा।
  21. पेट दर्द, दस्त , अपच, अजीर्ण, अफारा तथा मन्दाग्नि : अजवायन पाउडर का एक चम्मच (टी स्पून) ले उसमे एक चुटकी काला नमक मिला कर दिन में दो या तीन बार गुनगुने पानी के साथ सेवन से पेट में दर्द, दस्त , अपच, अजीर्ण, अफारा तथा मन्दाग्नि में लाभकारी होती है।
  22. भूख लगाना : अजवायन, सौंफ, सोंठ और काला नमक को बराबर मात्रा में मिलाकर देसी घी के साथ दिन में तीन बार खाएं। भूख लगने लगेगी ।
  23. मोटापा नाशक : शाम को अजवायन को एक गिलास पानी में भिगोएं सुबह छानकर उस पानी में शहद डालकर पीने से मोटापे को कम करने में मदद होती है।
  24. मसूड़ों की सूजन : अजवायन के तेल की कुछ बूंदें गुनगुने पानी में मिलाकर कुल्ला करने से मसूड़ों की सूजन कम होती है।
  25. खांसी जुकाम में रामबाण : खांसी जुकाम में चुटकी भर काला नमक, आधा चम्मच अजवायन और दो लोंग इन सब को पिसकर गुनगुने पानी के साथ दिन में कई बार पीने से अदभुत लाभ मिलता है। यह रामबाण दवा है।
  26. जमा कफ निकालने हेतु : आधा कप पानी में आधा चम्मच अजवायन और थोड़ी सी हल्दी पाउडर डालकर उबाले और ठंडा करें और इसमें एक चम्मच शहद डालकर पीएं। और गर्म पानी में अजवायन डालकर इसका भाप लें। इस से छाती में जमा कफ निकल जाता है ।
  27. शीत-पित्ती : शीत-पित्ती की बीमारी के लिए अजवायन के फूल को गुड के साथ मिला कर पानी से लेने से पित्ती ठीक होती है। अजवायन का चूर्ण गेरु में मिलाकर शरीर पर मलने से पित्ती में तुरन्त लाभ होता है।
  28. खांसी : बेर के पत्तों और अजवायन को पानी में उबालकर, छानकर उस पानी से गरारे करने पर खांसी में लाभ होता है।
  29. अर्धशिरशूल : अजवायन को पानी में डालकर उबालें। छानकर बार बार थोड़ा-थोड़ा लेते रहने से आधे सिर दर्द में लाभ होता है। रात को कई बार पेशाब आने पर भी इसके सेवन से फायदा होता है।
  30. जोड़ों का दर्द : जोड़ों के दर्द में सरसों के तेल में अजवायन डालकर अच्छे से गर्म करें व छान ले और इससे जोड़ों की मालिश करे इससे आराम होगा।
  31. कृमिनाशक : अजवायन प्रबल कीटनाशक है। आँतों में कीड़े होने पर अजवायन के साथ काले नमक का सेवन करने पर पेट के कीड़े बाहर निकल जाते हैं। अजवायन का चूर्ण और गुड समान मात्रा में मिलकर गोली बनाकर दिन में दो तीन बार खिलाने से पेट के सभी प्रकार के कीडे नष्ट हो जाते है।
  32. कृमिनाशक : एक से दो ग्राम ग्राम अजवायन का चूर्ण छाछ के साथ देने से पेट के कीडे नष्ट होकर मल के साथ बाहर निकल जाते है।
  33. कृमिनाशक : सुबह दस-पन्द्रह ग्राम गुड खाकर दस-पन्द्रह मिनट बाद एक से दो ग्राम अजवायन का चूर्ण बासी पानी के साथ ले। इससे आंतों में मौजूद सब प्रकार के कीडे मर कर मल के साथ बहार निकल जायेंगे।
  34. दस्तावर : अजवायन को रात में चबाकर गरम पानी पीने से सवेरे पेट साफ हो जाता है।
  35. खॉसी और कफ एवं कफ की दुर्गन्ध : अजवायन के फूल को शहद में मिलाकर लेने से खॉसी और कफ में फायदेमंद होता है। इससे कफ की दुर्गन्ध भी खत्म होती है।
  36. चोट सूजन व दर्द : चोट लगने पर अजवायन एवं हल्दी की पुल्टिस बाँधने से चोट की सूजन व दर्द कम होती है।
  37. दस्त : अजवायन का अर्क या तेल 10-15 बूँद बराबर लेते रहने से दस्त बंद होते हैं।
  38. ठंड का बुखार : अजवायन का चूर्ण दो-दो ग्राम की मात्रा में दिन में तीन बार लेने से ठंड का बुखार शान्त होता है।
  39. ब्लडप्रेशर : ब्लडप्रेशर, बाय का दर्द, रक्तचाप और चर्म रोगों, में ऊँगलियों के काम न करने पर अजवायन के फूल एवं गिलोय का अर्क 1-1 ग्राम साथ मिलाकर लेना लाभ दायक होता है।
  40. चर्मरोग : अजवायन के फूल (सफ़ेद दाने के रूप में बाज़ार में उपलब्ध) का चूर्ण पानी में मिलाकर उस घोल से घाव, दाद, खुजली, फुंसियाँ आदि धोने पर ये चर्मरोग नष्ट होते हैं।
  41. प्रसव के बाद : अजवायन का प्रसव के बाद अग्नि की प्रदिप्त करने और भोजन को पचाने, वायु एवं गर्भाशय को शुद्ध करने के लिए सभी परम्परागत भारतीय परिवारों में लड्डू बना कर खिलाया जाने की परंपरा हे। यह चमत्कारी लाभ देता हे। प्रसूति स्त्रियों को अजवायन व गुड मिलाकर देने से भूख बढ़ती है। प्रसव के बाद अजवायन के प्रयोग से गर्भाशय शुद्ध होता है। गर्भाशय पूर्वास्थिती में आ जाता है। दूध ज्यादा बनता है। बुखार व कमर का दर्द ठीक करता है। इससे खराब मासिक चक्र ठीक भी हो जाता हें।
  42. पेट दर्द, जलन, अफारा , और मलमूत्र की रूकावट : अजवायन 10 ग्राम, छोटी हरड़ का चूर्ण 6 ग्राम, सेंधा नमक 3 ग्राम, हींग 3 ग्राम का चूर्ण बनाकर रखें और 3-3 ग्राम की मात्रा में जल के साथ लें तो पेट दर्द, जलन, अफारा , और मलमूत्र की रूकावट दूर होती है।
  43. बदन दर्द : अजवायन चूर्ण गरम पानी के साथ लेने से या अर्क को गुनगुना करके पीने से या इसके तेल की मालिश करने से बदन दर्द ठीक होता है।
  44. शक्तिशाली एंटीबायोटिक, एंटीऑक्सिडेंट और एंटीऑक्सिडेंट : अजवायन की पत्ती माहवारी के विकारों के उपचार, फेफड़ों की समस्याओं और अजीर्ण में और प्रयोग किया जाता है यह शक्तिशाली एंटीबायोटिक और एंटीऑक्सिडेंट भी होता है। अजवायन की पत्ती में प्राकृतिक एंटीसेप्टिक तत्व हंड यह संक्रमण को दूर रखने के महत्वपूर्ण होता है।
  45. किडनी या गुर्दे का दर्द : किडनी या गुर्दे संबंधी परेशानी में एक बड़ा चम्मच जीरा और दो चम्मच अजावयन को पीस कर पाउडर बना लें। इसमें थोड़ा सा काला नमक और एक चम्मच भूरे रंग का सिरका डाले। हर घंटे बाद एक-एक चम्मच इस मिश्रण का लें। दर्द से जल्द ही आराम मिल जाएगा।
  46. हाजमा : दोपहर को भोजन के बाद पिसी 2 - 3 ग्राम अजवायन लेने से खाना आसानी से हजम होता है।
  47. पुरानी खांसी : पान में अजवायन को डाल कर खाने से पुरानी खांसी ठीक होती है।
  48. मालिश : अजवायन को सरसों के तेल में डाल कर पकायें उससे बच्चों को मालिश करें सर्दी-जुकाम में तथा प्रसव उपरांत लाभ होगा।
  49. मसूड़ों में सूजन : मसूड़ों में सूजन होने पर अजवायन के तेल की कुछ बूँदें पानी में मिलाकर कुल्ला करने से सूजन कम होती है।
  50. आधे सिर में दर्द : आधे सिर में दर्द होने पर एक चम्मच अजवायन आधा लीटर पानी में डालकर उबालें। पानी को छानकर रखें एवं दिन में दो-तीन बार थोड़ा-थोड़ा लेते रहने से काफी लाभ होगा।
  51. जोड़ों का दर्द : सरसों के तेल में अजवायन डालकर अच्छी तरह गरम करें। इससे जोड़ों की मालिश करने पर जोड़ों के दर्द में आराम होता है।
  52. चोट के नीले-लाल दाग : चोट लगने पर नीले-लाल दाग पड़ने पर अजवायन एवं हल्दी की पुल्टिस चोट पर बाँधने पर दर्द व सूजन कम होती है।
  53. मुख में दुर्गंध : मुख से दुर्गंध आने पर थोड़ी सी अजवायन को पानी में उबालकर रख लें, फिर इस पानी से दिन में दो-तीन बार कुल्ला करने पर दो-तीन दिन में दुर्गंध खत्म हो जाती है।
स्रोत : http://desi-prescriptions.blogspot.in/2015/10/benefits-of-parsley.html
सिर्फ 1 मिनट में मिलता है दर्द से आराम……….

इस नुस्खे के आगे दवाइयां हैं फेल, क्योंकि सिर्फ 1 मिनट में मिलता है दर्द से आराम
शरीर के किसी भी हिस्से में दर्द हो रहा हैं, तो इस आसान और प्रभावशाली का तरीके को अपनाएं…
जयपुर। संवेदनशीलता की प्राचीन जापानी कला के अनुसार, प्रत्येक उंगली विशेष बीमारी और भावनाओं के साथ जुड़ी होती है। हमारे हाथ की पांचों उंगलिया शरीर के अलग-अलग अंगों से जुड़ी होती हैं। इसका मतलब आपको दर्द नाशक दवाइयां खाने की बजाय इस आसान और प्रभावशाली तरीके का इस्तेमाल करना करना चाहिए। जी हां, शरीर के किसी हिस्से में दर्द हो रहा हो…सिर्फ हाथ की उंगली को रगडऩे से दर्द मिनटों में छू-मंतर हो जाता है।
कैसे दूर होता है…
हमारे हाथ की अलग-अलग उंगलिया अलग अलग बीमारिओं और भावनाओं से जुड़ी होती हैं। शायद आपको पता न हो, हमारे हाथ की उंगलिया चिंता, डर और चिड़चिड़ापन दूर करने की क्षमता रखती है। उंगलियों पर धीरे से दबाव डालने से शरीर के कई अंगों पर प्रभाव पड़ेगा।
अंगूठा
हाथ का अंगूठा हमारे फेफड़ों से जुड़ा होता है। यदि आपकी दिल की धड़कन तेज है, तो हलके हाथों से अंगूठे पर मसाज करें और हल्का-सा खींचे। इससे आपको तुरंत आराम मिलेगा।
तर्जनी
ये उंगली आंतों से जुड़ी होती है। यदि आपके पेट में दर्द है, तो इस उंगली को हल्का-सा रगड़े, दर्द एक मिनट के अंदर गायब हो जाएगा।
बीच की उंगली (मध्यमा)
ये उंगली परिसंचरण तंत्र तथा सर्कुलेशन सिस्टम से जुड़ी होती है। यदि आपको चक्कर या आपका जी घबरा रहा है, तो इस उंगली पर मालिश करने से तुरंत रहत मिलेगी।
तीसरी उंगली (अनामिका)
ये उंगली आपकी मनोदशा से जुड़ी होती है। यदि किसी कारण आपकी मनोदशा अच्छी नहीं है या शांति चाहते हैं, तो इस उंगली को हल्का-सा मसाज करें और खींचें, आपको जल्द ही इस के अच्छे नतीजे प्राप्त हो जाएंगे। आपका मूड ताजगी से खिल उठेगा।
छोटी उंगली
छोटी उंगली का किडनी और सिर के साथ संबंध होता है। यदि आपको सिर में दर्द है, तो इस उंगली को हल्का-सा दबाएं और मसाज करे, आपका सिर दर्द गायब हो जाऐगा। इसे मसाज करने से किडनी भी तंदुरुस्त रहती है।
http://www.patrika.com/news/disease-and-conditions/salvation-from-sudden-pain-number-one-just-massage-the-finger-within-60-seconds-1401133/
TUESDAY, JANUARY 12, 2016

हर जोर का बैग्यानिक नाम है रिलीस कटरा पाटन गुजरातचेहरा चेंजइसकी बेटी हर जाति की होती है इसका उपयोग टूटी हुई हड्डी को जोड़ने में किए जाने के कारण इसका नाम हर जोर है इसको हिंदी में अच्छी संघार के नाम से जाना जाता है संस्कृत में कोशिश टू घंटी किया बंदर बिल्ली इसको कहा जाता है और गुजराती में बेदारी मराठी में कंध वेद बंगाली में हार बंद मराठी में जहाज जो भी कहा जाता है तेलुगु में भववा डबल जी के नाम से उसको जानते हैं यह पौधा पूरे भारतवर्ष में पाया जाता है इस दिल में 46 अंगूर पर घाटे होती है जैसे तू घर का पौधा होता है ठीक उसी तरह यह होता है लेकिन तू हर की चौड़ाई कुछ ज्यादा होती है वह मोटा होता है यह बिल्कुल उंगली के बराबर पतला होता है इसका डंठल करवादी होता है लेकिन इसका सबसे प्रमुख यूज़ जो है यह आंखों के सारे लोगों को खत्म करता है टूटी हड्डी को जोड़ने के लिए इसका उपयोग किस तरह से आप कर सकते हैं सबसे पहले हाथ जोड़ की नर्म लकड़ी का टिकट ले करके उसे बारीक पीसना उसने बराबर मात्रा में उड़द की दाल वन मिला दे उड़द की दाल ही बारीक पीसना और दोनों को मिलाकर किसी भी टूटी हड्डी के ऊपर सिंघाड़ा लेट कपड़ा लपेटकर के कपड़े से बांध देंगे तो हड्डी जोड़ जाती है यह लेप हर तीसरे दिन बदलते तीसरे दिन फिर से ले कर के फिर उसको पांडे की तरह से करने से एक महीने के अंदर ही हड्डी जोड़ जाती है और हड्डी टूटने का जो दर्द होता है वह तो एक हफ्ते में ही समाप्त हो जाता है लेकिन सिर्फ हड्डी जोड़ने के लिए ही इसका उपयोग नहीं होता यह पेट की गैस के दर्द को भी यह खत्म करता है अक्सर अक्सर एक उम्र के बाद पेट में दर्द होने लगता है साक्षअक्सर लोग प्लीपीठ के दर्द के कारण ठीक से सो नहीं पाते ।इस तरह की हालत में हाड़जोड़ की लकडी पीस कर के उसको पोस्टपीठ पर लेप कर दीजिए या पीठ पर उसकी मालिश कर दीजिए पीठ का दर्द खत्म हो जाता है यह इसका सबसे उपयोगी गुण है ।
इसे और भी बहुत सारी बीमारियों से सही होती है कुछ बीमारियों के बारे में बता रही हूं -------
अगर अनियमित मासिक धर्म है तो इसके तने का रस दीजिए इसके तने का रस आप दो चम्मच लीजिए पांच सात दिन तक पीने से काफी लाभ आपको मिलेगा ।

इसके अलावा अगर गठिया है तो हर जोड़ की लकड़ी का टुकड़ा और उड़द की दाल पीस कर के पकौड़ी तिल के तेल में पकौड़ी बनाइए और उसको खा लीजिएगा और तुलगातार एक महीने खाने से गठिया जड़ से खत्म हो जाता है ।
अगर किसी के दर्द हो रहा है तो हड़ जोड़ के पत्ते और इसकी कोपल का पाउडर हर जोड़ के पतिऔर उसके तने के ऊपर वाली भाई ऊपर वाले का पाउडर पीस कर केसे पानी के साथ साथ दीजिए को वस्त्र बंद हो जाती है ।
अगर कान में दर्द हो रहा है बिस्कुट का रस निकालकर के दो बूंद कान में डाल दीजिए तुरंत आराम मिलता है ।

अगर मसूड़ों में सूजन आ गई है तू इसमें भी हर जोर बहुत काम करता है ए 10 ग्राम के रस को एक चम्मच शक्कर में मिलाकर पर चढ़ा दीजिए मसूड़ों की सूजन खत्म हो जाएगी ।यह काम आप को कम से कम एक 11 दिन करना चाहिए चरणों की सूजन अब अपने आप खत्म हो जाएगी।
अगर पेट में दर्द हो रहा है तो हड़जोड़ की 4 या 5 शाखा को चुने के पानी में उबाल लीजिये ।फिर उस पानी को छान कर पिला दीजिये।
यह औषधि ताकत भी प्रदान करती है ।5 ग्राम की मात्र में इसके चूर्ण को पानी के साथ लेने से अनोखे बल की प्राप्ति होती है।
बी भूख बढ़ानी हो तो हड़जोड़ सेंक कर उसकी चटनी बनाकर खाएं।
किसी को दमे वाली खांसी हो तो प्रतिदिन इसके ताने का 2 चम्मच रास पिलायें ।2 माह में टी बी या दमा जड़ से ख़त्म हो जायेगा।
खाना देर से हजम हो रहा हो तो हड़जोड़ का 2 ग्राम चूर्ण और सोंठ का 2 ग्राम चूर्ण मिलाकर पानी से निगलिये लगभग 12 दिनों तक ।
पूरे बदन में दर्द हो रहा हो तो बिस्तर पर हड़जोड़ की मुलायम टहनियों को बिछा कर उन पर सोने की सलाह आयुर्वेद देता है।
इसका वैज्ञानिक नाम है Vitis Quadrangularis.
इन आलेखों में पूर्व विद्वानों द्वारा बताये गये ज्ञान को समेट कर आपके समक्ष सरल भाषा में प्रस्तुत करने का छोटा सा प्रयत्न मात्र है .औषध प्रयोग से पूर्व किसी मान्यताप्राप्त हकीम या वैद्य से सलाह लेना आपके हित में उचित होगा.
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हड़जोड़
Author : डॉ.रूपेश श्रीवास्तव (Dr.Rupesh Shrivastava)
यह है हड़जोड़ नामक वनस्पति का चित्र जिसमें आप देख सकते है कि इसमें पत्ते आदि नहीं रहते

हड़जोड़ (जिसे अस्थिश्रंगार भी कहते हैं यह एक बेल होती है जो कि ऐसा लगता है कि उंगलियों से जुड़-जुड़ कर बनी हो) को सुखा कर बारीक चूर्ण करके छान लीजिये और इस चूर्ण में से दो चुटकी लेकर एक मुनक्के में भर दीजिये और पानी से निगलवा दीजिये। यह दिन में दो बार दीजिये ध्यान रहे कि चूर्ण मुंह में न लगने पाए इसी लिये मुनक्के में भर कर दिया जाता है अन्यथा मुंह में हल्की सी चुनचुनाहट का अनुभव होने लगता है और किसी किसी नाजुक मरीज को छाले हो जाते हैं। बस पंद्रह दिन का उपचार ही चमत्कार दिखा देगा और आप आयुर्वेद की प्रशंसा करते नहीं थकेंगे। सारी समस्याएं इन दवाओं से ही हल हो जाएंगी।
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हडजोड – जोड़ों के दर्द में लाभप्रद वनस्पतीय प्रयोग
जोड़ों के दर्द में लाभप्रद वनस्पतीय प्रयोग

प्रश्न: जोड़ों के दर्द से परेशान हूँ। कई उपाय किये पर सफलता कम ही मिली। ऐसी वनस्पति सुझायें जिसे कि भोजन के रूप मे या भोजन के साथ प्रयोग किया जा सके।

उत्तर: आपके प्रश्न के लिये धन्यवाद। हमारी पारम्परिक चिकित्सा प्रणालियो मे जोड़ों के दर्द के लिये बहुत सी वनस्पतियाँ सुझायी गयी है। पर इन सब का प्रयोग उतना आसान नही है, जितना कि लगता है। यही कारण है कि जब हम अपने मर्जी या अकुशल विशेषज्ञ के मार्गदर्शन मे इनका प्रयोग करते है तो सफलता नही मिलती है। फिर हमारे मन की चंचलता भी प्रेरित करती है कि हम जल्दी-जल्दी दवा बदलें। किसी भी दवा के प्रयोग मे जल्दी का रवैया नुकसान दायक हो सकता है।

आपने तो सुना ही होगा कि वनस्पतियाँ बोलती हैं। जी, आपने बिल्कुल सही पढ़ा। वनस्पतियाँ बोलती हैं और स्वयम बताती हैं कि वे किस रोग मे उपयोगी हैं। वनस्पतियाँ विशेष लोगो से नही बोलती हैं। सभी उनको सुन सकते हैं यदि सुनना चाहें तो। हड़जोड़ नामक वनस्पति भी बोलती है। आप पोस्ट पर प्रस्तुत दोनो चित्र देखे। इसके माँसल तने आपको मानव अस्थि की तरह दिखेंगे। यह वनस्पति इन माँसल तनों के माध्यम से यह बताती है कि अस्थि और जोड़ सम्बन्धी रोगो में इसकी उपयोगिता है। रोग की जटिल अवस्था में इसके प्रयोग के लिये विशेषज्ञ की सलाह चाहिये पर आरम्भिक अवस्था मे इसके साधारण प्रयोग से जोड़ों के दर्द से न केवल मुक्ति पायी जा सकती है, बल्कि इससे बचा भी जा सकता है। प्रयोग आसान है।
आप सब ने चावल से बना चीला तो खाया ही होगा। देश के अलग-अलग हिस्सो मे अलग-अलग प्रकार का चीला बनता है। आपको किसी भी प्रकार के चीले को बनाते समय इसके तने की दो सन्धियो के बीच के आधे भाग को कुचलकर घोल मे मिला लेना है और फिर यह विशेष चीला बनाकर खाना है। चलिये यदि आपके लिये चीला नया शब्द है तो इसके टुकडो को सूजी (रवे) या आटे के हलवे मे मिला कर उपयोग कर ले। सप्ताह मे छुट्टी के दिन एक बार इसे खायें। यह निश्चित ही लाभ करेगा। रोज या दिन मे कई बार मन से खाने का प्रयोग न करें।

देश के वे पारम्परिक चिकित्सक जो कि टूटी हड्डियो को जोड़ने मे माहिर हैं वे अन्य वनस्पतियों के साथ इसका बाहरी प्रयोग करते हैं। आधुनिक अनुसन्धान बताते हैं कि इसमे कैल्शियम की मात्रा अधिक होती है। पर इसके अलावा भी इसमें बहुत कुछ ऐसा होता है जिसके बारे मे आधुनिक विज्ञान जानने की कोशिश कर रहा है। हाल ही मे इसके एक अनोखे ग़ुण के आधार पर एक अमेरीकी पेटेण्ट सामने आया है। विशेषज्ञों ने पाया है कि यदि आप मनमर्जी वसा (फैट) खाने के बाद इसके विशेष तत्व को खा लें तो वसा शरीर मे रूके बिना मल के साथ बाहर निकल जाता है। यह तो मोटे और पेटू लोगों के लिये वरदान से कम नही है। भारत के पारम्परिक चिकित्सक इस बात को पहले से जानते थे पर जब हमारे देश में उनकी ही कद्र नही है तो उनके ज्ञान की कद्र कौन करेगा? नतीजा यह कि अब हमारे ज्ञान के लिये हमे पैसे खर्चने होंगे।

आप इस वनस्पति को आसानी से बागीचे मे लगा सकते हैं। मैने अपने घर मे आम के पेड के सहारे इसे लगाया है। यह प्रश्न का उत्तर लम्बा होता जा रहा है। पर कुछ दिनो पहले हड़जोड़ पर मैने लगातार आठ घंटे का व्याख्यान दिया। आप इससे अन्दाज लगा ही सकते है इसके विषय मे हमारे देश मे उपलब्ध समृध्द ज्ञान का।
साभार : पंकज अवधिया
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हड़जोड़:~~~~~~~'
वानस्पतिक नाम : Cissus quadrangularis)
यह लता हड्डियों को जोड़ती है।
इसको अस्थि श्रृंखला के नाम से जाना जाता है। यह छह इंच के खंडाकार चतुष्कोणीय तनेवाली लता होती है। हर खंड से एक अलग पौधा पनप सकता है। चतुष्कोणीय तने में हृदय के आकार वाली पत्तियां होती है। छोटे फूल लगते हैं। पत्तियां छोटी-छोटी होती है और लाल रंग के मटर के दाने के बराबर फल लगते हैं। यह बरसात में फूलती है और जाड़े में फल आते हैं।

दक्षिण भारत और श्रीलंका में इसके तने को साग के रूप में प्रयोग करते हैं।
-- हड़जोड़ में सोडियम, पोटैशियम और कैल्शियम कार्बोनेट भरपूर पाया जाता है। हड़जोड़ में कैल्शियम कार्बोनेट और फास्फेट होता है जो हड्डियों को मजबूत बनाता है। आयुर्वेद में टूटी हड्डी जोड़ने में इसे रामबाण माना गया है।
-- इसके तने को तेल में भुनकर हड्डी पर बांधने से जल्दी ठीक होती है |
--इसके अलावा कफ, वातनाशक होने के कारण बवासीर, वातरक्त, कृमिरोग, नाक से खून और कान बहने पर इसके स्वरस का प्रयोग होता है।
--मुख्य रूप से इसके तने का ही प्रयोग किया जाता है। 10 से 20 मिलीलीटर स्वरस की मात्रा निर्धारित है।
-- २ ग्राम हडजोड. का चूर्ण दिन में ३ बार लेने से और उसके रस को हड्डी पर लेप करने से हड्डियां जल्दी जुड़ जाती है |
-- इस चूर्ण में बराबर मात्र में सौंठ चूर्ण मिलाकर रखे , ३-४ ग्राम के मात्रा में पानी से लेने पर पाचन शक्ति बढती है |
-- रक्त प्रदर और मसिकस्राव अधिक होने पर इसके १० से २० मिली. रस में गोपीचंदन २ ग्राम ,घी एक चमच और शहद ४ चमच के साथ लेने से ठीक हो जाता है |
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हड़जोड़
रंग : हड़जोड़ का रंग भूरा होता है।
स्वाद : हड़जोड़ का स्वाद तीखा व कषैला होता है।
स्वरूप : हड़जोड़ की बेल होती है जिसमें हर 5 अंगुल में गांठ होती हैं और इसमें 3 या 4 धारी भी होती हैं।
स्वभाव : हड़जोड़ गर्म होती है।
मात्रा : 2 ग्राम।
गुण : हड़जोड़ की जड़ी बूटी टूटी हुई हडि्डयों को जोड़ देती है। यह पीने तथा लगाने दोनों ही के काम में आती है तथा यह वात और कफ का नाश करती है। गरम, दस्तावर और कीड़ों को मारती है। बवासीर को दूर करने के साथ ही यह आंखों की बीमारियों को भी दूर करती है। हलकी, रूखी और स्वादिष्ट होती है। वीर्य को भी बढ़ाती है। चौधारी हड़जोड़ भूनोपद्रव और प्रेत-बाधा को दूर करती है, दर्द को खत्म कर देती है। हड्डी के टूटने पर हड़जोड़ के तने को तेल में भून कर लगायें फिर प्लास्टर या खपच्ची बांध दें।
हड़जोड़ का विभिन्न रोगों में उपयोग : 
1. पाचनशक्तिवर्द्धक: हड़जोड़ का चूर्ण और सोंठ के चूर्ण को बराबर मात्रा में लेकर खाने से पेट की पाचनशक्ति बढ़ती है। 
2. रक्तप्रदर: रक्तप्रदर या मासिकस्राव की अधिकता में हड़संघारी (हड़जोड़वा) का रस 10 से 20 मिलीलीटर की मात्रा में सुबह-शाम गोपीचन्दन, घी और शहद के सेवन करने से बहुत अधिक लाभ मिलता है।
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अलसी के करिश्माई फायदे, ऐसे करें इस्तेमाल

क्या आप जानते हैं कि अलसी का सेवन त्वचा पर बढ़ती उम्र के असर को कम करता है। अलसी का सेवन भोजन के पहले या भोजन के साथ करने से पेट भरने का एहसास होकर भूख कम लगती है। इसके रेशे पाचन को सुगम बनाते हैं, इस कारण वजन नियंत्रण करने में अलसी सहायक है। चयापचय की दर को बढ़ाता है एवं यकृत को स्वस्थ रखता है। प्राकृतिक रेचक गुण होने से पेट साफ रख कब्ज से मुक्ति दिलाता है। 

कैसे लें अलसी : अलसी को धीमी आंच पर हल्का भून लें। फिर मिक्सर में दरदरा पीस कर किसी एयर टाइट डिब्बे में भरकर रख लें। रोज सुबह-शाम एक-एक चम्मच पावडर पानी के साथ लें। इसे सब्जी या दाल में मिलाकर भी लिया जा सकता है। इसे अधिक मात्रा में पीस कर नहीं रखना चाहिए, क्योंकि यह खराब होने लगती है। इसलिए थोड़ा-थोड़ा ही पीस कर रखें।

अलसी सेवन के दौरान पानी खूब पीना चाहिए। इसमें फायबर अधिक होता है, जो पानी ज्यादा मांगता है। एक चम्मच अलसी पावडर को 360 मिलीलीटर पानी में तब तक धीमी आंच पर पकाएं जब तक कि यह पानी आधा न रह जाए। थोड़ा ठंडा होने पर शहद या शकर मिलाकर सेवन करें। सर्दी, खांसी, जुकाम में यह चाय दिन में दो-तीन बार सेवन की जा सकती है। अस्थमा में भी यह चाय बड़ी उपयोगी है।

अलसी और अस्थमा : अस्थमा वालों के लिए एक और नुस्खा भी है। एक चम्मच अलसी पावडर आधा गिलास पानी में सुबह भिगो दें। शाम को इसे छानकर पी लें। शाम को भिगोकर सुबह सेवन करें। गिलास कांच या चांदी का होना चाहिए। 

क्या है अलसी में : अलसी में कैल्शियम, फास्फोरस, आयरन, केरोटिन, थायमिन, राइबोफ्लेविन और नियासिन पाए जाते हैं। यह गनोरिया, नेफ्राइटिस, अस्थमा, सिस्टाइटिस, कैंसर, हृदय रोग, मधुमेह, कब्ज, बवासीर, एक्जिमा के उपचार में उपयोगी है।

http://hindi.webdunia.com/health-care/benefit-of-flax-seeds-116092200040_1.html
छोटा है पर बड़े काम का नींबू
- निहालचंद जैन
नींबू में उपयोगिता का अक्षय भंडार है। जापान के एक प्रसिद्ध आहार शास्त्री का नीबू के लिए कथन है- 'घर में यह हमारा सेवक है, समाज के लिए उच्च कोटि का वैद्य है और समूचे राष्ट्रीय जीवन के लिए यह बहुत बड़ा वैज्ञानिक है।' एक से अधिक किस्म के नींबू भारत में पाए जाते हैं। प्रत्येक किस्म के नींबू में साइट्रिक अम्ल और प्राकृतिक लवण-पोटाश और फास्फोरस मुख्य रूप से होते हैं। 
ये लवण रक्त की अम्लता को दूर कर उसे क्षारत्व देते हैं और रक्त को शुद्ध करते हैं। इस प्रकार सभी रोगों को हरने में मददगार होने से नींबू को औषधि समझा जाता है। वैसे तो लगभग सभी फलों में यह गुण न्यूनाधिक मात्रा में होता है, पर नींबू में अधिक होने के कारण और प्रायः सालभर मिलते रहने के कारण उसका महत्व अधिक है।
नींबू अपच एवं पेट के अन्य विकारों में भी सुधार करता है। यह स्कर्वी रोग की विशेष दवा है। नींबू कच्ची-पकी तरकारियों का स्वाद बढ़ाता है। केले, सेब के टुकड़ों पर डालने से उनका रंग नहीं बदलता-या बिगड़ता एवं उनका स्वाद बढ़ जाता है। सर्दी लगने पर सोते समय गर्म पानी में नींबू मिलाकर पीने से फायदा होता है। कई बार ऐसा प्रयोग करने से पुराने जुकाम में भी लाभ होता है।
कब्ज+रक्तचाप : नींबू का प्रयोग कब्ज दूर करने में और रक्तचाप की समस्या को भी दूर करने में मददगार बताया जाता है।
अधिक खाँसी या दमा : अधिक खाँसी या दमा जोर पर हो उस समय शहद और उसका चौथाई भाग नीबू का रस मिलाकर लेने से तुरंत आराम होता है।
एनीमा : नींबू के पानी का एनीमा, सादे पानी के एनीमा की तुलना में ज्यादा प्रभावी होता है तथा कई विकारों को दूर करता है।
चर्म रोगों : नींबू त्वचा के रोग, मसूड़ों की सूजन, गले की खराश, टॉंसिल के रोगों में भी लाभ करता है। आँख-कान के रोगों में भी फायदा करता है। मुँह की झाँई, मुहाँसे, घावों, दाँतों एवं चर्म रोगों के लिए श्रेष्ठ उपचार का प्रयोग है।
नासिका के रक्तस्राव को तत्काल रोकता है।
पर्वतारोही क्लबों में अक्सर सुना जाता है कि 'मध्ययुग में नेपोलियन ने आल्पस को जीता और इस युग में विश्व की सबसे ऊँची चोटी को नींबू ने जीता।' सौंदर्य संबंधी अनेक समस्याओं का हल नींबू है।    
भोजन सामग्री को खराब होने से बचाता है। ऋतु के अनुसार अपने गुणों में परिवर्तन करता है और ऋतु के दोषों के अनुकूल गुण पैदा कर लेता है। नींबू को रक्त में खटाईवर्धक माना जाता है, क्योंकि वह खाने में खट्टा लगता है परंतु पेट के रसों के साथ क्रिया होने पर क्षारीय पदार्थ बन जाते हैं, जो रक्त को क्षारीय बनाते हैं।
नींबू में 89 भाग जल, 1 भाग पोषक तत्व, 1 भाग चिकनाई, 8 भाग कार्बोज, आधा भाग खनिज पदार्थहोता है। इसमें विटामिन बी और सी अधिक मात्रा में और विटामिन ए साधारण मात्रा में पाए जाते हैं। बर्फीले पहाड़ों पर जाने वाले नींबू को आवश्यक रूप से अपने साथ ले जाते हैं।
सौंदर्यवर्धकों में नींबू श्रेष्ठ व सर्वत्र उपलब्ध होकर तत्काल उपयोग में लिया जा सकता है।
रूसी का शत्रु : सिर से पैर तक के लिए सौंदर्यवर्धक, बालों के लिए बड़ा हितकर, रूसी का शत्रु होता है नींबू। इसका रस लगाकर सिर साफ करें-रूसी गायब। नींबू के शेम्पू कई रूपों में प्राप्त हैं, पर नींबू सबसे सस्ता और प्रभावी। पानी में इसका रस मिलाकर बाल धोने से बालों में चमक आ जाती है।
सौंदर्य तथा स्वास्थ्य की दृष्टि से प्रातःकाल पहली चीज पानी में एक नींबू का रस मिलाकर पीना है। नींबू मिला पानी शरीर को आकर्षक बनाने में सहायक है। नींबू मिला पानी कब्ज दूर करने में भी सहायक है और यदि कब्ज नहीं रहे तो शरीर स्फूर्ति भरा रहता है और यह स्फूर्ति आकर्षक व्यक्तित्व प्रदान करने में प्रभावी होती है।
आँखों के चारों ओर काली धारी तथा मुहाँसे कब्ज के कारण होते हैं तथा कब्ज दूर होते ही ये गायब हो जाते हैं। इस प्रकार चेहरे को चमक प्राप्त हो जाती है। कोहनी, टखनों का कालापन भी नींबू लगाने से दूर होना पाया गया है। नींबू का उबटन प्रसिद्ध है। नींबू के गुण अनेक हैं।
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कागजी नींबू के असरकारी गुण

बुखार की हरारत : यह शरीर को शीतलता एवं ताजगी प्रदान करता है। यह शरीर की गर्मी को भी शांत करता है। इसके रस को चाय में डालकर पिएँ या एक नींबू को पाँच बराबर-बराबर भागों में काटकर तीन गिलास पानी में डालकर एक गिलास पानी रह जाने तक धीमी आँच में उबालें। ठंडा होने के बाद छानकर, बुखार की हरारत होते ही पी लें। बुखार नहीं आएगा।

  1. * यदि शौच ठीक तरह से नहीं हो रहा हो या पेचिश हो, तो प्याज के रस में कागजी नींबू का रस मिलाएँ। इसमें थोड़ा-सा पानी डालकर पिएँ, लाभ होगा। 
  2. * एक छोटा-सा अदरक का टुकड़ा लें। तीन माशा (आधे तोले का आधा) सेंधा नमक लें तथा एक माशा नींबू का रस। इसे मिलाकर खाएँ। अपच व कब्ज गायब हो जाएँगे। 
  3. * स्कर्वी रोग में नींबू श्रेष्ठ दवा का काम करता है। एक भाग नींबू का रस और आठ भाग पानी मिलाकर रोजाना दिन में एक बार लें।

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10 घरेलू नुस्खे गुणकारी नींबू के

  • 1 शुद्ध शहद में नींबू की शिकंजी पीने से मोटापा दूर होता है।
  • 2 नींबू के सेवन से सूखा रोग दूर होता है।
  • 3 नींबू का रस एवं शहद एक-एक तोला लेने से दमा में आराम मिलता है।
  • 4 नींबू का छिलका पीसकर उसका लेप माथे पर लगाने से माइग्रेन ठीक होता है।
  • 5 नींबू में पिसी काली मिर्च छिड़क कर जरा सा गर्म करके चूसने से मलेरिया ज्वर में आराम मिलता है।
  • 6 नींबू के रस में नमक मिलाकर नहाने से त्वचा का रंग निखरता है और सौंदर्य बढ़ता है।
  • 7  नौसादर को नींबू के रस में पीसकर लगाने से दाद ठीक होता है।
  • 8 नींबू के बीज को पीसकर लगाने से गंजापन दूर होता है।
  • 9 बहरापन हो तो नींबू के रस में दालचीनी का तेल मिलाकर डालें।
  • 10 आधा कप गाजर के रस में नींबू निचोड़कर पिएं, रक्त की कमी दूर होगी।

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चाशनीयुक्त नींबू का पना
सामग्री : 

  • 25 नींबू, 1 से डेढ़ किलो अथवा आवश्यकतानुसार शक्कर, 3-4 लौंग, आधा चम्मच काली मिर्च पावडर। 

विधि :

  • एक भाग नींबू का रस और चार से छह भाग शक्कर लेकर दोनों को अच्छी तरह पकाकर चाशनी बना लें। तत्पश्चात लौंग एवं काली मिर्च का चूर्ण डालें। लीजिए चाशनीयुक्त नींबू का पना तैयार है। 
  • अब जब भी जरूरत हो तब आवश्यकतानुसार पानी मिलाकर पीने से यह नींबू का पना भोजन के प्रति रुचि उत्पन्न करता करने के साथ-साथ भोजन को पचाता है एवं बढ़ते हुए वात को नष्ट करता है।

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नींबू (कैसे) रखें तरोताजा...?

नींबुओं को लंबे समय तक ताजा बनाए रखने के लिए उन पर नारियल का तेल लगाकर फ्रिज में रखें।
दालों को यदि अंकुरित करके खाया जाए तो उनमें विटामिन 'सी' की मात्रा अधिक बढ़ जाती है।
दिनभर रसोईघर में उपयोग किए गए कपड़े रातों को ही साबुन से धोकर रसोईघर में सुखा लें।
वॉश बेसिन तथा टब पर से जंग के दाग छुड़ाने के लिए उन पर नमक के साथ तारपीन का तेल मिलाकर लगाएँ।
थर्मस फ्लास्क से चाय/काफी के दाग छुड़ाने के लिए उसमें अंडे के छिलके के टुकड़े चूरा करके गर्म पानी के साथ डालें। अच्छी तरह हिलाने के बाद धो दें।
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गुणकारी नींबू के फायदे
- किरण मिश्रा
नींबू स्वास्थ्य की रक्षा के लिए अत्यंत उपयोगी और लाभदायक माना जाता है। यह स्वाद से खट्टा-मीठा, कसैला आदि कई प्रकार का होता है। नींबू बरसात में सर्वाधिक पैदा होता है, लेकिन यह सभी ऋतुओं में सरलता से उपलब्ध हो जाता है।
नींबू में सोडियम, पोटैशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम, लोहा, ताँबा, फॉस्फोरस, क्लोरिन आदि तत्वों के साथ प्रोटीन, वसा, विटामिन बी और सी भी पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं।

  1. नींबू पानी प्रातःकाल पीने से पेट साफ होता है। 
  2. नींबू आपके इम्यून सिस्टम को मजबूत करता है। 
  3. नींबू का सेवन उल्टी की समस्या का समाधान करता है। 
  4. नींबू पानी पीने से शरीर में स्फूर्ति आती है। 
  5. नींबू रस का दो समय सेवन करने से शरीर की चर्बी समाप्त होती है। इसका नियमित सेवन मोटापे को समाप्त करने का सबसे उपयोगी उपाय है। 
  6. नींबू का सेवन रक्त को शुद्ध करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  7. नींबू स्वास्थ्य की रक्षा के लिए अत्यंत उपयोगी और लाभदायक माना जाता है। यह स्वाद से खट्टा-मीठा, कसैला आदि कई प्रकार का होता है। नींबू बरसात में सर्वाधिक पैदा होता है, लेकिन यह सभी ऋतुओं में सरलता से उपलब्ध हो जाता है।  
  8. नींबू का रस जख्मों से बैक्टीरिया नष्ट करता है, वहीं जख्म से खून बहना भी रोकता है। 
  9. मुँहासे और एक्जिमा जैसे त्वचा रोगों में नींबू का रस लगाने से फायदा होता है। 
  10. नींबू का सेवन लीवर (जिगर) की विकृति की समस्या का समाधान भी करता है। 
  11. नींबू का रस ऑस्टियोआर्थराइटिस में भी फायदेमंद होता है। 
  12. नींबू के पानी से नियमित कुल्ला करने व उसके गूदे को दाँतों पर मलने से मुँह व दाँतों की समस्याओं का समाधान होता, वहीं मुँह की दुर्गंध भी समाप्त हो जाती है। 
  13. दूध में नींबू का रस मिलाकर लगाने से चेहरे की रंगत में निखार आता है।

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खट्टे नींबू के 10 मीठे गुण

  • 1 शुद्ध शहद में नींबू की शिकंजी पीने से मोटापा दूर होता है।
  • 2 नींबू के सेवन से सूखा रोग दूर होता है।
  • 3 नींबू का रस एवं शहद एक-एक तोला लेने से दमा में आराम मिलता है।
  • 4 नींबू का छिलका पीसकर उसका लेप माथे पर लगाने से माइग्रेन ठीक होता है।
  • 5 नींबू में पिसी काली मिर्च छिड़क कर जरा सा गर्म करके चूसने से मलेरिया ज्वर में आराम मिलता है।
  • 6 नींबू के रस में नमक मिलाकर नहाने से त्वचा का रंग निखरता है और सौंदर्य बढ़ता है।
  • 7 नौसादर को नींबू के रस में पीसकर लगाने से दाद ठीक होता है।
  • 8 नींबू के बीज को पीसकर लगाने से गंजापन दूर होता है।
  • 9 बहरापन हो तो नींबू के रस में दालचीनी का तेल मिलाकर डालें।
  • 10 आधा कप गाजर के रस में नींबू निचोड़कर पिएँ, रक्त की कमी दूर होगी।

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खट्टा नींबू मीठे फायदे! नींबू के खास उपयोग

आमतौर पर हमारे यहाँ तीन प्रकार के नींबू पाए जाते हैं। देशी, कागजी और पहाड़ी। इन तीनों का अलग-अलग बीमारियों में अलग-अलग उपयोग किया जाता है। गर्मी के दिनों के लिए यह नींबू बड़े काम का है। यह एक गुणकारी औषधीय पदार्थ है तथा र तरह के अपच, पेट की गड़बड़ी, लीवर और तिल्ली की बीमारी में उपयोगी सिद्ध होता है। 
आइए, हम आपको बता रहे है इनके खास उपयोग :-

1. कागजी नींबू : यह शरीर को शीतलता एवं ताजगी प्रदान करता है। यह शरीर की गर्मी को भी शांत करता है। इसके रस को चाय में डालकर पिएँ या एक नींबू को पाँच बराबर-बराबर भागों में काटकर तीन गिलास पानी में डालकर एक गिलास पानी रह जाने तक धीमी आँच में उबालें। ठंडा होने के बाद छानकर, बुखार की हरारत होते ही पी लें। बुखार नहीं आएगा।

  1. * यदि शौच ठीक तरह से नहीं हो रहा हो या पेचिश हो, तो प्याज के रस में कागजी नींबू का रस मिलाएँ। इसमें थोड़ा-सा पानी डालकर पिएँ, लाभ होगा।
  2. * एक छोटा-सा अदरक का टुकड़ा लें। तीन माशा (आधे तोले का आधा) सेंधा नमक लें तथा एक माशा नींबू का रस। इसे मिलाकर खाएँ। अपच व कब्ज गायब हो जाएँगे।
  3. * स्कर्वी रोग में नींबू श्रेष्ठ दवा का काम करता है। एक भाग नींबू का रस और आठ भाग पानी मिलाकर रोजाना दिन में एक बार लें।
2. पहाड़ी नींबू : यह नींबू भूख बढ़ाने वाला होता है। बेस्वाद मुँह होना, अधिक प्यास लगना, उल्टियाँ होना, कमजोर पाचन शक्ति, खाँसी, श्वास लेने में परेशानी तथा पेट के कीड़ों के लिए यह बेहद लाभदायक है। एसिडिटी एवं अम्ल पित्त की स्थिति में शाम के समय में इसका ताजा रस पिएँ। अपच के लिए यह हितकारी है।
  1. * देशी नींबू के रस में थोड़ी शकर मिलाएँ। इसे गर्म कर सिरपनुमा बना लें। इसमें थोड़ा पानी मिलाकर पिएँ। पित्त के लिए यह अचूक औषधि है।
  2. * दो तोला नींबू का गूदा लें। इसमें छः माशा (करीब आधा तोला) काला नमक मिलाएँ। इसे खाने से लीवर संबंधी तकलीफ दूर होगी। यह पीलिया रोग के लिए भी फायदेमंद है।
  3. * एक गिलास पानी में एक नींबू निचोड़कर प्रातः भूखे पेट हमेशा पीते रहने से नेत्र ज्योति ठीक रहती है। इससे पेट साफ रहता है व शरीर स्वस्थ रहता है। निरोग रहने का यह प्राथमिक उपचार है। 
  4. * सुबह-शाम एक गिलास पानी में एक नींबू निचोड़कर पीने से मोटापा दूर होता है। 
  5. * बवासीर (पाइल्स) में रक्त आता हो तो नींबू की फाँक में सेंधा नमक भरकर चूसने से रक्तस्राव बंद हो जाता है।
  6. * आधे नींबू का रस और दो चम्मच शहद मिलाकर चाटने से तेज खाँसी, श्वास व जुकाम में लाभ होता है। 
  7. * नींबू ज्ञान तंतुओं की उत्तेजना को शांत करता है। इससे हृदय की अधिक धड़कन सामान्य हो जाती है। उच्च रक्तचाप के रोगियों की रक्तवाहिनियों को यह शक्ति देता है। 
  8. * एक नींबू के रस में तीन चम्मच शकर, दो चम्मच पानी मिलाकर, घोलकर बालों की जड़ों में लगाकर एक घंटे बाद अच्छे से सिर धोने से रूसी दूर हो जाती है व बाल गिरना बंद हो जाते हैं। 
  9. * एक गिलास पानी में एक नींबू निचोड़कर सेंधा नमक मिलाकर सुबह-शाम दो बार नित्य एक महीना पीने से पथरी पिघलकर निकल जाती है। 
  10. * नींबू को तवे पर रखकर सेंक लें (दो भाग करके)। उस पर सेंधा नमक डालकर चूसें। इससे पित्त की दिक्कत खत्म होती है। 

3. देशी नींबू : सी प्रकार नकसीर, दाँतों की मजबूती, खुजली, मलेरिया, पीलिया, अस्थमा, सिरदर्द, अनिद्रा, त्वचा रोग आदि में भी नींबू अत्यंत उपयोगी है। इतना ही नहीं स्वास्थ्य के साथ ही यह सौंदर्यवर्धक भी है।

यदि आपकी त्वचा शुष्क व साँवली है तो प्रतिदिन रात में सोने से पूर्व शुद्ध आँवले के तेल में नींबू का रस मिलाकर चेहरे व गर्दन पर लगाएँ एवं हल्के हाथों से मालिश करें। कुछ ही दिनों में त्वचा का रंग निखर आएगा।

इसी प्रकार हथेलियों व कोहनियों की सौंदर्य वृद्धि के लिए भी नींबू को निचोड़कर बचे हुए छिलके में शकर के खड़े दाने डालकर उक्त स्थानों पर तब तक हल्के-हल्के घिसें जब तक पूरी शकर न पिघल जाए। इससे त्वचा चमकदार व मुलायम बनती है। तो देखा आपने कितने फायदे छुपे हैं
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रात को मोजे में नींबू डालकर सोएंगे तो ये 5 शानदार फायदे

First Published:27-09-2016 04:53:32 PM
Last Updated:27-09-2016 04:53:32 PM

नई दिल्ली, लाइव हिन्दुस्तान टीम अक्सर लोगों के घरों में ऐसे कई सदस्य होंगे, जिनके पैरों से बदबू आते हैं और न सिर्फ घर में बल्कि बाहर आस-पास के लोगों के बीच शर्मसार होना पड़ता है। इतना ही यदि आपके पैरों की एड़ियां फटी हो तो रात को सोने से पहले मोजे में नींबू डालकर लेटे, तब यह बेहद कारगर साबित हो सकता है। नींबू न सिर्फ गर्मियों में बल्कि पैरों की देखभाल करने में असरदार होता है। नींबू न सिर्फ स्वास्थ्य के लिए ही लाभदायक है, बल्कि इससे पैरों से जुड़ी समस्याएं भी खत्म की जा सकती है। इसके अलावा ऐसा करने से 5 शानदार फायदे मिल सकते हैं, जिन्हें आप जरूर जानना चाहेंगे।

नींबू को मोजे में रखने के 5 शानदार फायदे


1. पैरों के तलवे : रात में सोने से पहले मोजे में नींबू डालकर सोएं, इससे न सिर्फ आपके पैर की त्वचा मुलायम रहते हैं बल्कि फटी हुई एड़ियां भी ठीक हो जाती हैं।

2. नहीं होगी बदबू : पैरों से आने वाली बदबू लोगों के लिए बड़ी समस्या है। जूता-चप्पल पहनने के बाद बाद पसीना आना और इसके बाद जबरदस्त बदबू हर किसी के लिए परेशानी का विषय होता है। यदि आप इससे जल्द छुटकारा पाना चाहते हैं तो रोजाना आपको सोते वक्त मोजे में नींबू डालकर सोना चाहिए।
3. पैरों का रंग साफ और गोरापन : यदि आपके पैर में दाद या फिर रंग दबा हुआ हो तो इसका रंग साफ करने और गोरापन पाने के लिए इसका प्रयोग किया जा सकता है। पैरों में यदि दाने होते हैं तो भी यह फायदेमंद हो सकता है।
4. पैरों का रूखापन : पैरों से जुड़ी समस्याओं में सबसे ज्यादा परेशानी रूखापन होता है। इसके लिए लोग कई प्रकार के लोशन आदि का प्रयोग करते हैं। पैरों के रूखेपन को दूर करने के लिए यह तरीका आपके लिए बेहद कारगर साबित हो सकता है।

5. पैरों में नमी और दाद से सुरक्षा : रात में सोते वक्त नींबू को मोजे में डालकर सोने से नमी तो आती ही है, साथ ही दाद जैसी कोई समस्या दूर रहती है। इतना ही नहीं नींबू के पोषक तत्व आपके पैरों के दुर्गंध को दूर भी कर देता है।

क्या है नींबू का प्रयोग करने का तरीका?

  1. नींबू को दो टुकड़ों में काट लें और फिर इसे पूरे पैरों के तलवों पर अच्छे से घिस लीजिए। अब आप बचे हुए टुकड़े को एड़ियों के उपर रखकर इसे ढ़क लें। नींबू का आकर इतना हो कि इससे आपकी पूरी एड़ी ढ़क जाए। इसके बाद आप जुराबे पहनें।
  2. नींबू से पैर की एड़ियों को मोजों के अंदर कम से कम दो घंटे तक ही रखें। आपको कुछ दिनों तक थोड़ा अटपटा या अजीब सा लग सकता है लेकिन आपको इसके बेहतर परिणाम दिखने लगेगें।
  3. नींबू कैसे करता है असर नींबू के रस में कई तरह के तत्व होते हैं जो पैरों और एड़ियों की समस्या को अच्छी तरह से ठीक कर देते हैं। रूखी और फटी एड़ियां फिर से मुलायम और सुंदर बन जाती हैं। नींबू के इस घरेलू उपाय को आप नियमित कुछ दिनों तक करते रहें। आपको बेहतर और स्वस्थ लाभ दिखने लगेगें।
Source :http://www.livehindustan.com/news/health-news/article1-5-feet-benefits-about-a-lemon-in-your-socks-567315.html?c=home-flicker

--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!

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सभी के स्वस्थ एवं सुदीर्घ जीवन की कामना के साथ-मेरे प्यारे और दुलारे तीन बच्चों की ममतामयी अद्वितीय माँ (मम्मी) जो दुखियों, जरूतमंदों और मूक जानवरों तक पर निश्छल प्यार लुटाने वाली एवं अति सामान्य जीवन जीने की आदी महिला थी! वह पाक कला में निपुण, उदार हृदया मितव्ययी गृहणी थी! मेरी ऐसी स्वर्गीय पत्नी "जानकी मीणा" की कभी न भुलाई जा सकने वाली असंख्य हृदयस्पर्शी यादों को चिरस्थायी बनाये रखते हुए इस ब्लॉग को आज दि. 08.08.12 को फिर से पाठकों के समक्ष समर्पित कर रहा हूँ!-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'

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(Tribulus Terrestris) How to get pregnant? 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गर्भावस्था की विकृतियां-Disorders of Pregnancy गर्भावस्था के दौरान संभोग-Sex During Pregnancy गर्भावस्था-Pregnancy गर्भाशय-उच्छेदन के साइड इफेक्ट्स-Side Effects of Hysterectomy गर्मी गर्मी-Heat गाजर-Carrots गिलोय गुलज़ाफ़री गैस गोखरू (LAND CALTROPS) गोखरू-LAND CALTROPS-Tribulus Terrestris गोभी-Cabbage घमोरी चकवड़ चमत्कारिक सब्जियां चर्म रोग चाय-Tea चालीस के पार-Forty Across चिकनगुनिया चिरायता-Absinth चिरोटा चौलाई छपाकी छुआरा-छुहारा-Date Palm जकवड़ जटामांसी-Spikenard जलोदर रोग-Ascites Disease जवारे जवासा-Alhag जहर जायफल-Nutmeg जीरा-Cumin जूस-Juice ज्वर-Fiver झांईं झुर्रियाँ झूठे दर्द टमाटर-Tomatoes टाइफाइड डायबिटीज डायरिया डिलेवरी डेंगू डेंगू-Dengue ढीलापन तरबूज-Watermelon तलाक ताकत तुंबा तुंबी तुलसी तेल त्रिफला त्वचा थायरायड-Thyroid दन्तकृमि दर्द दाग-धब्बे-Stains-Spots दांतो में कैविटी-Teeth Cavity दाम्पत्य-Conjugal दूधी-Milk Hedge द्रोणपुष्पी-Leucas Cephalotes धनिया-Coriander धमासा नपुंसकता नाखून नागरमोथा नाड़ी हिंगु (डिकामाली) निम्न रक्तचाप-Low Blood Pressure नियासिन-Niacin निर्गुण्डी नींबू-Lemon नीम-azadirachta indica नुस्खे-Tips नेगड़ नेगड़-निर्गुन्डी-Vitex negundo नेत्र रोग नैतिक न्युमोनिया-Pneumonia पंतजलि पत्तागोभी-CABBAGE पत्थरचट्टा पत्नी पथरी पनीर-Cheese पपीता-CARICA PAPPYA पमाड पवाड़ पवाँर पाचन पारिजात पालक-Spinach पिंपल-मुंहासे-Pimples-Acne पीलिया पीलिया-Jaundice पीलिया-कामला-Jaundice पुआड़ पुनर्नवा-साटी-सौंटी-Punarnava पुरुष पेट के कीड़े पेंसिल थेरेपी-Pencil Therapy पौरुष प्याज-Onion प्रतिरक्षा-इम्युनिटी-Immunity प्रतिरोधक प्रतिरोधक-Resistance प्रदर प्रमेह प्रवाहिका (पेचिश)-Dysentery प्रसव प्रेग्नेंसी-Pregnancy प्रेमिका प्रोटीन-Protein प्रोस्टेट ग्रन्थि-Prostate Gland प्लूरिसी-Pleurisy फफूंद-Fungi फल-Fruit फिटकरी-Alum फूलगोभी-CAULIFLOWER फैट फोड़ा फोलिक एसिड-Folic Acid फ्लू-Flu बकुल बथुआ-White Goose Foot बबूल-ACACIA बरसाती बीमारियाँ बरसाती बीमारियां बवासीर बहुमूत्रता- बादाम-Almonds बाल झडऩा-Hair Falling बीमारियों के अनुसार औषधियां बुखार बेल बेल – Bael बेली ब्लैक मेलिंग भगंदर-Fistula-in-ano भय भस्मक रोग भूख भूमि आंवला/भुई आंवला-Phyllanthus Niruri मकोय-Soleanum nigrum मटर-PEA मंदाग्नि मदार मधुमेह-Diabetes मन्दाग्नि-Dyspepsia मरुआ मलेरिया (Malaria) मस्से-WARTS माईग्रेन (आधासीसी)-Migraine माजूफल मानसिक-Mental मानिसक तनाव-Mental Stress मिर्च-Chili मुख मैथुन-ओरल सेक्स-Oral Sex मुहाँसे मूँगफली-Groundnut-peanut मूड डिस्ऑर्डर-Mood Disorders मूत्र में जलन-Burning in Urine मूर्च्छा (Unconsciousness) मूली-Radish मेथी मेथी दाना मेंहदी मैथी-FENUGREEK मोगरा (Mogra) मोटापा मोटापा-Obesity मौलसिरी यकृत वृद्धि-Liver Growth यकृत-लीवर-जिगर-Lever यूपेटोरियम परफोलियेटम योग विज्ञापन योनि योनि शूल-Vaginal Colic यौनि रक्त प्रदर (Blood Pradar) रक्त रोहिड़ा-TECOMELLA UNDULATA रक्ताल्पता (एनीमिया)-Anemia रस-juices रातरानी Night Blooming Jasmine/Cestrum nocturnum रामबाण औषधियाँ-Panacea Medicines लहसुन-Garlic लीवर लीवर-Lever लीवर-Liver लू-hot wind लैंगिक लौकी-Gourd लौंग की चाय वजन बढाएं-Weight Increase वमन विकृति-Vomiting Distortion वात श्लैष्मिक ज्वर वात-Rheumatism वायरल वायरल फीवर वायरल बुखार-Viral Fever विटामिन-Vitamins विधारा वियाग्रा-Viagra विषखपरा वृक्कों (गुर्दों) में पथरी-Renal (Kidney) Stone वैवाहिक जीवन-Marital वैश्यावृति शरीफा-सीताफल-Custard apple शलगम-Beets शहद-Honey शीघ्र पतन शुक्राणु-Sperm श्योनाक-Oroxylum indicum श्रेष्ठतर श्वेत प्रदर-Leucorrhea षड़यंत्र संतरा-Orange सदा सुहागन सदाफूली सदाबहार सदाबहार चूर्ण सनबर्न सफ़ेद दाग सब्जियां-Vegetables संभालू समर्पण-Dedication सरफोंका सर्दी जुकाम-Cold सर्पविष संवेदना साइटिका-Sciatica साबूदाना-Sago सायटिका सिजेरियन सुगर सुदर्शन सुहागा-Boracic सूखा रोग सूजन सेक्‍स सेक्स परामर्श-Sex Counseling सेक्‍स-Sex सेमल-Bombax Ceiba सोजन-सूजन सोयाबीन (Soyabean) सोयाबीन-Soyabean सोरियासिस-Psoriasis सौंदर्य-Beauty सौंफ की चाय सौंफ-Fennel स्त्री स्त्रीत्व-Femininity स्त्रैण स्वप्न दोष स्वप्नदोष-Night Fall हजारदानी हड़जोड़ हड्डी हड्डी में दर्द हड्डीतोड़ ज्वर हरसिंगार-Night Jasmine हरी दूब-CREEPING CYNODAN हस्तमैथुन-Masturbation हिचकी-Hiccup हिमोग्लोबिन-hemoglobin हिस्टीरिया-Hysteria हीनतर हृदय-Heart हेल्थ टिप्स-Health-Tips हैजा हैपीनेस-Happiness होम केयर टिप्स-Home Care Tips होम्योपैथी होम्योपैथी-Homeopathy