Online Dr. P.L. Meena (डॉ. पुरुषोत्तम लाल मीणा)

Health Care Friend and Marital Dispute Consultant

(स्वास्थ्य रक्षक सक्षा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार)

-:Mob. & WhatsApp No.:-

85619-55619 (10 AM to 10 PM)

xxxxxxxxxxx

स्वास्थ्य की अनदेखी नहीं करें, तुरंत स्थानीय डॉक्टर (Local Doctor) से सम्पर्क करें। हां यदि आप स्थानीय डॉक्टर्स से इलाज करवाकर थक चुके हैं, तो आप मेरे निम्न हेल्थ वाट्सएप पर अपनी बीमारी की डिटेल और अपना नाम-पता लिखकर भेजें और घर बैठे आॅन लाइन स्वास्थ्य परामर्श प्राप्त करें।

Post Effect of Dengue, Chikungunya & Viral: लाइलाज बनने से पहले ही डेंगू, चिकनगुनिया और वायरल के दर्द का होम्योपैथिक इलाज करवायें।-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'




इन दिनों डेंगू, चिकनगुनिया और वायरल का प्रकोप जारी है। अपने आसपास नजर डालोगे तो पाओगे कि कोई भी पेशेंट डेंगू, चिकनगुनिया और वायरल से तो ठीक हो जाता है या खुद को ठीक हुआ समझ लेता है। लेकिन डेंगू, चिकनगुनिया और वायरल के बाद हाथ पेशेंट के हाथ-पैरों, जोड़ों, नसों तथा मांसपेशियों में कठोरता आ जाती है। चलने-फिरने में असहनीय दर्द होता है। जिसके कारण पेशेंट को लंगड़ाते हुए चलना पड़ता है। पेशेंट पेनकिलर (Painkiller) दर्दनिवारक खा-खा कर अपने गुर्दों तक को खराब कर लेते हैं। इस तकलीफ की उचित चिकित्सा कराने पर अधिक समय तक ध्यान नहीं देने से अनेक बार यही दर्द गठिया में बदल जाता है। जबकि इस प्रकार की दर्दनाक समस्याओं का निदान होम्योपैथी की दुष्प्रभाव रहित दवाइयों से संभव है।

अत: ऐसी तकलीफों से पीड़ित लोगों, इस दर्द को अपनी नीयति मानकर निराश या हताश (Frustrated or Depressed) होने की जरूरत नहीं है। इस प्रकार की तकलीफों का होम्योपैथी में इलाज संभव है। अकसर लोग मेरी ओर से लिखी गयी जानकारियों और हेल्थ बुलेटिंस को पढकर इलाज या परामर्श हेतु मुझे काल करते हैं, समयाभाव के कारण मैं उन्हें तत्काल रिस्पांस  (Response-प्रतिक्रिया) नहीं दे पाता हूं। जबकि होना यह चाहिये कि अपने आपसपास के किसी अनुभवी होम्योपैथ से सम्पर्क किया जाना चाहिये। क्योंकि मुझ से अधिक अनेक अनुभवी तथा अधिक योग्य होम्योपैथ उपलब्ध हैं।

हां *अनेकानेक स्वास्थ्य सम्बन्धी विषयों की जानकारी और रोगियों के अनुभवों की जानकारी हेतु मेरी निम्न वेबसाइट पर स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनने हेतु विजिट/क्लिक कर सकते हैं:—*


>>> *Only Online Health Care Friend and Marital Dispute Consultant (स्वास्थ्य रक्षक सखा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार) Dr. P. L. Meena (डॉ. पुरुषोत्तम लाल मीणा)
Mobile & WhatsApp No.: 8561955619,

*Fix Time to Call: Between 10 AM to 10 PM Only.+‎2nd Mobile: 9875066111*
गुदाद्वार, योनिद्वारा Vaginal Creaks, आंखों, होठों तथा नाक के त्वचा और श्लेष्मिक झिल्ली के मिलन वाले किनारों में जख्म, फटन, चिटकन, दरार, Creak का सफल एवं आसान होम्योपैथिक इलाज

लेखक: डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
8561955619, 14.10.2018



अनेक लोगों को उनकी त्वचा और श्लेष्मिक झिल्ली के मिलने वाले हिस्सों अर्थात किनारों पर क्रेक या फटन या जख्म हो जाते हैं, कभी न भरने वाली दरारें पड़ जाती हैं। जो बाद में अनेक बार दर्दनाक या लाइलाज रूप धारण कर लेते हैं। ऐसे पीड़ित लोगों को आधुनिक चिकित्सा पद्धति में संतोषजनक समाधान नहीं मिल पाता है, तब वे थक-हारकर आयुर्वेद एवं होम्योपैथी में समाधान तलाशते हैं। मैंने ऐसे कई दर्जन पेशेंट्स का सफल उपचार किया है। सर्वसाधारण की जानकारी हेतु बतलाया जाना अवश्यक है कि होम्योपैथी में नाइट्रिक एसिड या एसिड नाइट्रिक नाम से जानी जाने वाली दवाई का इस प्रकार के रोगी की बीमारी की स्थिति एवं अवस्थानुसार, उचित शक्ति में सेवन कराने से आश्चर्यजनक परिणाम मिलते हैं।

कुछ उदाहरण:
गुदाद्वार, योनिद्वारा, आंखों, होठों तथा नाक के त्वचा और श्लेष्मिक झिल्ली के मिलन वाले किनारों पर जख्म, फटन, चिटकन एवं दरार। जिन्हें त्वचा का क्रेक होना भी कहा जा सकता है।

इस प्रकार की सभी तकलीफों में लक्षणानुसार होम्योपैथी की नाइट्रिक एसिड नामक दवाई अकेली ही या रटानिया के साथ तथा कुछ बॉयोकैमिक साल्ट्स के साथ मिलकर आरोग्य प्रदान करती है।

अत: ऐसी तकलीफों से पीड़ित लोगों को निराश होने की जरूरत नहीं है। यह समस्या लाइज नहीं है। अपने निकट के किसी अनुभवी होम्योपैथ से सम्पर्क किया जा सकता है।

यदि आप किसी लाइलाज समझी जाने वाली तकलीफ के कारण लम्बे समय से बीमार या अस्वस्थ या परेशान हैं तो निरामय उपचार हेतु आपके निकट के किसी आयुर्वेद और, या होम्योपैथी के डॉक्टर से सम्पर्क करें। साथ ही *अनेकानेक स्वास्थ्य सम्बन्धी विषयों की अधिक जानकारी और रोगियों के अनुभवों की जानकारी हेतु हमारी निम्न वेबसाइट पर विजिट/क्लिक करके स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बने:*


>>> *Online Doctor* P. L. Meena: Health Care Friend and Marital Dispute Consultant (स्वास्थ्य रक्षक सक्षा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार ), Mobile & WhatsApp No.: 8561955619, *Fix Time to Call: Between 10 AM to 10 PM Only.+‎2nd Mobile: 9875066111*
चिकनगुनिया/डेंगू-Chikungunya / Dengue

इन दिनों चिकनगुनिया/डेंगू का प्रकोप फैलता ही जा रहा है। जिसका समय पर उपचार नहीं होने या रोगी की प्रॉपर देखरेख नहीं होने पर अनेक बार जीवन के लिये खतरा बन सकता है। देशी जड़ी बूटियों से निर्मित चिकनगुनिया/डेंगू नाशक काढा इसके लिये कारगर उपचारक/प्रतिरोधक दवा सिद्ध होती है।



1. नीम गिलोय की चार इंच लम्बी मोटी डंडी।
(यदि गिलोय नीम चढी नहीं मिले तो दो पत्ते नीम के मिलायें।)
2. तुलसी (काली तुलसी अधिक लाभकारी) के मध्यम आकार के पांच पत्ते।
3. तीन काली मिर्च।
4. मूंगफली के एक दाने के बराबर ताजा अदरक।
5. चार गुणा चार इंच साइज का पपीता का ताजा पत्ता।

उक्त सभी को पीसकर 400 मिलीलीटर पानी में उबालें 100 मिलीलीटर रहने पर रोगी को सुबह नाश्ते से 30 मिनट बाद, दोपहर भोजन से 30 मिनट बाद एवं शाम भोजन/डिनर से 30 मिनट बाद, 5-7 दिन तक पिलायें। इसके सेवन से 40 मिनट बाद तक कुछ नहीं खिलायें तो अच्छे परिणाम मिलेंगे।

यदि आप किसी लाइलाज समझी जाने वाली तकलीफ के कारण लम्बे समय से बीमार या अस्वस्थ या परेशान हैं तो निरामय उपचार हेतु आपके निकट के किसी आयुर्वेद और, या होम्योपैथी के डॉक्टर से सम्पर्क करें। साथ ही *अनेकानेक स्वास्थ्य सम्बन्धी विषयों की अधिक जानकारी और रोगियों के अनुभवों की जानकारी हेतु हमारी निम्न वेबसाइट पर विजिट/क्लिक करके स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बने:*

http://www.healthcarefriend.in

>>> *Online Doctor* P. L. Meena: Health Care Friend and Marital Dispute Consultant (स्वास्थ्य रक्षक सक्षा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार ), Mobile & WhatsApp No.: 8561955619, *Fix Time to Call: Between 10 AM to 10 PM Only.+‎2nd Mobile: 9875066111*
पथरी तोड़क व्हीट ग्रास एवं नींबू ज्यूस (Stone Breaker Wheatgrass and Lemon Juice)

लेखक: डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
08 अक्टूबर, 2018, +91 8561955619
सावधानी Caution: पथरी के इलाज के साथ कुछ परहेज बहुत जरूरी हैं। क्योंकि किडनी की पथरी में जितनी जरूरत इसके तत्काल इलाज की होती है, उतनी ही जरूरत कुछ खाद्यों/पेयों से परहेज की भी होती है। जिससे के पथरी बढ़े नहीं और दवाइयों के सेवन से धीरे-धीरे पथरी आसानी से घुल जाए। अत: पथरी से पीड़ित रोगी को निम्न परहेज करने जरूरी हैं:—

  • 1. बीज वाले खाद्य पदार्थों जैसे टमाटर, मिर्च आदि नहीं खाने चाहिये या बहुत कम खाने चाहिये।
  • 2. सोडियम की वजह से भी पथरी बढ़ती है। इसलिये नमक का प्रयोग ज्यादा न्यनतम करें और हाई सोडियम वाले खाद्य पदार्थ जैसे बादाम, मूंगफली आदि बिलकुल भी नहीं खायें।
  • 3. अंडा, मीट, मछली, पालक, चुकंदर, चॉकलेट, चाय, पालक, गैहूं का चौकर, स्ट्राबेरी आदि नहीं खायें तथा कोका कोला का सेवन नहीं करें।

गैहूं का जवारा अर्थात व्हीट ग्रास (Wheatgrasss) को पानी में अच्छी तरह उबाल कर, इसमें नींबू का रस मिक्स करके दिन में 2 बार खाली पेट इसका सेवन करने से गुर्दे से पथरी टूटकर बाहर निकल जायेगी। मूत्राशय कि पथरी के लिए तो यह अच्छा परिणामदायी पेय माना गया है। इसके अलावा इसका सेवन किडनी से जुड़ी अनेक बीमारियों को भी दूर करता है। इसके रस के सेवन से शारीरिक शक्ति तथा रोग प्रतिरोधक शक्ति में अपार वृद्धि होती है। इसके विधिवत सेवन से कैंसर, हैपेटाइटिस, एलर्जी, चर्मरोग, अपच आदि अनेकों रोगों/तकलीफों से बचा जा सकता है।
  

गेहूँ के ज्वारे का रस: गेहूँ के ज्वारे से रस निकालते समय यह ध्यान रहे कि गेहूँ की पत्तियों में से नीचे का जड़ वाला सफेद हिस्सा काटकर फेंक दे। यह ध्यान रहे कि जिस ज्वारे से रस निकाला जाय उसकी ऊंचाई अधिकतम पांच से छः इंच ही हो। केवल हरे हिस्से का ही रस सेवन करना विशेष लाभकारी होता है। रस निकालने के पहले ज्वारे को अच्छ से धो लेना चाहिये।
उपरोक्त पेय के साथ में हमारे द्वारा अनेक महत्वपूर्ण ऑर्गेनिक जड़ी-बूटियों से निर्मित Stone Dissolvent Powder (पथरी घोलक पाउडर) भी रोगियों को पीने को दिया जाता है। इन दोनों के सेवन से एक से दो महिने में 90 फीसदी से अधिक रोगियों को किडनी की पथरी से मुक्ति मिल जाती है। यद्यपि बहुत बड़ी, सख्त/कठोर, विकृत आकार (Distorted Shape/Size) की पथरी के मामलों में समय अधिक लग सकता है। पथरी के पेशाब नली में फंस जाने सहित कुछ अत्यधिक पीड़ादायक आपवादिक मामलों में रोगी को सर्जरी करवाने की जरूरी भी पड़ सकती है।
नोट: किसी भी रोगी को खुद अपना इलाज करने का खतरा नहीं उठाना चाहिये। क्योंकि पथरी के आकार (Shape/Size) के अनुसार उचित दवाई एवं दवाई की सही मात्रा का निर्धारण अनुभवी चिकित्सक ही कर सकता है।

यदि आप किसी लाइलाज समझी जाने वाली तकलीफ के कारण लम्बे समय से बीमार या अस्वस्थ या परेशान हैं तो निरामय उपचार हेतु आपके निकट के किसी आयुर्वेद और, या होम्योपैथी के डॉक्टर से सम्पर्क करें। साथ ही *अनेकानेक स्वास्थ्य सम्बन्धी विषयों की अधिक जानकारी और रोगियों के अनुभवों की जानकारी हेतु हमारी निम्न वेबसाइट पर विजिट/क्लिक करके स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बने:*
>>> *Online Doctor* P. L. Meena: Health Care Friend and Marital Dispute Consultant (स्वास्थ्य रक्षक सक्षा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार ), Mobile & WhatsApp No.: 8561955619, *Fix Time to Call: Between 10 AM to 10 PM Only.+‎2nd Mobile: 9875066111*
प्रमेह (Spermatorrhoea): पुरुषों और विशेषकर युवकों के पौरुष का दुश्मन, लेकिन इसका इलाज संभव है!

लेखक: डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश',
04 अक्टूबर, 2018, +91 8561955619

प्रमेह पुरुषों, विशेषकर युवकों का रोग है। प्रमेह का प्रमुख कारण अजीर्ण, कब्ज एवं पाचनतंत्र की खराबी होती है। प्रेमिका या किसी युवती को याद करने या उसका स्पर्श करने, कामुक फोटो/फिल्म देखने, कामुक बातें करने आदि कारणों से ही प्रमेह से पीड़ित रोगी का वीर्यपात हो जाता है। अर्थात बिना सेक्स किये ही अपने आप वीर्य निकल जाता है। रोगी शिकायत करता है कि शौच/मलत्याग के समय या मलत्याग के समय जोर लगाने पर, विशेषकर सुबह के समय मूत्र त्याग से पहले, वीर्य/धात/धातु की कुछ बूंदें अपने आप निकल जाती हैं।

उपरोक्त कारणों से रोगी को पिंडलियों और कमर में दर्द रहने लगता है। उसे मानसिक एवं शारीरिक दुर्बलता अनुभव होती है। किसी काम में मन नहीं लगता। हमेशा सुस्ती बनी रहती है। रोगी उनींदा सा पड़ा रहता है। याददाश्त भी कमजोर हो जाती है। बहुत जरूरी, बल्कि अत्यावश्यक कार्यों को करने का भी मन नहीं करता है। उसका स्वभाव चिड़चिड़ा हो जाता है। स्त्री के नाम से ही उसे घबराहट होने लगती है।

रोगी के मन में आशंका बनी रहती है कि वह अपनी प्रेमिका या पत्नी के साथ सेक्स कर भी पायेगा या नहीं? अधिकतर मामलों में सेक्स शुरू करने से पहले ही रोगी का वीर्यपात हो जाता है। अत्यधिक हस्तमैथुन करने और हस्तमैथुन करने के दौरान या बाद में स्वप्नदोष के बाद ऐसी स्थिति उत्पन्न होती देखी गयी है। इसके अलावा अत्यधिक नशा करने के दुष्पपरिणामस्वरूप भी इस प्रकार की समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

यहां समझने वाली सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस प्रकार की तकलीफों से ग्रसित रोगियों के मन में अनेक तरह की आधारहीन, लेकिन उनको सच लगने वाली भ्रांतियां उनके अवचेतन मन में (अंदर तक बैठ) स्थापित हो चुकी होती हैं। किसी ऊंची इमारत को नीचे से देखने पर या ऊपर/ऊंची इमारत से नीचे देखने पर अत्यधिक डर लगने लगता है। पुल पार करते समय डर लगता है। मिठाई या नमक खाने की उत्कट (Passionate) इच्छा उत्पन्न होने लगती है।

इन सबके कारण रोगी को लगने लगता है, बल्कि उसको सच में अनुभव होता है कि उसका वीर्य पानी जैसा पतला हो चुका है। लिंग की नशें कमजोर तथा शिथिल हो चुकी हैं। लिंग में टेढापन आ गया है। इन सबके साथ रोगी का पाचन तंत्र भी बुरी तरह से खराब हो चुका होता है। कुछ रोगियों को बवासीर/पाइल्स, फिश्चुला/भगंदर, रैक्टम कॉलैप्स/गुदाभ्रंश की समस्या भी होने लगती है।

यहां सबसे महत्वपूर्ण बात जो मैंने अपने अनुभव में पायी है। ऐसे यौन रोगियों के मानसिक विकारों का उपचार किये बिना, उन्हें शारीरिक रूप से स्वस्थ नहीं किया जा सकता है। मगर बहुत कम रोगी इस बात को समझना चाहते हैं। इस कारण वे यहां-वहां लुटते-पिटते रहते हैं और अनेक तो जवानी में ही वृद्ध नजर आने लगते हैं। अत: दवाइयों के साथ-साथ रोगी की काउंसलिंग पहली जरूरत होती है। (Therefore, counseling of patients along with medicines is first required.) मगर यहां फिर से एक बड़ी समस्या यह है कि अनुभवहीनता और, या समयाभाव के कारण डॉक्टर काउंसलिंग पर ध्यान नहीं देते हैं या डॉक्टर्स को काउंसलिंग के लिये वांछित सेवाशुल्क अदा करने में रोगी असमर्थ होते हैं।

उपरोक्त प्रकार की मनोशारीरिक यौन तकलीफों से परेशान/पीड़ित पुरुषों/युवकों की संख्या छोटी नहीं है, बल्कि इनकी संख्या बहुत ज्यादा है।

मैं ऐसे रोगियों का उपचार करते समय समुचित परामर्श के साथ शुद्ध देशी ऑर्गेनिक जड़ी-बूटियां, बॉयोकैमिक पाउडर्स एवं होम्योपैशिक दवाइयों का सेवन करवाता हूं।

सुखी एवं सफल दाम्पत्य जीवन के लिये मानसिक एवं शारीरिक रूप से स्वस्थ होना पहली अनिवार्य शर्त है। अत: मानसिक रुग्ण ग्रंथियों से मुक्त हो जाने वाले, तकरीबन सभी रोगी पुरुष प्रमेह की तकलीफ से पूर्णत: स्वस्थ हो जाते हैं, जबकि मानसिक रूप से अपने आप को असाध्य या लाइलाज बीमारी के रोगी मान चुके, रोगियों को ठीक करना सबसे बड़ी चुनौती होती है। जिसके लिये दवाइयों से ज्यादा लगातार काउंसलिंग की जरूरत होती है, मगर काउंसलिंग में जो वक्त खर्च होता है, उसकी कीमत अदा नहीं कर पाने वालों में से अधिकतर हमेशा को मनोशारीरिक यौन रोगी बने रहते हैं। खुद को नपुंसक और नामर्द पुरुषों की श्रेणी में शामिल कर चुके ऐसे पुरुषों द्वारा इलाज नहीं हो पाने के लिये किसी चिकित्सक को दोषी ठहराना भी उनकी मानसिक बीमारी ही है।

लक्षणों पर आधारित/निर्वाचित होम्योपैथी की सुसंगत दवाइयों में इतनी प्रबल आरोग्यकारी ताकत होती है, जिससे बहुसंख्यक मनोरोगियों की मनोस्थिति बदली जा सकती है, लेकिन इसमें भी चिकित्सक का बहुत सा समय खर्च होता है।
याद रखने लायक अंतिम न तो कोई चिकित्सक मुफ्त मिल सकता है और न ही कोई चिकित्सा सम्पूर्ण होती है, क्योंकि स्वस्थ होने के लिये प्रकृति का सहयोग भी जरूरी होता है।

इस लेख का प्राथमिक और अंतिम लक्ष्य प्रमेह से पीड़ित रोगियों को तीन बातें समझाना है।
पहली: प्रमेह केवल शारीरिक ही नहीं, बल्कि मानसिक रोग भी है। दूसरी: प्रमेह का रोग लाइलाज नहीं है। औरतीसरी: प्रमेह के इलाज के लिये रोगी को अपने मन में यह दृढ विश्वास होना अनिवार्य है कि वह ठीक हो सकता है।
यदि आप किसी लाइलाज समझी जाने वाली तकलीफ के कारण लम्बे समय से बीमार या अस्वस्थ या परेशान हैं तो निरामय उपचार हेतु आपके निकट के किसी आयुर्वेद और, या होम्योपैथी के डॉक्टर से सम्पर्क करें। साथ ही *अनेकानेक स्वास्थ्य सम्बन्धी विषयों की अधिक जानकारी और रोगियों के अनुभवों की जानकारी हेतु हमारी निम्न वेबसाइट पर विजिट/क्लिक करके स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बने:*



>>> *Online Doctor* P. L. Meena: Health Care Friend and Marital Dispute Consultant (स्वास्थ्य रक्षक सक्षा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार ), Mobile & WhatsApp No.: 8561955619, *Fix Time to Call: Between 10 AM to 10 PM Only.+‎2nd Mobile: 9875066111*
मक्का (Corn) : परम्परागत औषधीय उपयोग

लेखक: डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'1-परिचय (Introduction): मक्का की खेती करना या मक्का घर के पास खाली जगह पर उगाना बहुत सरल है। इसकी देखरेख अधिक नहीं करनी पड़ती है और इसकी उपज भी अच्छी होती है। मक्का के टिक्कड़ मोटी रोठियां बनती हैं। भारत के अनेक क्षेत्रों में आदिवासी तथा ग्रामीण लोग मक्के के रोटी, मक्के के पानिये और उड़द के आटे की भुजिया के साथ में भोजन में प्रयोग करते हैं। शुद्ध मक्का के आटे के या मक्का को बेसन या दूसरी दालों में मिलाकर अनेक तरह के पकौडे़ तथा दूसरे पकवान बनाये जाते हैं। पकने से पहले नर्म—नर्म ताजे मक्के के भुट्टे सेंककर खाने का आनंद तो अपने आप में अनौखा होता है। मक्के के सूखे दाने की खील भी बनाये जाते हैं। जिन्हें सिनेमा हालों में ऊंची कीमत पर बेचा जाता है। इन सबसे बढकर मक्का के अनेक औषधीय उपयोग भी हैं।

2-पोषक तत्व: भुट्टे के दानों में बहुत सारा मैग्नीशियम, आयरन, कॉपर, विटामिन ए, विटामिन बी 9, फोलिक एसिड, विटामिन सी और फॉस्फोरस पाया जाता है। जो स्वास्थ्य वर्धक है। अत: इसका सेवन करना चाहिये।
प्रत्येक 100 ग्राम मक्का में उपस्थित पोषक तत्व:
(Nutritional value of corn per 100 gm)
ऊर्जा         : 360 किलोजूल (86 किलोकैलोरी)
प्रोटीन        : 3.27 ग्राम
फाइबर       : 2 ग्राम
विटामिन A   : 9 μg
विटामिन B1 : 0.155 mg
विटामिन B2 : 0.055 mg
विटामिन B3 : 1.77 mg
विटामिन C   : 6.8 mg
आयरन       : 0.52 mg
मैग्नीशियम    : 37 mg
पोटेशियम    : 270 mg
जिंक         : 0.46 mg

*>>>>नि:शुल्क स्वास्थ्य परामर्श हेतु Mobile & WhatsApp No.: 8561955619, *Fix Time to Call: Between 10 AM to 10 PM Only.*

3-सामान्य गुण (Property): मक्का अत्यन्त रूक्षा (रूखा), कफ और पित्तनाशक, रुचि को बढ़ाने वाला, दस्तों को रोकने वाला होता है। वायु पैदा करने वाला (बढ़ाने वाला) होता है।

4-हानिकारक प्रभाव (Harmful Effects): मक्का पचने में गरिष्ठ अर्थात भारी है। अत: जिसका शरीर बलवान हो और जिसकी पाचन शक्ति तेज या अच्छी हो, वही इसको आसानी से पचा सकता है। कमजोर पाचन-शक्ति वालों के लिए मक्का हानिकारक है। यह शरीर की नसों को शिथिल करता है।

5-मक्का का तेल: मक्का का तेल भी निकाला/बनाया जा सकता है। जो बेहद स्वास्थ्यवर्धक है।

6-तेल को निकालने की विधि: ताजी नर्म-दूधिया मक्का के दाने पीसकर कांच की शीशी में भरकर खुली हुई शीशी धूप में रख दें। कुछ दिनों में शीशी में से दूध सूखकर उड़ जाएगा और तेल मात्र शीशी में शेष रह जाएगा। इस तेल को छानकर दूसरी साफ शीशी में भरकर सुरक्षित रख लें और इस तेल से मालिश किया करें। इस तेल की कमजोर बच्चों के पैरों पर मालिश करने से बच्चे के पैरों में शक्ति आती है और बच्चा जल्दी चलने लगता है। 1 चम्मच तेल में शर्बत मिलाकर पीने से शारीरिक बल भी बढ़ता है।

7-भुट्टे के रेशों का ड्रिंक बनाने की विधि और रेशों के लाभ:
(1) एक गिलास पानी को उबलने के लिये रख दें। पानी उबलने के बाद, इसमें भुट्टे के रेशों को डालकर 15 मिनट तक और उबालें। गुनगुना होने पर इसमे चुटकी भर काला नमक और नींबू निचोड़कर पियें।
(2) काच के बर्तन में एक गिलास साफ पानी में भुट्टे के रेशे डालकर दिनभर के लिये धूप में रख दे। शाम को इस पानी में एक चम्मच शहद मिलाकर पियें।
(3) भुट्टे के रेशों का ड्रिंक किडनी को हेल्दी रखने और कई बीमारियों से बचाने में हेल्पफुल होता है।
(4) भुट्टे के बालों/रेशों में भी कई हेल्दी न्यूट्रिएंट्स होते हैं जो अनेक बीमारियों से बचाव में मददगार होते हैं। जो अनेक बीमारियों से लड़ने में सहायता करते हैं।
(5) संक्रमण से सुरक्षा: इनका सेवन ब्लैडर/मूत्राशय में इंफेक्शन पैदा करने वाले माइक्रोब्स को मारते हैं। अत: मूत्राशय के संक्रमण की संभावना न्यूनतम हो जाती है।
(6) भुट्टे के रेशों से बना ड्रिंक फैट बर्निंग प्रोसेस को तेज करता है।
इससे मोटापे से बचाव होता है।
(7) पथरी के उपचार में सिल्क को पानी में उबालकर बनाये गये काढ़े का प्रयोग होता है।
(8) मक्के के बाल (Corn Silk) का उपयोग पथरी रोगों की चिकित्सा मे होता है। पथरी से बचाव के लिए रात भर सिल्क को पानी मे भिगोकर सुबह सिल्क हटाकर पानी पीने से लाभ होता है।

*>>>>नि:शुल्क स्वास्थ्य परामर्श हेतु Mobile & WhatsApp No.: 8561955619, *Fix Time to Call: Between 10 AM to 10 PM Only.*

8-मक्का का विभिन्न रोगों में उपचार (Treatment of various diseases): पेट एवं पाचन: मक्का मनुष्य के पाचन तंत्र को मजबूती प्रदान करता है। जिससे भोजन अच्छे से पचता है और भूख भी अच्छी लगती है। मक्का में पेट यानि आमाशय को ताकत देने का बहुत अच्छा गुण पाया जाता है। अत: यदि गेहूँ के आटे के स्थान पर मक्के के आटे का प्रयोग करें तो यह लीवर के लिये अधिक लाभकारी है। यह प्रचूर मात्रा में रेशे से भरा हुआ है इसलिये इसे खाने से पेट का डायजेशन/चाचन अच्छा रहता है। मक्का कब्ज को दूर करता है। कब्ज से कौन राहत नहीं पाना चाहता? मक्का/कॉर्न में जो फाइबर होता है, वह मलाशय या कोलन/पेट में जमे हुए खाद्य पदार्थों को निकालने में सहायता कर कब्ज के कष्ट से राहत दिलाता है। अत: मक्का के सेवन से कब्ज, बवासीर और पेट के कैंसर के होने की संभावना कम हो जाती है। भुट्टे के रेशे और रेशों से बने ड्रिंक में मौजूद फाइबर भी पाचन क्रिया को बेहतरीन रखते हैं। मक्का का भुट्टा खाने से मुंह के अंदर अधिक लार बनने लगती है, जिससे पंचान तंत्र सही हो जाता है।


9-शक्तिवर्धक: मक्का खाने से शरीर को काफी लाभ मिलता है। इसे मक्का आमाशय को मजबूत बनता है। मक्का खून को बढ़ाने वाला (रक्त-वर्धक) होता है।

10-खांसी, कुकर-खांसी और जुकाम: मक्का के भुट्टे को जलाकर उसकी राख पीस लें, इसमें स्वादानुसार सेंधानमक मिला लें, फिर रोजाना 4 बार चौथाई चम्मच लेकर गर्म पानी से फंकी लें। इसके सेवन से खांसी, कुकर-खांसी और जुकाम में लाभ मिलता है।

11-पेशाब में जलन होना: ताजा मक्का के भुट्टे को पानी में उबालकर उस पानी को छानकर मिश्री मिलाकर पीने से पेशाब की जलन और गुर्दों की कमजोरी दूर होती है।

12-यक्ष्मा (टी.बी.): टी.बी. के रोग से पीड़ित व्यक्ति को मक्का की रोटी खिलाने से आराम मिलता है।

13-पथरी: पथरी के उपचार के लिये मक्का के अनेक उपयोग हैं—

(1) भुट्टे के बाल का उपयोग पथरी से बचाव के लिए किया जाता है। अगर भुट्टे के बाल को रात भर पानी मे भिगो दें और सुबह  मक्का के सारे बाल हटाकर उस पानी को पी लें। इससे लाभ मिलता है।
(2) मक्का के भुट्टे और जौ को जलाकर राख कर लें। दोनों को अलग-अलग पीसकर अलग-अलग शीशियों में भरकर रख लें। उन शीशियों में से दो चम्मच मक्का की राख और दो चम्मच जौ की राख को एक कप पानी में घोल लें, फिर छानकर इस पानी को पी लें। ऐसा करने से पथरी गल जाती है और पेशाब खुलकर आता है।
(3) मक्के को तथा जौ को अलग-अलग जलाकर भस्म (राख) बनाकर पीस लें तथा अलग-अलग बर्तन में रखें। रोजाना सुबह मक्के का 2 चम्मच भस्म (राख) 1 कप पानी में मिलाकर पीयें तथा शाम को जौ का भस्म (राख) 2 चम्मच एक कप पानी में मिलाकर पीने से पथरी ठीक हो जाती है।

*>>>>नि:शुल्क स्वास्थ्य परामर्श हेतु Mobile & WhatsApp No.: 8561955619, *Fix Time to Call: Between 10 AM to 10 PM Only.*

14-उल्टी: मक्का के भुट्टे में से दाने निकालकर उन्हें जलाकर राख कर लें, फिर इस राख को आधा ग्राम लेकर शहद के साथ चाटें। इससे कै (उल्टी) आना तुंरत ही बन्द होती है।

15-काली/सूखी खांसी: मक्का के बीज निकाले हुए भुट्टे को जलाकर राख कर लें। इसके 1-2 ग्राम राख को शहद के साथ दिन में 2 बार सेवन करने से काली खांसी दूर हो जाती है।

16-खांसी:
(1) मक्का को जलाकर उसकी राख को इकट्ठा कर लें, फिर इसमें लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग की मात्रा में पिसा हुआ कोयला और कालानमक मिलाकर रख दें। इसे शहद के साथ सुबह-शाम चाटने से कालीखांसी और कुकुर खांसी भी दूर हो जाती है। 
(2) मक्का के भुट्टे को जलाकर उसकी राख को पीस लें। इसमें थोड़ा-सा सेंधानमक मिला दें। इसके आधा-आधा चम्मच चूर्ण गर्म पानी के साथ सेवन करने से खांसी में लाभ मिलता है।
(3) गुल्ली के दाने निकालने के बाद जो बीच का हिस्सा बचे, उसको सुखाकर जला लें और राख बना लें। इस राख को प्रतिदिन गुनगुने पानी के साथ फांकने से खांसी का इलाज होता है। खांसी कैसी भी हो यह चूर्ण लाभ देता ही है। यहां तक कि कूकर खांसी में भी बड़ी राहत मिलती है।

17-जुकाम: मक्के के भुट्टे को पूरी तरह से जलाकर उसकी राख बना लें, फिर इसमें स्वाद के अनुसार सेंधानमक मिलाकर रोजाना 4 बार फंकी लें। इससे जुकाम ठीक हो जाता है। इसके अलावा जब भुट्टे खाएं तो गुल्ली के दानों को खाने के बाद जो भुट्टे का बीच का भाग बचता है, उसे फेंकें नहीं, बल्कि उसे बीच में से तोड़ लें और उसे सूंघें। इससे जुकाम में बड़ा फायदा मिलता है। इसके बाद में भी फेंकें नहीं, बल्कि इसे जानवर को खाने के लिए डाल सकते हैं।

18-मूत्ररोग:
(1) लगभग 30 ग्राम मक्का के सुनहरी बालों को 250 ग्राम पानी में उबालें और जब 60 ग्राम रह जाये तो छानकर ठंडा करके पी लें, इससे पेशाब खुलकर आता है। अगर ताजे भुट्टे को छिलके सहित पानी में उबाल लें और फिर उस पानी को छानकर मिसरी मिलाकर पी लें। तो इसे पीने से पेशाब की जलन धीरे-धीरे दूर हो जाती है।
(2) ताजा मक्का के भुट्टे को पानी में उबालकर उस पानी को छानकर मिश्री मिलाकर पीने से पेशाब की जलन व गुर्दों की कमजोरी हो जाती है।

19-गुर्दे के रोग: मक्के के भुट्टे के 20 ग्राम बालों को 200 मिलीलीटर पानी में डालकर उबालें। जब 100 मिलीलीटर पानी ही शेष बचे तब छानकर पीने से गुर्दे के रोग ठीक हो जाते हैं।

20-प्रदर रोग: मक्का की छूंछ/डंठल की राख शहद के साथ सेवन करने से प्रदर रोग में लाभ होता है।

21-मोटापा कम करे: भुट्टे के बालों/रेशों के सेवन से कोलेस्ट्रॉल (Cholesterol) कंट्रोल में रहता है और मोटापा भी कम होता है। इसलिए यह दिल की बीमारियों से भी रक्षा करता है।

22-दिल की कमजोरी: मक्का के दाने निकली हुई भुट्टे की डण्डी (भुट्टे का बीच का भाग) को जलाकर इसकी राख को पीसकर रख लें। इसके आधा ग्राम चूर्ण को ताजा मक्खन के साथ खाने से दिल की कमजोरी दूर होती है। मक्का के भुट्टों के रेशों का ड्रिंक शुगर और कोलेस्ट्रोल लेवल को कण्ट्रोल करता है, इससे हार्ट की समस्या से बचाव होता है। भुट्टा दिल की बीमारी को भी दूर करने में सहायक है, क्योंकि इसमें विटामिन सी, कैरोटिनॉइड और बायोफ्लेवनॉइड पाया जाता है। यह कोलेस्ट्रॉल लेवल को बढ़ने से बचाता है और शरीर में खून के प्रवाह को भी बढ़ाता है।

23-हड्डियां मजबूत: भुट्टे में विटामिन A, B और E, मिनरल्स और कैल्शियम काफी मात्रा में पाये जाते हैं। मक्का में जिन्क, फॉस्फोरस, मैग्नेशियम और आयरन होता है, जो हड्डियों को मजबूती प्रदान करने में अहम् भूमिका निभाते हैं। जिससे हड्डियां मजबूत बनती हैं। यहाँ तक कि मक्का का सेवन गठिया या अर्थराइटिस जैसे रोगों के होने की संभावना को भी कम करता है।

24-दृष्टि वर्धक: मक्का में बीटा-कैरोटीन होता है, जो विटामिन ए के उत्पादन में सहायता करता है। यह आँख संबंधी समस्याओं को कम करता और दृश्य-शक्ति को उन्नत करता है। साथ ही बढ़ती उम्र में होने वाली रतौंधी या मैक्युलर डीजनरेशन (Macular Degeneration* =जिसका परिणाम दृष्टि में धुंधलापन होता है। यह अंधापन पैदा कर सकता) की संभावना को कम करता है।
*A degenerative condition affecting the central part of the retina (the macula) and resulting in distortion or loss of central vision. It occurs especially in older adults, in which case it is called age-related macular degeneration.-एक degenerative स्थिति रेटिना (मैक्यूला) के केंद्रीय हिस्से को प्रभावित करता है और जिसके परिणामस्वरूप केंद्रीय दृष्टि के विरूपण या नुकसान होता है। यह विशेष रूप से पुराने वयस्कों में होता है, इस मामले में इसे आयु से संबंधित मैकुलर अपघटन कहा जाता है।

25-एनर्जी: मक्का एनर्जी प्रदान करता है। कार्बोहाइड्रेड एनर्जी का स्रोत होता है। मक्का/कॉर्न में कार्बोहाइड्रेड प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, जो शरीर को भरपूर मात्रा में एनर्जी तो देता ही है साथ ही पेट को देर तक भरा हुआ रखता है। भुट्टे के तेल को पीने से शरीर शक्तिशाली होता है। हर रोज एक चम्मच तेल को चीनी के बने शर्बत में मिलाकर पीने से बल बढ़ता है।

26-कोलेस्ट्रॉल फाइटर: भुट्टे को एक बेहतरीन कोलेस्ट्रॉल फाइटर माना जाता है, जो दिल के मरीजों के लिए बहुत अच्छा है। यह कोलेस्ट्रॉल लेवल को बढने से बचाता/रोकता है और शरीर में खून के फ्लो/बहाव को भी बढाता है। यह खून की नलियों में कोलेस्ट्रोल जमा होने से रोकता है। साथ ही यह धमनियों में जमें कॉलेस्ट्रॉल को बाहर निकाल देता है।

27-बच्चों के लिये: बच्चों के विकास के लिए भुट्टा बहुत फायदेमंद माना जाता है। भुट्टे के तेल से बच्चों की मालिश की जाती है।

28-कैंसर फाईटर: भुट्टे को सेंकने या पकाने के बाद इसके 50 प्रतिशत एंटी-ऑक्सीडेंट्स गुण बढ़ जाते हैं। ये बढती उम्र को रोकते हैं और यह कैंसर से लड़ने में मदद करता है। पके हुए भुट्टे में फेरूलिक एसिड होता है जो कि कैंसर जैसी बीमारी में लड़ने में बहुत मददगार होता है। इसके अलावा भुट्टे में मिनरल्स और विटामिन प्रचुर मात्रा में पाये जाते हैं।

29-गर्भावस्था में उपयोगी: मक्का का सेवन प्रेगनेंसी/गर्भावस्था में भी बहुत लाभदायक होता है। मक्का में जो विटामिन बी9 और फॉलिक एसिड होता है, वह गर्भवती महिलाओं के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है। मक्का एक ऐसा हेल्दी स्नैक्स/नाश्ता है, जो वजन को कंट्रोल करने के साथ-साथ आपको स्वस्थ/हेल्दी और फिट एण्ड फाइन बनाता है। इसलिये गर्भवती महिलाओं को इसे अपने आहार में अवश्य शामिल करना चाहिये। इसमें फोलिक एसिड पाया जाता है। जिसकी कमी से होने वाला बच्चा अंडरवेट हो सकता है और कई अन्य बीमारियों से पीड़ित भी हो सकता है। अत: मक्का का सेवन इन तकलीफों से प्रतिरक्षा करता है। बच्चों के विकास के लिए मक्का या ताजा भुट्टा बहुत फायदेमंद माना जाता है।

*>>>>नि:शुल्क स्वास्थ्य परामर्श हेतु Mobile & WhatsApp No.: 8561955619, *Fix Time to Call: Between 10 AM to 10 PM Only.*

30-एनीमिया-रक्ताल्पता (Anemia): (रक्ताल्पता=रक्त की ऑक्सीजन वाहन की क्षमता में कमी हो जाना जो रक्त में लाल रक्त कोशिकाओं की संख्‍या अथवा हीमोग्लोबिन की मात्रा में सामान्य से नीचे कमी हो जाने पर होती है) एनीमिया रोग आयरन के कमी के कारण होता है। मक्का में आयरन खूब होता है जो खून की कमी को दूर करता है। मक्का का भुट्टा आयरन का एक अच्छा स्रोत है। अगर मक्का-भुट्टे को दैनिक आहार में शामिल किया जायेगा तो इससे आयरन की कमी पूरी होने लगेगी और एनीमिया रोग से बचाव भी होगा। भुट्टा हमारे शरीर में खून की कमी को पूरी करता है। इससे हमारा खून भी साफ हो जाता है, जिससे हमारे शरीर का रंग भी साफ हो जाता है।

31-खून जमने में सहायता: विटामिन की अधिकता के कारण मक्का रक्त के जमने की क्षमता को बढ़ाता है। इससे चोट लगने पर खून कम बहता है।

32-डायबीटीज: भुट्टे के रेशे खून में इन्सुलिन की मात्रा को संतुलित रखते हैं, जिससे डायबीटीज कंट्रोल में रहता है| यह ब्लड में सुगर लेवल मेन्टेन रखता है। इसके कारण डायबिटीज से बचाव होता है।

33-चर्मरोग: मक्का में कैरोटिन होता है जो कि त्वचा के लिये बहुत फायदेमंद होता है। इसलिये मक्का दाद, खाज, खुजली आदि चर्म रोगों के लिये बहुत अच्छी दवा है। खुजली के लिए भी भुट्टे का स्टॉर्च (Starch=मांडी) प्रयोग किया जाता है। वहीं इसके सौंदर्य लाभ भी कुछ कम नहीं है।

34-त्वचा निखारे: बढ़ती हुई उम्र के कारण झुर्रियों का पड़ना और खूबसूरती में कमी आना यह समस्या सभी को बहुत परेशान करती है। इस समस्या से बचने के लिए भुट्टा ज़रूर खाएं, क्योंकि इसमें विटामिन ए, विटामिन सी और एंटी ऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं, जो झुर्रियों को आने से रोककर त्वचा को निखार प्रदान करते हैं। मक्का के स्टार्च के प्रयोग से त्वचा खूबसूरत और चिकनी बन जाती है।

35-दांत: सबसे पहली बात तो यह है कि बड़ों के साथ-साथ बच्चों को भी भुट्टे अवश्य खिलाने चाहिए, इससे उनके दांत मजबूत होते हैं।

36-सांस: गुल्ली के दाने निकालने के बाद जो बीच का हिस्सा बचे, उसको सुखाकर जला लें और राख बना लें। सांस के रोगों में यह बड़ा कारगर इलाज है।

37-कैसी भी खांसी: गुल्ली के दाने निकालने के बाद जो बीच का हिस्सा बचे, उसको सुखाकर जला लें और राख बना लें। इस राख को प्रतिदिन गुनगुने पानी के साथ फांकने से खांसी का इलाज होता है। खांसी कैसी भी हो यह चूर्ण लाभ देता ही है। यहां तक कि कूकर खांसी में भी बड़ी राहत मिलती है।

38-बाल: नियमित भुट्टा खाने से बाल झड़ने की समस्या खत्म हो जाती है, क्योंकि भुट्टा में काफी मात्रा में विटामिन ई तत्व मिलता है जो बालों को जड़ से मजबूत बना देता है। जिन लोगों के बालों की समस्या रहती है-जैसे बालों का झड़ना, असमय सफेद बाल आना, उनको हफ्ते में एक बार भुट्टे का सेवन जरूर करना चाहिए। भुट्ठा बालों को संपूर्ण आजादी देता है, जिससे बाल काले मजबूत और घने हो जाते हैं।

39-पढ़ाई में एकाग्रता: सभी विद्यार्थियों को हफ्ते में कम से कम एक बार भुट्टा/मक्का जरूर खाना चाहिए। क्योंकि भुट्टे में मौजूद प्रोटीन पढ़ाई में एकाग्रता को बढ़ाते हैं। इससे दिमाग भी तरोताजा रहता है। यह पढ़ने की शक्ति को भी बढ़ाता है।

40-गुर्दा एवं गुर्दे की पथरी: मक्का के भुट्टे के रेशे किडनी में जमा हुए टॉक्सिन्स और नाइट्रेट (Toxins and Nitrate) को बाहर निकाल देते हैं, जिससे किडनी स्टोन होने का खतरा समाप्त हो जाता है। यह बॉडी Toxins (विषाक्त पदार्थों) निकालकर किडनी को स्वस्थ रखता है। किडनी स्टोन के खतरे से बचाता है। मक्के के रेशों/बालों (Corn Silks) का उपयोग पथरी रोगों की चिकित्सा में होता है। पथरी से बचाव के लिये रात भर रेशों को पानी मे भिगोकर सुबह रेशे हटाकर पानी पीने से लाभ होता है। पथरी के उपचार में रेशों को पानी में उबालकर बनाये गये काढ़े का प्रयोग भी किया जाता है।

यदि आप किसी लाइलाज समझी जाने वाली तकलीफ के कारण लम्बे समय से बीमार या अस्वस्थ या परेशान हैं तो निरामय उपचार हेतु आपके निकट के किसी आयुर्वेद और, या होम्योपैथी के डॉक्टर से सम्पर्क करें।साथ ही*अनेकानेक स्वास्थ्य सम्बन्धी विषयों की अधिक जानकारी और रोगियों के अनुभवों की जानकारी हेतु हमारी निम्न वेबसाइट पर विजिट/क्लिक करके स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बने:*


>>> *Online Doctor* P. L. Meena: Health Care Friend and Marital Dispute Consultant (स्वास्थ्य रक्षक सक्षा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार ), Mobile & WhatsApp No.: 8561955619, *Fix Time to Call: Between 10 AM to 10 PM Only.+‎2nd Mobile: 9875066111*
गेदुआ की छाछ 
English: Polpala
Botanical Name: Aerva Lanat (Linn), Achranthes Lanata Linn. (Achyranthes Lanata Linn.)


Commonly known as:

Mountain knot-grass, Woolly Aerva, Woolly Illecebrum
• Bengali: ছায়া chaya
• Hindi: छाया chaya, गोरखबूटी gorakhbuti, गोरखगांजा gorakhganja, कपूरीजड़ी kapurijadi, खली khali, खरी khari
• Kannada: ಬಿಳಿ ಹಿಮ್ಡಿ ಸೊಪ್ಪು bili himdi soppu
• Konkani: तांडलो tamdlo
• Malayalam: ചെറൂള cherula
• Marathi: कापूरमाधुरी kapurmadhuri
• Punjabi: bui-kaltan
• Rajasthani: भूई bhui
• Sanskrit: अश्मःभेदः ashmahabhedah, भद्र bhadra, गोरक्षगञ्जा gorakshaganja, पाषाणभेद pashanabheda, शतकभेदी shatakabhedi
• Sindhi: bhui, jari
• Sinhalese: polpala
• Tamil: சிறுபூளை ciru-pulai, உழிஞை ulinai
• Telugu: పిండిదొండ pindidonda


---------

Bengali: Chaya.

Rajasthani: Bhui.

Sindhi: Bhui, Jari.

Punjabi: Bui -kaltan (flowers as sold in bazaars).
Duk.: Kul -ke -jar, Khul.
Trans-Indus: Asmei, Spirke, Sasai.
Sinhalese-Pol pala.
Marathi: Kapu -madhura.
Tamil: Sirru -pulay -vayr.
Telugu: Pinde-conda, Pindi-chetter.
Sanskrit: Astmabayda


Medicinal Uses: 


A decoction (काढ़ा) (the report does not specify the plant part [K]) is considered to be an efficacious diuretic and is used against catarrh (excessive discharge) of the bladder (मूत्राशय) and gonorrhea (सूजाक, प्रमेह). It is described as one of the best-known remedies for bladder and kidney stones. Ayurvedic practitioners recommend a decoction (काढ़ा) of the plant to be taken internally for a few days to dissolves the stone and to clear the urinary path.


Leaves are steeped in hot water and applied to swellings.

The juice from crushed leaves is applied to the eyes.

The roots are used to treat a headache, as a demulcent (शांतिदायक), to cure coughs and as a vermifuge (पेट के कीड़ों को दुर करने की दवा).

Roots are used for treating snakebite (सांप काटने) and constipation (कब्ज).

-x-x-x-xx-
Food
The whole plant, especially the leaves, is edible. The leaves are put into soup or eaten as a spinach or as a vegetable. The plant provides grazing for stock, a game in and chickens.

http://tropical.theferns.info/viewtropical.php?id=Aerva+lanata

Medicinal Uses:

Leaves: A leaf-decoction is prepared as a gargle for treating sore-throat and used in various complex treatments against guinea-worm. to wash Babies that have become unconscious during an attack of malaria or of some other disease are washed with a leaf decoction at the same time smoke from the burning plant is inhaled. The leaf-sap is also used for eye-complaints. An infusion is given to cure diarrhoea and in an unspecified manner at childbirth, and on sores.
पत्तियां: गले में खराश, शोथ, दाह होने पर इसकी पत्तियों को पानी में उबाल कर काढा बनायें और कोढे का का गरारा करें। गिनी-कीड़े के काटने पर होने वाली विभिन्न जटिलताओं/पीड़ाओं/परेशानियों के उपचारों में हेतु इसके पत्तों का प्रयोग किया जाता है। मलेरिया या किसी अन्य बीमारी के हमले के दौरान बेहोश हो गए शिशुओं को नहलाने/छींटे देने के लिए इसके पत्ते का काढ़ा उपयोग किया जाता है, साथ शिशुओं को ही इसके जलते हुए पौधे का धुआं सुंघाया जाता है। आंखों की शिकायतों के लिए भी इसके पत्तों-का रस उपयोग भी किया जाता है। इसके पत्तों के जलसेक/अर्क/आसव का प्रयोग दस्तों को ठीक करने और प्रसव के दौरान हुए अनिश्चित तरीके के घावों को ठीक करने के लिये किया जाता है।

Roots: The root is used in a snake-bite treatment.
जड़ें: जडों का उपयोग सांप-काटने के उपचार में किया जाता है।

Flowers: For pains in the lower part of the back leaves and flowers are reduced to ash which is rubbed into cuts on the back.
फूल: पीठ के निचले भाग में दर्द के उपचार के लिये पत्तियों और फूलों को पीस कर, कमर के कटों/जोड़ों पर मसलना चाहिये।

Spiritual: It gives protection against evil spirits, is a good-luck talisman for hunters, and safeguards the well-being of widows.

-x-x-x-x-

This herb is described as one of the best-known remedies for bladder and kidney stones.
इस जड़ी बूटी को मूत्राशय और गुर्दे के पत्थरों के इलाज के लिए सबसे प्रसिद्ध उपचारों में से एक के रूप में वर्णित किया गया है।
Ayurvedic practitioners recommend a decoction of the plant to be taken internally for a few days to dissolves the stone and to clear the urinary path.
आयुर्वेदिक चिकित्सक पत्थरी को तोड़ने के लिये और मूत्र पथ को साफ़ करने के लिए कुछ दिनों के लिए आंतरिक रूप से इसके काढे की सिफारिश करते हैं।
>>>http://www.flowersofindia.net/catalog/slides/Mountain%20Knot%20Grass.html
xxxxxxx

Aerva Lanata Herb Uses, Benefits, Cures, Side Effects, Nutrients:

https://herbpathy.com/Uses-and-Benefits-of-Aerva-Lanata-Cid2694

हुलहुल-वनौषधि परिचय
(Cleome viscosa, Dog Mustard, Yellow Spider Flower, Tickweed)

लेखक: डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'

Botanical Name: Cleome Viscosa/CLEOME VISCOSA L

Family: Cleomaceae (Spider Flower Family)
पर्यायवाची (Synonyms): Polanisia Viscosa, हुरहुर, कुत्ता सरसों, जंगली सरसों, अर्क कान्ता


आयुर्वेदिक उपयोग (Ayurvedic Uses): खरपतवार (Weed) के रूप में खेतों, मेड़ों और खुली जगह पर या जंगली क्षेत्रों में अपने आप पैदा होने वाला यह एक जंगली पौधा/जड़ी बूटी है। जो आमतौर पर तीन प्रकार का देखा/पाया जाता है, लेकिन ग्रंथकारों ने इसे दो प्रकार का ही उल्लेख किया है। जिसे पीले फूल और सफेद फूल वाली हुलहुल के नाम से जाना/महचाना जाता है। मेरे अनुभव में पीले फूल वाली हुलहुल में ही दो प्रजातियां होती हैं। जिनमें पत्तों के आकारों और डंठल के रंग में अंतर होता है। वर्तमान में हुलहुल जैसे उपयोगी औषधीय पौधों को संरक्षित करना अपने आप में चुनौती बनता जा रहा है, क्योंकि किसानों द्वारा खेती में खरपतवार नाशक दवाइयों के अंधाधुंध उपयोग के कारण यह महत्वपूर्ण तथा ऐसी ही अन्य अनेक उपयोगी जंगली बनौषधियां लगातार नष्ट/समाप्त होती जा रही है। छोटे से प्रयास के रूप में हमने जयपुर स्थित हमारे निरोगधाम में/के आपपास के जंगलों से शुद्ध आॅर्गेनिक हुलहुल को संरक्षित, संग्रहित करके उपयोग में लाया जा रहा हैं। यहां संक्षेप में हुरहुर की जनोपयोगी जानकारी प्रस्तुत है। लेकिन याद रहे इसका उपयोग करने से पहले किसी योग्य/अनुभवी चिकित्सक की राय अवश्य लें।


स्वभाव एवं गुण (Nature and Properties): स्वभाव सामान्यत: गर्म। स्वाद कड़वा, तीखा और ठंडा। पित्तकारक, लेकिन कफ तथा वात नाशक। वीर्य वर्धक। पेचिश नाशक। सभी प्रकार के चर्म रोगों में अत्यंत उपयोगी।




संकलन (Collection): सितम्बर माह के अंतिम सप्ताह से अक्टूबर के पहले-दूसरे सप्ताह के दौरान अर्थात बरसात के मौसम की समाप्ति के बाद जैसे ही धूप निकलना शूरू हो तो हुलहुल के पौधे को जड़ से उखाड़ कर और छाया शुष्क करके इसका पंचांग बनाया जा सकता है। इसी प्रकार से हरे पत्ते और पकने पर फलियों को सुखाकर बीज संग्रहित किये जा सकते हैं। संग्रहित औषधि तत्वों को ठीक से सुखाकर सूखे और हवाबंद डब्बों में सुरक्षित किया जा सकता है।




ऑर्गेनिक औषधि अधिक प्रभावी (Organic Herb More Effective): किसानों द्वारा उपज बढाने के लिये रासायनिक खाद एवं कीटनाशकों का अधिकाधिक प्रयोग किये जाने के कारण खेतों में उगने वाली हुलहुल भी प्रभावहीन या विषैली हो जाती है। जिससे वांछित उपचारात्मक परिणाम नहीं मिल पाते हैं। अत: उपचार हेतु ऑर्गेनिक पद्धति से उत्पादित हुलहुल का ही उपयोग किया जाना चाहिये। इसी कारण हमारे यहां निरोगधाम पर ऑर्गेनिक पद्धति से जड़ी-बूटियों का उत्पादन किया जाता है। 


बवासीर (पाइल्स-Piles-Hemorrhoids): इसके पत्तों को पीसकर पुल्टिस बना लें और गुदा द्वार अर्थात बवासीर पर चिपकाकर लंगोल बांध कर रखें। 4 से 7 दिन में बवासीर के बाहरी मस्से झड़कर ठीक हो जायेंगे।
यह भी पढें:

बवासीर/पाइल्स-Hemorrhoids/Piles:





आसान प्रसव (Easy Delivery): जड़ को धागे में बांधकर गर्भिणी के हाथ, सिर, कान या कमर में बांधने से प्रसव आसानी से हो जाता है, लेकिन याद रखकर प्रसव होने के तुरंत बाद इसे प्रसूता के शरीर से इसे हटा/खोल देना चाहिये। अन्यथा अनर्थ हो सकता है।

यह भी पढें:
यदि करते हो पत्नी से प्यार तो होम्योपैथिक प्रसव सुरक्षा चक्र (Pregnancy Safe-Guard) से क्यों इनकार?

काश मेरी बहन को भी प्रसव सुरक्षा चक्र (Pregnancy Safeguard) का कोर्स दिलवाया होता?



गिल्टी (Gland): सफेद फूल वाली हुलहुल के पत्तों का लेप गिल्टी पर लगाने से गिल्टी/गांठ पिघल सकती/जाती है।


चर्म रोग (Skin Disease): अस्वास्थ्यकर घावों, नासूरों, त्वचा की बीमारी, खुजली, अल्सर, कुष्ठ रोग, चमड़ी फटकर बनने वाले ब्रणों/अल्सरों पर पत्तियों को पीसकर लगाया जाता है। अनेक अनुभवी गुणीजनों का कहना है कि हुलहुल का सम्पूर्ण पौधा घाव, अल्सर, सूजन और त्वचा संक्रमण में परम्परागत इलाज के रूप प्रयोग किया जाता रहा है। बीजों, जड़ों, और पत्तियों के आसव/अर्क का उपयोग लाइलाज अल्सरों में जमा मैग्गोट नामक मुलायम लार्वा के क्लीनर/साफसफाई के रूप में उपयोग किया जाता है। घावों/फोड़ों में मवाद बनना रोकने के लिये इसकी पत्तियों को पानी में उबाल कर घावों/फोड़ों पर लगाया/धोया जाता है। यही वजह है कि अनेक क्षेत्रों के आदिवासियों द्वारा हुलहुल के पौधे को कुचल या मसल कर शरीर के किसी भी बाहरी हिस्से पर होने वाले फफोलों/छालों के उद्भेदों, संक्रमणों, चमड़ी के रोगों को नियंत्रित करने के लिये सफलतापूर्वक लगाया/प्रयोग किया जाता रहा है।


उपदंश (सिफलिस-Syphilis): एक पुरानी बैक्टीरिया संवाहक बीमारी, जो मुख्य रूप से यौन सम्बन्धों के दौरान संक्रमण से सम्पर्क में आती है, लेकिन विकासशील भ्रूण को संक्रमण से भी संयोग से भी हो सकती है। इस तकलीफ में हुलहुल की पत्तियों को पीसकर और पानी में घोलकर पीने से आराम मिलता है।


प्रमेह-सूजाक (Gonorrhea): प्रमेह या सूजाक में पुरुषों की लिंग/मूत्रमार्ग या स्त्रियों की योनि/मूत्रमार्ग में सूजन होने के साथ—साथ पनीले, पीले या सफेद द्रव्य का स्राव होता है। इस तकलीफ में हुरहुर का सेवन जहां प्रमेह नाशक है, वहीं वीर्य/शक्ति एवं स्वास्थ्य वर्धक भी है। अत: इसके बीजों के पाउडर या पंचांग पाउडर का सेवन किया जा सकता है।


ऐंठन (Cramp): हाथ-पैरों में ऐंठन होने पर हुलहुल के 50 से 70 ग्राम ताजा पत्तों को पीसकर या 5 से 10 ग्राम शुद्ध पाउडर को कुछ दिनों तक पानी में मिलाकर पीने से हाथ-पैरों में ऐंठन वाला दर्द ठीक हो जाता है।



कान दर्द (Earache/Ear Pain): पत्तियों का रस कान दर्द से छुटकारा पाने के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है। बहरेपन/कम सुनाई देने या कान से निकलने वाले पीबयुक्त/मवाद स्राव की तकलीफ से परेशान आस्ट्रेलियन आदिवासियों द्वारा इसके रस को तेल में उबालकर कान में डाला जाता है।


पेट दर्द एवं आंतों के कीड़े (Stomach Pain And Intestinal Worms): पेट की शिकायतों में बीज काढ़ा इस्तेमाल किया जाता है। इसके बीज आंतों के कीड़ों को मार देते हैं और वायुनाशक हैं। अफ्रीका एवं अमेरिका में हुलहुल को कृमिनाशक (पेट के कीड़े को दुर करने की दवा) के रूप में प्रयोग किया जाता है। बीज का ताजा पाउडर वयस्कोंं को 2000 से 4000 मिलीग्राम तथा अवयस्कों या बच्चों को 300 मिलीग्राम से 1300 मिलीग्राम तक सोते समय पानी के साथ पिलाने से पेट के कीड़े मर जाते हैं। पेट दर्द का निदान होता है और पेट की अनेक तकलीफों में आराम मिलता है। 

कब्ज (Constipation): इसका काढा कब्ज का असरकारी इलाज है।

यह भी पढें:
कब्ज का कब्जा अस्वस्थता को आमंत्रण-[Constipation Capture-Invitation To Sickness]

पेचिश (Dysentery): पेट में मरोड़ के साथ दर्द होना और मरोड़ के साथ पेचिश/दस्त आना जिसमें आंव एवं रक्त का मिश्रण हो, तो कुछ दिन तक हुलहुल के पत्तों का काढा पीने जल्दी आराम मिल जाता है।

पाचक एवं भूख वर्धक (Digestive and Appetite): हुलहुल का काढा रेचक/दस्तावर होने के साथ-साथ भूख को बढ़ाने और पाचन शक्ति को मजबूत करने में भी सहायक है।

सिरदर्द (Headache): सिरदर्द की तकलीफ से परेशान लोगों द्वारा इसके पत्तों का पुल्टिस/लेप इस्तेमाल किया जाता है। ऑस्ट्रेलिया के आदिवासी सिरदर्द के उपचार के लिए इसकी पत्तियों का उपयोग करते हैं।

दांत (Teeth): विटामिन सी की कमी के कारण दांतों में एक बीमारी होती है, जिसमें दांतों के मसूढों में सूजन और रक्तस्राव होता है। हुलहुल की जड़ों का उपयोग स्कर्वी रोधक/मसूड़ों से रक्तस्राव एवं सूजन रोधक सिद्ध हुआ है एवं यह इन तकलीफों के उपचार में सहायक/प्रोत्साहक के रूप में उपयुक्त पाया गया है।

हृदय (Heart): श्रीलंका सहित अनेक देशों में इलुहुल को जड़ों और बीजों को हृदय को मजबूती प्रदान करने वाले प्रोत्साहक/उत्तेजक के रूप में उपयोग किया जाता रहा है।

ठंड, बुखार एवं दस्त (Cold, Fever and Diarrhea): हुलहुल के बीजों का उपयोग ठंड लगकर आने वाले बुखार, मलेरिया और बुखार के साथ दस्त की तकलीफ के उपचार लिए भी किया जाता है।

शिशु विकार (Infants Disorders): शिशुओं की पसली चलने के साथ में होने वाली बेहोशी और ऐंठन में इसके बीजों का उपयोग किया जाता है।

मूत्रवर्धक (Diuretic): हुलहुल मूत्रवर्धक है।

दमा (Asthma): पत्तों का रस।

संक्षेप में कहा जाये तो नवीनतम शोधों के अनुसार हुरहुर के पौधे में मलेरिया बुखार, सिर दर्द, ओटिटिस मीडिया-[otitis media-मध्यकर्णशोथ], आंखों के घावों, अल्सर, स्कर्वी, संधिशोथ, त्वचा रोग, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल रोग [gastrointestinal (जठरांत्र-relating to the stomach and the intestines-पेट और आंतों से संबंधित], डिस्प्सीसिया [dyspepsia-indigestion-अपच, अजीर्ण, बदहजमी], ब्रोंकाइटिस [bronchitis-श्वास नली का प्रदाह, श्वसनीशोध], जिगर की बीमारियों, गर्भाशय की शिकायतों और शिशुओं के आंतों के इलाज में उपयोगी माना जाता है।

वयस्कों के लिये दवाई की मात्रा:
  • पत्ते: 2 ग्राम-पाचन क्रिया को सुधारते है।
  • बीज: 2 ग्राम-आँतों के कीड़े नष्ट करते है।
  • पत्तों का रस: 2 ग्राम-दमा मिटता है।
  • जड़: कान में बाँधने से भूत-प्रेत का प्रकोप नहीं होता।
>>> *Online Doctor* P. L. Meena: Health Care Friend and Marital Dispute Consultant (स्वास्थ्य रक्षक सक्षा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार ), Mobile & WhatsApp No.: 8561955619, *Fix Time to Call: Between 10 AM to 10 PM Only.+‎2nd Mobile: 9875066111*

--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!

--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!
सभी के स्वस्थ एवं सुदीर्घ जीवन की कामना के साथ-मेरे प्यारे और दुलारे तीन बच्चों की ममतामयी अद्वितीय माँ (मम्मी) जो दुखियों, जरूतमंदों और मूक जानवरों तक पर निश्छल प्यार लुटाने वाली एवं अति सामान्य जीवन जीने की आदी महिला थी! वह पाक कला में निपुण, उदार हृदया मितव्ययी गृहणी थी! मेरी ऐसी स्वर्गीय पत्नी "जानकी मीणा" की कभी न भुलाई जा सकने वाली असंख्य हृदयस्पर्शी यादों को चिरस्थायी बनाये रखते हुए इस ब्लॉग को आज दि. 08.08.12 को फिर से पाठकों के समक्ष समर्पित कर रहा हूँ!-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'

Label Cloud

(Tribulus Terrestris) 14 फरवरी Abutilon Indicum Aerva Lanat Allergy Aloevera Juice Alum Aluminum Amaranthus spinosus Ammonium chloride Appetite Argemone Mexicana Ash-coloured Fleabane Bael Ban Tulasi Bauhinia purpurea Bernini’s Cinema Bitter Gourd Black night shade Blumea Lacera Bone Infection Borax Calories Calories Chart Cancer Care Carrots Castor beans Chanca Piedra Cheese Chemotherapy Chenopodium Album Chikungunya Cholesterol Cleome viscosa Clerodendrum Phlomidis Clitoria Ternatea Colocynth Colpoptosis Constipation Convolvulus Pluricaulis Corn Creak Croton Bonplandianum Croton Sparsiflorus Cumin Date Palm Dengue Diabetes digestion Disorders Divorce Dog Mustard Dysentery Early Ejaculation Emblic Myrobalan Extramarital Relation Extremely Intolerance Fatty liver Femininity FENUGREEK Fenugreek Seeds Ferrum Phosphoricum Fever Fissure Fistula Folic Acid Gallbladder Gardenia Gummifera Garlic Ginger Gooseberry Gourd Groundnut-peanut Guava Hainampfer Hair Falling Headaches Health Health Care Friend Health Consultation Health Links Health Tips Hemorrhoids Hepatitis Hibiscus Homeopathic Homeopathy Homoeopath Honey How to get pregnant? Immunity IMPOTENCY Incurable indigestion Jaundice Juice Juice of Berries LAND CALTROPS Lemon Leucas Aspera Leucorrhea Lever Liver Cirrhosis Liver fibrosis Low Blood Pressure Marital Dispute Consultant Masturbation Mexican Daisy Mexican Poppy Migraine Migraines Myopia Neurons Night Jasmine Nutgrass Nutmeg Nutsedge Obesity Omega 3 Oroxylum indicum Painkillers Phyllanthus Niruri Piles Portulaca Oleracea Post Effect Pregnancy Safe-Guard Pregnancy Safeguard Pregnancy-Safe-Guard Premature Ejaculation Prostate Gland Protein Purple Nutsedge Raan Tulas Radish Rectal Collapse Rectal Prolapse rectum collapse Saffron Senna occidentalis Separation Sex Sexual Power Sickness side effects less Side-Effects Spermatorrhoea Sperms Spiny Amaranth Stone Stone Breaker Sword fruit tree TECOMA STANS Thermometer Tickweed Tips Treatment of Incurable Tribulus Terrestris Tridax Procumbens Umbrella Sedge Unquenchable Conjugal Uterine Prolapse vaginal Creaks Vaginal Prolapse Viral Vitamins Vitex Negundo Wheatgrass White Discharge Yellow Spider Flower अंकुरित अनाज अंकुरित गेहूं-Wheat germ अंकुरित भोजन-Sprouts अखरोट अंगूर-Grapes अचूक चमत्कारिक चूर्ण अजवाइन अजवायन अजीर्ण-Indigestion अंडकोष अडूसा (वासा)-Adhatoda Vasika-Malabar nut अण्डी अतिबला अतिसार अतिसार-Diarrhea अतृप्त अतृप्त दाम्पत्य अत्यंत असहिष्णुता अदरक अदरख अंधश्रृद्धा अध्ययन अनिद्रा अपच अपराजिता अपराधबोध अफरा अफीम अमरूद अमृता अम्लपित्त-Pyrosis अरंडी अरणी अरण्ड अरण्डी अरलू अरुचि अरुचि-Anorexia-Distaste अर्जुन अर्थराइटिस अर्द्धसिरशूल अर्श अर्श रोग-बवासीर-Hemorrhoids-Piles अलसी अल्सर अल्सर-Ulcers अवसाद अवसाद-Depression अश्मःभेदः अश्वगंधा अश्वगंधा-Winter Cherry असंतुष्ट असफल असर नहीं असली अस्थमा अस्थमा-दमा-Asthma आइरन आक आकड़ा आघात आत्महत्या आंत्र कृमि आंत्रकृमि-Helminth आंत्रिक ज्वर-टायफाइड-Typhoid fever आधाशीशी आधासीसी आंधीझाड़ा-ओंगा-अपामार्ग-Prickly Chalf flower आमला आमवात आमाशय आयुर्वेद आयुर्वेदिक आयुर्वेदिक उपचार आयुर्वेदिक औषधियां आयुर्वेदिक सीरप-Ayurvedic Syrup आयुर्वेदिक-Ayurvedic आरोग्य आँव आंव आंवला आंवला जूस आंवला रस आशावादी-Optimistic आसन आसान प्रसव-Easy Delivery आहार चार्ट आहार-Food आॅपरेशन आॅर्गेनिक इच्छा-शक्ति इन्द्रायण इन्फ्लुएंजा इमर्जेंसी में होम्योपैथी इमली-Tamarind Tree इम्युनिटी इलाज इलाज का कुल कितना खर्चा इलायची उच्च रक्तचाप उच्च रक्तचाप-High Blood Pressure-Hypertension उत्तेजक उत्तेजना उदर शूल-Abdominal Haul उदासी उन्माद-Mania उपवास उम्र उल्टी ऊर्जा एक्जिमा एक्यूप्रेशर एग्जिमा एजिंग-Aging एंटी ऑक्सीडेंट्स एंटी-ओक्सिडेंट एंटीऑक्सीडेंट एण्टी-आॅक्सीडेंट एनजाइना एनीमिया एमिनो एसिड एरंड एलर्जी एलर्जी-Allergy एलोवेरा एलोवेरा जूस एल्यूमीनियम ऐंठन ऐलोपैथ ऐसीडिटी ऑर्गेनिक ओमेगा 3 के स्रोत ओमेगा-3 ओर्गेनिक औषध-Drug औषधि सूची-Drug List औषधियों के नुकसान-Loss of drugs कचनार कचनार-Bauhinia Purpurea कटुपर्णी कड़वाहट कंडोम कद्दू कनेर कपास-COTTON कपिकच्छू कपूरीजड़ी कफ कब्ज कब्ज़ कब्ज-कोष्ठबद्धता-Constipation कब्ज. Cucumber कब्जी कमजोरी कमर कमर दर्द करेला कर्ण वेदना कर्णरोग कष्टार्तव-Dysmenorrhea कांच निकलना काजू कान कानून सम्मत काम काम शक्ति कामवाण पाउडर कामशक्ति कामशक्ति-Sexual power कामेच्छा कामोत्तेजना कायाकल्प कार्बोहाइड्रेट कार्बोहाइड्रेट-Carbohydrates काला जीरा काला नमक काली जीरी काली तुलसी काली मिर्च काले निशान कास-खांसी-Cough किडनी किडनी संक्रमण किडनी स्‍टोन कीड़े कीमोथेरेपी कुकरौंधा कुकुंदर कुटकी-Black Hellebore कुबडापन कुल्थी कुल्ला कुष्ट कुष्ठ कृमि केला केसर कैफीन-Caffeine कैलोरी कैलोरी चार्ट कैलोरी-Calories कैवांच कैविटी कैंसर कॉफी कॉफ़ी कॉलेस्ट्रॉल कोंडी घास कोढ़ कोबरा कोलेस्‍ट्रॉल कोलेस्ट्रॉल-Cholesterol कोलेस्ट्रोल कौंच कौमार्य क्रियाशीलता क्रोध क्षय रोग-Tuberculosis क्षारीय तत्व क्षुधानाश खजूर खजूर की चटनी खनिज खरबूजा-Musk melon खरेंटी खरैंटी शिलाजीत खाज खांसी खिरेंटी खिरैटी खीरा खुजली खुशी-Joy खुश्की खुश्बू खोया गंजापन-Baldness गठिया गठिया-Arthritis गठिया-Gout गड़तुम्बा गंडा-ताबीज गंध गन्ने का रस गरमा गरम गर्भ निरोधक गर्भधारण गर्भपात गर्भवती गर्भवती कैसे हों? गर्भावस्था गर्भावस्था की विकृतियां-Disorders of Pregnancy गर्भावस्था के दौरान संभोग-Sex During Pregnancy गर्भावस्था-Pregnancy गर्भाशय गर्भाशय भ्रंश गर्भाशय-उच्छेदन के साइड इफेक्ट्स-Side Effects of Hysterectomy गर्म पानी गर्मी गर्मी-Heat गलगण्ड गाजर गाजवां गांठ गाँठ-Knot गारंटी गाल ब्लैडर गिलोय गिल्टी गुड़हल गुंदा गुदाद्वार गुदाभ्रंश गुर्दे गुलज़ाफ़री गुस्सा गृध्रसी गृह-स्वामिनी गेदुआ की छाछ गैस गैस्ट्रिक गैहूं का जवारा गोक्षुरादि चूर्ण गोखरू गोखरू (LAND CALTROPS) गोंद कतीरा-Hog-Gum गोंदी गोभी-Cabbage गोरख मुंडी गोरखगांजा गोरखबूटी गोरखमुंडी ग्रीन-टी घमोरी घरेलु ​नुस्खे घाघरा घाव चकवड़ चक्कर चपाती चमत्कारिक सब्जियां चरित्र चर्बी चर्म चर्म रोग चर्मरोग चाय चाय-Tea चालीस के पार-Forty Across चिकनगुनिया चिकित्सकीय चिटकन चिंतित चिरायता-Absinth चिरोटा चुंबन चोक चौलाई छपाकी छरहरी काया छाछ छाले छींक छीकें छुअ छुआरा छुहारा छोटा गोखरू छोटा धतूरा छोटी हरड़ जंक फूड जकवड़ जख्म जंगली तिल्ली जंगली पेड़ जंगली-कटीली चौलाई जटामांसी-Spikenard जलजमनी जलन जलोदर रोग-Ascites Disease जवारा जवारे जवासा-Alhag जहर जामुन का जूस जायफल जिगर जीरा जीवन रक्षक जीवनी शक्ति जुएं जुकाम जुदाई जुलाब जूएं जूस जूस-Juice जोड़ों के दर्द जोड़ों में दर्द जौ ज्यूस ज्योति ज्वर ज्वर-Fiver झाइयाँ झांईं झाड़-फूंक झुर्रियाँ झुर्रियां झुर्री झूठे दर्द टमाटर का रस टमाटर-Tomatoes टाइफाइड टाटबडंगा टायफायड टूटी हड्डी टॉन्सिल टोटला ट्यूमर ठंड ठंडापन ठेकेदार डॉक्टर डकार डकारें डायबिटीज डायरिया डिग्री फ़ारेनहाइट डिग्री सेल्सियस डिजिसेक्सुअल डिटॉक्सीफाई डिटॉक्सीफिकेशन डिनर डिब्बाबंद भोजन डिलेवरी डीकामाली डीगामाली डेंगू डेंगू-Dengue डॉ. निरंकुश डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' डॉ. मीणा ढकार ढीलापन ढीली योनि तकलीफ का सही इलाज तंत्र-मंत्र तम्बाकू तरबूज-Watermelon तलाक ताकत तिल तिल्ली तुंबा तुंबी तुलसी तेल त्रिदोषनाशक त्रिफला त्वचा त्वचा रोग थकान थाईरायड थायरायड-Thyroid थायरॉइड दण्डनीय अपराध दंत वेदना दन्तकृमि दन्तरोग दमा दर वेदना दरार दर्द दर्द निवारक दर्द निवारक दवा दर्दनाक दस्त दही दाग-धब्बे-Stains-Spots दाढ़ दांत दांतो में कैविटी-Teeth Cavity दाद दाम्पत्य दाम्पत्य विवाद सलाहकार दाम्पत्य-Conjugal दाल दालचीनी दालें दिमांग दिल दीर्घायु दु:खी दुर्गंध दुर्बलता दुष्प्रभाव दुष्प्रभावरहित दूध दूध वृद्धि दूधी दूधी-Milk Hedge दृष्टिदोष दो मन द्रोणपुष्पी-Leucas Cephalotes धड़कन धनिया बीज धनिया-Coriander धमासा धात धातु धातु पतन धार्मिक धूम्रपान छोड़ना चाहते हैं? धैर्यहीन नज़ला नपुंसक नपुंसकता नाइट्रिक एसिड नाक नाखून नागबला नागरमोथा नाडी हिंगु नाड़ी हिंगु (डिकामाली) नामर्दी नारकीय पीड़ा नारियल नाश्ता निमोनिया निम्न रक्तचाप निम्बू नियासिन निराश निरोगधाम निर्गुण्डी निर्गुन्डी निष्कपट स्नेह निष्ठा निसोरा नींद नींबू नींबू-Lemon नीम-azadirachta indica नुस्खे नुस्खे-Tips नेगड़ नेत्र रोग नेुचरल नैतिक नॉर्मल डिलेवरी नोनिया नौसादर न्युमोनिया-Pneumonia न्यूरॉन्स पक्षघात पंचकर्म पढ़ने में मन लगेगा पंतजलि पत्तागोभी-CABBAGE पत्थर फोड़ी पत्थरचट्टा पत्नी पथरी पदार्थ पनीर पपीता पपीता-CARICA PAPPYA पमाड परदेशी लांगड़ी परम्परागत चिकित्सा परहेज पराठा परामर्श परिस्थिति पवाड़ पवाँर पाइल्स पाक-कला पाचक पाचन पाचनतंत्र पाचनशक्ति पाठक संख्या 16 लाख पार पाठक संख्या पंद्रह लाख पायरिया पारदर्शिता पारिजात पालक पालक-Spinach पित्त पित्ताशय पित्ती पिंपल-मुंहासे-Pimples-Acne पिरामिड पीलिया पीलिया-Jaundice पीलिया-कामला-Jaundice पुआड़ पुदीना पुनर्नवा-साटी-सौंटी-Punarnava पुरुष पुंसत्व पेचिश पेट के कीड़े पेट दर्द पेट में गैस पेट रोग पेड़ पेद दर्द पेशाब पेशाब में रुकावट पेंसिल थेरेपी-Pencil Therapy पौधे पौरुष पौष्टिक रागी रोटी प्याज-Onion प्यास प्रजनन प्रतिरक्षा प्रतिरक्षा प्रणाली प्रतिरोधक प्रतिरोधक-Resistance प्रदर प्रमेह प्रवाहिका (पेचिश)-Dysentery प्रसव प्रसव सुरक्षा चक्र प्रसव-पीड़ा प्रसूति प्राणायाम प्रेग्नेंसी-Pregnancy प्रेम प्रेमरस प्रेमिका प्रेमी प्रोटीन प्रोटीन का कार्य प्रोटीन के स्रोत प्रोस्टेट प्रोस्टेट ग्रन्थि प्लीहा प्लूरिसी-Pleurisy प्लेटलेट्स फटन फफूंद-Fungi फरास फल फल-Fruit फाइबर फिटकरी फुंसी-Pimples फूलगोभी-CAULIFLOWER फेंफड़े फेरम फॉस फैट फैटी लीवर फोटोफोबिया फोड़ा फोड़े-Boils फोरप्ले फोलिक एसिड फ्लू फ्लू-Flu फ्लेक्स सीड्स बकायन बकुल बड़ी हरड़ बथुआ बथुआ पाउडर बथुआ-White Goose Foot बदबू बबूल-ACACIA बरसाती बीमारियाँ बरसाती बीमारियां बलगम बलवृद्धि बला बलात्कार बवासीर बहरापन बहुनिया बहुमूत्रता- बांझपन बादाम-Almonds बादाम. बाल बाल झड़ना बाल झडऩा-Hair Falling बिना सिजेरियन मां बनें बिवाई बीजबंद बीड़ी बीमारियों के अनुसार औषधियां बीमारी बील बुखार बूंद-बूंद पेशाब बेल बेली बैक्टीरिया बॉयोकैमी ब्र​ह्मदण्डी ब्रेस्ट ग्रोथ ब्लड प्रेशर ब्लैक मेलिंग ब्लॉकेज भगंदर भगंदर-Fistula-in-ano भगनासा भगन्दर भगोष्ठ भड़भांड़ भय भविष्य भस्मक रोग भावनात्मक भुई आंवला-Phyllanthus Niruri भूई आमला भूई आंवला भूख भूख बढ़ाने भूमि भूमि आंवला भोजनलीवर मकोय मकोय-Soleanum nigrum मक्का मक्का के भुट्टे मंजीठ मटर-PEA मंद दृष्टि मंदाग्नि मदार मधुमेह मधुमेह-Diabetes मन्दाग्नि-Dyspepsia मरुआ मरोड़ मर्द मर्दाना मलाशय मलेरिया मलेरिया (Malaria) मवाद मसाले मस्तिष्क मस्से मस्से-WARTS महंगा इलाज महत्वपूर्ण लेख महाबला माइग्रेन माईग्रेन माईंड सैट माजूफल मानवव्यवहार मानसिक मानसिक लक्षण मानसिक-Mental मानिसक तनाव-Mental Stress मायोपिया मासिक मासिक-धर्म मासिकधर्म मासिकस्राव माहवारी मिनरल मिर्गी मिर्च-Chili मीठा खाने की आदत मुख मैथुन-ओरल सेक्स-Oral Sex मुख्य लक्षण मुधमेह मुलहठी मुलेठी मुहाँसे मूँगफली मूड डिस्ऑर्डर-Mood Disorders मूत्र मूत्र असंयमितता मूत्र में जलन-Burning in Urine मूत्ररोग मूत्राशय मूत्रेन्द्रिय मूर्च्छा (Unconsciousness) मूली मूली कर रस मृत्यु मृत्युदण्ड मेथी मेथी दाना मेंहदी मैथुन मोगरा (Mogra) मोटापा मोटापा-Obesity मोतियाबिंद मौत मौलसिरी मौसमी बीमारियां यकृत यकृत प्लीहा यकृत वृद्धि-Liver Growth यकृत-लीवर-जिगर-Lever यूपेटोरियम परफोलियेटम यूरिक एसिड लेबल योग विज्ञापन योन योन संतुष्टि योनि योनि ढीली योनि शिथिल योनि शूल-Vaginal Colic योनि संकोचन योनिद्वारा योनिभ्रंश योनी योनी संकोचन यौन यौन आनंद यौन उत्तेजक पिल्स (sexual stimulant pills) यौन दौर्बल्य यौन शक्तिवर्धक यौन शिक्षा यौन समस्याएं यौनतृप्ति यौनशक्ति यौनशिक्षा यौनसुख यौनानंद यौनि रक्त प्रदर (Blood Pradar) रक्त रोहिड़ा-TECOMELLA UNDULATA रक्तचाप रक्तपित्त रक्तशोधक रक्ताल्पता रक्ताल्पता (एनीमिया)-Anemia रस-juices रातरानी Night Blooming Jasmine/Cestrum nocturnum रामबाण रामबाण औषधियाँ-Panacea Medicines रुक्षांश रूढिवादी रूसी रूसी मोटापा रेचक रेठु रोग प्रतिरोधक रोबोट सेक्स रोमांस लकवा लक्षण लक्ष्मी लंच लसोड़ा लस्सी लहसुन लहसुन-Garlic लाइलाज लाइलाज का इलाज लाक्षणिक इलाज लाक्षणिक जानकारी लाभ लिंग लिंग प्रवेश लिसोड़ा लीकोरिया लीवर लीवर सिरोसिस लीवर-Liver लू-hot wind लैंगिक लोनिया लौकी लौंग की चाय ल्युकोरिया ल्यूकोरिया ल्यूज योनी वजन वज़न वजन कम वजन बढाएं-Weight Increase वन तुलसी वन/जंगली तुलसी वनौषधियाँ वमन वमन विकृति-Vomiting Distortion वसा वात वात श्लैष्मिक ज्वर वात-Rheumatism वायरल वायरल फीवर वायरल बुखार-Viral Fever वासना विचारतंत्र विटामिन विधारा वियाग्रा-Viagra वियोग विरह वेदना विलायती नीम विवाहेत्तर यौन सम्बन्ध विवाहेत्तर सम्बंध विश्वास विष विष हरनी विषखपरा वीर्य वीर्य वृद्धि वीर्यपात वृक्कों (गुर्दों) में पथरी-Renal (Kidney) Stone वृक्ष वैज्ञानिक वैधानिक वैवाहिक जीवन वैवाहिक जीवन-Marital वैवाहिक रिश्ते वैश्यावृति व्याकुल व्‍यायाम व्रण शंखपुष्पी शरपुंखा शराब शरीफा-सीताफल-Custard apple शर्करा शलगम-Beets शल्यक्रिया शहद शहद-Honey शारीरिक शारीरिक रिश्ते शिथिलता शीघ्र पतन शीघ्रपतन शुक्राणु-Sperm शुक्राणू शुगर शोक शोथ शोध श्योनाक श्रेष्ठतर श्वास श्वांस श्वेत प्रदर श्वेत प्रदर-Leucorrhea श्वेतप्रदर षड़यंत्र संकुचन संकोच संक्रमण संक्रमित संखाहुली संतरा-Orange संतान संतुष्टि सत्यानाशी सदा सुहागन सदाफूली सदाबहार सदाबहार चूर्ण सनबर्न सफ़ेद दाग सफेद पानी सफेद मूसली सब्जि सब्जियां-Vegetables सब्जी संभालू संभोग समर्पण-Dedication सरकार को सुझाव सरफोंका सरहटी सर्दी सर्दी जुकाम-Cold सर्दी-जुकाम सर्पक्षी सर्पविष सलाद संवाद संवेदना सहदेई सहदेवी सहानभूति साइटिका साइटिका-Sciatica साइड इफेक्ट्स साबूदाना-Sago सायटिका सिगरेट सिजेरियन सिर दर्द सिर वेदना सिरका सिरदर्द सिरोसिस सी-सेक्शन सीजर डिलेवरी सुगर सुदर्शन सुहागा सूखा रोग सूजन सेक्‍स सेक्स उत्तेजक दवा सेक्स परामर्श-Sex Counseling सेक्स पार्टनर सेक्स पावर सेक्स समस्या सेक्स हार्मोन सेक्‍स-Sex सेंधा नमक सेब सेमल-Bombax Ceiba सेल्स सोजन-सूजन सोंठ सोना पाठा सोयाबीन सोयाबीन (Soyabean) सोयाबीन-Soyabean सोराइसिस सोरियासिस-Psoriasis सौंठ सौंदर्य सौंदर्य-Beauty सौन्दर्य सौंफ सौंफ की चाय सौंफ-Fennel स्किन स्खलन स्तन स्तन वृद्धि स्तनपान स्तम्भन स्त्री स्त्रीत्व स्त्रैण स्पर्श स्मृति-लोप स्वप्न दोष स्वप्नदोष स्वप्नदोष-Night Fall स्वभाव स्वभावगत स्वरभंग स्वर्णक्षीरी स्वस्थ स्वास्थ्य स्वास्थ्य परामर्श स्वास्थ्य रक्षक सखा हजारदानी हड़जोड़ हड्डी हड्डी में दर्द हड्डी संक्रमण हड्डीतोड़ ज्वर हड्डीतोड़ बुखार हरड़ हरसिंगार हरी दूब-CREEPING CYNODAN हरीतकी हर्टबर्न हस्तमैथुन हस्तमैथुन-Masturbation हाई बीपी हाथ-पैर नहीं कटवायें हारसिंगार हालात हिचकी हिचकी-Hiccup हिमोग्लोबिन-hemoglobin हिस्टीरिया हिस्टीरिया-Hysteria हींग हीनतर हुरहुर हुलहुल हृदय हृदय-Heart हेपेटाइटिस हेपेटाईटिस हेल्थ टिप्स-Health-Tips हेल्थ बुलेटिन हैजा हैपीनेस-Happiness हैल्थ होम केयर टिप्स-Home Care Tips होम्योपैथ होम्योपैथिक होम्योपैथिक इलाज होम्योपैथिक उपचार होम्योपैथी होम्योपैथी-Homeopathy