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डॉ. पुरुषोत्तम मीणा

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गुड़हल (Hibiscus)

गुड़हल फूल के 5 चमत्कारी लाभ के बारे में जानें

आप सभी ने गुड़हल का फूल तो देखा ही होगा। अक्सर लोग अपने घरों में इस खूबसूरत फूल का पौधा लगाते हैं। लेकिन अगर आपको लगता है कि ये फूल सिर्फ आपके आंगन की खूबसूरती ही बढ़ाता है तो शायद आप अभी इस फूल के बारे में ज्यादा कुछ जानते नहीं है। दरअसल गुड़हल के फूल में काफ अधिक औषधीय गुण भी होते हैं। जिसकी वजह से इन फूलों का इस्तेमाल आप कई शारीरिक समस्याओं को दूर करने के लिए कर सकते हैं। गुड़हल का फूल छोटी मोटी चोट को भरने से लेकर आपकी सेक्स लाइफ को बेहतक बनाने तक का काम करता है। चलिए विस्तार से जानते हैं इस खूबसूरत फूल के सभी फायदों के बारे में।

ब्लड प्रेशर कंट्रोल करे: अगर आपको हाई ब्लड प्रेशर की समस्या है तो इस फूल का पौधा घर पर ज़रूर लाकर रखें, ये आपके बहुत काम आएगा। कई प्रकार के अध्ययनों से ये साबित हुआ है कि ये फूल ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करके दिल की बीमारी होने की संभावना को कम करता है। अब बताइये, इससे नैचुरल तरीका मिलेगा आपको अपना ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने का?

खरोंच और कट के घाव ठीक करे: घर में अगर बच्चे हैं तो समझिये छोटी मोटी चोट तो आपके लिए आम बात होगी। बच्चे खेलते-खेलते गिर जाते हैं या कोई नुकीली चीज़ लगा लेते हैं जिससे उनको छोटा घाव हो जाता है। या अगर आप किचन में काम करते हुए चाकू से उंगली काट लेती हैं तो गुड़हल के पत्तों का लेप आपके बहुत काम आएगा। इससे बहुत जल्दी घाव भरता है।

कॉलेस्ट्रॉल कम करे: कॉलेस्ट्रॉल अगर शरीर में बहुत बढ़ जाए तो आपको दिल की कई बीमारियां हो सकती है। इसलिए कोशिश करें कि अपना कॉलेस्ट्रॉल कंट्रोल करें। एक स्टडी में ये बात सामने आई है कि 1 ग्राम गुड़हल के पत्ते का रस वेट और एलडीएल कोलेस्ट्रॉल दोनों को कंट्रोल कर सकता है।

सेक्स लाइफ में भरे उमंग – जी हां, हैरान न हो। गुड़हल का फूल आपकी सेक्स लाइफ को बेहतर बनाने में भी आपकी मदद कर सकता है। इस फूल में पुरूषों के कामोत्तेजना को बढ़ाने का गुण होता हैं क्योंकि ये मेल एन्ड्रोजेन का काम करते है।

पेद दर्द व सूजन कम करे – गुड़हल के पत्तों में फ्लेवनॉयड और पॉलीफेनॉल होता है जो शरीर में किसी भी प्रकार के सूजन और पेट की गड़बड़ी के उपचार में मदद करता है। पेट दर्द तो बहुत आम बीमारी है जो घर में किसी न किसी को लगा ही रहता है। इसलिए कोशिश करें कि ये पौधा आपके घर में हो, ताकि आपको ज्यादा दवा न खाना पड़े।
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गुणों से भरपूर है गुड़हल की पत्ती

गुड़हल एक खूबसूरत फूलों वाला पौधा है, जो आमतौर पर ट्रॉपिकल और गर्म क्षेत्रों में पाया जाता है। इस पौधे की कई प्रजातियां पाई जाती है और सभी अपने खूबसूरत फूलों के जानी जाती है। मजेदार बात यह है कि गुड़हल का फूल दक्षिण कोरिया, मलेशिया और हैथी गणराज्य का राष्ट्रीय फूल है। भारत में इस फूल को काफी शुभ माना जाता है और कई धार्मिक संस्कारों और चढ़ावें में इसका इस्तेमाल किया जाता है। प्रचीन भारतीय आयुर्वेद में गुड़हल का इस्तेमाल कई तरह की बीमारियों को दूर करने के लिए किया जाता था। गुड़हल की पत्ती का इस्तेमाल न सिर्फ औषधीय, बल्कि कई रूपों में किया जाता है। कई बार तो इसका इस्तेमाल पार्क और गार्डन को सजाने के लिए भी किया जाता है। गुड़हल की पत्ती को विभिन्न तरह से इस्तेमाल के लिए अलग-अलग रूपों में संसाधित किया जाता है। गुड़हल की सूखी पत्ती का इस्तेमाल मैक्सिकन जैसे कई व्यंजन को सजाने के लिए भी किया जाता है। साथ ही इसकी पत्ती का इस्तेमाल चाय बनाने के लिए किया जाता है, जो कई देशों में अलग-अलग नामों से चर्चित है। कई शोध के जरिए वैज्ञानिक रूप से यह बात सिद्ध हो चुकी है कि गुड़हल की पत्ती में औषधीय गुण पाए जाते हैं। 2008 में यूएसडीए के अध्ययन में पाया गया कि गुड़हल का चाय पीने से ब्लड प्रेशर कम होता है। आयुर्वेद में लाल और सफेद गुड़हल को औषधीय गुण से भरपूर माना जाता है और इसका इस्तेमाल खांसी, बालों के झड़ने और बालों के सफेद होने की समस्या से निजात पाने के लिए किया जाता है। साथ ही गुड़हल एंटीऑक्सीडेंट से भी भरपूर होता है और इसका इस्तेमाल एंटी-एजिंग के रूप में किया जाता है। इसके अलावा गुड़हल की पत्ती से बनी चाय का इस्तेमाल शरीर में स्फूर्ति जगाने के लिए भी किया जाता है।

01. हेयर कंडीशनर गुड़हल की पत्ती और इसके फूल की पंखुड़ी से बना पेस्ट प्राकृतिक हेयर कंडीशनर का काम करता है। जब इसे शैंपू के बाद लगाया जाता है तो यह बालों के रंग को काला करता है और डैंड्रफ से भी छुटकारा दिलाता है।
02. चाय गुड़हल की पत्ती से बनी चाय का इस्तेमाल कई देशों में औषधि के रूप में किया जाता है। अगर आपको किडनी की समस्या है तो इससे बनी चाय बिना शक्कर के लें। साथ ही इससे डिप्रेशन के समय मूड भी ठीक हो जाएगा।
03. स्किन केयर अपने खास गुणों के कारण गुड़हल का इस्तेमाल कॉस्मेटिक स्किन केयर में किया जाता है। परंपरागत चीनी दवाइयों में गुड़हल की पत्ती का इस्तेमाल एंटी-सोलर एजेंट के रूप में किया जाता है, क्योंकि यह अल्ट्रावाइलेट रेडिएशन को सोख लेता है। साथ ही इसका इस्तेमाल स्किन की झुर्रियों से निजात पाने में भी किया जाता है।
04. ब्लड प्रेशर कम करे: अध्ययन से पता चला है गुड़हल की पत्ती से बनी चाय पीने से ब्लड प्रेशर की समस्या से निजात मिलता है। इसलिए ब्लड प्रेशर कम करने के लिए इसका नियमित सेवन करना चाहिए।
05. घाव पर भी असरदार: गुड़हल से निकले तेल का इस्तेमाल खुले घाव और कैंसर से हुए घाव पर किया जाता है। साथ ही ये कैंसर के प्रारंभिक चरण काफी कारगर होता है। 
06. कोलेस्टेरोल कम करे गुड़हल: की पत्ती से बनी चाय एलडीएल कोलेस्टेरोल को कम करने में काफी प्रभवी होती है। इसमें पाए जाने वाले तत्व अर्टरी में प्लैक को जमने से रोकते हैं, जिससे कोलेस्टेरोल का स्तर कम होता है।
07. सर्दी और खासी में फायदेमंद: गुड़हल की पत्ती में प्रचूर मात्रा में विटामिन सी पाया जाता है। जब चाय या अन्य रूपों में इसका सेवन किया जाता है तो यह सर्दी और खांसी के लिए काफी फायदेमंद होता है। इससे आपको सर्दी से जल्द राहत मिलेगी।
08. वजन कम करने और पाचन में सहायक: गुड़हल के सेवन से भूख की इच्छा शांत होती है। ऐसे में यह वजन कम करने में काफी मददगार होता है। हड़हुल की पत्ती से बनी चाय पीने से आप कम खाएंगे और आपकी पाचन प्रक्रिया भी तेज होगी। इससे शरीर में अनावश्यक फैट नहीं बनता है।
09. रेगुलर मेंस्ट्रल: साइकल गुड़हल की पत्ती से बनी चाय के नियमित सेवन से महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन का स्तर कम होता है। इससे शरीर में हार्मोन का संतुलन बना रहता है। यही वजह है मेंस्ट्रल साइकल में किसी तरह की दिक्कत नहीं आती है।
10. एंटी ऐजिंग: गुड़हल की पत्ती में कई तरह के एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। यह शरीर में मौजूद फ्री रेडिकल्स को हटाता है, जिससे उम्र बढ़ने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है। कई मामलों में तो जीवन में भी वृद्धि हो जाती है।
रोगी अनर्थ या अपराध करे, इससे पहले उसे होम्योपैथिक इलाज की जरूरत होती है। लाक्षणिक इलाज: लक्षणों का मिलान करें और लाइलाज बीमारियों से मुक्ति पायें। भाग-2

जिन पाठकों ने पहला भाग नहीं पढा या जिन्हें पहले भाग का विवरण याद नहीं, तात्कालिक जानकारी के लिये दोहराया जाता है कि होम्योपैथी के मूल सिद्धान्त के अनुसार, होम्योपैथी में किसी भी रोग की कोई सुनिश्चित दवाई नहीं होती है। (There is no sure medication for any disease) केवल इतना ही नहीं, बल्कि-
*1-दो बीमार लोगों की एक जैसी बीमारी के लिये, अलग-अलग दवाई दी जा सकती है। (For the same illness of two sick people, different medicines can be given)*
*2-एक ही दवाई से, एक या एकाधिक रोगियों के अनेक रोगों को ठीक किया जा सकता है। (With the same medication, many diseases of one or more patients can be cured)*
*3-इसकी मूल वजह यह है कि होम्योपैथी में हम रोग का नहीं, रोगी का इलाज करते हैं। (We treat the patient, not the disease)*
*4-रोगी के मानसिक एवं शारीरिक लक्षणों के अनुसार मेल खाने वाली दवाई का चयन/सिलेक्शन करके रोगी की सभी प्रकार की तकलीफों का इलाज किया जा सकता है। (All types of diseases of the patient can be cured)*
*5-होम्योपैथी की किसी भी दवाई के कोई साईड इफैक्ट/दुष्प्रभाव नहीं होते हैं। (There are no side effects of any medicine in Homeopathy)*
*आपके इलाज के लिए आधारभूत लक्षण*
*(Basic Symptoms for Your Cure)*




होम्योपैथी के समान लाक्षणिक चिकित्सा सिद्धान्त को आम लोगों के लिये सरल, सुगम और रोचक बनाने के लिये मेरी ओर से छोटा सा प्रयास शुरू किया गया है। जिसके तहत विश्व के महान होम्योपैथिक चिकित्सकों द्वारा अनुभवसिद्ध कुछ अति-महत्वूपर्ण लक्षणों को पाठकों के समक्ष सरल तरीके से पेश कर रहा हूं।

यहां प्रस्तुत निम्न लक्षणों से यदि आप में से किसी के भी शारीरिक और, या मानसिक लक्षण मेल खाते हैं, तो आप इनके आधार पर अपनी कितनी भी पुरानी किसी भी मानसिक या शारीरिक बीमारी या व्यसन (mental or physical illness or addiction) के इलाज की उम्मीद कर सकते हैं।

*1 स्मृति-लोप:* स्मृति-लोप इतना हो जाता है कि रोगी अपने बच्चों, माता पिता, पति या पत्नी तक भूल जाते हैं। जब रोगी को यह अनुभूति या अहसास हो रहा हो कि सब कुछ अवास्तविक और अयथार्थ है। रोगी की स्मरण शक्ति कम हो जाती है, वह हर बात में कसम खाता है और छोटी-छोटी बातों में लोगों को समझाने लगता है। याद रहे रोगी को ऐसा वेद, धर्म, दर्शन आदि के कारण ऐसा नहीं सोचता, बल्कि उसे लगता ही ऐसा है कि जो कुछ दीखता है, वह वैसा नहीं है, जैसा दिख रहा है। इसी कारण उसे लगता है कि उसका पुत्र। पुत्र नहीं, पुत्री, पुत्री नहीं। पति, पति नहीं। पत्नी, पत्नी नहीं। माता, माता नहीं। पिता, पिता नहीं।

*2 दो मन:* रोगी को ऐसा भ्रामक विश्वास हो जाता है कि वह एक नहीं दो है। उसके शरीर में दो व्यक्ति या दो आत्मायें या दो मन हैं। उसे किसी से किसी क प्रकार के कार्य को करने का आदेश मिलता है, जबकि दूसरे से उस कार्य के विरोध करने का आदेश मिलता है।अनेक बार रोगी को लगता है कि उसका शरीर और उसकी आत्मा या मन दोनों अलग-अलग हैं। उसे लागता है कि उसके ऊपर दो आत्माओं का अधिकार स्थापित हो गया है।

*3 अनियंत्रित और बेकाबू मन:* रोगी की इच्छा एक काम करने को होती है तो दूसरी इच्छा उस काम को न करने की होती है। रोगी को लगता है कि उसकी दो 'इच्छा-शक्तियां' (Wills) हैं। उनमें से एक इच्छा-शक्ति उसे जो कुछ करने को कहती है, दूसरी उसे करने से रोकती है। वह निश्चय नहीं कर पाता कि क्या करे और क्या नहीं। उसके भीतर से उसे एक आवाज आती है-यह करो; दूसरी आवाज आती हैं-यह न करो। उसकी इच्छा है कि दूसरे को मार, दूसरे के साथ अन्याय करे, परन्तु उसे दूसरी आवाज ही अपने भीतर से सुनाई देती है कि ऐसा न करे। क्या करे, क्या न करे, इसका विवाद उसके भीतर लगातार चलता ही रहता है। ऊपरी तल पर तो तो ऐसी मनोस्थिति सभी लोगों की होती है, लेकिन सामान्य और स्वस्थ व्यक्ति अच्छे-बुरे का निर्णय करने में सक्षम होता है। परन्तु जब मन इतना अनियंत्रित और बेकाबू (Uncontrolled and Uncontrollable) हो जाये कि वह दो इच्छाओं में से बुरी इच्छा के चंगुल में ही फंस जाय। रोगी में यह निर्णय करने के क्षमता नहीं रहे कि वह यह सोच सके बुरे और भले में से सही क्या है? रोगी यह नहीं सोच सके कि कानून का डर क्या है? ऐसी स्थिति में वह अनर्थ या अपराध करे, इससे पहले उसे होम्योपैथिक इलाज की जरूरत होती है।

*उपचार कहां से प्राप्त करें?*

उपरोक्त लक्षणों में से पचास फीसदी से अधिक लक्षण मेल खाने पर अपने नजदीक के किसी भी अनुभवी होम्योपैथ और, या आयुर्वेद डॉक्टर से सम्पर्क करें और, या *सुबह 10 बजे से रात्रि 10 बजे के बीच मोबाईल नम्बर 98750 66111 पर तथा हेल्थ वोट्स एप नम्बर: 85619 55619 पर मुझ से सीधे सम्पर्क किया जा सकता है।* हो सकता है कि *अभी तक 'लाइलाज समझी जाने वाली' (incurable considered) आपकी तकलीफ/लत से आपको मुक्ति मिल जाये?*

MY Ref-(MUIDHROAMCOAENOA-10-01-2018)
*आपका-अपना*
-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश', HCF & MDC
(Health Care Friend and Marital Dispute Consultant)
स्वाथ्य रक्षक सखा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार
मुख्य प्रबन्ध संचालक-निरोगधाम (लाइलाज का इलाज)
*केवल हेल्थ वाट्सएप: 85619-55619 (इस पर काल नहीं करें)*
Mobile No: 9875066111 (10 AM to 10 PM बजे काल करें)
Jaipur, Rajasthan, 10 जनवरी, 2018, 22.10PM
गर्भाशय भ्रंश या योनिभ्रंश (Vaginal Prolapse/Collapse or Uterine Prolapse): किसी एक ही डॉक्टर राय को या एक ही चिकित्सा पद्धति के निष्कर्ष को अन्तिम मानकर हार नहीं मान लेनी चाहिये।




22 वर्ष की आयु में मेरी शादी हुई। 3 साल बाद बेटे का जन्म हुआ। डिलेवरी के 25 दिन बाद हमने सेक्स किया। जिसके 15-20 दिन बाद योनि का हिस्सा बाहर दिखने लग गया। खड़े होने पर ऐसा डर सा लगने लगा, जैसे योनि से सब कुछ बाहर आ जायेगा। मैंने अपने पति को बताया तो तुरंत डॉक्टर को दिखाया। उन्होंने 15 दिन की दवाई दी। कोई फायदा नहीं हुआ। इसके बाद जयपुर के एसएमएस की बड़ी महिला डॉक्टर को घर पर दिखाया। उन्होंने 15-15 दिन की दो बार दवाई दी। कोई फायदा नहीं हुआ। अब तक 7 हजार रुपये खर्च हो गये और कोई फायदा नहीं हुआ। अन्त में डॉक्टर ने आॅपेरेशन की सलाह दी। जिसका खर्चा 50 हजार से अधिक बताया। मैं आॅपरेशन के नाम से ही डर गयी। डर ही डर में दो-तीन महिने निकल गये। इस बीच मैं पीहर में आ गयी। मेरी मां ने कुछ देशी दवाई बनाकर खिलाई। उनसे भी कोई फायदा नहीं हआ। इसी बीच मेरी भाभी ने महिलाओं के एक वाट्सएप हेल्थ ग्रुप में, मेरी समस्या को लिखा। एक महिला ने बताया कि डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' के हेल्थ वाट्सएप 8561955619 पर सम्पर्क करो। मेरे पति ने और मैंने उनसे सम्पर्क किया और मिलने का समय मांगा। लेकिन उन्होंने सारी जानकारी वाट्सएप पर ही एक फॉर्म में भरकर भेजने को कहा। हमें बहुत अटपटा सा लगा, लेकिन इलाज करवाना था, सो सब कुछ लिख दिया। इसके बाद डॉ. साहब ने मोबाईल पर बहुत से सवाल पूछे, न चाहते हुए भी सभी सवालों का भी जवाब दिया। शुरु में दो महिना की दवाई दी। जिससे मुझे काफी फायदा हुआ। फिर से हमने दो महिना की दवाई मंगवानी चाही, लेकिन डॉक्टर साहब ने एक साथ दो महिने की दवाई नहीं भेजी। बाद में एक-एक महिना की दवाई भेजी। कुल 5 महिने बाद मैं पूरी तरह से ठीक हो चुकी हूं। अब मुझे लगता है कि यदि मैं वाट्सएप पर डॉ. साहब को लिखकर जानकारी भेजने या सवालों के जवाब देने के कारण संकोचवश इलाज नहीं करवाती तो मैं शायद ही ठीक हो पाती। आॅपरेशन का खर्चा झेलना पड़ता। डर इस बात का था कि आॅपरेशन के बाद पता नहीं क्या होने वाला था? जबकि मैं मात्र 12500 रुपये में ही पूरी तरह से स्वस्थ हो गयी। सबसे बड़ी बात कि मैं आॅपरेशन करवाने से बच गयी। इसके अलावा चर्चा के दौरान मुझे और मेरे पति को डॉ. साहब ने अनेक ऐसे टिप्स भी दिये जो हमारे लिये अमूल्य हैं। मैं डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'जी का यह उपकार कभी नहीं भूलूंगी। धन्यवाद।-उर्मिला, अजमेर, राजस्थान। यह रोगिणी द्वारा बताये अनुभव का सार संक्षेप है।

डॉक्टर टिप्पणी: योनिद्वार बाहर निकलने को आम बोलचाल में शरीर निकलना भी कहा जाता है। जिसे हिन्दी में गर्भाशय भ्रंश या योनिभ्रंश (Vaginal Prolapse/Collapse or Uterine Prolapse) कहा जाता है। लेकिन होम्योपैथी में रोग के इन नामों के बजाय रोगिणी के शारीरिक एवं मानसिक लक्षण ही अत्यधिक मायने रखते हैं। जिनको जाने बिना उपचार करना असम्भव है। मुझे पता है कि उर्मिला जी को मेरे सवालों के जवाब अर्थात लाक्षणिक जानकारी देने में काफी हिचकिचाहट हुई थी। यहां समझने वाली बात यह है कि महिलाओं को अपनी योन तकलीफों को कभी भी छिपाया नहीं चाहिये। इसके अलावा किसी एक ही डॉक्टर राय को या एक ही चिकित्सा पद्धति के निष्कर्ष को अन्तिम मानकर हार नहीं मान लेनी चाहिये।
*नोट: मेरी ओर से भेजी जा रही उक्त पाठ्य सामग्री से यदि आपको किसी भी प्रकार की परेशानी हो तो प्लीज तुरंत अवगत कराएं। आगे से आपको कोई सामग्री नहीं भेजी जायेगी। यदि यह सामग्री आपको किसी अन्य स्रोत से प्राप्त हुई है और यदि आप अपने वाट्सएप इनबॉक्स में नियमित रूप से ऐसी सामग्री प्राप्त करना और पढना चाहते हैं तो अपने मोबाईल में मेरा वाट्सएप 9875066111 एवं 8561955619 को सेव/एड करें और नियमित सामग्री प्राप्त करने हेतु वाट्सएप 9875066111 पर मुझे लिखें।*

*आपका-अपना*
-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश', HCF & MDC
(Health Care Friend and Marital Dispute Consultant)
स्वाथ्य रक्षक सखा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार
Chief Management Director-Nirogdham (Treatment of Incurable)
मुख्य प्रबन्ध संचालक-निरोगधाम (लाइलाज का इलाज)
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Jaipur, Rajasthan, 07 जनवरी, 2018, 22.08 बजे।

यौन शक्तिवर्धक (केसर-युक्त) 'कामवाण पाउडर'-Sexual Power


स्त्री एवं पुरुष दोनों के स्वस्थ, सफल एवं सन्तुष्टि प्रदायक यौन-सम्बन्ध दाम्पत्य जीवन की आधारशिला होते हैं। वर्तमान में अनेक प्रकार के तनाव और मानसिक दबावों के चलते यौन-क्षमता समाप्त या कमजोर होती जा रही हैं। स्त्रियों में श्वेतप्रदर सहित अनेक प्रकार की समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। इन सब कारणों से लोगों के दाम्पत्य जीवन बिखर रहे हैं।




यौन अक्षमता को थोड़ा स्पष्ट करना बहुत जरूरी है। जो पुरुष अपनी पत्नी से यौन संबन्ध नहीं बना पाते या जल्द ही स्खलित या शिथिल या ठंडे हो जाते हैं, वे यौन रोगी या नपुंसकता के रोगी कहलाते हैं। इस समस्या का सीधा सम्बंध लैंगिक कमजोरी से ही माना जाता है। इनमें से बहुसंख्यक पुरुष शारीरिक रूप से नपुंसक नहीं होते, लेकिन उनके अवचेतन मन में बैठे कुछ प्रचलित अंधविश्वासों के चक्कर में फंसकर, यौन-अक्षमता के शिकार होकर वे मानसिक रूप से नपुंसक/नामर्द हो जाते हैं। मानसिक नपुंसकता के रोगी अपनी पत्नी के पास जाने से डरने लगते हैं। वे इतने भयभीत रहते हैं कि सहवास भी नहीं कर पाते। इस कारण उनकी मानसिक स्थिति लगातार बिगड़ती ही चली जाती है।

इसका दु:खद दुष्परिणाम यह होता है कि इस रोग में रोगी अपनी परेशानी, किसी दूसरे को नहीं बता पाता या उसे सही उपचार नहीं करा पाता, मगर जब वह पत्नी को संभोग के दौरान पत्नी को पूरी सन्तुष्टि नहीं दे पाता, तो रोगी की पत्नी को उसकी अक्षमता का पता चल ही जाता है। वह जान जाती है कि उसका पति नंपुसकता के शिकार है। इससे पति-पत्नी के बीच में लड़ाई-झगड़े और विवाद शुरू हो जाते हैं। अनेक मामलों में बात विवाहेत्तर यौन सम्बन्धों या तलाक तक पहुंच जाती है।

वास्तव में ऐसे रोगियों का इलाज होम्योपैथी के जरिये सम्भव है, लेकिन न तो ऐसे रोगी प्रयास करते हैं और न हीं उन्हें समर्पित तथा अनुभवी होम्योपैथ डॉक्टर मिल पाते हैं। इस कारण वे जीवनभर घुट-घुट कर अपमानजनक जीवन जीने को विवश होते हैं।

बहुत से सामान्य पुरुषों की यौन कमजोरी जो नामर्दी तक नहीं पहुंच पाती है, वे भी धीरे-धीरे उपरोक्त स्थिति की ओर लगातार बढ रहे होते हैं, लेकिन शर्म-संकोचवश वे अपनी समस्या को किसी के सामने नहीं रख पाते हैं। ऐसे लोगों को अपनी शारीरिक यौन क्षमताओं को बरकरार रखने तथा बढाने के लिये प्रतिवर्ष खुराक लेते रहना चाहिये। इससे उन्हें बहुत सम्बल मिल सकता है।

ऐसे लोगों के लिये स्प्ष्ट किया जाता है कि हमारे देश में अनेक आयुर्वेदिक औषधियां स्त्री और पुरुष दोनों में संतुलित कामशक्ति का संचार करने में अनादिकाल से सम्पूरक सिद्ध होती रही हैं। मगर दु:ख का विषय है कि जंगल लगातार समाप्त होते जा रहे हैं और प्रगति की राह पर चलने को मजबूर किसानों द्वारा खेती में जहरीले कीटनाशकों और खादों का उपयोग किया जाता है। ऐसे में खेतों में या खेतों ​के किनारे पैदा होने वाली शुद्ध आॅर्गेनिक औषधियां मिलना लगभग मुश्किल सा हो गया है। कुछ लोग व्यावसायिक रूप से औषधियों की खेती करने लगे हैं, लेकिन अधिक उपज लेने के चक्कर में, उनके द्वारा भी जहरीले कीटनाशकों और खादों का धड़ल्ले से उपयोग किया जा रहा है।

उपरोक्त कारणों से बाजार में उपलब्ध औषधियों से आशातीत परिणाम नहीं मिल पा रहे हैं। इन हालातों में हमने राजस्थान की जलवायु में पनप सकने वाली कुछ प्रमुख औषधियों को आॅर्गेनिक विधि से पैदा करके, उन्हें छाया शुष्क करके और निर्धारित रीति से उनका शोधन करके, उनका बारीक पाउडर बनाने का छोटा सा प्रयास शुरू किया है। जो अत्यंत परिश्रमपूर्ण होने के साथ-साथ तुलनात्मक रूप से काफी मंहगा कार्य सिद्ध हो रहा है। मगर प्रसन्नता की बात यह है कि हजारों लोगों पर इन औषधियों का उपयोग करने के बाद उत्साहवर्द्धक परिणाम मिले हैं। जो सबसे बड़ा संतोष का विषय है।

अत: उपरोक्त हालातों में स्त्री-पुरुषों को यौन समस्याओं से सम्बन्धित ताजा एवं शुद्ध 'कामवाण पाउडर' को इच्छुक लोगों को अग्रिम आॅर्डर पर एक और दो माह के उपयोग हेतु क्रमश: 300 एवं 600 ग्राम के पैक में घर बैठे रीजनेबल कीमत पर, रजिस्टर्ड पार्सल के जरिये उपलब्ध करवाने का निर्णय लिया है। इन दवाइयों का पहली बार लगातार 6 महिने तक तथा इसके बाद हर साल एक-दो महिने सेवन करते रहने पर कोई भी सामान्य पुरुष 65 से 70 साल तक सफलतापूर्वक यौनसम्बन्ध बना सकता है।
'कामवाण पाउडर' में मुख्यत: निम्न महत्वपूर्ण औषधियों का सम्मिश्रण है:-

01. सफेद मूसली: संकेत-प्राकृतिक रूप से कामोत्तेजक, पुष्टिकारक, एंटीऑक्सीडेंट, वीर्य, यौन शक्ति, उर्जा, शुक्राणु, सेक्स आवृति/ड्राईव, स्तम्भन और बल वर्द्धक। नियमित रक्त संचार करके यौनांगों को स्वस्थ एवं शक्ति प्रदान करती है। वीर्य को पुष्ट और गाढा करती है, साथ ही रोगों से लड़ने हेतु शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करती है। श्वेतप्रदर, बांझपन, शिथिलता, ठंडापन, नपुंसकता, शीघ्रपतन और अल्पशुक्राणुता से बचाती है।
02. बबूल की पत्ती एवं कच्ची फली: संकेत-यौन कमजोरी तथा शीघ्रपतन को ठीक करके स्तम्भन शक्ति बढाती हैं। वीर्य को गाढा करके शुक्राणुओं की संख्या में वृद्धि करती हैं। मूत्र विकारों से मुक्ति दिलाती हैं।
03. अश्वगंधा: संकेत-इसे इण्डियन जिनसेंग भी कहा जाता है। लेकिन अश्वगंधा पूरी तरह से प्राकृतिक परिणाम प्रदान करती है। यह वातनाशक, बलकारक, शक्तिवर्द्धक तथा पाचनशक्ति वर्द्धक। बांझपन, गर्भस्त्राव, श्वेतप्रदर, रक्तप्रदर, जोड़ों में दर्द, कमरदर्द, नपुंसकता, यौन कमजोरी, शीघ्रपतन, कमजोर पाचन प्रणाली, गठिया, वातरोग, शियाटिका, हाई ब्लड पेशर, थकावट आदि को दूर करती है।
04. मुलेठी: संकेत-वात, पित्त और कफ-त्रिदोषनाशक। नपुंसकता (नामर्दी), ऐसिडिटी, कब्ज, आंव, अल्सर, कफ, खांसी, मूत्ररोग, अनियमित और दर्दनाक माहवारी, स्नायु कमजोरी, जोड़ों एवं मांसपेशियों के दर्द आदि को दूर करके, प्राकृतिक कामशक्ति बढाती है। हृदय को मजबूत करती है। नेत्रज्योति एवं रक्त की मात्रा बढाती है। सौन्दर्य वर्द्धक है।
05. शतावरी: संकेत-इसे आयुर्वेदिक औषधियों की रानी कहा जाता है। यौनांगों में शिथिलता-ढीलापन, स्वप्नदोष, शीघ्रपतन, मूत्रविकार, अपच, अजीर्ण, कब्ज, प्रदर, माईग्रेन, अनिद्रा नाशक एवं दुग्धवर्द्धक, प्रजनन क्षमता बढाये, मधुमेह नियंत्रित करे और सुंदरता निखारे।
06. मेथी: संकेत-कोलेस्‍ट्रॉल लेवल में सुधार, ब्लड प्रेशर कंट्रोल, शुगर संतुलन, चर्म रोग नाशक, पाचनशक्ति बर्द्धक, कृमिरोग नाशक है।
07. बीजबंद: संकेत-यौन दुर्बलता, कब्ज, खूनी बवासीर, मूत्रातिसार, श्वेत प्रदर, हृदय दुर्बलता, उच्च रक्तचाप, शीघ्रपतन, कमजोरी आदि।
08. जायफल: संकेत-कामशक्ति एवं कामेन्द्रिय शक्ति वर्धक, त्वचा की झाईयाँ, जोड़ों का दर्द, वात एवं कफ नाशक, अजीर्ण, गर्भाशय-शोथ आदि में विशेष लाभदायक है।
09. वंशलोचन: संकेत-वीर्य वृद्धि, वीर्य गाढा, गर्भपात प्रतिरोधक, प्रदर, प्रमेह, यकृत/लीवर के रोग आदि में लाभदायक है।
10. गोखरू बीज: संकेत-गोखरू पुरुष के प्रजनन अंगों को स्वस्थ रखता है, शुक्राणुओं की गुणवत्ता, गतिशीलता व आयतन को बढ़ावा देता है। बलवर्धक एवं प्राकृतिक कामेच्छा वर्धक। साइटिका एवं चर्मरोग में उपयोगी। सभी मूत्र रोगों में उपयोगी। त्रिदोष (वात, कफ और पित्त) नाशक। बांझपन, यौन कमजोरी, गुर्दारोगों आदि में लाभकारी।
11. शिलाजीत: संकेत-दिमागी ताकत एवं रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ाये और मधुमेह, रक्तचाप, तनाव, यौन कमजोरी, शीघ्रपतन, स्वप्नदोष आदि को नियंत्रित करे।
12. निर्गुण्डी: संकेत-शिलाजीत के साथ निर्गुण्डी का सेवन सभी तकलीफों में आश्चर्यजनक परिणाम देता है। साथ ही पाचन-क्रिया को मजबूत करके लीवर को ताकतवर बनाती है।
13. सौंठ: संकेत-सिरदर्द, अर्द्धसिर शूल, कब्ज, भूख की कमी, अजीर्ण, मधुमेह, अंडकोषवृद्धि, दर्दनाक माहवारी, प्रदर, जोड़ों-वात-कमर के दर्द से मुक्ति। आ​दि।
14. गिलोय: संकेत-पुराना ज्वर, मधुमेह, कब्ज नाशक, यौनशक्ति वर्धक एवं रोग प्रतिरोधक क्षमता बढाने वाली औषधि है।
15. काली मूसली: संकेत-कामेच्छा में कमी, प्रदर, सीने में जलन, चर्मरोग, पेशाब में जलन आदि को दूर करता है। शक्ति वर्धक है। शुक्राणू वर्धक। ऐण्टीआॅक्सीडेंट। प्रजनन शक्ति बढाये।   
16. आमला: संकेत-रोग प्रतिरोधक क्षमता एवं नेत्रज्योति बढाये, ऐण्टीआॅक्सीडेंट-शरीर से विशैले पदार्थ निकाले, पाचनतंत्र को मजबूत करे, वृद्धावस्था की गति को रोके, दिल की रक्षा करे, नींद नहीं आना आदि।
17. मकोय: संकेत-यौन-शक्ति वर्धक, कामोत्तेक, वीर्य वर्धक, त्रिदोष (वात, कफ और पित्त) शामक, पाचन, यकृत/लीवर शोधक एवं उतेजक, शोथहर, रक्तशोधक, कुष्ठ व विषनाशक, कब्ज, बवासीर, दमा, श्वास, अनिद्रा, चर्मरोग, घबराहट, ऐंठन, बांयटे, पेट में जलन, पीलिया, यकृत रोग, गठिया आदि में उपयोगी।
18. डीकामाली: संकेत-अपच, भूख की कमी, कब्ज, चर्मरोग, संक्रमण, बवासीर, आंतों के कृमि आदि के उपचार में सहायक।
19. भूई आमला: संकेत-स्वस्थ यौनशक्ति के लिये पाचन क्रिया और पाचन क्रिया के लिये स्वस्थ लीवर का होना आवश्यक है। लीवर क्लीनिंग, गैस्ट्रिक अल्सर एवं एंटीऑक्सिडेंट हेतु उपयोगी है। भूई आमला लीवर को ताकत प्रदान करता है। शराब के सेवन से क्षतिग्रस्त यकृतों को पुनर्जीवित करे। साथ ही यह गठिया-जोड़ों के दर्द का प्राकृतिक तरीके से शमन करता है। मूत्रवर्धक, रक्तचाप को कम करता है, प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूती प्रदान करे। शुगर लेवल को कम करे।
20. श्योनाक: संकेत-कब्ज, फोड़े और घावों, मुंह कैंसर, खुजली और अन्य त्वचा रोगों के लिए एक प्रभावी उपाय, गर्भधारण की संभावना बढ़ाये। रक्तशोधक। स्त्रीरोग संबंधी विकारों में उपयोगी और यहां तक कि बचपन के मनोवैज्ञानिक यौन विकारों के मामले में भी प्रभावी। दिल का टॉनिक, रक्त शोधक, रोग शामक, भूख वर्धक। गठिया-वात। पाचन शक्ति वर्धक। संक्रमण नाशक आदि।
21. कौंच: संकेत-कौंच को भारतीय बियाग्रा कहा जाता है। यद्यपि यह बियाग्रा से भी ताकवर है, लेकिन इसका प्रभाव स्थायी है, जबकि बियाग्रा का तात्कालिक प्रभाव होने के साथ-साथ अनेक दुष्प्रभाव भी होते हैं। नपुंसकता, नसों की कमजोरी, लिंग का ढीलापन और शीघ्रपतन, वीर्य के पतलेपन, शुक्राणुओं की कमी, दर्द व पेट की तकलीफें, मधुमेह, गैस, श्वेतप्रदर, बांझपन, गर्भपात आदि की समस्या आदि में अत्युत्तम है।
22. तालमखाना: संकेत-तालमखाना यौनशक्ति और कामोत्तेजना बढाने वाला, पेशाब साफ लाने वाला, एंटी बॉयोटिक एवं पोषक गुणों से भरपूर है। वीर्य विकार, वीर्य का पतलापन, शुक्राणुओं की कमी, नामर्दी, स्वप्नदोष, शीघ्रपतन आदि में उपयोगी है। शारीरिक कमजोरी को घटाता है। यह हृदय और किडनी के लिये भी बहुत उपयोगी है। स्त्रियों की कमजोरी, विशेषकर प्रसवकाल के बाद की कमजोरी में विशेष लाभदायक है।
23. लाजवंती/छुईमुई: संकेत-नपुंसकता, शीघ्रपतन और मर्दाना कमजोरी, स्तनों का ढीलापन दूर करे, गर्भाशय  के बाहर आने की समस्या, बवासीर (Piles) और भगंदर (Anal fistula), चर्मरोग, मधुमेह, गले के रोग, संकोचक, आदि में लाभदायक है।
24. सेमलकंद/सेमल मूसली: पुष्टिकारक, कामोत्तेजक और नपुंसकता नाशक, बलकारक, अपार बलवीर्य वर्धक, स्तम्भन शक्ति बढ़ाती है, शरीर की कान्ति निखारती, प्रमेह-धातु की कमजोरी और शरीर की क्षीणता में सेमल की मूसली अव्वल दर्जे की चीज है।
25. उटंगन: संकेत-यह सभी प्रकार की यौन समस्याओं का समाधान है तथा यौनशक्ति बढाने में विशेष उपयोगी है।
26. केसर: संकेत- अजीर्ण, अपच, गैस को दूर करे। रक्‍त शुद्धिकरण करके किडनी और लिवर की करे सुरक्षा। यौन क्षमता अर्थात मर्दानगी वर्धक। माहावारी तथा गर्भाशय सम्बन्धी तकलीफों में लाभकारी। ज्योतिवर्धक। बाल झड़ना रोके। अर्थराइटिस-गठिया में आरामदायक। स्मरण-शक्ति बढाये।
इत्यादि।

जो कोई पुरुष उपरोक्त 'कामवाण पाउडर' पाउडर को घर बैठे मंगवाना चाहते हैं, वे हम से सीधे सम्पर्क कर सकते हैं।

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डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश', HCF&MDC
(Health Care Friend and Marital Dispute Consultant)
स्वाथ्य रक्षक सखा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार
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Mobile No. मोबाईन नम्बर: 9875066111 (10AM to 10PM)
Jaipur, Rajasthan, 27 दिसम्बर, 2017, 21.40PM
शीघ्रपतन का होम्योपैथिक इलाज!

लेखक: डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
आगे बढने से पहले पाठकों को अवगत करवाना उचित होगा कि 30 नवम्बर, 2017 को 'शीघ्रपतन' शीर्षक से लिखे लेख में निम्न विषयों की जानकारी दी जा चुकी है:
1. शीघ्रपतन से कितने पुरुष परेशान रहते हैं?
2. शीघ्रपतन किसे कहते हैं?
3. वीर्य स्खलन की समय सीमा क्या होनी चाहिये?
4. स्त्री की योन तृप्ति क्या है?
5. सम्भोग को समान भोग बताना कितना सही?
6. शीघ्रपतन का गर्भधारण से सम्बन्ध?
7. शीघ्रपतन दाम्पत्य बिखराव का कारण!
8. शीघ्रपतन के कारण।
उक्त जानकारी मेरी वेबसाइट के निम्न लिंक पर पढी जा सकती है:-

07 दिसम्बर, 2017 को 'शीघ्रपतन नाशक सात घरेलु ​नुस्खे!' शीर्षक से लिखे लेख में शीघ्रपतन नाशक सात घरेलु ​नुस्खों के बारे में विस्तार से जानकारी दी जा चुकी है।
उक्त जानकारी मेरी वेबसाइट के निम्न लिंक पर पढी जा सकती है:-
http://www.healthcarefriend.in/2017/12/blog-post_69.html

शीघ्रपतन के होम्योपैथिक इलाज के बारे में लिखने से पहले स्पष्ट कर देना उचित होगा कि होम्योपैथी में किसी भी रोग की कोई सुनिश्चित दवाई नहीं होती है। इलाज करने के लिये रोगी के सम्पूर्ण लक्षणों को जानने के बाद उचित दवाई का निर्धारण करना होता है, जो हम होम्योपैथ्स के लिये बहुत ही कठिन और परिश्रमपूर्ण कार्य है। दु:खद पहलु यह है कि अधिकतर रोगी, अपने लक्षण बताने में ही संकोच करते हैं। जिसके कारण रोगी को भारी शारीरिक एवं आर्थिक नुकसान होता है। साथ ही उपचारक का भी समय बर्बादा होता है और नाम खराब होता है।





यहां पर कुछ प्रमुख होम्योपैथिक औषधियों की जानकारी दी जा रही है, जो शीघ्रपतन की समस्या के समाधान में सहायक सिद्ध हो सकती हैं। मगर याद रहे किसी अनुभवी होम्योपैथ के परामर्श के बिना इन दवाईयों का सेवन करना उचित नहीं होगा, क्योंकि दवाई के नाम मात्र से कुछ नहीं हो सकता। महत्वपूर्ण कार्य है, रोगी के सम्पूर्ण लक्षणों को पूछकर/जानकर दवा की सही मात्रा और दवा की शक्ति का निर्धारण करना।

आॅरम मेटालिकम: रोगी को आत्महत्या करने का मन करता है और अपने आप को बिल्कुल निकम्मा महसूस करता है, निराशा अधिक होने के साथ ही शरीर का रक्तदाब बढ़ जाता है, जीवन में एकदम निराशापन हो जाता है। रोगी को भूख तथा प्यास लगती है, जी मिचलाने लगता है और दम घुटने लगता है तथा गर्मी भी लगने लगती है। अण्डकोष में दर्द और सूजन आ जाती है, अण्डको अन्डकोषों में कठोरता उत्पन्न हो जाती है, लिंग में तेज उत्तेजना होती है। भयंकर शारीरिक कामोत्तेजना तथा चंचलता का भाव होना, परन्तु इसके बाद बहुत शीघ्र ही लिंग में अत्यधिक शिथिलता। मैथुन शूरू करते ही लिंग का ढीला पड़ जाना। हस्तमैथुन के दुष्परिणाम आदि लक्षण पाये जाते हैं। स्त्री रोगी की योनि में तेज उत्तेजना होती है। बांझपन का रोग तथा इसके साथ ही योनि में तेज जलन के साथ बांझपन हो तो यह दवाई स्त्रियों के लिए भी बहुत उपयोगी सिद्ध हो सकती है।

सेलिनियम: सेलेनियम उन रोगियों के लिए बहुत उपयोगी मानी जाती है जो व्यक्ति जवानी के जोश में आकर अपने वीर्य को समय से पहले ही समाप्त कर चुके होते हैं और संभोग क्रिया के समय पूरी तरह सफल नहीं हो पाते। स्त्री के साथ संभोग क्रिया करने के बाद रोगी का चिड़चिड़ा हो जाना। सोते समय रोगी का वीर्य अपने आप ही निकल जाना। मन में संभोग करने की इच्छा तेज होना, लेकिन संभोग करते समय लिंग का उत्तेजित न होना, वीर्य का पतला हो जाना। बार-बार वीर्य-स्राव। बिना कामेच्छा के ही प्रात: काल लिंग में उत्तेजना होना, परन्तु सहवास की कोशिश करने पर लिंग का शिथिल हो जाना। अत्यधिक लैंगिक दुर्बलता। मन में अत्यधिक कामेच्छा होने पर भी लिंग में कड़ापन न आना अथवा सेक्स पूर्ण न हो पाना। जननेन्द्रिय/लिंग में खुजली तथा सुरसुरी। नींद में, पाखाने के समय अथवा अनजाने में लिंग से गोंद जैसा लसदार पदार्थ निकलना आदि लक्षणों में सेलिनियम का उपयोग लाभदायी हो सकता है।

ऐग्नस कैक्टस: लैंगिक दोष उत्पन्न होना, मृत्यु का भय होना। अधिक उदासी के साथ जल्दी मृत्यु का भय महसूस हो रहा हो। मन-मस्तिष्क स्थिर न रहना, याददाश्त कमजोर होना, किसी कार्य को करने में उत्साह न होना। जो पुरुष जवानी में अधिक मौज-मस्ती करते रहे हैं और कामवासना में अधिक डूबे रहने के कारण शारीरिक रूप से कमजोर तथा नपुंसक हो जाते हैं। जिनके प्रजनन अंग ठण्डे तथा ढीले पड़ गये हों। लिंग में कमजोरी, परन्तु कामेच्छा का अधिक होना, मल-त्याग के समय जोर लगाने से अथवा नींद में वीर्य स्खलन, एकदम मानसिक अवसन्नता, कमजोर तथा अनमनेपन का भाव आदि लक्षणों में इसका सेवन करें।

ग्रैफाइटिस: हर समय डर सा लगते रहना, किसी भी काम को करने में मन न लगना, बहुत ज्यादा भावुक हो जाना, किसी भी फैसले को करने में दुविधा होना, उदास सा बैठे रहना। गर्म पीने वाली चीजों का हजम न होना। जितनी बार भी भोजन करे उतनी ही बार जी मिचलाना और उल्टी आना, आमाशय में दबाव सा महसूस होना। आमाशय में जलन होने के कारण भूख न लगन। डकार लेने में परेशानी होना। पेट में गैस बनना। सेक्स करने की इच्छा का तेज होना, लेकिन सेक्सक्रिया के दौरान अपने सहभागी को पूरी तरह से खुश न कर पाना। अत्यधिक कामोत्तेजना के कारण योनि में लिंग-प्रवेश के तुरन्त बाद या प्रवेश से पूर्व ही वीर्य-स्खलन हो जाए। लिंग में कड़ापन न आना। हस्तमैथुन तथा अतिरिक्त काम-तृप्ति के कारण लिंग में शिथिलता, लिंगमुण्ड/सुपारी पर कटे-फटे घाव तथा खाल उधड़ जाना, लिंग में सूजन तथा लसदार-चिपचिपे स्राव होना। सेक्स क्रिया से मन का बिल्कुल हट जाना आदि लक्षणों के नज़र आने पर रोगी को ग्रैफाइटिस औषधि देने से लाभ होता है।

लाइकोपोडियम: लाइकोपोडियम नामर्दी की मुख्य औषध है। यह ऐसे रोगियों के लिए बहुत उपयोगी है जो मानसिक तथा शारीरिक दृष्टि से भी कमजोर होते हैं और जिन्हें शरीर में बहुत अधिक कमजोरी होती है। रोगी को और भी कई प्रकार के रोग होते हैं जो इस प्रकार हैं- लालची, कंजूस, धन का लालची, दूसरे के प्रति घृणा की भावना रखना आदि। रोगी को भय होता है तथा क्रोधित स्वभाव का हो जाता है, अपमान के कारण उसे और भी कई प्रकार की बीमारियां हो जाती है। अत्यधिक मैथुन तथा अत्यधिक अप्राकृतिक मैथुन के कारण लिंग में उत्तेजना या कड़ापन ही न आना। नपुंसकता रोग होने के साथ ही रोगी को संभोग करने की इच्छा अधिक होती है तथा समय से पहले अपने आप ही वीर्य निकल जाता है और इसके बाद लिंग ठण्डा हो जाता है तथा संभोग की शक्ति कम हो जाती है अर्थात संभोग करने का मन नहीं करता है, संभोग करने के समय में लिंग में हल्का कड़ापन होता है, संभोग करते समय नींद सी आने लगती है, रोगी संभोग के प्रति भयभीत हो जाता है तथा जम्भाई आती है। इस प्रकार के लक्षणों में से यदि कोई भी लक्षण किसी व्यक्ति को हो गया है तो इन लक्षणों के साथ शीघ्रपतन के लक्षण में लाइकोपोडियम सर्वोत्तम दवाई है। यह दवाई विशेषकर वृद्धों के लिए बहुत लाभकारी सिद्ध हो चुकी है।

फास्फोरस: रोगी का उत्साह कम, मन चिड़चिड़ा हो जाता है। उसे डर लगता है और रोगी को ऐसा लगता है कि हर कोने से कोई चीज रैंगती हुई बाहर निकल रही हो तथा उसके मन में दिव्यदृष्टि जैसी दशा उत्पन्न हो जाती है। रोगी अचानक चौंक पड़ता है। रोगी की सोचने की शक्ति कम हो जाती है, रोगी पागलों की तरह का व्यवहार करता है। उसे जीवन मेें आनन्द की अनुभूति नहीं होती है। अकेले रहने पर मृत्यु का भय लगा रहता है। दिमाग थका-थका सा रहता है। वह अपने प्रति अधिक उच्च धारणा रखता है, शरीर में उत्तेजना अधिक होती है, सारा शरीर गरम रहता है, रोगी अस्थिर रहता है और उसे चारों ओर अशान्ति प्रतीत होती है। खाना खाते ही रोगी को तुरन्त भूख लग जाती है, भोजन करने के बाद हर बार खट्टा स्वाद और खट्टी डकारें आती है, डकार आने के साथ ही खाना खाया हुआ भोजन तुरन्त वापस मुंह में आ जाता है, जैसे ही आमाशय के अन्दर पानी गरम होता है, वैसे ही उसकी उल्टी हो जाती है। रोगी में संभोग करने की शक्ति नहीं रहती है, रोगी को संभोग क्रिया करने के लिए अधिक इच्छा होती है, लेकिन उसका अपने आप ही वीर्यपात हो जाता है। दिन-रात बारम्बार पतले, लसदार रंगहीन तरल पदार्थ का मूत्र-मार्ग से स्राव होना। रोगी को संभोग करने के सपने आते हैं और अपने आप ही वीर्यपात हो जाता है। इत्यादि लक्षणों पर फास्फोरस लाभदायक है।

फास्फोरिक एसिडम: ऐसे रोगियों के रोगों को ठीक करने के लिए उपयोगी है जो पहले बहुत तन्दुरुस्त (स्वास्थ्य) रहे हों, लेकिन बाद में स्वप्नदोष, हस्तमैथुन, स्त्री प्रसंग, अनुचित बुरे कार्य करने के कारण अपने वीर्य को नष्ट करते हैं जिसके कारण उनका शरीर ठण्डा पड़ जाता है और कमजोरी अधिक हो जाती हैं। अधिक रोना-धोना और बड़बड़ाना, इस प्रकार के लक्षण होने के साथ ही रोगी को ठण्ड भी लगती है और अधिक निराशा होती है। रोगी को रसीले पदार्थों का सेवन करने की इच्छा होती है, खट्टी डकारें आती है, जी मिचलाने लगता है। आमाशय में दबाव महसूस होता है और भोजन करने के बाद ठीक प्रकार से नींद नहीं आती है, ठण्डा दूध पीने का मन करता है। रोगी को बार-बार पेशाब आता है तथा इसके साथ ही पेशाब में दूध जैसा सफेद पदार्थ भी आता है। जो वीर्य नहीं होता, लेकिन रोगी वीर्य समझकर परेशान होता रहता है। रोगी को रात के समय में मलत्याग करते समय वीर्यपात हो जाता है। वीर्यपात होते ही रोगी को जलन भी होती है। संभोग करने की शक्ति घट जाती है, अण्डकोष को छूने पर दर्द होता है तथा अण्डकोष सूजा रहता है, आलिंगन करने के समय में लिंग ठण्डा (शिथिल) पड़ जाता है। युवकों की अत्यधिक कामवासनाओं में लिप्तता तथा हस्तमैथुन। व्यभिचार आदि के कारण लैंगिक कमजोरी। नामर्दी के साथ अचैतन्यता/मूर्छा जैसी अवस्था। मलत्याग करने के समय में भी लिंग शिथिल पड़ा रहता है। लिंग की त्वचा पर सूजन आ जाती है तथा लिंग की सुपारी पर भी सूजन आ जाती है, लिंग पर घाव हो जाता है। मानसिक दुर्बलता। थोड़ी-बहुत उत्तेजना हो भी जाये तो सेक्स क्रिया पूर्ण न कर पाना। इस प्रकार के लक्षणों में फास्फोरिकम एसिडम का प्रयोग किया जा सकता है।

प्लैटिनम: रोगी अत्यधिक अहंकारी, अभिमानी हो जाता है। किसी की परवाह नहीं करना। सबको हर बात में अपने से छोटा समझना और अपने आप को हर बात में सब से बड़ा समझना। दूसरों के प्रति घृणा का भाव। इस प्रकार की अत्यधिक उत्तेजना, जिसके कारण हस्तमैथुन या अन्य तरीके से वीर्यपात करने को विवश होना पड़े। अत्यधिक कामोत्तेजना के कारण मिर्गी का दौरा पड़ जाये, असहनीय कामोत्तेजना होते रहना तथा साथ में लिंग/जननेन्द्रिय में लगातार सुरसुरी होना। अत्यधिक कामोत्तेजना के कारण शीघ्रपतन के लक्षण में प्लैटिनम लाभदायक है।

सीपिया: रोगी को अपने जननांग बिल्कुल ठण्डे से महसूस होना और उनमें बहुत ज्यादा पसीना आना, पुराना सुजाक रोग होने के कारण पेशाब के रास्ते से रात के समय दर्द के साथ स्राव का आना। लिंग के आगे के भाग पर मस्से से निकलना। बहुत दिनों तक बीमारी बने रहना अथवा बारम्बार वीर्यस्राव के कारण लिंग का दुर्बल हो जाना। कामेच्छा का घट जाना अथवा कामेच्छा के प्रति अरुचि आदि लक्षणों में सीपिया मदद कर सकती है।

सल्फर: रोगी का हर बात को तुरंत ही भूल जाना, किसी भी बात को सोचने और समझने में बहुत मुश्किल होना, मन में अजीब-अजीब से विचार आना जैसे कि वह किसी भी चीज को सुंदर वस्तु समझने लगता है, अपने आपको दुनिया का सबसे अमीर आदमी समझने लगता है, रोगी का बहुत ज्यादा चिड़चिड़ा हो जाना, किसी भी व्यक्ति से सही तरीके से बात न करना, काम करने में मन न लगना, रोगी इतना आलसी हो जाता है कि उसको खुद को ही जगा पाना मुश्किल हो जाता है, खुलकर भूख लगने पर भी रोगी का हमेशा कमजोरी और दुबला-पतला सा रहना। रोगी चाहे जितना भी भोजन कर ले उसको तब भी भूख लगती रहती है, अगर रोगी भोजन नही करता तो उसके सिर में दर्द शुरू हो जाता है और कभी-कभी तो रोगी को बिल्कुल भी भूख नहीं लगती, थोड़ा सा भोजन करते ही रोगी की भूख समाप्त हो जाती है। रोगी के लिंग में सूजन आने के कारण दर्द होना। वीर्य का अपने आप ही निकल जाना। सोते समय लिंग में बहुत तेजी से खुजली का होना और लिंग का बहुत कमजोर पड़ जाना। अंडकोषों का लटक जाना। कामेच्छा के समय जबरदस्त खाँसी उठना। लिंग में भरपूर कड़ापन न आना एवं योनि में प्रवेश के पूर्व ही अथवा प्रवेश करते ही बहुत जल्दी वीर्य स्खलित हो जाना। रोगी के लिंग में बहुत ही बदबूदार पसीने आना आदि लक्षणों के आधार पर सल्फर औषधि का प्रयोग करना असरकारक रहता है।

जिंकम मेटालिकम: मुख्य क्रिया मस्तिष्क सम्बंधित लक्षणों में विशेष रूप से होती है। यह औषधि ऊतकों को सुधारने में तेजी से क्रिया करती है और ऊतकों से सम्बंधी लक्षणों को समाप्त करती है। अण्डकोष की सूजन और ऊपर की ओर खिंचाव महसूस होना। लिंग की तेज उत्तेजना। रोगी में उत्पन्न ऐसे लक्षण जिसमें रोगभ्रम रहता है और साथ ही वीर्यपात हो जाता है। बालों का झड़ना। अण्डकोषों के वीर्य की थैली में खिंचाव महसूस होना। मन से सम्बंधित ऐसे लक्षण, जिसमें रोगी की स्मरणशक्ति कमजोर होने लगती है तथा उसे थोड़े देर पहले ही कही हुए बातें याद नहीं रहती। ऐसे रोगी शोर-शराबा पसन्द नहीं करता तथा हल्के शोर-शराबा में ही गुस्सा हो जाता है। इसके अतिरिक्त काम करने की इच्छा न करना, किसी से मिलने या बातचीत करने की इच्छा न होना। दूसरे के कहे हुए बातों को दोहराते रहना। मन में बुरे विचार आना तथा काल्पनिक रूप से भयभीत रहना। मल का सूखकर कठोर हो जाना तथा कब्ज बनना। इन कारणों से शीघ्रपतन होने पर रोगी को जिंकम मेटालिकम उपयोगी सिद्ध होगी।

कैलेडियम: रोगी अत्यन्त भुलक्कड़ होता है। जो काम कर चुका हो उस पर फिर सोचने लगता है कि किया या नहीं; दरवाजा बन्द कर चुका है, किन्तु लौट कर फिर ख्याल आता है कि बन्द किया या नहीं और फिर जाकर दरवाजे की कुण्डी को हाथ लगाकर इतमिनान करता है। जिस चीज का निश्चय करना हो उसे बार-बार जाकर, देखकर, हाथ लगाकर निश्चय करता है और वापस लौटने पर फिर अनिश्चित-का-अनिश्चित बना रहता है। रोगी सारे दिन बैठा-बैठा यही सोचा करता है कि जो काम वह कर चुका है या हो जाने चाहिये थे, वे उसने किये या नहीं किये, वे हुए या नहीं हुए। मन की इस प्रकार की दुर्बलता इसमें आ जाती है। जितना ही वह किसी विषय पर मन केन्द्रित करना चाहता है, उतना ही मन उस पर केन्द्रित नहीं हो पाता। मन की इस प्रकार की दुर्बलता प्राय: व्यभिचारियों में, हस्त-मैथुन करनेवालों में पायी जाती है। रोगी का मन अत्यन्त विषयासक्त होता है। उसमें स्त्री-प्रसंग की उत्कट इच्छा होती है, परन्तु मैथुन के प्रति असमर्थता होती है। स्त्री का आलिंगन करता है, परन्तु शारीरिक उत्तेजना ही नहीं हो पाती। ऐसे लोग सड़क के किनारे खड़े हुए आती-जाती ललनाओं की ओर ताका करते हैं और उनका वीर्य रिसता रहता है। ऐसे व्यभिचारी-विचारों से ग्रस्त पुरुष रातभर उलटा-पलटा करते हैं, लेकिन संभोग करने में असमर्थ हो जाते हैं। ऐसे रोगी को इतना मीठा पसीना आता है कि मक्खियां तक उस मिठास के लिये उसकी तरफ़ खिंची चली आती हैं। पसीना आने से रोगी को सभी तकलीफों में आराम मिलता है। इन लक्षणों में कैलेडियम सर्वोत्तम दवाई है।

कार्बोनियम सल्फ्यूरेटम: ज्यादा नशा करने के कारण रोगी की मांसपेशियों के कमजोर हो जाने पर, ठण्ड न बर्दाश्त कर पाना, त्वचा और श्लैष्मिका झिल्लियों का सुन्न पड़ जाना। ज्यादा नींद आना या नींद न आना, रोगी का चिड़चिड़ा हो जाना और याददाश्त का कमजोर हो जाना। संभोग क्रिया करने का बिल्कुल मन न करना, लिंग का सिकुड़कर छोटा हो जाना, अपने आप ही वीर्य निकल जाना। मूत्रनली से पुराने सूजाक जैसा स्राव निकलना। मूत्राशय के कष्ट, मूत्रनली में वेदना, सम्पूर्ण ध्वजभंग/नामर्दी। लिंगमुण्ड का प्रदाह, अण्डकोष में दर्द, जननेन्द्रिय में खुजली, जननेन्द्रिय की शिथिलता, सहवास के समय अतिशीघ्र स्खलित हो जाना, रात में स्वप्नदोष, कामेच्छा का अभाव आदि लक्षणों में कार्बोनियम सल्फ्यूरेटम का सेवन अत्यन्त उपयोगी है।

कोनियम मेकुलेटम: टांगों का कांपना, चलने-फिरने में परेशानी होना, कुछ दूर चलते ही शरीर का जवाब दे देना, कमजोरी, खून की कमी आदि लक्षण जो ज्यादा बुढ़ापे के लक्षण होते हैं। याददाश्त का कमजोर हो जाना और जनेन्द्रियों का कमजोर पड़ जाना। रात को नींद न आना, सुबह-सुबह बिस्तर छोड़ने का मन न करना, शरीर का टूटा-टूटा सा लगना। किसी भी चीज को रखकर कुछ ही समय में भूल जाना की कहां रखी है। पुरुष के अंदर संभोग की इच्छा तेज होने पर भी संभोग क्रिया में सफल न हो पाना, लिंग का कमजोर पड़ जाना, अण्डकोश का सख्त और बढ़ जाना। प्रचण्ड कामेच्छा रहने पर भी लिंग का उत्तेजित न होना। रात्रि में बिना स्वप्न के ही वीर्यम्राव। अत्यधिक सेक्स इच्छा होने पर भी सम्पूर्ण अथवा आंशिक, ध्वजभंग/नामर्दी। दर्द भरा वीर्यस्राव तथा भारी दर्दनाक लिंगोत्तेजना। लिंगोत्तेजना होने पर छुरी से काटने जैसा दर्द। विधुर तथा स्त्री प्रसंग के अनभ्यस्त पुरुषों की दबी हुई कामेच्छा का दुष्परिणाम, लैंगिक दुर्बलता, शीघ्रपतन के लक्षण आदि में कोनियम मेकुलेटम सर्वोत्तम दवाई है।

उक्त औषधियों के अतिरिक्त भी लक्षणानुसार होम्योपैथी में अनेकानेक ऐसी औषधियाँ हैं, जो शीघ्रपतन नामक तकलीफ का समाधान करने में उपयोगी सिद्ध होती हैं।

*नोट: मेरी ओर से भेजी जा रही उक्त पाठ्य सामग्री से यदि आपको किसी भी प्रकार की परेशानी हो तो प्लीज तुरंत अवगत कराएं। आगे से आपको नहीं भेजी जायेगी। यदि यह सामग्री आपको किसी अन्य स्रोत से मिली है और यदि आप अपने वाट्सएप इनबॉक्स में नियमित रूप से प्राप्त करना चाहते हैं तो अपने मोबाईल में हमारा वाट्सएप 9875066111 सेव/एड करें और हमें नियमित सामग्री प्राप्त करने हेतु वाट्सएप 9875066111 पर लिखें।*
डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश', HCF&MDC
(Health Care Friend and Marital Dispute Consultant)
स्वाथ्य रक्षक सखा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार
Health WhatsApp हेल्थ वाट्सएप: 8561955619
Mobile No. मोबाईन नम्बर: 9875066111 (10AM to 10PM)
Jaipur, Rajasthan, 26 दिसम्बर, 2017, 04.44AM
*सर्दी-जुकाम का होम्योपैथिक इलाज*

सर्दी का मौसम है। हर घर में किसी न किसी को सर्दी-जुकाम ने पकड़ रखा होगा? यद्यपि होम्योपैथी में किसी भी रोग के नाम से कोई दवाई नहीं दी जाती है, लेकिन लक्षणों के अनुसार लाइलाज समझी जाने वाली पुरानी से पुरानी तकलीफों को भी होम्योपैथी से ठीक किया जा सकता है। अत: सर्दी-जुकाम के बारे में भी यही नियम लागू होता है। अत: लक्षणानुसार कुछ होम्योपैथिक दवाइयों की जानकारी प्रस्तुत है:-



*एलियम सीपा (Allium Cepa):* मुख्य लक्षण-जुकाम में नाक से बहने वाले पानी से होंठ एवं नाक पर चिरमिराहट एवं खुजली हो रही हो साथ में छीकों के साथ नाक और आंखों से पानी आता हो तो एलियम सीपा जुकाम को ठीक कर देगी

*यूफ्रेशिया (Euphrasia):* इसका प्रमुख लक्षण-इसमें आँख से दाह करने वाला पानी/आंसू का स्राव और नाक से दाह न करने वाला स्राव बहता है। यदि आंखों के पानी से, गालों पर जलन एवं खुजली हो और नाक के पानी से कोई परेशानी न हो तो यूफ्रेशिया से जुकाम ठीक हो जायेगा।

*आर्सेनिकम एल्बम (Arsenicum Album):* प्रमुख लक्षण-नाक बंद/अवरुद्ध, बलगम से भरी हुई नाक और लगातार छींक आती हों। रोगी को किसी भी स्थान पर चैन और आराम नहीं मिलता हो। रोगी कभी यहां बैठता है, कभी वहां बैठता है। कभी एक कुर्सी पर बैठता है, कभी दूसरी कुर्सी पर बैठता है। कभी एक बिछौने पर लेटता है, कभी दूसरे बिछौने पर लेटता है। किसी एक जगह टिक कर बैठना, लेटना, रहना उसके लिये बहुत मुश्किल हो जाता है। रोगी को ऐसा लगता है कि उसका बदन जलन रहा है, लेकिन जब दूसरे लोग उसके शरीर को स्पर्श करके देखते हैं तो उन्हें ठंडा अनुभव होता है। शरीर की ऐसी आंतरिक जलन में भी रोगी को गर्मी से ही आराम मिलता है। इसी कारण रोगी अन्दर की जलन होने पर भी गर्म कपड़ा ही ओढ़ना चाहता हैं। साथ ही साथ रोगी बार-बार लेकिन बहुत थोड़ा-थोड़ा पानी पीता रहता है। ऐसी जुकाम आर्सेनिकम एल्बम से तुरंत ठीक हो जाती है।

*डल्कामारा (Dulcamara):* ऐसा जुकाम जो खुली, ठंडी हवा में बढ़ जाती है। गर्म हवा में, गर्म स्थान में रोगी को आराम मिलता है। रोगी अगर ठंडे कमरे में जायेगा, तो उसे नाक की हड्डी में दर्द शुरू हो जाएगा। छींकें आने लगेंगी और नाक से पानी बहने लगेगा। ऐसी जुकाम डल्कामारा से ठीक हो जायेगी।

*एकोनाइट (Aconite):* सर्दी-जुकाम दो प्रकार से हो सकता है। नमी वाली हवा लगने से सर्दी-जुकाम और खुश्क हवा लगने से सर्दी-जुकाम होना। सूखी ठंडी हवा के अचानक ठंड लगने से जो सर्दी-जुकाम हो जाती है। रोगी कितना ही पानी पीता जाये, उसकी प्यास नहीं बुझेती। रोगी बार-बार, बहुत-सा पानी पीता जाता है। ऐसे लक्षणों में एकोनाइट श्रेृष्ठ दवा है।

*नोट: उपरोक्त दवाई कितनी मात्रा में और कितनी बार लेनी हैं? इसका निर्धारण कोई अनुभवी होम्योपैथ ही कर सकता है। अत: बेहतर होगा कि किसी होम्योपैथ की देखरेख या परामर्श से ही इलाज लिया जाये।*

डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश', HCF&MDC
(Health Care Friend and Marital Dispute Consultant)
स्वाथ्य रक्षक सखा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार
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*Mobile No./मोबाईन नम्बर: 98750-66111 (10AM to 10PM)*
Jaipur, Rajasthan, 25 दिसम्बर, 2017, 05.10PM 
हाथ-पैर नहीं कटवायें, होम्योपैथी में हड्डी संक्रमण का इलाज सम्भव है!

लेखक: डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
यह संस्मण 1990 के उन दिनों की है, जब मैं होम्योपैथी का नौसिखिया ही था। अर्थात अनुभव की पूंजी नहीं के बराबर थी। मुम्बई (जो तब बम्बई थी) में सेवारत था। मेरे सहकर्मी की साली का पैर दुर्घटना में कुचल गया था। जिसके दो आॅपरेशन किये गये। आॅर्थोपैडिक सर्जन ने आॅपरेशन के जरिये हड्डियों को ठीक से फिक्स कर दिया था। वह चलने-फिरने भी लगी थी, लेकिन 1 साल और 3 महिने बाद भी हड्डी के एक हिस्से का संक्रमण (Infection) ठीक नहीं हो पा रहा था। हैवी-हैवी एण्टीबॉयोटिक्स खाने के बाद भी आराम नहीं पड़ रहा था। उन्होंने अनेक वरिष्ठ डॉक्टर्स को दिखाया। सब ने यही राय दी कि एण्टीबॉयोटिक्स खाने और ड्रेंसिंग करवाने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। किसी एक डॉक्टर ने तो यह भी कहा बताया कि यदि हड्डी का संक्रमण (Bone Infection) लम्बे समय तक जारी रहा तो पैर काटना पड़ सकता है। इसके बाद पीड़िता के सभी स्वजनों में घबराहट और चिन्ता होना स्वाभाविक था। इसके बाद उन्होंने अपनी हैसियत ​के अनुसार बम्बई के अच्छे से अच्छे डॉक्टर को दिखाया, लेकिन संक्रमण ठीक नहीं हुआ।

तब एक दिन मेरे सहकर्मी ने मुझ उक्त बात बताई और पूछा कि क्या होम्योपैथी की सफेद गोलियां इसमें कुछ मदद कर सकती हैं? मैंने कहा पक्का कुछ नहीं कह सकता, लेकिन मैटेरिया मैडीका का अध्ययन करके कोशिश अवश्य कर सकता हूं। एक सप्ताह तक अध्ययन करने के बाद मैंने उन्हें कुछ दवाई दी। 15 दिन दवाई सेवन करने के बाद भी कोई फर्क नहीं पड़ा। लेकिन इस बीच मैं लगातार मैटेरिया मैडीका का अध्ययन करता रहा।

अब मैंने पीड़िता से व्यक्तिगत रूप से मिलना का तय किया। उसके निवास पर जाकर, तब तक के अपने अनुभव और समझ के अनुसार जरूरी लक्षण पूछे। आधा घंटा तक पूछताछ करने के बाद भी कोई ऐसा लक्षण हाथ नहीं लगा, जिसके आधार पर उस लड़की के पैर को बचाने हेतु किसी दवाई का सिलेक्शन किया जा सकता। तब ही आते-आते मैंने एक व्यक्तिगत सवाल पूछा, 'सिर के बालों को कंघी क्यों नहीं करती और सिर क्यों बांध रखा है?' क्योंकि उसके बाल बड़े ही बेतरतीब से बिखरे हुए थे। लड़की ने जवाब दिया, 'मुझे कंघी करने में परेशानी होती है। सिर दर्द के कारण कपड़ा बांध रखा है।' इसके बाद पूछताछ में पता चला कि उसको सिर में अत्यन्त पसीना आता था। उसे दिनभर नींद सी आती रहती थी। उसे कभी भी जरा सी चोट लगते ही पक जाती थी और ठीक होने का नाम ही नहीं लेती थी, जबकि डायबिटीज नहीं थी।

उक्त सभी लक्षणों को नोट करके ले आया। 5-7 दिन तक फिर से मैटेरिया मैडीका का अध्ययन किया। अंत में फिर से मैंने 200 शक्ति में दवाई दी। 7 दिन बाद उसके पैर से निकलने वाली मवाद कम होने लगी। मुझे अपार खुशी हुई। एक महिने में उसका संक्रमण 50 फीसदी ठीक हो गया। इसके बाद मेरा ट्रासफर मुम्बई से मध्य प्रदेश के रतलाम शहर में हो गया। आने से पहले उनको एक माह की दवाई देकर आया।

उस जमाने में मोबाईल नहीं हुआ करते थे। अत: कोई एक माह के प्रयासों के बाद वे मुझ से सम्पर्क कर पाये। बताया कि 60-70 फीसदी फायदा होने के बाद फायदा होना रुक गया। दवाई भी खतम हो गयी थी। वे मेरे से मिलने रतलाम आ गये। मैंने उन्हें रतलाम से ही दो महिने की और उच्च शक्ति की दवाई दी। दो महिने बाद वे फिर से मिलने आये। लड़की बिलकुल ठीक हो चुकी थी। उनकी खुशी का ठिकाना नहीं था। इसके बाद तो कई दर्जन दुर्घटनाग्रस्त लोगों के हाथ-पैर कटने से बचाये जा चुके हैं।
मैं अनेक आर्थोपैडिक सर्जन्स से मिला और हड्डी के संक्रमण में एलोपैथिक एण्टीबॉयोटिक्स की असफलता की चर्चा की, तो मुझे बताया कि यदि हड्डी में अंदर संक्रमण हो जाये तो सामान्यत: एलोपैथिक एण्टीबॉयोटिक्स दवाईयों से ठीक नहीं होता है। ऐसे में अनेक बार संक्रमित हिस्से को काटना पड़ सकता है।
इन दिनों भी एक ऐसे ही पेशेंट का उपचार चल रहा है, जिनके पैर में 12 संक्रमण थे। अभी एक शेष रहा है। वाकई होम्योपैथी में अनेक असम्भव और लाइलाज समझी जाने वाली पीड़ाओं से मुक्ति दिलाने की शक्ति है। यदि आपकी नजर में भी ऐसा कोई परेशान व्यक्ति हो तो कृपया तुरंत किसी अनुभवी होम्योपैथ से सम्पर्क करें।

डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश', HCF&MDC
(Health Care Friend and Marital Dispute Consultant)
स्वाथ्य रक्षक सखा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार
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Jaipur, Rajasthan, 17 दिसम्बर, 2017, 07.49AM
मित्रो स्वास्थ्य टिप्स/Health Tips की श्रृंखला में आपका स्वागत है।

प्रथम टिप/First Tip: जिन लोगों में निम्न मानसिक लक्षण देखे/पाये जाते हैं। अकसर उनको पारिवारिक प्रताड़ना, अनदेखी या मानसिक उपचार करवाते हुए देखा जा सकता है। जबकि इन लक्षणों/पस्थितियों से गुजर रहे व्यक्तियों की अनदेखी करने या उन्हें प्रताड़ित करने से उनकी समस्याओं का समाधान सम्भव नहीं हो पाता है। अत: कृपया ध्यान दें यदि आप में से कोई या आपके आसपास कोई रोगी/रोगिणी किसी मानसिक-आघात से पीड़ित हो।



  • 1. जिसके हृदय में किसी प्रकार का गम या शोक या दु:ख बैठ चुका हो?
  • 2. हो सकता है, कोई लड़की या लड़का अपने प्रेमी/प्रेमिका के वियोग/जुदाई में परेशान हो। उसे उसके प्रेमी/प्रेमिका ने दगा दिया हो? उनको प्रेम का आघात पहुंचा हो?
  • 3. परिवार के किसी सदस्य की अचानक मृत्यु हो गई हो और उसके परिवार का कोई व्यक्ति उसके मर जाने के सदमे को न सह सका/सकी हो। दु:ख में अन्दर-ही-अन्दर शोक-मग्न या घुटता रहता या घुटती रहती हो?
  • 4. कई बार पत्नी को अपने रोगी पति की सेवा में दिन-रात एक कर देना पड़ रहा हो। उसकी चिन्ता में वह घुली जा रही हो।
  • 5. कोई बिजनिशमैन अपने धंधे या व्यापार की परेशानियों से या कोई कर्मचारी अपने दफ्तर की परेशानियों या अपने बॉस के व्यवहार के कारण तनाव, क्लेश से घिरा रहता हो।
  • 6. कोई छोटा बच्चा बोर्डिंग स्कूल में डाल दिये जाने के कारण घर जाने के लिये सदैव व्याकुल तथा परेशान रहता हो?
इन प्रकार के अनेकों परिस्थितियों/कारणों से अनेक प्रकार के मानसिक एवं शारीरिक रोग-लक्षण उत्पन्न हो जाते हैं। जैसे—
  • 1. रोगी/रोगिणी को रात को या सवेरे के समय पसीना आने लगे या घबराहट होने लगे।
  • 2. रात को नींद ही न आये या किसी भी काम में चित्त ही न लगे, मन सदैव दु:खी, गमगीन, चिंतित और व्याकुल रहने लगे।
  • 3. इन हालातें में व्यथित रोगी/रोगिणी निराश और हतोत्साह हो जाये।
  • 4. रोगी/रोगिणी का पेट खराब रहने लगे।
  • 5. मुंह में छाले हो जायें।
  • इत्यादि।
ऐसे हालातों से परेशान रोगी/रोगिणी के लिये होम्योपैथी की दुष्प्रभाव रहित दवाईयों से चमत्कार हो सकता है। यदि आपका कोई स्वजन इस तरह की समस्या से पीड़ित है तो आप अपने नजदीक के किसी अनुभवी होम्योपैथ से तुरंत सम्पर्क करेंं। ऐसे हालातों से परेशान व्यक्ति की सेवा हेतु, मैं भी आॅन लाइन मोबाइल नम्बर: 9875066111 तथा हेल्थ वोट्सएप नम्बर: 8561955619 पर 10 से 10 बजे के बीच हाजिर हूं। कृपया सेवा का अवसर प्रदान करें।
डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश', HCF&MDC
(Health Care Friend and Marital Dispute Consultant)
स्वाथ्य रक्षक सखा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार
'स्वास्थ्य रक्षक सखा' वाट्सएप भी संचालित है।
Health WhatsApp हेल्थ वाट्सएप: 8561955619
Mobile No. मोबाईन नम्बर: 9875066111 (10AM to 10PM)
Jaipur, Rajasthan, 08 दिसम्बर, 2017, 21.39
शीघ्रपतन नाशक सात घरेलु ​नुस्खे!

लेखक: डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
'शीघ्रपतन' शीर्षक से 30 नवम्बर, 2017 को लिखे लेख में निम्न विषयों की जानकारी दी जा चुकी है:-
  • 1. शीघ्रपतन से कितने पुरुष परेशान रहते हैं?
  • 2. शीघ्रपतन किसे कहते हैं?
  • 3. वीर्य स्खलन की समय सीमा क्या होनी चाहिये?
  • 4. स्त्री की योन तृप्ति क्या है?
  • 5. सम्भोग को समान भोग बताना कितना सही?
  • 6. शीघ्रपतन का गर्भधारण से सम्बन्ध?
  • 7. शीघ्रपतन दाम्पत्य बिखराव का कारण!
  • 8. शीघ्रपतन के कारण।
शीघ्रपतन नाशक घरेलु ​नुस्खों के बारे में बताने से पूर्व पाठकों के लिये उक्त लेख को पढना उचित रहेगा। अत: जिन पाठकों ने उक्त लेख नहीं पढा, वे हमारी वेबसाइट 'स्वास्थ्य रक्षक सखा' (www.healthcarefriend.in) पर जाकर या यहां क्लिक करके या निम्न लिंक पर जाकर इसे पढ सकते हैं। (http://www.healthcarefriend.in/2017/11/blog-post_30.html)




शीघ्रपतन नाशक घरेलु ​नुस्खे पढने से पहले यह जानना उचित होगा कि पूर्वोक्त 'शीघ्रपतन' शीर्षक से लिखित लेख में बताये गये शीघ्रपतन के 20 कारणों के अलावा पेट की गड़बड़ी भी 'शीघ्रपतन' एक बड़ा शारीरिक कारण होता है। अत: किसी योग्य चिकित्सक से 'शीघ्रपतन' का उपचार/परामर्श लेते समय अपने पेट की तकलीफों को कभी नहीं छुपायें। निम्न नुस्खों का इस्तेमाल करने से पहले अपने पेट की तकलीफों का उपचार अवश्य करवा लें। अन्यथा बताये गये परिणाम नहीं मिलेंगे।

शीघ्रपतन नाशक घरेलु ​नुस्खों की जानकारी प्रदान करने से पहले यह स्पष्ट करना भी जरूरी है कि इन नुस्खों में बतायी गयी औषधियों की सामग्री का उपयोग करने से पहले किसी अनुभवी चिकित्सक का परामर्श लेना जरूरी होगा। क्योंकि दवाई की मात्रा का सही-सही निर्धारण हर एक पुरुष की आयु, यौन क्षमता/समस्या, शारीरिक एवं मानसिक लक्षणों आदि के अनुसार भिन्न-भिन्न हो सकता है। इसके अलावा बताये गये नुस्खों में जिन आयुर्वेदिक औषधियों का उल्लेख किया गया है, यदि वे सभी शुद्ध, आॅर्गेनिक, ताजा, छाया शुष्क होंगी और जरूरत के अनुसार मात्रा में निधारित समय तक सेवन की जायेंगी तो ही वांछित परिणाम मिलेंगे।

शीघ्रपतन नाशक सात घरेलु ​नुस्खे!

1. गिलोय+बड़ा गोखरू+आंवला पाउडर: गिलोय, बड़ा गोखरू और आंवला बराबर मात्रा में लेकर कूट, पीस और कपड़छन करके पाउडर बना लें। इसका एक चम्मच चूर्ण प्रतिदिन मिश्री और घी के साथ सेवन करने से संभोग शक्ति तथा स्तम्भन शक्ति मजबूत होती है। इन तीनों औषधियों के अलावा कुछ अन्य औषधियों के मिश्रण सहित यौन शक्तिवर्धक एवं शीघ्रपतन नाशक यह पाउडर जरूरत के अनुसार हमारी ओर से रोगियों को दिया जाता है।
2. अलसी और वंशलोचन (अधिकतर पंसारी नकली वंशलोचन बेचते हैं, क्योंकि शुद्ध वंशलोचन बहुत मंहगा आता है) समान मात्रा में लेकर कूट, पीस और कपड़छन करके पाउडर बना लें। इसे गिलोय के रस तथा शहद के साथ हफ्ते-दस दिन से एक माह तक सेवन करें। इससे वीर्य गाढ़ा होकर यौन शक्ति एवं स्तम्भन शक्ति बढती है।
3. शोधित कौंच (निर्धारित रीति से कौंच को दूध में शोधित करके ही उपयोग किया जाना चाहिये) के बीज, शतावरी, बड़ा गोखरू, तालमखाना, अतिबला और नागबला को एक साथ मिलाकर कूट, पीस और कपड़छन करके पाउडर बना लें। इसमें बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर 2-2 चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम दूध के साथ रोजाना सेवन करने से स्तम्भन शक्ति बढती है और शीघ्रपतन के रोग में लाभ होता है। रात को संभोग क्रिया करने से 1 घंटा पहले इस चूर्ण को गुनगुने दूध के साथ सेवन करने से संभोग क्रिया सफलतापूर्वक संपन्न होती है। वीर्य का पतलापन, यौन-दुर्बलता और युवकों में विवाह के बाद शीघ्रपतन होना जैसे रोगों में इसका सेवन बहुत ही लाभकारी रहता है। ज्यादातर लोग कौंच का इस्तेमाल लंबे समय तक सेक्स की पॉवर बरकरार रखने के लिए किया जाता है। स्थायी यौन क्षमता बढाने के लिये कौंच के शोधित कौंच बीज पाउडर (कोई साईड इफैक्ट नहीं) विदेशी वियाग्रा (अनेक साईड इफैट) से भी 10 गुना ज्यादा शक्तिशाली होता है, चाहे लिंग की कमजोरी/शिथिलता/ढीलापन, वीर्य पतला, नपुंसकता या शीघ्रपतन कुछ भी समस्या हो सभी का स्थायी इलाज है-शुद्ध आॅर्गेनिक कौंच बीज का शोधित पाउडर। जयपुर स्थित हमारे निरोगधाम पर आॅर्गेनिक रीति से सफेद और काले कौंच की छोटे स्तर पर खेती की जा रही है। जिनका उपयोग रोगियों को दी जाने वाली दवाईयों में किया जा रहा है। व्यापार के लिये कौंच उपलब्ध नहीं है।
4. निर्धारित रीति से शुद्ध आॅर्गेनिक कौंच के बीज के शोधित पाउडर के साथ शुद्ध सफेदमूसली और नागौरी अश्वगंधा के बीजों को बराबर मात्रा में मिश्री के साथ मिलाकर कूट, पीस और कपड़छन करके पाउडर बना लें। इस पाउडर की 1 चम्मच मात्रा सुबह-शाम दूध के साथ सेवन करने से पुरुषों की सभी प्रकार की यौन-समस्याओं को दूर किया जा सकता है। हर प्रकार की शारीरिक कमजोरी दूर करने की ताकत इन कौंच के बीजों में होती है। आकार के अनुसार कौंच के बीज दो प्रकार के होते हैं-छोटे और बड़े। छोटे कौंच स्त्रियों की बीमारियों में अधिक उपयोगी होते हैं। जो योनि दोष, ब्रण, कुष्ठ दूर करते है और रक्तविकार नाशक हैं।
5. देशी बबूल की छाया शुष्क कच्ची पत्तियां, छाया शुष्क कच्ची फलियां और शुद्ध गोंद को बराबर मात्रा में मिलाकर कूट, पीस और कपड़छन करके पाउडर बना लें। इनमें इतनी ही मात्रा में मिश्री मिलाकर हवाबंद बोतल में रख लें। इस पाउडर को नियमित रूप से 2 महीने तक 2-2 चम्मच दूध के साथ सेवन करने से वीर्य की वृद्धि होती है। शीघ्रपतन से मुक्ति मिलती है और स्तम्भन शक्ति बढ़ती है। इसके अलावा यह स्वप्नदोष में भी बहुत लाभकारी है।
6. यदि शुद्ध आॅर्गेनिक मेथी के कुछ दाने रोज सेवन किये जाएं तो पुरुषों की मानसिक यौन सक्रियता बढ़ती है। इसके सेवन से पुरुषों में होने वाली लिंग उत्थान की समस्या हल हो सकती है। मेथी टेस्टोस्टेरोन हार्मोन में बढोतरी करके अन्य यौन समस्याओं को भी ठीक करने में मदद करती है। रात को सोते समय आधा चम्मच पिसा हुआ शुद्ध मेथी दाना पाउडर तथा आधा चम्मच धनिया पाउडर मिलाकर गर्म दूध के साथ नियमित रूप से एक महीने तक सेवन करने से पुरुषों की यौन शक्ति में बढ़ोतरी होती है। ब्रिसबेन स्थित आणविक चिकित्सा केंद्र के अनुसंधानकर्ताओं का दावा है कि भारत में सबसे अधिक मात्रा में पाई जाने वाली मेथी पुरुषों की कामेच्छाओं को काफी अच्छे स्तर तक बढ़ाने में सक्षम है। अनुसंधानकर्ताओं के अनुसार मेथी के बीज में पाया जाने वाला सैपोनीन पुरुषों में पाए जाने वाले टेस्टोस्टेरॉन हॉरमोन में उत्तेजना पैदा करता है।
7. जायफल का पाउडर एक चौथाई चम्मच, सुबह-शाम शहद के साथ खायें और इसका तेल सरसों के तेल में मिलाकर शिश्न (लिंग) पर मलें। इससे नपुंसकता और शीघ्रपतन का रोग समाप्त हो जाता है।

नोट: याद रहे वर्तमान में फसल में बढोतरी के मकसद से अधिकतर किसान खाद, खरपतवार नाशक दवाई, कीटनाशक जहर इत्यादि का जमकर उपयोग करते हैं। जिसके चलते फसलों में रोगनाशक प्राकृतिक औषधीय तत्व गड़बड़ा जाते हैं या कम या नष्ट हो जाते हैं। जिसका एक मात्र समाधान है-आॅर्गेनिक खेती जो तुलनात्मक रूप से बहुत मंहगी पड़ती है और उत्पादन कम होता है। लेकिन मानवता को रोगमुक्त करना है तो आॅर्गेनिक खेती समय की मांग है। इस दिशा में हमारी ओर से बहुत छोटे स्तर पर प्रयास जारी हैं। ऐसी स्थिति में होम्योपैथिक दवाईयों का सेवन करना अधिक सुरक्षित और परिणामदायी सिद्ध होता है। इस बारे में अगले लेख में जानकारी दी जायेगी।

डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश', HCF&MDC
(Health Care Friend and Marital Dispute Consultant)
स्वाथ्य रक्षक सखा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार
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Jaipur, Rajasthan, 07 दिसम्बर, 2017, 08.14AM
पाचनतंत्र को सुधारे बिना सेक्स समस्याओं का इलाज सम्भव नहीं!

मेरी उम्र 39 साल है। मैंने 4-5 साल से सेक्स उत्तेजक दवाई खायी तो मेरी सेक्स क्षमता ही समाप्त हो गयी। गोली खाने से भी कुछ नहीं होता था। पिछले एक साल में एक भी बार सेक्स नहीं कर सका था। अत: अपनी सेक्स समस्याओं के इलाज के लिये मैंने इंटरनेट पर समाधान ढूंढना चाहा। डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' जी की वेबसाइट http://www.healthcarefriend.in/ को पढा और डॉ. साहब को काल किया (9875066111)। मेरा रजिस्ट्रेशन फ्री में हो गया। सारी बात जानने के बाद डॉ. साहब बोले जब तक आपकी पाचन क्रिया नहीं सुधरेगी, आपकी सेक्स सम्बन्धी समस्याओं का इलाज सम्भव नहीं है।



मैं बहुत जल्दी में था। सो मैंने इंटरनेट पर ही कुछ और वेबसाइट खंगाली फिर डॉ. ... (हमारा मकसद किसी को बदनाम, अपमानित या प्रचारित करना नहीं है। अत: डॉक्टर का नाम प्रकाशित नहीं किया जा रहा है) से बात की, उन्होंने 7000 रुपये का कोर्स बताया और मुझे हर तरह से फिट कर देने की गारंटी भी दी। मैंने उनसे दवा मंगवाई। 3 महिने दवाई लेने के बाद भी निराशा ही हाथ लगी। उसके बाद उन्होंने मेरा काल अटैंड करने के बजाय मेरे नम्बर को ही ब्लैक लिस्टेड कर दिया। वाट्सएप पर मुझे ब्लॉक कर दिया।

थक हारकर मैंने फिर से डॉ. निरंकुश जी से सम्पर्क किया। इस बार डॉ. निरंकुश जी बोले आपका पुराना रिकॉर्ड डिलीट कर दिया गया है। अत: नये सिरे से के बनाना होगा। जिसका परामर्श शुल्क 1000 रुपये एडवांस जमा करने पर ही केस रजिस्टर होगा। मैंने एक हजार रुपये जमा करवाये। पूरी बात जानने के बाद मेरा इलाज शुरू किया। बाद में दवाई में एक हजार रुपये भी एडजेस्ट कर दिये। दो महिने में मेरी पेट की तकलीफें 50 फीसदी ठीक हो गयी। इसके बाद मेरी सेक्स समस्याओं का इलाज भी शुरू कर दिया। कुल 7-8 महिने के इलाज के बाद अब मैं बिना किसी उत्तेजक दवाई के एक माह में 3-4 बार नेुचरल सेक्स करने में सक्षम हो गया हूं। शुरू में मैंने समझा पेट की तकलीफों का सेक्स समस्याओं से क्या सम्बन्ध है? अब मुझे भूख भी अच्छी लगती है। कब्ज, अपच, गैस और डकारों से भी मुझे मुक्ति मिल चुकी है। हम पति-पत्नी दोनों की ओर से डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' जी का बहुत-बहुत धन्यवाद।-प्रभात कुमार झा, पटना, बिहार। (पहचान गोपनीय बनाये रखने के लिये रोगी का नाम और शहर बदल दिया गया है।)

डॉ. टिप्पणी: कड़वी हकीकत यह है कि सेक्स सम्बन्धी समस्याओं से ग्रस्त पुरुष चाहे युवा हों या वयस्क सबको इलाज की बहुत जल्दी होती है। इसी कारण उनको लूटने वालों की भी कमी नहीं है। यह सच है कि अनेक केसों में मेरा इलाज भी असफल होता है, लेकिन मैं किसी को किसी प्रकार की गारंटी नहीं देता हूं। हां मैं अपनी ओर से 100 फीसदी कोशिश करता हूं। अधिकतर मामलों में हमारी कोशिशें सफल होती हैं। जिन मामलों में असफलता मिलती है, उनमें अनेक बार रोगी का असहयोग भी कारण होता है। फिर भी ऐसे मामलों को चुनौती मानकर असफलता के कारणों को तलाशा जाता है। इस प्रकरण के सम्बन्ध में मुझे यह लिखते हुए दु:ख है कि अधिकतर लोगों का इतनी सी बात भी समझ में नहीं आती है कि-''जिस रोगी का पाचनतंत्र सामान्य भोजन को नहीं पचा सकता, उसका पाचनतंत्र आयुर्वेदिक औषधियों को कैसे पचायेगा? और पचायेगा नहीं तो उपचार कैसे होगा?'' इस विषय पर पूर्व में 'पाचनतंत्र को सुधारे बिना सेक्स समस्याओं का इलाज सम्भव नहीं!' शीर्षक से प्रकाशित लेख में भी जानकारी दी जा चुकी है।

डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश', HCF&MDC
(Health Care Friend and Marital Dispute Consultant)
स्वाथ्य रक्षक सखा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार
Health WhatsApp हेल्थ वाट्सएप: 8561955619
Mobile No. मोबाईन नम्बर: 9875066111 (10AM to 10PM)
Jaipur, Rajasthan, 07 दिसम्बर, 2017, 015.29PM

--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!

--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!
सभी के स्वस्थ एवं सुदीर्घ जीवन की कामना के साथ-मेरे प्यारे और दुलारे तीन बच्चों की ममतामयी अद्वितीय माँ (मम्मी) जो दुखियों, जरूतमंदों और मूक जानवरों तक पर निश्छल प्यार लुटाने वाली एवं अति सामान्य जीवन जीने की आदी महिला थी! वह पाक कला में निपुण, उदार हृदया मितव्ययी गृहणी थी! मेरी ऐसी स्वर्गीय पत्नी "जानकी मीणा" की कभी न भुलाई जा सकने वाली असंख्य हृदयस्पर्शी यादों को चिरस्थायी बनाये रखते हुए इस ब्लॉग को आज दि. 08.08.12 को फिर से पाठकों के समक्ष समर्पित कर रहा हूँ!-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'

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संभोग-Sex During Pregnancy गर्भावस्था-Pregnancy गर्भाशय गर्भाशय भ्रंश गर्भाशय-उच्छेदन के साइड इफेक्ट्स-Side Effects of Hysterectomy गर्म पानी गर्मी गर्मी-Heat गाजर गाजवां गांठ गाँठ-Knot गारंटी गाल ब्लैडर गिलोय गिल्टी गुड़हल गुंदा गुदाभ्रंश गुर्दे गुलज़ाफ़री गुस्सा गृध्रसी गृह-स्वामिनी गैस गैस्ट्रिक गोक्षुरादि चूर्ण गोखरू गोखरू (LAND CALTROPS) गोंद कतीरा-Hog-Gum गोंदी गोभी-Cabbage गोरख मुंडी गोरखमुंडी ग्रीन-टी घमोरी घरेलु ​नुस्खे घाघरा घाव चकवड़ चक्कर चपाती चमत्कारिक सब्जियां चर्बी चर्म चर्म रोग चर्मरोग चाय चाय-Tea चालीस के पार-Forty Across चिकनगुनिया चिकित्सकीय चिंतित चिरायता-Absinth चिरोटा चुंबन चोक चौलाई छपाकी छरहरी काया छाछ छाले छींक छीकें छुआरा छुहारा छोटा गोखरू छोटा धतूरा छोटी हरड़ जंक फूड जकवड़ जंगली-कटीली चौलाई जटामांसी-Spikenard जलजमनी जलन जलोदर रोग-Ascites Disease जवारा जवारे जवासा-Alhag जहर जामुन का जूस जायफल जिगर जीरा जीवन रक्षक जीवनी शक्ति जुएं जुकाम जुदाई जुलाब जूएं जूस जूस-Juice जोड़ों के दर्द जोड़ों में दर्द जौ ज्यूस ज्योति ज्वर ज्वर-Fiver झाइयाँ झांईं झुर्रियाँ झुर्रियां झुर्री झूठे दर्द टमाटर का रस टमाटर-Tomatoes टाइफाइड टायफायड टूटी हड्डी टॉन्सिल टोटला ट्यूमर ठंडापन ठेकेदार डॉक्टर डकार डकारें डायबिटीज डायरिया डिजिसेक्सुअल डिटॉक्सीफाई डिटॉक्सीफिकेशन डिनर डिब्बाबंद भोजन डिलेवरी डीकामाली डीगामाली डेंगू डेंगू-Dengue डॉ. निरंकुश डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' डॉ. मीणा ढीलापन ढीली योनि तकलीफ का सही इलाज तम्बाकू तरबूज-Watermelon तलाक ताकत तिल तिल्ली तुंबा तुंबी तुलसी तेल त्रिदोषनाशक त्रिफला त्वचा त्वचा रोग थकान थाईरायड थायरायड-Thyroid थायरॉइड दण्डनीय अपराध दंत वेदना दन्तकृमि दन्तरोग दमा दर वेदना दर्द दर्द निवारक दवा दर्दनाक दस्त दही दाग-धब्बे-Stains-Spots दाढ़ दांत दांतो में कैविटी-Teeth Cavity दाद दाम्पत्य दाम्पत्य विवाद सलाहकार दाम्पत्य-Conjugal दाल दालचीनी दालें दिल दीर्घायु दु:खी दुर्गंध दुर्बलता दुष्प्रभाव दुष्प्रभावरहित दूध दूध वृद्धि दूधी दूधी-Milk Hedge दृष्टिदोष दो मन द्रोणपुष्पी-Leucas Cephalotes धड़कन धनिया बीज धनिया-Coriander धमासा धातु धातु पतन धार्मिक धूम्रपान छोड़ना चाहते हैं? धैर्यहीन नज़ला नपुंसकता नाक नाखून नागबला नागरमोथा नाडी 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यौनसुख यौनानंद यौनि रक्त प्रदर (Blood Pradar) रक्त रोहिड़ा-TECOMELLA UNDULATA रक्तचाप रक्तपित्त रक्तशोधक रक्ताल्पता रक्ताल्पता (एनीमिया)-Anemia रस-juices रातरानी Night Blooming Jasmine/Cestrum nocturnum रामबाण रामबाण औषधियाँ-Panacea Medicines रुक्षांश रूढिवादी रूसी रूसी मोटापा रेचक रेठु रोग प्रतिरोधक रोबोट सेक्स रोमांस लकवा लक्षण लक्ष्मी लंच लसोड़ा लस्सी लहसुन लहसुन-Garlic लाइलाज लाइलाज का इलाज लाक्षणिक इलाज लाक्षणिक जानकारी लाभ लिंग लिंग प्रवेश लिसोड़ा लीकोरिया लीवर लीवर-Liver लू-hot wind लैंगिक लोनिया लौकी लौंग की चाय ल्युकोरिया ल्यूकोरिया ल्यूज योनी वजन वज़न वजन कम वजन बढाएं-Weight Increase वन/जंगली तुलसी वनौषधियाँ वमन वमन विकृति-Vomiting Distortion वसा वात वात श्लैष्मिक ज्वर वात-Rheumatism वायरल वायरल फीवर वायरल बुखार-Viral Fever वासना विचारतंत्र विटामिन विधारा वियाग्रा-Viagra वियोग विरह वेदना विलायती नीम विष विष हरनी विषखपरा वीर्य वीर्य वृद्धि वीर्यपात वृक्कों (गुर्दों) में पथरी-Renal (Kidney) Stone वृक्ष वैज्ञानिक वैधानिक वैवाहिक जीवन वैवाहिक जीवन-Marital वैवाहिक रिश्ते वैश्यावृति व्याकुल व्यायाम शंखपुष्पी शरपुंखा शराब शरीफा-सीताफल-Custard apple शर्करा शलगम-Beets शल्यक्रिया शहद शहद-Honey शारीरिक शारीरिक रिश्ते शिथिलता शीघ्र पतन शीघ्रपतन शुक्राणु-Sperm शुक्राणू शुगर शोक शोथ शोध श्योनाक श्रेष्ठतर श्वास श्वांस श्वेत प्रदर श्वेत प्रदर-Leucorrhea श्वेतप्रदर षड़यंत्र संकुचन संकोच संक्रमण संक्रमित संखाहुली संतरा-Orange संतान संतुष्टि सत्यानाशी सदा सुहागन सदाफूली सदाबहार सदाबहार चूर्ण सनबर्न सफ़ेद दाग सफेद पानी सब्जि सब्जियां-Vegetables सब्जी संभालू संभोग समर्पण-Dedication सरकार को सुझाव सरफोंका सरहटी सर्दी सर्दी जुकाम-Cold सर्दी-जुकाम सर्पक्षी सर्पविष सलाद संवेदना सहदेई सहदेवी सहानभूति साइटिका साइटिका-Sciatica साइड इफेक्ट्स साबूदाना-Sago सायटिका सिगरेट सिजेरियन सिर दर्द सिर वेदना सिरका सिरदर्द सिरोसिस सीजर डिलेवरी सुगर सुदर्शन सुहागा सूखा रोग सूजन सेक्स सेक्स उत्तेजक दवा सेक्स परामर्श-Sex Counseling सेक्स पार्टनर सेक्स पावर सेक्स समस्या सेक्स हार्मोन सेक्‍स-Sex सेंधा नमक सेब सेमल-Bombax Ceiba सेल्स सोजन-सूजन सोंठ सोना पाठा सोयाबीन सोयाबीन (Soyabean) 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