मित्रो, नमस्कार।
स्वास्थ्य की अनदेखी नहीं करें और तुरंत स्थानीय डॉक्टर (Local Doctor) से सम्पर्क करें। हां यदि आप इलाज करवाकर थक चुके हैं, लेकिन स्वस्थ नहीं हुए हैं तो आप वाट्सएप 8561955619 पर अपनी डिटेल भेजकर आॅन लाइन उपचार या परामर्श हेतु मुझ से सम्पर्क कर सकते हैं।
On Line-Health Care Friend and Marital Dispute Consultant-Dr. PL Meena
Health WhatsApp No. 8561955619, Mobile No.: 9875066111 (10AM to 10 PM)
एल्यूमीनियम (Aluminum) के बर्तनों में खाना-पकाना घातक!
डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
एल्यूमीनियम के बर्तनों में खाना पकाने और खाने से स्वास्थ्य को गंभीर हानि हो सकती हैं! अत: कुकर सहित जितने भी एल्यूमीनियम के बर्तन हैं, आज ही से उनका उपयोग करना बंद कर दें। यदि आपके घर में एल्यूमीनियम के बर्तनों में खाना पकाया जाता है, तो आपके परिवार के लोगों को अनेकों प्रकार की मानसिक और शारीरिक बीमारियां हो सकती हैं। जैसे-



1—जागते ही उदासी: रोगी प्रात:काल सोकर उठने के बाद उदास होता है, रोता है। वैसे वह रोता-धोता ही रहता है। अपनी परिस्थिति से दूर भाग जाना चाहता है, भयभीत रहता है, समझता है कि जिन परिस्थितियों से घिरा है उनसे हटने पर उसका दु:ख दूर होगा। साधारणतया भयभीतपना उसमें भरा रहता है। जब अपनी मानसिक-दशा को सोचने लगता है, तब डरता है कि कहीं पागल न हो जाय। जब वह सोचता है कि वह अपना नाम तक भूल जाता है, मन गड़बड़ाया रहता है, तब वह सोचने लगता है कि अब वह सचमुच पागल हो गया है। प्रात:काल सोकर उठने के बाद उसमें ऐसे विचार आते-जाते रहते हैं, परन्तु चित-वृति बदलती रहती है। कभी निराशा की मनोवृति से निकल कर वह आशाभरी, शांत मनोवृति में आ जाता है, इसके बाद फिर उसी निराशा के गर्त में जा गिरता है।

2—मूत्राशय की शिथिलता: स्त्री या पुरुष को देर तक पेशाब के लिये बैठे रहना पड़ता है, पेशाब उतरता ही नहीं, देर में उतरता है, धीरे-धीरे निकलता है, रोगी कहता है कि पेशाब जल्दी नहीं उतरता। कभी-कभी धार की जगह बूंद-बूद टपकता है।

3—मलाशय की शिथिलता: मलाशय इतना शिथिल हो जाता है कि भरा रहने पर भी मल नहीं निकलता, मल कठोर न होकर तरल भी क्यों न हो, वह निकलता ही नहीं। जब गुदा-द्वार में इस प्रकार की जड़ता, शिथिलता हो कि दस्त भी न निकले, ऐसी कब्ज हो, तब यह जांच लेना चाहिये कि आपकी रसाई में एल्यूमीनियम के बर्तनों का उपयोग तो नहीं हो रहा?

4—ल्यूकोरिया: स्त्रियों में पानी की तरह टांगों तक बह जाने वाला प्रदर हो जाता है। रोगिणी के जननांग इतने शिथिल हो जाते हैं कि प्रदर का पानी बहता हुआ टांगों के नीचे तक पहुंच जाता है। यह पानी तीखा, पीला या अंडे की सफेदी जैसा और त्वचा को काटने/छीलने वाला हो सेता ह। अनेक बाद प्रदर के तार या धागे जैसे बन जाते हैं। प्रदर के साथ रोगिणी के जननांगों में निम्न-लक्षण प्रकट होते हैं:-
  • (1) जरायु को मुख पर जख्म।
  • (2) सब जननांगों में शिथिलता।
  • (3) जननांगों की शिथिलता के कारण नीचे को बोझ की अनुभूति।
  • (4) सब मांसपेशियों में कमजोरी, ढिलाई और शिथिलता।
  • (5) यौन-सम्बन्धों के समय जलन और दर्द की अनुभूति। इत्यादि।

5—रोगी का चरित्र-चित्रण: उपरोक्त के अलावा एल्यूमीनियम के बर्तनों में खाना पकाने और खाने वाले व्यक्ति का चित्रण इस प्रकार से किया जा सकता है। रोगी के रुधिर की गति इतनी शिथिल होती है कि सर्दी में उसके हाथ-पांव ठंडे हो जाते हैं। वे खुश्की के कारण फट जाते हैं। पैरों में बड़ी-बड़ी बिवाइयां पड़ जाती हैं, जिनसे खून निकला करता है। ठंड से उसकी सभी तकलीफें बढ़ जाती हैं। नम मौसम में रोगी अच्छा अनुभव करता है। रोगी की त्वचा का अत्यन्त खुश्क हो जाती है। रोगी अपने को कपड़ों से ढक कर रखना चाहता है। शरीर को गर्म कपड़ों से ढके रहता है, परन्तु फिर भी खुली हवा चाहता है। मौसम की जरा भी तब्दीली से उसे ठंड लग जाती है, जुकाम हो जाता है। कभी-कभी बिस्तर में लेटते हुए इतनी ठंड अनुभव करता है कि दांत किटकिटाते हैं, परन्तु कुछ देर बाद बिस्तर में उसे इतनी खुजली उठती है और गर्मी लगती है कि तन पर कपड़ा रखना ही नहीं चाहता। ये दोनों विरोधी बातें रोगी की प्रकृति में पायी जाती हैं।

यदि उपरोक्त लक्षणों में से आपके शरीर में कोई एक या एकाधिक लक्षण मौजूद (Existing) हैं और यदि आप उपरोक्त में से किन्हीं तकलीफों से पीड़ित हैं तो आपके दीर्घ-स्वस्थ जीवन के हित में यह उचित होगा कि आप तुरंत अपने नजदीक के किसी भी अनुभवी डॉक्टर से सम्पर्क करें। *यदि आप सब जगह इलाज करवाकर थक चुके हैं तो सुबह 10 बजे से रात्रि 10 बजे के बीच मोबाईल नम्बर 98750 66111 पर और, या Health Advice WhatsApp No.: 85619 55619 पर आप सीधे मुझ से भी सम्पर्क कर सकते हैं।*

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14 फरवरी: जानें विवाहेत्तर सम्बंधों की यह सबसे बड़ी वजह?
लेखक: डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'


वैसे तो हर पल जीवन का अन्तिम पल होता है। अत: कोई भी दिन या पल ऐसा नहीं हो सकता, जब प्यार का इजहार संभव नहीं, लेकिन जब जमाना बदल रहा है और युवा पीढी वैश्विक संस्कृति में समाविष्ट हो रही है तो 14 फरवरी भी प्यार का प्रतीक बनता जा रहा है। लोकतंत्र में लोक अवधारणाएं और लोकतम ही सर्वोच्च होता है। अत: मानो या नहीं, लेकिन 14 फरवरी को भारत की युवा पीढी में मान्यता मिल चुकी है। जिसे आज नहीं तो कल सार्वजनिक स्वीकृति मिलना तय है। इस अवसर पर दाम्पत्य विवाद सलाहकार के रूप में कुछ अनुभवजन्य तथा मनोवैज्ञानिक शोधों पर आधारित स्त्री-पुरुष सम्बंधों से जुड़े हुए निष्कर्ष सार्वजनिक रूप से साझा कर रहा हूं:-
  • 1. आपसी रिश्तों में पुरुष स्त्री पर काबू पाना चाहता है, जबकि स्त्री की प्राथमिकता काबू करने की नहीं, बल्कि कुछ सहयोग, प्यार और योगदान करने की होती है।
  • 2. पुरुष के लिये तर्क सर्वोच्च होता है, जबकि स्त्री के लिये भावनाएं और संवेदनाएं जिसका कारण पुरुष के दिमांग का एक ही हिस्सा काम करता है, जबकि स्त्री के दोनों।
  • 3. रिश्तों में चोट खाने के बाद तुलनात्मक रूप से स्त्री के लिये संभलना बहुत आसान होता है, जबकि पुरुष के लिये बहुत मुश्किल। अनेक बार असंभव भी।
  • 4. अधिकतर पुरुषों को स्त्रियों की शारीरिक बनावट और सौन्दर्य में ही दिलचस्पी होती है। स्त्री की संवेदनाओं को समझने में उन्हें कोई रुचि नहीं होती। जबकि कड़वा सच यह है कि 'स्त्री की देह को पाकर रह जाने वाले पुरुष का जीवन सदैव अधूरा ही रहता है।'
  • 5. पत्नी के साथ चलते हुए दूसरी स्त्रियों को देखने वाले पति अकसर रंगे हाथ पकड़े जाते हैं, जबकि किन्हीं अपवादों को छोड़कर स्त्रियां कभी नहीं पकड़ी जाती! जबकि पुरुषों की तुलना में स्त्रियां अधिक ताकझांक करती हैं!
  • 6. स्त्री पुरुष की कमजोरियों को जानते हुए भी उसे चाहती और अपना भी लेती है, जबकि पुरुष के लिये ऐसा करना प्राय: असंभव होता है। परिणामस्वरूप ताउम्र दाम्पत्य जीवन में कभी न समाप्त होने वाली दुर्घटनाएं होती रहती हैं।
  • 7. एक विवाहिता पत्नी को दुत्कार देने वाला पुरुष दूसरी पत्नी को छोड़ देने या नकार देने में वक्त नहीं लगाता।
  • 8. विवाहेत्तर सम्बंध-एक्स्ट्रा मैरीटल रिलेशन बनाने वाले नब्बे फीसदी पुरुषों के पास इन सम्बंधों की कोई वजह नहीं होती। अत: अंत में उसे निराशा ही हाथ लगती है। पुरुष ऐसे काल्पनिक आनंद को वहां, खोजता फिरता है, जहां या कहीं भी वह होता ही नहीं है। वहीं दूसरी ओर विवाहेत्तर सम्बन्ध स्त्री को धन और मजे तो दे सकते हैं, लेकिन प्यारभरी ऊष्मा तथा सम्मान नहीं दे सकते। अत: दोनों ही निराश होते हैं।
  • 9. यह बात लगभग सर्वस्वीकार्य है कि शानो-शौकत, पद, प्रतिष्ठा, धन-सम्पदा और चकाचौंध से स्त्री को विवाह हेतु आकर्षित तो किया जा सकता है, लेकिन विवाह के बाद शानो-शौकत, पद, प्रतिष्ठा, धन-सम्पदा और चकाचौंध की तुलना में स्त्री को एक व्यक्ति के रूप में महत्व, उसकी संवेदनाओं का खयाल तथा उसके प्रति प्यारभरी ऊष्मा अधिक महत्वपूर्ण होती है। अत: हर स्त्री को शानो-शौकत, पद, प्रतिष्ठा, धन-सम्पदा और चकाचौंध तो चाहिये, लेकिन अपने सम्मान और संवेदनाओं के बदले में नहीं।
  • 10. सबसे बड़ी उलझन-पत्नी सोचती है कि वह अपने पति के बारे में सब कुछ जानती है, जबकि पुरुष सोचता है कि काश उसे समझने वाली पत्नी मिल पाती? दूसरी ओर पति सोचता है कि अन्य पुरुषों की तुलना में वह अपनी पत्नी को बहुत ज्यादा प्यार तथा सम्मान प्रदान करता है, जबकि पत्नी सोचती है, काश दूसरे पतियों की भांति उसका पति भी उसे प्यार और सम्मान प्रदान कर पाता? विवाहेत्तर सम्बंधों की यह सबसे बड़ी वजह है!
-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' On Line-Health Care Friend and Marital Dispute Consultant, ऑन लाईन-स्वाथ्य रक्षक सखा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार, संचालक-निरोगधाम (लाइलाज का इलाज), Health Advice WhatsApp No.: 85619-55619, Mobile No.: 98750-66111 (10AM to 10 PM), 14.02.2018.
बिखरता जीवन संभाला जा सकता है-एक दूसरे के प्रति-सम्मान का भाव, निष्ठा, विश्वास, पारदर्शिता और निष्कपट स्नेह, दाम्पत्य के प्रेमरस की कुंजी एवं पुख्ता आधारशिला हैं।

लेखक : डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' 

विभिन्न देशों में, विभिन्न समयों पर, विभिन्न शोधकों के शोधों से यह बात अनेकों बार प्रमाणित हुई है कि-



1. हजारों सालों के वंशानुगत आचरण, अवचेतन में स्थापित जीवन जीने के मानदंडों और प्रचलित सामाजिक व्यवस्था का एक पारिणामिक सच-

"स्त्री, अपने पति या प्रेमी की बुरी आदतों और उसके चरित्र की कमजोरियों को जान लेने के बाद भी, उनकी अनदेखी कर के उसे जीवनभर चाह सकती है। उसके साथ दाम्पत्य और आत्मीय प्रेम सम्बंधों का निर्वाह कर सकने में सफल हो सकती है।"
जबकि इसके ठीक विपरीत-
2. किन्हीं अपवादों को छोड़कर, एक सामान्य पुरुष, स्त्री की व्यवहारगत कमजोरियों, बुरी आदतों और उसके हलके चरित्र को कभी सहन नहीं कर सकता। बेशक उसे इसकी कितनी भी बड़ी कीमत क्यों ना चुकानी पड़े।
परिणामस्वरूप
3. स्त्री, पुरुष को चाहते हुए भी, अपने आप के बारे में बहुत कुछ छिपाने में खुद को पारंगत समझने लगती हैं। पुरुष भी अपनी संगिनी को विश्वास पात्र, वफादार, समर्पित और सद्चरित्र मानकर उस पर गर्व करने लगता है।
लेकिन
4. जिस दिन स्त्री की हकीकत पुरुष के सामने आती है, उन दोनों के जीवन बिखर जाते हैं। स्त्री के पास सुधार के लिए शेष कुछ नहीं बचता है।
और
5. पुरुष के पास जीवन जीने का कोई कारण नहीं बचता है।
दु:खद परिणिती-
6. परिवार बिखर जाते हैं। अनेक पुरुष नशे के आदि हो जाते हैं या आत्महत्या तक कर लेते हैं। मासूम बच्चों का जीवन बर्बाद हो जाता है। जो ज़िंदा रहते हैं-पल-प्रतिपल घुट-घुट कर जीने को विवश हो जाते हैं।

अत: अब जबकि सामाजिक और पारिवारिक मूल्य विखण्डित हो रहे हैं, जिन्हें सुधारवादी बदलाव कहते हैं। बेहतर और जरूरी है, बल्कि अपरिहार्य है कि-

7. स्त्री और पुरुष या प्रेमी-युगल इस बात को समझें कि समय और हालातों के अनुसार अपने सोचने और जीने के तरीकों और आदतों में यथासम्भव सजगता लाएं और अधिक सजग तथा पारदर्शी जीवन जियें। आपसी विश्वास खोकर एक साथ और एक छत के नीचे रहते हुए-
प्रेममय,
सजग
और
सफल
जीवन की कामना असम्भव है।
अंतिम बात-
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स्त्री और पुरुष दोनों का सोचने का ढंग मूल रूप से मनोसामाजिक एवं आनुवांशिक समाजीकरण का परिणाम है। जिसके लिये सम्पूर्ण रूप से उनको दोषी नहीं ठहराया जा सकता। लेकिन आज जबकि हम हर एक क्षेत्र में बदल रहे हैं। बदलने को तत्पर हैं। ऐसे में यह अपेक्षा की जाती है कि—

''एक दूसरे के प्रति-सम्मान का भाव, निष्ठा, विश्वास, पारदर्शिता और निष्कपट स्नेह, दाम्पत्य के प्रेमरस की कुंजी एवं पुख्ता आधारशिला हैं। अत: यह निर्णय नितांत जरूरी है कि 'आज तक हम से जो हो चुका, सो चुका या जो खो चुका, सो खो चुका। अब उसका रोना छोड़कर या उसे दुस्वप्न की भांति भुलाकर शेष बचे जीवन को तो संभाला ही जा सकता है। क्योंकि वर्तमान ही सत्य है।"
विचार प्रवाह के तहत यह विचार दिनांक: 19.12.2015 को लिखा गया था। जो आज भी प्रासंगिक है। अत: प्रसारित है।
नोट : आपको यह सन्देश व्यक्तिगत रूप से नहीं, बल्कि वाट्सएप के ब्रॉड कॉस्टिंग सिस्टम के जरिये भेजा गया है। अत: यदि आपको किसी भी प्रकार की आपत्ति हो तो, कृपया अवगत करावें। आगे से आपको ऐसा कोई सन्देश नहीं भेजा जायेगा।
शुभाकांक्षी और स्नेही
*डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'* On Line-Health Care Friend and Marital Dispute Consultant, ऑन लाईन-स्वाथ्य रक्षक सखा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार, संचालक-निरोगधाम (लाइलाज का इलाज), *Health Advice WhatsApp No.: 85619-55619 इस पर काल नहीं करें। Mobile No.: 9875066111 (केवल 10AM to 10 PM के बीच ही काल करें)*—07.02.2018.
एलर्जी-Allergy सहित सभी शारीरिक एवं मानसिक कष्टों का आॅनलाइन निदान







एलर्जी से 8-9 वर्षों से पीड़ित एक व्यक्ति के चार चित्र यहां प्रस्तुत हैं। जो हमारे पास आने से पहले एक दिन छोड़कर इंजेक्शन लगवाता था। इसके बाद भी उनकी दशा अत्यधिक खराब थी। जिसे 23.10.2017 के चित्र को देखकर समझा जा सकता है। दिनभर खुजाता रहता था। उसके जख्मों पर मक्खियां भिनभिनाती रहती थी। अत: हमेशा मक्खियों को उड़ाता रहता था। रोगी ने बताया कि कभी-कभी उसके सारे शरीर में भयंकर सोजन आ जाती थी। जख्मों से रक्त निकलता रहता था। अनेक बार उसके लिये चलना-फिरना भी मुश्किल हो जाता था। इस कारण उसका जीवन अत्यधिक कष्टमय था। लोग उसे देखकर नफरत करते थे। लोग उसके पास बैठना पसंद नहीं करते थे। इस कारण वह किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाता था। इस दौरान उसने अनेकों डॉक्टरों से इलाज करवाने में अपनी कड़ी मेहनत का बहुत सा रुपया खर्च किया। लेकिन सभी डॉक्टर्स ने अंत में यही कहा कि एलर्जी का स्थायी इलाज नहीं हो सकता।
उपरोक्त हालातों में पीड़ित व्यक्ति ने दिनांक: 23.10.17 को ​निदान हेतु मुझ संपर्क किया। उसने बताया कि वह करीब 45-50 साल से बीड़ी पीने का आदी है। चूंकि धूम्रपान करने वालों को होम्योपैथिक दवाई असर नहीं करती हैं। अत: सबसे पहले बीड़ी छोड़ने हेतु उनका होम्योपैथिक उपचार किया गया। पीड़ित व्यक्ति के सहयोग से मात्र 5 दिन में उनकी बीड़ी पीने की आदत छुड़वा दी गयी। दिनांक: 28.10.17 से पीड़ित व्यक्ति की एलर्जी का निदान शुरु किया गया। आयुर्वेदिक एवं होम्योपैथिक उपचार से दिनांक: 15.11.17 तक एलर्जी नियंत्रित हो गयी। दिनांक: 24.12.17 तक अर्थात 2 माह में शरीर और चेहरे के सभी जख्म मिट गये। दिनांक: 30.01.18 तक, अर्थात 3 महिने में रोगी ऊपरी तौर पर एलर्जी से पूर्णत: स्वस्थ हो गया एवं खुजली बंद हो गयी। अगले 3 महिने तक रोगी का आंतरिक उपचार किया जायेगा। जिसमें उनकी रक्तशुद्धि भी की जायेगी। यह सब हमारे निरोगधाम पर पैदा की जा रही शुद्ध-ताजा आॅर्गेनिक जड़ी-बूटियों तथा अमृततुल्य एवं दुष्प्रभाव रहित जर्मन होम्योपैथिक-बॉयोकैमिक तत्वों-दवाईयों का कमाल है।
उक्त रोगी का विवरण जैसे ही सोशल मीडिया पर मेरे द्वारा प्रसारित किया तो मेरे मोबाईल नम्बर: 9875066111 पर एलर्जी, दाद, खाज, खुजली आदि त्वचा रोगों से पीड़ित लोगों के फोन आने का सिलसिला शुरू हो गया। हजारों काल आ चुके हैं। जो यह संशोधित नोट डाले जाने तक जारी है। यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि समयाभाव के चलते तथा हमारे निरोगधाम पर पैदा की जा रही शुद्ध-ताजा आॅर्गेनिक जड़ी-बूटियों की सीमित मात्रा-उपलब्धता के कारण मैं सीमित संख्या में ही कुछेक रोगियों का ही उपचार कर पाता हूं।


रजिस्ट्रेशन-फ्री: यदि आप लाइलाज (Incurable) समझी जाने वाली किसी बीमारी का इलाज करवा-करवाकर थक चुके/चुकी हैं और आपकी बीमारी ठीक नहीं हो रही हैं तो इसकी की अनदेखी नहीं करें स्वास्थ्य परामर्श या इलाज हेतु अभी और इसी समय 85-619-55-619 पर अपनी समस्या लिखकर वाट्सएप करें और फ्री रजिस्ट्रेशन करवायें। जिससे बहुत कम खर्चे में आपका घर-बैठे इलाज-समाधान हो सके। Online Dr. PL Meena: Health Care Friend and Marital Dispute Consultant, (स्वास्थ्य रक्षक सखा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार) तथा संचालक-निरोगधाम (लाइलाज का इलाज)।

अत: एलर्जी सहित किसी भी तकलीफ से पीड़ित लोगों को अवगत करवाना जरूरी समझता हूं कि यदि आपकी तकलीफ का किसी स्थानीय डॉक्टर (Local Doctor) से आरोग्य (Health Restoration) अर्थात उपचार संभव है तो कृपया पहले आप उन्हीं से सम्पर्क करें। मुझ से वही पीड़ित और परेशान व्यक्ति सम्पर्क करें, जो अपनी तकलीफ का स्थानीय डॉक्टर्स से इलाज करवा-करवाकर अपना बहुत सा धन तथा वक्त खर्च-बर्बाद करके थक चुके हैं, लेकिन अभी भी उनकी पीड़ा-तकलीफ का निदान नहीं हुआ है। क्योंकि पहले से ही मेरे यहां अनेकों रोगियों के केस लम्बित-पेंडिंग हैं। इसकी मूल वजह यह है कि मेरे द्वारा पहले रोगी से व्यक्तिगत रूप से लाक्षणिक पूछताछ की जाती है और उसके बाद प्रत्येक रोगी की तकलीफों का अध्ययन एवं विश्लेषण करके उसके स्थायी निदान करने का प्रयास किया जाता है। जिसमें बहुत सा समय लगता है। अत: हो सके तो उपचार हेतु किसी स्थानीय डॉक्टर से सम्पर्क करें। यद्यपि किसी भी पीड़ित व्यक्ति की सेवा के लिये मैं हमेशा उपलब्ध हूं।

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कब्ज का कब्जा अस्वस्थता को आमंत्रण-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
[Constipation Capture-Invitation to Sickness]


क्या है-कब्ज ? संक्षेप में समझने के लिये कब्ज (Constipation) एक ऐसी स्थिति है, जिसमें हमारा पेट स्वाभाविक रूप से ठीक से साफ (Stomach Cleaning) नहीं हो पाता है। मल त्याग करते समय दर्द या मरोड़ या कूथन या कठिनाई हो सकती है। कब्ज से पीड़ित व्यक्ति सामान्य लोगों की तुलना में कम बार और कम मात्रा में या बार-बार मलत्याग करता है। लेकिन उसे लगता है कि उसका पेट ठीक से साफ नहीं हुआ है। आमतौर पर कब्ज से पीड़ित व्यक्ति नियत समय (Fixed Time) पर, नियमित रूप से (Regularly) खुलकर मलत्याग नहीं कर पाता है।



कब्ज के प्रमुख कारण (Major Causes of Constipation):
फाइबरयुक्त-रेशेयुक्त-आहार-की-कमी (Lack of Fiber-Rich Fiber Diet)।
खाली-पेट-चाय-कॉफी का-अधिक-सेवन।
तला-भुना-तैलीय-गरिष्ठ-भोजन करना (Fried-roasted-oily-rich-eating)
अस्तव्यस्त दिनचर्या (Disturbed or Irregular Routine Life/Activities)
रक्ताल्पता (Anemia)
दस्तावर-दवाईयों-का-अधिक-सेवन (More-Intake of Laxative-Medicines)
मल-मूत्र-वेग को रोकना (Preventing Stool-Urine-Velocity)
शारीरिक निष्क्रियता (Physical Inactivity)
दबाव-Stress
निर्जलीकरण-Dehydration
वृद्धावस्था (Old Age)
उदासी-अवसाद-Depression
आधुनिक दवाइयों के दुष्प्रभाव (Side Effects of Modern Drugs)
बिना-चबाये-जल्दबाजी-में-भोजन करने की-आदत।
बहुत-कम-पानी-पीना।
वंशानुगत-कारण (Hereditary Causes)
डेयरी-उत्पादों-का-अधिक-सेवन (More-Intake of Dairy Products)
हार्मोनल-परिवर्तन (Hormonal Changes)
शराब-गुटका-धूम्रपान।
अत्यधिक या बहुत-कम-नींद।
अत्यधिक या बहुत कम भोजन।
लीवर या तिल्ली की समस्या।
मधुमेह (Diabetes)
चिंता (Anxiety)
तनाव (Tension)
कुंठा (Frustration)
निराशा-मायूसी (Despondency)
जुदाई-वियोग (Separation)
इत्यादि।


रजिस्ट्रेशन-फ्री: यदि आप लाइलाज (Incurable) समझी जाने वाली किसी बीमारी का इलाज करवा-करवाकर थक चुके/चुकी हैं और आपकी बीमारी ठीक नहीं हो रही हैं तो इसकी की अनदेखी नहीं करें स्वास्थ्य परामर्श या इलाज हेतु अभी और इसी समय 85-619-55-619 पर अपनी समस्या लिखकर वाट्सएप करें और फ्री रजिस्ट्रेशन करवायें। जिससे बहुत कम खर्चे में आपका घर-बैठे इलाज-समाधान हो सके। Online Dr. PL Meena: Health Care Friend and Marital Dispute Consultant, (स्वास्थ्य रक्षक सखा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार) तथा संचालक-निरोगधा`म (लाइलाज का इलाज)।

कब्ज के प्रमुख दुष्परिणाम (Major Side-Effects of Constipation):
अपूर्ण-सूखा-दर्दनाक-मलत्याग ।
मलत्याग के समय रक्त-(Bleeding)
मुँह-मुख-से-दुर्गन्ध-आना।
खराब-स्वाद ।
बारंबार-छाले (Repeatedly-Mouth-Ulcer)
भूख-की-कमी-जी-मिचलाना-आफरा-(Flatulence)
पेट-सिर-शरीर-का-भारीपन।
पेट-में-हल्का-दर्द बने-रहना ।
डकार-कलेजे-में-जलन-सिरदर्द।
आलस्य-सुस्ती-चिड़चिड़ापन-तनाव ।
पेचिश-डिसेंटरी-(Dysentery )
गैस-ऐसीडिटी-(Acidity)
अल्सर-(Ulcer)
बवासीर-(Piles-Hemorrhoids)
भगंदर-फिस्च्युला-(Fistula)
कैंसर-(Cancer )
गुदाभ्रंश-(Rectum Collapse)
यकृत रोग-(Liver Dysfunction)
गठिया-(Arthritis-Gout-Rheumatoid)
जोड़ों का दर्द-(Joint Pain)
मोतियाबिंद-(Cataract)
उच्च रक्तचाप-(High Blood Pressure)
दाद-खाज-खुजली-(Ringworm-Herpes-Itching )
मुंहासे-Acne-एलर्जी-(Allergy)
(एक्जीमा-(Eczema) आदि चर्मरोग।
इत्यादि।

यदि उपरोक्त लक्षणों में से आपके शरीर में कोई एक या एकाधिक लक्षण विद्यमान-मौजूद (Existing) हैं और यदि आप उपरोक्त में से किन्हीं तकलीफों से पीड़ित हैं तो आपके दीर्घ-स्वस्थ जीवन के हित में यह उचित होगा कि आप तुरंत अपने नजदीक के किसी भी अनुभवी होम्योपैथ और, एवं आयुर्वेद के डॉक्टर से सम्पर्क करें। *यदि आप सब जगह इलाज करवाकर अपना वक्त और पैसा खर्चा करके थक चुके हैं और स्वस्थ होना चाहते हैं तो सुबह 10 बजे से रात्रि 10 बजे के बीच मोबाईल नम्बर 98750 66111 पर और, या Health Advice WhatsApp No.: 85619 55619 पर आप सीधे मुझ से भी सम्पर्क कर सकते हैं।*

यहां पर स्पष्ट करना जरूरी समझता हूं कि- *"हमारे द्वारा पीड़ित लोगों के शरीर में जिन-जिन तत्वों की कमी और, या अधिकता होती है, प्राकृतिक तरीके से उनकी पूर्ति, निष्कासन या सुधार हेतु ताजा-शुद्ध-आॅर्गेनिक जड़ी-बूटियों, होम्योपैथक एवं बॉयोकैमिक तत्वों से युक्त दुष्प्रभावरहित-पोषक, विषाक्तता नाशक एवं सम्पूरक तत्वों को रजिस्टर्ड पार्सल के जरिये घर बैठे उपलब्ध करवाकर तकलीफों से मुक्ति दिलाई जाती है। यद्यपित हम किसी प्रकार की गारण्टी नहीं देते हैं।"*

*अन्तिम बात:* हमारा प्रयास *'लाइलाज समझी जाने वाली सभी तकलीफों का घर बैठे समाधान करना है।'* सुबह 10 से रात्रि 10 बजे के बीच मो. नं.: 987506611 पर काल करें। या अभी, इसी समय 8561955619 पर अपनी तकलीफ लिखकर वाट्सएप करें और हमारे जवाब का इंतजार करें।


Online Dr. PL Meena: Health Care Friend and Marital Dispute Consultant, Health Advice WhatsApp No.: 85619-55619, Mobile No.: 9875066111 (10AM to 10 PM)
*बवासीर, गुदाभ्रंश और भगन्दर की पीड़ा क्यों?*



वर्तमान में जबकि हमारी जबान और खानपान दोनों अनियंत्रित होते जा रहे हैं। अधिकतर लोगों (82%+) का हाजमा बिगड़ा हुआ है और, या बिगड़ता जा रहा है। *दुष्परिणामस्वरूप* बड़ी संख्या में लोग *बवासीर-पाइल्स, गुदाभ्रंश और फिशर-भगन्दर* की असहनीय पीड़ा झेलने को विवश हो चुके हैं। इससे भी दुःखद बात यह है कि इनमें से बहुतेरे *आधुनिक चिकित्सकों से शल्य चिकित्सा करवाकर अपना स्वास्थ्य बरबाद कर चुके या कर रहे हैं। जबकि ऑपरेशन के कुछ समय बाद फिर-फिर ऑपरेशन...! आखिर कितनी बार ऑपरेशन? सबसे दर्दनाशक तो यह कि ऑपरेशन के बाद भी समाधान नहीं! जबकि परम्परागत चिकित्सा पद्धति से उपचार सम्भव है।*

*मेरा अपना अनुभव:-जब तक आप अपना हाजमा ठीक नहीं करेंगे, इन पीड़ाओं से मुक्ति असम्भव है?*


रजिस्ट्रेशन-फ्री: यदि आप लाइलाज (Incurable) समझी जाने वाली किसी बीमारी का इलाज करवा-करवाकर थक चुके/चुकी हैं और आपकी बीमारी ठीक नहीं हो रही हैं तो इसकी की अनदेखी नहीं करें स्वास्थ्य परामर्श या इलाज हेतु अभी और इसी समय 85-619-55-619 पर अपनी समस्या लिखकर वाट्सएप करें और फ्री रजिस्ट्रेशन करवायें। जिससे बहुत कम खर्चे में आपका घर-बैठे इलाज-समाधान हो सके। Online Dr. PL Meena: Health Care Friend and Marital Dispute Consultant, (स्वास्थ्य रक्षक सखा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार) तथा संचालक-निरोगधाम (लाइलाज का इलाज)।

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Online Dr. PL Meena: Health Care Friend and Marital Dispute Consultant, Health Advice WhatsApp No.: 85619-55619, Mobile No.: 9875066111 (10AM to 10 PM)

भाग-3: यदि ठंड, छुअन/स्पर्श और दर्द के प्रति अत्यंत असहिष्णुता (Extremely Intolerance) हो तो होम्योपैथी के जरिये सभी विकारों (Disorders) से मुक्ति!


होम्योपैथी के समान लाक्षणिक चिकित्सा सिद्धान्त को रोचक भाषा में आम लोगों के लिये सरल और सुगम बनाने के लिये छोटा सा प्रयास शुरू किया गया है। इसी क्रम में निम्न विवरण से यदि किसी के भी शारीरिक और, या मानसिक लक्षण मिलते हैं, तो इनके आधार पर उनके कितने भी पुराने और किसी भी मानसिक और, या शारीरिक विकारों से मुक्ति (cure from mental and, or physical disorders) संभव है।

*आरोग्य के लिए आधारभूत लक्षण*
*(Basic Symptoms for Cure)*

*1-अत्यधिक सर्दी लगना (Extreme cold):* सर्दी में हरेक व्यक्ति को गर्म कपड़े की जरूरत पड़ती है, लेकिन कुछ लोग हमेशा अपने-आप को गर्म कपड़ों से ढके रखते हैं। घर और दफ्तर के दरवाजे और खिड़कियां बन्द रखते हैं। अपने कमरे की ही नहीं, अपने साथ के कमरों के दरवाजे और खिड़कियां भी बन्द रखा करते हैं। सर्दी बर्दाश्त कर ही नहीं सकते। सोते हुए रजाई/कम्बल में कहीं से भी ठंडी हवा न घुस सके, इसका पूरा प्रबन्ध कर लेते हैं। खिड़की या दरवाजा जरा सा भी खुला रहने से उनको ऐसा लगता है कि उस स्थान से हवा आकर शरीर में प्रवेश कर रही है या शरीर को ठंडा कर रही है और उससे उनको तकलीफ बढ़ने की आशंका होती है!

*2-दर्द और स्पर्श के प्रति अत्यधिक असहनशीलता (Extreme intolerance towards pain and touch):* व्यक्ति में सहनशीलता का इस कदर अभाव होता है कि यदि उसके शरीर में कहीं सूजन या कोई चर्मरोग या फोड़ा-फुंसी हो तो वह न तो उन्हें किसी को छूने देता है, न उनके दर्द को सह सकता है। उसे थोड़ा सा भी दर्द ऐसे महसूस होता है, जैसे सूइयां चुभोई जा रही हों। जैसे वह ठंडी हवा को नहीं सह सकता, वैसे छूअन/स्पर्श (touch) को भी नहीं सह सकता। उसमें हर प्रकार की असहनशीलता (intolerance) पायी जाती है। दूसरे लोग जिस दर्द को साधारण समझ कर उस पर ध्यान भी नहीं देते, उस दर्द में वह चीखने-चिल्लाने लगता है। यहां तक कि थोड़े-से दर्द में ही बेहोश तक हो जाता है!


रजिस्ट्रेशन-फ्री: यदि आप लाइलाज (Incurable) समझी जाने वाली किसी बीमारी का इलाज करवा-करवाकर थक चुके/चुकी हैं और आपकी बीमारी ठीक नहीं हो रही हैं तो इसकी की अनदेखी नहीं करें स्वास्थ्य परामर्श या इलाज हेतु अभी और इसी समय 85-619-55-619 पर अपनी समस्या लिखकर वाट्सएप करें और फ्री रजिस्ट्रेशन करवायें। जिससे बहुत कम खर्चे में आपका घर-बैठे इलाज-समाधान हो सके। Online Dr. PL Meena: Health Care Friend and Marital Dispute Consultant, (स्वास्थ्य रक्षक सखा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार) तथा संचालक-निरोगधाम (लाइलाज का इलाज)।


*3-मानसिक-असहिष्णुता (Mental intolerance):* ठंड को न सहना, स्पर्श को न सहना, दर्द को न सहना, इतने पर ही बस नहीं होता। मानसिक-अनुभूति (Mental feeling) की भी असहिष्णुता होती है। सामान्य से कारण व्यक्ति को बहुत अधिक क्रोध आ जाता है, वह उत्तेजित और झगड़े के लिये तैयार रहता है। ऐसा चित्त-विकार (Mental disorder) उसे इस कदर दबोच लेता है कि बिना कारण के अपने मित्रों तक को मारने-पीटने के लिये उतावला हो जाता है।

*4-त्वचा रोग (skin diseases):* थोड़े सी ही त्वचा के कट जाने मात्रा से वह पक जाती है और उसमें मवाद आने लगती है। एक्जिमा के कारण हुए घाव में भी स्पर्श मात्र से ही खून का निकलना, छोटी-छोटी फुंसियों का निकलना, इन छोटी-छोटी फुंसियों में मवाद पड़ जाता है तथा पनीर की जैसी बदबू आना।

*इन विकारों से मुक्ति हेतु क्या करें?*
*(What to do to get rid of these disorders?)*

उपरोक्त लक्षणों में से यदि पचास फीसदी से अधिक लक्षण किसी व्यक्ति में मिलने पर अपने नजदीक के किसी भी अनुभवी होम्योपैथ से सम्पर्क करें और, या *सुबह 10 बजे से रात्रि 10 बजे के बीच मोबाईल नम्बर 98750 66111 पर तथा Health Advice WhatsApp No.: 85619 55619 पर मुझ से भी सम्पर्क किया जा सकता है।* हो सकता है कि *अभी तक 'लाइलाज समझी जाने वाले' (incurable considered) आपके किसी मानसिक और, या शारीरिक विकार से आपको मुक्ति मिल जाये?*
Ref-RUHPPLLUMSEREANPAENH (27-01-2018)
*आपका-अपना*
-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश', HCF & MDC
(Health Care Friend and Marital Dispute Consultant)
आॅन लाइन-स्वाथ्य रक्षक सखा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार
संचालक-निरोगधाम (लाइलाज समझे जाने वाले विकारों का इलाज)
*हेल्थ परामर्श वाट्सएप: 85619-55619 (इस पर काल नहीं करें)*
मो. नं.: 9875066111 (10 AM to 10 PM बजे के बीच)
मूत्राशय की कमजोरी का होम्योपैथिक इलाज


जब भी रोगी को पेशाब की इच्छा होती है, तब वह एक क्षण के लिये भी पेशाब को रोक नहीं सकता। पेशाब निकल जाने के डर से वह लिंग/मूत्रेन्द्रिय को पकड़ कर बाथरूम को भागता है, तब भी कई बार रास्ते में ही पेशाब निकल पड़ता है। इस तकलीफ का होम्योपैथी में बहुत कम खर्चे में इलाज संभव है। जबकि अनेक लोग प्रोस्टेट ग्रन्थि का ऑपरेशन करवाकर अपना पैसा और स्वास्थ्य ख़राब कर लेते हैं। अनेक ऐलोपैथिक दवाइयों का सेवन करके असमय अपना पौरुष खो देते हैं।
Ref.: Haojmuehot-170112018


रजिस्ट्रेशन-फ्री: यदि आप लाइलाज (Incurable) समझी जाने वाली किसी बीमारी का इलाज करवा-करवाकर थक चुके/चुकी हैं और आपकी बीमारी ठीक नहीं हो रही हैं तो इसकी की अनदेखी नहीं करें स्वास्थ्य परामर्श या इलाज हेतु अभी और इसी समय 85-619-55-619 पर अपनी समस्या लिखकर वाट्सएप करें और फ्री रजिस्ट्रेशन करवायें। जिससे बहुत कम खर्चे में आपका घर-बैठे इलाज-समाधान हो सके। Online Dr. PL Meena: Health Care Friend and Marital Dispute Consultant, (स्वास्थ्य रक्षक सखा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार) तथा संचालक-निरोगधाम (लाइलाज का इलाज)।

-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
HCF & MDC
(Health Care Friend and Marital Dispute Consultant)
स्वाथ्य रक्षक सखा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार
Chief Editor: http://www.healthcarefriend.in
मुख्य प्रबन्ध संचालक-निरोगधाम (लाइलाज का इलाज)
(लाइलाज समझी जाने वाली बीमारियों का आॅनलाइन इलाज)
*Only Health WhatsApp Don't Call 85619-55619*
*Call Between 10AM to 10PM Only Mob. No.:9875066111)*

Jaipur, Rajasthan

गुड़हल (Hibiscus)

गुड़हल फूल के 5 चमत्कारी लाभ के बारे में जानें

आप सभी ने गुड़हल का फूल तो देखा ही होगा। अक्सर लोग अपने घरों में इस खूबसूरत फूल का पौधा लगाते हैं। लेकिन अगर आपको लगता है कि ये फूल सिर्फ आपके आंगन की खूबसूरती ही बढ़ाता है तो शायद आप अभी इस फूल के बारे में ज्यादा कुछ जानते नहीं है। दरअसल गुड़हल के फूल में काफ अधिक औषधीय गुण भी होते हैं। जिसकी वजह से इन फूलों का इस्तेमाल आप कई शारीरिक समस्याओं को दूर करने के लिए कर सकते हैं। गुड़हल का फूल छोटी मोटी चोट को भरने से लेकर आपकी सेक्स लाइफ को बेहतक बनाने तक का काम करता है। चलिए विस्तार से जानते हैं इस खूबसूरत फूल के सभी फायदों के बारे में।

ब्लड प्रेशर कंट्रोल करे: अगर आपको हाई ब्लड प्रेशर की समस्या है तो इस फूल का पौधा घर पर ज़रूर लाकर रखें, ये आपके बहुत काम आएगा। कई प्रकार के अध्ययनों से ये साबित हुआ है कि ये फूल ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करके दिल की बीमारी होने की संभावना को कम करता है। अब बताइये, इससे नैचुरल तरीका मिलेगा आपको अपना ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने का?

खरोंच और कट के घाव ठीक करे: घर में अगर बच्चे हैं तो समझिये छोटी मोटी चोट तो आपके लिए आम बात होगी। बच्चे खेलते-खेलते गिर जाते हैं या कोई नुकीली चीज़ लगा लेते हैं जिससे उनको छोटा घाव हो जाता है। या अगर आप किचन में काम करते हुए चाकू से उंगली काट लेती हैं तो गुड़हल के पत्तों का लेप आपके बहुत काम आएगा। इससे बहुत जल्दी घाव भरता है।

कॉलेस्ट्रॉल कम करे: कॉलेस्ट्रॉल अगर शरीर में बहुत बढ़ जाए तो आपको दिल की कई बीमारियां हो सकती है। इसलिए कोशिश करें कि अपना कॉलेस्ट्रॉल कंट्रोल करें। एक स्टडी में ये बात सामने आई है कि 1 ग्राम गुड़हल के पत्ते का रस वेट और एलडीएल कोलेस्ट्रॉल दोनों को कंट्रोल कर सकता है।

सेक्स लाइफ में भरे उमंग – जी हां, हैरान न हो। गुड़हल का फूल आपकी सेक्स लाइफ को बेहतर बनाने में भी आपकी मदद कर सकता है। इस फूल में पुरूषों के कामोत्तेजना को बढ़ाने का गुण होता हैं क्योंकि ये मेल एन्ड्रोजेन का काम करते है।

पेद दर्द व सूजन कम करे – गुड़हल के पत्तों में फ्लेवनॉयड और पॉलीफेनॉल होता है जो शरीर में किसी भी प्रकार के सूजन और पेट की गड़बड़ी के उपचार में मदद करता है। पेट दर्द तो बहुत आम बीमारी है जो घर में किसी न किसी को लगा ही रहता है। इसलिए कोशिश करें कि ये पौधा आपके घर में हो, ताकि आपको ज्यादा दवा न खाना पड़े।
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गुणों से भरपूर है गुड़हल की पत्ती

गुड़हल एक खूबसूरत फूलों वाला पौधा है, जो आमतौर पर ट्रॉपिकल और गर्म क्षेत्रों में पाया जाता है। इस पौधे की कई प्रजातियां पाई जाती है और सभी अपने खूबसूरत फूलों के जानी जाती है। मजेदार बात यह है कि गुड़हल का फूल दक्षिण कोरिया, मलेशिया और हैथी गणराज्य का राष्ट्रीय फूल है। भारत में इस फूल को काफी शुभ माना जाता है और कई धार्मिक संस्कारों और चढ़ावें में इसका इस्तेमाल किया जाता है। प्रचीन भारतीय आयुर्वेद में गुड़हल का इस्तेमाल कई तरह की बीमारियों को दूर करने के लिए किया जाता था। गुड़हल की पत्ती का इस्तेमाल न सिर्फ औषधीय, बल्कि कई रूपों में किया जाता है। कई बार तो इसका इस्तेमाल पार्क और गार्डन को सजाने के लिए भी किया जाता है। गुड़हल की पत्ती को विभिन्न तरह से इस्तेमाल के लिए अलग-अलग रूपों में संसाधित किया जाता है। गुड़हल की सूखी पत्ती का इस्तेमाल मैक्सिकन जैसे कई व्यंजन को सजाने के लिए भी किया जाता है। साथ ही इसकी पत्ती का इस्तेमाल चाय बनाने के लिए किया जाता है, जो कई देशों में अलग-अलग नामों से चर्चित है। कई शोध के जरिए वैज्ञानिक रूप से यह बात सिद्ध हो चुकी है कि गुड़हल की पत्ती में औषधीय गुण पाए जाते हैं। 2008 में यूएसडीए के अध्ययन में पाया गया कि गुड़हल का चाय पीने से ब्लड प्रेशर कम होता है। आयुर्वेद में लाल और सफेद गुड़हल को औषधीय गुण से भरपूर माना जाता है और इसका इस्तेमाल खांसी, बालों के झड़ने और बालों के सफेद होने की समस्या से निजात पाने के लिए किया जाता है। साथ ही गुड़हल एंटीऑक्सीडेंट से भी भरपूर होता है और इसका इस्तेमाल एंटी-एजिंग के रूप में किया जाता है। इसके अलावा गुड़हल की पत्ती से बनी चाय का इस्तेमाल शरीर में स्फूर्ति जगाने के लिए भी किया जाता है।

01. हेयर कंडीशनर गुड़हल की पत्ती और इसके फूल की पंखुड़ी से बना पेस्ट प्राकृतिक हेयर कंडीशनर का काम करता है। जब इसे शैंपू के बाद लगाया जाता है तो यह बालों के रंग को काला करता है और डैंड्रफ से भी छुटकारा दिलाता है।
02. चाय गुड़हल की पत्ती से बनी चाय का इस्तेमाल कई देशों में औषधि के रूप में किया जाता है। अगर आपको किडनी की समस्या है तो इससे बनी चाय बिना शक्कर के लें। साथ ही इससे डिप्रेशन के समय मूड भी ठीक हो जाएगा।
03. स्किन केयर अपने खास गुणों के कारण गुड़हल का इस्तेमाल कॉस्मेटिक स्किन केयर में किया जाता है। परंपरागत चीनी दवाइयों में गुड़हल की पत्ती का इस्तेमाल एंटी-सोलर एजेंट के रूप में किया जाता है, क्योंकि यह अल्ट्रावाइलेट रेडिएशन को सोख लेता है। साथ ही इसका इस्तेमाल स्किन की झुर्रियों से निजात पाने में भी किया जाता है।
04. ब्लड प्रेशर कम करे: अध्ययन से पता चला है गुड़हल की पत्ती से बनी चाय पीने से ब्लड प्रेशर की समस्या से निजात मिलता है। इसलिए ब्लड प्रेशर कम करने के लिए इसका नियमित सेवन करना चाहिए।
05. घाव पर भी असरदार: गुड़हल से निकले तेल का इस्तेमाल खुले घाव और कैंसर से हुए घाव पर किया जाता है। साथ ही ये कैंसर के प्रारंभिक चरण काफी कारगर होता है। 
06. कोलेस्टेरोल कम करे गुड़हल: की पत्ती से बनी चाय एलडीएल कोलेस्टेरोल को कम करने में काफी प्रभवी होती है। इसमें पाए जाने वाले तत्व अर्टरी में प्लैक को जमने से रोकते हैं, जिससे कोलेस्टेरोल का स्तर कम होता है।
07. सर्दी और खासी में फायदेमंद: गुड़हल की पत्ती में प्रचूर मात्रा में विटामिन सी पाया जाता है। जब चाय या अन्य रूपों में इसका सेवन किया जाता है तो यह सर्दी और खांसी के लिए काफी फायदेमंद होता है। इससे आपको सर्दी से जल्द राहत मिलेगी।
08. वजन कम करने और पाचन में सहायक: गुड़हल के सेवन से भूख की इच्छा शांत होती है। ऐसे में यह वजन कम करने में काफी मददगार होता है। हड़हुल की पत्ती से बनी चाय पीने से आप कम खाएंगे और आपकी पाचन प्रक्रिया भी तेज होगी। इससे शरीर में अनावश्यक फैट नहीं बनता है।
09. रेगुलर मेंस्ट्रल: साइकल गुड़हल की पत्ती से बनी चाय के नियमित सेवन से महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन का स्तर कम होता है। इससे शरीर में हार्मोन का संतुलन बना रहता है। यही वजह है मेंस्ट्रल साइकल में किसी तरह की दिक्कत नहीं आती है।
10. एंटी ऐजिंग: गुड़हल की पत्ती में कई तरह के एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। यह शरीर में मौजूद फ्री रेडिकल्स को हटाता है, जिससे उम्र बढ़ने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है। कई मामलों में तो जीवन में भी वृद्धि हो जाती है।
रोगी अनर्थ या अपराध करे, इससे पहले उसे होम्योपैथिक इलाज की जरूरत होती है। लाक्षणिक इलाज: लक्षणों का मिलान करें और लाइलाज बीमारियों से मुक्ति पायें। भाग-2

जिन पाठकों ने पहला भाग नहीं पढा या जिन्हें पहले भाग का विवरण याद नहीं, तात्कालिक जानकारी के लिये दोहराया जाता है कि होम्योपैथी के मूल सिद्धान्त के अनुसार, होम्योपैथी में किसी भी रोग की कोई सुनिश्चित दवाई नहीं होती है। (There is no sure medication for any disease) केवल इतना ही नहीं, बल्कि-
*1-दो बीमार लोगों की एक जैसी बीमारी के लिये, अलग-अलग दवाई दी जा सकती है। (For the same illness of two sick people, different medicines can be given)*
*2-एक ही दवाई से, एक या एकाधिक रोगियों के अनेक रोगों को ठीक किया जा सकता है। (With the same medication, many diseases of one or more patients can be cured)*
*3-इसकी मूल वजह यह है कि होम्योपैथी में हम रोग का नहीं, रोगी का इलाज करते हैं। (We treat the patient, not the disease)*
*4-रोगी के मानसिक एवं शारीरिक लक्षणों के अनुसार मेल खाने वाली दवाई का चयन/सिलेक्शन करके रोगी की सभी प्रकार की तकलीफों का इलाज किया जा सकता है। (All types of diseases of the patient can be cured)*
*5-होम्योपैथी की किसी भी दवाई के कोई साईड इफैक्ट/दुष्प्रभाव नहीं होते हैं। (There are no side effects of any medicine in Homeopathy)*
*आपके इलाज के लिए आधारभूत लक्षण*
*(Basic Symptoms for Your Cure)*




होम्योपैथी के समान लाक्षणिक चिकित्सा सिद्धान्त को आम लोगों के लिये सरल, सुगम और रोचक बनाने के लिये मेरी ओर से छोटा सा प्रयास शुरू किया गया है। जिसके तहत विश्व के महान होम्योपैथिक चिकित्सकों द्वारा अनुभवसिद्ध कुछ अति-महत्वूपर्ण लक्षणों को पाठकों के समक्ष सरल तरीके से पेश कर रहा हूं।

यहां प्रस्तुत निम्न लक्षणों से यदि आप में से किसी के भी शारीरिक और, या मानसिक लक्षण मेल खाते हैं, तो आप इनके आधार पर अपनी कितनी भी पुरानी किसी भी मानसिक या शारीरिक बीमारी या व्यसन (mental or physical illness or addiction) के इलाज की उम्मीद कर सकते हैं।

*1 स्मृति-लोप:* स्मृति-लोप इतना हो जाता है कि रोगी अपने बच्चों, माता पिता, पति या पत्नी तक भूल जाते हैं। जब रोगी को यह अनुभूति या अहसास हो रहा हो कि सब कुछ अवास्तविक और अयथार्थ है। रोगी की स्मरण शक्ति कम हो जाती है, वह हर बात में कसम खाता है और छोटी-छोटी बातों में लोगों को समझाने लगता है। याद रहे रोगी को ऐसा वेद, धर्म, दर्शन आदि के कारण ऐसा नहीं सोचता, बल्कि उसे लगता ही ऐसा है कि जो कुछ दीखता है, वह वैसा नहीं है, जैसा दिख रहा है। इसी कारण उसे लगता है कि उसका पुत्र। पुत्र नहीं, पुत्री, पुत्री नहीं। पति, पति नहीं। पत्नी, पत्नी नहीं। माता, माता नहीं। पिता, पिता नहीं।

*2 दो मन:* रोगी को ऐसा भ्रामक विश्वास हो जाता है कि वह एक नहीं दो है। उसके शरीर में दो व्यक्ति या दो आत्मायें या दो मन हैं। उसे किसी से किसी क प्रकार के कार्य को करने का आदेश मिलता है, जबकि दूसरे से उस कार्य के विरोध करने का आदेश मिलता है।अनेक बार रोगी को लगता है कि उसका शरीर और उसकी आत्मा या मन दोनों अलग-अलग हैं। उसे लागता है कि उसके ऊपर दो आत्माओं का अधिकार स्थापित हो गया है।

*3 अनियंत्रित और बेकाबू मन:* रोगी की इच्छा एक काम करने को होती है तो दूसरी इच्छा उस काम को न करने की होती है। रोगी को लगता है कि उसकी दो 'इच्छा-शक्तियां' (Wills) हैं। उनमें से एक इच्छा-शक्ति उसे जो कुछ करने को कहती है, दूसरी उसे करने से रोकती है। वह निश्चय नहीं कर पाता कि क्या करे और क्या नहीं। उसके भीतर से उसे एक आवाज आती है-यह करो; दूसरी आवाज आती हैं-यह न करो। उसकी इच्छा है कि दूसरे को मार, दूसरे के साथ अन्याय करे, परन्तु उसे दूसरी आवाज ही अपने भीतर से सुनाई देती है कि ऐसा न करे। क्या करे, क्या न करे, इसका विवाद उसके भीतर लगातार चलता ही रहता है। ऊपरी तल पर तो तो ऐसी मनोस्थिति सभी लोगों की होती है, लेकिन सामान्य और स्वस्थ व्यक्ति अच्छे-बुरे का निर्णय करने में सक्षम होता है। परन्तु जब मन इतना अनियंत्रित और बेकाबू (Uncontrolled and Uncontrollable) हो जाये कि वह दो इच्छाओं में से बुरी इच्छा के चंगुल में ही फंस जाय। रोगी में यह निर्णय करने के क्षमता नहीं रहे कि वह यह सोच सके बुरे और भले में से सही क्या है? रोगी यह नहीं सोच सके कि कानून का डर क्या है? ऐसी स्थिति में वह अनर्थ या अपराध करे, इससे पहले उसे होम्योपैथिक इलाज की जरूरत होती है।

*उपचार कहां से प्राप्त करें?*

उपरोक्त लक्षणों में से पचास फीसदी से अधिक लक्षण मेल खाने पर अपने नजदीक के किसी भी अनुभवी होम्योपैथ और, या आयुर्वेद डॉक्टर से सम्पर्क करें और, या *सुबह 10 बजे से रात्रि 10 बजे के बीच मोबाईल नम्बर 98750 66111 पर तथा हेल्थ वोट्स एप नम्बर: 85619 55619 पर मुझ से सीधे सम्पर्क किया जा सकता है।* हो सकता है कि *अभी तक 'लाइलाज समझी जाने वाली' (incurable considered) आपकी तकलीफ/लत से आपको मुक्ति मिल जाये?*

MY Ref-(MUIDHROAMCOAENOA-10-01-2018)
*आपका-अपना*
-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश', HCF & MDC
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Jaipur, Rajasthan, 10 जनवरी, 2018, 22.10PM

--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!

--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!
सभी के स्वस्थ एवं सुदीर्घ जीवन की कामना के साथ-मेरे प्यारे और दुलारे तीन बच्चों की ममतामयी अद्वितीय माँ (मम्मी) जो दुखियों, जरूतमंदों और मूक जानवरों तक पर निश्छल प्यार लुटाने वाली एवं अति सामान्य जीवन जीने की आदी महिला थी! वह पाक कला में निपुण, उदार हृदया मितव्ययी गृहणी थी! मेरी ऐसी स्वर्गीय पत्नी "जानकी मीणा" की कभी न भुलाई जा सकने वाली असंख्य हृदयस्पर्शी यादों को चिरस्थायी बनाये रखते हुए इस ब्लॉग को आज दि. 08.08.12 को फिर से पाठकों के समक्ष समर्पित कर रहा हूँ!-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'

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(Tribulus Terrestris) 14 फरवरी Abutilon Indicum Allergy Aloevera Juice Alum Aluminum Amaranthus spinosus Ammonium chloride Argemone Mexicana Ash-coloured Fleabane Bael Bauhinia purpurea Bernini’s Cinema Bitter Gourd Black night shade Blumea Lacera Bone Infection Borax Calories Calories Chart Cancer Care Carrots Castor beans Chanca Piedra Cheese Chenopodium Album Cholesterol Clerodendrum Phlomidis Colocynth Constipation Convolvulus Pluricaulis Cumin Date Palm Dengue Diabetes Disorders Emblic Myrobalan Extremely Intolerance Fatty liver Femininity FENUGREEK Fenugreek Seeds Fistula Folic Acid Gallbladder Gardenia Gummifera Garlic Ginger Gooseberry Gourd Groundnut-peanut Guava Hair Falling Health Health Care Friend Health Links Health Tips Hepatitis Hibiscus Homeopathic Homeopathy Homoeopath Honey How to get pregnant? 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Cucumber कब्जी कमजोरी कमर दर्द करेला कर्ण वेदना कर्णरोग कष्टार्तव-Dysmenorrhea कांच निकलना काजू कान कानून सम्मत काम काम शक्ति कामवाण पाउडर कामशक्ति कामशक्ति-Sexual power कामेच्छा कामोत्तेजना कायाकल्प कार्बोहाइड्रेट कार्बोहाइड्रेट-Carbohydrates काला जीरा काला नमक काली जीरी काली तुलसी काले निशान कास-खांसी-Cough किडनी किडनी स्‍टोन कीड़े कुकरौंधा कुकुंदर कुटकी-Black Hellebore कुबडापन कुल्थी कुल्ला कुष्ठ कृमि केला केसर कैफीन-Caffeine कैलोरी कैलोरी चार्ट कैलोरी-Calories कैवांच कैविटी कैंसर कॉफी कॉफ़ी कॉलेस्ट्रॉल कोंडी घास कोढ़ कोबरा कोलेस्ट्रॉल कोलेस्ट्रॉल-Cholesterol कोलेस्ट्रोल कौंच कौमार्य क्रियाशीलता क्रोध क्षय रोग-Tuberculosis क्षारीय तत्व क्षुधानाश खजूर खजूर की चटनी खनिज खरबूजा-Musk melon खरेंटी खरैंटी शिलाजीत खांसी खिरेंटी खिरैटी खीरा खुजली खुशी-Joy खुश्की खुश्बू खोया गंजापन-Baldness गठिया गठिया-Arthritis गठिया-Gout गड़तुम्बा गंध गन्ने का रस गरमा गरम गर्भ निरोधक गर्भधारण गर्भपात गर्भवती गर्भवती कैसे हों? गर्भावस्था गर्भावस्था की विकृतियां-Disorders of Pregnancy गर्भावस्था के दौरान संभोग-Sex During Pregnancy गर्भावस्था-Pregnancy गर्भाशय गर्भाशय भ्रंश गर्भाशय-उच्छेदन के साइड इफेक्ट्स-Side Effects of Hysterectomy गर्म पानी गर्मी गर्मी-Heat गाजर गाजवां गांठ गाँठ-Knot गारंटी गाल ब्लैडर गिलोय गिल्टी गुड़हल गुंदा गुदाभ्रंश गुर्दे गुलज़ाफ़री गुस्सा गृध्रसी गृह-स्वामिनी गैस गैस्ट्रिक गोक्षुरादि चूर्ण गोखरू गोखरू (LAND CALTROPS) गोंद कतीरा-Hog-Gum गोंदी गोभी-Cabbage गोरख मुंडी गोरखमुंडी ग्रीन-टी घमोरी घरेलु ​नुस्खे घाघरा घाव चकवड़ चक्कर चपाती चमत्कारिक सब्जियां चरित्र चर्बी चर्म चर्म रोग चर्मरोग चाय चाय-Tea चालीस के पार-Forty Across चिकनगुनिया चिकित्सकीय चिंतित चिरायता-Absinth चिरोटा चुंबन चोक चौलाई छपाकी छरहरी काया छाछ छाले छींक छीकें छुअ छुआरा छुहारा छोटा गोखरू छोटा धतूरा छोटी हरड़ जंक फूड जकवड़ जंगली-कटीली चौलाई जटामांसी-Spikenard जलजमनी जलन जलोदर रोग-Ascites Disease जवारा जवारे जवासा-Alhag जहर जामुन का जूस जायफल जिगर जीरा जीवन रक्षक जीवनी शक्ति जुएं जुकाम जुदाई जुलाब जूएं जूस जूस-Juice जोड़ों के दर्द जोड़ों में दर्द जौ ज्यूस ज्योति ज्वर ज्वर-Fiver झाइयाँ झांईं झुर्रियाँ झुर्रियां झुर्री झूठे दर्द टमाटर का रस टमाटर-Tomatoes टाइफाइड टायफायड टूटी हड्डी टॉन्सिल टोटला ट्यूमर ठंड ठंडापन ठेकेदार डॉक्टर डकार डकारें डायबिटीज डायरिया डिजिसेक्सुअल डिटॉक्सीफाई डिटॉक्सीफिकेशन डिनर डिब्बाबंद भोजन डिलेवरी डीकामाली डीगामाली डेंगू डेंगू-Dengue डॉ. निरंकुश डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' डॉ. मीणा ढीलापन ढीली योनि तकलीफ का सही इलाज तम्बाकू तरबूज-Watermelon तलाक ताकत तिल तिल्ली तुंबा तुंबी तुलसी तेल त्रिदोषनाशक त्रिफला त्वचा त्वचा रोग थकान थाईरायड थायरायड-Thyroid थायरॉइड दण्डनीय अपराध दंत वेदना दन्तकृमि दन्तरोग दमा दर वेदना दर्द दर्द निवारक दवा दर्दनाक दस्त दही दाग-धब्बे-Stains-Spots दाढ़ दांत दांतो में कैविटी-Teeth Cavity दाद दाम्पत्य दाम्पत्य विवाद सलाहकार दाम्पत्य-Conjugal दाल दालचीनी दालें दिल दीर्घायु दु:खी दुर्गंध दुर्बलता दुष्प्रभाव दुष्प्रभावरहित दूध दूध वृद्धि दूधी दूधी-Milk Hedge दृष्टिदोष दो मन द्रोणपुष्पी-Leucas Cephalotes धड़कन धनिया बीज धनिया-Coriander धमासा धातु धातु पतन धार्मिक धूम्रपान छोड़ना चाहते हैं? धैर्यहीन नज़ला नपुंसकता नाक नाखून नागबला नागरमोथा नाडी हिंगु नाड़ी हिंगु (डिकामाली) नामर्दी नारकीय पीड़ा नारियल नाश्ता निमोनिया निम्न रक्तचाप निम्बू नियासिन निराश निरोगधाम निर्गुण्डी निष्कपट स्नेह निष्ठा निसोरा नींद नींबू नींबू-Lemon नीम-azadirachta indica नुस्खे नुस्खे-Tips नेगड़ नेगड़-निर्गुन्डी-Vitex negundo नेत्र रोग नेुचरल नैतिक नोनिया नौसादर न्युमोनिया-Pneumonia पक्षघात पंचकर्म पढ़ने में मन लगेगा पंतजलि पत्तागोभी-CABBAGE पत्थर फोड़ी पत्थरचट्टा पत्नी पथरी पदार्थ पनीर पपीता पपीता-CARICA PAPPYA पमाड परदेशी लांगड़ी परम्परागत चिकित्सा परहेज पराठा परिस्थिति पवाड़ पवाँर पाइल्स पाक-कला पाचक पाचन पाचनतंत्र पाठक संख्या 16 लाख पार पाठक संख्या पंद्रह लाख पायरिया पारदर्शिता पारिजात पालक पालक-Spinach पित्त पित्ताशय पित्ती पिंपल-मुंहासे-Pimples-Acne पिरामिड पीलिया पीलिया-Jaundice पीलिया-कामला-Jaundice पुआड़ पुदीना पुनर्नवा-साटी-सौंटी-Punarnava पुरुष पेचिश पेट के कीड़े पेट दर्द पेट में गैस पेट रोग पेड़ पेद दर्द पेशाब पेशाब में रुकावट पेंसिल थेरेपी-Pencil Therapy पौधे पौरुष पौष्टिक रागी रोटी प्याज-Onion प्यास प्रजनन प्रतिरक्षा प्रतिरक्षा प्रणाली प्रतिरोधक प्रतिरोधक-Resistance प्रदर प्रमेह प्रवाहिका (पेचिश)-Dysentery प्रसव प्रसव सुरक्षा चक्र प्रसव-पीड़ा प्रसूति प्राणायाम प्रेग्नेंसी-Pregnancy प्रेमरस प्रेमिका प्रेमी प्रोटीन प्रोटीन का कार्य प्रोटीन के स्रोत प्रोस्टेट प्रोस्टेट ग्रन्थि प्लीहा प्लूरिसी-Pleurisy प्लेटलेट्स फफूंद-Fungi फरास फल फल-Fruit फाइबर फिटकरी फुंसी-Pimples फूलगोभी-CAULIFLOWER फेंफड़े फैट फैटी लीवर फोटोफोबिया फोड़ा फोड़े-Boils फोरप्ले फोलिक एसिड फ्लू फ्लू-Flu फ्लेक्स सीड्स बकायन बकुल बड़ी हरड़ बथुआ बथुआ पाउडर बथुआ-White Goose Foot बदबू बबूल-ACACIA बरसाती बीमारियाँ बरसाती बीमारियां बलगम बलवृद्धि बला बलात्कार बवासीर बहरापन बहुनिया बहुमूत्रता- बांझपन बादाम-Almonds बादाम. बाल बाल झड़ना बाल झडऩा-Hair Falling बिना सिजेरियन मां बनें बिवाई बीजबंद बीड़ी बीमारियों के अनुसार औषधियां बीमारी बुखार बूंद-बूंद पेशाब बेल बेली बैक्टीरिया ब्र​ह्मदण्डी ब्रेस्ट ग्रोथ ब्लड प्रेशर ब्लैक मेलिंग ब्लॉकेज भगंदर भगंदर-Fistula-in-ano भगनासा भगन्दर भगोष्ठ भड़भांड़ भय भविष्य भस्मक रोग भावनात्मक भुई आंवला-Phyllanthus Niruri भूई आमला भूई आंवला भूख भूख बढ़ाने भूमि भूमि आंवला भोजनलीवर मकोय मकोय-Soleanum nigrum मंजीठ मटर-PEA मंद दृष्टि मंदाग्नि मदार मधुमेह मधुमेह-Diabetes मन्दाग्नि-Dyspepsia मरुआ मरोड़ मर्द मर्दाना मलाशय मलेरिया मलेरिया (Malaria) मवाद मसाले मस्तिष्क मस्से मस्से-WARTS महत्वपूर्ण लेख महाबला माइग्रेन माईग्रेन माईंड सैट माजूफल मानसिक मानसिक लक्षण मानसिक-Mental मानिसक तनाव-Mental Stress मायोपिया मासिक मासिक-धर्म मासिकधर्म मासिकस्राव माहवारी मिनरल मिर्गी मिर्च-Chili मीठा खाने की आदत मुख मैथुन-ओरल सेक्स-Oral Sex मुख्य लक्षण मुधमेह मुलहठी मुलेठी मुहाँसे मूँगफली मूड डिस्ऑर्डर-Mood Disorders मूत्र मूत्र असंयमितता मूत्र में जलन-Burning in Urine मूत्राशय मूत्रेन्द्रिय मूर्च्छा (Unconsciousness) मूली मूली कर रस मृत्यु मृत्युदण्ड मेथी मेथी दाना मेंहदी मैथुन मोगरा (Mogra) मोटापा मोटापा-Obesity मोतियाबिंद मौत मौलसिरी मौसमी बीमारियां यकृत यकृत प्लीहा यकृत वृद्धि-Liver Growth यकृत-लीवर-जिगर-Lever यूपेटोरियम परफोलियेटम यूरिक एसिड लेबल योग विज्ञापन योन योन संतुष्टि योनि योनि ढीली योनि शिथिल योनि शूल-Vaginal Colic योनि संकोचन योनिभ्रंश योनी योनी संकोचन यौन यौन आनंद यौन दौर्बल्य यौन शक्तिवर्धक यौनतृप्ति यौनशक्ति यौनशिक्षा यौनसुख यौनानंद यौनि रक्त प्रदर (Blood Pradar) रक्त रोहिड़ा-TECOMELLA UNDULATA रक्तचाप रक्तपित्त रक्तशोधक रक्ताल्पता रक्ताल्पता (एनीमिया)-Anemia रस-juices रातरानी Night Blooming Jasmine/Cestrum nocturnum रामबाण रामबाण औषधियाँ-Panacea Medicines रुक्षांश रूढिवादी रूसी रूसी मोटापा रेचक रेठु रोग प्रतिरोधक रोबोट सेक्स रोमांस लकवा लक्षण लक्ष्मी लंच लसोड़ा लस्सी लहसुन लहसुन-Garlic लाइलाज लाइलाज का इलाज लाक्षणिक इलाज लाक्षणिक जानकारी लाभ लिंग लिंग प्रवेश लिसोड़ा लीकोरिया लीवर लीवर-Liver लू-hot wind लैंगिक लोनिया लौकी लौंग की चाय ल्युकोरिया ल्यूकोरिया ल्यूज योनी वजन वज़न वजन कम वजन बढाएं-Weight Increase वन/जंगली तुलसी वनौषधियाँ वमन वमन विकृति-Vomiting Distortion वसा वात वात श्लैष्मिक ज्वर वात-Rheumatism वायरल वायरल फीवर वायरल बुखार-Viral Fever वासना विचारतंत्र विटामिन विधारा वियाग्रा-Viagra वियोग विरह वेदना विलायती नीम विवाहेत्तर सम्बंध विश्वास विष विष हरनी विषखपरा वीर्य वीर्य वृद्धि वीर्यपात वृक्कों (गुर्दों) में पथरी-Renal (Kidney) Stone वृक्ष वैज्ञानिक वैधानिक वैवाहिक जीवन वैवाहिक जीवन-Marital वैवाहिक रिश्ते वैश्यावृति व्याकुल व्यायाम शंखपुष्पी शरपुंखा शराब शरीफा-सीताफल-Custard apple शर्करा शलगम-Beets शल्यक्रिया शहद शहद-Honey शारीरिक शारीरिक रिश्ते शिथिलता शीघ्र पतन शीघ्रपतन शुक्राणु-Sperm शुक्राणू शुगर शोक शोथ शोध श्योनाक श्रेष्ठतर श्वास श्वांस श्वेत प्रदर श्वेत प्रदर-Leucorrhea श्वेतप्रदर षड़यंत्र संकुचन संकोच संक्रमण संक्रमित संखाहुली संतरा-Orange संतान संतुष्टि सत्यानाशी सदा सुहागन सदाफूली सदाबहार सदाबहार चूर्ण सनबर्न सफ़ेद दाग सफेद पानी सब्जि सब्जियां-Vegetables सब्जी संभालू संभोग समर्पण-Dedication सरकार को सुझाव सरफोंका सरहटी सर्दी सर्दी जुकाम-Cold सर्दी-जुकाम सर्पक्षी सर्पविष सलाद संवेदना सहदेई सहदेवी सहानभूति साइटिका साइटिका-Sciatica साइड इफेक्ट्स साबूदाना-Sago सायटिका सिगरेट सिजेरियन सिर दर्द सिर वेदना सिरका सिरदर्द सिरोसिस सीजर डिलेवरी सुगर सुदर्शन सुहागा सूखा रोग सूजन सेक्स सेक्स उत्तेजक दवा सेक्स परामर्श-Sex Counseling सेक्स पार्टनर सेक्स पावर सेक्स समस्या सेक्स हार्मोन सेक्‍स-Sex सेंधा नमक सेब सेमल-Bombax Ceiba सेल्स सोजन-सूजन सोंठ सोना पाठा सोयाबीन सोयाबीन (Soyabean) सोयाबीन-Soyabean सोराइसिस सोरियासिस-Psoriasis सौंठ सौंदर्य सौंदर्य-Beauty सौन्दर्य सौंफ सौंफ की चाय सौंफ-Fennel स्किन स्खलन स्तन स्तन वृद्धि स्तनपान स्तम्भन स्त्री स्त्रीत्व स्त्रैण स्पर्श स्मृति-लोप स्वप्न दोष स्वप्नदोष स्वप्नदोष-Night Fall स्वभाव स्वभावगत स्वरभंग स्वर्णक्षीरी स्वस्थ स्वास्थ्य स्वास्थ्य रक्षक सखा हजारदानी हड़जोड़ हड्डी हड्डी में दर्द हड्डी संक्रमण हड्डीतोड़ ज्वर हड्डीतोड़ बुखार हरड़ हरसिंगार हरी दूब-CREEPING CYNODAN हरीतकी हर्टबर्न हस्तमैथुन हस्तमैथुन-Masturbation हाथ-पैर नहीं कटवायें हारसिंगार हालात हिचकी हिचकी-Hiccup हिमोग्लोबिन-hemoglobin हिस्टीरिया हिस्टीरिया-Hysteria हींग हीनतर हृदय हृदय-Heart हेपेटाइटिस हेपेटाईटिस हेल्थ टिप्स-Health-Tips हैजा हैपीनेस-Happiness हैल्थ होम केयर टिप्स-Home Care Tips होम्योपैथ होम्योपैथिक होम्योपैथिक इलाज होम्योपैथिक उपचार होम्योपैथी होम्योपैथी-Homeopathy