परामर्श समय : 10 AM से 10 PM के बीच।

My WhatsApp No.: 85-619-55-619

क्या आप अपने स्वास्थ्य की रक्षा हेतु अपने व्हाट्सएप पर

नियमित रूप से हेल्थ बुलेटिन प्राप्त करना चाहते हैं?

यदि हां तो आप से उम्मीद की जाती है कि-

1. आप मेरे वाट्सएप नम्बर: 85-619-55-619 को अपने मोबाईल में सेव करें।

2. आप मेरे वाट्सएप नम्बर: 85-619-55-619 पर हेल्थ बुलेटिन प्राप्त करने हेतु

या स्वास्थ्य परामर्थ हेतु रिक्वेस्ट भेज सकते हैं।

3. आपका परिचय जानने के बाद आपकी स्वास्थ्य रक्षा ​हेतु

हेल्थ बुलेटिन भेजा जाने लगेगा।

लेकिन याद रहे उक्त वाट्सएप पर अन्य कोई सामग्री नहीं भेजें।

अन्यथा आपके नम्बर को ब्लॉक कर दिया जायेगा।

डॉ. पुरुषोत्तम मीणा

आॅन लाईन स्वास्थ्य रक्षक सखा

My Whatsapp No. : 85-619-55-619

मित्रो स्वास्थ्य टिप्स/Health Tips की श्रृंखला में आपका स्वागत है।

प्रथम टिप/First Tip: जिन लोगों में निम्न मानसिक लक्षण देखे/पाये जाते हैं। अकसर उनको पारिवारिक प्रताड़ना, अनदेखी या मानसिक उपचार करवाते हुए देखा जा सकता है। जबकि इन लक्षणों/पस्थितियों से गुजर रहे व्यक्तियों की अनदेखी करने या उन्हें प्रताड़ित करने से उनकी समस्याओं का समाधान सम्भव नहीं हो पाता है। अत: कृपया ध्यान दें यदि आप में से कोई या आपके आसपास कोई रोगी/रोगिणी किसी मानसिक-आघात से पीड़ित हो।



  • 1. जिसके हृदय में किसी प्रकार का गम या शोक या दु:ख बैठ चुका हो?
  • 2. हो सकता है, कोई लड़की या लड़का अपने प्रेमी/प्रेमिका के वियोग/जुदाई में परेशान हो। उसे उसके प्रेमी/प्रेमिका ने दगा दिया हो? उनको प्रेम का आघात पहुंचा हो?
  • 3. परिवार के किसी सदस्य की अचानक मृत्यु हो गई हो और उसके परिवार का कोई व्यक्ति उसके मर जाने के सदमे को न सह सका/सकी हो। दु:ख में अन्दर-ही-अन्दर शोक-मग्न या घुटता रहता या घुटती रहती हो?
  • 4. कई बार पत्नी को अपने रोगी पति की सेवा में दिन-रात एक कर देना पड़ रहा हो। उसकी चिन्ता में वह घुली जा रही हो।
  • 5. कोई बिजनिशमैन अपने धंधे या व्यापार की परेशानियों से या कोई कर्मचारी अपने दफ्तर की परेशानियों या अपने बॉस के व्यवहार के कारण तनाव, क्लेश से घिरा रहता हो।
  • 6. कोई छोटा बच्चा बोर्डिंग स्कूल में डाल दिये जाने के कारण घर जाने के लिये सदैव व्याकुल तथा परेशान रहता हो?
इन प्रकार के अनेकों परिस्थितियों/कारणों से अनेक प्रकार के मानसिक एवं शारीरिक रोग-लक्षण उत्पन्न हो जाते हैं। जैसे—
  • 1. रोगी/रोगिणी को रात को या सवेरे के समय पसीना आने लगे या घबराहट होने लगे।
  • 2. रात को नींद ही न आये या किसी भी काम में चित्त ही न लगे, मन सदैव दु:खी, गमगीन, चिंतित और व्याकुल रहने लगे।
  • 3. इन हालातें में व्यथित रोगी/रोगिणी निराश और हतोत्साह हो जाये।
  • 4. रोगी/रोगिणी का पेट खराब रहने लगे।
  • 5. मुंह में छाले हो जायें।
  • इत्यादि।
ऐसे हालातों से परेशान रोगी/रोगिणी के लिये होम्योपैथी की दुष्प्रभाव रहित दवाईयों से चमत्कार हो सकता है। यदि आपका कोई स्वजन इस तरह की समस्या से पीड़ित है तो आप अपने नजदीक के किसी अनुभवी होम्योपैथ से तुरंत सम्पर्क करेंं। ऐसे हालातों से परेशान व्यक्ति की सेवा हेतु, मैं भी आॅन लाइन मोबाइल नम्बर: 9875066111 तथा हेल्थ वोट्सएप नम्बर: 8561955619 पर 10 से 10 बजे के बीच हाजिर हूं। कृपया सेवा का अवसर प्रदान करें।
डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश', HCF&MDC
(Health Care Friend and Marital Dispute Consultant)
स्वाथ्य रक्षक सखा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार
'स्वास्थ्य रक्षक सखा' वाट्सएप भी संचालित है।
Health WhatsApp हेल्थ वाट्सएप: 8561955619
Mobile No. मोबाईन नम्बर: 9875066111 (10AM to 10PM)
Jaipur, Rajasthan, 08 दिसम्बर, 2017, 21.39
शीघ्रपतन नाशक सात घरेलु ​नुस्खे!

लेखक: डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
'शीघ्रपतन' शीर्षक से 30 नवम्बर, 2017 को लिखे लेख में निम्न विषयों की जानकारी दी जा चुकी है:-
  • 1. शीघ्रपतन से कितने पुरुष परेशान रहते हैं?
  • 2. शीघ्रपतन किसे कहते हैं?
  • 3. वीर्य स्खलन की समय सीमा क्या होनी चाहिये?
  • 4. स्त्री की योन तृप्ति क्या है?
  • 5. सम्भोग को समान भोग बताना कितना सही?
  • 6. शीघ्रपतन का गर्भधारण से सम्बन्ध?
  • 7. शीघ्रपतन दाम्पत्य बिखराव का कारण!
  • 8. शीघ्रपतन के कारण।
शीघ्रपतन नाशक घरेलु ​नुस्खों के बारे में बताने से पूर्व पाठकों के लिये उक्त लेख को पढना उचित रहेगा। अत: जिन पाठकों ने उक्त लेख नहीं पढा, वे हमारी वेबसाइट 'स्वास्थ्य रक्षक सखा' (www.healthcarefriend.in) पर जाकर या यहां क्लिक करके या निम्न लिंक पर जाकर इसे पढ सकते हैं। (http://www.healthcarefriend.in/2017/11/blog-post_30.html)




शीघ्रपतन नाशक घरेलु ​नुस्खे पढने से पहले यह जानना उचित होगा कि पूर्वोक्त 'शीघ्रपतन' शीर्षक से लिखित लेख में बताये गये शीघ्रपतन के 20 कारणों के अलावा पेट की गड़बड़ी भी 'शीघ्रपतन' एक बड़ा शारीरिक कारण होता है। अत: किसी योग्य चिकित्सक से 'शीघ्रपतन' का उपचार/परामर्श लेते समय अपने पेट की तकलीफों को कभी नहीं छुपायें। निम्न नुस्खों का इस्तेमाल करने से पहले अपने पेट की तकलीफों का उपचार अवश्य करवा लें। अन्यथा बताये गये परिणाम नहीं मिलेंगे।

शीघ्रपतन नाशक घरेलु ​नुस्खों की जानकारी प्रदान करने से पहले यह स्पष्ट करना भी जरूरी है कि इन नुस्खों में बतायी गयी औषधियों की सामग्री का उपयोग करने से पहले किसी अनुभवी चिकित्सक का परामर्श लेना जरूरी होगा। क्योंकि दवाई की मात्रा का सही-सही निर्धारण हर एक पुरुष की आयु, यौन क्षमता/समस्या, शारीरिक एवं मानसिक लक्षणों आदि के अनुसार भिन्न-भिन्न हो सकता है। इसके अलावा बताये गये नुस्खों में जिन आयुर्वेदिक औषधियों का उल्लेख किया गया है, यदि वे सभी शुद्ध, आॅर्गेनिक, ताजा, छाया शुष्क होंगी और जरूरत के अनुसार मात्रा में निधारित समय तक सेवन की जायेंगी तो ही वांछित परिणाम मिलेंगे।

शीघ्रपतन नाशक सात घरेलु ​नुस्खे!

1. गिलोय+बड़ा गोखरू+आंवला पाउडर: गिलोय, बड़ा गोखरू और आंवला बराबर मात्रा में लेकर कूट, पीस और कपड़छन करके पाउडर बना लें। इसका एक चम्मच चूर्ण प्रतिदिन मिश्री और घी के साथ सेवन करने से संभोग शक्ति तथा स्तम्भन शक्ति मजबूत होती है। इन तीनों औषधियों के अलावा कुछ अन्य औषधियों के मिश्रण सहित यौन शक्तिवर्धक एवं शीघ्रपतन नाशक यह पाउडर जरूरत के अनुसार हमारी ओर से रोगियों को दिया जाता है।
2. अलसी और वंशलोचन (अधिकतर पंसारी नकली वंशलोचन बेचते हैं, क्योंकि शुद्ध वंशलोचन बहुत मंहगा आता है) समान मात्रा में लेकर कूट, पीस और कपड़छन करके पाउडर बना लें। इसे गिलोय के रस तथा शहद के साथ हफ्ते-दस दिन से एक माह तक सेवन करें। इससे वीर्य गाढ़ा होकर यौन शक्ति एवं स्तम्भन शक्ति बढती है।
3. शोधित कौंच (निर्धारित रीति से कौंच को दूध में शोधित करके ही उपयोग किया जाना चाहिये) के बीज, शतावरी, बड़ा गोखरू, तालमखाना, अतिबला और नागबला को एक साथ मिलाकर कूट, पीस और कपड़छन करके पाउडर बना लें। इसमें बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर 2-2 चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम दूध के साथ रोजाना सेवन करने से स्तम्भन शक्ति बढती है और शीघ्रपतन के रोग में लाभ होता है। रात को संभोग क्रिया करने से 1 घंटा पहले इस चूर्ण को गुनगुने दूध के साथ सेवन करने से संभोग क्रिया सफलतापूर्वक संपन्न होती है। वीर्य का पतलापन, यौन-दुर्बलता और युवकों में विवाह के बाद शीघ्रपतन होना जैसे रोगों में इसका सेवन बहुत ही लाभकारी रहता है। ज्यादातर लोग कौंच का इस्तेमाल लंबे समय तक सेक्स की पॉवर बरकरार रखने के लिए किया जाता है। स्थायी यौन क्षमता बढाने के लिये कौंच के शोधित कौंच बीज पाउडर (कोई साईड इफैक्ट नहीं) विदेशी वियाग्रा (अनेक साईड इफैट) से भी 10 गुना ज्यादा शक्तिशाली होता है, चाहे लिंग की कमजोरी/शिथिलता/ढीलापन, वीर्य पतला, नपुंसकता या शीघ्रपतन कुछ भी समस्या हो सभी का स्थायी इलाज है-शुद्ध आॅर्गेनिक कौंच बीज का शोधित पाउडर। जयपुर स्थित हमारे निरोगधाम पर आॅर्गेनिक रीति से सफेद और काले कौंच की छोटे स्तर पर खेती की जा रही है। जिनका उपयोग रोगियों को दी जाने वाली दवाईयों में किया जा रहा है। व्यापार के लिये कौंच उपलब्ध नहीं है।
4. निर्धारित रीति से शुद्ध आॅर्गेनिक कौंच के बीज के शोधित पाउडर के साथ शुद्ध सफेदमूसली और नागौरी अश्वगंधा के बीजों को बराबर मात्रा में मिश्री के साथ मिलाकर कूट, पीस और कपड़छन करके पाउडर बना लें। इस पाउडर की 1 चम्मच मात्रा सुबह-शाम दूध के साथ सेवन करने से पुरुषों की सभी प्रकार की यौन-समस्याओं को दूर किया जा सकता है। हर प्रकार की शारीरिक कमजोरी दूर करने की ताकत इन कौंच के बीजों में होती है। आकार के अनुसार कौंच के बीज दो प्रकार के होते हैं-छोटे और बड़े। छोटे कौंच स्त्रियों की बीमारियों में अधिक उपयोगी होते हैं। जो योनि दोष, ब्रण, कुष्ठ दूर करते है और रक्तविकार नाशक हैं।
5. देशी बबूल की छाया शुष्क कच्ची पत्तियां, छाया शुष्क कच्ची फलियां और शुद्ध गोंद को बराबर मात्रा में मिलाकर कूट, पीस और कपड़छन करके पाउडर बना लें। इनमें इतनी ही मात्रा में मिश्री मिलाकर हवाबंद बोतल में रख लें। इस पाउडर को नियमित रूप से 2 महीने तक 2-2 चम्मच दूध के साथ सेवन करने से वीर्य की वृद्धि होती है। शीघ्रपतन से मुक्ति मिलती है और स्तम्भन शक्ति बढ़ती है। इसके अलावा यह स्वप्नदोष में भी बहुत लाभकारी है।
6. यदि शुद्ध आॅर्गेनिक मेथी के कुछ दाने रोज सेवन किये जाएं तो पुरुषों की मानसिक यौन सक्रियता बढ़ती है। इसके सेवन से पुरुषों में होने वाली लिंग उत्थान की समस्या हल हो सकती है। मेथी टेस्टोस्टेरोन हार्मोन में बढोतरी करके अन्य यौन समस्याओं को भी ठीक करने में मदद करती है। रात को सोते समय आधा चम्मच पिसा हुआ शुद्ध मेथी दाना पाउडर तथा आधा चम्मच धनिया पाउडर मिलाकर गर्म दूध के साथ नियमित रूप से एक महीने तक सेवन करने से पुरुषों की यौन शक्ति में बढ़ोतरी होती है। ब्रिसबेन स्थित आणविक चिकित्सा केंद्र के अनुसंधानकर्ताओं का दावा है कि भारत में सबसे अधिक मात्रा में पाई जाने वाली मेथी पुरुषों की कामेच्छाओं को काफी अच्छे स्तर तक बढ़ाने में सक्षम है। अनुसंधानकर्ताओं के अनुसार मेथी के बीज में पाया जाने वाला सैपोनीन पुरुषों में पाए जाने वाले टेस्टोस्टेरॉन हॉरमोन में उत्तेजना पैदा करता है।
7. जायफल का पाउडर एक चौथाई चम्मच, सुबह-शाम शहद के साथ खायें और इसका तेल सरसों के तेल में मिलाकर शिश्न (लिंग) पर मलें। इससे नपुंसकता और शीघ्रपतन का रोग समाप्त हो जाता है।

नोट: याद रहे वर्तमान में फसल में बढोतरी के मकसद से अधिकतर किसान खाद, खरपतवार नाशक दवाई, कीटनाशक जहर इत्यादि का जमकर उपयोग करते हैं। जिसके चलते फसलों में रोगनाशक प्राकृतिक औषधीय तत्व गड़बड़ा जाते हैं या कम या नष्ट हो जाते हैं। जिसका एक मात्र समाधान है-आॅर्गेनिक खेती जो तुलनात्मक रूप से बहुत मंहगी पड़ती है और उत्पादन कम होता है। लेकिन मानवता को रोगमुक्त करना है तो आॅर्गेनिक खेती समय की मांग है। इस दिशा में हमारी ओर से बहुत छोटे स्तर पर प्रयास जारी हैं। ऐसी स्थिति में होम्योपैथिक दवाईयों का सेवन करना अधिक सुरक्षित और परिणामदायी सिद्ध होता है। इस बारे में अगले लेख में जानकारी दी जायेगी।

डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश', HCF&MDC
(Health Care Friend and Marital Dispute Consultant)
स्वाथ्य रक्षक सखा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार
Health WhatsApp हेल्थ वाट्सएप: 8561955619
Mobile No. मोबाईन नम्बर: 9875066111 (10AM to 10PM)
Jaipur, Rajasthan, 07 दिसम्बर, 2017, 08.14AM
पाचनतंत्र को सुधारे बिना सेक्स समस्याओं का इलाज सम्भव नहीं!

मेरी उम्र 39 साल है। मैंने 4-5 साल से सेक्स उत्तेजक दवाई खायी तो मेरी सेक्स क्षमता ही समाप्त हो गयी। गोली खाने से भी कुछ नहीं होता था। पिछले एक साल में एक भी बार सेक्स नहीं कर सका था। अत: अपनी सेक्स समस्याओं के इलाज के लिये मैंने इंटरनेट पर समाधान ढूंढना चाहा। डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' जी की वेबसाइट http://www.healthcarefriend.in/ को पढा और डॉ. साहब को काल किया (9875066111)। मेरा रजिस्ट्रेशन फ्री में हो गया। सारी बात जानने के बाद डॉ. साहब बोले जब तक आपकी पाचन क्रिया नहीं सुधरेगी, आपकी सेक्स सम्बन्धी समस्याओं का इलाज सम्भव नहीं है।



मैं बहुत जल्दी में था। सो मैंने इंटरनेट पर ही कुछ और वेबसाइट खंगाली फिर डॉ. ... (हमारा मकसद किसी को बदनाम, अपमानित या प्रचारित करना नहीं है। अत: डॉक्टर का नाम प्रकाशित नहीं किया जा रहा है) से बात की, उन्होंने 7000 रुपये का कोर्स बताया और मुझे हर तरह से फिट कर देने की गारंटी भी दी। मैंने उनसे दवा मंगवाई। 3 महिने दवाई लेने के बाद भी निराशा ही हाथ लगी। उसके बाद उन्होंने मेरा काल अटैंड करने के बजाय मेरे नम्बर को ही ब्लैक लिस्टेड कर दिया। वाट्सएप पर मुझे ब्लॉक कर दिया।

थक हारकर मैंने फिर से डॉ. निरंकुश जी से सम्पर्क किया। इस बार डॉ. निरंकुश जी बोले आपका पुराना रिकॉर्ड डिलीट कर दिया गया है। अत: नये सिरे से के बनाना होगा। जिसका परामर्श शुल्क 1000 रुपये एडवांस जमा करने पर ही केस रजिस्टर होगा। मैंने एक हजार रुपये जमा करवाये। पूरी बात जानने के बाद मेरा इलाज शुरू किया। बाद में दवाई में एक हजार रुपये भी एडजेस्ट कर दिये। दो महिने में मेरी पेट की तकलीफें 50 फीसदी ठीक हो गयी। इसके बाद मेरी सेक्स समस्याओं का इलाज भी शुरू कर दिया। कुल 7-8 महिने के इलाज के बाद अब मैं बिना किसी उत्तेजक दवाई के एक माह में 3-4 बार नेुचरल सेक्स करने में सक्षम हो गया हूं। शुरू में मैंने समझा पेट की तकलीफों का सेक्स समस्याओं से क्या सम्बन्ध है? अब मुझे भूख भी अच्छी लगती है। कब्ज, अपच, गैस और डकारों से भी मुझे मुक्ति मिल चुकी है। हम पति-पत्नी दोनों की ओर से डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' जी का बहुत-बहुत धन्यवाद।-प्रभात कुमार झा, पटना, बिहार। (पहचान गोपनीय बनाये रखने के लिये रोगी का नाम और शहर बदल दिया गया है।)

डॉ. टिप्पणी: कड़वी हकीकत यह है कि सेक्स सम्बन्धी समस्याओं से ग्रस्त पुरुष चाहे युवा हों या वयस्क सबको इलाज की बहुत जल्दी होती है। इसी कारण उनको लूटने वालों की भी कमी नहीं है। यह सच है कि अनेक केसों में मेरा इलाज भी असफल होता है, लेकिन मैं किसी को किसी प्रकार की गारंटी नहीं देता हूं। हां मैं अपनी ओर से 100 फीसदी कोशिश करता हूं। अधिकतर मामलों में हमारी कोशिशें सफल होती हैं। जिन मामलों में असफलता मिलती है, उनमें अनेक बार रोगी का असहयोग भी कारण होता है। फिर भी ऐसे मामलों को चुनौती मानकर असफलता के कारणों को तलाशा जाता है। इस प्रकरण के सम्बन्ध में मुझे यह लिखते हुए दु:ख है कि अधिकतर लोगों का इतनी सी बात भी समझ में नहीं आती है कि-''जिस रोगी का पाचनतंत्र सामान्य भोजन को नहीं पचा सकता, उसका पाचनतंत्र आयुर्वेदिक औषधियों को कैसे पचायेगा? और पचायेगा नहीं तो उपचार कैसे होगा?'' इस विषय पर पूर्व में 'पाचनतंत्र को सुधारे बिना सेक्स समस्याओं का इलाज सम्भव नहीं!' शीर्षक से प्रकाशित लेख में भी जानकारी दी जा चुकी है।

डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश', HCF&MDC
(Health Care Friend and Marital Dispute Consultant)
स्वाथ्य रक्षक सखा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार
Health WhatsApp हेल्थ वाट्सएप: 8561955619
Mobile No. मोबाईन नम्बर: 9875066111 (10AM to 10PM)
Jaipur, Rajasthan, 07 दिसम्बर, 2017, 015.29PM
पाचनतंत्र एवं विचारतंत्र को ठीक किये बिना स्थायी स्वास्थ्य लाभ मुश्किल!
लेखक: डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
वैज्ञानिक शोध एवं चिकित्सकों के क्लीनिकल अनुभव इस बात को प्रमाणित करते हैं कि संसार की आधी से अधिक आबादी पेट और दिमांगी समस्याओं से ग्रस्त है। जिसके कारण लोगों को अनेक प्रकार की शारीरिक एवं मानसिक बीमारियां झेलनी पड़ रही हैं। एक प्रसिद्ध डॉक्टर का कहना है कि अधिकतर लोग जो भोजन करते हैं, उसमें से आधा अपने लिये तथा शेष आधा डॉक्टरों की रोजी रोटी चलाने के लिये खाते हैं। विश्व प्रसिद्ध लेखक और वकृत्वकला के गुरू डेल कॉरनेगी का कहना है कि जो लोग चिंता पर नियंत्राण नहीं कर पाते, वे ना-ना प्रकार की असाध्य बीमारियों को झेलते हुए अकाल मृत्यु को प्राप्त होते हैं।



उपरोक्त पृष्ठभूमि में यह तथ्य भली-भांति और स्वत: स्पष्ट है कि हमारे शरीर में पाचनतंत्र को संचालित करने वाले लीवर और विचारतंत्र को संचालित करने वाले मस्तिष्क को सकारात्मक और, नकारात्मक रूप से प्रभावित करने वाले हालात और कारण मनुष्य के स्वास्थ्य और बीमारी के मूलाधार होते हैं।



अस्पतालों में भर्ती 90 फीसदी रोगियों के पाचनतंत्र एवं विचारतंत्र में होने वाली उथल-पुथल एवं गड़बड़ियां जिम्मेदार होती हैं। शेष 10 फीसदी में से जो दुर्घटनाओं के परिणाम होते हैं, उनके पीछे भी विचारतंत्र जिम्मेदार होता है। बहुत कम ऐसे मामले होते हैं, जिनमें रोगी पाचनतंत्र एवं विचारतंत्र की भूमिका के बिना अस्पताल में भर्ती होता है।

अत: समझने वाली बात यह है कि शरीर में प्रत्यक्ष प्रकट बीमारियों का इलाज करवाने से पूर्व अपने पाचनतंत्र एवं विचारतंत्र का स्वयं अवलोकन करें और इस तरह की तकलीफों को छिपायें नहीं, बल्कि समस्त हालातों को अपने चिकित्सक को विस्तार से बतायें। अन्यथा किन्हीं अपवादों को छोड़कर पाचनतंत्र एवं विचारतंत्र को ठीक किये बिना स्थायी स्वास्थ्य लाभ बहुत मुश्किल है!

डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश', HCF&MDC
(Health Care Friend and Marital Dispute Consultant)
स्वाथ्य रक्षक सखा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार
Health WhatsApp हेल्थ वाट्सएप: 8561955619
Mobile No. मोबाईन नम्बर: 9875066111 (10AM to 10PM)
Jaipur, Rajasthan, 04 दिसम्बर, 2017
धूम्रपान छोड़ना चाहते हैं?





वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि जब कोई व्यक्ति एक सिगरेट पीता है तो वह ज़िंदगी के 7 मिनट खो देता है। सिगरेट पीने वालों के नजदीक रहने वालों को इससे भी अधिक खतरा है। अत: सिगरेट पीने वालों से सहानभूति और दूरी बनाये रखें। उनके पास जीने के लिये अधिक समय नहीं बचा है।

*बीड़ी, सिगरेट, तम्बाकू छोड़ना है तो सम्पर्क करें।*

डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' HCF&MDC, 04.12.1217 
(Health Care Friend and Marital Dispute Consultant)
Health WhatsApp: 8561955619
Mobile No.: 9875066111 (10AM to 10PM)
होमोसेक्सुअल पुरानी बात, ये ‘डिजिसेक्सुअल’ का ज़माना

रोमांटिक पार्टनर के न होने पर पश्चिमी देशों में रोबोट के साथ सेक्स कॉमन होता जा रहा है. यहां तक कि वास्तविक जिंदगी के साथी से भी ऊपर अब सेक्स रोबोट को तरजीह दी जा रही है.

हालांकि हालिया शोध कहता है कि कुछ वक्त बाद ऐसा भी हो सकता है कि ज्यादातर लोग 'डिजिसेक्सुअल' इंसानों में तब्दील हो जाएं, जिनकी शारीरिक और भावनात्मक जरूरतें वर्चुअल यानी आभासी दुनिया से ही पूरी हो जाएं.

कनाडा की यूनिवर्सिटी ऑफ मेनिटोबा ने यह शोध किया, जो जर्नल ऑफ सेक्सुअल एंड रिलेशनशिप थैरेपी में छपी है.

शोधकर्ता नील कैकऑर्थर कहते हैं कि अब यह कहा जा सकता है कि हम वर्चुअल सेक्स की दुनिया में प्रवेश कर चुके हैं. जैसे-जैसे तकनीक और समृद्ध होती जाएगी, हममें से बहुत से लोगों को अहसास होगा कि हम डिजिसेक्सुअल हैं.

डिजिसेक्सुअल यानी वे लोग जो तकनीक के जरिए सेक्स को प्राथमिकता देते हैं.

शोध बताता है कि चूंकि लोग सेक्स रोबोट को अपनी जरूरतों और पसंद के अनुसार कस्टमाइज करवाते हैं तो वे इसके साथ ज्यादा सहज महसूस करते हैं और कई बार इसके साथ ऐसे प्रयोग भी कर सकते हैं जो किसी जीते-जागते इंसान के साथ करना मुश्किल हो सकता है.

मसलन ये रोबोट इस तरह से डिजाइन किए जाते हैं कि ये इंसानों की सेक्सुअल जरूरतों की पूर्ति कर सकें. पसंद के अनुसार कस्टमर इन सेक्स रोबोट को ऑर्डर भी कर सकते हैं.

कई कस्टमर रंग, आंखों के रंग, वजन, बाल जैसी चीजों में भी अपनी पसंद से बदलाव करवाते हैं.

इन हाईटेक सेक्स डॉल्स की त्वचा सिलिकॉन की बनी होती है जो छूने पर इंसानों की तरह ही गर्म महसूस होती है और ये प्रतिक्रिया भी करती हैं.

चूंकि ये रोबोट होते हैं, जो अपने साथ किसी भाव को लेकर नहीं आते, सोच-समझ नहीं सकते. इसलिए उनके साथ सेक्स आसान हो जाता है. रोबोट्स के पास आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस होती है और ये छूने पर प्रतिक्रिया भी करते हैं, इसलिए बहुत से लोगों का मानना है कि ये इंसानों से बेहतर सेक्स पार्टनर साबित हो सकते हैं.

दूसरी ओर डिजिटल सेक्स के लिए लोगों का बढ़ता क्रेज और इसपर हो रहे शोध डराते हैं.

इससे इंसानी दूरियां बढ़ने का शुरुआती संकेत मिल रहा है. चूंकि लोगों के पास एक-दूसरे के साथ बिताने को वक्त नहीं, या साथ भी हैं तो कई चीजों में उलझे हुए हैं तो शारीरिक रिश्ते बनाने में भी दिक्कत लाजिमी है. बढ़ता ठंडापन कोई ऐसा दिन भी ला सकता है, जब इंसान अपनी हर जरूरत के लिए रोबोट तक सीमित रह जाए.
स्रोत: hindi.news18.com से साभार। Link
पित्ताशय/गाल ब्लैडर/Gallbladder पथरी: होम्योपैथिक उपचार

डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
पित्त, पित्ताशय, पित्त, पित्त पथरी और आयुर्वेदिक उपचार के बारे में 'पित्ताशय/गाल ब्लैडर/Gallbladder पथरी: आयुर्वेदिक उपचार' शीर्षक पूर्व प्रकाशित लेख में जानकारी दी जा चुकी है। पित्ताशय की पथरी के उपचार में आयुर्वेद के साथ-साथ होम्योपैथी की दवाईयों (Medicines) से भी आश्चर्यजनक परिणाम मिलते हैं। अत: जनहित में पित्ताशय की पथरी के होम्योपैथिक उपचार हेतु स्वास्थ्य जनजागरण हेतु संक्षिप्त जानकारी प्रस्तुत है। कृपया इसे पढकर खुद अपना इलाज करने का रिस्क नहीं लें।



सबसे पहले यह जानना बहुत जरूरी है कि होम्योपैथी के मूल सिद्धान्त के अनुसार, होम्योपैथी में किसी भी रोग की कोई सुनिश्चित दवाई नहीं होती है। केवल इतना ही नहीं, बल्कि दो रोगियों की एक जैसी बीमारी के लिये अलग-अलग दवाई दी जा सकती है और एक ही दवाई से एक या एकाधिक रोगियों के अनेक रोगों को ठीक किया जा सकता है। इसकी मूल वजह यह है कि होम्योपैथी में रोग का नहीं, बल्कि रोगी का इलाज किया जाता है। रोगी के लक्षणों के अनुसार दवाई का चयन/सिलेक्शन करके रोगी की सभी मानसिक एवं शारीरिक बीमारियों का इलाज किया जा सकता है। इसी सिद्धान्त के अनुसार पित्ताशय की पथरी से पीड़ित रोगियों के प्रमुख लक्षणों के अनुसार प्रस्तुत मुख्य-मुख्य होम्योपैथिक दवाईयों को उनके नाम के साथ लिखे गये लक्षणों से मिलान करके उपयोग में लाया जाता है। लेकिन याद रहे किसी भी रोग के इलाज के लिये किसी भी होम्योपैथिक दवाई के लक्षणों का मिलान कर लेनाभर पर्याप्त नहीं होता है। रोग निदान के लिये रोगी की प्रतिरोधक शक्ति, स्वभाव, नशे-खाने-पीने-सोने-टेंशन की आदतें आदि सम्पूर्ण लक्षणों को जानने के बाद ही होम्योपैथिक दवाई की उचित शक्ति और मात्रा का निर्धारण किया जा सकता है। यह कार्य कोई अनुभवी होम्योपैथ ही कर सकता है।

1. लाइकोपोडियम (Lycopodium): लक्षण-पेट के ऊपरी और दाहिने हिस्से में ऐसा दर्द होना जो तेलयुक्त पदार्थ खाने से बढ़ना। रोगी को बार-बार मलत्याग की इच्छा होती है। उसके पेशाब में ईंट के चूरे के समान लाल रंग के बारीक कण निकलते हैं। सामान्यत: रोगी पेट का साफ नहीं होना।

2. बर्बेरिस वल्गेरिस (Berberis Vulgaris): लक्षण-लीवर के नीचे स्थित पित्ताशय से दर्द शुरू होकर पेट के निचले हिस्से या पाँव तक पहुँच जाता है। दर्द वाले स्थान पर दबाने और हरकत करने अर्थात हल-चल करने से दर्द का बढ़ जाता है। दर्द से राहत पाने के लिये रोगी दाहिनी ओर झुकता हुआ देखा जा सकता है। बार-बार पेशाब करने की इच्छा के साथ-साथ पेशाब में पीले या चमकदार लाल रंग के चूरे के बारीक कण निकलते हैं। पेशाब कर लेने के बाद भी रोगी को ऐसा महसूस होना, जैसे मूत्राशय में कुछ पेशाब शेष रह गया हो।

3. कल्केरिया कार्बोनिका (Calcarea Carbonica): लक्षण-यह दवाई मोटे और थुलथुले लोगों के लिये अधिक उपयुक्त है। पित्ताशय में तीव्र दर्द होना। खट्टी डकारें आना और खट्टे पित्त की उलटी भी होना। अधिक पसीना आना। सिर में अत्यधिक पसीना आना, लेकिन रोगी को ठंडी हवा सहन न होना। जबकि खाने-पीने में गरम पदार्थ अच्छे नहीं लगना और ठंण्डे पदाथों की चाहत। इसके अलावा अंडा, पेंसिल, चाक, नींबू, खड़िया आदि खाने की विशेष चाहत/इच्छा।

4. नक्स वोमिका (Nux Vomica): नोट: रोगियों के शरीर में आधुनिक चिकित्सा या आयुर्वेद की दवाईयों के शेष रहे प्रभाव/दुष्प्रभावों को नष्ट करने के लिये सामान्यत: इस दवा का उपयोग किया जाता है। लक्षण-अनियमित दिनचर्या वाले तुनक-मिजाज (Short Tempered) लोगों, जिनके खाने, पीने, जागने और सोने का कोई निश्चित समय तय नहीं होता। उन्हें यह दवाई उपयोगी होती है। ऐसा लगता है जैसे पित्ताशय की पथरी, पित्त-नली में कहीं अटक गयी है। जिसका बार-बार दर्द उठ रहा है। भूख कम लगना। कभी कब्ज होना तो कभी पतले दस्त हो जाना। बार-बार मलत्याग की इच्छा होना, लेकिन जाने पर मलत्याग न होना या बहुत ही कम मलत्याग होना। मलत्याग के लिये बैठने पर ऐसा लगना जैसे थोड़ा और-थोड़ा और मलत्याग होगा, लेकिन मलत्याग होता नहीं है। यही लक्षण पेशाब के समय भी हो सकता है। अनेक बार पेशाब बूंद-बूंद करके आता है। पेशाब में खून आना। खांसने से पेशाब निकल जाना।

5. चियोनैंथस वर्जिनिका (Chionanthus Virginica): लक्षण-आंखों की श्लेष्मा झिल्ली में पीलापन। जीभ पर पीली परत जमना। मुंह सूखा होना, किन्तु फिर भी पानी पीने के बाद भी सूखेपन के अनुभव में राहत नहीं। पेट में ऐसा दर्द होना जो पित्ताशय से मूत्राशय तक बढ़ा हुआ मालूम होता है। रोगी को पीलिया हो सकता है। सलेटी रंग का मलत्याग। पेशाब गाढ़े पीले रंग का आना। त्वचा में पीलापन/पिलांसा सा दिखना।

6. चेलिडोनियम मेजस (Chelidonium Majus): लक्षण-पीठ के पीछे की ओर दाहिने कन्धे की तरफ जो अस्थि-फलक है, उसके नीचे लगातार दर्द होते रहना। रोगी को भूख न रहे या कम लगे, जी मिचलाये और पित्त की उल्टी हो। पित्त की पथरी जब पित्ताशय छोटी-सी नलिकाओं में फंस जाती है, तो इससे भयंकर पीड़ा होती है। चेलिडोनियम इस रुकावट को खोल देती है और पित्त-पथरी निकल जाती है। विशेष लक्षण पीड़ित व्यक्ति ठंडा पानी नहीं पीना चाहता सकता। लेकिन गर्मागर्म पानी या पेय हो तो उसे सुहाता है। वह खाली पेट नहीं रह सकता। कुछ न कुछ खाने को अवश्य चाहिये।

उपरोक्त के अलावा रोगी के लक्षणों के अनुसार चाइना (China), फॉस्फोरस (Phosphorus), मेन्था पिपेरिटा (Mentha Piperita), कार्डुअस मेरिएनस (Carduus Marianus), कोलेस्टेरीनम (Cholesterinum) इत्यादि का भी उपयोग किया जा सकता है।

उपरोक्त के अलावा होम्योपैथी की छोटी बहन के नाम से जानी जाने वाली बॉयोकेमिक दवाईयां (जिन्हें 12 साल्ट के नाम से जाना जाता है) भी लक्षणानुसार पित्ताशय की पथरी के इलाज में महत्वूपर्ण साबित हो सकती हैं।
नोट:
1-यहां प्रस्तुत सामग्री के आधार पर, बिना किसी डॉक्टर की सलाह के खुद ही, अपना उपचार करना उचित नहीं है।
2-यदि उक्त सामग्री आपको उपयोगी लगे तो इसे जनहित में अपने जान-पहचान वाले लोगों के साथ साझा किया जा सकता है।
डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
Dr. Purushottam Meena 'Nirankush'
स्वाथ्य रक्षक सखा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार
HCF&MDC (Health Care Friend and Marital Dispute Consultant)
Health WhatsApp हेल्थ वाट्सएप: 8561955619
Mobile No. मोबाईन नम्बर: 9875066111
Jaipur, Rajasthan 03 दिसम्बर, 2017
पित्ताशय/गाल ब्लैडर/Gallbladder पथरी: आयुर्वेदिक उपचार

वर्तमान में पित्ताशय (Gallbladder) या पित्त (Bile) की थैली में पथरी (Stone) बनने की समस्या तेजी से बढती जा रही है। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान (Modern Medical Science) के 100 फीसदी डॉक्टर पित्त पथरी का एक मात्र इलाज आॅपरेशन ही बतलाते हैं। जबकि आयुर्वेद और होम्योपैथी की मदद से अधिकतर मामलों में पित्त पथरी की तकलीफ से बिना ऑपरेशन (Without Operation) के भी मुक्ति पायी जा सकती है।

पित्ताशय/पित्त की थैली/गाल ब्लैडर/Gallbladder क्या है?
शरीर में नाशपाती के आकार का थैलीनुमा यह अंग लीवर (Lever) के नीचे पाया जाता है। सामान्यतः इसका कार्य पित्त को संग्रहित/इकट्ठा करना एवं उसे गाढ़ा करना है। आम धारणा के विपरीत पित्ताशय स्वयं पित्त नहीं बनाता है। अर्थात पिताशय पित्त का निर्माण नहीं करता है।




क्या होता है पित्त?
पित्त एक पाचक (Digestive) रस है जो कि लीवर द्वारा बनाया जाता है। मुख्यत: पित्ताशय में इस जमा पित्त का उपयोग छोटी आंत में फैटी अर्थात वसायुक्त खाद्य पदार्थों को तोड़ने और उनको पचाने के लिए होता है।

पित्त का स्वरूप:
शहद या शक्कर की गाढी चाशनी का जो तरल रूप होता है, पित्ताशय/पित्त की थैली में जमा पित्त की ऐसी ही कल्पना करके, पित्त के स्वरूप को समझा जा सकता है।

पित्त के पित्त पथरी में परिवर्तित होने के कारण:
निम्न प्रमुख कारणों से पित्त कठोर, सूखा या सख्त स्वरूप धारण करने पर पित्त पथरी में परिवर्तित हो जाता है:-

1. कॉलेस्ट्रॉल: पित्त की पथरियों के बनने पीछे शरीर में बढे हुए कॉलेस्ट्रॉल की प्रमुख भूमिका होती है। यही वजह है कि जांच करने पर पित्त की पथरी में 50 से 95 फीसदी कॉलेस्ट्रॉल पदार्थ पाया जाता है।
2. अनियमित भोजन: समय पर भोजन नहीं करने के कारण, भोजन को पचाने के लिये जमा पित्त से पित्ताशय लंबे समय तक भरा रहता है। जिसका समय पर और नियमित उपयोग नहीं होते रहने के कारण संग्रहित पित्त का, पित्त की थैली या पित्ताशय में जमाव शुरू हो जाता है, जो धीरे-धीरे कठोर होता जाता है और अन्त में पथरी का रूप धारण कर लेता है।
3. आन्तरिक संक्रमण (Internal Infection): किसी आन्तरिक संक्रमण/इंफेक्शन के कारण पित्त, जिसे पाचक रस भी कहा जाता है, वह अधिक गाढा हो जाता हैं। कालांतर में यही संग्रहित गाढा पित्त, पित्त की पथरी का रूप धारण कर लेता है।
4. मोटापा (Obesity): मोटापे से ग्रस्त लोगों के पित्त में कॉलेस्ट्रॉल की मात्रा अधिक होने के कारण, पित्ताशय में संग्रहित पित्त रस के सूखने की सम्भावना अधिक होती है। इस कारण मोटे लोगों में और विशेषकर मोटी महिलाओं में पित्त की पथरी बनने की संभावना अधिक होती है।
5. कम उम्र में अधिक प्रजनन और ​गर्भ निरोधक गोली: औरतों में कम उम्र में ही अधिक बच्चे जनने के कारण और, या अधिक समय तक एलोपैथिक गर्भ-निरोधक गोलियां खाने के कारण भी पित्ताशय में पथरी बनती देखी गयी है। अथवा इन हालातों में औरतों के पित्ताशय में पथरी बनने की प्रक्रिया तेज हो जाती है।
6. अन्य कारण: डायबिटीज (मधुमेह), तेजी से वजन घटना या घटाना, डायटिंग-अधिक भूखा रहना, आनुवांशिक खून संबंधी बीमारियाँ और कुछ भौगोलिक एवं जलवायू परिस्थितियाँ।

पित्त पथरी के प्रमुख लक्षण:
1. पित्ताशय में पथरी होने पर भी बहुत से मामलों में जीवनपर्यन्त किसी प्रकार के लक्षण प्रकट नहीं होते हैं।
2. पित्ताशय में सूजन आ जाती है। जिसके कारण पीड़ित व्यक्ति को बिना कोई कारण हल्का या कभी-कभी तेज बुखार रहने लगता है।
3. रोगी को अपना यकृत एवं पित्ताशय बढा हुआ अनुभव होता है। जिसे छूने पर पित्ताशय के स्थान पर उदर में दाईं तरफ दर्द होता है। साथ ही पित्ताशय में बिना छुए भी दर्द होता रहता है।
4. पित्ताशय में पित्त इकठ्ठा हो जाने के कारण, पित्तविसर्जन नली में, पथरी के कारण रुकावट आ जाती है। जिसके कारण पीलिया हो जाता है। अकसर पीलियाग्रस्त लोगों को पित्त पथरी होने की सम्भावना बनी रहती है।
5. जी मिचलाता रहता है। रोगी बार-बार उलटी/वोमिट (Vomit) करना चाहता है, लेकिन उसे उलटी होती नहीं है। इस कारण वह भूख होने पर भी भोजन करने से कतराता रहता है।

पित्ताशय की पथरी का उपचार:
भ्रांति के कारण तुरंत आॅपरेशन: पित्ताशय की पथरी के बारे में यह भ्रांति फैली या जानबूझकर फैलाई हुई है कि एक बार पित्ताशय में पथरी बनना शुरू हो गया या पथरी बन गयी तो उसका कोई इलाज ही नहीं है। इसलिये पिताशय का आॅपरेशन ही एक मात्र उपचार है। इस भ्रांति के कारण अधिकतर रोगी तुरंत आॅपरेशन करवा लेते हैं और फिर जीवनभर भुगतते रहते हैं। इसका मूल कारण है-आयुर्वेद और होम्योपैथी जैसी कारगर चिकित्सा पद्धतियों के प्रति केन्द्र सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय का सौतेला रवैया। जिसके चलते आयुर्वेद और होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धतियों की विशेषताओं का पर्याप्त प्रचार-प्रसार नहीं हो पाता है और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के निष्कर्षों को ही अन्तिम सत्य मान लिया जाता है। जबकि कोई भी चिकित्सा पद्धति सम्पूर्ण नहीं है।
आयुर्वेदिक उपचार:
1. गुडहल (Hibiscus): गुडहल के फूलों का शुद्ध और आॅर्गेनिक पाउडर 1 चम्मच/टी स्पून (पथरी की अवस्था और आकार के अनुसार उचित मात्रा में) रात को सोते समय खाना खाने के कम से कम एक डेढ़ घंटा बाद गुनगुने पानी के साथ फंकी लेेते रहें। इसका स्वाद हलका कड़वा होता है। यद्यपि बुहत अधिक कड़वा भी नहीं होता है। अत: इसके कड़वे स्वाद को सहने के लिये अपने आप को तैयार रखें। इसके सेवन के बाद कुछ भी खाना पीना नहीं है। पाउडर लेने के बाद सीने में अचानक बहुत तेज़ दर्द हो सकता है। जैसे हार्ट अटैक आ जायेगा। यह दर्द पथरी टूटने का हो सकता है। इसके प्रयोग के दौरान पालक, टमाटर, चुकंदर, भिंडी का सेवन न करें। अगर पित्त की पथरी बड़ी है तो पथरी गलने/पिघलने या टूटते समय दर्द भी हो सकता है। इसलिये अपने स्वैच्छिक निर्णय से ही आप इसका प्रयोग को करें।

2. गुडहल फूल पाउडर की उपलब्धता: गुडहल के फूलों का पाउडर बहुत आसानी से पंसारी (आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी-दवा विक्रेता) के यहां मिल जाता है। यद्यपि गुडहल का शुद्ध और आॅर्गेनिक फूल पाउडर मिलना अंसभव नहीं, लेकिन बहुत मुश्किल अवश्य है। जयपुर स्थित हमारे निरोगधाम पर लगे गुडहल के पेड़ों में खिलने वाले फूलों से 100 प्रतिशत शुद्ध आर्गेनिक गुडहल फूल का पाउडर तैयार किया जाता है। जिसे केवल हमारे द्वारा उपचारित रोगियों के लिये ही दिया जाता है। शुद्ध आर्गेनिक गुडहल फूल का पाउडर ट्रेडिंग/व्यापार के लिये उपलब्ध नहीं है।

3. नाशपाती का जूस (Pear Juice): नाशपाती में मौजूद पैक्टिन (Pectene), कॉलेस्ट्रॉल (Cholesterol) को बनने और जमने से रोकता है। अत: एक गिलास गुनगुने पानी में, एक गिलास नाशपाती का जूस और दो चम्मच शहद (Honey) मिलाकर पीएं। इस जूस को एक दिन में तीन बार पीना चाहिए। इसका लगातार सेवन करने से पित्ताशय की थैली की पथरी पिघलकर निकल जाती है। इसके अलावा भी नाशपाती के बहुत से फायदे हैं।
4. सेब का जूस+सिरका (Apple Juice+Vinegar): वैज्ञानिक अध्ययनों से पता चला है कि सेब में पित्त की पथरी को गलाने का प्राकृतिक गुण होता है। यद्यपि अनुभव यह प्रमाणित करते हैं कि सेब के जूस को सेब के सिरका के साथ लेने पर यह ज्यादा असरकारी होता है। सेब में मौजूद प्राकृतिक मैलिक एसिड (Mallic Acid) पथरी को प्राकृतिक तरीके से पिघलाने में मदद करता है तथा सेब का सिरका लीवर में कॉलेस्ट्रॉल (Cholesterol) नहीं बनने देता, जो पित्ताशय में पथरी बनने के लिए जिम्मेदार होता है। सेब जूस+सिरका का यह घोल न केवल पथरी को पिघलाता है, बल्कि साथ ही साथ पथरी को दुबारा बनने से भी रोकता है और पथरी के दर्द से भी राहत प्रदान करता है। अत: एक गिलास सेब के जूस में, एक चम्मच सेब का सिरका मिलाकर, इस घोल को ठीक नहीं होने तक नियमित रूप से दिनभर में दो बार पीना चाहिये।

5. पुदीना (Mint) का काढा या पुदीने की चाय: आयुर्वेद में पुदीना को पाचन के लिए सबसे अच्छी घरेलू औषधि (Home Remedy) माना जाता है जो पित्त वाहिका तथा पाचन से संबंधित अन्य रसों के निर्माण में सहयोगी बनकर उन्हें बढ़ाता है। पुदीना में तारपीन (Terpenes) विद्यमान होता है जो कि पथरी को प्राकृतिक तरीके से गलाने में सहायक माना जाता है। इसी वजह से पुदीने की पत्तियों से बनी चाय गॉल ब्लैडर पथरी को पिघलाने में सहायक हो सकती है। अत: एक गिलाश पानी को गरम करें, इसमें ताजी या सूखी पुदीने के पत्तियों को उबालें। अर्थात काढा बनायें। हल्का गुनगुना रहने पर पानी को छानकर इसमें एक चम्मच शहद मिलाएं और इसे चाय की भांति पियें। इस काढे/चाय को दिन में दो बार पिया जा सकता है।

6. जांच: आयुर्वेदिक इलाज करवायें तो प्रत्येक 45 दिन बाद पथरी की वास्तविक स्थिति को जानने के लिये अल्ट्रासाउण्ड/Ultrasound जांच करवाते रहना जरूरी है। अगर उपरोक्त में से किसी भी उपचार से पित्ताशय में सूखा पित्त, फिर से पिघल जाये तो आॅपरेशन की जरूरत ही नहीं पड़ेगी!

नोट:
1-यहां प्रस्तुत सामग्री के आधार पर, बिना किसी डॉक्टर की सलाह के खुद ही, अपना उपचार करना उचित नहीं है।
2-लेख काफी लम्बा हो गया है। अत: पित्ताशय की थैली के होम्यापैथिक उपचार के बारे में अलग से उपयोगी सामग्री प्रस्तुत की जायेगी।

डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
स्वाथ्य रक्षक सखा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार
Dr. Purushottam Meena 'Nirankush'
HCF&MDC (Health Care Friend and Marital Dispute Consultant)
हेल्थ वाट्सएप: 8561955619
मोबाईन नम्बर: 9875066111
02 दिसम्बर, 2017
शीघ्रपतन?

स्त्री-पुरुष के यौन सम्बन्धों के दौरान, स्त्री की यौनतृप्ति/संतुष्टि से पहले ही पुरुष का वीर्यपात/वीर्य स्खलित हो जाने को आम बोलचाल में शीघ्रपतन कहा जाता है। शीघ्रपतन के लिये अंग्रेजी में तीन टर्म यूज की जाती हैं। (ED=Early Discharge/अर्ली डिस्चार्ज or EE=Early Ejaculation/अर्ली इजाकुलेशन or PE=Premature Ejaculation/प्रीमैच्योर इजाकुलेशन)।

एक अध्ययन के मुताबिक हर एक पुरुष को अपने जीवन काल में कभी न कभी शीघ्रपतन की समस्या का सामना करना ही पड़ता है। 30 से 40 फीसदी पुरुषों को जीवनभर शीघ्रपतन की समस्या का सामना करना पड़ता है। इसलिए अगर कोई पुरुष शीघ्रपतन की समस्या से परेशान हैं तो ऐसे पुरुष को अधिक परेशान होने की जरूरत नहीं होनी चाहिये। क्योंकि कोई भी अकेला पुरुष शीघ्रपतन की समस्या से नहीं जूझता है, बल्कि संसार के एक-तिहाई से अधिक पुरुष शीघ्रपतन की समस्या से परेशान हैं। लेकिन पुरुषों की सबसे बड़ी शीघ्रपतन की समस्या के बारे में खुलकर डॉक्टर से बात नहीं करना। या गारण्टी देकर लूट-खंसोट करने वाले डॉक्टरों के चक्कर में फंसना। इस समस्या के बने रहने का सबसे बड़ा कारण है।

शीघ्रपतन किसे कहते हैं?

जब एक पुरुष अपनी यौन सहयोगी स्त्री की योनि में लिंग को प्रवेश करवाकर लिंग का योनि में घर्षण करता है, तो घर्षण शुरू करने के बाद अत्यल्प समय में ही वीर्य स्खलित हो जाने को सामान्यत: शीघ्रपतन कहा जाता है।
या
पुरुष या स्त्री को योन संतुष्टि मिलने से पहले ही वीर्य स्खलित हो जाना भी शीघ्रपतन कहा जा सकता है।
या
योनि में लिंग को प्रवेश करवाने से पहले ही फोरप्ले अर्थात रोमांस के दौरान ही पुरुष के लिंग से स्वत: वीर्यपात हो जाने को शीघ्रपतन कह सकते हैं।
या
कामुक बातचीत, कामुक दृश्य, कामुक मूवी/फिल्म या किसी आकर्षक महिला को देखने या उसकी कल्पना करने से ही लिंग से स्वत: वीर्य निकल जाने को भी शीघ्रपतन कह सकते हैं।

वीर्य स्खलन की समय सीमा क्या होनी चाहिये?
योनि में लिंग प्रवेश कराने के बाद कितने समय में लिंग से वीर्य स्खलित होना आदर्श स्थिति मानी जानी चाहिये? इस विषय में विश्वभर के सैकड़ों वैज्ञानिक ने अनेकानेक शोध और अध्ययन करने के बाद वे इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि वीर्य स्खलन की कोई निश्चित समय सीमा निर्धारित करना असम्भव है। क्योंकि शोध और अध्ययन के दौरान निम्न तथ्य सामने आये-
  • 1. एशिया भारत जैसी जलवायु में सामान्यत: 1 से 3 मिनट में पुरुष डिस्चार्ज हो जाते हैं।
  • 2. अपवादस्वरूप 3 मिनिट से अधिक समय तक डिस्चार्ज नहीं होने वाले पुरुषों की सेक्स सहयोगी स्त्री को भी अनेकों बार पूर्ण योन सन्तुष्टि नहीं मिलती है।
  • 3. कुछ स्त्रियों को 1 मिनट से भी कम समय में पूर्ण योनतृप्ति मिल जाती है।
स्त्री की योन तृप्ति क्या है?
यह एक ऐसा सवाल है, जिसके बारे में स्त्रियों में भी मतैक्य का अभाव है। विश्वप्रसिद्ध महिला सेक्स-विशेषज्ञ मैरी स्टॉप्स का कहना है कि अधिकतर स्त्रियां योन सन्तुष्टि के बारे में अपनी राय व्यक्त करते समय भ्रमित होती हैं। उनका कहना है कि यदि दस महिलाओं से योनतृप्ति के अनुभव को शब्दों में व्यक्त करने के बारे में पूछा जाये तो तकरीबन सभी के अनुभव भिन्न-भिन्न होंगे। इसका कारण स्पष्ट करते हुए मेरी स्टॉप्स कहती हैं कि प्रत्येक स्त्री का सेक्स ज्ञान, सेक्स अनुभव, सेक्स रुचि, सेक्स परफॉर्मेंश आदि का अनुभव अलग-अलग होता है। क्योंकि स्त्री को पुरुष की भांति सेक्स के दौरान वीर्य या ऊर्जा स्खलन जैसा शारीरिक अनुभव नहीं होता। बल्कि स्त्री के लिये सेक्स का आनंद मानसिक पहले और शारीरिक बाद में है। कुछ अन्य स्त्री सेक्स एक्सपर्ट का कहना है कि सेक्स के दौरान स्त्री को केवल योनि में लिंग के घर्षण करने से ही यौनतृप्ति नहीं मिलती है, बल्कि स्त्री के अंग-अंग में यौनानंद की प्राप्ति होती है, बशर्ते उसका पुरुष साथी यौन कला में प्रवीण हो?

सम्भोग को समान भोग बताना कितना सही?

एक आदर्श सम्भोग में, स्त्री-पुरुष दोनों एक साथ समान रूप से, यौनानंद प्राप्त करते हैं। इसी कारण इस शारीरकि क्रिया को सम्भोग कहा जाता है।
In an ideal sexual intercourse, both men and women receive equally, Sexual pleasure. For this reason, this physical activity is called SAMBHOG.

स्त्री की यौन संतुष्टि को पश्चिमी सेक्स एक्सपर्ट अंग्रेजी में आर्गेज्म/Orgasm कहते हैं। जबकि मैं इसके लिये हिन्दी में यौनतृप्ति या सेक्सुअ फुलफिलमेंट/Sexual Fulfillment लिखना अधिक उपयुक्त समझता हूं। साथ ही सम्भोग की उक्त धारणा केवल कागजों तक सीमित है। एक दशक से अधिक समय तक लगातार दाम्पत्य विवाद सलाहकार के रूप में सेवाएं देने के दौरान अधिकतर स्त्रियों ने मुझे यह बताया कि वे यौन-सम्बन्धों के दौरान पुरुष से योनि में केवल लैंगिक घर्षण ही नहीं चाहती हैं, बल्कि सेक्स प्रारम्भ करने से पूर्व, सेक्स के दौरान और सेक्स के बाद भी पुरुष की सम्पूर्ण मानसिक एवं शारीरिक सक्रियता चाहती हैं। जबकि पुरुष की मानसिकता इससे ठीक विपरीत या भिन्न होती है।

मैं मेरे अनेक लेखों में अनेक बार इस स्थिति को अग्रलिखित शब्दों में लिखता आया हूं।

'स्त्री पुरुष के समक्ष समर्पण करती है, पुरुष का प्यार पाने के लिये। जबकि पुरुष प्यार करता है, स्त्री का शरीर पाने के लिये।'

व्यवहार में बहुत कम ऐसा होता है, जबकि पुरुष के वीर्य स्खलन के साथ ही स्त्री को यौन तृप्ति मिले।

शीघ्रपतन का गर्भधारण से सम्बन्ध

शीघ्रपतन के कारण परेशान अनेक पुरुषों के मनोमस्तिष्क में यह गलत धारणा अन्दर तक बैठ जाती है कि शीघ्रपतन के कारण वे पिता नहीं बन सकेंगे। जबकि गर्भ धारण का शीघ्रपतन से काई सम्बन्ध नहीं है। गर्भधारण के लिये सेक्स के दौरान वीर्य का अन्दर योनि में स्खलन होना ही पर्याप्त होता है। अत: शीघ्रपतन के कारण पिता नहीं बन सकने का भय निराधार है।

शीघ्रपतन दाम्पत्य बिखराव का कारण

इसमें कोई संदेह नहीं कि पुरुष जब स्त्री को सम्पूर्ण रूप से भावनात्मक और शारीरिक तृप्ति देने में असमर्थ है तो स्त्री को यौन-क्रिया के दौरान पुरुष की शारीरिक सक्षमता तो उम्मीद होती ही है। ऐसे हालात में स्त्री पर्याप्त समय तक लैंगिक यौन घर्षण की उम्मीद करती है। जिससे उसे उम्मीद रहती है, यदा-कदा उसे यौनतृपित मिल सके। अनेक स्त्रियां अपने अनुभवों में बतलाती हैं कि बेशक उनका डिस्चार्ज नहीं होता, लेकिन जब पुरुष उन्हें सम्पूर्णता से चाहता है। प्यार करता है और मानसिक तथा शारीरिक योगदान करता है तो लम्बे लैंगिक योन घर्षण के बाद, योनि में ऐसी अनुभूति होती है, जैसे योनि का हर एक ऊतक शि​थिल हो गया। या एक फुहार सी निकलती अनुभव होती है। या ऐसा लगता है, जैसे कोई जलता हुआ गर्म अंगारा एकदम से ठंडा हो गया हो।

इन दिनों जबकि विवाह पूर्व और विवाहेत्तर यौन सम्बन्ध सामान्य बात हो चुकी है। ऐसे में यदि किसी स्त्री को जब कभी उक्त या ऐसी ही सम्पूर्ण यौन अनुभूति या तृप्ति अपने पति या प्रेमी से प्राप्त हो जाती है, तो उसे हर बार सेक्स में इसी प्रकार की अनुभूति की उम्मीद रहती है। जिसकी प्राप्ति नहीं होने पर वह अपने पति से नाखुश रहने लगती है और पति को नाकारा, नामर्द और सेक्स क्रिया में असफल मानकर चिड़चिड़ी भी हो जाती है। इन हालातों में शीघ्रपतन दाम्पत्य बिखराव का कारण भी बन सकता है।

शीघ्रपतन के कारण:
उपरोक्त पृष्ठभूमि के होते हुए भी बहुत से पुरुषों को वास्तव में शीघ्रपतन की समस्या होती है। जिसके निम्न प्रमुख कारण हैं:-
  • 1. स्त्री-पुरुष की प्रकृतिदत्त भिन्न मनोस्थिति। पुरुष शीघ्रता से सब कुछ पा लेना चाहता है, जबकि स्त्री आराम से सम्पूर्ण तृप्ति की प्रतीक्षा करती है।
  • 2. वास्तविक एवं व्यावहारिक यौन शिक्षा का अभाव।
  • 3. अपरिहार्य कारणों से लम्बे समय बाद सेक्स करना।
  • 4. शीघ्रपतन हो जाने की आशंका का भय।
  • 5. अपनी पत्नी को संतुष्ट नहीं कर पाने की आशंका।
  • 6. तनाव, मानसिक दबाव या क्लेशमय स्थिति में सेक्स।
  • 7. डिप्रेशन के दौरान सेक्स करना।
  • 8. सेक्स के दौरान किसी के देखे/पकड़े जाने का भय।
  • 9. दिमांग में इस बात का भय कि लम्बे समय तक स्खलन को रोकना मुश्किल होगा।
  • 10. सेक्स के प्रति नकारात्मक या अपराधबोधात्मक विचार।
  • 11. नासमझ या नापसंद या बेमेल यौन—साथी।
  • 12. स्त्री को दुर्गंध फैलाने वाली ल्यूकोरिया की बीमारी।
  • 13. सेक्स के दौरान स्त्री का सपोर्ट नहीं मिलना।
  • 14. हार्मोंस की गड़बड़।
  • 15. पुरुष का प्रोस्टेट, थॉइरॉइड या डाईबिटीज से पीड़ित होना।
  • 16. पुरुष को अपने लिंग के आकार को लेकर भ्रांति होना।
  • 17. पुरुष को फैंफड़ों सम्बंधी कोई बीमारी होने के कोरण, अधिक समय तक लैंगिक यौन घर्षण करने से सांस फूल जाने का भय बने रहना।
  • 18. पुरुष मस्तिष्क के रसायनों के असामान्य/Abnormal level of brain chemicals स्तर होना।
  • 19. सेक्स कलाओं की अज्ञानता।
  • 20. लिंग और योनि के आकार में अत्यधिक असमानता।
इत्यादि।
नोट: शीघ्रपतन का उपचार अगले अंक में प्रस्तुत किया जायेगा।
डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
दाम्पत्य विवाद सलाहकार
Dr. Purushottam Meena 'Nirankush'
Marital Dispute Consultant
हेल्थ वाट्सएप: 8561955619
मोबाईन नम्बर: 9875066111
30 नवम्बर, 2017
पेट दर्द का प्रोपर इलाज नहीं करवाना घातक हो सकता है! 

भारत में ऐसे लोगों की बहुत बड़ी संख्या है, जिन्हें कोई न कोई पाचन अर्थात् डाईजेशन सम्बन्धी समस्या लगातार बनी ही रहती है। इनमें बच्चे, जवान, वयस्क और वृद्ध सभी शामिल हैं। जिसके कारण उन्हें भूख में कमी, पेट दर्द, डकारें, गैस, कब्ज, कभी कब्ज कभी दस्त, मरोड़-पेचिश, अपच, मिचली, उबकाई, आतों में छाले, बवासीर, सिरदर्द, बदन में सोजन, इत्यादि में से एक या एकाधिक तकलीफें हो सकती हैं।





सामान्यत: ऐसे व्यथित लोगों का प्रस्तुत चित्र में दर्शाये गये अंगों में से लीवर, तिल्ली/स्पलीन, छोटी-बड़ी आतों में कोई न कोई अंग अफेक्टेड हो सकता है। इनमें से फैटी लीवर होना बहुत आम और बड़ी समस्या है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार संसार में 32 फीसदी लोग इससे पीड़ित हैं। अत: समय रहते अपनी तकलीफ का पता लगाकर, उसका प्रोपर इलाज नहीं करवाना घातक हो सकता है।-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' स्वास्थ्य रक्षक सखा, हेल्थ वाट्सएप 8561955619, मो. 9875066111, 29.11.2017

--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!

--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!
सभी के स्वस्थ एवं सुदीर्घ जीवन की कामना के साथ-मेरे प्यारे और दुलारे तीन बच्चों की ममतामयी अद्वितीय माँ (मम्मी) जो दुखियों, जरूतमंदों और मूक जानवरों तक पर निश्छल प्यार लुटाने वाली एवं अति सामान्य जीवन जीने की आदी महिला थी! वह पाक कला में निपुण, उदार हृदया मितव्ययी गृहणी थी! मेरी ऐसी स्वर्गीय पत्नी "जानकी मीणा" की कभी न भुलाई जा सकने वाली असंख्य हृदयस्पर्शी यादों को चिरस्थायी बनाये रखते हुए इस ब्लॉग को आज दि. 08.08.12 को फिर से पाठकों के समक्ष समर्पित कर रहा हूँ!-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'

Label Cloud

(Tribulus Terrestris) Abutilon Indicum Allergy Aloevera Juice Alum Amaranthus spinosus Ammonium chloride Argemone Mexicana Ash-coloured Fleabane Bael Bauhinia purpurea Bernini’s Cinema Bitter Gourd Black night shade Blumea Lacera Borax Calories Calories Chart Care Carrots Castor beans Chanca Piedra Cheese Chenopodium Album Cholesterol Clerodendrum Phlomidis Colocynth Convolvulus Pluricaulis Cumin Date Palm Dengue Diabetes Emblic Myrobalan Fatty liver Femininity FENUGREEK Fenugreek Seeds Folic Acid Gallbladder Gardenia Gummifera Garlic Ginger Gooseberry Gourd Groundnut-peanut Guava Hair Falling Health Health Care Friend Health Links Health Tips Hepatitis Homeopathic Homeopathy Homoeopath Honey How to get pregnant? Immunity IMPOTENCY Jaundice Juice Juice of Berries LAND CALTROPS Lemon Leucas Aspera Leucorrhea Lever Liver Cirrhosis Liver fibrosis Low Blood Pressure Marital Dispute Consultant Masturbation Mexican Daisy Mexican Poppy Migraine Myopia Night Jasmine Nutgrass Nutmeg Nutsedge Obesity Omega 3 Oroxylum indicum Portulaca Oleracea Prostate Gland Protein Purple Nutsedge Radish rectum collapse Saffron Senna occidentalis Sex side effects less Sperms Spiny Amaranth Stone Breaker Tips Treatment of Incurable Tribulus Terrestris Tridax Procumbens Umbrella Sedge Unquenchable Conjugal Vitamins White Discharge अंकुरित अनाज अंकुरित गेहूं-Wheat germ अंकुरित भोजन-Sprouts अखरोट अंगूर-Grapes अचूक चमत्कारिक चूर्ण अजवाइन अजवायन अजीर्ण-Indigestion अंडकोष अडूसा (वासा)-Adhatoda Vasika-Malabar nut अण्डी अतिबला अतिसार अतिसार-Diarrhea अतृप्त अतृप्त दाम्पत्य अदरक अदरख अध्ययन अनिद्रा अपच अपराधबोध अफरा अफीम अमरूद अमृता अम्लपित्त-Pyrosis अरंडी अरणी अरण्ड अरण्डी अरलू अरुचि अरुचि-Anorexia-Distaste अर्जुन अर्थराइटिस अर्द्धसिरशूल अर्श अर्श रोग-बवासीर-Hemorrhoids-Piles अलसी अल्सर अल्सर-Ulcers अवसाद अवसाद-Depression अश्वगंधा-Winter Cherry असंतुष्ट असफल असर नहीं असली अस्थमा अस्थमा-दमा-Asthma आइरन आक आकड़ा आघात आत्महत्या आंत्र कृमि आंत्रकृमि-Helminth आंत्रिक ज्वर-टायफाइड-Typhoid fever आधाशीशी आधासीसी आंधीझाड़ा-ओंगा-अपामार्ग-Prickly Chalf flower आमला आमवात आमाशय आयुर्वेद आयुर्वेदिक आयुर्वेदिक उपचार आयुर्वेदिक औषधियां आयुर्वेदिक सीरप-Ayurvedic Syrup आयुर्वेदिक-Ayurvedic आरोग्य आँव आंव आंवला आंवला जूस आंवला रस आशावादी-Optimistic आसन आसान प्रसव-Easy Delivery आहार चार्ट आहार-Food आॅर्गेनिक इन्द्रायण इन्फ्लुएंजा इमर्जेंसी में होम्योपैथी इमली-Tamarind Tree इम्युनिटी इलाज इलाज का कुल कितना खर्चा इलायची उच्च रक्तचाप उच्च रक्तचाप-High Blood Pressure-Hypertension उत्तेजक उत्तेजना उदर शूल-Abdominal Haul उन्माद-Mania उपवास उम्र उल्टी ऊर्जा एक्जिमा एक्यूप्रेशर एग्जिमा एजिंग-Aging एंटी ऑक्सीडेंट्स एंटी-ओक्सिडेंट एंटीऑक्सीडेंट एण्टी-आॅक्सीडेंट एनजाइना एमिनो एसिड एरंड एलर्जी एलर्जी-Allergy एलोवेरा एलोवेरा जूस ऐंठन ऐलोपैथ ऐसीडिटी ऑर्गेनिक ओमेगा 3 के स्रोत ओमेगा-3 ओर्गेनिक औषध-Drug औषधि सूची-Drug List औषधियों के नुकसान-Loss of drugs कचनार कचनार-Bauhinia Purpurea कटुपर्णी कड़वाहट कंडोम कद्दू कनेर कपास-COTTON कपिकच्छू कफ कब्ज कब्ज़ कब्ज-कोष्ठबद्धता-Constipation कब्ज. Cucumber कब्जी कमजोरी कमर दर्द करेला कर्ण वेदना कर्णरोग कष्टार्तव-Dysmenorrhea कांच निकलना काजू कान कानून सम्मत काम काम शक्ति कामशक्ति कामशक्ति-Sexual power कामोत्तेजना कायाकल्प कार्बोहाइड्रेट कार्बोहाइड्रेट-Carbohydrates काला जीरा काला नमक काली जीरी काली तुलसी काले निशान कास-खांसी-Cough किडनी किडनी स्‍टोन कीड़े कुकरौंधा कुकुंदर कुटकी-Black Hellebore कुबडापन कुल्थी कुल्ला कुष्ठ कृमि केला केसर कैफीन-Caffeine कैलोरी कैलोरी चार्ट कैलोरी-Calories कैवांच कैविटी कैंसर कॉफी कॉफ़ी कॉलेस्ट्रॉल कोंडी घास कोढ़ कोबरा कोलेस्ट्रॉल कोलेस्ट्रॉल-Cholesterol कोलेस्ट्रोल कौंच कौमार्य क्रियाशीलता क्रोध क्षय रोग-Tuberculosis क्षारीय तत्व क्षुधानाश खजूर खजूर की चटनी खनिज खरबूजा-Musk melon खरेंटी खरैंटी शिलाजीत खांसी खिरेंटी खिरैटी खीरा खुजली खुशी-Joy खुश्की खुश्बू खोया गंजापन-Baldness गठिया गठिया-Arthritis गठिया-Gout गड़तुम्बा गंध गन्ने का रस गरमा गरम गर्भ निरोधक गर्भधारण गर्भपात गर्भवती गर्भवती कैसे हों? गर्भावस्था गर्भावस्था की विकृतियां-Disorders of Pregnancy गर्भावस्था के दौरान संभोग-Sex During Pregnancy गर्भावस्था-Pregnancy गर्भाशय गर्भाशय-उच्छेदन के साइड इफेक्ट्स-Side Effects of Hysterectomy गर्म पानी गर्मी गर्मी-Heat गाजर गाजवां गांठ गाँठ-Knot गारंटी गाल ब्लैडर गिलोय गिल्टी गुंदा गुदाभ्रंश गुर्दे गुलज़ाफ़री गुस्सा गृध्रसी गृह-स्वामिनी गैस गैस्ट्रिक गोक्षुरादि चूर्ण गोखरू गोखरू (LAND CALTROPS) गोंद कतीरा-Hog-Gum गोंदी गोभी-Cabbage गोरख मुंडी गोरखमुंडी ग्रीन-टी घमोरी घरेलु ​नुस्खे घाघरा घाव चकवड़ चक्कर चपाती चमत्कारिक सब्जियां चर्बी चर्म चर्म रोग चर्मरोग चाय चाय-Tea चालीस के पार-Forty Across चिकनगुनिया चिकित्सकीय चिंतित चिरायता-Absinth चिरोटा चुंबन चोक चौलाई छपाकी छरहरी काया छाछ छाले छीकें छुआरा छुहारा छोटा गोखरू छोटा धतूरा छोटी हरड़ जंक फूड जकवड़ जंगली-कटीली चौलाई जटामांसी-Spikenard जलजमनी जलन जलोदर रोग-Ascites Disease जवारा जवारे जवासा-Alhag जहर जामुन का जूस जायफल जिगर जीरा जीवन रक्षक जीवनी शक्ति जुएं जुकाम जुदाई जुलाब जूएं जूस जूस-Juice जोड़ों के दर्द जोड़ों में दर्द जौ ज्यूस ज्योति ज्वर ज्वर-Fiver झाइयाँ झांईं झुर्रियाँ झुर्रियां झुर्री झूठे दर्द टमाटर का रस टमाटर-Tomatoes टाइफाइड टायफायड टूटी हड्डी टॉन्सिल टोटला ट्यूमर ठंडापन ठेकेदार डॉक्टर डकार डकारें डायबिटीज डायरिया डिजिसेक्सुअल डिटॉक्सीफाई डिटॉक्सीफिकेशन डिनर डिब्बाबंद भोजन डिलेवरी डीकामाली डीगामाली डेंगू डेंगू-Dengue डॉ. निरंकुश डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' डॉ. मीणा ढीलापन ढीली योनि तकलीफ का सही इलाज तम्बाकू तरबूज-Watermelon तलाक ताकत तिल तिल्ली तुंबा तुंबी तुलसी तेल त्रिदोषनाशक त्रिफला त्वचा त्वचा रोग थकान थाईरायड थायरायड-Thyroid थायरॉइड दण्डनीय अपराध दंत वेदना दन्तकृमि दन्तरोग दमा दर वेदना दर्द दर्द निवारक दवा दर्दनाक दस्त दही दाग-धब्बे-Stains-Spots दाढ़ दांत दांतो में कैविटी-Teeth Cavity दाद दाम्पत्य दाम्पत्य विवाद सलाहकार दाम्पत्य-Conjugal दाल दालचीनी दालें दिल दु:खी दुर्गंध दुर्बलता दुष्प्रभाव दुष्प्रभावरहित दूध दूध वृद्धि दूधी दूधी-Milk Hedge दृष्टिदोष द्रोणपुष्पी-Leucas Cephalotes धड़कन धनिया बीज धनिया-Coriander धमासा धातु धातु पतन धार्मिक धूम्रपान छोड़ना चाहते हैं? धैर्यहीन नज़ला नपुंसकता नाक नाखून नागबला नागरमोथा नाडी हिंगु नाड़ी हिंगु (डिकामाली) नामर्दी नारकीय पीड़ा नारियल नाश्ता निमोनिया निम्न रक्तचाप निम्बू नियासिन निराश निरोगधाम निर्गुण्डी निसोरा नींद नींबू नींबू-Lemon नीम-azadirachta indica नुस्खे नुस्खे-Tips नेगड़ नेगड़-निर्गुन्डी-Vitex negundo नेत्र रोग नेुचरल नैतिक नोनिया नौसादर न्युमोनिया-Pneumonia पक्षघात पढ़ने में मन लगेगा पंतजलि पत्तागोभी-CABBAGE पत्थर फोड़ी पत्थरचट्टा पत्नी पथरी पदार्थ पनीर पपीता पपीता-CARICA PAPPYA पमाड परदेशी लांगड़ी परहेज पराठा परिस्थिति पवाड़ पवाँर पाइल्स पाक-कला पाचक पाचन पाचनतंत्र पाठक संख्या 16 लाख पार पाठक संख्या पंद्रह लाख पायरिया पारिजात पालक पालक-Spinach पित्त पित्ताशय पित्ती पिंपल-मुंहासे-Pimples-Acne पिरामिड पीलिया पीलिया-Jaundice पीलिया-कामला-Jaundice पुआड़ पुदीना पुनर्नवा-साटी-सौंटी-Punarnava पुरुष पेचिश पेट के कीड़े पेट दर्द पेट में गैस पेट रोग पेड़ पेशाब में रुकावट पेंसिल थेरेपी-Pencil Therapy पौधे पौरुष पौष्टिक रागी रोटी प्याज-Onion प्यास प्रजनन प्रतिरक्षा प्रतिरक्षा प्रणाली प्रतिरोधक प्रतिरोधक-Resistance प्रदर प्रमेह प्रवाहिका (पेचिश)-Dysentery प्रसव प्रसव सुरक्षा चक्र प्रसव-पीड़ा प्रसूति प्राणायाम प्रेग्नेंसी-Pregnancy प्रेमिका प्रेमी प्रोटीन प्रोटीन का कार्य प्रोटीन के स्रोत प्रोस्टेट ग्रन्थि प्लीहा प्लूरिसी-Pleurisy प्लेटलेट्स फफूंद-Fungi फरास फल फल-Fruit फाइबर फिटकरी फुंसी-Pimples फूलगोभी-CAULIFLOWER फेंफड़े फैट फैटी लीवर फोटोफोबिया फोड़ा फोड़े-Boils फोरप्ले फोलिक एसिड फ्लू फ्लू-Flu फ्लेक्स सीड्स बकायन बकुल बड़ी हरड़ बथुआ बथुआ पाउडर बथुआ-White Goose Foot बदबू बबूल-ACACIA बरसाती बीमारियाँ बरसाती बीमारियां बलगम बलवृद्धि बला बलात्कार बवासीर बहरापन बहुनिया बहुमूत्रता- बांझपन बादाम-Almonds बादाम. बाल बाल झड़ना बाल झडऩा-Hair Falling बिना सिजेरियन मां बनें बिवाई बीजबंद बीड़ी बीमारियों के अनुसार औषधियां बीमारी बुखार बूंद-बूंद पेशाब बेल बेली बैक्टीरिया ब्र​ह्मदण्डी ब्रेस्ट ग्रोथ ब्लड प्रेशर ब्लैक मेलिंग ब्लॉकेज भगंदर भगंदर-Fistula-in-ano भगनासा भगोष्ठ भड़भांड़ भय भविष्य भस्मक रोग भावनात्मक भुई आंवला-Phyllanthus Niruri भूई आमला भूई आंवला भूख भूख बढ़ाने भूमि भूमि आंवला भोजनलीवर मकोय मकोय-Soleanum nigrum मंजीठ मटर-PEA मंद दृष्टि मंदाग्नि मदार मधुमेह मधुमेह-Diabetes मन्दाग्नि-Dyspepsia मरुआ मरोड़ मर्द मर्दाना मलेरिया मलेरिया (Malaria) मसाले मस्तिष्क मस्से मस्से-WARTS महत्वपूर्ण लेख महाबला माइग्रेन माईग्रेन माईंड सैट माजूफल मानसिक मानसिक लक्षण मानसिक-Mental मानिसक तनाव-Mental Stress मायोपिया मासिक मासिक-धर्म मासिकधर्म मासिकस्राव माहवारी मिनरल मिर्गी मिर्च-Chili मीठा खाने की आदत मुख मैथुन-ओरल सेक्स-Oral Sex मुधमेह मुलहठी मुलेठी मुहाँसे मूँगफली मूड डिस्ऑर्डर-Mood Disorders मूत्र मूत्र असंयमितता मूत्र में जलन-Burning in Urine मूत्राशय मूर्च्छा (Unconsciousness) मूली मूली कर रस मृत्यु मृत्युदण्ड मेथी मेथी दाना मेंहदी मैथुन मोगरा (Mogra) मोटापा मोटापा-Obesity मोतियाबिंद मौत मौलसिरी मौसमी बीमारियां यकृत यकृत प्लीहा यकृत वृद्धि-Liver Growth यकृत-लीवर-जिगर-Lever यूपेटोरियम परफोलियेटम यूरिक एसिड लेबल योग विज्ञापन योन योन संतुष्टि योनि योनि ढीली योनि शिथिल योनि शूल-Vaginal Colic योनि संकोचन योनी योनी संकोचन यौन यौन आनंद यौन दौर्बल्य यौनतृप्ति यौनशक्ति यौनशिक्षा यौनसुख यौनानंद यौनि रक्त प्रदर (Blood Pradar) रक्त रोहिड़ा-TECOMELLA UNDULATA रक्तचाप रक्तपित्त रक्तशोधक रक्ताल्पता रक्ताल्पता (एनीमिया)-Anemia रस-juices रातरानी Night Blooming Jasmine/Cestrum nocturnum रामबाण रामबाण औषधियाँ-Panacea Medicines रुक्षांश रूढिवादी रूसी रूसी मोटापा रेचक रेठु रोग प्रतिरोधक रोबोट सेक्स रोमांस लकवा लक्षण लक्ष्मी लंच लसोड़ा लस्सी लहसुन लहसुन-Garlic लाइलाज लाइलाज का इलाज लाक्षणिक जानकारी लाभ लिंग लिंग प्रवेश लिसोड़ा लीकोरिया लीवर लीवर-Liver लू-hot wind लैंगिक लोनिया लौकी लौंग की चाय ल्युकोरिया ल्यूकोरिया ल्यूज योनी वजन वज़न वजन कम वजन बढाएं-Weight Increase वन/जंगली तुलसी वनौषधियाँ वमन वमन विकृति-Vomiting Distortion वसा वात वात श्लैष्मिक ज्वर वात-Rheumatism वायरल वायरल फीवर वायरल बुखार-Viral Fever वासना विचारतंत्र विटामिन विधारा वियाग्रा-Viagra वियोग विरह वेदना विलायती नीम विष विष हरनी विषखपरा वीर्य वीर्य वृद्धि वीर्यपात वृक्कों (गुर्दों) में पथरी-Renal (Kidney) Stone वृक्ष वैज्ञानिक वैधानिक वैवाहिक जीवन वैवाहिक जीवन-Marital वैवाहिक रिश्ते वैश्यावृति व्याकुल व्यायाम शंखपुष्पी शरपुंखा शराब शरीफा-सीताफल-Custard apple शर्करा शलगम-Beets शल्यक्रिया शहद शहद-Honey शारीरिक शारीरिक रिश्ते शिथिलता शीघ्र पतन शीघ्रपतन शुक्राणु-Sperm शुक्राणू शुगर शोक शोथ शोध श्योनाक श्रेष्ठतर श्वास श्वांस श्वेत प्रदर श्वेत प्रदर-Leucorrhea श्वेतप्रदर षड़यंत्र संकुचन संकोच संक्रमण संखाहुली संतरा-Orange संतान संतुष्टि सत्यानाशी सदा सुहागन सदाफूली सदाबहार सदाबहार चूर्ण सनबर्न सफ़ेद दाग सफेद पानी सब्जि सब्जियां-Vegetables सब्जी संभालू संभोग समर्पण-Dedication सरकार को सुझाव सरफोंका सरहटी सर्दी सर्दी जुकाम-Cold सर्पक्षी सर्पविष सलाद संवेदना सहदेई सहदेवी सहानभूति साइटिका साइटिका-Sciatica साइड इफेक्ट्स साबूदाना-Sago सायटिका सिगरेट सिजेरियन सिर दर्द सिर वेदना सिरका सिरदर्द सिरोसिस सीजर डिलेवरी सुगर सुदर्शन सुहागा सूखा रोग सूजन सेक्स सेक्स उत्तेजक दवा सेक्स परामर्श-Sex Counseling सेक्स पार्टनर सेक्स पावर सेक्स समस्या सेक्स हार्मोन सेक्‍स-Sex सेंधा नमक सेब सेमल-Bombax Ceiba सेल्स सोजन-सूजन सोंठ सोना पाठा सोयाबीन सोयाबीन (Soyabean) सोयाबीन-Soyabean सोराइसिस सोरियासिस-Psoriasis सौंठ सौंदर्य सौंदर्य-Beauty सौन्दर्य सौंफ सौंफ की चाय सौंफ-Fennel स्किन स्खलन स्तन स्तन वृद्धि स्तनपान स्तम्भन स्त्री स्त्रीत्व स्त्रैण स्वप्न दोष स्वप्नदोष स्वप्नदोष-Night Fall स्वभाव स्वभावगत स्वरभंग स्वर्णक्षीरी स्वस्थ स्वास्थ्य स्वास्थ्य रक्षक सखा हजारदानी हड़जोड़ हड्डी हड्डी में दर्द हड्डीतोड़ ज्वर हड्डीतोड़ बुखार हरड़ हरसिंगार हरी दूब-CREEPING CYNODAN हरीतकी हर्टबर्न हस्तमैथुन हस्तमैथुन-Masturbation हारसिंगार हालात हिचकी हिचकी-Hiccup हिमोग्लोबिन-hemoglobin हिस्टीरिया हिस्टीरिया-Hysteria हींग हीनतर हृदय हृदय-Heart हेपेटाइटिस हेपेटाईटिस हेल्थ टिप्स-Health-Tips हैजा हैपीनेस-Happiness हैल्थ होम केयर टिप्स-Home Care Tips होम्योपैथ होम्योपैथिक होम्योपैथिक उपचार होम्योपैथी होम्योपैथी-Homeopathy